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आज केवड़िया देश के रेल नक्शेपर आ गया, चलिए देखते है।

केवड़िया, सरदार पटेल, दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा, स्टेच्यु ऑफ यूनिटी ऐसे कई हैशटैग डालकर आपने सर्च किया होगा, लेकिन केवड़िया का सटीक रेल लोकेशन आज हम आपको दिखाते है।

Courtesy Telegram : @Bhaveen_Patel

यह केवड़िया का रेल मैप है, जिससे आपको केवड़िया को गाड़ियाँ किस तरह, कैसे जानेवाली है यह आसानी से समझ आ जाएगा। इस मैप में कोई स्केल नही है और स्टेशनोंके भी कोड डाले गए है, जिनको हम विस्तार से बताएंगे।

ST / MMTC याने सूरत / मुम्बई सेंट्रल, MYGL याने मियाँगाम कर्जन, VS विश्वामित्री और ADI याने अहमदाबाद इसका मतलब सूरत – अहमदाबाद पश्चिम रेलवे के मुख्य रेल मार्ग पर BRC – वडोदरा स्टेशन से केवड़िया के लिए गाड़ियाँ जाएगी। वडोदरा जंक्शन के पास ही VS – विश्वामित्री और PRTN – प्रतापनगर नाम के स्टेशन है। यह दोनोंही स्टेशनोंपर पहले नैरो गेज छोटी रेल लाईन की गाड़ियाँ चलती थी, जिसका अब गेज कन्वर्शन होकर ब्रॉड गेज बड़ी लाइन हो गयी है। वड़ोदरा से विश्वामित्री महज 3 किलोमीटर और प्रतापनगर 6 किलोमीटर अंतर पर है और इन स्टेशनोंके बीच काफी अच्छा सड़क सम्पर्क भी उपलब्ध है। केवड़िया के लिए 2 जोड़ी मेमू गाड़ियाँ प्रतापनगर से ही चलनेवाली है।

प्रतापनगर से आगे 27 किलोमीटर पर DB – डभोई जंक्शन है। डभोई से एक लाइन ARPR -अलीराजपुर की ओर जाती है और दूसरी CDD – चांदोद की ओर जाती है, और तीसरी छोटी लाइन MYGL – मियाँगाम कर्जन से जुड़ी है जो कि हाल ही में गेज कन्वर्शन के हेतु बन्द कर दी गयी है। डभोई से चांदोद की दूरी 20 किलोमीटर है। चांदोद से आगे केवड़िया स्टेशन बना है, यह पूर्णतयः नया निर्मित ब्रॉड गेज रेल मार्ग है। चांदोद से केवड़िया की दूरी 43 किलोमीटर की है। प्रतापनगर से केवड़िया तक यह पूरा रेल मार्ग इलेक्ट्रीफाइड याने विद्युतीकरण वाला है और कुल अंतर 90 किलोमीटर इतना है।

अब समझते है परिचालन। वाराणसी और रीवा से वडोदरा के बीच चलनेवाली दोनों साप्ताहिक महामना गाड़ियोंको केवड़िया तक विस्तारित किया गया है। इनमें दो बार लोको रिवर्सल होगा। पहली बार वडोदरा में और दूसरी बार डभोई में तब जाकर यह गाड़ियाँ केवड़िया पोहोचेंगी। यही अवस्था दादर केवड़िया और चेन्नई केवड़िया स्पेशल्स की भी रहेंगी, उन्हें भी वडोदरा और डभोई में लोको रिवर्सल करना होगा।वही अहमदाबाद केवड़िया, हजरत निजामुद्दीन केवडिया और प्रतापनगर केवडिया को केवल एक बार डभोई में लोंको रिवर्सल करना होगा।

जब मियाँगाम कर्जन से सीधी छोटी लाइन डभोई जाती है, उसका गेज कन्वर्जन हो जाएगा तो वडोदरा स्टेशन इन गाड़ियोंको लगेगा ही नही और वे सीधे ही डभोई होकर केवड़िया जाएगी। आगे डभोई में भी बाइपास रेल मार्ग के निर्माण का कार्य चल रहा है।

प्रतापनगर केवड़िया उद्धाटन मेमू
दादर केवड़िया स्पेशल

केवडिया स्टेशन के कुछ दृश्य
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मध्य रेल की 5 जोड़ी गाड़ियाँ सेवाग्राम, गरीब रथ शुरू की जा रही है।

राहत भरी खबर है, मध्य रेल के यात्रिओंके लिए और खास कर के नागपुर के यात्रिओंके लिए। क्योंकि उनकी चहेती सेवाग्राम एक्सप्रेस, पुणे गरीब रथ और अहमदाबाद प्रेरणा भी इस सूची में है।

