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हावडा – जोधपुर / बीकानेर डेली गाड़ी अब होगी, सप्ताह मे 4 और 3 दिन मे परावर्तित। इस कवायद की वजह, फायदे और नुकसान समझते है।

राजस्थानवासियोंकी हावडा के लिए जानेवाली एक्सप्रेस गाड़ी में रेल प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण बदलाव किया जा रहा है।

12307/08 हावडा जोधपुर हावडा एक्सप्रेस और 22307/08 हावडा बीकानेर हावडा लिंक एक्सप्रेस यह गाड़ियाँ इस मार्ग की बेहद लोकप्रिय गाड़ियाँ थी। लेकिन रेल प्रशासन ने अपनी लिंक एक्सप्रेस चलाने की नीतियां बदली है, लिंक एक्सप्रेस को रेलवे के टाइमटेबलोंसे पूर्णतयः हटाने का पक्का मन रेलवे ने बना लिया है। दरअसल हावडा से मेड़ता रोड़ तक 12307/08 नम्बर से सीधी आती थी, यहाँपर उसके कुछ डिब्बे निकल कर 22307/08 हावडा मेड़ता रोड़ बीकानेर एक्सप्रेस बनकर बीकानेर जाते थे और बचे डिब्बे जोधपुर जाते थे। वापसी में गाड़ी का एक हिस्सा बीकानेर से मेड़ता रोड़ तक आता था और जोधपुर हावडा गाड़ी में जुड़ कर हावडा एक पूरी 22/24 डिब्बे की पूरी गाड़ी बनकर हावडा जाती थी। इस व्यवस्थामे यात्रिओंको राजस्थान के दोनों शहरोंसे, बीकानेर और जोधपुर से हावडा के बीच रोजाना कनेक्टिविटी उपलब्ध थी।

संक्रमण काल मे ऐसे भी नियमित गाड़ियाँ बन्द है और उसके बदले 0 नम्बर से शुरू होनेवाली कुल 230 स्पेशल गाड़ियाँ और 12 सितंबर से इसमें 86 और स्पेशल गाड़ियाँ रेल प्रशासन चला रही है। वर्तमान मे चल रही 02307/02308 जोधपुर / बीकानेर – हावड़ा स्पेशल गाड़ी के स्थान पर अब गाड़ी संख्या 02387/02388 बीकानेर से हावड़ा के मध्य सप्ताह मे 3 दिन व गाडी संख्या 02385/02386 जोधपुर – हावड़ा सप्ताह में 4 दिन चलेगी। यह परिवर्तन हावड़ा से चलने वाली गाड़ी से 1.10.20से प्रभावी होगा।कृपया तिथि / समय निम्नानुसार है।

इसका मतलब यह है कि नई व्यवस्था में 12385 हावडा जोधपुर एक्सप्रेस हावडा से मंगल, बुध, शनि और रविवार को चलेगी और जोधपुर को गुरुवार, शुक्रवार, सोमवार और मंगलवार को पोहोचेगी। वापसी में 12386 जोधपुर हावडा एक्सप्रेस सोमवार, मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार को निकलेगी और हावडा को तीसरे दिन बुधवार, गुरुवार, शनिवार एवं रविवार को पोहोचेगी। याने रोजाना चलने वाली हावडा जोधपुर हावडा एक्सप्रेस अब सप्ताह में 4 दिन ही चलेगी।

वही 12387 हावडा बीकानेर एक्सप्रेस, हावडा से सोम, गुरु, शुक्र को निकल तीसरे दिन बुधवार, शनिवार एवं रविवार को बीकानेर पोहोचेगी। वापसी में 12388 बीकानेर हावडा एक्सप्रेस बुध, शनि, रवि को निकल तीसरे दिन शुक्रवार, सोमवार एवं मंगलवार को हावडा पोहोचेगी। इसमें भी रोजाना की कनेक्टिविटी घटकर सप्ताह में 3 दिन की रहनेवाली है।

