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हर किसी की चाहत, उसके क्षेत्र से चले वन्दे भारत!

आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने वन्दे भारत श्रेणी की 75 गाड़ियाँ, शुरू करने की बात 15 अगस्त 2021 को लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिन के भाषण में की थी और आगे वर्ष 2022/23 के अर्थसंकल्प में इसे बढाकर 400 गाड़ियाँ देशभर में चलाने की घोषणा देश के अर्थमन्त्री द्वारा की गई।

हालाँकि यह घोषणाएं किसी भी विशेष शहर को लेकर नही थी, मगर इन घोषणाओंके बाद राजनेताओंमें जो लहर चली की प्रत्येक क्षेत्र के नेतागण उनके क्षेत्र को वन्देभारत एक्सप्रेस के लिए पात्र समझकर, बस 2- 4 वन्देभारत गाड़ियाँ उनके ही क्षेत्र से चलाई जायेंगी ऐसा आधिकारिक तौर से कहने लगे। यह सब खबरें अब 4, 6 महीने पुरानी हो गयी परन्तु ऐसा वन्देभारत एक्सप्रेस है क्या जो उसे चलवाने में नेतागण इतना जोर दे रहे? क्या घोषित क्षेत्र की जनता भी यही चाहती है, की सचमुच उन्हें वन्देभारत एक्सप्रेस उनके क्षेत्र से चले? चलिए समझते है।

दरअसल वन्देभारत एक्सप्रेस भारतीय रेल की पेरंबूर, चेन्नई स्थित, अग्रगण्य रेल कोच कारखाने इंटीग्रल कोच फैक्टरी द्वारा बनाई गई अत्याधुनिक, सेल्फ प्रोपल्ड अर्थात अंतर्गत लोको बनावट वाली वातानुकूलित गाड़ी है। भारतीय रेल की सेमी हाई स्पीड रेल की चाहत में इस गाड़ी का अविष्कार किया गया और उसका तत्कालीन नाम था ‘ट्रेन 18’ और लागत थी करीबन 100 करोड़ रुपये। यह सफल अविष्कार अक्टूबर 2018 में तैयार हुवा। 80% भारतीय बनावट की इस ट्रेन 18 का नामकरण ‘वन्देभारत’ ऐसे किया गया और 15 फरवरी 2019 को इसे नई दिल्ली से वाराणसी के बीच फेरे लगाने के लिए शुरू किया गया। यज्ञपी इस आधुनिक गाड़ी की अधिकतम गतिक्षमता 220 kmph तक घोषित है परन्तु इसे अधिकतम 180 kmph की गति तक चलाया जा रहा है। इस प्रोटोटाइप एकमेव रैक के बाद दूसरा रैक 03 अक्टूबर 2019 को नई दिल्ली कटरा के बीच चल पड़ा।

वन्देभारत गाड़ी की विशेषताएं अब तक तो बहुतों बार सुन चुके होंगे मगर यहां मुख्यतः हमने ऐसी बातें जानने का प्रयत्न किया की आखिर LHB जैसी गतिवान, सुरक्षित और ट्रेन 18 से किफायती गाड़ियोंके मुकाबले में इस वन्देभारत को क्यों प्राधन्य दिया जा रहा है? क्यों इस गाड़ी को, भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में मिल का पत्थर साबित होनेवाली है ऐसा माना जा रहा है? दरअसल यह गाड़ी EMU/MEMU रैक का ही उच्चतम और आरामदायक अविष्कार है।

सेल्फ प्रोपल्ड होने की वजह से इसके परिचालन में लोको की जरूरत नही रहती। इस वजह से लोको शंटिंग अर्थात उसे गाड़ी में जोड़ना, निकालना, रिवर्सल करना उसमे लगने वाला समय, मानवी श्रम, शक्ति इन सब बातोंकी बचत सुनिश्चित होती है।

पूरे गाड़ी में अलग अलग जगह पर इंजिन जुड़े रहने से गाड़ी का लोड ट्रैक पर समान रूप से रहता है। नियमित गाड़ियोंमे यह केवल लोको में ही केंद्रित रहता है। इससे गाड़ी के तीव्रता से पीकअप लेने की क्षमता बहुत ज्यादा है और किसी एक इंजिन के फेल हो जाने पर भी गाड़ी रोकनी नही पड़ती पर्यायी व्यवस्था में गाड़ी चलाई जा सकती है। केवल गति थोड़ी कम होगी मगर गाड़ी अपने गंतव्य तक ले जाई जा सकेगी।

