भारतीय रेलवे के पर्वोत्तर सीमान्त रेलवे के इंजीनियरों ने यह कमाल कर दिखाया है। मणिपुर राज्य को देश की राजधानी से जोड़ने के लिए नई रेल लाईन निर्माण का काम जोरों पर है।
मणिपुर के तमेंगलोंग जिले के मकरु नदी के घाट पर 555.5 मीटर लंबे मेगा ब्रिज पर सभी गर्डरों को लॉन्च कर दिया गया है। जिरीबाम – तुपल – इंफाल के बीच नई ब्रॉड गेज 111 किलोमीटर लंबी रेल लाइन की राष्ट्रीय परियोजना का एक हिस्सा है। इस लाइन पर 47 सुरंगें है, एक सुरंग तो सवा दस किलोमीटर लंबी है। मकरू नदी पर के ब्रिज की विशेषता यह है, की भारतीय रेल पर 100 मीटर ऊंचा याने करीबन 33 मंज़िला बिल्डिंग होती है इतना ऊंचा घाट वाला ब्रिज पहली बार बनाया गया है।
इस ब्रिज का काम 23 अप्रैल, 2020 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिसे नार्थ फ्रंटियर रेल्वेज के कंस्ट्रुक्शन विभाग ने तैयार किया है।
मकरु ब्रिज (NFR के ट्वीट से साभार)जिरिबाम रेलवे स्टेशनइम्फाल रेलवे स्टेशन प्रस्तवित परियोजना चित्र
भारतीय रेल्वे दुनिया के सबसे बड़े परिवाहन नेटवर्क मे से एक है। दिनभर मे 19,000 गाड़ियां चलती है जिसमे 12,000 तो सिर्फ यात्री गाडियाँ होती है। ढाई करोड़ हर रोज का कुल यात्री यातायात भारत के 8000 रेल्वे स्टेशनों से गुजरता है। ऐसी स्थितिमे यह लाजमी है की स्टेशन्स की यात्री सुविधाए बढाई जाए, उन्नत की जाए। इसके लिए भारतीय रेल्वे ने एक आई आर एस डी सी (इंडियन रेल्वे स्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड ) नामक उपकम्पनी बनाई जो स्टेशन्स की सुधारणाओंपर काम करती है।
हाल मे IRSDC कंपनी चंडीगढ़, हबीबगंज ( भोपाल ), शिवाजीनगर ( पुणे ), बिजवासन और आनंदविहार ( दिल्ली ), साहिबजादा अजित सिंह नगर ( मोहाली ), सूरत और गांधीनगर ( गुजराथ ) ऐसे आठ स्टेशन्स को पुनर्निर्मित करने पर काम कर रही है। यह आठों स्टेशन आंतरराष्ट्रीय दर्जे के बनाए जाने की योजना है। पुरानी स्टेशन बिल्डिंग को सुधारना या उसके आसपास की जगह लेकर नई बिल्डिंग बनाना, यात्री सुविधाए उन्नत करना, प्लेटफॉर्म्स की लम्बाई और संख्या बढ़ाना, यात्रीओं के आवागमन के लिए सरक्युलेटींग एरिया डेवलप करना और यात्रीओं को एयरपोर्ट के भांति वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स, शॉपिंग मॉल, एंटरटेन्मेंट हब का निर्माण करना इस तरह की यह योजनाएं है।
आज हम जिस स्टेशन की बात कर रहे है वह स्टेशन है नई दिल्ली का बिजवासन स्टेशन। यह स्टेशन उत्तर रेल्वे के रेवाड़ी दिल्ली लाइन पर स्थित है और द्वारका सेक्टर मे पड़ता है। यह पर जो नए टर्मिनल स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है, नई दिल्ली, दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली सराय रोहिल्ला, और आनन्द विहार टर्मिनल ईन दिल्ली के रेल टर्मिनलोंकी आज की भिड़भरी स्थितियाँ देखते हुए कितना जरूरी है यह आपके समझ आएगा। आगे भविष्य मे, अभ्यास यह बताता है की दिल्ली की ओर आने वाले यात्रीओं की संख्या हर वर्ष लगभग 5% से बढ़ रही है, ऐसे मे महाराष्ट्र, गुजराथ, राजस्थान और देश के उत्तर पश्चिम राज्यों की ओर से आने वाली गाड़ियों के लिए एक अलगसे टर्मिनल बनाया जाना बेहद जरूरी है।
बिजवासन का नया ट्रेन टर्मिनल, इस जगह पर बनाया जाना इसलिए भी उपयुक्त है, यहाँ से इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट करीब है और राष्ट्रीय राजमार्ग क्र 8 भी पास ही से गुजरता है जो यात्रीओं को ज्यादा सुविधा प्रदान करेगा। आगे भविष्य मे दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी यहाँ आसपास की जगहों पर ISBT आंतरराज्यीय बस अड्डा, आन्तर्राष्ट्रीय अधिवेशन एवं प्रदर्शनी केंद्र, दिल्ली का दूसरा राजनियीक परिसर और एकीकृत फ्रेट कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए प्रयत्नशील है।
