Uncategorised

दक्षिण मध्य रेल SCR ने अपनी 66 सवारी गाड़ियाँ मेमू/डेमू में चलाने हेतु प्रस्तावित की है। नान्देड मण्डल के आकोट से भी मेमू चल पड़ेगी।

इस 66 गाड़ियोंकी सूची में 16 गाड़ियाँ जो की पहले सवारी गाड़ियाँ थी, शून्याधारित समयसारणी के अनुसार एक्सप्रेस श्रेणी में बदले जाने का प्रस्ताव है। बाकी अलग अलग मण्डलोंमें 50 सवारी गाड़ियोंके पुराने ICF रैक बदलकर डेमू/मेमू रैक सवारी श्रेणी में चलाए जाएंगे। विशेष उल्लेखनीय बात यह है, वर्ष 2017 से बन्द पड़ा आकोट स्टेशन भी फिर से गाड़ी देख सकेगा। अकोला तक आनेवाली एक जोड़ी सवारी गाड़ी को आकोट तक विस्तारित किया जाने का प्रस्ताव है।

सिकंदराबाद मण्डल की सवारी गाड़ियाँ जो एक्सप्रेस में बदली जाएगी।

57121 काजीपेट बल्हारशाह रामगिरी सवारी, काजीपेट सिरपुर कागज़ नगर एक्सप्रेस मेमू बनेगी।

57123 भद्राचलम सिरपुर कागज़ नगर सिंगारेनी सवारी, भद्राचलम सिरपुर कागज़ नगर एक्सप्रेस मेमू बनेगी।

57124 बल्हारशाह भद्राचलम सिंगारेनी सवारी, सिरपुर कागज़ नगर भद्राचलम एक्सप्रेस मेमू बनेगी।

57547/48 हैदराबाद पूर्णा हैदराबाद सवारी गाड़ी, हैदराबाद पूर्णा हैदराबाद एक्सप्रेस बनकर चलेगी। इसमें वही नियमित रैक रहेगा।

विजयवाड़ा मण्डल की सवारी गाड़ियाँ जो एक्सप्रेस में बदली जाएगी।

67298/97 विजयवाड़ा गुडूर विजयवाड़ा मेमू को मेमू एक्सप्रेस में चलाया जाएगा।

67242/41 विजयवाड़ा काकीनाडा पोर्ट विजयवाड़ा मेमू सवारी को, मेमू एक्सप्रेस बनाकर चलाया जाएगा

67244/43 विशाखापट्टनन काकीनाडा पोर्ट विशाखापट्टनन मेमू सवारी को, मेमू एक्सप्रेस बनाकर चलाया जाएगा।

57382/81 नरसापुर गुण्टूर नरसापुर सवारी गाड़ी को डेमू एक्सप्रेस बनाकर चलाया जाएगा।

57327/28 ढोंण गुण्टूर ढोंण सवारी गाड़ी को डेमू एक्सप्रेस बनाकर चलाया जाएगा।

सिकंदराबाद मण्डल की सवारी गाड़ियाँ।

57122 सीरपुर कागज़ नगर काजिपेट रामगिरी सवारी अब मेमू रैक से चलेगी

57659 सोलापुर फलकनुमा सवारी अब वाड़ी से काचेगुड़ा मेमू रहेगी

57660 फलकनुमा कलबुर्गी सवारी अब काचेगुड़ा वाड़ी मेमू रहेगी।

67269/70 काजिपेट डोरणाकल काजिपेट पुश-पुल सवारी गाड़ी अब मेमू बनकर चलेगी।

67271/72 डोरणाकल विजयवाड़ा डोरणाकल पुश-पुल सवारी गाड़ी अब मेमू बनकर चलेगी।

67265/66 वरंगल सिकंदराबाद वरंगल मेमू यथावत मेमू ही रहेगी।

67249/50 चित्तापूर सिकंदराबाद चित्तापूर सवारी मेमू कलबुर्गी सिकंदराबाद कलबुर्गी ऐसे चलेगी।

