22 नवम्बर 2024, शुक्रवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2081
रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) द्वारा आयोजित परीक्षा उम्मीदवारों के लिए मध्य रेल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई और नागपुर के बीच 10 विशेष गाड़ियाँ चलाई जाएंगी।
विवरण निम्नलिखित हैः
01103 आरआरबी विशेष 23.11.2024 से 27.11.2024 तक प्रतिदिन दोपहर 15.30 को मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से प्रस्थान करेगी और अगले दिन सुबह 10.50 को नागपुर पहुंचेगी (कुल 5 फेरे) वापसी में 01104 आरआरबी विशेष दिनांक 24.11.2024 से 28.11.2024 तक प्रतिदिन, दोपहर 13.30 बजे नागपुर से प्रस्थान करेगी और अगले दिन प्रातः 04.10 बजे मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचेगी (5 फेरे)
19 नवम्बर 2024, मंगलवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, विक्रम संवत 2081
भारतीय रेल में यात्रा टिकट आरक्षण को लेकर बहुत जद्दोजहद है। पहली बात यह की जब चाहों, जिस तिथि और गाड़ी में चाहों आरक्षण मिल जाए यह लॉटरी लगने जैसा पल होता है। मगर कई बार परिस्थितियाँ विपरीत रहती है और जिस यात्री का कन्फर्म टिकट बन चुका है, उसकी जगह किसी अन्य पारिवारिक सदस्य को यात्रा पर भेजना पड़ता है। इन परिस्थितियों में भारतीय रेल में ‘चेंज ऑफ पैसेंजर’ अर्थात अन्य यात्री यह पर्याय उपलब्ध है। आइए देखते है इसकी नियमावली और प्रक्रिया किस तरह है।
आरक्षित यात्री परिवर्तन के लिए सबसे पहले केवल आरक्षित यात्री का ही परिवर्तन किया जा सकेगा। प्रतिक्षासूची यात्री के परिवर्तन को अनुमति नही है। गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से छूटने के समय से, कमसे कम चौबीस घण्टे पहले तक यात्री परिवर्तन की अर्जी की जा सकेगी। यात्री परिवर्तन केवल परिवार के अंतर्गत ही किया जा सकता है। इस परिवार का अर्थ माता, पिता, भाई, बहन, पुत्र, पुत्री तक सीमित है। चाचा, बुआ, मामा, मौसी, बहु, जवाई, सास, ससुर इनमें परिवर्तन नही किया जाता है।
आरक्षित यात्री द्वारा निकटतम रेलवे स्टेशन जहाँ कम्प्यूटराइज्ड रिजर्वेशन सेंटर (संगणकीकृत आरक्षण केंद्र ) हो, स्टेशन मैनेजर के नामे आवेदन पत्र देना होगा। इसमे आरक्षित यात्री का पहचान पत्र (आई डी), जिस व्यक्ति के नाम पर परावर्तित करना है, उसका पहचान पत्र, दोनों व्यक्ति एक परिवार से है, इस बात का प्रमाण (जैसे की राशन कार्ड), आरक्षित टिकट की प्रतिलिपि (यदि ई-टिकट निकाला गया हो तो उसके पीडीएफ फाइल की प्रिन्ट) यह सारे कागज़ात जोड़े जाए। हाँ, उन सारे संलग्न कागजात के ओरिजिनल्स आपके साथ होना आवश्यक है।
उपरोक्त कागज़ात का सेट स्थानीय स्टेशन मैनेजर के पास देना होगा। वह उसे अधिस्वीकृत कर मुख्य आरक्षण अधिकारी (CRS) को उक्त PNR में बदलाव करने की अनुमति देंगे और इस प्रकार स्थानीय आरक्षण कार्यालय में जाकर ‘चेन्ज ऑफ पैसेंजर’ की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। आरक्षण कार्यालय के अधिक्षक, यदि यात्री का आरक्षित टिकट PRS याने छपा टिकट होगा तो उसी टिकट पर बदलाव किया गया ऐसे लिखकर, हस्ताक्षर और मुहर लगा दी जाएगी और ई-टिकट होगा तो PDF प्रिन्ट पर परिवर्तन किया गया यह लिख दिया जाएगा।