02169/70 मुम्बई नागपुर मुम्बई सेवाग्राम स्पेशल एक्सप्रेस बदले चाल ढाल में नजर आएगी। गाड़ी क्रमांक बदल गया और कसारा, इगतपुरी, वरणगाव, बोदवड, जलम्ब, चांदूर, पुलगाव, सेवाग्राम और सिन्दी यह स्टापेजेस खत्म किए गए है। परिचालन के समय में भी परिवर्तन है। 02170 सेवाग्राम एक्सप्रेस 20 जनवरीसे नागपुर से चलेगी तो 02169 दिनांक 21 से मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से नागपुर के लिए रवाना होगी।

01137/01138 नागपुर अहमदाबाद नागपुर साप्ताहिक प्रेरणा स्पेशल, इसका भी गाड़ी क्रमांक बदला है और परिचालन त्रिसाप्ताहिक से घटकर साप्ताहिक किया गया है। समयोंमे भी भारी बदलाव किया गया है, यह गाड़ी कम समय मे अपने गन्तव्यपर पोहोंचा रही है। 01137 नागपुर से 20 जनवरीसे और 01138 अहमदाबाद से 21 जनवरी को निकलेगी।

बाकी 3 जोड़ी गाड़ियाँ है,

02043/44 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस बीदर मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस। 02043 दिनांक 20 जनवरीसे हर बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को मुम्बई से बीदर के लिए निकलेगी वापसी में 02044 दिनांक 21 जनवरीसे हर गुरुवार, शनिवार और रविवार को बीदर से मुम्बई के लिए निकलेगी।

01088/01087 पुणे वेरावल पुणे साप्ताहिक स्पेशल दिनांक 21 से 01088 पुणे से हर गुरुवार को वेरावल के लिए रवाना होगी वही दिनांक 23 से 01087 हर शनिवार को वेरावल से पुणे के लिए छूटेगी।

02114/02113 नागपुर पुणे नागपुर गरीबरथ वातानुकूलित त्रिसाप्ताहिक स्पेशल दिनांक 19 जनवरीसे 02114 नागपुर से हर मंगलवार, शुक्रवार, और रविवार को पुणे के लिए निकलेगी वही 02113 दिनांक 20 जनवरीसे हर बुधवार, शनिवार और सोमवार को पुणे से निकलेगी।

उपरोक्त 3 जोड़ी गाड़ियोंकी समयसारणी प्रसारित नही हुई है, जैसे ही प्राप्त होती है प्रकाशित की जाएगी।

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भुसावल विभाग मे मध्य रेल के महाव्यवस्थापक का दौरा।

यह एकदम सहज बात है, की आमजन पीड़ा में है, तकलीफ में है तो सम्बन्धित वरिष्ठ अधिकारियोंसे आशा, अपेक्षाएं बनी रहती है, वे आएंगे तो कुछ तो राहत लेकर आएंगे, समस्याओंका निराकरण करेंगे।

कल भुसावल रेलवे मण्डल में मध्य रेल के महाव्यवस्थापक का दौरा सम्पन्न हुवा। यह मनमाड़ नासिक के बीच निरीक्षण दौरा था। वहांके कुछ रेलमार्ग के खंडोंकी स्पीड टेस्ट की गई। उसके पश्चात भुसावल मण्डल में रेल कर्मियोंको व्यवस्थापन की ओरसे उनके उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए पुरस्कार वितरण किया गया। महाव्यवस्थापक के दौरे निमित्त पत्रकार परिषद का भी आयोजन था, वह भी सम्पन्न हुवा। आपको यह जानकर आश्चर्य होना स्वाभाविक है, की लेख में, पत्रकार परिषद का उल्लेख एक वाक्य में ही पूरा हो गया?

