
बेंगालुरु नई दिल्ली बेंगालुरु कर्णाटक स्पेशल के समय मे बदलाव


मुम्बई महानगर क्षेत्र में दूरदराज से रेल यात्री आते है। उनकी गाड़ियाँ मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, पनवेल, बांद्रा टर्मिनस, मुम्बई सेंट्रल या दादर में समाप्त होती है। इन टर्मिनल्स से उनके रहने के या जहाँ जाना चाहते है उसके लिए उन्हें और यात्रा करनी होती है, जो फिलहाल मुम्बई की लोकल ट्रेन्स में संक्रमणों के पाबंदियोके चलते सम्भव नही है। ऐसे में महाराष्ट्र राज्य प्रशासन की ओरसे मध्य एवं पश्चिम रेलवे की ओर इस तरह के आउट स्टेशन यात्रिओंको अपनी लम्बी दूरी की गाड़ियोंको पकड़ने या उससे उतरने के बाद अपने घरोंतक पोहोंचने के लिए जरूरत हो तो सबर्बन गाड़ियोंमे यात्रा करने की अनुमति दी जानी चाहिए ऐसी दरख़्वास्त की गई है। पत्र का मसौदा आप के लिए प्रस्तुत है।

चूँकि यह राज्य प्रशासन का पत्र मध्य एवं पश्चिम रेलवे के मुख्यालयोंको भेजा गया है तो उसे, उन्होंने आगे, चेयरमैन, रेलवे बोर्ड, नई दिल्ली की अनुमति प्राप्त करने के लिए भेजा है।

इन पत्रचारोंको देखते, यह बात तय है कि बाहरी स्टेशनोंसे मुम्बई में आने वाले और मुम्बई से बाहरी यात्रा को जाने वाले रेल यात्रिओंके लिए मुम्बई की लोकलोंका दरवाजा खुलना एक महज औपचारिकता है, और जल्द ही दिल्ली मुख्यालय से अनुमति पत्र मिल जाएगा।
राज्य शासन ने अपने पत्र में बाहर से मुम्बई पोहोंचने वाले यात्रिओंको अपनी ट्रेन टर्मिनल पर पोहोंचने के बाद 6 घंटोतक अपनी उपनगरीय यात्रा का टिकट खरीद कर यात्रा करते आएगी और उसी प्रकार मुम्बई के विभिन्न टर्मिनलोंपर पोहोंचने के लिए अपनी लम्बी दूर की गाड़ी के छूटने के समय के 6 घंटे पूर्व उपनगरीय यात्रा की जा सकेगी। उपरोक्त यात्रा के टिकट ही उनकी उपनगरीय टिकट खरीदने की वैलिडिटी रहेंगे।
हम राज्य शासन ने बाहरी यात्रिओंके लिए उठाए गए इस निर्णय का स्वागत करते है।
पुरानी 20903/04 वडोदरा वाराणसी वडोदरा महामना फिलहाल 09103/04 स्पेशल के तौर पर चलाई जा रही है। परिचालन के दिन बदल गए है और समय परिवर्तन भी हो रहा है।

‘गरीबी मे आटा गिला’ भाई, पहले ही गाड़ियाँ चलने की घोषणा ऐसे रुक रुक के हो रही है मानो लॉटरी खोली जा रही हो। “फलाँ गाड़ी चलेगी, फलाँ गाड़ी बदले समय के साथ शुरू होने जा रही है।” ऐसे टाइटल आए दिन अखबारोंमें छपती है। वैसे में ही उत्तरी भागोंमें अलग अलग रेल रोको आन्दोलनोने रेल गाड़ियोंकी चाल ही बिगाड़ दी है। बेचारे यात्री को टिकट कन्फर्म होने के बावजूद यात्रा करने से पहले रेलवे से पूछना पड़ता है, गाड़ी चलने वाली है या नही और चलेगी तो उसके स्टेशन तक जाएगी या नही।
संक्रमण का डर, फिर रोको रोको की मार अब रेलवे पर प्रकृति का भी प्रहार पड़ने वाला है, वह है कोहरा। दिसम्बर, जनवरी में पूरे उत्तरी भारत मे कोहरे की वजह से गाड़ियाँ देरी से चलती थी या रद्द करनी पड़ती थी। रेल प्रशासन ने बीते वर्षोंसे कुछ गाड़ियोंके परिचालन पहले से रद्द करने का निर्णय लिया है। इससे यात्रिओंको अपने यात्रा का नियोजन करने में आसानी होती है।
हमारे पास गाड़ियोंके कोहरे की वजह से रद्द/ आंशिक रद्द के कुछ परीपत्रक आए है, जिन्हें आपके लिए प्रस्तुत किया है। हालांकि इन क्षेत्रोंकी और भी कुछ गाड़ियोंका रद्दीकरण या आंशिक रद्दीकरण की खबरे आ सकती है। अतः यात्रिओंसे निवेदन है, अपनी रेल यात्रा के नियोजन हेतु रेलवे की हेल्पलाइन या अधिकृत वेबसाइटों का उपयोग जरूर करे।





