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मध्य रेलवे भुसावल डिवीजन की बदली हुई समयसारणी

मध्य रेलवे भुसावल डिवीजन की कुछ गाड़ियोंके समय मे भारी फेरबदल हुवा है। यात्रिओंको बदली हुई समयसारणी ज्ञात हो इसीलिए यात्रिओंकी सुविधा हेतु मध्य रेलवे ने इसे ट्विटर पर प्रकाशित किया है। अतिरिक्त जानकारी के लिए यात्री NTES और IRCTC के ऐप से अपनी गाड़ियोंके समय की जानकारी प्राप्त कर सकते है या रेलवे की हेल्पलाइन 139 पर सम्पर्क करें।

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पूरी की ओर चलनेवाली 5 त्यौहार स्पेशल गाड़ियोंमे बदलाव

02866/65 पूरी लोकमान्य तिलक टर्मिनस पूरी साप्ताहिक त्यौहार स्पेशल

02973/74 गांधीधाम पूरी गांधीधाम साप्ताहिक त्यौहार स्पेशल

02827/28 पूरी सूरत पूरी साप्ताहिक त्यौहार स्पेशल

02880/70 भुबनेश्वर लोकमान्य तिलक टर्मिनस भुबनेश्वर द्विसाप्ताहिक त्यौहार स्पेशल

02857/58 विशाखापट्टनम लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशाखापट्टनम साप्ताहिक त्यौहार स्पेशल

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पूर्णतयः आरक्षित गाड़ियाँ, अभी भी आरक्षित ही रहेंगी।

क्या सोशल मीडिया और क्या अखबारोंके, चैनलोंके रिपोर्टर सारे की सारे ” जनरल टिकट शुरू हो जाएंगे”, “स्टेशनपर से फौरन टिकट लो और यात्रा करो” ऐसे लुभावने शीर्षक डाल, अपनी TRP में इजाफे बढ़वाने के पीछे लग गए।

दरअसल रेल बोर्ड के अंतर्गत पत्रव्यवहार का यह मसौदा अचानक सोशल मीडिया में आ गया और यू ट्यूबरोंने उसे हाथोंहाथ पसारना शुरू कर दिया। जिसने उसने अपनी अपनी बुद्धि और ज्ञान का इस्तेमाल कर यात्रिओंको चौकानेवाले हैडिंग्ज डाल कर फूल टु भ्रमित किया। यात्री धड़ाधड़ रेलवे की हेल्पलाइन में फोन घुमाने लगे, बताइए द्वितीय श्रेणी की बुकिंग्ज कब शुरू हो रही है, जनरल क्लास में यात्रा की टिकट कैसे मिलेगी, हमारे UTS में तो टिकट नही मिल रही? भैय्या, जब गाड़ियोंमे सेकेण्ड क्लास है ही नही तो उसकी टिकट बिकेगी कैसे और आप खरीदोगे कैसे? खैर! रेल प्रशासन को फौरन एक स्पष्टीकरण परीपत्रक के स्वरूप में डालना पड़ा, जो आपके लिए प्रस्तुत है।

इस पत्र में यह स्पष्ट कर दिया गया है, की जो गाड़ियाँ हाल में चल रही है चाहे वह स्पेशल हो या त्यौहार स्पेशल्स पूर्णतयः आरक्षित थी वह उसी प्रकार चलेंगी। सभी सेकन्ड क्लास और SLR में भी सिटिंग के आरक्षण याथवत चलते रहेंगे।

मित्रों, रेल प्रशासन ने न ही द्वितीय श्रेणी शुरू करने के बारे में बात की और न ही सवारी गाड़ियोंके बारे में। इसका अर्थ स्पष्ट है, फिलहाल आरक्षित व्यवस्थाओंके साथ ही गाड़ियाँ चलेंगी। यात्रिओंसे हमारा नम्र निवेदन है, रेलवे हेल्पलाइनसे या रेलवे की अधिकृत वेबसाइटों से रेलवे की जानकारी सुनिश्चित कर लीजिए।

एक बात यात्रिओंने और नोट करनी है, रेलवे ने अपनी समयसारणी जारी नही की है। जितने भी बदलाव रेलवे के समयोंमे और परिचालन में किए जा रहे है वह सारे रेलवे की अधिकृत वेबसाइटों पर उपलब्ध किए जाते है। और ध्यान रखिए यह बदलाव बहोत तेजी से और बारम्बार किए जा रहे है, अतः अपनी रेल यात्रा शुरू करने से पहले अपनी नियोजित गाड़ी के बारे में जान लेना अति आवश्यक हो गया है।

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क्यों नही शुरू हो पा रही सवारी गाड़ियाँ?

