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तौबा करें इन विशेष गाड़ियोंसे..

12 नवम्बर 2024, मंगलवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल त्यौहारों, छुट्टियों में अमूमन सभी व्यस्त रेल मार्गोंपर यात्रिओंकी भीड़ देखते हुए विशेष गाड़ियोंका संचालन करती है। रेल प्रशासन के नियमानुसार सभी विशेष यात्री गाड़ियोंमे अतिरिक्त किराया दर लागू रहता है। यह अतिरिक्त किराया दर तत्काल रेट से लेकर किलोमीटर रिस्ट्रिक्शन्स तक हो सकता है। किलोमीटर रिस्ट्रक्शन्स मतलब कम अन्तर के यात्री को भी निर्धारित अन्तर का किराया देना होगा। गौरतलब यह है, विशेष गाड़ियोंके द्वितीय साधारण वर्ग की टिकिटोंमें केवल सुपरफास्ट सरचार्ज के अलावा अतिरिक्त किरायोंका ज्यादातर दबाव नही होता।

अब मज़े की बात बताऊँ, यह विशेष गाड़ियाँ रेल विभाग के नियमित परिचालन में अतिरिक्त ही रहती है और इनकी प्राथमिकता न के बराबर रहती है। समझने की बात यह है, इनकी समयसारणी के हिसाब में यह गाड़ियाँ भले ही इनके प्रारम्भिक स्टेशन से चल दे मगर मार्ग में कहाँ और कितना रोकी जाएगी, गन्तव्य तक कब पहुँचेंगी इस पर मार्ग पर परिचालनिक दबाव कितना है इस पर निर्भर है। युँ समझिए, आपकी विशेष गाड़ी में भले ही सुपरफास्ट का टैग लगा हो, मार्ग की नियमित सवारी गाड़ी, मालगाड़ी भी उस पर भारी है। उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, विशेष गाड़ी को नही।

आजकल तो इन विशेष गाड़ियोंका परिचालन इस कदर बेपरवाह हुवा है, की उसे गंतव्य स्टेशन पर उसके रैक को लौटने के समयपर ही लिया जाता है, ताकि गन्तव्य टर्मिनल स्टेशनोंपर उस विशेष गाड़ी को ज्यादा खड़ा न करना पड़े। उदाहरण के तौर पर 01924 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी से हड़पसर सुपरफास्ट विशेष को लीजिए, यह गाड़ी झाँसी से शनिवार शाम 19:40 को निकलकर अगले दिन रविवार शाम 16:30 को हड़पसर पहुंचना निर्धारित थी और 01923 हड़पसर झाँसी रविवार शाम 19:30 को हड़पसर से रवाना होनी थी। तो 01924 को हड़पसर में स्विकार ही लगभग शाम आठ बजे करते है और वहीं से रैक पलटाकर 01923 बनाकर रवाना कर दिया जाता है। हम यहाँपर केवल एक उदाहरण दे रहे है मगर, कोई भी विशेष गाड़ी के परिचालनिक रिकॉर्ड को खंगालकर देख लीजिए, यह परिचालनिक पद्धति तमाम विशेष गाड़ियोंमे रेल प्रशासन अपना रहा है।

रेल विभाग इन विशेष गाड़ियोंके समयपालन पर बिलकुल भी गम्भीर नही है। जब यह गाड़ियाँ मार्ग में अपनी समयसारणी से परे हो जाती है तो लगातार पिछड़ते चली जाती है और एक ऐसे दुष्टचक्र में फँसती चली जाती है की इनकी परिचालन देरी अपने निर्धारित समयसारणी से दो-तीन दिन अर्थात 48 से 72 घण्टे देरी से भी चलते दिखाई देती है। रेल विभाग इन गाड़ियोंकी इतनी बेइंतहा देरी के बावजूद, गाड़ी के रैक को अपने डिपो में वापिस भेजना, यात्रिओंकी बुकिंग कायम रहना यह इसे चलाते रखने की मजबूरी है।