जब कोई फलनिष्पत्ति नही होती है, तब कथन गढ़ने का कोई अर्थ नही है। पत्रकारोंके मन मे बहोत सारे सवाल थे। भुसावल रेलवे विभाग का अधिकार क्षेत्र, नासिक जैसे महानगर के इगतपुरी से लेकर विदर्भ में अमरावती तक और दिल्ली की ओर मुख्य मार्ग में खण्डवा तक व्यापक रूपसे फैला है। इसमें नासिक, जलगाँव, अकोला और अमरावती ऐसे 4 महानगर, नासिक, धुलिया, जलगाँव, बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, बुरहानपुर, खण्डवा ऐसे जिले आते है। आज स्थिति यह है, संक्रमण काल मे जो यात्री गाड़ियाँ बन्द की गई उनमेसे केवल 45% गाड़ियाँ चल रही है। उनमें भी सारी यात्री गाड़ियाँ लम्बी दूरी की और केवल बड़े बड़े स्टेशनोंपर रुकनेवाला गाड़ियाँ है। कम दूरी वाली, छोटे व्यापारी, किसान, नौकरीपेशा यात्रिओंकी रोजमर्रा वाली सवारी, इण्टरसिटी और मेमू गाड़ियाँ शुरू होने का कोई आसार दिखाई नही देता है। भुसावल से दोपहर की गीतांजलि एक्सप्रेस जाने के बाद नागपुर की ओर जाने के लिए सीधी अगले दिन विदर्भ एक्सप्रेस ही है। इस मार्ग की लोकमान्य तिलक टर्मिनस हावडा एक्सप्रेस, मुम्बई नागपुर सेवाग्राम एक्सप्रेस, पुणे हावडा आज़ाद हिन्द एक्सप्रेस अब तक शुरू नही की गई है, तब भुसावल नागपुर सवारी, भुसावल नरखेड़ मेमू, भुसावल वर्धा सवारी की तो कोई सुदबुध ही नही। वही हालत मुम्बई, पुणे के लिए गाड़ियोंकी है भुसावल पुणे हुतात्मा और इस मार्ग की मुम्बई सवारी, देवलाली शटल बन्द होने से है।

डिवीजन के कई ऐसे छोटे बड़े शहर है, जो रेलवे के मायने महत्व नही रखते लेकिन रोजगार के लिए कई लोग वहाँपर रेलवे से जानाआना करते है। बुरहानपुर, नेपानगर, खण्डवा, वरणगाव, मलकापुर, नांदुरा, शेगाव, अकोला, मूर्तिजापुर, बडनेरा, जलगाँव, पाचोरा, चालीसगांव, कजगांव, नांदगांव, मनमाड़, लासलगांव, निफाड़, नासिक कई गाड़ियाँ जो चल रही है, इन स्टेशनोंपर नही रुकती। एक तरफ मुम्बई दिल्ली राजधानी रोजाना चलने का बड़ा प्रचार प्रसार किया जा रहा है, वही छोटे स्टेशनोंके यात्री संगठन अपनी अत्यावश्यक रेल सम्पर्क के लिए आक्रोश कर रहे है, आंदोलन करने के लिए विवश है। महाव्यवस्थापक दौरेमे बहुतांश विषय छोटे शहरोंकी सम्पर्कता के मांग के ही थे, उत्तर में आश्वासित किया गया है की राज्य शासन से समन्वय साधते हुए गाड़ियाँ शुरू की जाएंगी।

खण्डवावासियोंकी अलग मांग है, वहाँपर खण्डवा से इन्दौर और अकोला के बीच छोटी लाइन की गाड़ी चलती थी जो वर्षोंसे बड़ी लाइन में तब्दील करने के प्रक्रिया में बन्द पड़ी है। खण्डवा जंक्शन के छोटे लाइन के प्लेटफॉर्म औऱ पूरा यार्ड अब भी अविकसित ही है। खण्डवा स्टेशन का विकास मध्य रेलवे की उदासनिता के चलते ठप्प पड़ा है। खण्डवा से इन्दौर मार्ग पश्चिम रेलवे के अधिकार में तो खण्डवा अकोला मार्ग दक्षिण मध्य रेल के अधीन है, और खण्डवा स्टेशन मध्य रेल के भुसावल मण्डल में आता है। स्टेशन के प्लेटफार्म, यार्ड के विकास की जिम्मेदारी मध्य रेल भुसावल मण्डल के अधिकार क्षेत्र में है। मगर इस विषयपर भी इस पत्रकार परिषद में ठोस ऐसा जबाब नही मिला है।

भुसावल में मेमू शेड, LHB मेंटेनेंस यार्ड, भुसावल बाइपास पर अलगसे दौंड कॉर्ड की तरह स्टेशन का विकास करना इस तरह के प्रमुख विषय हमेशा की तरह अधूरे ही रहे। हर तरह के आश्वासन के साथ इस परिषद का समापन हुवा।

फोटो : उदय जोशी

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🤭 फिर से गेंद, रेलवे के पाले मे…

महाराष्ट्र राज्य में मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे का मुख्यालय है। संक्रमण काल मे रेल प्रशासन और राज्य शासन दोनों के समन्वय से रेल गाड़ियोंका नियोजन किया जा रहा है। एक तरफ लम्बी दूरी की काफी गाड़ियाँ चल पड़ी है तो दूसरी तरफ उपनगरीय, सवारी और कम दूरी की गाड़ियोंके न चलने से स्थानिक यात्रिओंमें असंतोष गहरा रहा है। इस विषय मे रेलवे और राज्य के बीच पत्राचार भी जारी है।

