Uncategorised

दक्षिण रेलवे की और 3 गाड़ियाँ नए समयसारणी के साथ 30 नवम्बर से चलेगी

यात्रीगण ज्ञात रहे, यह सभी गाड़ियाँ आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके के साथ ही चलाई जाएगी। निम्नलिखित सभी बदलाव 30 नवम्बर से लागू किए जा रहे है।

1: 02617/18 एर्नाकुलम हज़रत निजामुद्दीन एर्नाकुलम मंगला स्पेशल एक्सप्रेस

2: 16345/46 तिरुवनंतपुरम लोकमान्य तिलक टर्मिनस तिरुवनंतपुरम नेत्रावती स्पेशल एक्सप्रेस वाया कोंकण रेलवे

3: 02269/70 एम जी आर चेन्नई सेंट्रल नई दिल्ली एम जी आर चेन्नई सेंट्रल द्विसाप्ताहिक दुरन्तो स्पेशल

Uncategorised

इसी हफ्तेसे गाड़ियाँ अपना समय बदल रही है, ज़ीरो बेस टाइम्टेबलिंग गाड़ियोंमे जारी

जो भी गाड़ियाँ विशेष श्रेणी में चल रही थी और जब तक कोई सूचना नही दी जाएगी तब तक चलती रहेंगी। अब इन कुछ गाड़ियोंमे जीरो बेस टाइम्टेबलिंग, शून्य प्रणाली समयसारणी के तहत बदलाव किए जा रहे है। यहाँपर पहले भी हमने नवजीवन और केरला एक्सप्रेस के बदले समय दिए है। अब ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस, प्रयागराज एक्सप्रेस और दुरन्तो के बदले समय लीजिए।

02615/16 चेन्नई नई दिल्ली चेन्नई ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस

उत्तर मध्य रेलवे की 4 जोड़ी गाड़ियाँ, 02417/18 प्रयागराज नई दिल्ली प्रयागराज स्पेशल एक्सप्रेस, 02275/76 प्रयागराज नई दिल्ली प्रयागराज दुरन्तो स्पेशल, 02451/52 कानपुर नई दिल्ली कानपुर श्रमशक्ति स्पेशल, 04131/32 प्रयागराज उधमपुर प्रयागराज स्पेशल

06011/12 कन्याकुमारी हज़रत निजामुद्दीन कन्याकुमारी द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस यह हो सकता है कि 16317/18 हिमसागर साप्ताहिक का जीरो बेस टाइम्टेबलिंग में बदला रूप है।

02386 जोधपुर हावडा एक्सप्रेस और 02388 बीकानेर हावडा एक्सप्रेस का भी समय परिवर्तन होने जा रहा है।

06517 बेंगलुरु मंगालूरु स्पेशल एक्सप्रेस के समयोंमे हसन से लेकर मंगालूरु तक बदलाव हो रहे है।

Uncategorised

02625/26 तिरुवनंतपुरम नई दिल्ली केरला एक्सप्रेस नए ज़ीरो बेस टाइमटेबल के अनुसार 30 नवम्बर से चलेगी।

इसके साथ ही दक्षिण रेलवे अपनी गाड़ियोंमे ज़ीरो बेस टाइम्टेबलिंग लागू करने वाला पहला ज़ोन हो गया है। पहले भी याने 23/26 नवम्बर से दक्षिण रेलवे की नवजीवन एक्सप्रेस भी जीरो बेस आधारित गाड़ी बदले हुए समयसारणी के साथ शुरू हो रही है। 02625 केरला एक्सप्रेस में 90 मिनट की बचत हो रही है तो 02626 नई दिल्ली से तिरुवनंतपुरम केरला एक्सप्रेस की समयसारणी में अमूलचूल बदलाव किया गया है।

निम्नलिखित समयसारणी पुरानी है और केवल अवलोकनार्थ दी गयी है कि कितने बदलाव पुराने समयोंमे हुए है।

Uncategorised

लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के दर्शन करने, अब केवडिया पोहोंचीए रेलवे से

स्टेचू ऑफ यूनिटी

पश्चिम रेलवे ने “सरदार दर्शन” अपनी 4 जोड़ी रेल गाड़ियोंको केवड़िया तक विस्तार कर के सुविधाजनक कर दिया है। वडोदरा डिवीजन के प्रतापनगर से केवड़िया तक नया मार्ग बनाकर स्टेशन का निर्माण हुवा है। जल्द ही इस मार्ग पर गाड़ियोंको चलाने की स्वीकृति मिल जाएगी। पश्चिम रेलवे ने देश के सभी यात्रिओंको स्टेचू ऑफ यूनिटी दर्शन के लिए केवड़िया आना सुलभ और सुविधापूर्ण हो इसलिए 4 जोड़ी गाड़ियोंके केवड़िया तक विस्तार किए जाने की घोषणा की है।

1: 12927/28 मुम्बई सेंट्रल वडोदरा मुम्बई सेंट्रल

2: 20904/03 वाराणसी वडोदरा वाराणसी महामना

3: 20906/05 रेवा वडोदरा रेवा एक्सप्रेस

और दो जोड़ी मेमू जो प्रतापनगर – केवड़िया के बीच फेरे लगाएगी।

तो तैयार हो जाइए, लौहपुरुष सरदार पटेल के दर्शन करने के लिए।

Uncategorised

भारतीय रेल : यात्री संभ्रमित, कर्मी खोए खोए!