इस निर्धारित स्थान से इंदिरा गांधी आन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा टर्मिनल 1 – 15 km, टर्मिनल 3 – 13 km, नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन 26 km, इंडिया गेट 25 km, CBD 27 km, एम्बियन्स मॉल गुरुग्राम 9 km, एम्बियन्स मॉल वसंतकुंज 15 km, द्वारका सेक्टर मेट्रो स्टेशन 2.8 km, दिल्ली सराय रेल्वे स्टेशन 31 km पड़ता है। इस परिदृश्य मे यह समझ आता है, की यह स्थान ट्रेन टर्मिनल के लिए काफी सुविधाजनक है। ISBT आन्तरराज्यीय बस अड्डा एवं MRTS मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की उपलब्धता यहाँ पर होनेसे बिजवासन टर्मिनल एक मुख्य बहु यातायात केंद्र बन जायगा।
प्रमुख सुविधाएं :- 1: बिजवासन टर्मिनल पर से 26 डिब्बों की 14 जोड़ी याने 28 गाडियाँ छोड़ी या टर्मिनेट की जा सकेगी। 2: 26 डिब्बों की 44 गाड़ियों के रखरखाव, धुलाई की क्षमता के यार्ड और साइडिंग का निर्माण किया जायगा। किसी गाड़ी की 2000 यात्री क्षमता को देखते हुए 88,000 यात्रीओं की व्यवस्था इस टर्मिनल के निर्माण से होनेवाली है। 3: सेक्टर 21 स्टेशन की मेट्रो लाइन का आगे गुरु ग्राम स्टेशन विस्तार किया जाना है और निर्धारित isbt आंतरराज्यीय बस अड्डे के वजह से यहाँपर यात्रीओं के आवागमन की संख्या मे लक्षणीय वृद्धि होने वाली है।
दरअसल ऐसी एक मराठी मूवी आयी थी, जिसमे फ़िल्म का हीरो इस सवाल के ज़रिए अपनी बचपन की बिछड़ी दोस्त का पता लगाने की कोशिश करते हुए बताया गया है।
लॉकडाउन अवधी का लगभग महीना गुजर गया है और सब के मन मे यही सवाल है “आजकल क्या कर रहे हो?” पहले तो यह सवाल पूछे जाने का अर्थ यह था की, वह अपनी रोजी रोटी के लिए या जीवन मे किसी मंजिल को पाने के लिए कुछ न कुछ तो करता है पर वह जो कुछ कर रहा है आखिर वह है क्या? यह जानने, समझने के लिए या किसी का स्टेट्स नापने के लिए होता था। पर आज कल इस सवाल का छुपा अर्थ यह होता है, भाई, समय कैसे काट रहे हो?
दुनियाभर में इस लॉक डाउन की वजह से करीबन 80% आबादी घरोंमें बैठी है। सोशल डिस्टेनसिंग के लिए यह बेहद जरूरी भी है। केवल जरूरी सेवाएं देने विभाग, इन घरों मे बैठी करोड़ों की आबादी शान्ति और संयम के साथ सुरक्षित जी सके इसलिए अपनी जान हथेली पर रखकर देश की सेवा कर रही है। हम लोग अपने घरों मे सुरक्षित रहे इसलिए यह 20% लोग जिसमे स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानून व्यवस्था, बिजली और पानी की व्यवस्था देने वाले विभाग सजग है। हम अपनी और अपनोंकी सुरक्षा के लिए रुके रहे पर हमारा देश न रुके इसलिए हजारों ट्रांसपोर्टर्स जिसमे ट्रक ड्रायवर्स अपनी लॉरियाँ लेकर राशन,अनाज, फल, सब्जियां, दवाएं एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचा रहे है।
रेल्वे भी अपनी मालगाड़ियाँ और पार्सल विशेष गाडियाँ चलाकर इसमे महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 20 अप्रैल से कई जगहों पर सड़क निर्माण के काम शुरू किए गए है उसके लिए सीमेंट, ताप बिजली घरों के लिए कोयला, लौह कारखानों के लिए खनिज, कच्चा तेल इन हमेशा की ढुलाई के साथ साथ अनाज, दूध, सब्जी की ढुलाई भी रेल्वे अपनी अन्नपूर्णा मालगाड़ियों से कर रहा है। अत्यावश्यक सामान और दवाओं के लिए पार्सल विशेष गाडियाँ चलाई जा रही है। इन गाड़ियों के लिए लोको पायलट, गार्ड्स, स्टेशन मास्टर, परिचालन विभाग के कर्मचारी, रखरखाव कर्मी गाडियाँ चलाने के लिए जरूरी है, अपनी सेवाएं दे रहे है। हालांकि गाड़ियां पटरी पर कम होने से इन लोगों के ड्यूटी साइकल काफी कम है। लोको पायलट और गार्ड्स को 4 – 6 दिन मे एक बार ड्यूटी कॉल आ रही है।