विजयवाड़ा मण्डल की सवारी गाड़ियाँ।

विजयवाड़ा मण्डल की 67299/300 राजमुंद्री विजयवाड़ा राजमुंद्री मेमू सवारी और 77215/16 विजयवाड़ा मच्चिलिपट्टनम विजयवाड़ा डेमू सवारी यथावत चलेगी।

नान्देड मण्डल की सवारी गाड़ियोंमे बदलाव, एक जोड़ी डेमू आकोट से चलाने का प्रस्ताव।

57582 पूर्णा अकोला सवारी को पूर्णा से अकोला के आगे आकोट तक डेमू रैक में तब्दील करके विस्तारित किया जाएगा। वापसीमे 57539 अकोला परली वैजनाथ सवारी को आकोट से पूर्णा तक ही चलाया जाएगा।

57554 आदिलाबाद परली वैजनाथ सवारी गाड़ी को डेमू रैक से चलाया जाएगा।

57551 पूर्णा आदिलाबाद सवारी को परली वैजनाथ से आदिलाबाद के बीच डेमू रैक से संचालित किया जाएगा।

57541/42 नागरसोल हुजूर साहिब नान्देड नागरसोल सवारी गाड़ी को बदले समयोनुसार डेमू रैक से चलाया जाएगा

गुण्टूर मण्डल की गाड़ियाँ

57317/20 गुण्टूर मचेरला गुण्टूर सवारी गाड़ी अब मेमू रैक से चलेगी

67213/14 मचेरला विजयवाड़ा/गुण्टूर मचेरला सवारी मेमू को अब केवल मचेरला विजयवाड़ा के बीच ही चलाया जाएगा।

77221/22 विजयवाड़ा गुण्टूर/ गुण्टूर रेपाले सवारी डेमू बदले हुए समयोनुसार चलेगी।

77223/29 रेपाले गुण्टूर सवारी गाड़ियाँ और 77224 गुण्टूर रेपाले, 77230 गुण्टूर विजयवाड़ा डेमू

हैदराबाद मण्डल

8 जोड़ी गाड़ियाँ डेमू/मेमू सूचित की गई है।

गुंटकल मण्डल

77407/08 गुंटकल रायचुर गुंटकल सवारी, 57475/76 तिरुपति गुंटकल तिरुपति सवारी, 57274/73 रायचुर हुब्बाल्ली रायचूर सवारी, 57401/02/03/04 तिरुपति काटपाडी तिरुपति दो जोड़ी सवारी गाड़ियाँ यह सारी डेमू रैक में तब्दील की जाएगी।

Uncategorised

भारतीय रेल में निजी गाड़ियाँ, एक दृष्टिकोण

भारतीय रेल में निजी ट्रेन के विरोध में कई वीडियो, मैसेजेस सोशल मीडिया में घूम रहे है। मगर जनता को बरगलाने के सिवा कुछ ज्यादा नही है इसमें।

जो लोग निजी ट्रेन्स के खिलाफ बोलते है, यह भूल जाते है की वही रेलवे के आधुनिकीकरण, अतिरिक्त लाइने, नई गाड़ीयाँ, मार्ग विस्तार के लिए सदा आग्रही रहते है। आप किसी रेलवे प्रवासी संघ को देख लीजिए, आपको यही सारी मांगोंकी फेहरिस्त मिल जाएगी। यहाँतक की देश के गणमान्य राजनीतिक भी इन मांगों के समर्थन में पत्र भेजते रहते है।

हमारे देश की भाग्यरेखा, जीवनरेखा कहलाने वाली भारतीय रेल वित्तीय संकटों से जूझ रही है, यह पता होते हुए भी किसी यात्री उपभोक्ता संघ ने, रेलवे जो अपने हर टिकट पर छापकर जताते रहती है कि 40 प्रतिशत से भी ज्यादा रियायत वह टिकटोंपर दे रही है, कभी उस विषयपर चर्चा नही की और ना ही उस विषय मे रेलवे को कोई सुझाव दिया। आज भी भारतीय रेल के किराए किसी भी सार्वजनिक परिवहन में सबसे कम ही होंगे।