अब यात्रिओंकी परेशानी समझिए। जब यात्री अपनी टिकट बुकिंग हेतु वेबसाइट खंगालता है तो उसे नियमित गाड़ियोंके साथ यह अतिरिक्त किराया वाली विशेष गाड़ियाँ भी दिखाई देती है। इनकी समयसारणी और कम स्टोपेजेस की सूची भी उसे ललचाती है, की वह इसमे बुकिंग कर सकता है। मगर जो भुक्तभोगी यात्री इस मायाजाल से गुजर चुके है, विशेष गाड़ियोंके सुगम (?) परिचालन को भुगत चुके है, इससे से तौबा ही करते है। इन गाड़ियोंमे पेंट्रीकार नही रहती। साफसफाई के लिए कर्मचारी दल मौजूद नही रहने से कोच में गंदगी रहती है। नियमित टिकट जाँच दल नही रहता। पहले तो बेडरोल भी भी उपलब्ध नही कराए जाते थे, जिसे अब सुधारा गया है, वातानुकूलित यानों में बेडरोल उपलब्ध कराए जा रहे है। जिस यात्री को गन्तव्य स्टेशन पर निर्धारित समयपर पहुँचना है, तो वह इन विशेष गाड़ियोंकी समयसारणी पर कतई विश्वास न करें या एखाद दिन का मार्जिन बचाकर अपनी टिकट बनवाए।

हम रेल प्रशासन से अनुरोध करते है, विशेष गाड़ियोंकी समयसारणी इसी प्रकार से बनवाए जिस प्रकार वह चलाई जाती है। टर्मिनल स्टेशन पर जब वह यथार्थ में पहुंचाई जाती है, वह समय उसकी समयसारणी में डाला जाए तो हर्ज ही क्या है? कमसे कम यात्री के साथ धोखा तो नही होगा। इन गाड़ियोंको व्यर्थ ही सुपरफास्ट विशेष ऐसे विशेषणों से दूर रखा जाए। कई यात्री इन विशेष गाड़ियोंके अनियमित परिचालन के अभ्यस्त हो चुके है और जो भी यात्री पहली बार इनके मायाजाल में फँसता है, दोबारा कतई इन गाड़ियोंमे यात्रा नही करता। विशेष गाड़ियोंके परिचालन को निर्धारित समयसारणी के अनुसार चलाया जाए अन्यथा यात्री इन गाड़ियोंमें बुकिंग करने से तौबा करते नज़र आएंगे।

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हुब्बाली – भगत की कोठी के बीच त्यौहार विशेष गाड़ी के 3-3 फेरे

09 नवम्बर 2024, शनिवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल में फिलहाल त्यौहार विशेष गाड़ियोंकी धूम चल रही है। खासकर उत्तरप्रदेश, बिहार के लिए अमूमन सभी महानगरों के लिए हररोज गाड़ियाँ उपलब्ध कराई जा रही है। इसी बीच इक्कादुक्का विशेष गाड़ी कोई नए मार्ग पर निकाली जाती है तो उसकी जानकारी यात्रिओंके लिए आवश्यक बन जाती है। हुब्बाली – भगत की कोठी के बीच निम्नलिखित त्यौहार विशेष के 3 -3 फेरे चलाए जा रहे है, जिसका विवरण निम्नप्रकार से है,

07311/12 हुब्बाली – भगत की कोठी (जोधपुर) हुब्बाली त्यौहार विशेष एक्सप्रेस वाया मिरज, पुणे, वसई रोड, अहमदाबाद, अबू रोड

चलने की अवधि :-

हुब्बाली से रवाना होने की तिथि 12.11.24, 19.11.24 और 26.11.24 = (3 फेरे)

भगत की कोठी से रवाना होने की तिथि :- 14.11.24, 21.11.24 और 28.11.24 = (3फेरे)

कोच संरचना : वातानुकूलित टू टियर 02, वातानुकूलित थ्री टियर 12, स्लिपर 05, जनरेटर कम लगेज वैन 02 कुल 21 LHB कोच

स्टोपेजेस : हुब्बाली, धारवाड़, लौंडा, बेलागावी, घाटप्रभा, मिरज, सांगली, कराड़, सातारा, पुणे, लोनावला, कल्याण, वसई रोड, वापी, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, मेहसाणा, पालनपुर, अबू रोड, पिंडवाड़ा, जवाईबंध, फालना, मारवाड़ जंक्शन, पाली मारवाड़, लूणी, भगत की कोठी

समयसारणी :

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रेल प्रशासन फिर एक बार ‘छुपी किराया वृद्धि’ की ओट में..

