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रेलवे के आरक्षण ऍप, वेबसाइट पर यात्रिओंको बेहतर मिले सुविधा

हाल ही में भारतीय रेल ने अपने संगणकीय आरक्षण टिकट बुकिंग्ज की वेबसाइट irctc.co.in और आईआरसीटीसी ऍप में व्यापक बदलाव किया।

इस बदलाव में वेबसाइट और ऐप की कम समय मे ज्यादा यात्रिओंके बुकिंग किए जाने की गति और क्षमता निस्संदेह बेहतर हुई है, मगर यात्रिओंकी रेल प्रशासन से कुछ अधिक की अपेक्षाएं थी वह पूरी नही की गई है, अपितु नया सुधारित ऐप चलाते वक्त सुविधाओंकी कमी ज्यादा महसूस होती है। किसी भी ऐप/ वेबसाईट को जब अद्यतन, अपडेट किया जाता है, तो सहज है की उसकी तुलना उसी के पुराने संस्करण से की जाए और इसी में नए ऐप की कमियाँ खलती है।

सर्वप्रथम जब स्टेशन सर्च किया जाता है, पहले ऐप में स्टेशन कोड डालते ही स्टेशन का नाम सिलेक्ट हो जाता था। नए ऐप में ऐसा नही होता। स्टेशन की स्पेलिंग के 3, 4 अक्षर डाले तभी नाम आएगा। कई बार स्टेशनोंके नाम की स्पेलिंग उसके उच्चारण से भिन्न होती है, उदाहरण के लिए मेहसाणा लीजिए। इसकी स्पेलिंग mehsana न होकर mahesana याने महेसाणा इस प्रकार है। ठीक वैसे ही बठिण्डा और भटिंडा, शिमोगा या शिवमोग्गा इस तरह है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन का कोड DDU है और पुराना नाम मुगलसराय है, लेकिन सर्च में पण्डित से शुरुवात करो तो सर्च नही होता।

दूसरा स्टेशनोंके बीच चलनेवाली गाड़ियोंकी सूची किसी तरह का कोई अनुक्रम का पालन नही करती, जो पहले पुराने ऐप में अपनेआप क्रमबद्ध आती थी। हालाँकि नए ऐप में sort by ऐसा ऑप्शन है, जिसे हर बार, हर सर्च में सिलेक्ट करना पड़ता है, डिफॉल्ट नही आता, हो सकता है इसका कोई बग हो, सुधारना बाकी हो।

आरक्षण का कोटा सिलेक्शन गाड़ियोंके साथ नही है। यदि आपने किसी दो स्टेशनोंके बीच आरक्षण उपलब्धता जानने का प्रयत्न किया तो सूची डिफॉल्ट जनरल कोटे की आएगी। कोटा बदलकर तत्काल या अन्य देखना हो तो बैक जाकर कोटा का चुनाव करना होगा, सीधे गाडीके अलग अलग कोटा आप सूचीमे नही देख सकते जो की पहले ऐप में मुमकिन था।

सबसे महत्वपूर्ण दरकार थी विविध कोटा की जानकारी की। यह बात समझने के लिए उसके विस्तार में आपको लिए चलते है। रेलवे के आरक्षण टिकटोंमे आरक्षित कोटे और उनके कोड्स अलग अलग होते है। सर्वसामान्य आरक्षण कोटे में conf, gnwl, pqwl, rlwl और rswl इस तरह कोड होते है, यह सारे आरक्षित टिकटोंके लिए समान रूपसे लागू होते है फिर वह आपका रियायती टिकट हो या महिला टिकट हो। केवल तत्काल के लिए tqwl यह अलग कोड है।

अब पहले ऐप में यात्रिओंको सूची में ही दिख जाता था की उसकी टिकट वेटिंग लिस्ट में याने wl तो है मगर किस प्रकार wl है, gnwl याने जनरल वेटिंग लिस्ट है या rlwl रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट है। अब जानकार यात्री इसका फर्क समझते है कि gnwl याने जनरल वेटिंग लिस्ट गाडीके प्रारंभिक स्टेशन से जारी की जाती है तो rlwl किसी बीच वाले स्टेशन से, तो rswl रोड साइड वेटिंग लिस्ट है। जनरल वेटिंग लिस्ट gnwl वाली वेटिंग लिस्ट में टिकट कन्फर्म होने की संभावना भरपूर होती है वही rlwl और rswl में बेहद कम। पहले वाले पुराने ऐप में वेटिंग लिस्ट कोड से पता चलने की वजह से यात्री यह प्रयत्न करता था की उसे कन्फर्म टिकट नही मिलता है तो कमसे कम जनरल वेटिंग लिस्ट का तो भी टिकट मिल जाए जो की नए सुधारित ऐप में सम्भव नही है। नए सुधारोंमें इस व्यवस्था को रेल प्रशासन ने निकाल दिया है। अब केवल wl ऐसा ही कोड सूची में दिखाई देता है।

