भारतीय रेल के कई क्षेत्रीय रेलवे ने अपने अपने क्षेत्रोंकी गाड़ियोंमे अनारक्षित टिकट एवं यात्रा शुरू कर दी है। इसमें दक्षिण रेलवे का भी नाम जुड़ने जा रहा है। दक्षिण रेलवे में अनारक्षित यात्रा दिनांक 01 नवम्बर से शुरू हो जाएगी। हालाँकि 2 जोड़ी गाड़ियाँ, 06321/22 नागरकोईल कोयम्बटूर नागरकोईल विशेष और 06324/23 मंगालुरु सिटी कोयम्बटूर मंगालुरु सिटी विशेष गाड़ियोंमे यह व्यवस्था दिनांक 10 नवम्बर से लागू होगी। आइए 14 जोड़ी गाड़ियोंका विस्तृत परिपत्रक है, देखते है।
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भुसावल – जलगाँव 3 री /4 थी रेल लाइन आकार ले रही है।
भुसावल से जलगाँव के बीच तीसरी और चौथी लाइन का प्रोजेक्ट पहले ही घोषित है और उसमे से तीसरी लाइन पूरी हो कर उसे सुरक्षा आयुक्त से परिचालन की अनुमति भी मिल चुकी है।मालगाडीयाँ चल भी रही है मगर फिलहाल कोई यात्री गाड़ी तीसरी लाइनपर नही चली है।
तीसरी लाइनपर यात्री गाड़ी न चलने की क्या वजह है यह तो मण्डल प्रशासन ही बता सकता है, मगर शायद भुसावल प्लेटफार्म की कोई दिक्कत हो सकती है। जहाँतक चौथी लाइन का सवाल है जलगाँव से भादली में रेल ओवर रेल ब्रिज का ही काम शेष बचा है और भादली से भुसावल के बीच दो रोड ओवर रेल ब्रिज का काम तेजी से चल रहा है। उसके पूर्णत्व के बाद ही रेल बिछाने का कार्य शुरू हो सकता है।
इसी बीच जलगाँव स्टेशन पर छठवाँ प्लेटफार्म साकार होने जा रहा है। यह इस तीसरी/चौथी लाइन के प्रोजेक्ट का बड़ा ही महत्वपूर्ण काम है। पश्चिम रेलवे सूरत की ओरसे भुसावल आनेवाली सभी गाड़ियाँ मुम्बई – भुसावल लाइन को बिना क्रॉस किए सीधे भुसावल आ सकती है। भुसावल – सूरत लाइन की भुसावल – मुम्बई लाइन से जो क्रॉसिंग जलगाँव में होती थी उसे टालने के लिए ही यह प्रोजेक्ट का प्रमुख हेतु है। यह क्रॉसिंग अब रेल ओवर रेल ब्रिज के जरिए भादली – जलगाँव के बीच में ही हो जाएगी। यूँ समझिए की इससे जलगाँव स्टेशन जंक्शन रहते हुए भी जंक्शन नही रहेगा, क्योंकि तीसरी/चौथी लाइन के चलते पश्चिम रेलवे भुसावल जंक्शन से सिधा ही जुड़ जाएगा।
आपके लिए कुछ तस्वीरें जलगाँव स्टेशन की लेकर आए है। इन तसवीरोंमें आपको छठवें प्लेटफार्म बनने की तैयारी दिखाई दे रही है। इन तस्वीरों के लिए हम सय्यद मुश्ताक अली @mushtaq_ayyub के आभारी है।


द प रेल SWR की वास्को जसीडीह वास्को वाया मडगाँव, हुब्बाली, बल्लारी, सिकन्दराबाद, बल्हारशाह, गोंदिया, राउरकेला, राँची, धनबाद
वास्को जसीडीह के बीच साप्ताहिक विशेष गाड़ी घोषित की गई है। हालांकि यह गाड़ी नियमित रूप से चलाने की बात तय है, मगर फिलहाल इसे केवल 13 फेरोंके लिए चलाया जाएगा।
06397 वास्को जसीडीह साप्ताहिक विशेष दिनांक 05 नवम्बर से प्रत्येक शुक्रवार को वास्को से सुबह 5:15 को निकलेगी और रविवार को सुबह 7:00 बजे जसीडीह को पहुंचा देगी। वापसीमे 06398 जसीडीह वास्को साप्ताहिक विशेष दिनांक 08 नवम्बर से प्रत्येक सोमवार को दोपहर 13:10 को अपनी यात्रा शुरू करेगी और बुधवार को दोपहर 14:40 को वास्को पहुंच जाएगी।
गाड़ीमे 1 वातानुकूलित 2 टियर, 2 वातानुकूलित 3 टियर, 11 स्लिपर, 5 द्वितीय श्रेणी और 2 एसएलआर कोच रहेंगे। गाड़ी MSPC मेल/एक्सप्रेस पूर्णतयः आरक्षित आसन व्यवस्था से चलाई जाएगी। समयसारणी निम्नलिखित है।

द प रेल SWR की दो प्रतिदिन विशेष गाड़ियाँ पहले नवम्बर से चल पड़ेगी
विजयपुरा से मंगालुरु जंक्शन और विजयपुरा से हुब्बाली के बीच यह दो प्रतिदिन चलने वाली गाड़ियाँ 01 नवम्बर से शुरू करने का परिपत्र आया है।
1: 01789 विजयपुरा मंगालुरु जंक्शन विशेष दिनांक 01 नवम्बर से प्रतिदिन चलना शुरू करेगी। वापसीमे 01790 मंगालुरु जंक्शन विजयपुरा विशेष दिनांक 02 नवम्बर से प्रतिदिन चला करेंगी। उक्त गाड़ीमे 5 द्वितीय श्रेणी, 6 स्लिपर, 1 वातानुकूलित थ्री टियर और 2 एसएलआर कोच रहेंगे। समयसारणी निम्नलिखित रहेगी।