हाल ही मे सोशल मीडिया में रेलवे का एक पत्र वायरल हुवा। पत्र का मसौदा यह था, की द्वितीय श्रेणी के टिकटोंकी बिक्री टिकट वेंडिंग मशीन्स और UTS पर विविध क्षेत्रीय रेलवे अपनी जरूरत के अनुसार शुरू कर सकती है।

अब बात यह है, तमाम रेल गाड़ियाँ, एक दो रेलवे के जोन छोड़ दिए जाय तो पूर्णतयः आरक्षित आसन व्यवस्थाओंके साथ चलाई जा रही है। यहाँतक की सेकेण्ड क्लास आसन की भी 2S वर्ग के तरह आरक्षण किया जाता है। डेमू, मेमू और सवारी गाड़ियाँ नॉन सबर्बन खण्डोंपर लगभग बन्द ही है।

इसके पीछे क्या कारण हो सकते है, चलिए आज चर्चा करते है। सबसे महत्व की बात यह है, जब से संक्रमण और लॉक डाउन शुरू हुवा और गाड़ियाँ बन्द की गई थी, उन्हें वापस शुरू करने के लिए राज्योंकी और स्थानिक प्रशासन की अनुमति अनिवार्य कर दी गयी थी। आज भी यह व्यवस्था कायम है। यदि स्थानिक प्रशासन चाहे और सोचें की संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है तो रेलवे को पत्र देकर सवारी गाड़ियाँ और द्वितीय श्रेणी अनारक्षित टिकिटिंग शुरू करने की अनुमति रेलवे को दे सकती है।

इस प्रकार की अनुमति देने में इतना सोच विचार इसलिए किया जा रहा है, की द्वितीय श्रेणी टिकिटिंग में किसी भी यात्री की कोई पहचान रेलवे के पास नही रहती। केवल टिकट यही यात्री की रेलवे में या रेल परिसर में प्रवेश किए जाने की वैधता रहेगी। वह कौन है, कहाँसे आया है, कहाँ जाना चाहता है, उसका सम्पर्क का पता, फोन कुछ भी रेल प्रशासन के पास नही होता और यही सबसे बड़ी तकलीफ इस द्वितीय श्रेणी टिकिटिंग में रहेगी। संक्रमण की स्थिति यदि उत्प्रन्न होती है, तो किसी भी तरह की कोई “कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग” नही हो पाएगी।

इसके बाद दूसरा मुद्दा खड़ा होता है यात्रीयोंकी बहुतायत संख्या का। रेलवे और स्थानिक प्रशासन को डर है, की संक्रमण के पहले वाली भीड़ वाली स्थितियां रेल गाड़ी के द्वितीय श्रेणी के डिब्बों में फिर से दिखाई देने लगेगी। संक्रमण के पहले सेकेण्ड क्लास में 90 यात्री क्षमता के डिब्बों में 150-200 यात्री यात्रा करते पाए जाना आम दृश्य था। इतनाही नही स्लिपर क्लास में भी प्रतिक्षासूची के यात्री बेहिचक सवार हो जाते थे। सीजन पास धारक और रेल कर्मचारियों का तो पूछना ही क्या? वही बात डेमू, मेमू, सवारी गाड़ियाँ और सबर्बन लोकल्स की है। अभी तक भी महाराष्ट्र राज्य में मुम्बई की सबर्बन गाड़ियोंमे आम यात्री को यात्रा करने की अनुमति नही दी गयी है। अलग अलग वर्ग फिर वह राज्य, केंद्र शासन के कर्मचारी हो या मेडिकल विभाग से सम्बंधित हो या कानून विभाग से जुड़े लोग ही यात्रा कर सकते है। कुछ समय का स्लॉट महिला यात्रिओंके लिए भी खोला गया है, लेकिन पहले जिस तरह टिकट ले ले कर सरे आम यात्री लोकल्स में घूमता था उसपर अभी भी बंधन है।

कुल मिलाकर यह है, की “अब भी दिल्ली दूर है” यानी अब भी आम यात्री के लिए द्वितीय श्रेणी का टिकट ले कर सर्र से रेलवे स्टेशन जा कर यात्रा के लिए निकल जाना प्रतिबंधित है। अनुमति का सर्क्युलर भले ही निकल जाए, मगर जब तक राज्य शासन और स्थानिक प्रशासन हरी झंडी नही देता लोकल, सवारी गाड़ियाँ रेलवे स्टेशनोंसे नही खुलने वाली।

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रामेश्वरम ओखा रामेश्वरम त्यौहार विशेष गाड़ी

06733/34 रामेश्वरम ओखा रामेश्वरम त्यौहार विशेष केवल 3 फेरे करेंगी। रामेश्वरम से 11,18 और 25 दिसम्बर शुक्रवारको निकलेगी और ओख़ासे 15, 22 और 29 मंगलवारको निकलेगी। यह गाड़ी पूर्णतयः आरक्षित आसन व्यवस्थाओं के साथ, विशेष किराया दर से चलाई जाएगी।