07 नवम्बर 2024, गुरुवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल में पिछली किराया वृद्धि करीबन दस वर्ष पहले हुई थी। उसके बाद आज 2024 तक कोई भी सीधी रेल किराया वृद्धि नही की गई है। यह बात और है, रेल प्रशासन किराया तालिका के अलावा अन्य तरीकोंसे अतिरिक्त किराया बढ़ा ही देती है। जिसमे किराया तालिका वहीं के वहीं मगर किराए ज्यादा लागू होते है।

यह अन्य तरीके से किराया वृद्धि में उनके लिए सबसे सरल प्रक्रिया साधारण मेल/एक्सप्रेस की श्रेणी को बदल कर उसे सुपरफास्ट में बदलना या सवारी गाड़ी को एक्सप्रेस में बदलना। गौरतलब यह है, आजतक जितनी भी सवारी गाड़ियाँ एक्सप्रेस में बदली गई, उन में स्टोपेजेस उतने ही रहने के कारण एक्सप्रेस की ‘फिल’ कभी आई ही नही है।

01 जनवरी 2025 से नई समयसारणी दाखिल होने जा रही है और सुना जा रहा है, उस मे साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट एवं सवारी से मेल/एक्सप्रेस में बदलने वाली गाड़ियोंकी लम्बी सूची है। 11077/78 पुणे जम्मूतवी पुणे झेलम एक्सप्रेस, 11057/58 मुम्बई अमृतसर मुम्बई पठानकोट एक्सप्रेस, 15066/65 पनवेल गोरखपुर पनवेल, 11407/08 पुणे लखनऊ पुणे साप्ताहिक, 11079/80 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक, 18237/38 कोरबा अमृतसर बिलासपुर छत्तीसगढ़, 11703/04 रीवा डॉ आंबेडकर नगर रीवा त्रिसाप्ताहिक इत्यादि सुपरफास्ट गाड़ियाँ बनने की सूची में नामजद है।

साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट बनाए जानेपर इन गाड़ियोंमे साधारण श्रेणी के किरायोंमें ₹15/-, स्लिपर क्लास में ₹30/-, वातानुकूलित थ्री टियर, वातानुकूलित टू टियर, वातानुकूलित चेयर कर में ₹45/- और वातानुकूलित प्रथम में ₹75/- प्रति सवारी सीधे जुड़ जाएंगे। लम्बी दूरी के सवारियों को अनुपात में यह वृद्धि कोई ज्यादा मायने नही रखेगी मगर कम अंतर के यात्रिओंको यह अतिरिक्त किराया और वह भी किसी अलग अनुभव अर्थात एक्सप्रेस से सुपरफास्ट में यात्रा करना बहुत खलेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, भारतीय रेल का सुपरफास्ट श्रेणी का मानदंड। मात्र 55 kmph औसत से अपनी यात्रा पूर्ण करनेवाली गाड़ी सुपरफास्ट श्रेणी में ली जा सकती है। उपरोक्त दर्शाई गई गाड़ियाँ औसत 50 से 54kmph गति से अपनी यात्रा पूर्ण कर रही है। जो भी अतिरिक्त परिचालन समय दिया गया है, उसमे मामूली फेरफार किया जाए तो यह गाड़ियाँ सुपरफास्ट के मानदंड में सम्मिलित की जा सकेगी। जहाँ रेल विभाग अपने ट्रैकों की गतिसीमाएँ 130, 160 kmph कर रही है, गाड़ियोंके रैक उनके अनुकूल याने LHB युक्त किए जा रहे है और सवारी गाड़ियोंसे लेकर अमूमन सभी यात्री गाड़ियाँ 100, 130 की गति से दौड़ रही है। ऐसी अवस्था में रेल विभाग चाहे तो सुपरफास्ट का मानदंड ऊँचा कर सकती है।

एक तरफ रेल विभाग अपनी आय से जूझ रहा है और दूसरी ओर रेल यात्री किराया बढ़ाने के निर्णय को राजनीति आगे जाने नही देती। दूसरी तरफ उच्च श्रेणियों के किरायोंपर हवाई मार्ग के किरायोंका भी दबाव रहता है। हालात यह है, सुपरफास्ट चार्ज, विशेष गाड़ियोंमे अतिरिक्त किराए, सवारी गाड़ियोंका मेल/एक्सप्रेस में बदलना, आवश्यक डेमू/मेमू, इंटरसिटी गाड़ियोंके जगह महंगी प्रीमियम गाड़ियोंकी लॉन्चिंग यह सब एक तरह से किरायोंमें वॄद्धि के ही संकेत है। तत्काल, प्रीमियम तत्काल, किसी न किसी तरीके से यात्रिओंको वैसे भी अतिरिक्त किराया भुगतान करना पड़ता है। आम यात्री अब इस तरह तैयार हो चुका है, की उसे कमसे कम दस प्रतिशत किराया ज्यादा चुकाना पड़ सकें बशर्ते राजनीति न आड़ी आए।