हर कोई जो अत्यावश्यक सेवाओं मे है, अपना काम मुस्तैदी से कर रहा है। जिनके पास इसके बाद भी खाली समय बच रहा है तो कोई जरूरतमंदों की मदत कर रहा है तो कोई राशन, खाना पहुंचा रहा है, और नहीं कुछ तो बैठे बैठे मास्क ही बना रहे है, और जहां लोगों के पास मास्क नहीं है उन्हें ले जा कर दे रहे है। रेल्वे का आईआरसीटीसी खानपान विभाग कई जरुरतमन्द लोगों को पैक खाना और पीने का पानी उपलब्ध करा रहा है।
वह आजकल क्या कर रहे है यह तो आपके समझ मे आ ही गया होगा, आप बताए आप आजकल क्या कर रहे हो?
3 मई को लॉक डाउन – 2 की अवधि खत्म होने जा रही है। ऐसे मे सभी के मन मे यह जानने की उत्कंठा हो रही है, क्या लॉक डाउन आगे जारी रहेगा या इसमे अंशत: छूट का दायरा बढ़ेगा, सबसे बड़ा सवाल, रेल्वे की यात्री सेवाएं शुरू की जाएगी? और यदि हुई तो किस तरह, क्योंकी हर किसी को अब सोशल डिस्टेनसींग का अटूट महत्व समझ मे आ गया है।
कई सारी खबरें, लेख इस विषय पर बन रहे है और रोज नितनई बातें पढ़ने मे आ रही है। रेल्वे प्रशासन ने इस लॉक डाउन की अवधि मे करीबन 20,000 पुराने स्लिपर क्लास के कोचेस जो LHB डिब्बों के चलते रेलवे की साइडिंग पे पड़े थे, उनकी मिडल बर्थ निकालकर, उन्हे आइसोलेशन कोच के लिए तैयार किया है। याने रेग्युलर कैबिन में दो दो अपर, मिडल और लोअर ऐसे 6 बर्थ की जगह अपर और लोअर ऐसी 4 बर्थ की कैबिन बनी है। अब इन संक्रमण की हालातों मे रेल्वे के वातानुकूलित डिब्बे सेंट्रल एयर कंडीशनिंग होने की वजह से यात्रा के लिए उपयुक्त नहीं माने जा रहे। आगामी रेल यात्रा के लिए यही आइसोलेशन वाले कोचेस लगा कर गाडियाँ चलाने की सम्भावनाओं पर चर्चे चल रहे है।
अब फ़ैक्ट समझने की कोशिश करते है। यह पुराने स्लिपर कोच 72 बर्थ क्षमता के होते है। हर कैबिनसे 2 बर्थ हटा दिये जाते है तो हर डिब्बे की 9 कैबिन मे से कुल 18 बर्थ निकाल कर 54 बर्थस रह जायेंगे। हम यह समझकर चलते है, की सोशल डिस्टेनसिंग को आधार रखकर गाड़ियाँ केवल इन्ही स्लिपर डिब्बों के साथ चलायी जाएगी। यह तो हो गई आसन व्यवस्था अब गाड़ियोंकी स्थिति देखते है। दुरांतों, राजधानी, और इन्ही तरह की प्रीमियम गाडियाँ छोड़ दें तो रेल्वे की लगभग 60 से लेकर 70 % गाडियाँ हर 50 किलोमीटर चलने के बाद स्टेशनोंपर रुकती है। उपनगरीय याने लोकल गाडियाँ और सवारी गाड़ियोंकी तो फिलहाल हम बात ही नही कर रहे है।
कई सारे मेल एक्सप्रेस रुकने वाले स्टेशन्स ऐसे है जहाँपर अभी भी पूर्णतया: अनावश्यक प्रवेश के लिए प्रतिबंध नहीं है या यूँ कहिए कोई भी व्यक्ति स्टेशन एरिया मे, प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी बंधन के, रुकावट के आ जा सकता है। गाड़ियाँ अब तक भी स्टेशनों के बाहर सिग्नल के इन्तजार मे खड़ी हो जाती है। ऐसी स्थिति मे गाड़ीमे कोई भी अवांछनीय व्यक्ती प्रवेश कर सकती है या गाडीसे उतर सकती है। गाड़ी मे अभी भी प्रतीक्षासूची के आरक्षण बुकिंग पर कड़े नियम नहीं है। अभी तक PRS याने काउंटर से छपा प्रतीक्षासूची वाला टिकट, यात्री बिना रद्द किए गाड़ी मे यात्रा करते पाया जाता है। क्या सोशल डिस्टेनसिंग की इन स्थितियों मे हम आरक्षण के इन नियमोमे सुधार होता या कोई प्रशासनिक कारवाई होती देख सकते है?
