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पश्चिम रेलवे की चार क्लोन त्यौहार विशेष एक फेरा गाड़िया, बांद्रा से जयपुर, भगत की कोठी, सूरत से मुजफ्फरपुर और उधना से मडगांव के बीच चलेगी।

यह चारों गाड़ियाँ क्लोन, आरक्षित विशेष गाड़ियाँ है और विशेष किराया श्रेणी से चलाई जाएगी। यात्रीगण कृपया परिचालन पर ध्यान देवे।

09005/06 बांद्रा जयपुर बांद्रा हमसफ़र क्लोन विशेष, विशेष किरायोंके साथ दिनांक 26 मार्च को बांद्रा से और 27 मार्च को जयपुर से रवाना होगी।

09143/44 बांद्रा भगत की कोठी बांद्रा हमसफ़र क्लोन विशेष, दिनांक 25 को बांद्रा से और 26 को भगत की कोठी से निकलेगी।

09049/50 सूरत मुजफ्फरपुर सूरत वाया वडोदरा, रतलाम, मक्सी, गुना, आग्रा, कानपुर, लखनऊ, आजमगढ़, मऊ, छपरा होकर चलेगी। दिनांक 26 को सूरत से और 28 को मुजफ्फरपुर से निकलेगी।

09067/68 उधना मडगांव उधना क्लोन विशेष, दिनांक 26 को उधना से और 27 को मडगांव से निकलेगी। यह गाड़ी में वातानुकूलित के साथ साथ स्लिपर एकोमोडेशन उपलब्ध है।

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हुजुर साहिब नान्देड से हजरत निजामुद्दीन और श्रीगंगानगर के बीच विशेष गाड़ियाँ

रेलवे ने यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए हजूर साहिब नांदेड़ और हजरत निजामुद्दीन और श्रीगंगानगर के बीच अतिरिक्त विशेष चलाने का फैसला किया है।

विवरण इस प्रकार हैं: –
1) गाडी क्रमांक 02753 विशेष हजूर साहिब नांदेड से दिनांक 06.04.2021 से अगले आदेश तक हर मंगलवार को सुबह 9:00 बजे रवाना होगी और अगले दिन 10:30 बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचेगी।
गाडी क्रमांक 02754 विशेष हजरत निजामुद्दीन से दिनांक. 07.04.2021 से अगले आदेश तक हर बुधवार को रात 22:40 को रवाना होगी और तीसरे दिन 00.35 बजे हजूर साहिब नांदेड पहुंचेगी।
हाल्ट: परभणी,जालना,औरंगाबाद, मनमाड, जलगांव,
भोपाल, झांसी, आग्रा कैंट

संरचना: – 2 वातानुकुलीत द्वितीय श्रेणी, 2 वातानुकुलीत तृतीय श्रेणी, 10 शयनयान आणि 2 द्वितीय श्रेणी आसन.

2) हजूर साहिब नांदेड़ और श्रीगंगानगर के बीच विशेष ट्रेन
गाडी क्रमांक 07623 विशेष हजूर साहिब नांदेड से दिनांक 01.04.2021 से अगले आदेश तक हर गुरुवार को सुबह 06:50 बजे रवाना होगी और अगले दिन 19:20 बजे श्रीगंगानगरला पहुंचेगी।
गाडी क्रमांक 07624 विशेष श्री गंगानगर से दिनांक. 03.04.2021 से अगले आदेश तक हर शनिवार को 12:30 बजे रवाना होगी और तीसरे दिन 02.30 बजे हजूर साहिब नांदेड पहुंचेगी।

हाल्ट: अकोला, शेगाव, मलकापूर , भुसावल, जलगांव, अमलनेर, नंदुरबार, सुरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, नाडियाद, अहमदाबाद, महेसाना, पालनपूर, आबू रोड, पिंडवारा, फालना, मारवार, पालीमारवार, जोधपूर, मेडता रोड, नागौर, नोखा, बिकानेर, सुरतगढ, रायसिंग नगर, श्रीकरणपूर

इस विशेष ट्रेन के हाल्ट एवं विस्तृत समय के लिए कृपया http://www.enquiry.indianrail.gov.in देखें या
NTES ऐप डाउनलोड करें।

इस विशेष ट्रेन में केवल कन्फर्म यात्रियों को ही यात्रा करने की अनुमति है।
यात्रियों को बोर्डिंग, यात्रा और गंतव्य पर यात्रा के दौरान COVID19 से संबंधित सभी मानदंडों, एसओपी का पालन करने की सलाह दी जाती है।

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संक्रमण पूर्व काल मे चलनेवाली सारी गाड़ियोंमे से 90% गाड़ियाँ शुरू की जाएगी।