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भारतीय रेल ला रहा नया इंटीग्रेटेड टिकट बुकिंग ऍप

04 नवम्बर 2024, सोमवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2081

आईआरसीटीसी नहीं इस ऐप से बुक‍ होगा ट्रेन का ट‍िकट! द‍िसंबर से बदल जाएगा रेलवे का पूरा स‍िस्‍टम

रेलवे की तरफ से अगले महीने नया ऐप पेश क‍िये जाने की उम्‍मीद है. इस ऐप के शुरू होने के बाद यात्र‍ियों को अलग- अलग सुव‍िधाएं एक ही प्‍लेटफॉर्म पर म‍िल जाएंगी, इससे सफर करने वालों को काफी सहूल‍ियत होगी.

Indian Railways New Super App: भारतीय रेलवे का दुन‍िया में चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है. रोजाना चलने वाली हजारों ट्रेनों से लाखों लोग अपने गंतव्‍य तक पहुंचते हैं. अगर आप भी ट्रेनों के जर‍िये सफर करते हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, रेलवे की तरफ से दिसंबर के अंत तक एक सुपर ऐप लॉन्च करने का प्‍लान क‍िया जा रहा है. इस एक ही ऐप के जर‍िये टिकट बुकिंग, खाने की डिलीवरी और ट्रेन का स्‍टेटस चेक क‍िया जा सकता है. इन सभी सुव‍िधाओं के एक ही प्‍लेटफॉर्म पर म‍िलने से यात्र‍ियों को काफी सहूल‍ियत होगी.

नए ऐप को आईआरसीटीसी से जोड़ा जाएगा
नया ऐप यात्रियों के लिए बहुत काम का होगा. इसे सीआरआईएस (CRIS) ने तैयार क‍िया है और टिकट बुकिंग वेबसाइट आईआरसीटीसी (IRCTC) के साथ जोड़ा गया है. इस ऐप के शुरू होने के बाद ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्र‍ियों को बहुत सी सुविधाएं मिलेंगी और रेलवे को भी इससे फायदा होगा. आपको बता दें सीआरआईएस एक संस्था है, जो रेलवे के लिए तकनीकी काम करती है.

इसके अलावा आईआरसीटीसी के ऐप औश्र वेबसाइट के जर‍िये अभी ट‍िकट की ऑनलाइन बुक‍िंग की जाती है. नए ऐप के जर‍िये रेलवे का प्‍लान सभी चीजों को स‍िस्‍टेमेट‍िंग करना और आमदनी बढ़ाना है.

कई कामों को लेकर हो जाएगा आसानी

रेलवे की तरफ से जल्‍द पेश क‍िये जाने वाले सुपर ऐप से टिकट बुकिंग से लेकर और भी कई काम आसानी से हो जाएंगे. इकोनॉम‍िक टाइम्‍स में प्रकाश‍ित खबर के अनुसार इस ऐप के द‍िसंबर के अंत तक शुरू होने की उम्‍मीद है. एक अधिकारी ने बताया आईआरसीटीसी सीआरआईएस और ट्रेन के टिकट लेने वाले यात्रियों के बीच इंटरफेस के रूप में काम करना जारी रखेगा. प्‍लान्‍ड तरीके से सुपर ऐप और आईआरसीटीसी के बीच इंटीग्रेशन का काम चल रहा है.

अभी इन ऐप को यूज करते हैं रेलवे यात्री

अधिकारी ने बताया कि नए ऐप में कई सुविधाएं जैसे यात्री टिकट-प्लेटफॉर्म टिकट बुक करना और ट्रेन का स्‍टेटस चेक करना आद‍ि होंगी. रेलवे यात्रियों को अभी अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइट्स जैसे आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट (ट्रेन टिकट बुकिंग, बदलाव, और रद्द करने के लिए), आईआरसीटीसी ई-कैटरिंग फूड ऑन ट्रैक (ट्रेन में सीट पर खाना मंगाने के लिए), रेल मदद (शिकायत और सुझाव के लिए), यूटीएस (बिना सीट के टिकट बुक करने के लिए) और नेशनल ट्रेन इंक्‍वायरी सिस्टम (ट्रेन की स्थिति जानने के लिए) आद‍ि का यूज करना होता है.