आम यात्रिओंकी, आईआरसीटीसी के ऐप/वेबसाईटो के अपडेट आने के पहले ही ऐसी अपेक्षा थी की आरक्षण करते वक्त जब वह ट्रेन के शेड्यूल याने समयसारणी जानने के लिए क्लीक करें तो उसे समयसारणी के साथ साथ किस किस स्टेशन पर उपरोक्त गाड़ी के कोटे दिए गए है यह समझ आ जाए। हमे लगता है, एक उपभोक्ता का यह जानने का अधिकार भी है, की उसे टिकट खरीदने के पहले क्या क्या पर्याय उपलब्ध है, जिसमे उसकी प्रतिक्षासूची वाली टिकट कन्फर्म हो सकती है। यदि वह प्रारंभिक स्टेशन से टिकट खरीदता है, जिसमे उसे gnwl जनरल वेटिंग लिस्ट टिकट मिलेगी और कन्फर्मेशन के आसार ज्यादा से ज्यादा रहेंगे तो उसे वैसे टिकट लेने का पर्याय यथायोग्य तरीकेसे दिखाई देना चाहिए। ऐसा टिकट खरीदकर बादमे वह अपने यात्रा शुरू करने का स्थान बदल सकता है ( change of boarding station ) इस सुविधा का उपयोग कर के वह रेलवे को अतिरिक्त भुगतान तो कर ही रहा है और प्रारंभिक स्टेशनसे उसके बोर्डिंग स्टेशन तक की बुकिंग दोबारा बुक किए जाने के लिए फिरसे खाली भी कर रहा है।

आशा है, रेल प्रशासन अपने ऐप / वेबसाईटोंमे सकारात्मक सुधार कर यात्रिओंको टिकट आरक्षण करने के अच्छे पर्याय उपलब्ध कराएंगे और साथ ही अपने राजस्व में अमूल्य ऐसी वृद्धि भी पाएंगे।

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राजस्थान की और दो लोकप्रिय गाड़ियाँ चलने को तैयार

02093/02094 पूरी जोधपुर पूरी साप्ताहिक स्पेशल पूरी से 20 जनवरी एवं जोधपुर से 23 जनवरीसे शुरू की जा रही है।

02037/02038 पूरी अजमेर पूरी द्विसाप्ताहिक स्पेशल पूरी से 21 और अजमेर से दिनांक 26 से शुरू होने जा रही है।

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उत्तर पश्चिम रेल्वेकी 4 गाड़ियाँ, जिसमे रणकपुर एक्सप्रेस भी है, शुरू होने जा रही है।

04707/08 बीकानेर दादर बीकानेर रणकपुर स्पेशल प्रतिदिन दिनांक 17/18 जनवरीसे शुरू की जा रही है। खास बात यह है, यह गाड़ी अब बांद्रा टर्मिनस के बजाय दादर – बीकानेर के बीच चलेगी।

04725/26 भिवानी मथुरा भिवानी प्रतिदिन स्पेशल, जी, 54792/54791 भिवानी मथुरा सवारी गाड़ी का एक्सप्रेस में रूपांतरण, दोनों ओरसे दिनांक 18 जनवरीसे शुरू हो रही है।

09741/42 जयपुर बयाना जयपुर प्रतिदिन स्पेशल, जी आप ठीक समझे 59721/59722 सवारी गाड़ी का एक्सप्रेस में रूपांतरण, दोनों ओरसे दिनांक 18 जनवरीसे शुरू हो रही है।

04727/28 श्रीगंगानगर तिलक ब्रिज श्रीगंगानगर प्रतिदिन स्पेशल, यह भी 54767/68 सवारी गाड़ी का ही एक्सप्रेस रूपांतरण है, दिनांक 18/19 से शुरू की जा रही है।

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लीजिए, दानापुर रेल डिवीजन मे द्वितीय श्रेणीके साथ, अब तो सीजन पासधारक भी रेल यात्रा करेंगे।

पूर्व मध्य रेलवे में एक तरफ लगभग सभी इण्टरसिटी और कम दूरी वाली गाड़ियाँ शुरू कर दी गयी है, वहीं वरिष्ठ विभागीय वाणिज्य अधिकारी का MST पास को लेकर ट्वीट भी जारी हुवा है। टवीट में अधिकारी महोदय कहते है मासिक पास धारक, द्वितीय श्रेणी टिकट धारी को रेल यात्रा करने की अनुमति दी जा रही है। और आश्चर्य की बात यह है, उसके लिए उन्होंने जो पत्र जोड़ा है, वह मध्य और पश्चिम रेलवे उपनगरीय सेवाओं के लिए जारी किया रेलवे का परीपत्रक है। यहाँ मध्य/पश्चिम रेलवे के न सिर्फ कम दूरी के यात्री बल्कि उपनगरीय गाड़ियोंके सामान्य यात्री भी रेलवे से यात्रा कर नही पा रहे, परेशान है। आंदोलन, रेल रोको करने की नौबत आ रही है।