भारतीय रेलवे अपने विशालकाय नेटवर्क को आधुनिकता की ओर ले जाना चाहती है और इसके लिए उसको ढेर सारे निधि की जरूरत है। जब रेलवे ने देखा की उनकी आय ज्यादातर मालवहन से आ रही है तो उसके लिए अमूमन 83,000 करोड़ रुपए के समर्पित गलियारोंकी रचना की गई। पूर्व और पश्चिम मालवहन गलियारा लगभग तैयार हो चुका है और कुछ हिस्सेपर गाड़ियाँ दौड़ने भी लग गयी है। इसी तरह पूरे देश के मालवहन मार्ग का अभ्यास कर और 6 समर्पित मालवहन गलियारोंकी रचना की जा रही है। धन के आपूर्ति हेतु, रेलवे ने अपनी इकाइयों के निजीकरण की शुरुवात करी। आईआरसीटीसी, रेल विकास निगम लिमिटेड ऐसी कम्पनियों में निजी निवेश खोला गया। हवाईअड्डों की तर्ज पर, स्टेशनोंके निजीकरण व्यवस्था की जा रही है। आज कोई भी समझ सकता है, भारतीय रेलवे स्टेशन की सेवाओंमें कितना सुधार हुवा है। अब निजी ट्रेनोंके चलाने की भी बात की जा रही है।

सोशल मीडिया में, निजी ट्रेन के विरुद्ध कहते हुए, यह कोई नही कह रहा की निजी ट्रेन की वजह से लगभग 30,000 करोड़ की आय होगी। यह बात सरासर गलत है की निजी ट्रेन चलने की वजह से नियमित ट्रेन बन्द होगी, जबकी रेल प्रशासन ने बिल्कुल कह दिया है, कोई भी नियमित गाड़ियोंका परिचालन बन्द नही होगा अपितु सवारी गाड़ियोंकी जगह मेमू ट्रेनों में वृद्धि ही होगी।

एक तर्क यह भी है, रेल कर्मियोंको नौकरियों से कम किया जाएगा। किसी भी व्यापार, व्यवसाय में वृद्धि होती है तो कर्मचारियों की बढ़ोतरी ही होती है। जब निजी गाड़ियाँ बढ़ेगी तो रेलवे के केवल कमर्शियल कर्मचारी निजी ट्रेन में भरती नही होंगे बाकी ऑपरेटिंग स्टाफ़ और रेल लाइन की देखभाल करने वालोंकी ज्यादा भर्ती ही कि जाएगी। आप देख सकते है DFCCIL में बहुत सारी नौकरियां निकली है।

निजी ट्रेनोंसे यात्रिओंकी सुविधामे बढ़ोतरी ही होगी। आपने आईपीएल के क्रिकेट मैचेस तो देखे होंगे, उसमे कई विदेशी खिलाड़ी सहभागी होते है और आप यह भी जान चुके होंगे की उनकी सहभागिता से हमारे खिलाड़ियों का स्तर कितना सुधरा है, कितने खिलाड़ी हमारे देश मे आगे आए है। ठीक उसी तरह का फायदा इन निजी ट्रेनों को देश विदेश की जानी मानी कम्पनियों के परिचालित करने से भारतीय रेल को होगा। अत्याधुनिक सुविधा, अव्वल दर्जे की हॉस्पिटलिटी, तेज गति से चलनेवाले आरामदायक कोचेस और सबसे बड़ी बात ढेर सारी अतिरिक्त गाड़ियाँ। इसके लिए विद्युतीकरण, अतिरिक्त रेल लाइने बिछाई जा रही है। इन गाड़ियोंके बीच मे हमारी नियमित गाड़ियाँ, अतिरिक्त मेमू गाड़ियाँ भी चलती रहेगी।

