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लीजिए दोहरी खुशी! दो नई गाड़ियाँ

नैरो गेज का विस्तार कर उस जगह ब्रॉड गेज की लाइन डलने के बाद इंतजार था गाड़ियाँ कौन कौन सी मिलेंगी। क्या जबलपुर इटारसी नागपुर बल्हारशहा मार्ग की गाड़ियोंको डाइवर्ट किया जाएगा या फिर कोई नई गाड़ियाँ मिलेंगी? जी हाँ हम उसी जबलपुर गोंदिया रेल मार्ग की बात कर रहे है जिसे अभी अभी गेज कन्वर्जन के बाद गया चेन्नई गया साप्ताहिक एक्सप्रेस का तोहफ़ा मिला।

नैनपुर, बालाघाट वासियोंको जबलपुर, गोंदिया से रेल कनेक्टिविटी के लिए गाड़ियोंका इंतजार था। वह प्रतीक्षा जल्द ही खत्म होने वाली है। उनको आने मार्ग के लिए दो नई डेली एक्सप्रेस गाड़ियोंकी सौगात मिलने जा रही है। रेलवे बोर्ड ने रीवा – इतवारी – रीवा ओवरनाइट डेली एक्सप्रेस और जबलपुर – चांदा फोर्ट – जबलपुर इण्टरसिटी डेली एक्सप्रेस को मंजूरी दे दी है। ईन दोनों गाड़ियोंकी टेंटटीव समय सारणी भी आ गयी है। जल्द ही WCR पश्चिम मध्य रेलवे और SECR दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारी मिलकर इसका टाइमटेबल निश्चित कर के इसके परिचालन की घोषणा कर देंगे। तो लीजिए उस मंजूरी के पत्र की कॉपी आपके लिए प्रस्तुत है।

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डिब्बे गरीब रथ के, किराया थ्री टियर वातानुकूलित दर्जेका, यह कैसी नाइन्साफ़ी?

यह आखिर चल क्या रहा है? क्या किराया वसूलने का कोई तरीका, किराया तालिका, नियम कुछ है या मेरी मर्जी, कुछ लॉजिक तो बताए रेल प्रशासन।

आज से नागपुर पुणे के बीच एक वातानुकूलित स्पेशल गाड़ी शुरू की गई जिसका क्रमांक है 02114 और पुणे से नागपुर के लिए 02113 इस तरह है। रेल प्रशासन की ntes.gov.in यह वेबसाइट इसे गरीब रथ कहती है और यह है भी गरीब रथ के डिब्बों वाली गाड़ी, जिसमे साइड मिडल वाले बर्थ होते है। लेकिन इसके टिकट का किराया वातानुकूलित 3 टियर के नॉर्मल डिब्बों सा वसूला जा रहा है। ऐसा क्यों, क्या कोई इसका स्पष्टीकरण करेगा?

02114 में साइड मिडल बर्थ वाले वातानुकूलित कोच जो गरीब रथ के लिए लगते है, वही लगे है। आरक्षण चार्ट देख लीजिए।

यदि रेलवे इसकी वजह संक्रमण काल मे सभी तरह की रियायतें बन्द की है अतः गरीब रथ के किराए भी रियायती नही हो सकते ऐसी दलील करती है तो क्या मध्य रेलवे के यात्रिओंको ही सारी रियायतें बन्द की गई है क्या, इसका उत्तर दीजिएगा। क्योंकि और भी गरीब रथ एक्सप्रेस भारतीय रेलवे के अंतर्गत चल रहे है। उदाहरण के लिए 02063/64 पूरी यशवंतपुर पूरी स्पेशल इसके 1500 किलोमीटर के अंतर के लिए भारतीय रेलवे के कमर्शियल सर्क्युलर नम्बर 65/2019 dt 31/12/2019 effective from 01/01/2020 के हिसाब से बेस फेयर 985 रुपए और अलग अलग चार्जेस मिलाकर कुल किराया पूरी से यशवंतपुर के लिए 1150 लग रहा है।

दूसरी गाड़ी है, 02187/88 जबलपुर मुम्बई जबलपुर गरीबरथ एक्सप्रेस। जबलपुर से मुम्बई का अंतर है 996 किलोमीटर और इसका बेस किराया है 766 रुपए, अन्य चार्जेस जोड़कर कुल किराया होता है 920 रुपए।