उपरोक्त पत्र देखे, महाराष्ट्र राज्य शासन ने रेलवे से कहा है, हमने रेलवे को सभी अन्तरराज्यीय रेल सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी थी, जिसमे दौंड – पुणे शटल की सेवाएं सम्मिलित है।

इस पत्राचार का शब्दशः रूपांतरण इस प्रकार है, “दौंड और पुणे के बीच शटल सेवाओं और राज्य में किसी अन्य शटल सेवाओं के संबंध में, यह अनुरोध किया जाता है कि स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में रेलवे यह सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र तैयार कर सकता है कि उक्त सेवाओं का उपयोग केवल उन यात्रियों को ही किया जा सकता है।  जो समय-समय पर राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा अनिवार्य के रूप में सभी सामाजिक दूरी और अन्य COVID 19 संबंधित प्रोटोकॉल को बनाए रखने के साथ दैनिक आधार पर आवश्यक कार्य के लिए सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं।”

यह पत्र आपदा नियंत्रण महाराष्ट्र राज्य के सचिव ने मुख्य वाणिज्य अधिकारी मध्य रेलवे एवं पश्चिम रेलवे इनको लिखा है और साथ ही इसकी प्रतिलिपि महाराष्ट्र के सभी जिलाधिकारी समेत पुलिस विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियोंको दी है। इस तरह गाड़ियोंको चलाने की जिम्मेदारी फिर से रेलवे के अधिकार क्षेत्र की तरफ पलट कर आ गयी है।

आपको ज्ञात होगा हाल ही में दौंड पुणे यात्री संगठनों ने उनके खण्ड पर शटल, डेमू, मेमू या उपनगरीय गाड़ियाँ शुरू कराने के लिए दिनांक 20 जनवरी को रेल रोको आंदोलन की चेतावनी रेलवे प्रशासन को दे रखी है। यह पत्राचार उसी सम्बन्ध में चल रहा है और यह राज्य प्रशासन का उत्तर भी आ गया है।

इस पर यात्रिओंकी नजर अब रेल प्रशासन पर टिकी है, रेलवे की ओरसे अब क्या प्रतिक्रिया रहेगी, क्या अब सभी गाड़ियाँ चल पड़ेगी?

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रेलवे के आरक्षण ऍप, वेबसाइट पर यात्रिओंको बेहतर मिले सुविधा

हाल ही में भारतीय रेल ने अपने संगणकीय आरक्षण टिकट बुकिंग्ज की वेबसाइट irctc.co.in और आईआरसीटीसी ऍप में व्यापक बदलाव किया।

इस बदलाव में वेबसाइट और ऐप की कम समय मे ज्यादा यात्रिओंके बुकिंग किए जाने की गति और क्षमता निस्संदेह बेहतर हुई है, मगर यात्रिओंकी रेल प्रशासन से कुछ अधिक की अपेक्षाएं थी वह पूरी नही की गई है, अपितु नया सुधारित ऐप चलाते वक्त सुविधाओंकी कमी ज्यादा महसूस होती है। किसी भी ऐप/ वेबसाईट को जब अद्यतन, अपडेट किया जाता है, तो सहज है की उसकी तुलना उसी के पुराने संस्करण से की जाए और इसी में नए ऐप की कमियाँ खलती है।

सर्वप्रथम जब स्टेशन सर्च किया जाता है, पहले ऐप में स्टेशन कोड डालते ही स्टेशन का नाम सिलेक्ट हो जाता था। नए ऐप में ऐसा नही होता। स्टेशन की स्पेलिंग के 3, 4 अक्षर डाले तभी नाम आएगा। कई बार स्टेशनोंके नाम की स्पेलिंग उसके उच्चारण से भिन्न होती है, उदाहरण के लिए मेहसाणा लीजिए। इसकी स्पेलिंग mehsana न होकर mahesana याने महेसाणा इस प्रकार है। ठीक वैसे ही बठिण्डा और भटिंडा, शिमोगा या शिवमोग्गा इस तरह है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन का कोड DDU है और पुराना नाम मुगलसराय है, लेकिन सर्च में पण्डित से शुरुवात करो तो सर्च नही होता।

दूसरा स्टेशनोंके बीच चलनेवाली गाड़ियोंकी सूची किसी तरह का कोई अनुक्रम का पालन नही करती, जो पहले पुराने ऐप में अपनेआप क्रमबद्ध आती थी। हालाँकि नए ऐप में sort by ऐसा ऑप्शन है, जिसे हर बार, हर सर्च में सिलेक्ट करना पड़ता है, डिफॉल्ट नही आता, हो सकता है इसका कोई बग हो, सुधारना बाकी हो।