जब हम हमारे घर का कुछ हिस्सा किराएपर चढ़ा देते है तो उसके पीछे होने वाले फायदे, परेशानी सब चीजोंको ध्यान में रखते ही है। एक तरफ अतिरिक्त आय, अत्याधुनिक परिचालन स्टॉक्स से हमारे कर्मियोंकी पहचान, यात्रिओंको आरामदायक और अतिरिक्त रेल सेवा यह सब मिलने वाला है। इसके ऐवज में हो सकता है की इन गाड़ियोंको हमारी प्राइम टाइम गाड़ियोंके स्लॉट्स, हमे देना पड़े। खैर, देखते है आगे आगे होता है क्या।

Uncategorised

दक्षिण रेलवे की 3 जोड़ी साप्ताहिक गाड़ियाँ, कन्याकुमारी से कटरा, मदुरई से चंडीगढ़ और नई दिल्ली से पुड्डुचेरी के बीच चलेगी

06317 कन्याकुमारी श्री माता वैष्णो देवी कटरा हिमसागर साप्ताहिक विशेष दिनांक 09 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी और वापसीमे 06318 श्री माता वैष्णो देवी कटरा कन्याकुमारी हिमसागर साप्ताहिक दिनांक 12 जुलाई से प्रत्येक सोमवार को चलेगी। समयसारणी निम्नलिखित प्रकार से है।

यह परीपत्रक अधूरा ही प्राप्त हुवा है, हम प्रयत्न करेंगे कि जालन्धर से कटरा के बीच की समयसारणी उपलब्ध हो।

02687 मदुरई चंडीगढ़ साप्ताहिक विशेष दिनांक 11 जुलाई से प्रत्येक रविवार को चलेगी और वापसीमे 02688 चंडीगढ़ मदुरई साप्ताहिक विशेष दिनांक 16 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार को चला करेगी।

यात्रीगण यह ज्ञात रहे, यह गाड़ी मदुरई देहरादून मदुरै द्विसाप्ताहिक हुवा करती थी और सहारनपुर चंडीगढ़ इस गाड़ी की लिंक हुवा करती थी, जब लिंक एक्सप्रेस का अस्तित्व खत्म किया जा चुका है तो यह गाड़ी साप्ताहिक चंडीगढ़ और दूसरी साप्ताहिक देहरादून बन गयी है।

04072 नई दिल्ली पुड्डुचेरी साप्ताहिक विशेष दिनांक 11 जुलाई से प्रत्येक रविवार को चलेगी और वापसीमे 04071 पुड्डुचेरी नई दिल्ली साप्ताहिक विशेष दिनांक 14 जुलाई से प्रत्येक बुधवार को चलेगी

उपरोक्त सभी गाड़ियाँ आरक्षित विशेष है।

Uncategorised

विविध क्षेत्र से गाड़ियाँ शुरू होने की खबरें है।

पूर्वोत्तर सीमान्त NFR से 2 जोड़ी गाड़ियोंकी समयसारणी

02842/41 न्यू जलपाईगुड़ी हावडा न्यू जलपाईगुड़ी शताब्दी विशेष, सप्ताह में 6 दिन, दिनांक 12 जुलाई से चलना शुरू कर देगी।

02067/68 गौहाटी जोरहाट टाउन गौहाटी जनशताब्दी विशेष सप्ताह में 6 दिन, दिनांक 12 जुलाई से चलना शुरू कर देगी। यात्रीगण ज्ञात रहे, इस गाड़ी का दिमापुर ठहराव राज्य प्रशासन के आदेशानुसार रद्द किया गया है।

उ प रेल NWR से दो जोड़ी गाड़ियोंके चलने की खबर है।

02497 श्रीगंगानगर तिरुचिरापल्ली हमसफर साप्ताहिक दिनांक 05 जुलाई से प्रत्येक सोमवार को चलेगी और 02498 तिरुचिरापल्ली श्रीगंगानगर हमसफर साप्ताहिक दिनांक 09 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार को चल पड़ेगी।

