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आई आर सी टी सी क्या है।

IRCTC याने इंडियन रेल्वेज कैटरिंग एन्ड टूरिजम कॉर्पोरेशन

IRCTC वो बला है जो पत्थर को शिशेसे तोड़ती है। अब आप कहेंगे, छोड़िए ज़नाब। क्या फिल्मी डायलॉग मार रहे है। हाँ दोस्त, डायलॉग तो नीरा फिल्मी है, लेकिन बात है सच। जो जो काम करना भारतीय रेल अपना कर्तव्य, सेवा, फर्ज समझती है, वही काम करने के लिए यह कम्पनी कमर्शियल तरीकेसे कर यात्रिओंसे सर्विस चार्ज वसूलती है। हाँ जी, लेकिन है तो भारतीय रेल का ही बच्चा यानी अंग यानी उपकम्पनी।

शुरू से शुरू करते है। आपने रेल्वेमें कभी न कभी यात्रा तो की होगी? यात्रा करने के लिए टिकट भी खरीदा होगा। भारतीय रेल अपने PRS (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम) काउन्टर पर आरक्षण टिकट बिना किसी सेवा शुल्क के साथ देता है वहीं इसके लिए IRCTC करीबन ₹15/- और ₹30/- तक चार्ज करता है। जबकी काउन्टर पर यात्री को छपा टिकट भी मिलता है। आपको राज की बात बताते है, खैर यह बात राज तो रही नही बल्कि तमाम प्रतिक्षासूची के यात्रियों में लोकप्रिय हो गई है की PRS काउन्टर की प्रतिक्षासूची टिकट कन्फ़र्म ना भी हो तो ई – टिकट की तरह रद्द नही होती, और थ्री टायर स्लिपर में साईड बाय साईड यात्रा भी कर लो।

रेलवे प्लेटफार्म पर पहूंचो तो यात्रिओंके लिए जगह जगह पर पीने के ठंडे पानी की निशुल्क व्यवस्था याने वॉटर कूलर वगैरह लगी रहती है तो IRCTC की तरफ से बोतल बन्द पानी की व्यवस्था है जो ₹15/- प्रति लीटर से उपलब्ध रहता है या वॉटर वेंडिंग मशीन्स लगी होती है जो कुछ दाम लेकर आपको पानी पिलाती है।

यात्रिओंके लिए रेलवे की ओरसे प्लेटफॉर्म्स पर अधिकृत यात्रिओंके लिए प्रतीक्षालय होते है, जिसके लिए कोई शुल्क नही देना पड़ता, वहीं IRCTC के आलीशान लॉन्ज बनाए जा रहे जिसमे कुछ शुल्क चुकाकर यात्री अपनी गाड़ी का इंतज़ार कर सकता है। यह लॉन्ज सुपर लक्झरी होते है लेकिन अलग से दाम चुकाकर ही यात्री इसका मज़ा ले पाता है।

प्लेटफॉर्म्स पर रेलवे के उपहारगृह में रेलवे के निर्धारित दरोंपर यात्रिओंको चाय, कॉफी, नाश्ता, खाना मिलता है, वहीं IRCTC के उपहारगृह जो की किसी चेन होटल, कम्पनी द्वारा संचालित होते है, कुछ विशेष रेट्स पर खानपान की चीजें मिलती है। जी, जी किसी सर्वसाधारण होटल और पॉश, फर्निश्ड होटल्स के रेट्स में जो फर्क होता है बस वैसे ही।

अब तो IRCTC की संचालित प्राइवेट यात्री गाड़ियाँ भी चलने लगी है। इन गाड़ियोंके और भारतीय रेलवे की खुद की गाड़ियोंके टिकट दरोंमें काफी अंतर है। जी माना सर्विसेज में भी अंतर है, लेकिन रेट्स में तो अंतर है ही। हाँ भारतीय रेल पर इन IRCTC की गाड़ियोंको टॉप प्रायोरिटी दी जाती है। इन सबके अलावा IRCTC भारतीय रेलवे पर पर्यटन गाड़ियाँ, पैकेज टूर भी चलाती है।

अब आपको IRCTC कम्पनी के बारे में कुछ कुछ समझ आ रहा होगा। यह भारतीय रेलवे का कमाऊ और लाडला पूत है। भारतीय रेलवे के ई – टिकिटिंग ऑपरेशन करने वाली एकमात्र कम्पनी जिसे अब PRS काउंटर्स भी सौंपे जाने की सम्भावनाए है, भारतीय रेलवे के खानपान विभाग में पेंट्री कार, प्लेटफॉर्म्स पर स्टॉलोंका आबंटन का कमर्शियल पार्ट सम्भालने वाली कम्पनी, प्लेटफॉर्म्स पर लॉन्ज और रिटायरिंग रूम्स की बुकिंग और देखभाल करनेवाली कम्पनी, लाखों रेल यात्रिओंको रोज बोतलबन्द पानी उपलब्ध करानेवाली कम्पनी और अपने कार्यक्षेत्र में बिना किसी या कहीं कहीं मामुली प्रतिस्पर्धी के कामकाज करने वाली प्योर कमर्शियल कम्पनी है।