यदि गाडियाँ चलाने का निर्णय लिया जाता है तो सबसे पहले रेल प्रशासन को अपने कुछ नियम और कायदे सुधारने होंगे और उनपर कड़ाई से अमल भी करना होगा। सारे स्टेशन्स या शुरुवात में मुख्य स्टेशन्स केवल परिचयपत्र और उचित अनुमतिपत्र के साथ ही प्रवेश के लिए प्रतिबंधित किए जाए। अनुमतिपत्र पर व्यक्ति स्टेशन के कौनसे एरिया में जाने के लिए पात्र है उसकी जानकारी लिखी जानी चाहिए। जैसे की स्टेशन का आहाता, आरक्षण कार्यालय, टिकटघर, प्लेटफॉर्म्स, गाड़ी का डिब्बा आदि। आगे सबसे महत्वपूर्ण गाड़ी मे आरक्षण किए जाने वाले प्रत्येक यात्री के पास यात्रा करने के उचित कारण हो और किसी भी राजपत्रित अधिकारी का साक्ष्यंकित अनुमतिपत्र हो तभी यात्री को आरक्षण और प्रवेश दिया जाए।
1: रेल प्रशासन को चाहिए की अपनी किसी भी रेग्युलर गाड़ी चलाने के बजाय विशेष गाड़ियों को चलाना होगा। ताकी उनका अलग से टाइम टेबल, अलगसे गाड़ी की संरचना, अलग सुरक्षात्मक दृष्टिकोण रखते हुए मेडिकल जाँच करने वाला स्टाफ और सैनिटेशन किया जा सके ऐसी समुचित व्यवस्था हो इन्ही स्टेशनों पर स्टोपेज दिए जा सके। ऐसी गाड़ियोंके किराए भी अलग दर से याने तत्काल / प्रिमियम तत्काल रेट्स से लिए जा सकते है और यात्री किरायोंमे दी जाने वाली रियायत भी अपनेआप रद्द हो जाएगी।
2: स्टेशन पर गाड़ी मे प्रवेश दिए जाने के लिए हवाई अड्डे पर के सारे मानक अपनाए जाए। गाड़ी मे यात्री चढ़ने के बाद डिब्बे के दरवाजे लॉक होने की सुविधाए हो या मैन्युअली लॉक किए जाए और स्टोपेज आने के उपरांत गाड़ी प्लेटफ़ॉर्म पर पहुंचे तब ही खोले जाए। इसमे भी पूरी गाड़ी यात्री प्रतिबंधित वेस्टिबुल हो याने सभी डिब्बे एक दूसरे से जुड़े हो लेकिन कर्मचारियों के लिए ही एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे में जाने की अनुमति हो, केवल एक ही डिब्बे याने गाड़ी के आखिरी डिब्बे से सारे यात्रीओंका का प्रवेश और एक ही, सबसे पहले डिब्बे से निकास हो।
3: गाड़ी के हर डिब्बे मे एक सुरक्षा कर्मी और एक टीटीई जिनके पास गाड़ी के गार्ड और लोको पायलट से सीधी संपर्क व्यवस्था हो। गाड़ी “अलार्म चेन पुलिंग सिस्टम” के बजाय केवल रेल्वे के नुमाइन्दे से निवेदन किए जाने पर ही रोकी जा सके ऐसा नियम बने।
4: गाड़ी में प्रवेश किए जाने वाले यात्री का सामान स्कैन किया गया है ऐसा प्रमाणपत्र आवश्यक किया जाना चाहिए। बिना प्रमाणपत्र के यात्री को गाड़ी में प्रवेश की अनुमति नही रहेगी।
इतने बन्धनोंके उपरान्त ही रेल गाड़ियाँ चलाए जाना ठीक रह सकता है।