यात्रिओंने क्या पाया, क्या खोया : सबसे बड़ा नुकसान, जोधपुर और बीकानेर दोनोंही स्टेशनोंके अपनी हावडा से रोजाना वाली एन्ड टू एन्ड कनेक्टिविटी खोई है और पाने में इन स्टेशनोंको रोज जो आधी आधी गाड़ी मिलती थी उस जगह पर फूल रैक 22 डिब्बों की LHB गाड़ी मिलेगी। एक अर्थ से यह भी समझ सकते है कि हावडा से मेड़ता रोड तक तो रोजाना गाड़ी उपलब्ध है, बस 4 दिन जोधपुर जाएगी और 3 दिन बीकानेर जाएगी।

रेलवे का दृष्टिकोण : रेलवे अपनी सारी गाड़ियाँ सेमी हाई स्पीड में तब्दील करने जा रही है। इसकी शुरवात 130 किलोमीटर प्रति घंटा हो रही है और आगे बढ़कर 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक कि जाएगी। इसके लिए गाड़ी के रैक LHB किए जाने जरूरी है और LHB रैक की शंटिंग करना याने जो मेड़ता रोड स्टेशन पर आधी गाड़ी बीकानेर और आधी गाड़ी जोधपुर के लिए काटना / जोड़ना मुनासिब नही। दूसरा आजकल गाड़ियोंमे ट्रेन लाइटिंग सिस्टम भी OHE याने ऊपरी इलेक्ट्रिक सप्लाई से ली जाती है, इसमें सारे डिब्बे की वायरिंग जुड़ी होती है। तीसरे यह कि शंटिंग से रेलवे की दो लाइनपर ब्लॉक लगता है, मुख्य गाड़ी को 45 से 60 मिनट खड़ा भी रखना पड़ता है। काफी सारा स्टाफ़ भी अटकता है। इन सारी झंझटसे मुक्ति पाने के लिए रेल प्रशासन सारी लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ बन्द कर उनको ऐसे अलग अलग दो हिस्सों में सेपरेट गाड़ियोंमे बाँट कर चलाना चाहती है।

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सूरत छपरा सूरत नई एक्स्ट्रा गाड़ी, तापी गंगा एक्सप्रेस के क्लोन स्वरूप में

बीते दिनों में यह क्लोन ट्रेन्स की खबर तो आपके पढ़ने या सुनने में आयी होगी। मन मे कुछ सवाल भी आए होंगे, भाई यह क्लोन ट्रेन क्या होती है? चलिए समझते है।

भारतीय रेल में कई गाड़ियाँ चलती है, जैसे राजधानी, हमसफ़र, एक्सप्रेस, मेल, सवारी ई, लेकिन क्लोन ट्रेन पहली बार चलाई जा रही है। कोई ट्रेन में सारी बुकिंग्ज फूल हो गयी है, बहोत सारी वेटिंग स्थिति चल रही है और आरक्षण कन्फर्म होने की कोई गुंजाइश भी नही तब रेल प्रशासन की ने एक अलग से नई योजना बनाई, क्लोन याने हूबहू उसी मार्ग पर दूसरी ट्रेन चलाने की।

यहाँपर हम आपको सूरत – छपरा – सूरत तापी गंगा एक्सप्रेस के क्लोन ट्रेन की बात बता रहे है। रेग्युलर तापी गंगा एक्सप्रेस बेहद लोकप्रिय और बारों मास फूल चलनेवाली ट्रेन है। सप्ताह में 5 दिन सोम, बुध, गुरु, शुक्र और रविवार को सूरत से छपरा के लिए चलती है और वापसी में छपरा से मंगल, बुध, शुक्र, शनि और रविवार को सूरत के लिए चलती है।

यह क्लोन एक्सप्रेस सोमवार को सूरत से निकलेगी और मंगलवार को छपरा पोहोचेगी फिर बुधवार को वापिस सूरत के लिए छपरा से निकलेगी और गुरुवार को सूरत पोहोंचेगी। याने सप्ताह में केवल एक दिन, दोनों ओरसे। सूरत छपरा सूरत क्लोन एक्सप्रेस में 18 डिब्बे रहेंगे, जिसमे 2 जनरेटर कार, 4 स्लिपर और 12 वातानुकूलित थ्री टियर कोच रहेंगे। यह गाड़ी इसके नियमित स्टापेजेस से काफी कम जगहोंपर रुकने वाली है। सूरत से चलने के बाद भुसावल, इटारसी, जबलपुर, प्रयागराज छिंवकी, वाराणसी, शाहगंज से सीधी छपरा रुकेगी।