यात्रिओंके के लिए बेहतर सुरक्षा हेतु स्वयमचलित दरवाजे, हवाई जहाज जैसी आसन व्यवस्था, धुवां रोधी अलार्म, cctv, ऑनबोर्ड wifi, ऑनबोर्ड केटरिंग, रोटॉटेबल सीट्स इत्यादि अंतर्गत साजसज्ज़ा उपलब्ध है। GPI बेस्ड यात्री सूचनाएं, लोको पायलट से लेकर ट्रेन मैनेजर तक पूरे 16 कोच इंटरकनेक्टेड और एयर सील्ड उसके वजह से गाड़ी में चलते वक्त बहुत कम आवाज आता है।

प्रत्येक 1 कोच छोड़कर एक कोच में मोटर लगी रहने से गाड़ी को परिचालित करते वक़्त तेजी से उच्च गति प्राप्त करना या जल्द कंट्रोल करना सम्भव है, साथ ही ब्रेकिंग में रिजनरेशन व्यवस्था लगाए जाने से परिचालन खर्च 25% की बचत की जाती है।

वन्देभारत के नवनिर्मित रैक्स में और भी आधुनिक सुविधाएं समिल्लित की जाने वाली है। कहा जा रहा है, आगामी वन्देभारत गाड़ियाँ केवल सीट्स ही नही शायिका युक्त भी आएंगी।

अत्याधुनिक वन्देभारत एक्सप्रेस कहें या उसी तरह की मेमू गाड़ियाँ यह आधुनिक जगत की रेल व्यवस्थाएं है, रेल कोचिंग का भविष्य है। आनेवाले दिनोंमें लगभग सभी यात्री गाड़ियाँ सेल्फ प्रोपल्ड ही रखी जायेगी, यहाँतक की पण्यवहन गाड़ियाँ भी दोनों ओर लोको लगाकर चलाई जा सकती है। दुनिया है जो नई नई तकनीक को बड़ी तेजी से अपनाने के लिए तत्पर रहती है अतः नेतागण इन गाड़ियोंको अपने क्षेत्र के लिए खींचने में लगे है।

यह बात और है, वातानुकूलित और आधुनिक साजसज्ज़ा वाली वन्देभारत लम्बी दूरी की यात्रा के लिए उपयुक्त है तो कम दूरी और रोजाना यात्रिओंकी जरूरत तो मेमू ही पूरी कर सकती है। गौरतलब यह बात समझ लीजिए, ‘फास्ट एक्सलरेशन और क्विक डीएक्सलरेशन’ के चलते आनेवाले दिनोंमें पड़ावों की मांग हमेशा चलती रहती है, वह भी यथार्थता से पूरी की जाएगी। यात्रीगण वन्देभारत के भी पड़ाव मांग लेंगे तो रेल प्रशासन वह भी खुशी खुशी दे पाएगी बशर्ते उनकी ‘अर्निंग’ वाली शर्ते पूरी हो, परिचालन विभाग की कोई दिक्कत नही रहेगी। 😊😊

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समर्पित मालगाड़ी गलियारा और भारतीय रेल : अरब और ऊँट

भारतीय रेलवे नेटवर्क पर भारतीय रेल के अलावा DFCCIL डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड याने मालगाड़ियोंके लिए समर्पित रेल गलियारा, जिसपर केवल मालगाड़ियोंका ही परिवाहन किया जाएगा। इस DFC की और भारतीय रेल की रेल लाइने एक ही गेज BG की है, डिब्बे, लोको भी एक ही तरह के है बल्कि DFC ज्यादा उन्नत है। इस मार्गपर भारतीय रेल द्वारा प्रशिक्षित और उनमें कार्यरत परिचालन स्टाफ ही काम कर रहा है। मित्रों, फिर विषय है क्या? आइए बताते है, दरअसल कल भारतीय रेल ने इस DFC के ट्रैक पर अपनी यात्री गाड़ियाँ यदि ‘अनिवार्यता’ रही तो चलाने की अनुमति ले ली। निम्नलिखित पत्र देखिए,

अब आप सोच रहे होंगे, इस DFC और IR के बीच अरब और ऊँट कहाँसे आ गए? मित्रों, पंचतंत्र की कहानी है अरब और ऊँट। कहानी में दयालु अरब अपने तम्बू के बाहर बन्धे ऊँट को धूप और गर्मी से बचने के लिए सिर्फ सिर ढांक सके इतनी सी जगह देता है और देखते ही देखते सिर, आगे के दो पैर, पेट, पीठ यूँ करते करते पूरा ऊँट तम्बू के अन्दर और अरब जगह की कमी के चलते तम्बू से बाहर यह हालात हो जाती है। कहानी की तात्पर्य यह है, की मालिक कोई और लाभ ले कोई और।

इस बात को विस्तार से समझने के लिए हमे DFCCIL को थोड़ा समझना होगा। DFC में फिलहाल दो भाग है, EDFC और WDFC पूर्व और पश्चिम समर्पित गलियारा। EDFC की कुल लम्बाई 1873 किलोमीटर की है और WDFC की 1504 किलोमीटर। EDFC का मार्ग खुर्जा, भाऊपुर, दीनदयाल उपाध्याय नगर, लुधियाना – दादरी, दीनदयाल उपाध्याय नगर – सोननगर ऐसे है तो WDFC का रेवाड़ी – वड़ोदरा – JNPT जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट मुम्बई ऐसा है। आप मैप देख सकते है.