हालाँकि जितना सरल यह काम दिखाया जाता है, सभी सरकारी कामकाज के भाँति, यह काम भी उतने सरलतापूर्वक रेल कर्मचारी होने नही देते। यदि किसी मण्डल मुख्यालय स्टेशन पर आप यह काम करवा रहे है, तो बजाय स्टेशन मैनेजर कार्यालय आपको मण्डल वाणिज्य अधिकारी DCM से अधिस्वीकृति लानी होंगी, और बहुत सहज है, की महज दस मिनट के काम के लिए आपको चार घण्टे या पूरा का पूरा दिन लग जाए और आप यह ठान ले की इससे बेहतर होता आप अपना कन्फर्म टिकट रद्द करवा लेते और दोबारा नया टिकट बनवा लेते।
दरअसल किसी एक ही परिवार में टिकट परिवर्तन करना है तो रेल विभाग उसे ऑनलाइन पद्धति से भी पूर्ण कर सकती है। यह ठीक अभी अभी शुरू की गई दिव्यांगजन के रियायती पास की तरह ही कागज़ात अपलोड करने से लिया जा सकता है। इससे यात्री को बहुत सुविधा होगी और रेल विभाग के कर्मचारियों के नियमित कार्यकलापों में भी अवांछित, अकस्मात काम की बाधा टाली जा सकेगी।
मण्डल मुख्यालय से कुछ इस तरह का अनुमति पत्र जारी किया जाता है, जिसे आरक्षण कार्यालय में जाकर यात्री परीवर्तन किया जाता है।
16 नवम्बर 2024, शनिवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2081
भारतीय रेल विभाग ने रेलवे रियायत के लिए दिव्यांगजन आईडी कार्ड के लिए ऑनलाइन पोर्टल दिनांक-13.11.2024 से शुरू कर दिया गया है
दिव्यांगजन (दिव्यांग व्यक्ति) के लिए रेलवे रियायत आईडी कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए एक नए ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की घोषणा करते हुए हमें खुशी हो रही है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना और रेलवे रियायत योजना के तहत दिव्यांगजनों को मिलने वाले लाभों तक आसान पहुँच सुनिश्चित करना है।
नया पोर्टल उपयोगकर्ता के अनुकूल इंटरफेस प्रदान करेगा, जिससे आवेदक अपने विवरण प्रस्तुत कर सकेंगे, आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे और अपने घर बैठे अपने आईडी कार्ड आवेदन की स्थिति को ट्रैक कर सकेंगे। यह पहल विकलांग व्यक्तियों को सुलभता बढ़ाने और सहायता प्रदान करने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वे भारतीय रेलवे में रियायती किराए पर सुविधाजनक यात्रा कर सकें।
ऑनलाइन पोर्टल की मुख्य विशेषताएं:
आसान पंजीकरण: आवेदक पंजीकरण बना सकते हैं और आवश्यक विवरण ऑनलाइन भर सकते हैं।
वास्तविक समय स्थिति अपडेट: हर चरण पर अपने आवेदन की प्रगति को ट्रैक करें।
24/7 पहुंच: किसी भी समय आवेदन करें और अपना आवेदन प्रबंधित करें।
15 नवम्बर 2024, शुक्रवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा, विक्रम संवत 2081
दपुमरे SECR रेल क्षेत्र में रेल तिहरीकरण हेतु नौरोजाबाद स्टेशन पर करीबन दस दिनोंके रेल ब्लॉक के चलते निम्नलिखित 18 मेल/एक्सप्रेस एवं 6 सवारी विशेष गाड़ियोंके फेरे 22 नवम्बर 2024 से 02 दिसम्बर 2024 तक रद्द किए जा रहे है।
साथ ही 15231/32 बरौनी गोंदिया बरौनी प्रतिदिन एक्सप्रेस JCO दिनांक 23 से 29 नवम्बर 2024 तक अपने नियमित मार्ग बरौनी, कटनी, उसलापुर गोंदिया की जगह बरौनी, कटनी, जबलपुर, नैनपुर, बालाघाट गोंदिया होकर चलाई जाएगी।
13 नवम्बर 2024, बुधवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2081
प्राप्त जानकारियोंके अनुसार रेल विभाग अब यात्री किरायोंके सुधार पर लगनेवाले राजकीय अडंगोंपर गम्भीरता से विचार कर रहा है। फ़िलहाल रेल विभाग अपने प्रत्येक टिकट पर ‘छप्पन प्रतिशत रियायती किरायोंका’ दुखड़ा छापता है।