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होली विशेष गाड़ियाँ

गांधीधाम भागलपुर स्पेशल – एक फेरा

अहमदाबाद पटना स्पेशल – एक फेरा

हज़रत निजामुद्दीन पुणे स्पेशल – दो फेरे

अजमेर भोपाल स्पेशल – एक फेरा

मध्य रेलवे की लोकमान्य तिलक टर्मिनस पटना, मऊ, वाराणसी और पुणे से दानापुर, बल्हारशहा स्पेशल गाड़ियाँ। नागपुर से पुणे और लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्पेशल।

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खण्डवा – आकोट – अकोला गेज कन्वर्शन समझेंगे मैप के जरिए।

खण्डवा – आकोट – अकोला गेज कन्वर्शन, नागपुर – छिंदवाड़ा, गोंदिया – जबलपुर गेज कन्वर्शन और पुणे – मिरज – कोल्हापुर दोहरीकरण यह सारे प्रोजेक्ट समझने के लिए मैप्स काफी सहायता करते है। आज हमने हमारे पाठकोंके लिए प्रोजेक्ट मैप प्रस्तुत किए है।

खण्डवा मथेला लूप

इस मैप में देख सकते है, किस तरह इटारसी की ओरसे आनेवाली कोल गुड्स गाड़ियाँ बिना खण्डवा आए सनावद के रास्ते मुड़ जाएगी। मथेला से निमाड़खेड़ी अंतर 58km का है। यह पूरी मथेला – निमाड़खेड़ी – खरगोन लाइन NTPC पॉवर प्लान्ट के लिए बनाई गई है। इस लाइन का उपयोग यात्री यातायात के लिए खण्डवा – मथेला – सनावद ऐसा करना हो तो खण्डवा से मथेला जो की मात्र 7km है वहाँपर लोको की दिशा बदलना होगा और तभी गाड़ी सनावद की ओर बढ़ेगी या फिर MEMU चलाई जा सकती है तो लोको की शंटिंग की जगह लोको पायलट, गार्ड अपनी कैबिन बदलेंगे और गाड़ी आगे बढ़ेगी। आपको याद दिला दे निमड़खेड़ी – सनावद गेज कन्वर्शन अपने पूर्णत्व की ओर है।

भुसावल – खण्डवा – ओम्कारेश्वर रोड़, खण्डवा – रतनपुर – आकोट – अकोला

उपरोक्त मैप में पूरा त्रिकोण भुसावल – खण्डवा – अकोला दिखाई देता है। जिसमे खण्डवा से रतनपुर और आकोट से अकोला लाइन का गेज कन्वर्शन जारी है ऐसे मालूम होता है। अंबेडकर नगर महू से बलवाड़ा गेज कन्वर्शन प्रोजेक्ट वन जमीनोंके कारण कितना घूम के जा रहा है।

नागपुर – छिंदवाड़ा गेज कन्वर्शन

नागपुर – छिंदवाड़ा

नागपुर से भिमालगोंदी और छिंदवाड़ा से भण्डारकुण्ड गेज कन्वर्शन हो चुका है, दोनों ओरसे गाड़ियाँ भी चल रही है। बस भिमालगोंदी से भण्डारकुण्ड का CRS सुरक्षा निरीक्षण होना बाकी है। जो शायद मार्च में हो जाएगा। यह निरीक्षण होने के बाद नागपुर – छिंदवाड़ा सीधी गाड़ियोंका शुरू कराने का मार्ग खुल जाएगा। मैप में गोंदिया – जबलपुर गेज कन्वर्शन की स्थिति भी देख सकते है। इस मार्ग का भी छोटासा समनापुर – नैनपुर के बीच का सेक्शन बाकी रह गया है। इस मार्ग की जल्द ही शुरू किए जाने की सम्भावना है।

पुणे – मिरज – कोल्हापुर दोहरीकरण

पुणे – मिरज दोहरीकरण

इस मैप में आप पुणे – मिरज दोहरीकरण देख सकते है। विशेष ध्यान दौंड – बारामती इकहरी लाइन, लोनन्द – फलटण लाइन और फलटण बारामती प्रपोज्ड लाइन के मैप पे दीजिएगा। यह लाइन पुणे बाईपास करके सीधे मिरज के लिए निकल के जा रही है। साथही कोंकण रेलवे का स्टेशन सावंतवाड़ी से कोल्हापुर प्रपोज्ड लिंक प्रोजेक्ट भी दिखाई दे रहा है।