02187 जबलपुर मुम्बई गरीबरथ का किराया
जबलपुर मुम्बई गरीब रथ के किरायोंका विवरण

मगर 02113/14 पुणे नागपुर पुणे गरीबरथ का किराया देखिए। पुणे से नागपुर का अंतर है 891 किलोमीटर, बेस किराए 1110 रुपए अन्य चार्जेस मिलाकर कुल किराया 1255 रुपए। यदि इस किरायोंको गरीबरथ के बेस किराए से कलक्युलेट किया जाए तो 717 रुपए ही लगेंगे। अन्य चार्जेस में 40 रुपये आरक्षण, 45 रुपये सुपरफास्ट और gst के 40 रुपये कुल योग हुवा 845 रुपए मात्र और मध्य रेलवे वसूल रही है 1255 यानी 410 रुपए ज्यादा। बताइए यह कौनसा न्याय है?

पुणे नागपुर 02113 गाडीके वातानुकूलित 3 टायर के किराए, जबकि कोचेस सारे गरीब रथ के है।
किरायोंका विवरण
notes.gon.in रेलवे की वेबसाइट पर 02114 का जिक्र गरीबरथ ऐसा है।

इस तरह हम 02063/64 पुरी यशवंतपुर पुरी स्पेशल के भी किराए गरीबरथ के किराए चार्ट से ही वसूले जा रहे है इसका भी सबूत दे सकते है। लेकिन प्रश्न यह है भारतीय रेल में इस तरह का भेदाभेद क्यों किया जा रहा है? क्या मध्य रेलवे ही यात्रिओंके साथ नाइन्साफ़ी कर रही है?

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दौंड पुणे दौंड मेमू डेमू सेवा इसी सप्ताह से शुरू होगी।

गत 10 महीनोंसे बन्द सवारी गाड़ियोंके बाद अब दौंड पुणे के बीच शुरू किए जाने के आसार है। आपको ज्ञात होगा पुणे दौंड यात्री संगठन ने इन डेमू, मेमू गाड़ियोंको शुरू करने हेतु, 20 जनवरीसे रेल रोको आंदोलन की चेतावनी जारी की थी।

इस सम्बन्ध में मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार का बयान है, राज्य सरकार से रेलवे को इन गाड़ियोंको चलाने की अनुमति मिल गयी है और रेलवे बोर्ड से आगे की कार्यवाही के लिए प्रस्तावित की जा चुकी है। इसी सप्ताह 5 जोड़ी गाड़ियाँ शुरू किए जाने की तैयारी है।

शुरुवात में मुम्बई उपनगरीय गाड़ियोंके तर्जपर केवल अत्यावश्यक सेवाए देने वाले यात्रिओंके लिए ही इन गाड़ियोंमे यात्रा किए जाने की अनुमति रहेगी। दौंड पुणे प्रवासी संघ के विवेक देशपाण्डे ने कहा है, केवल जरूरी व्यक्तियोंको ही यात्रा के सम्मतिपत्र दिए जाएंगे, पुलिस कार्यालय से क्यु आर कोड्स की पासेस जारी की जाएगी। करीबन 1300 यात्रिओंको सर्वप्रथम इन गाड़ियोंसे यात्रा करने की अनुमति मिल सकती है।

आशा है, रेल प्रशासन इसी तरह बाकी भी खण्डोंपर जरूरत के हिसाब से छोटे अंतर की गाड़ियाँ शुरू करे। भुसावल विभाग में भुसावल इगतपुरी, भुसावल बडनेरा और भुसावल खण्डवा के बीच मेमू ट्रायल्स शुरू किए जाने की चर्चा है।

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हाय! ये कैसा झीरो बेस? जिस किसी मकसद से लाया गया, वहाँतक पोहोचेगा भी?