09683 अजमेर चंडीगढ़ गरीबरथ त्रिसाप्ताहिक विशेष दिनांक 06 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार, शुक्रवार एवं रविवार को चलेगी और 09684 चंडीगढ़ अजमेर गरीबरथ त्रिसाप्ताहिक विशेष दिनांक 07 जुलाई से प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शनिवार को चलेगी।

अब खबर हावडा से मुम्बई सेवाओंकी,

02096/95 हावडा मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस हावडा दुरान्तो विशेष वाया नागपुर का परिचालन अवधि बढ़ाया गया है। यह गाड़ी अब सितंबर माह के अंत तक चलाई जाएगी।

हावडा से मुम्बई की ओर यात्रिओंमें गाड़ियोंकी भारी मांग को देखते हुए पूर्व रेलवे ER ने अपने क्षेत्र से 03179/80 सियालदाह लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच पांच फेरे के लिए एक विशेष गाड़ी का आयोजन किया है। 03179 सियालदाह लोकमान्य तिलक टर्मिनस दिनांक 04, 11, 17, 24 जुलाई एवं 91 अगस्त को सियालदाह से प्रत्येक रविवार को चलेगी। वापसीमे 03180 लोकमान्य तिलक टर्मिनस सियालदाह साप्ताहिक विशेष लोकमान्य तिलक टर्मिनस से दिनांक 06, 13, 20, 27 जुलाई एवं 03 अगस्त को प्रत्येक मंगलवार को चलेगी।

यात्रीगण ज्ञात रहे, उपरोक्त सभी गाड़ियाँ आरक्षित विशेष है और सम्बंधित राज्य प्रशासन के संक्रमण काल के निर्बंधोके आधीन चलाई जा रही है अतः यात्रिओंको उक्त नियमोंका पालन करना अनिवार्य रहेगा।

Uncategorised

मांग मध्य रेल के छोटे स्टेशनोंके सवारियोंकी, कम अन्तर की रोजाना यात्रा करने वाले यात्रिओंकी…

मध्य रेल, जहाँसे भारतीय रेल की पहली यात्री गाड़ी चली थी। रेल्वे का ऐसा झोन जिसमे कभी यात्रिओंकी ओरसे गाड़ियोंके लिए पुरजोर मांग या जीवन मरण का प्रश्न है इस तरह की गाड़ियोंके लिए खींचतान दिखाई नही देती, ना ही कभी कोई राजनीतिक दबाव की नीति अपनाई जाती रही। मगर आज अपनी सवारी गाड़ियोंके परिचालित करने की मांग करने के लिए बेबस है। रेल प्रशासन ने अवश्य ही सोचना चाहिए, ऐसे निर्बंधोमें छोटे स्टेशनोंके यात्रीयोंकी की जरूरतें वाकई में पूरी हो रही है, क्या यात्री सन्तुष्ट है? क्या उनकी परेशानीयोंको कोई सहानुभूतिपूर्वक कोई देखता भी है?

मध्य रेलवे में मुम्बई, पुणे, सोलापुर, भुसावल और नागपुर ऐसे 5 मण्डल है। जिसमे मुम्बई और पुणे में उपनगरीय गाड़ियाँ चलाई जाती है। रेलवे की उपनगरीय गाड़ियोंका यात्रिओंके जीवन मे क्या महत्व है यह बताने की कतई जरूरत नही, मगर यही जरूरत वाला दृष्टिकोण जहां उपनगरीय गाड़ियाँ नही चलती ऐसे भुसावल, सोलापुर और नागपुर मण्डलोंमे क्यों नही लिया जाता? माना की इन मण्डलोंमें मुम्बई या पुणे जितने डेली कम्यूटर्स, रोजाना रेल के उपयोगकर्ता नही है मगर कुछ न कुछ तो यात्री जरूर है जो रोजाना रेल से जाना आना करते है।

