07332 हुबली सोलापुर विशेष सवारी दिनांक 17 से 23 मार्च तक रदद् रहेगी। वापसीमे 07331 सोलापुर हुबली विशेष सवारी दिनांक 19 से 25 मार्च तक रदद् रहेंगी।
07322/21 धारवाड़ सोलापुर धारवाड़ विशेष सवारी दिनांक 18 से 24 मार्च तक रदद् रहेगी।
07329 हुबली विजयपुरा इण्टरसिटी विशेष एक्सप्रेस दिनांक 15 से 23 मार्च तक रदद् रहेंगी। वापसीमे 07330 विजयपुरा हुबली इण्टरसिटी विशेष एक्सप्रेस दिनांक 16 से 24 मार्च तक रदद् रहेगी।
NFR पूर्वोत्तर सीमान्त रेल ने अपनी 91 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंकी सूची और उनमें अनारक्षित टिकटोंके जारी किए जाने की तिथियाँ सूचित कर दी है। गौरतलब यह देख सकते है, लगभग सभी तिथियाँ जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई के प्रथम सप्ताह की है।
रेल प्रशासन के निर्देश के बाद से 120 दिनों बाद अनारक्षित सेवा का शुरू किया जाना बिल्कुल तर्कसंगत है। इससे पूर्व आरक्षित द्वितीय श्रेणी 2S के यात्रिओंके हितोंकी रक्षा होगी, वह अपने अग्रिम आरक्षण पर सुरक्षित यात्रा कर पाएंगे। निम्नलिखित तिथियोंसे मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अनारक्षित सेवा शुरू हो जाने के बाद, आम यात्री टिकट काउन्टर से टिकट लेकर यात्रा कर सकेगा और उसे द्वितीय श्रेणी साधारण श्रेणी के लिए अग्रिम आरक्षण करने की जरूरत नही रहेगी।
कभी कभी शक होता है, यह एकछत्र भारतीयरेल है या विविध क्षेत्रीय रेलवे में बटी स्वतंत्रता पूर्व काल की स्टेट रेलवे? तब एक राज्य, निज़ाम नही चाहता था की कोई दूसरा उसके क्षेत्र में दखल दे। यहाँतक की इसके लिए एक स्टेट रेलवे अपना गेज बदल लेती थी। इसका उदाहरण आपको गुजरात, राजस्थान, मप्र में मिल जाएगा। प्रत्येक राजा अपने इलाके के लिए अपनी खुद की रेल चलाता था और वह बगल के राजा की रेलवे से अलग गेज की रहती थी। आज फिर वही हालात है, किसी एक क्षेत्रीय रेल में अनारक्षित टिकट मिल रहे है, तो किसमे नही।
NWR उ प रेल ने घोषणा कर दी, हम 11 तारीख से ही 97 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंमे अनारक्षित यात्री सेवा शुरू कर देंगे तो प रे WR ने 01 जुलाई से उपरोक्त सेवा शुरू हो पाएगी यह कह दिया। भाई, उत्तर रेलवे NR ने तो गजब कर दिया उन्होंने 250 के करीबन गाड़ियोंकी सूची छपवा दी और प्रत्येक गाड़ी में अनारक्षित सेवा शुरू की अलग अलग तिथियाँ भी। कुछ क्षेत्रीय रेलवे ऐसी भी है, जो मौन व्रत ले कर चुपचाप बैठी है, जैसे की मध्य रेल।
अब परेशानी क्या है, आज भी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके डिब्बों में अपनी क्षमता से दुगने यात्री यात्रा कर रहे है। कोई क्षेत्रीय रेलवे अनारक्षित टिकट जारी कर अपने यहाँसे अनारक्षित डिब्बों को यात्रिओंसे लबदब करा भेज रही है तो कोई रेलवे (CR) बिना आरक्षण द्वितीय श्रेणी में पैर भी धरने न दे रही है। ऐसे में जब केवल मध्य रेलवे के ही कार्यक्षेत्र में चलनेवाली गाड़ियाँ यदि यात्रिओंसे ठूँस ठूँस कर चले तो रेल प्रशासन के नियम, कानून, अनुशासन तो ताक पर रखे पड़े है, क्यों? सही है या नही?