2: 01791 हुब्बाली विजयपुरा अनारक्षित प्रतिदिन विशेष दिनांक 01 नवम्बर से और 01792 विजयपुरा हुब्बाली अनारक्षित प्रतिदिन विशेष दिनांक 03 नवम्बर से चलना शुरू करेगी। यह गाड़ी भी विजयपुरा मंगालुरु विशेष के रैक से ही चलने वाली है, सिर्फ अनारक्षित होने की वजह से इसका वातानुकूलित थ्री टियर कोच यात्रा के दौरान बन्द किया हुवा रहेगा। दोनोंही विशेष गाड़ियोंमे मेल/एक्सप्रेस की किराया तालिका लागू रहेगी।


रेल प्रशासन चलाएगा वातानुकूल इकोनोमी कोच से बनी पूरी गाड़ी
एक खबर सोशल मीडिया मे आई है, की रेल प्रशासन अब नवनिर्मित वातानुकूल थ्री टियर इकोनोमी कोच वाली पूरी गाड़ी ही शुरू करने का नियोजन कर रहा है। दरअसल अब तक यूँ हो रहा था की हर एक गाड़ी मे एक, दो कोच जोड़े जा रहे थे और यात्रीओं मे इन डिब्बों मे यात्रा करने की बड़ी ही उत्सुकता रहती है। रेल प्रशासन, अब इसी उत्सुकता को ‘फूल रैक’ की ट्रेन चलवाकर कैश करने का प्रयत्न करने जा रही है।

यह तो हो गई जानकारी वाली बात, मगर सोशल मीडिया बड़ा ही नटखट और चुलबुला रहता है। अभी तो इस गाड़ी के नियोजन की खबरें ही चल रही है पर सोशल मीडिया में एक अलग ही चर्चा ने जोर पकड़ लिया। भारतीय रेल्वे अपने क्षेत्र मे कई सम्पूर्ण वातानुकूलित गाडियाँ चलाता है। राजधानी, वन्दे भारत, शताब्दी, गतिमान, हमसफ़र, गरीबरथ, कुछ वातानुकूलित दुरांतों ऐसी पूर्ण वातानुकूलित गाड़िया है। जिसमे भी केवल राजधानी, हमसफ़र गाडियों मे ही शयिका रहती है। वन्दे भारत, शताब्दी, गतिमान मे तो केवल बैठक व्यवस्था ही है और कुछ दुरांतों और गरीब रथ मिक्स्ड याने द्वितीय श्रेणी स्लीपर, द्वितीय श्रेणी और गरीब रथ ने सीटींग आदि श्रेणियाँ रहती है। यदि वातानुकूलित थ्री टियर इकोनोमी कोच की यह गाड़ी चली तो यह हमसफ़र की तरह पूर्णतय: वातानुकूलित 3 टियर स्लीपर डिब्बों से युक्त रहेगी और फिर इसका नाम क्या रखा जाएगा? सोशल मीडिया इसमें जुट गया है।
अब सोशल मीडिया मे कोई इसे गरीब रथ की तर्ज पर “निर्धन रथ ” कह रहा है तो कोई ” दिन दयालु सफर” कह रहा है। अलग अलग विचार आ रहे है। चूंकि इन वातानुकूल थ्री टियर इकोनोमी कोच मे नियमित वातानुकूल थ्री टियर श्रेणी से 8% कम किराया लगता है और इसी वजह से रेल प्रशासन ने इस डिब्बे को वातानुकूल इकोनोमी यह नाम दिया है। यह जो नाम निकल कर आ रहे है, यह उसी इकोनोमी नाम पर तंज कसे जा रहे है। क्योंकी जो यात्री वातानुकूल कोच मे पूरा किराया देकर यात्रा कर सकता है उसके लिए 8% किराया कम होना यह कोई आकर्षित करने वाली बात नहीं है। वहीं गरीब रथ के किरायों से यह किराये बहुत ज्यादा है तो गरीब रथ के किराये से आकर्षित हुए यात्री भी इस श्रेणी मे यात्रा करने के लिए आकर्षित नहीं हो पाएंगे।

खैर, यात्रीओंको आकर्षित करने का कोई उद्देश्य भी रेल प्रशासन के सामने नहीं होगा उन्हे तो शायद सभी लंबी दूरी की गाड़ियों मे सारे गैर वातानुकूलित कोचेस को हटाकर सम्पूर्ण वातानुकूलित गाड़ी चलवाना यह भविष्य की संकल्पना हो सकती है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। देखिए, रेल गाड़ियों की गति अब 130 kmph हो चली है और आगे 150/180 की भी चालन क्षमता को जोखा जा रहा है। ऐसे मे गाड़ी का सम्पूर्ण वातानुकूलित होना अति आवश्यक हो जाता है, ताकि रेल गाड़ी की गति मे हवा का अवरोध कम रहे।
फिलहाल तो बाते नियोजन की ही हो रही है मगर जल्द ही यह गाड़ी पटरी पर आने की संभावना भी है। जिस तरह सोशल मीडिया मे गाड़ी के नाम पर चर्चा चल रही है, आपके भी जहन मे कोई न कोई नाम उभर कर आया होगा, आप उसे हमारे साथ जरूर शेयर कर सकते है। वैसे हमने इस गाड़ी का नाम ” संचयनी ” सोचा है। संचयनी याने बचत। बचत समय की और थोड़ी सी पैसों की भी। क्या कहते हो!