साभार : सभी मैप इंडियारेलइंफो के सौजन्य से

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हज़रत निजामुद्दीन – पलवल, उत्तर रेलवे का चौथी रेल लाइन के लिए फरीदाबाद में रेल ब्लॉक।

उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में प्रि नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के लिए हज़रत निजामुद्दीन – पलवल मार्ग पर फरीदाबाद स्टेशन पर रेल ब्लॉक लिया जा रहा है। फरीदाबाद स्टेशनपर चौथी रेल लाइन का यह तकनीकी कार्य है। यह ब्लॉक 02 मार्च तक चलना है।

यह बात निश्चित है, हज़रत निजामुद्दीन – पलवल मार्ग पर ब्लॉक लिया जाना याने बहोत सारी गाड़ियोंके शेड्यूल का अस्तव्यस्त होना। मित्रों, काफी लंबी लिस्ट है, यदि आपको इस मार्ग पर रेल यात्रा करनी हो तो निम्नलिखित परिपत्रक को ध्यानसे देख ले। आने वाले 02 मार्च तक कई गाड़ियाँ रद्द / आँशिंक रद्द / परावर्तित या रेग्युलेट रहेंगी।

उपरोक्त खबर अपने सभी मित्रों और रिश्तेदारों को भी दें, ताकी किसी को रेल यात्रा में परेशानी न हो।

उत्तर रेलवे द्वारा जारी परिपत्रक – हिंदी में

उत्तर रेलवे द्वारा जारी परिपत्रक – अंग्रेजी में

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प्रतिक्षासूची के यात्रिओंसे रेलवे ने कमाए 9000 करोड़।

कोटा के सुजीत स्वामी ने माहिती अधिकार ( right to information act ) के तहत रेलवे से रद्द किए जानेवाले टिकीटोंकी जानकारी मंगाई। रेलवे ने जानकारी देते हुए यह बताया की जनवरी 2017 से लेकर जनवरी 2020 तक गत तीन वर्षोंमें रेलवे ने प्रतिक्षासूची के यात्रिओंसे करीबन 9000 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है। साढ़े नौ सौ करोड़ लोगोंने अपने प्रतिक्षासूची के PRS वाले टिकट रद्द नही करवाए जिससे 4335 करोड़ रुपए और 4684 करोड़ रुपए, यात्रिओंके टिकट ऑनलाईन थे जो अपने आप रद्द हो गए उससे रेलवे ने यह कमाई की है।

इन दोनों टिकट लेने के तरीके में करीबन 75% टिकट स्लिपर क्लास के थे, दूसरा क्रमांक थ्री टायर AC का है। वही रद्दीकरण में 90% प्रतिक्षासूची के टिकट एक क्लास के थे। इन तीन वर्षोंमें 145 करोड़ ऑनलाइन टिकट तो 74 करोड़ टिकट PRS से आबंटित किए गए। *जाहिर सी बात है, जो 74 करोड़ प्रतिक्षासूची वाले टिकट PRS से जारी हुए है, उनमें से शायद ही 5-10 प्रतिशत टिकट रद्द किए होंगे और जो भी PRS टिकट रद्द किए गए होंगे उसमे भी करीबन 90% टिकट AC क्लास के होंगे।

क्या रेल प्रशासन इन आँकड़ोंसे कुछ संज्ञान लेगी? यह सारे प्रतिक्षासूची, स्लीपरों वाले टिकटधारी अनाधिकृत यात्री अपने टिकट लिए अधिकृत यात्रिओंके साथ, स्लिपर डब्बोंमे घुस कर यात्रा करते रहते है। जो एक सुरक्षित यात्रा के हिसाब से न सिर्फ यात्रिओंके लिए बल्कि रेल परिचालन के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकता है।

किसी 80 यात्री की क्षमता के डिब्बे में 150-200 यात्री यात्रा करते है और वही जनरल सेकन्ड क्लास में 100 यात्री की क्षमता वाले डिब्बे में 300 से 400 लोग यात्रा करते है। यहाँ तक कि एमिनिटीज, मेंटेनेंस, सिक्युरिटी और चेकिंग स्टाफ़ भी अपना काम नही कर पाता।

यह कैसी हालात बना रख्खी है रेल प्रशासन ने भारतीय रेलोंकी? क्यों नही बन्द किए जाते प्रतिक्षासूची के टिकट? 700 – 800 प्रतिक्षासूची के टिकट जारी करने में कैसा लॉजिक है? रेल प्रशासन को इसका जवाब देना होगा।