23 मार्च 2020 यह तारीख रेलवे के इतिहास में दर्ज हो चुकी है। इसी दिन से सभी रेलगाड़ियोंके पहिए थम गए थे। क्या पसेंजर, मेल एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और क्या मालगाड़ियाँ। सब की सब ठप्प। बड़ा निर्णय था, संक्रमण को रोकने के लिए, देश की धमनी को नियंत्रित करने का। तमाम देशवासी सकते में आ गए, लेकिन रुकना यहीं समझदारी थी।

12 मई 2020 से 15 जोड़ी राजधानी एक्सप्रेस गाड़ियाँ खोली गई। मालगाड़ियाँ, पार्सल गाड़ियाँ जरूरत के हिसाब से चलाई जा रही थी। रेलवे के आधे से ज्यादा कर्मी घर बैठ गए थे। कार्यालयीन कर्मचारियोंकी बात छोड़िए, लाइन ड्यूटी स्टाफ़, गार्ड्स, लोको पायलट को भी सप्ताह के एखाद-दुखाद दिन बुलावा आता था। धीरे धीरे श्रमिक गाड़ियोंसे और 100 जोड़ी गाड़ियोंसे यात्री गाड़ियाँ बढ़ने लगी। यात्रिओंमें डर तो था लेकिन अटके पड़े लोग अपने घरोंके लिए रेल का सहारा लेने लगे।

अनलॉक शुरू हुवा, गाड़ियाँ बढ़ने लगी, यात्री व्यापार व्यवसाय और रोजगार के लिए कामोंपर लौटने लगे। लेकिन रेलवे ने यात्रिओंपर आरक्षण का निर्बंध लगा रखा जो आज की तारीख में भी जारी है। फजूलमे कोई भी रेलवे स्टेशनोंपर, उसके दायरोंमें प्रवेश नही कर पा रहा था। गाड़ियोंमे जनरल टिकट भी आरक्षण व्यवस्था में, द्वितीय श्रेणी सिटिंग में बदल गया। हर डिब्बेमें जितनी यात्री व्यवस्था उतने ही यात्री। प्रतिक्षासूची टिकट धारकोंकी छुट्टी हो गयी, साथ ही सीजन पास धारी, सलाम दुवा कर यात्रा करनेवाले सब के सब रेल यात्रा से परे हो गए।

ऐसी व्यवस्थाओंमें रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्म और रेलगाड़ियाँ गजब की साफसुथरी रहने लगी। अतिरिक्त यात्री नही, प्लेटफॉर्मोंपर मिलने जुलने छोड़ने वाले नही, धूम मचाने वाले बिक्रेता नही, सब शांतिपूर्ण माहौल। इसी बीच रेलवे ने अपने सुधार कार्यक्रमोपर जोर दिया। प्लेटफॉर्म, पटरी, पुलिया दुरुस्त कर लिए। जो जो चीजे उन्हें प्रतिबंधित करनी थी, गले की हड्डी बनी थी उन पर कन्ट्रोल आते जा रहा था। अनाधिकृत प्रवेश पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। झीरो बेस टाइम्टेबलिंग में कई सवारी गाड़ियाँ बन्द होने वाली है, स्टापेजेस रद्द होने वाले है वह सब इन संक्रमण काल के रेल बन्द अवस्था मे यात्रिओंके गले उतर गया है। 23 मार्च से तमाम गाड़ियाँ बन्द होने के बाद अब जब भी कोई गाड़ी शुरू होने की घोषणा होती है तो यात्री और यात्री संगठन ऐसे प्रतिक्रिया देते है की जैसे उन्हें कोई नई गाड़ी ही मिलने जा रही हो। यह ठीक वैसे है, तमाम व्यवस्था छीनी जाने के बाद एखाद बून्द टपके तो मुर्दे में जान आती हो। यात्री संगठन की सवारी गाड़ियोंके बारे मे चर्चा लगभग बन्द हो चुकी है। छोटे स्टेशनोंके यात्रिओंमे परिवहन बदल चुका है, सभीने पर्यायी व्यवस्था ढूंढ ली है। नाराजी ही सही लेकिन सीजन पास वाले भी अलग यातायात अपनाकर रोजमर्रा निर्वाह में लग चुके है। प्रतिक्षासूची रेलगाड़ियोंसे गायब हो चुकी है।☺️

रेलवे स्टेशनोंके विक्रेता आज भी अपनी रोजन्दारी जो घटकर 25 प्रतिशत भी नही रही, परिस्थितियों के बदलने की राह जोत रहे है। बुकस्टाल के ताले जो मार्च के लॉक डाउन से लगे आज भी नही खुले है। रेल गाड़ियाँ तो पटरियोंपर आती जा रही लेकिन रेलवे पर निर्भर लोगोंकी जिंदगी अभी भी डिरेल याने पटरीपर लौटी नही है। रेलवे अपने मालगाड़ियाँ, सामान लदान में डेढ़ गुना, दोगुना इजाफा बता अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन यात्री ट्रैफिक का घाटा, उसका कोई जिक्र तक नही है। कर्मचारियोंमें एक अजीबसी उदासी है और यात्रिओंमें रेल यात्रा करनेमे सम्भ्रम। बिल्कुल जरूरी हो तो रेल यात्राएं की जा रही है। हौशी, उत्साही पर्यटक आज भी अपने घरोमे ही है। सब कुछ अब भी सुना सुना है