आरक्षण का कोटा सिलेक्शन गाड़ियोंके साथ नही है। यदि आपने किसी दो स्टेशनोंके बीच आरक्षण उपलब्धता जानने का प्रयत्न किया तो सूची डिफॉल्ट जनरल कोटे की आएगी। कोटा बदलकर तत्काल या अन्य देखना हो तो बैक जाकर कोटा का चुनाव करना होगा, सीधे गाडीके अलग अलग कोटा आप सूचीमे नही देख सकते जो की पहले ऐप में मुमकिन था।

सबसे महत्वपूर्ण दरकार थी विविध कोटा की जानकारी की। यह बात समझने के लिए उसके विस्तार में आपको लिए चलते है। रेलवे के आरक्षण टिकटोंमे आरक्षित कोटे और उनके कोड्स अलग अलग होते है। सर्वसामान्य आरक्षण कोटे में conf, gnwl, pqwl, rlwl और rswl इस तरह कोड होते है, यह सारे आरक्षित टिकटोंके लिए समान रूपसे लागू होते है फिर वह आपका रियायती टिकट हो या महिला टिकट हो। केवल तत्काल के लिए tqwl यह अलग कोड है।

अब पहले ऐप में यात्रिओंको सूची में ही दिख जाता था की उसकी टिकट वेटिंग लिस्ट में याने wl तो है मगर किस प्रकार wl है, gnwl याने जनरल वेटिंग लिस्ट है या rlwl रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट है। अब जानकार यात्री इसका फर्क समझते है कि gnwl याने जनरल वेटिंग लिस्ट गाडीके प्रारंभिक स्टेशन से जारी की जाती है तो rlwl किसी बीच वाले स्टेशन से, तो rswl रोड साइड वेटिंग लिस्ट है। जनरल वेटिंग लिस्ट gnwl वाली वेटिंग लिस्ट में टिकट कन्फर्म होने की संभावना भरपूर होती है वही rlwl और rswl में बेहद कम। पहले वाले पुराने ऐप में वेटिंग लिस्ट कोड से पता चलने की वजह से यात्री यह प्रयत्न करता था की उसे कन्फर्म टिकट नही मिलता है तो कमसे कम जनरल वेटिंग लिस्ट का तो भी टिकट मिल जाए जो की नए सुधारित ऐप में सम्भव नही है। नए सुधारोंमें इस व्यवस्था को रेल प्रशासन ने निकाल दिया है। अब केवल wl ऐसा ही कोड सूची में दिखाई देता है।

आम यात्रिओंकी, आईआरसीटीसी के ऐप/वेबसाईटो के अपडेट आने के पहले ही ऐसी अपेक्षा थी की आरक्षण करते वक्त जब वह ट्रेन के शेड्यूल याने समयसारणी जानने के लिए क्लीक करें तो उसे समयसारणी के साथ साथ किस किस स्टेशन पर उपरोक्त गाड़ी के कोटे दिए गए है यह समझ आ जाए। हमे लगता है, एक उपभोक्ता का यह जानने का अधिकार भी है, की उसे टिकट खरीदने के पहले क्या क्या पर्याय उपलब्ध है, जिसमे उसकी प्रतिक्षासूची वाली टिकट कन्फर्म हो सकती है। यदि वह प्रारंभिक स्टेशन से टिकट खरीदता है, जिसमे उसे gnwl जनरल वेटिंग लिस्ट टिकट मिलेगी और कन्फर्मेशन के आसार ज्यादा से ज्यादा रहेंगे तो उसे वैसे टिकट लेने का पर्याय यथायोग्य तरीकेसे दिखाई देना चाहिए। ऐसा टिकट खरीदकर बादमे वह अपने यात्रा शुरू करने का स्थान बदल सकता है ( change of boarding station ) इस सुविधा का उपयोग कर के वह रेलवे को अतिरिक्त भुगतान तो कर ही रहा है और प्रारंभिक स्टेशनसे उसके बोर्डिंग स्टेशन तक की बुकिंग दोबारा बुक किए जाने के लिए फिरसे खाली भी कर रहा है।

आशा है, रेल प्रशासन अपने ऐप / वेबसाईटोंमे सकारात्मक सुधार कर यात्रिओंको टिकट आरक्षण करने के अच्छे पर्याय उपलब्ध कराएंगे और साथ ही अपने राजस्व में अमूल्य ऐसी वृद्धि भी पाएंगे।