भुसावल मण्डल में भुसावल से इटारसी एवं कटनी सवारी, भुसावल से नरखेड़ मेमू, वर्धा और नागपुर सवारी, भुसावल से देवलाली और मुम्बई के लिए सवारी गाडी चलती थी। याने भुसावल से कुल 7 गन्तव्योंके लिए सवारी गाड़ियाँ चलाई जाती थी। जिसमे हमने पश्चिम रेलवे की भुसावल से सूरत के बीच चलनेवाली 3 जोड़ी सवारी गाड़ी को जोड़ा नही है। हालाँकि पश्चिम रेलवे ने शून्याधारित समयसारणी के प्रस्तावोके अनुसार 3 में से दो सवारी गाड़ियोंको बदलाव के साथ चला भी दिया है। भुसावल नन्दूरबार भुसावल और भुसावल सूरत भुसावल यह दो गाड़ियाँ एक्सप्रेस किरायोंमे, आरक्षित और अनारक्षित बुकिंग्ज के साथ चल रही है।

यह भुसावल से चलनेवाली गाड़ियोंकी बात है, आगे भुसावल मण्डल की चालीसगांव – धुळे 4 जोड़ी सवारी गाड़ी, बड़नेरा – अमरावती 6 जोड़ी सवारी गाड़ी, इगतपुरी मनमाड़ शटल, जलम्ब खामगांव रेल बस, नवी अमरावती नरखेड़ सवारी इनकी गिनती नही की गई है। यह सारी गाड़ियाँ बन्द है।

अब बात करते है पुणे, सोलापुर, नागपुर मण्डल की, पुणे मण्डल में पुणे – लोनावला, पुणे – दौंड उपनगरीय रेल सेवा के अलावा दौंड बारामती, पुणे – सातारा – कोल्हापुर, पुणे पनवेल सवारी गाड़ियाँ चलती है। सोलापुर मण्डल में दौंड से वाड़ी और मनमाड़ दौंड खण्ड आता है। इस क्षेत्र में पुणे मनमाड़, पुणे निजामाबाद, पुणे नान्देड, पुणे सोलापुर, विजयपुरा रायचूर, सोलापुर गुंटकल, कलबुर्गी वाड़ी, सोलापुर फलकनुमा, कलबुर्गी हैदराबाद ऐसी सवारी गाड़ियाँ चला करती थी। नागपुर मण्डल के कार्यक्षेत्र में बड़नेरा से नागपुर, वर्धा से बल्हारशाह, नागपुर से इटारसी और आमला छिंदवाड़ा ऐसे खण्ड आते है। जिसमे नागपुर वर्धा अमरावती सवारी, नागपुर आमला, अजनी काजीपेट, नागपुर इटारसी, वर्धा बल्हारशाह, आमला बैतूल, आमला छिंदवाड़ा, जुन्नारदेव छिंदवाड़ा ऐसी सवारी गाड़ियाँ चलती थी।

मुम्बई मण्डल में भी मुम्बई से कर्जत, कसारा, पनवेल, हार्बर ऐसी सैकड़ों उपनगरीय गाड़ियोंके अलावा मुम्बई से पंढरपुर, विजयपुरा और साईं नगर शिरडी की सवारी गाड़ी चलती थी। फिलहाल यह तीन गन्तव्योंकी सवारी गाड़ियोंको शून्याधारित समयसारणी में विशेष एक्सप्रेस बनाकर चला दिया गया है। इसके अलावा कोंकण रेलवे खण्ड पर दादर रत्नागिरी, दिवा सावंतवाड़ी, दिवा पनवेल ऐसी सवारी गाड़ियाँ चलती थी।