मित्रों, यह क्लोन गाड़ी चलवाने का कंसेंप्ट प्रयोगात्मक है, यदि यात्रिओंमें इसे पसंद किया जाता है तो आरक्षण की प्रतीक्षा सूची को देख कर रेल प्रशासन इसके फेरोंको और भी बढ़ा सकती है। वैसे बांद्रा टर्मिनस अमृतसर बांद्रा टर्मिनस पश्चिम एक्सप्रेस की भी क्लोन की घोषणा पश्चिम रेलवे द्वारा की गई है। आप दोनोंही परीपत्रक देख लीजिए। योजना बढ़िया है, यात्रिओंके लिए काफी सुविधाजनक है।

सूरत छपरा सूरत तापी गंगा क्लोन ट्रेन
बांद्रा टर्मिनस अमृतसर बांद्रा टर्मिनस पश्चिम एक्सप्रेस
की क्लोन ट्रेन
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मुम्बई नासिक औरंगाबाद नागपुर बुलेट ट्रेन के लिए सम्भावित मार्ग

हमारे देश मे बुलेट ट्रेन के निर्माण की शुरुवात हो चुकी है, मुम्बई से अहमदाबाद के बीच देश का पहला बुलेट ट्रेन मार्ग बनने जा रहा है। भारत सरकार ने इसके लिए एक कम्पनी स्थापित की है जिसका नाम है नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड – NHSRCL

यह भारतीय रेल की उपकम्पनी, NHSRCL न सिर्फ मुम्बई – अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग बनाएगी बल्कि और भी 7 नये मार्ग पर भी बुलेट ट्रेन चलाने की संभावना तलाश करेगी। मुम्बई – अहमदाबाद मार्ग 508 किलोमीटर का है इसके अलावा जो नए 7 मार्ग है, वह इस प्रकार है।

1: दिल्ली – वाराणसी 865 किलोमीटर

2: मुम्बई – नागपुर 753 किलोमीटर

3: दिल्ली – अहमदाबाद 886 किलोमीटर

4: चेन्नई – मैसुरु 435 किलोमीटर

5: दिल्ली – अमृतसर 459 किलोमीटर

6: मुम्बई – हैदराबाद 711 किलोमीटर

7: हावडा – वाराणसी 760 किलोमीटर

कुल मिलाकर करीबन 5000 किलोमीटर की 7 बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए DPR तयार करने की जिम्मेदारी NHSRCL कम्पनी ने ली है। इन प्रोजेक्ट्स में का एक प्रोजेक्ट, महाराष्ट्र का महत्वपूर्ण, मुम्बई – नागपुर बुलेट रेल मार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ( डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट – DPR ), उसके आधार पर यह मार्ग का अनुमान निकाला गया है। एक अंदाज यह है, की यह बुलेट रेल का मार्ग समृद्धि महामार्ग के साथ ही चलेगा और जरूरत के हिसाब से शहरोंकी कनेक्टिविटी लेने के लिए शहरोको जोड़ते हुए चलेगा। जाहिर सी बात है, आप को उत्सुकता होंगी की यह मार्ग कौनसे शहरोंसे होकर गुजरेगा, मुम्बई से निकलकर शाहपुर, इगतपुरी, नासिक, शिरडी, औरंगाबाद, जालना, मेहकर, मालेगाव जहांगीर, कारंजा लाड़, पुलगांव, वर्धा और नागपुर यह समृद्धि महामार्ग है और हमारा अनुमान है, की बुलेट ट्रेन की पटरियाँ इसके साथ ही डलेगी और चलेगी।

तो लीजिए, आप अनुमानित मैप भी देख लीजिए।

Courtesy : @sahil11p साहिल पेडणेकर

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हमारे यहाँ भी हो सकती है, सारी रेल गाड़ियाँ वातानुकूलित