10 करोड़ से ज्‍यादा बार डाउनलोड हुआ IRCTC का ऐप

अभी आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट रेल यात्रियों के बीच सबसे लोकप्रिय ऐप है, इसे 10 करोड़ से ज्‍यादा यूजर्स ने डाउनलोड कर रखा है. अभी यह रिजर्व्ड ट्रेन टिकट बुक करने का बेस्‍ट प्लेटफॉर्म है. अधिकारी ने बताया क‍ि आईआरसीटीसी सुपर ऐप को कमाई का नया जरिया मानता है. यद‍ि आप अपना ट्रेन टिकट क‍िसी प्राइवेट कंपनी के जर‍िये बुक कराते हैं तो भी वो कंपनी बुक‍िंग के ल‍िये आईआरसीटीसी का ही इस्तेमाल करती है.

पिछले साल आईआरसीटीसी ने 4,270 करोड़ रुपये कमाए और उसमें से 1,111 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. इस कमाई का 30% हिस्सा सिर्फ टिकट बुक करने से आया.

यूटीएस ऐप को एक करोड़ से ज्‍यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. यह ऐप मुख्य रूप से प्लेटफॉर्म टिकट और सीजन पास खरीदने के लिए इस्तेमाल होता है. सीआरआईएस (CRIS) रेलवे के कई अहम कामों के लिए सॉफ्टवेयर बनाता है और उसका रख-रखाव करता है.

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दुर्भाग्यपूर्ण हादसा : बान्द्रा टर्मिनल स्टेशन पर यात्रिओंकी भगदड़; नौ यात्री घायल, दो गम्भीर

27 अक्टूबर 2024, रविवार, कार्तिक, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

दिनांक 27 अक्टूबर 2024, समय सुबह 2:45, बान्द्रा टर्मिनस रेलवे स्टेशन। 22921 बान्द्रा टर्मिनस गोरखपुर अंत्योदय (सभी अनारक्षित कोच) साप्ताहिक एक्सप्रेस अपने निर्धारित प्रस्थान समय 5:10 को रवाना होने के लिए सिद्ध हो रही थी। गाड़ी का खाली रैक, प्लेटफार्म क्रमांक एक पर लगने के लिए रेलवे यार्ड से निकलकर बस प्लेटफार्म पर बैक हो ही रहा था की हजारों यात्रिओंकी भीड़ जो बीती रात से गाड़ी में सवार होने की प्रतीक्षा कर रही थी, उमड़ पड़ी। गाड़ी के सभी दरवाजे, खिड़कियाँ बन्द अवस्था मे थे। मगर यात्रिओंकी भीड़ गाड़ी में चढ़ने के लिए बेताब थी। धक्कमपेल में कई यात्री प्लेटफार्म पर, पटरी पर गिर पड़े। खबर है, नौ यात्री इस भगदड़ में घायल हुए है, जिनमे दो की हालत गम्भीर है।

यह उधना रेलवे स्टेशन का दृश्य है। अमूमन त्यौहारों, छुट्टियों के दौरान महानगरों के सभी रेलवे टर्मिनल स्टेशन इसी तरह यात्री भीड़ से पटे रहते है।

मित्रों, कोई भी हादसे लापरवाही की वजह से होते है। दिवाली, छट पूजा की भीड़ रेलवे स्टेशनों, यातायात व्यवस्था में समा नही पा रही है। रेल प्रशासन ने कई अतिरिक्त गाड़ियोंका नियोजन किया है, उनको व्यापक प्रसिद्धि भी दी गई है। फिरभी रेल यात्री नियमित गाड़ियोंमे यात्रा करना ज्यादा पसन्द करते है। त्यौहारों, छुट्टियों में रेल यातायात पर इस तरह की भीड़ होना स्वाभाविक है, प्रति वर्ष होती है। रेल प्रशासन इस बात के लिए कोई अग्रिम तैयारी या सुरक्षा के दृष्टिकोण से नियोजन क्यों नही कर पाती, यह एक गम्भीर प्रश्न है।