रेल प्रशासन अब तो मध्य और पश्चिम रेलवे के लाखों रोजाना रेल यात्रिओंकी परेशानी समझे और उनकी माँगोपर सहानुभूतिपूर्वक निर्णय ले।

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क्या रेल प्रशासन को आंदोलन कराना ही मान्य है?

संक्रमण काल के रेल बन्द के बाद, 12 मई से रेल गाड़ियाँ पटरियों पर दौड़ना शुरू हो गयी और लगातार इनकी संख्या बढ़ती चली जा रही है। लम्बी रेल यात्रा करनेवाले यात्रिओंकी तो हर तरह से सुविधा हो गयी मगर छोटे अन्तरोंमें और प्रतिदिन रेल यात्रा करने वालोंका क्या?

आम तौर पर रेल में लम्बी दूरी की यात्रा करनेवाले यात्री अपनी यात्रा आरक्षण कर के ही किया करते है, अतः उनको विद्यमान “सिर्फ आरक्षित यात्री ही रेल में यात्रा कर पाएंगे” इस रेल प्रशासन के नियम से कोई परेशानी नही है उल्टा उनको प्रतिदिन अप डाउन करनेवालोंकी भीड़ से निजात ही मिली है। परन्तु यह अप डाउन वाले बेचारे जाए कहाँ? किससे लगाए अपने सहायता की गुहार?

इस विषयपर हम बार बार अपने ब्लॉग के जरिए रेल प्रशासन को इन यात्रिओंकी मदत कीये जाने की दुहाई दे चुके है। सारी गाड़ियोंमे आरक्षित टिकट धारक ही यात्रा कर पा रहे है। द्वितीय श्रेणी टिकिटिंग सर्वथा बन्द कर दी गयी है तो मासिक पासधारी यात्री की तो सुनवाई ही नही। रेल यात्रा की अनुमति न होने के कारण यह बेचारे महीनेभर का अग्रिम यात्री किराया दे कर यात्रा करनेवाले लोग सड़क मार्ग से महंगी और असुरक्षित यात्रा करने के लिए मजबूर है। बहुतांश भारत मे यही स्थिति है। कई क्षेत्र में यह लोग संगठित न होने के कारण इनकी मांग जाहिर तक नही हो पा रही है।

आज यह विषय दोबारा यहाँपर लाने का कारण है, दौंड – पुणे खण्डपर सवारी, डेमू, मेमू की बहाली हो इस लिए वहाँकी स्थानिक रेल यात्री संघ का रेल रोको आंदोलन की चेतावनी देना यह है। किसी भी रेल प्रेमी व्यक्तियोंको रेल को असंवैधानिक तरिकोंसे रोका जाए यह कदापि अच्छा नही लगता इससे न सिर्फ उस क्षेत्र के रेल परिचालन बाधित होते है, बल्कि हमारे नैशनल करियर भारतीय रेल की प्रतिमा भी मलिन होती है। लेकिन एक तरफ दक्षिण पश्चिम रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में कम दूरी वाली गाड़ियाँ शुरू कर दी गयी है, द्वितीय श्रेणी टिकट के काउंटर्स खोल, बिक्री शुरू हो गयी है, यहाँतक की प्लेटफार्म टिकट भी 10/- रुपए में मिलना शुरू हो गए है। तब बाकी बचे क्षेत्रीय रेलोंमें यह सारी व्यवस्था शुरू करने में क्या परेशानी है?

माना की सवारी गाड़ियाँ नही चलाई जा रही, उन्हें भी एक्सप्रेस बनाकर चलाया जा रहा है परंतु कुछ तो व्यवस्था है, की कम दूरी वाले यात्री रेल से यात्रा तो कर पा रहे है। स्थानिक सांसद अब इन यात्रिओंकी बात लेकर रेल प्रशासन से बातचीत कर रहे है। रेल प्रशासन आन्दोलकों को रेल रोको नही किया जाए ऐसी अपील कर रहा है। लेकिन हमारा प्रश्न फिर से यही है, प्रशासन यात्रिओंकी मजबूरी क्यों नही समझता, क्या उसे आंदोलन कराना ही मन्जूर है?

उपरोक्त तस्वीरे, अखबार दैनिक लोकमत, पुणे सकाळ indiarailinfo.com से साभार