हाल ही में रेलवे का एक पत्र जिसमे ATVM/UTS टिकट वेंडिंग मशीनोंको शुरू करने की मंजूरी दिए जाने के बारे में बोर्ड का उत्तर था, इस पत्र का विवेचन कई अखबारों और यू ट्यूबर, ब्लॉगर्स ने बेहद गलत तरीकेसे किया। उन्होंने सेकेण्ड क्लास के टिकट मिलने शुरू हो जाएंगे से लेकर सवारी गाड़ियाँ चल पड़ेंगी तक पतंग उड़ा दिए। अपनी अपनी समझ से शुरू होने की तारीखें भी ज़ाहिर कर दी। आखिरकार रेल प्रशासन को प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के जरिए एक परीपत्रक निकाल यह कहना पड़ा, ऐसा कुछ नही है, आरक्षित गाड़ियाँ यथावत आरक्षण व्यवस्थाओंके साथ ही चलेंगी और सेकेण्ड क्लास या सवारी गाड़ियाँ जब भी शुरू की जाएगी उनकी सूचना अलग से दी जाएगी। इसके बाद जिन जिन लोगोंने ऐसी अफवाह उड़ाई थी, इतने सन्नाटे में है की बाद का रेलवे का स्पष्टीकरण तक उन्होंने जाहिर नही किया। खैर!
हम यह कहना चाहते है, पूर्व, उत्तर पूर्व, दक्षिण पूर्व और दक्षिण पश्चिम रेल्वेज ने अपने क्षेत्रोंमें सवारी गाड़ियाँ शुरू कर दी है। इन्ही क्षेत्रीय रेलवे की तरह बाकी क्षेत्रोंमें भी सवारी, डेमू, मेमू गाड़ियाँ शुरू कर दी जानी चाहिए। गौरतलब यह है, की इन गाड़ियोंमे आरक्षण नही होता, केवल सेकन्ड क्लास की टिकट चलती है। इन टिकटोंका किराया मेल/एक्सप्रेस के मुकाबले काफी कम रहता है और मार्ग लगभग सारे स्टापेजेस पर यह गाड़ियाँ रुकती है। अतः आम जनता को इन्ही गाड़ियोंके चलने की दरकार है।
रेल और राज्य प्रशासन को डर है, यदि सवारी, डेमू, मेमू गाड़ियाँ चलाई जाने लगी तो संक्रमण को नियंत्रित करने में काफी दिक्कतें आयेंगी। चूँकि सेकेण्ड क्लास टिकटधारक का रेलवे के पास कोई रिकॉर्ड नही होता तब कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग हो ही नही पाएगी। दूसरा जितनी डिब्बा यात्री क्षमता है, उससे कहीं ज्यादा यात्री टिकट बेचे जाते है और यात्री, इन गाड़ियोंमे यात्रा भी करते है। इस अनियंत्रित यात्री ट्रैफिक का ब्यौरा किस तरह रखा जाए या संख्या पर काबू कैसे किया जाए यह सबसे बड़ी समस्या है। इस पर एक उपाय है।
जो किसी एक ही मार्ग पर नियमित यात्रा करने वाले यात्री है, जैसे की मासिक पासधारक यात्री है, उनके पास के डाटा में आधार कार्ड जोड़ दे तो कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की समस्या सुलझ जाएगी। उसी तरह सेकेण्ड क्लास टिकट खरीदते वक्त भी यह फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। रेल प्रशासन को अपने टिकिटिंग सिस्टम में मामूली सा बदलाव करना होगा और यात्रा करते वक्त यात्रिओंको अपना आधार कार्ड रखना आवश्यक करना होगा। बदलते परिवेश में देश की जनता अपनी सुरक्षितता के लिए अपनाए गए नियमोंका पालन अवश्य ही करेंगी।