रेल प्रशासन ने झीरो बेस, शून्याधारित समयसारणी की जो हवा तैयार की थी की 10,000 से भी ज्यादा स्टापेजेस रद्द किए जाएंगे, गाड़ियाँ अब सरपट चलेंगी, लेकिन ऐसा किसी ट्रेनोके समयसारणी में अभी तक तो नज़र नही आया है। यह बात और है की रेलवे ने यह अधिकृत जाहिर भी नही किया है की यही शून्याधारित समयसारणी है।

संक्रमण काल का रेल बन्द, रेलवे को अपने परिचालन में आमूलचूल बदलाव लाने के लिए सुनहरा वक्त था। इस वक्त में, रेलवे चाहती तो अपनी सुपरफास्ट गाड़ियोंकी परिभाषा बदल सकती थी। जगह जगह पर राजनीतिक दबावोंके चलते, हर 25, 50 किलोमीटर के बीच के स्टापेजेस खत्म किए जा सकते थे। लेकिन उससे उन्हें अभी भी छुटकारा नही मिल सका है।

लम्बी दूरी की गाड़ियाँ चल रही है और सारी सवारी गाड़ियाँ बन्द है, उनके जगहोंपर उन्ही गन्तव्योंके बीच इण्टरसिटी एक्सप्रेस का नियोजन है। पर समझ नही आ रहा है, इस योजनाको जामा क्यों नही पहनाया जा रहा? कम अंतर की रेल यात्रा करनेवाले यात्री बेहद परेशान है, आक्रोशित है, आंदोलन पर उतर आए है। कई छोटे स्टेशनोंके बीच रोज़ानावाले यात्री ज्यादा स्टापेजेस वाली एक्सप्रेस गाड़ियोंमे जबरन और बिना टिकट के ही यात्रा करने लग गए है। 5,50 किलोमीटर के सड़क मार्ग से यात्रा करनेपर लगने वाले 80, 100 रुपए रोजाना खर्च करने की आम जनता की हैसियत नही है। इस तरह गैरकानूनी यात्रा करने के लिए ऐसे लोग और भी कई तरह की जोखिम भी उठा रहे है। चलती गाड़ी में चढ़ना, उतरना। प्लेटफॉर्म के बाहर निकलने के बाद गाड़ी में चढ़ना, आउटर एरिया से उतर कर रेल पटरियोंसे स्टेशन के बाहर छुपे मार्गोंसे जानाआना करना इत्यादि। रेल प्रशासन की इच्छा शक्ति होनी चाहिए ऐसे मार्गोंको तत्परतासे बन्द करना चाहिए था लेकिन वह हो न सका।

आज तमाम लम्बी दूरी की गाड़ियोंके रेल यात्री राहत की साँस ले रहे है और इसकी वजह है कम दूरी के पासधारक इन रेलोंमें नही है। अनारक्षित यात्री आरक्षित डिब्बों में नही है। वे चाहते है लम्बी दूरी की गाड़ियाँ सदैव ऐसे ही चलना चाहिए लेकिन क्या यह सम्भव है? क्या रेलवे ग़ैरउपनगरिय क्षेत्रोंसे मासिक पासधारकोंकी लम्बी दूरी के आरक्षित डिब्बों में अनाधिकृत प्रवेश को रोक सकेगी? इसका केवल एक ही रास्ता है। लम्बी दूरीकी गाड़ियोंके निकटतम अन्तरोंमें स्टापेजेस को हटाना और इसके ऐवज में इण्टरसिटी गाड़ियोंमे इज़ाफ़ा करना। तब ही यह सम्भव हो पाएगा।

पासधरकोंके लिए कई नियम है। जैसे की पासेस को जोड़ जोड़ कर लम्बी यात्रा करने की मनाही ( क्लबिंग ऑफ पास ) पासधारक अलग अलग खण्डोंपर पास लेकर 400 से 500 किलोमीटर का जानाआना करते है। ग़ैरउपनगरिय खण्डोंपर 150 किलोमीटर की पास मिलती है। भुसावल से मुम्बई, नागपुर, भोपाल ऐसे शहरोंके लिए 3 पास का क्लब करना आम बात है। हालांकि मासिक पास बीते 10 माह से बन्द है, लेकिन जब भी शुरू होगी उस पासधारक की पास को आधारकार्ड से संलग्न की जाती है तो इससे आसानीसे छुटकारा मिल सकता है। कोई भी व्यक्ति दो या दो से ज्यादा पास नही निकाल पाएगा।