अब प्रश्न यह है, इतनी ढेर सवारी गाड़ियाँ, इनके बीच के स्टेशन्स, वहांके यात्री इनका इस संक्रमण काल के रेल बन्द और उसके बाद की यह विशेष गाड़ियोंका परिचालन में क्या हाल होंगे? कैसे यात्रा कर रहे होंगे इन छोटे स्टेशन्स के लोग? उन स्टेशनोंके सहारे से रहनेवाले कई लोगोंकी आजीविका भी ठप हो गयी होगी, जैसे कुली, मजदूर, रेहड़ी वाले, ऑटो रिक्शा वाले लोग। जब गाड़ियाँ ही नही तो यात्री कहाँसे होंगे और यात्री ही नही तो लेनदेन, काम धंदा कैसा? प्रशासन ने इन स्टेशनोंके यात्रिओंके साथ साथ इन्हें भी भगवान भरोसे छोड़ दिया है।

मित्रों, निर्बन्धित गाड़ियाँ चलाए जाने से सोचिए, कितनी समस्याए उत्पन्न हुई है। ऐसा नही की सारे भारतीय रेल पर यही स्थिति है, मध्य रेल छोड़ दें तो लगभग सभी क्षेत्रीय रेलवे ने अपने क्षेत्र की PSPC याने यात्री सवारी सेवाएं चला दी है, हालाँकि यह सेवाएं मेल/एक्सप्रेस किरायोपर चल रही है मगर सभी स्टेशन्स पर रुक तो रही है। वहाँ के यात्रिओंको रेल सेवा का लाभ तो मिल रहा है। कई क्षेत्रीय रेल्वेज ने शून्याधारित समयसारणी के प्रस्तावित मद पर अपने गाड़ियोंमे बदलाव भी कर लिए है। सवारी गाड़ियोंके बदले मेमू ट्रेन्स चलाई जा रही है।

यात्री चाहते है, मध्य रेल और जो भी बाकी क्षेत्रीय रेल्वेज है, अपने निर्णय यथायोग्य समय रहते जारी कर देवे। शून्याधारित समयसारणी में यदि सवारी गाड़ियोंको बन्द कर मेमू/डेमू चलवाना हो तो चलवा दे। कोई गाड़ियोंमे गन्तव्योंके बदलाव करने हो, स्टापेजेस कम करने हो जो भी है, वह कर के गाड़ियोंको पुनः पटरियोंपर चला दीजिए। बस गाड़ियाँ पूर्ण क्षमता से चलवा दीजिए। भले ही नियमित समयसारणी न हो तो विशेष PSPC कर के ही चलवा दीजिए।

अनारक्षित टिकट व्यवस्था शुरू करना भी बेहद जरूरी है। लोग अपनी छोटी छोटी, रोजमर्रा की और बेहद जरूरी यात्रा करने के लिए परेशान हो रहे है। सार्वजनिक परिवहन बन्द होने से सड़क मार्ग पर जरूरत से ज्यादा निजी वाहन, मोटर साइकिलें लेकर लोगोंको यात्रा करनी पड़ रही है। एक तो सुरक्षा से समझौता, अतिरिक्त यात्रा समय और ऊपर से महंगे ईंधन का बोझ है सो अलग।

व्यापार, व्यवसाय, कारखानोमे काम करने वाले कर्मी, निजी क्लासेस में भागदौड़ करनेवाले विद्यार्थी, जरूरी काम से शहरोंकी ओर जानेवाले जरूरतमन्द, दवाखानेमे इलाज के लिए जानेवाले मरीज और उनके परिजन ऐसे कई यात्री है जो सवारी गाड़ियोंके बन्द होने से बेहद परेशान है। इन लोगोंकी सुनवाई ही नही है क्योंकि न तो ये इलेक्ट्रॉनिक आधुनिक गैजेट्स का उपयोग कर पाते है, ना ट्विटर, ई मेल जानते है कि फटसे अपनी समस्या की गुहार लगा देंगे और ना ही किसी जनप्रतिनिधियोंको इनकी समस्या का कोई ख्याल है। यह ग्रामीण लोग बेचारे बस इंतज़ार करते जा रहे है, आखिर किसी दिन तो इनकी सवारी गाड़ियाँ चलने वाली है, इंतज़ार कीजिए बस चलने वाली ही है। 😢😢