यह DFC अतिउन्नत तकनीक से बनाया जा रहा है। भारतीय रेल पर 4.26 मीटर ऊंचाई और 3200 मिलीमीटर चौड़ाई तक की माल लदान की अनुमति है जबकि DFC पर 7.1 मीटर ऊंचाई उपलब्ध होने के कारण दोहरी/तिहरी मंजिल तक एवं 3660 मिलीमीटर चौड़ाई के कन्टेनर्स का लदान किया जा सकता है। भारतीय रेल पर ज्यादा से ज्यादा 700 मीटर लंबी गाड़ी चलाई जा सकती है (हाल ही मे जो पायथन, वासुकि वगैरे मालगाडियाँ चली उन्हे एण्ड टू एण्ड चलाना पड़ता है ) तो वहीं DFC पर 1500 मीटर लंबी गाड़ी चलाई जा सकती है। ट्रेन लोड की बात की जाए तो IR पर 5400 टन तो DFC पर 13000 टन की क्षमता है। भारतीय रेल पर माल गाड़ियोंकी अनुमानित अधिकतम गति 75 kmph (?)और DFC पर अधिकतम गति 100 kmph उपलब्ध है। नवंबर 2021 के आँकड़े देखे जाए तो EDFC पर 8700 और WDFC पर 6020 मालगाड़ियाँ चल चुकी है। हजारों करोड़ की लागत का यह मालगाड़ी समर्पित गलियारा हमारे देश की महत्वकांक्षी परियोजना है। आप निम्नलिखित मैप देखिए आनेवाले दिनों मे किस तरह देशभर मे इस DFC का जाल फैलाया जानेवाला है।

जब रेल मंत्रालय का यह पत्र सोशल मीडिया मे आया तो तमाम रेलप्रेमियों के मन मे एक बात कौंध गई कहीं यह ‘अरब और ऊँट’ वाली कहानी तो नहीं सिद्ध होने जा रही? ऐसा न हो की भारतीय रेल की यात्री गाडियाँ धीरे धीरे ऊँट की DFC की लाइनों पर कब्जा जमाने लग जाए? हमने यह बात तज्ञोंसे समझने का प्रयत्न किया तब उन्होंने कहा की भारतीय रेल केवल मजबूरी, आपात स्थिति मे ट्रेनों का डायवर्जन के वक्त ही, ट्रैफिक क्लियरेन्स के लिए DFC का उपयोग करेगी। DFC के प्लेटफॉर्म्स बहुत कम ऊंचाई के और माल लादने के लिए ट्रॅक और क्रेन के हिसाब से बनाए गए है, यात्रीओंकी यातायात के लिए कतई उपयुक्त नहीं है। DFC के पास अधिसूचित “स्टेशनों” पर भी उपयुक्त प्लेटफॉर्म होने की संभावना नहीं है और प्राथमिक प्लेटफॉर्म यात्री सुविधाओं से रहित होंगे। सबसे मूल बात, DFC के अधिकारीयों को खुद ही यात्री ट्रेनों को स्वीकार करने में दिलचस्पी नहीं लेंगे क्योंकि आगे यात्री यातायात चलाने वाली भारतीय रेल ही मालभाड़े से उत्पन्न अर्जित कर यात्री किराये मे समायोजित कर अपना कारोबार खींच रही है।

मित्रों, DFC का जाल भले ही देश भर मे फैलने वाला है, और भारतीय रेल लाख चाहे मगर DFC के रेल मार्ग पर केवल पण्यवहन ही चलता रहेगा क्योंकी यह उसके लिए समर्पित है।

Map courtesy : dfccil journal

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किसे चाहिए है, रेल किरायोंमे रियायत? कौन लाभ ले रहा है?

माननीय रेल मंत्री जी का हालिया ट्वीट देखिए,

“1 रुपए 16 पैसे खर्च होते हैं पैसेंजर को ट्रेवल कराने के लिये, हम पैसेंजर से लेते हैं मात्र 48 पैसे। जो भी यात्रा करते हैं उन्हें बहुत बड़ा डिस्काऊंट दिया जाता है” : माननीय रेल मंत्री https://t.co/ITMfD1rY7A

यह बहुत बड़ा विषय है और गम्भीर भी है। जब सार्वजनिक तौर पर यह कहा जाता है, की सार्वजनिक परिवाहन में यात्रिओंको बहुत बड़ी याने 1रुपये 16 पैसे के मुकाबले 48 पैसे वसूले जाते है, अर्थात लगभग 58% की छूट दी जा रही है। रेलवे अपने पूर्ण देय किराया टिकट पर भी यह बात छापती है। यह किस तरह की व्यवस्था है? क्यों दिया जा रहा है यह ‘डिस्काउंट’?