निम्नलिखित परीपत्रक देखिए, यह परीपत्रक उत्तर रेलवे मुख्यालय का है और अपने मण्डल को भेजा गया है। पत्र में संदर्भ रेलवे बोर्ड के उस आदेश का दिया गया है, जो यह कहता है, संक्रमण काल के पूर्व जितनी भी गाड़ियाँ चलाई जा रही थी, उनमें से 10 अप्रैल तक, 90% गाड़ियाँ शुरू करवा दी जाए और उसके लिए आवश्यक चल स्टॉक को तैयार रखा जाए।

तो है न मित्रों अफवाह फैलाने वालो के लिए चांटा? हमेशा रेलवे की अधिकृत वेबसाइट्स, ऍप और हेल्पलाइन नम्बर 139 से ही जानकारी प्राप्त करें।

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02925 बांद्रा अमृतसर विशेष (पश्चिम एक्स) के समयसारणी में दिनांक 22 मार्च से बदलाव

02925 बांद्रा टर्मिनस से अमृतसर को जानेवाली प्रतिदिन विशेष के समयसारणी में 22 मार्च से बांद्रा टर्मिनस से नागदा तक, बदलाव किया जा रहा है। यह गाड़ी अब दोपहर 12:00 के बजाय आधे घण्टे पहले यानी 11:30 को बांद्रा टर्मिनस से निकलेगी। अंधेरी स्टेशन का स्टॉपेज दोनों दिशाओंके याने 02925 बांद्रा से अमृतसर और 02926 अमृतसर से बांद्रा की ओर, परिचालन में रद्द किया जा रहा है।

बांद्रा से नागदा तक, इस गाडीसे यात्रा करने वाले सभी यात्रीगण समयसारणी पर विशेष ध्यान दीजिएगा, क्योंकि 22 मार्च से गाड़ी अपनी नियमित समयसारणी से करीबन 30 मिनट पहले परिचालित की जा रही है। वही 02926 अमृतसर बांद्रा विशेष में एक अंधेरी स्टापेज रद्द के सिवा और कोई बदलाव नही किया गया है।

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बाते, रेल अर्थसंकल्प पर बहस की!

जमाना ऐसा चल रहा है, हर किसी को बोलने, अपनी बात रखने का हक़ है, “राइट टु स्पीक,” अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य जो है। बात कहने का हक़ है, मगर मनवाने का? भाई, ऐसा कोई हक़ नही होता। 😄

फिर उसके लिए एक अलग नीति अपनाई जाती है, जिसे हमारे देश मे चाणक्य नीति कहा जाता है। साम, दाम, दण्ड और भेद यह वे चार सूत्र है जो चाणक्य नीति के तहत आते है, लेकिन आजकल सभी को यह सूत्र समझ आ गए है, अतः इससे भी काम सफल कराने में दिक्कतें आती है तब एक और अस्त्र बाहर निकलता है, वह है भावना, सहानुभूति बटोरने वाला अस्त्र। यह ऐसा अस्त्र है, इससे काम बनें या ना बनें लेकिन यह बात तो सिद्ध हो जाती है, की काम कराने के लिए घुटने तक टेक दिए गए है।

चर्चा का विषय यह है, रेल अर्थसंकल्प पर देशभर के विविध जनप्रतिनिधियों द्वारा रेल मन्त्री के सन्मुख, अपने क्षेत्र की बात रखी जा रही है। ऐसा है, किसी घर मे चार बेटे है, जो कुछ करना है वह “घर” के लिए करना है, मगर हर एक बेटा यह समझता है, उसे कुछ नही मिला, जो कुछ किया जा रहा है उसका फायदा उसके दूसरे भाई को ही मिलेगा। अब, वह ये क्यों नही समझता, जो कुछ हो रहा है वह “घर” को सुदृढ बनाने के लिए किया जा रहा है न की किसी एक को फायदा पहुँचाने। हमारा देश, हमारा घर है और हम वह चार बेटे है, जो दूसरे बेटे की थाली में घी ज्यादा परोसा जा रहा है इस पर ही नजरें गड़ाए रहते है।

जब बात प्रतिनिधित्व निभाने की है, तो यह साबित करना भी जरूरी है, की जनता की मांग सामने तक पोहोंचायी गयी है या नही? अतः माँगे तो रखी जाती ही है। चाहे वह पूरी कीये जाने के लिए योग्य हो या ना हो। फिर ऐसी विशिष्ट माँगोंके लिए सर्वेक्षण किया जाता है। जिसमे प्रोजेक्ट निर्माण की लागत और पूरा होने के बाद उससे मिलनेवाली कमाई इसका तालमेल लगाया जाता है। इस आधारपर प्रोजेक्ट का भविष्य तय होता है। कई बार जनप्रतिनिधियों के समाधान के लिए ही सर्वेक्षण करा जाता है, जिसके बारे में पहले ही पता होता है कि प्रोजेक्ट फिजिबल नही है।

