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RRB – NTPC परीक्षा विशेष एक फेरा गाड़ियाँ

रेल दुनिया की https://wp.me/pajx4R-3dC इस पोस्ट में लगभग देशभर की सारी RRB-NTPC परीक्षा विशेष गाड़ियाँ अपडेट की गई है। परिक्षार्थीयोंसे निवेदन है, कृपया पोस्ट देखें और अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

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RRB – NTPC, रेल्वे की परीक्षा हेतु विशेष रेलगाड़ियों की जानकारी

प्रिय मित्रों, रेल प्रशासन मे रेल्वे भर्ती परीक्षाओं के लिए 65 विशेष गाड़ियोंका नियोजन किया है। हमने प्रयत्नपूर्वक ज्यादा से ज्यादा गाड़ियोंकी जानकारी यहाँपर संकलित करने का प्रयत्न किया है और हम अपने परीक्षार्थी मित्रों से निवेदन करते है, यज्ञपि हमारी सारी जानकारी रेल्वे के परिपत्रकों से ही ली गई है परंतु और भी अतिरिक्त गाड़ियोंकी विस्तृत जानकारी हेतु रेल्वे की हेल्पलाइन 139 या ऐप NTES पर गाडियाँ अवश्य ही जांच ले।

48 गाड़ियोंमे अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे

अपडेट्स

RRB – NTPC के SC/ST उम्मीदवारोको अपनी सीट/बर्थ अपने परिक्षापत्र के साथ आयी ऑथोरिटी पर आरक्षण करने की अनुमति मिली है।

04001/02 हज़रत निजामुद्दीन जबलपुर हज़रत निजामुद्दीन परीक्षा विशेष

03505/06 गया हावड़ा गया परीक्षा विशेष और 05215/16 समस्तीपुर कोलकाता समस्तीपुर परीक्षा विशेष

07683/84 काकीनाडा टाउन पाण्डवपुरा काकीनाडा टाउन परीक्षा विशेष और 07450/51 हैदराबाद मैसुरु हैदराबाद परीक्षा विशेष

02190/89 जबलपुर नान्देड़ जबलपुर परीक्षा विशेष

02194/93 रीवा राजकोट रीवा परीक्षा विशेष

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प रे WR के मुम्बई – सूरत मुख्य मार्ग पर एकदिवसीय यातायात और पावर ब्लॉक ; यात्री ट्रैफिक निम्नानुसार नियंत्रित किया जाएगा।

रविवार 08 – 05 – 22 को सुबह 06.30 से दोपहर 14.30 तक प्रमुख यातायात और पावर ब्लॉक घोषित किया जा रहा है। यह ब्लॉक डाउन मेन लाइन और अप मेन लाइन पर वाणगांव – डहानू रोड के दरम्यान रहेगा। इन ब्लॉकों के दौरान कुछ ट्रेनों को विनियमित, रद्द, शॉर्ट टर्मिनेट/आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा, विस्तृत विवरण निम्नानुसार है।

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‘ट्रेन्स ऑन डिमाण्ड’ अर्थात मांग के आधार पर गाड़ियोंकी उपलब्धि

निम्नलिखित गाड़ियोंकी सूची देख लीजिए फिर आगे इस TOD के ज्वलंत मुद्दे पर चर्चा करते है,

06044/43 कोचुवेली तंबाराम कोचुवेली एक फेरा विशेष

02190/89 जबलपुर नांदेड जबलपुर एक फेरा विशेष

03023/24 हावड़ा पटना हावड़ा एक फेरा विशेष

03175/76 सियालदाह गौहाटी सियालदाह एक फेरा विशेष

03401/02 भागलपुर दरभंगा भागलपुर एक फेरा विशेष

उपरोक्त गाडियाँ रेल्वे की भर्ती परीक्षा हेतु चलाई जा रही है। इन गाड़ियोंके परिपत्रक मे आप जो TOD मार्क देख रहे है वह है ‘ट्रेन ऑन डिमाण्ड’ यह वह तरकीब है जो बीते वर्ष रेल सीईओ वी के यादव ले आए थे। धारणा यह थी, जिन गाड़ियों मे यात्रीओंकी प्रतीक्षा सूची लंबी खींच जाए उन गाड़ियोंकी क्लोन, प्रतिकृति गाड़ी चलाई जाए ताकि मुख्य गाड़ी का प्रतीक्षा सूची यात्री भार के लिए एक अतिरिक्त गाड़ी तुरंत ही हाजिर रहेगी और यात्रीओंकी परेशानी थोड़ी कम होगी। हालांकि यादव जी के समय यह क्लोन ट्रेन हुवा करती थी, जैसे ही अधिकारी बदले नाम भी बदल गया और अब यह गाडियाँ TOD कहलाने लगी है।