आजसे पहले भी यह बातें हो चुकी है, सामाजिक जिम्मेदारी निभाने हेतु यात्रिओंसे, भारतीय रेल यह किराया कम वसूलती है। यात्री किरायोंमे दी गयी छूट को वह पण्यवहन करके, मालभाड़े के उत्पन्न से समायोजित करती है। जब ऐसी समायोजन की व्यवस्था की गई है तब ऐसा बयान क्यों?

वैसे भी संक्रमणकाल से रेल प्रशासन ने वरिष्ठ नागरिकों सहित कई रियायतोंको स्थगित कर रखा है। द्वितीय श्रेणी अनारक्षित सवारी गाड़ियाँ जिनके किराये की श्रेणी बहुत ही कम है, अब तक भी शुरू नही की गई है। नवनिर्मित वातानुकूल इकोनॉमी कोच में लिनन, कम्बल नही देने का निर्णय लिया जा चुका है, प्रमुख रेलवे स्टेशनोंके रखरखाव को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। भारत गौरव नामक FTR पूर्ण किराया देय गाड़ी के जरिये यात्री गाड़ियोंमे भी निजी क्षेत्र की शिरकत हो रही है। कुल मिलाकर यह साफ है, रेलवे यात्री किरायोंके रियायती बोझ को अब सह नही पा रही और शायद इसीलिए रेल मन्त्री का इस तरह से बयान आया है।

रेलवे में रियायत पाने वालोंकी सच्चाई देखें तो, दौड़के गाड़ी पकड़ने वाले दिव्यांग, मुफ्त का अखबार पढ़ने वाले दृष्टिहीन, स्मार्टफोन विथ ब्लू टूथ कॉर्डलेस ईयरफोन धारक मूक बधिर, दिव्य औषधी प्राप्त निरोगी मरीज और जिन्हें रेलवे पटरी पर दौड़ती है यह तक पता नही ऐसे रेलकर्मी, रेलवे में ऐसे कई प्रकार के रियायती नमूनेदार यात्री रहते है जिसकी सघन जांच होना जरूरी है।

सार्वजनिक परिवहन में उसका उपयोग करने वाले यात्रिओंकी नैतिकता सही होना जरूरी है। प्रशासन आवाहन करती है, ‘बिना टिकट रेलवे के अहाते में प्रवेश न करें’ है न विवेक पर छोड़ी हुई बात? कोई भी प्रशासन प्रत्येक व्यक्ति के पीछे जाँच दल तो नही न लगा सकता? बिना टिकट यात्रा करना, बिना आरक्षण के आरक्षित यान में प्रवेश करना, अनैतिक तरीकेसे गाड़ियोंमे बिक्री करना यह सब सामाजिक अपराध है, आपकी अपनी परिवाहन व्यवस्था को नुकसानदेह है।

साथही इस तरह के सार्वजनिक बयान से यात्रिओंको यह भी अहसास हो जाना चाहिए की रेल प्रशासन जिस तरह सामाजिक दायित्वों के तले दबे जा रही है, जरूरी है की इस बोझ को जल्द से जल्द कम करने का प्रयत्न हो। पण्यवहन और यात्री यातायात में समायोजन को भी सुस्थिति में लाया जाए ताकि रेल प्रशासन के पण्यवहन में भी वृद्धि हो और रास्ते से चलनेवाली माल को रेलवे की तरफ आकर्षित किया जा सके।

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हादसा : 11005 दादर पुड्डुचेरी एक्सप्रेस के 3 कोच बेपटरी हुए, फिलहाल कोई जानमाल के नुकसान की खबर नही।

Shivaji M Sutar
@ShivajiIRTS
·
43s
As per information recvd from control room 3 coaches of train 11005 derailed near Dadar station.
No injury reported. Time 9.45pm.
Relief trains have been moved to site for early restoration.

Vdo courtesy : telegram

अपडेट :

इस लेख के अनुसार, मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – गदग एक्सप्रेस, दादर-पुडुचेरी एक्सप्रेस से टकरा गई, क्योंकि किसी एक गाड़ी को दादर से मुख्य लाइन को पार किया जा रहा था। कुछ सिग्नलिंग समस्या, या लोको पायलटों में से कीसी एक ने त्रुटि की। विवरण अभी आने को है।

Train Cancellation Update-1

The following trains have been cancelled

11005 Dadar-Puducherry Express JCO 15.4.2022
11139 CSMT-Gadag Express JCO 15.4.2022