रेलवे स्टेशनोंपर रेल सुरक्षा बल खड़ा है, ट्विटर के जरिये हर वरिष्ठ अधिकारी, मन्त्रीगण तक यात्रिओंसे सीधे जुड़े है, फिर भी ऐसी अराजकता मची है? आखिर चल क्या रहा है? या तो रेल प्रशासन सीधे कह दें अब कोई आरक्षित द्वितीय श्रेणी नही रहेंगी और सभी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके द्वितीय श्रेणी कोच अनारक्षित समझे जाएंगे, जिन यात्रिओंने द्वितीय श्रेणी का अग्रिम आरक्षण कर रखा है उसे अब आरक्षित रेल यात्रा यह एक सुन्दर बिसरा ख्वाब समझ कर भुला देना चाहिए। रेल विभाग वैसे भी आरक्षित आसन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नही लेता अतः अब तो घोषित ही क्यों न कर दिया जाय की यात्री अपने बलबूते पर यात्रा करें, यज्ञपी हमने यात्री को आरक्षण दिया है, लेकिन उसके साथ अन्य रेल्वेज के अनारक्षित यात्री भी यात्रा कर सकते है।
कितनी कमाल बात है, ढेर व्यवस्था है मगर नियोजन के नाम पर सब शून्य और व्यर्थ है। तर्कहीन और निरी अनुशासन हीनता। ट्विटर पर अधिकारियों से रोजाना कम से कम एक तो भी शिकायत “ओवर क्राउडिंग” की रहती है। सम्बंधित शिकायत कर्ता से उसका PNR पूछा जाता है मगर कार्रवाई क्या हुई यह आजतक भी किसे ट्विटर पर प्रसारित होते दिखाई नही दी। मध्य रेल क्षेत्र में चलनेवाली ऐसी कई गाड़ियाँ है जिसमे रोजाना क्षमता से अधिक यात्री यात्रा कर रहे है, प्रशासन देख रहा है। न तो अनारक्षित टिकटें जारी किए जा रहे न ही बन्द हो चुकी गाड़ियाँ बहाल की जा रही है। पता नही, रेलवे अपने अधिकारों का उपयोग कब करनेवाली है?
रेल प्रशासन ने मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंमे द्वितीय श्रेणी सामान्य की अनारक्षित टिकटें शुरू करने के आदेश क्या निकालें, विविध क्षेत्रीय रेल मे कौन कब यह सुविधा शुरू कर रहा है इसकी KBC शुरू हो गई। अब आप पूछोगे कैसे, तो भैय्या जी हम बतावत है, तनिक ठइरो।
जैसे ही रेल बोर्ड से उपरोक्त आदेश जारी हुवा, सबसे पहले प्रतिक्रिया पश्चिम रेल्वे की दिनांक 02 मार्च को आयी। उन्होंने करीबन 200 गाड़ियोंकि सूची लगाकर मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी अनारक्षित सेवा दिनांक 01 जुलाई से शुरू की जाएगी और इंट्रा जोन अर्थात पश्चिम रेल्वे के अंतर्गत चलाए जानेवाली मेल/एक्स्प्रेस गाड़ियोंकी सूची बाकी रख दी। इसकी वजह साफ थी, लंबी दूरी की गाड़ियोंमे ARP अग्रिम आरक्षण के चलते कई यात्रीओं ने 4 महिनेतक की द्वितीय श्रेणी मे आरक्षण शुल्क 15/- देकर अपनी सीटें आरक्षित करवा रखी है। ऐसे मे रेल्वे बोर्ड और पश्चिम रेल्वे का निर्णय बिल्कुल सही लगता है की पत्र की तिथि से 120 दिनों बाद यह अनारक्षित व्यवस्था को खोला जाए।
रेल्वे बोर्ड के पत्र मे 120 के ARP के बाद व्यवस्था कायम करने के अलावा एक प्रावधान और था, वह था, जिस दिन से द्वितीय श्रेणी मे किसी भी यात्री ने आरक्षण न कराया हो ऐसी गाड़ी मे उस दिन से यह सुविधा शुरू की जा सकती है। अब खेल यहाँ शुरू होता है। कौन सी गाड़ी मे कब तक आरक्षण किया गया है और कब तक नहीं यह बात केवल रेल्वे प्रशासन ही जान पाएगा और उसकी घोषणा करेगा तो उस प्रकार से उ प रेल NWR, दक्षिण रेल्वे और इसी तरह 2-4 क्षेत्रीय रेल्वे ने अपने अपने क्षेत्र से निकलने वाली गाड़ियों की सूचियाँ बनाई और सूचनाएं जारी कर दी। यह सारी सूचनाए अलग अलग दिन हमने अपने ब्लॉग के जरिए प्रकाशित भी की है। आज उत्तर रेल्वे की सूची भी यहाँ जोड़ रहे है, फिर आगे अपनी बात जारी रखेंगे।