एक बात विशेष तौर पर समझने की है, जब कहा जाता है, सड़क निर्माण की घोषणा, रेल मार्ग के मुकाबले फटाफट हो जाती है। उसके लिए धनार्जन भी हो जाता है, कार्य भी जल्द शुरू हो जाते है। साहब, यही तो मुख्य अन्तर है, सड़क और रेल मार्ग के बीच। सड़क मार्ग में कई उद्योग, व्यापार, जमीनदार, रसूखदार के हीत जुड़े होते है। किसी को फैक्ट्री के पास से सड़क गुजरने का फायदा मिलता है, किसी को खेती का मूल्यांकन बढ़कर मिलता है। दूसरा सड़क मार्ग ऐसा है, आपके पास ट्रक है, कार है, ट्रैक्टर है या बैलगाड़ी आप उस सड़क का उपयोग कभी भी, कहीं भी, कैसे भी कर सकते है, इसके लिए आपको न ही किसी विशेष वाहन या ही किसी विशेष अनुमति की जरूरत है। लेकिन रेल मार्ग का ऐसा नही है। रेल मार्ग पर चलने के लिए रेल गाड़ी ही चाहिए। याने रेल मार्ग बनाने के लिए खर्च, फिर उसपर चलाने के लिए विशिष्ट संरचनाओं से युक्त वाहन, उसकी देखभाल के लिए तन्त्रज्ञ, याने एक पूरी की पूरी यंत्रणा इसके लिए कायम स्वरूप में लगनी ही है। निर्माण, संचालन और देखभाल हरदम हर वक्त करना ही है। ऐसा नही की कच्ची पक्की कैसी भी सड़क है, वाहन तो चल ही जाएगा। याने रेल मार्ग के लिए फंडिंग करना, सड़क मार्ग की फंडिंग से कहीं मुश्किल है। दूसरा फर्क घाट, पहाड़ी, नदी, दर्रे इसका भी है, सड़क मार्ग के लिए शार्प टर्न, खड़ी चढ़ाई को एडजस्ट करना मुमकिन है, यह रेल मार्ग को आसानी से सम्भव नही है। रेल मार्ग के निर्माण का खर्च बढ़ता चला जाता है।

दूसरा, लम्बी लम्बी अन्तरोंकी गाड़ियोंकी माँग की जाती है, आम जनता को हर दिन पास के शहरों में जाने के लिए ज्यादा कनेक्टिविटी की जरूरतें है, न की दूर दूर के तीर्थक्षेत्रोंको जानेकी। वहीं बात इन्ही लम्बी दूरीक़े गाड़ियोंके स्टापेजेस के माँग की। भाई, वह रेल गाड़ी है, न की गांवों में चलने वाली कोई रोड़वेज बस, के हाथ दिखाया और रुक गयी, या अपना घर यहांसे पास पड़ता है, हम यही उतरेंगे। रेल गाड़ियोंके स्टापेजेस में रेलवे उसका खर्चा गिनती है और नही रोके जाने से फायदा। जब कमाई और खर्च का तालमेल दिखाई नही देता तब ही स्टापेजेस हटाए जाते है। रेल विभाग का स्टापेजेस कम करने में कोई निजी हित है ऐसा क़दापी नही सोचना चाहिए, ऐसी हर बात पर, तकनीकी आधार ले कर ही ऐसे निर्णय लिए जाते है।

खैर, बहुत सारी तकनीकी बातें है। अब आप बताए कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा पुल रेल मार्ग के लिए बनाया जा रहा है, रामेश्वरम में समुंदर के बीच अत्याधुनिक रेल पुलिया बनने जा रहा है, दिल्ली, कोलकाता की मैट्रो, रोहतक का हवाई रेल मार्ग, देश भर में वर्ष 2023 तक पूर्णतयः विद्युतीकरण, करोड़ो रूपये लगाकर बनाए जा रहे रेलवे के समर्पित मालवहन गलियारे, पटरियोंपर 130-160 किलोमीटर प्रति घण्टे से दौड़ लगाने वाली हमारे भारतीय रेल की अत्याधुनिक रेल गाड़ियाँ क्या यह हमारे लिए गौरव की बात नही? बेशक! यह सब हमारे लिए ही है, हम भारतियोंके लिए है।