क्यों चौंक गए न? लेकिन रेल प्रशासन 230 LHB कोच के साथ अपनी कपूरथला कोच फैक्टरी में, इस दिशा में प्रयोगात्मक दृष्टिकोण से प्रयत्न कर रहा है। यह प्रयोग LHB के स्लिपर क्लास एवं जनरल सेकेंड क्लास डिब्बों के साथ किया जा रहा है। नए वातानुकूलित स्लिपर में 83 बर्थ और सेकन्ड क्लास में 100 सीट्स रहेंगे।

भारतीय रेलवे में रेल यात्रिओंके बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय क्लास कौनसा है तो वह है वातानुकूलित थ्री टियर। स्लिपर से लगभग दो से ढाई गुना किराया मगर वातानुकूलित 2 टियर से आधा, वातानुकूलित साफसुथरी व्यवस्था, किराए में सम्मिलित बेड सेट इस तरह की खुबियोंके चलते देश के मध्यम वर्ग में एसी थ्री क्लास काफी लोकप्रिय है।

वातानुकूलित थ्री टियर में वातानुकूलित टु टियर के मुकाबले ज्यादा यात्री, यात्रा करते है। यात्रिओंकी संख्या ज्यादा होने के कारण रेलवे को भी यह वर्ग में ज्यादा कमाई होती है। दूसरा स्लिपर क्लास और जनरल क्लास यह वर्ग रेलवे को सामाजिक हितोंके लिए रियायती किरायोंमे चलवाना पड़ता है, याने इन वर्गोंके किराए से आने वाले उत्पन्न को फायदा नही कहा जा सकता है। रही बात किराया बढ़ाकर उत्पन्न में सुधार करने की तो स्लिपर और सेकन्ड क्लास में एखाद रुपिया भी बढ़ जाए तो हंगामा हो जाता है, वही वातानुकूलित क्लास में किराया बढ़ाने की कोई गुंजाइश अब नही रही है, यदि इस श्रेणी में किराए के दर बढ़ते है तो यात्री सड़क मार्ग या हवाई मार्ग की तरफ मुड़ जाएगा ऐसा सांख्यिकी (स्टेटिस्टिक्स) बताते है।

पिछले वर्षोंमें किराए में वृद्धि न करते हुए, उसी व्यवस्थामे किस तरह बदलाव करके आय बढ़ाई जा सकती है, इस पर रेलवे ने कुछ प्रयोग किए थे। जिसमें स्लिपर और वातानुकूलित थ्री टियर में साइड मिडल बर्थ का आविष्कार आया था, लेकिन इसे यात्रिओंने सिरे से नकार दिया, बिल्कुल ही नापंसद कर दिया। स्लिपर क्लास के डिब्बों में तो यह साइड मिडल बर्थ निकाल दिए गए किंतु वातानुकूलित थ्री टियर में अब भी गरीब रथ एक्सप्रेस में चलाए जा रहे। यह गरीब रथ की साइड मिडल बर्थ वाली व्यवस्था लम्बी रेल यात्रा में यात्रा करनेवाले सभी यात्रिओंको बेहद असुविधाजनक साबित होती है।

अब आप सोच रहे होंगे स्लिपर और जनरल क्लास का वातानुकूलित नया अवतार कैसा होगा? आइए समझाते है, LHB के स्लिपर कोच में 80 बर्थ होते है, हर कैबिन में 6 लम्बे और 2 आड़े ऐसे 8 बर्थ, 10 कैबिन याने कुल 80 बर्थ हुए। नए वातानुकूलित LHB स्लिपर में 83 बर्थस है। इन कोचेस की लम्बी बर्थस वाली 10 कैबिनोंकी रचना में बदलाव करके याने उन्हें थोड़ा थोड़ा पास कर के एक कैबिन, 11वी कैबिन और निकाली जा रही है। जिसमे 3 बर्थस और निकलेंगे साथ ही वातानुकूलित यंत्रणा का कन्ट्रोल कैबिनेट भी आ जाएगा। याने यात्री के आराम में कोई खासा खलल नही होगा, न ही कोई मिडल बर्थ रहेगा। लम्बी बर्थ की लंबाई 185 सेंटीमीटर, लगभग 73 इंच रहेगी वही साइड बर्थ की लंबाई 178.5 सेंटीमीटर, 71 इंच रहेगी और बर्थोंकी चौड़ाई 57.3 सेंटीमीटर, 22.5 इंच रहेगी। उसी प्रकार LHB सेकेंड क्लास में 10 सीट्स की 10 कैबीन्स होती है यानी 100 सीट्स की यात्री क्षमता होती है। जिसे वातानुकूलित में भी बरकरार रखा जाएगा। हमारे पास नए सुधारोंका चित्र है, जो आपके लिए प्रस्तुत है।