यह 256 गाड़ियोंकी सूची है और तकरीबन हर गाड़ी मे अनारक्षित सेवा जारी होने की तिथि अलग अलग है। यात्री को भले ही एक दिशामे जाना हो मगर उस दिशामे जाने वाली प्रत्येक गाड़ी मे कौन से दिन से अनारक्षित टिकट मिलने लगेगी यह पता करना एक कंपेटिटिव एक्जाम पास करने जितना ही कठिन है। इस का हल एक ही है, बस यात्री रेल्वे की टिकट खिड़की पर जाए और वहाँ के बुकिंग बाबू से सर खपाए की फलाँ गाड़ी मे चालू टिकट मिलेगी या नहीं मिलेगी और नहीं मिलेगी तो कब से मिलेगी। है की नहीं दिमाग का दही जमाने वाली बात? कई क्षेत्रीय रेल्वे ऐसी भी है जिन्होंने इस विषय को लेकर न कोई तिथि बताई है और न ही कोई सूचना, जैसी की मध्य रेल्वे। मध्य रेल्वे मे द्वितीय श्रेणी का आरक्षण हो रहा है और मेल/एक्सप्रेस गाड़ियों मे भी आरक्षण के सिवा प्रवेश वर्जित है।
फोटो साभार : small town traveller youtube channel
कुल मिलाकर सबब यह है, यात्री स्टेशनपर जाएं, चालू टिकट मिलता होवे तो टिकट ले कर अपनी यात्रा शुरू करे अन्यथा आरक्षण मिलता होवे तो आरक्षण ले ले और वह भी उपलब्ध न हो तो सड़क मार्ग से अपनी व्यवस्था कर लें। हाँ, एक बात और है, जिन गाड़ियोंमे अनारक्षित टिकट शुरू कर दी गयी है, उनमे रेलवे के ई-टिकट भी उपलब्ध दिखाई दे रहे है। मतलब ई है, यात्रा का आरम्भ करते वक्त आपके आरक्षित सीट पर बैठे अनारक्षित बन्दे से अपनी जगह खाली करवाने के लिए, आपको एक सौ एक टका माथा फोड़ी करनी पड़ सकती है। ऐसे में हम और रेलवे एक ही बात कह सकते है, “आपकी यात्रा सुखद एवं मंगलमय हो!” 😊
दो दिन पहले की बात है, द प रेल के बंगलुरु मण्डल के त्याकल स्टेशन की यह दर्दनाक घटना है। यह त्याकल स्टेशन बेंगालुरु – जोलारपेट्टै स्टेशन के बीच बेंगालुरु से महज 55 किलोमीटर और बांगारपेट स्टेशन से 15 किलोमीटर पहले पड़ता है। घटना 9 मार्च, सुबह 8:38 की है। त्याकल स्टेशन के दोनोंही प्लेटफ़ॉर्म पर नियमित अप डाउन करने वाले यात्रीओंकी दो अनारक्षित गाडियाँ खड़ी थी और पता नहीं कब तक खड़ी रहनेवाली थी। वजह थी रेल्वे की OHE ओवर हेड इलेक्ट्रिक सप्लाई का फेल होना। रोजाना जाने आने वाले यात्री ऐसे मामलों मे काफी जानकारी रखने वाले होते है। गाड़ी तुरंत तो चलनी नहीं थी अतः बहुतांश यात्री गाड़ी से उतरकर यूँ ही इधर-उधर घूम रहे थे, कुछ प्लेटफ़ॉर्म पर तो कुछ प्लेटफ़ॉर्म की विरुद्ध दिशामे गाड़ीसे उतरकर बगल की मैन लाइन की पटरी पर। आनेवाले भयावह संकट से बेखबर, अपने ही रोजगार पर पहुँचने की उधेड़बुन, देरीसे पहुँचने पर पड़नेवाली मालिक की डाँट के बारे मे सोचते कर्मचारी, आज की कौनसी जरूरी क्लास डुबनेवाली है इस टेंशन मे फंसे विद्यार्थी, गाड़ी देर से पहुचेंगी तो रेहड़ियाँ, ठेले लगाने मे होनेवाली देरी और उससे होनेवाले नुकसान से चिन्तित छोटे व्यवसायी।
अचानक दोनों गाड़ियोंके बीच खड़े यात्री जोर जोर से चिल्लाने लगे, एकदम से भागदौड़ और अफरातफरी मच गई, चेन्नई मैसूर शताब्दी एक्स्प्रेस मैन लाइन से बड़े ही जोरदार गति से त्याकल स्टेशन मे घुस रही थी। इस सुपरफास्ट शताब्दी गाड़ी का त्याकल स्टेशन पर स्टोपेज न होने की वजह से हमेशा की ही तरह तकरीबन 100-110 की गति से पार होने के लिए, अपनी सीटी जोर जोर से बजाती, दौड़ती चली आ रही थी। शताब्दी के लोको पायलट को ट्रैक पर घूमते लोग नजर आए, गाड़ी का हॉर्न लगातार बजता जा रहा था, लोगोंमे अफरातफरी मची थी, किसी को कुछ समझ नहीं या रहा था। सब लोग पटरी से अलग होने, दूर हटने का प्रयत्न कर रहे थे, और..