संक्रमण काल के बाद रेल प्रशासन ने विद्यार्थियों, मरीजों और दिव्यांग व्यक्तियों को दी जानेवाली किरायों की छूट को छोड़ बाकी सभी तरह की किराया रियायत कड़ाई के साथ बन्द कर दी है। रेल की सबसे सस्ती, सवारी गाड़ियोंके किरायोंमे भी बड़ा उलट फेर किया गया था। सब सवारी गाड़ियोंके गाड़ी क्रमांक में ‘0’ टैग लगाकर उन्हें विशेष गाड़ियोंकी श्रेणी में रखकर मेल/एक्सप्रेस के किराए में चलाने का एक असफल प्रयोग भी किया गया मगर राजनीतिक दबाव के चलते उन में से कई गाड़ियाँ फिर सवारी रूप और किरायोंमे लौटाई गई। कुछ नियमित मेल/एक्सप्रेस श्रेणियों में रखने में रेल विभाग सफल रहा।
अब एक और प्रयोग की ओर रेल विभाग बढ़ रहा है। रेल विभाग की तमाम कम अन्तर में चलनेवाली गाड़ियाँ, उपनगरीय रेल, करीबन 200 किलोमीटर के भीतर चलनेवाली डेमू/मेमू गाड़ियाँ जो फिलहाल सवारी श्रेणियों में चल रही है, उन्हें राज्य सरकारों के हवाले करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। यही गाड़ियाँ रेल विभाग को खल रही है और हमेशा रेल बजट में निगेटिव उत्पन्न के पाले में रहती है। एक सोच के अनुसार उपरोक्त गाड़ियोंके परिचालन को अपने पास रख सारे वाणिज्यिक कार्य राज्य सरकार के हवाले किए जाएंगे। कुछ राज्य में राज्य सरकारें अपना परिवहन चलाती है अतः इस तरह की कार्यवाही से वह अवगत है। इन गाड़ियोंके किराए, स्टोपेजेस और फेरे का निर्धारण राज्य सरकार कर सकेगी। उससे मिलने वाली वाणिज्यिक और ग़ैरवाणिज्यिक आय भी वहीं अर्जित करेंगी। रेल विभाग उनसे ऑपरेटिंग शुल्क लिया करेंगी।
इस तरह की कार्यवाही में यात्रिओंके पाले में क्या पड़नेवाला है, यह समझने का प्रयत्न करते है। सबसे पहले किराए स्थानीय परिवहनों के स्तर पर अर्थात दुगुने, तिगुने बढ़ सकते है। रेल परिचालन में पहले ही इन गाड़ियोंको (उपनगरीय छोड़कर) दुय्यम प्राथमिकता थी, इस निर्णय के बाद और भी स्तर गिर सकता है। स्थानीय राजनयिकों की दखलंदाजी बढ़ सकती है। यह यात्रिओंके होनेवाले नुकसान की बातें है मगर कुछ बातें यात्री हित की भी हो सकती है। गाड़ियोंके फेरे, समयसारणी और स्टोपेजेस के निर्णय, स्थानीय जरूरतोंके अनुसार तीव्र गति से लिए जाएंगे। हालाँकि अन्तिम निर्णय रेल विभाग ही लेगा चूँकि रेल संसाधन वहीं के वहीं है, राज्य सरकारों की गाड़ियाँ कोई अलग पटरी या अलग स्टेशन, प्लेटफॉर्म पर थोड़े ही जानी है?
एक विचार यह भी है, जिस तरह रेल मंत्रालय ने भारतीय रेल के संसाधन के तत्त्वों पर गठित नौ क्षेत्रीय कार्यालयोंको राज्यवार तत्व पर पुनर्रचना कर सोलह किया उससे आए दिन किसी न किसी क्षेत्र से अपना अलग मण्डल या अलग क्षेत्रीय कार्यालय बनाने की मांग उठने लगी है। अखण्ड भारतीय रेल इस निर्णय से राज्य रेल की श्रेणी की ओर जाने लगी है। यदि स्थानिय राज्य सरकारों को रेल विभाग अपने वाणिज्यिक काम बाँट देती है तो इसका और कितना बुरा असर रेल के केन्द्रीय परिचालन एवं प्रबंधन पर पड़ेगा यह सोचने की बात रहेगी।
कुल मिलाकर रेल विभाग किराया बढ़ाने का ठीकरा राज्य सरकारों पर मढ़ने की कवायद करने की सोच रहा है। यात्री किरायोंके जरिए ज्यादा उत्पन्न का घी सीधी उंगली से निकालना सम्भव नही हो पा रहा इसलिए राज्य प्रशासन को बीचमे लाकर उंगली टेढ़ी की जाने की सोच है।