Courtesy: raildwar.com

यात्रिओंको इसमें फायदा यह होगा की नियमित वातानुकूलित थ्री टियर के सारे फायदे उससे और भी कम किराए में उपलब्ध हो जाएंगे। हर कोचेस में रेलवे का प्रतिनिधि मौजूद रहेगा जो यात्री की सारी एमिनिटीज याने सुखसुविधा का ख्याल रखेगा। जहां तक बेड रोल्स का सवाल है तो वैसे भी अब जब भी गाड़ियाँ नियमित रूप से शुरू की जाएगी तो किसी भी वर्ग में रेलवे बेड सेट्स उपलब्ध नही कराने वाली है।

वातानुकूलित थ्री टियर और वातानुकूलित सेकन्ड क्लास भारतीय रेल का प्रयोगात्मक प्रयास है, जिसे वातानुकूलित टूरिस्ट क्लास कहा जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रिओंकी वातानुकूलित यात्रा की पसंद को भुनाना है, जिससे रेलवे को भी इन अपग्रेडेड स्लिपर एवं सेंकेंड क्लास के किरायोंमे वृद्धि करते आएगी। यदि यह वातानुकूलित अपग्रेड स्लिपर, सेकेंड क्लास का प्रयोग सफल होता है, तो रेलवे को यात्री ट्रैफिक से भी आय मिल सकेगी जो फिलहाल केवल माल एवं पार्सल से हो रही है।

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9 जोड़ी गाड़ियाँ बन जाएंगी सुपरफास्ट

ज़ीरो बेस टाइमटेबल में 9 जोड़ी एक्सप्रेस गाड़ियोंको सुपरफास्ट बनाया जाएगा। वैसे तो सुपरफास्ट गाड़ियोंकी लिस्ट बहोत लम्बी बनेगी लेकिन फिलहाल इन गाड़ियोंकी घोषणा की गई है। सम्भव है कि सुपरफास्ट बनाए जाने पर इन गाड़ियोंके परिचालन के दिन और समयसारणी भी बदले। आइए देखते है,

1: 15563/64 जयनगर उधना जयनगर अंत्योदय एक्सप्रेस

2: 14227/28 वाराणसी लखनऊ वाराणसी द्विसाप्ताहिक वरुणा एक्सप्रेस

3: 14203/04 वाराणसी लखनऊ वाराणसी डेली एक्सप्रेस

4: 14209/10 प्रयागघाट लखनऊ प्रयागघाट डेली इंटरसिटी एक्सप्रेस

5: 19263/64 पोरबंदर दिल्ली सराय रोहिल्ला पोरबंदर द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस

6: 19317/18 इन्दौर पूरी इन्दौर हमसफ़र साप्ताहिक एक्सप्रेस

7: 19335/36 इन्दौर गांधीधाम इन्दौर साप्ताहिक एक्सप्रेस

8: 19403/04 अहमदाबाद सुल्तानपुर अहमदाबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस

9: 19025/26 सूरत अमरावती सूरत त्रीसाप्ताहिक एक्सप्रेस यह गाड़ी का उद्धाटन हुवा तब ये सवारी गाड़ी थी, फिलहाल बिना किसी समय और स्टापेजेस के बदलाव के एक्सप्रेस स्वरूप में है, और अब यह सुपरफास्ट बनने जा रही है।