यह TOD गाडियाँ यात्रीओंकी मांग अत्यधिक रहने से एक फेरा तत्व पर चलाई जाती है। वैसे तो हमारे देश मे कहीं से कहीं के लिए ट्रेन चलवा दें, यात्री भार की कौनों कमी नाही। पहले जो जो गाडियाँ हॉलिडे स्पेशल, एग्जाम स्पेशल, मेला – सत्संग स्पेशल इत्यादि चलती थी वह सारी विशेष गाडियाँ इस TOD श्रेणी मे लाई गई है। इसकी विशेषता यह है, यह गाडियाँ 1.3 किराया दर से चलाई जाती है, परिचालन के एक दिन यहाँतक की महज कुछ घंटों पहले घोषित की जाती है, केवल एक फेरा गाड़ी होती है। अब आप कहोगे विशेषताएं बता रहे हो या बुराइयाँ गिनवा रहे हो? जी, हकीकत तो यही है। जिनकी एग्जाम होगी या किसी शादी ब्याह मे जाना होगा, क्या वह यात्री निकलने के आखरी वक्त तक रेल्वे द्वारा की जाने वाली विशेष गाड़ी के जादुई घोषणा की प्रतीक्षा करता रहेगा? जादुई इसलिए की कोई भरोसा ही नहीं की कौन सी गाड़ी चलाई जाएगी और उसका मार्ग, समयसारणी क्या होगी? अत: यह जितनी भी एकल फेरा गाडियाँ अब तक घोषित की गई है, बिल्कुल ही बिल्कुल खाली ही चली है।

दरअसल कुछ वर्षों पहले, यह क्लोन, ट्रेन ऑन डिमाण्ड और 1.3 वाले किराये इत्यादि घोषणाओं के पहले, सभी क्षेत्रीय रेल्वे फरवरी महीने तक अपनी गर्मी विशेष गाड़ियोंकी घोषणा कर देती थी और यात्री बाकायदा 2 – 2 महीने पहले अपना आरक्षण भी कर लेते थे, जो बिल्कुल योग्य और सुविधाजनक था मगर पता नहीं रेल प्रशासन ने क्या सोची और वह पद्धति बंद हो गई या नियंत्रित कर दी गई और यह इन्स्टेन्ट वाली गाड़ियोंका आविष्कार किया गया। एकतरफ मुम्बई की ओर से उत्तरी भारत के लिए हर आधे-एक घण्टे से हर रोज लगातार पूरे सप्ताह के लिए भी गाडियाँ चले तो भी उन्हे यात्री भार की कमी न होगी मगर इन यात्रीओंके लिए रेल प्रशासन के पास कोई नियोजन नहीं है। सप्ताह मे 2-3 दिन एखाद गाड़ी चलाने से यात्रीओंका समाधान नहीं होता है और ना ही सब्र। वह तो बिना आरक्षण, बिना टिकट और बिना जगह गाड़ी के दरवाजे मे लटकता या टॉयलेट के बगल मे, पैसेज मे खडा होकर अपने गाँव निकल जाता है।

यह बात कतई नहीं की यात्री पैसे बचाना चाहता है, चूंकि उसे टिकट नहीं मिलती, आरक्षण नहीं मिलता यहाँ तक की अगले दिन कोई गाड़ी होगी यह भरोसा भी नहीं मिलता तो वह खुद की जान की परवाह न करते हुए किसी तरह सामने खड़ी गाड़ी मे यात्रा करने मजबूर हो जाता है। यह वहीं यात्री है जो संक्रमण काल के दौरान गाड़ियोंके अभाव मे पैदल ही अपने गाँव निकल पड़ा था। तब प्रशासन ने आनन-फानन मे कई श्रमिक गाडियाँ चलवाई और इन लोगों को गाडियाँ उपलब्ध करवाई गई। लेकिन आज भी यह यात्री ऐसे ही बैचेन हो जाते है, इनके लिए अभी भी रेल प्रशासन पूर्व नियोजन नहीं करती है और यह लोग उसी प्रकार गाड़ियों मे बेहद करुण अवस्था मे यात्रा करते हुए अपने गाँव पहुंचते है। यह हकीकत है, आप किसी भी स्टेशन पर मुम्बई की ओरसे उत्तर भारत मे वाराणसी या बिहार मे पटना की ओर जाने वाली गाड़ियोंमे देख सकते हो, और हम प्रशासन से भी पूरी विनम्रता के साथ निवेदन करते है की आप भी देखिए और इनके लिए कुछ तो पूर्व और यथोचित नियोजन कीजिए। अभी जून के पहले सप्ताह से यही यात्री उलटी दिशामे अर्थात मुम्बई, पुणे, गुजरात की ओर वापसी यात्रा शुरू करेंगे। इन्हे इंस्टेंट वाली गाड़ियोंकी की जगह सप्ताह, दो सप्ताह पहले घोषणा कर गाडियाँ उपलब्ध करवाएं।

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रेल में नया ट्रेन्ड चल निकला है, सीधे गाड़ी में बैठो। साधारण टिकट मिलती नही, आरक्षण उपलब्ध नही, मजबूर यात्री क्या करें?

गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी है, शादी ब्याह का मौसम है और यही वक्त है की मुम्बई, पुणे से उत्तरी, उत्तर पूर्वी भारत की गाड़ियाँ भर भर कर चलती है।

सामान्यतः आम यात्री अपने गाँव जाने के लिए 8-15 दिन पहले गाड़ियोंमे आरक्षण देखता है, वह उसे ‘रिग्रेट’ ‘नो रुम’ इस तरह दिखाई देता है। मध्य रेलवे में लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे साधारण श्रेणी (जनरल क्लास) टिकट अभी उपलब्ध नही है। जून, जुलाई में शुरू होंगे ऐसी खबर है। इस हालत में मजबूर यात्री क्या कर रहा है, उसके गाँव जानेवाला जिस गाड़ी में आरक्षित टिकट ले कर चल रहा है, उसके साथ वह गाड़ी में सवार हो जाता है। उसे यह बात पर पक्का भरोसा है, की उसे न ही उतारा जाएगा ना ही कोई कानूनी कार्रवाई होगी, ज्यादा से ज्यादा बिना टिकट के लिए दण्डित किया जाएगा वह भी उसका किसी टिकट चेकिंग स्टाफ से पाला पड़ा तो अन्यथा यात्रा ऐसे ही बिना टिकट ही पूरी हो जाएगी।

आप उपरोक्त तस्वीर, आरक्षित स्लीपर क्लास की देख रहे है। यह किस गाड़ी की, कौन से दिन की यह बताने की कोई आवश्यकता नही क्यों की यह तस्वीर हमारे भारतीय रेल की तमाम यात्री आरक्षण की सु(?)व्यवस्थाओं की उड़ी हुई धज्जियोंको उजागर करने वाली प्रतिनिधिक तस्वीरें है। भारतीय रेल के प्रत्येक क्षेत्र, प्रत्येक मण्डल के अधिकारी इस दुर्व्यवस्था से भलीभाँति परिचित है और इस समस्या से निपटने का कोई भी हल या निदान यह करना नही चाहते। किसी भी यात्री गाड़ी की एवरेज यात्रा अवधी 24 से 48 घंटे की होती है और हम भारतीय यात्री ‘एडजस्टमेन्ट’ टॉलरेन्स अर्थात समायोजन और सहिष्णुता के मामले मे सर्वोच्च पुरस्कार के अधिकारी होंगे इतने योग्य अवश्य ही है। थोड़ा बहुत थोड़ा बहुत करते करते 80 यात्री क्षमता के स्लीपर क्लास में 200 यात्री हम चला लेते है। किसी भूले भटके की शिकायत आ भी गयी तो उसे यूँ ही थोड़ी देर के लिए जगह कर दी जाती है, आगे वहीं ‘ढाक के तीन पांत’

फिलहाल यह भीड़ का रेला मुम्बई, पुणे, सूरत, अहमदाबाद की ओर से उत्तर भारत की ओर जा रहा है और साधारणतः जून के शुरवात से यह स्थिति उल्टी होगी, तब मुम्बई, अहमदाबाद, पुणे की ओर गाड़ियाँ भर भर चलेंगी। दूसरी समस्या कोयला गाड़ियोंकी है। देशभर की ताप विद्युत गृह को कोयले की जरूरत को देखते हुए यात्री गाड़ियाँ बन्द कर मालगाड़ियोंको चलाना पड़ रहा है। ऐसी बिकट स्थिति में, रेल प्रशासन, ज्यादा विशेष गाड़ियाँ कहाँ से चला पाएगी?

रेल प्रशासन को चाहिए की जिस मार्ग पर कोयले की मालगाड़ियोंका दबाव न हो उस मार्ग से अतिरिक्त गाड़ियोंके चलाने का प्रबंधन करें। यात्रिओंके लिए जनसाधारण, अंत्योदय विशेष गाड़ियाँ जिनमे आरक्षण कराने की आवश्यकता नही, उन्हें गोदान, पवन, कुशीनगर जैसी लोकप्रिय गाड़ियोंके आगे-पीछे क्लोन ट्रेन भांति चलवाये। रेल प्रशासन चाहे तो इस प्रकार की गाड़ियोंमे 2S आरक्षण बुकिंग भी शुरू कर सकती है, जिससे यात्रिओंकी यात्रा नियोजित हो सकती है।

रेल अधिकारी स्टेशनोंपर आकर यह सुनियोजित कर सकते है, की कौनसे गन्तव्योंके लिए यात्रिओंकी ज्यादा मांग है और उस प्रकार अतिरिक्त गाड़ियोंका नियोजन करें। यह हर गर्मी के नौसम की स्थिति रहती है, मगर न ही रेल प्रशासन, न ही उनके उच्च अधिकारी इस यात्री समस्या का निराकरण करने का कष्ट उठाते है।

लेख में उधृत तस्वीरे twitter.com से साभार