रेल प्रशासन किस तरह ऐसी आपदाओं से, हादसोंसे यात्रिओंको बचा सकता है, आइए समझते है,

रेल प्रशासन अपनी विशेष गाड़ियोंका नियोजन तकरीबन 30 से 45 दिनों पहले कर लेता है और उनके परिचालन की घोषणा भी कर देता है। सभी विशेष गाड़ियाँ अतिरिक्त किराया दर से चलाई जाती है। इन गाड़ियोंमे वातानुकूलित, ग़ैरवातानुकूलित, आरक्षित, अनारक्षित सभी तरह के यात्री कोचेस रहते है। अंत्योदय या जनसाधारण वर्ग की तरह सम्पूर्ण अनारक्षित विशेष गाड़ियाँ भी इन बेड़ों में चलाई जाती है। ज्ञात रहें, यह हादसा भी अनारक्षित गाड़ी, अंत्योदय एक्सप्रेस पर ही हुवा है। दरअसल यह अनारक्षित गाड़ियोंमे यात्री भीड़ का कुछ भी पूर्वानुमान नही निकाला जा सकता, बस यह समझ कर चलें की इसमे इतनी यात्री क्षमता है और इतने यात्री ही सवार होंगे। इधर विशेष गाड़ियोंमें अतिरिक्त किराए और अनियमित परिचालन की वजह से यात्री उसे प्राधान्य नही देते और नियमित गाड़ियोंका रुख करते है।

रेल प्रशासन को चाहिए, संक्रमण काल के दौरान जिस तरह सभी अनारक्षित वर्गों को बिना किसी अतिरिक्त किराया लिए, मात्र पंधरह रुपए आरक्षित शुल्क लगाकर यात्रिओंके आसनोंको सुनिश्चित किया था उसी तरह सभी विशेष गाड़ियोंमे एक सप्ताह पूर्व आरक्षण शुरू कर यात्रिओंकी व्यवस्था करना चाहिए।

रेलवे प्लेटफार्म पर केवल आरक्षित यात्री का ही प्रवेश सुनिश्चित करना चाहिए और भीड़ के दौरान प्लेटफार्म टिकट का आबंटन बन्द किया जाना चाहिए।

रेल प्रशासन अपनी पूर्वघोषित विशेष गाड़ियोंके अलावा भी अतिरिक्त गाड़ियोंकी घोषणा करता है। यदि विशेष गाड़ियोंको अग्रिम बुकिंग कर चलाया गया तो रेल प्रशासन को भी यात्री माँग का अंदाजा आएगा और उस प्रकार नियोजन करते आएगा।

यह सभी त्यौहार, छुट्टी विशेष गाड़ियाँ लगभग एकतरफा अत्याधिक भीड़ और दूसरी तरफा बिल्कुल खाली अवस्था मे चलती है। रेल विभाग चाहे तो खाली अवस्था मे लौटती गाड़ियोंको मार्ग में अतिरिक्त ठहराव या नियमित गाड़ियोंकी प्रतिक्षासूची से लिंक कर नियमित गाड़ियोंकी भीड़ का नियोजन कर सकती है।

यह अत्यंत आवश्यक है की सभी विशेष गाड़ियाँ अपनी समयसारणी अनुसार चलाई जाए, ताकि यात्री उन्हें नियमित गाड़ियोंमें जगह उपलब्ध न होनेपर अपनी यात्रा के लिए चुने।

विशेष गाड़ियाँ चलाने के लिए नियमित टर्मिनल स्टेशन की जगह, वह स्टेशन से होकर गुजरें ऐसे स्टेशनोंसे या उससे निकटतम स्टेशन से चलाया जाना चाहिए। इससे नियमित टर्मिनल स्टेशनोंपर यात्री भीड़ का दबाव कम होने में मदद मिलेगी।

थोड़ी यात्रिओंमें अनुशासन की भी कमी है, यह बात निश्चित है मगर अग्रिम आरक्षण से इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। रेल प्रशासन उचित नियोजन हेतु,  भीड़ भरे अवसरों पर सभी नियमित अनारक्षित गाड़ियों और नियमित मेल/एक्सप्रेस के अनारक्षित कोच में भी केवल अग्रिम आरक्षण की पाबंदी ला सकता है।