हम रेल प्रशासन की इस मामले में मजबूरी समझते है, लेकिन आम यात्री ने भी इन चीजोंको बेहतर ढंग से समझना चाहिए। 25 किलोमीटर का सवारी गाडीका इकतरफा किराया मात्र 10 रुपये है, याने एक माह के कुल 30 दिनोंके 60 फेरोंके रुपए लगते है 600 केवल वहीं इतने ही अंतर की मासिक पास का चार्ज है 195 रुपए मात्र। इसमें भी ग़ैरउपनगरिय क्षेत्रोंमें एक्सप्रेस से यात्रा करने के लिए इन यात्रिओंको अनुमति है। समझ लीजिए हमारे मासिक पास के गणित में सवारी गाड़ी की जगह एक्सप्रेस रखते है तो? तो एक्सप्रेस के इकतरफा किराए 30 रुपए, 60 फेरीक़े हुए 1800। अब बताइए कहाँ 195 रुपए में महीनाभर रेल यात्रा और कहाँ रुपए 1800 के टिकट किराए? इसके बाद भी पास के मूल्य में मामूली भी बदलाव हुवा तो काफी हो हल्ला होता है और रेल प्रशासन को पहले अपनी व्यवस्था सुधारने की दुहाई दी जाती है।

रेलवे ऐसे भी यात्री गाड़ियोंसे कुछ भी कमाई हासिल नही कर पाती, यहाँतक की उसका खर्च भी नही निकलता। ऐसे में रेलवे अपने घाटे से उबरने के लिए निजी गाड़ियाँ, वातानुकूलित डिब्बे की हमसफ़र, तेजस गाड़ियाँ, स्टेशनोंके निजीकरण, गाड़ियोंके किरायोंमे सुपरफास्ट चार्जेस, विशेष गाड़ियोंके विशेष किराए, स्टेशन डेवलपमेंट चार्जेस, वेटिंग रूम्स का निजीकरण करके उससे उगाही इत्यादि तिकड़में आजमाई जाती है।

आपने अपने आरक्षित, अनारक्षित टिकटोंपर छपा संदेश तो देखा होगा ” रेलवे आपसे किरायाके कुल 57 फीसदी ही मूल्य ले रही है” क्या पूरा किराए देने के बाद भी इस तरह का छपा टिकट लेकर यात्रा करना शर्मिंदगी नही? क्या हम रेलवे को पूरा किराया नही देना चाहते या रेलवे के पास ऐसी व्यवस्था नही है कि पूरा 100 फीसदी किराया वसूल कर सके? यात्रिओंके सोचने, समझने की सख्त जरूरत है। किसी व्यवस्था पर कितना बोझ बनाया जा सकता है? की वह चरमरा न जाए, छटपटाहट में आपके किरायोंकी रियायत बनी रखने के लिए उसे कमाई के लिए अलग अलग हथकंडों को खोजना पड़े?

रेलवे प्रशासन के पास अब भी मौका है, वक्त रहते कड़ाई से निर्णय कर इधर उधर के चार्जेस लगाकर, अलग अलग हथकंडे आजमाकर अपना राजस्व बढाने के बजाय अपनी किरायोंकी सूची को अद्ययावत करे, परिचालन सुव्यवस्थित करे, रियायती सवारी गाड़ियोंके स्थान पर छोटी छोटी इण्टरसिटी गाड़ियाँ ले आए, रियायतें दी जाती है तो उन्हें भी यथयोग्य नियमनोंके साथ संलग्न करें। यह अब मुश्क़िलोंके चलते, बेहद जरूरी होता चला जा रहा है।

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रेलवे की यात्री किराया रियायत सूची, concessions.

यूँ तो अभी भी कई कैटेगरी प्रकारोंकी यात्री किरायोंकी रियायतें स्थगित ही है, जिसमे वरिष्ठ नागरिक रियायत भी शामिल है, लेकिन मरीजोंके लिए, दिव्यांग यात्रिओंकी रेल किराया रियायतें जारी है, उपलब्ध है। हमारे पाठकोंकी गुज़ारिश थी उन्हें रियायतोंकी सूची फिरसे चाहिए थी, अतः प्रस्तुत है।

उपरोक्त सूची मनोज सोनी @manojjnsoni द्वारा प्रेषित