शाहबाज अहमद शरीफ उम्र 24 वर्ष, बांगारपेट से रोजाना सुबह निकल बेंगालुरु मे अपने सॉफ्टवेयर की जॉब पर पहुँचने वाला बन्दा, अब कभी भी अपनी नौकरी पर नहीं पहुँच सकेगा क्यों की वह इस हादसे का शिकार हो चुका है। उसकी शताब्दी एक्स्प्रेस की चपेट मे आकर मृत्यु हो गई है। उसके साथ ही खबर यह भी है, और दो यात्री इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए है।
त्याकल स्टेशन पर प्लेटफ़ॉर्म है, FOB फुट ओवर ब्रिज भी है। चूंकि मेन लाइनका स्टेशन है, रोजाना कई गाडियाँ बिना रुके, तेज गतिसे पास भी होती है, फिर.. । फिर यह हादसा क्यों हुवा? कहा जा रहा है, ड्यूटी पर हाजिर स्टेशन मास्टर, राजा बाबू ने शताब्दी एक्स्प्रेस थ्रु पास होंगी ऐसी सूचना भी दी थी, थ्रु ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले पोर्टर ने भी चिल्ला चिल्लाकर लोगों को आगाह करने का प्रयत्न किया था। गलती, लापरवाही किसकी है? बेशक, प्लेटफ़ॉर्म के बजाय पटरी पर उतर कर घूमने वाले यात्रीओं की, लापरवाही से कानों मे इयरफोन डाल कर बेखौफ, गैर जिम्मेदाराना तरीकेसे रेल्वे लाइन पर, बहती सड़क पर घुमनेवाली युवा पीढ़ी की। कुछ यात्रीओंका कहना है, शाहबाज ने इयरफोन लगा रखे थे, उसे न ही लोको के लगातार बजने वाले हॉर्न सुनाई दिए, न ही अन्य यात्रीओंकी चिल्लाहट।
रेल प्रशासन लगातार यात्रीओं से निवेदन करती है, रेल पटरी पार करने के लिए फुट ओवर ब्रिज का उपयोग करें। पटरी पर चलने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ रेलगाड़ी का है, आम इंसान ने रेल पटरी से दूर ही रहना चाहिए। हादसे के बाद त्याकल स्टेशन के स्टेशन मास्टर और रेल कर्मचारियोंको, कुछ रेल यात्रीओंके गुस्से का शिकार होना पड़ा, स्टेशन मास्टर को मारपीट की गई, उनके कपड़े फाड़ दिए गए हालांकि इस मामले मे किसी रेलकर्मी ने यात्रीओं के खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई, उल्टा इस हादसे का उन्हे गहरा दुख हुवा। यात्रीओं का पटरीपर घूमना बहुत अप्रत्याशित मामला था और तेज चलती गाड़ी को रोकना बेहद नामुमकिन। इस घटना को देखते हुए हम यात्रीओंको प्रार्थना करते है, यात्री, रेलगाड़ी में और प्लेटफ़ॉर्म पर ज्यादा सुरक्षित है। कभी भी प्लेटफ़ॉर्म के अलावा अन्य जगहों पर, रेल पटरी पर से रेलगाड़ियों मे चढ़ना या उतरना, रेल पटरियों पर घूमना बेहद खतरनाक है। ऐसा साहस कभी न करें।
उपरोक्त खबर और वीडियो एस. ललिता (@Lolita_TNIE) के सौजन्य से प्रकाशित