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भारतीय रेल टनलोंकी दुनिया

भारत मे रेलवे का DFC डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बहोत जोरशोर से चल रहा है।

आज हम WDFCC के दादरी मुम्बई JNPT लाइन में सोहना हरियाणा के पास बनाए गए एक किलोमीटर लम्बे टनल की तस्वीरों को प्रस्तुत कर रहे है। यह कार्य हाल ही सम्पन्न हुवा है। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर जायंट लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी ने इसे निर्धारित अवधि एक वर्ष से पहले ही कम्प्लीट कर दिया है। इस टनल से दादरी एवं रेवाड़ी जोड़े जा रहे है। आप यह जानकर गर्व होगा, यह दुनिया पहली डबल स्टैक कंटेनर ढोने वाली और विद्युतीकरण वाली रेलवे लाइन है।

जरा इन्हें भी देख लीजिए,

यह है TBM टनल बोअरिंग मशीन दुनिया की सबसे बड़ी साइज की टनल बोअरिंग 17.5 मीटर साइज है इसकी। मुम्बई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए 14.5 मीटर वाली 3 TBM का इस्तेमाल किया जा रहा है और मुम्बई के समुद्र तटीय रोड़ के लिए 12.5 मीटर के टनल बनाए जाते है।

News & photo courtesy : Sahil Pednekar @sahi11p

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खबर समस्तीपुर, बिहार से है।

समस्तीपुर-दरभंगा रेल खंड के हायाघाट स्टेशन के पास पुल के गर्डर तक बाढ़ का पानी पहुँच जाने के कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस खंड पर अस्थायी रूप से गाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया गया है जिसके कारण निम्न गाड़ियों का मार्ग परिवर्तन/ आंशिक समापन किया गया है l

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अकोला – आकोट मार्ग का CRS निरीक्षण जारी है।

आइए आपको वहीं लिए चलते है। आज CRS निरीक्षण होगा और कल याने 24 को होगी स्पीड टेस्ट। चलिए आज की गतिविधि देखते है।

रिपोर्ट : मनोज सोनी, खण्डवा द्वारा

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यह वीडियो देखिए, आपको हैरत होगी …..

जी हाँ। हैरत ही होगी। अब तक आपने मुम्बई की उपनगरीय गाड़ियोंकी भीड़ देखी थी, यह हमारे उत्तर भारत के गाँवोंके तरफ की भीड़ है।

हम लोगोंकी दिक्कत यह है, रोजगार पर जाने के लिए गाड़ी चाहिए। हम प्रशासन से लक्जरी नही माँग रहे, न ही कोई विशेष व्यवस्था। लेकिन रोजाना छोटे छोटे गावोंके स्टेशनोंसे जो मजदूर, कर्मचारी, विद्यार्थि शाहरोंकी ओर चलते है और शाम में लौटते है, जरा उनके हाल तो देखिए। कहीं रोटी के चक्कर मे जिंदगी न छूट जाए।

“चाहे आप बुलेट ट्रेनवाँ चलाई ले, उ राजधानियां, शताब्दियाँ चलवा लीजिए बाबुसाब, पर हमरा रोज का टुकटुकिया ना बन्द करी” यह हमारे गांव के श्रमिकोंकी माँग है। आए दिन ख़बरोंमें पढा जा रहा है, सवारी गाड़ियोंको एक्सप्रेस बनाया जाएगा। स्टापेजेस हटा दिए जाएंगे। “दो सौ का पास बनाई के रोज सहर जात रहे, दिनभर खड़े रहे, तब जाकर दो जून रोटी मिलत है बाबूजी। इब गाड़ी नाही चलिबे तो हम हु सहर कैसन जाई? बस, टेम्पो से तो का उसे किराया देई और का हम खाई?”

ऐसे ऐसे सवाल, हमारे विकास की तो बोलती ही बन्द हो गयी। इनकी जरूरतें हमारी सोच से कई अलग है। कहाँ हम इनसे हाई स्पीड, नॉन स्टॉप सुपरफास्ट गाड़ियाँ और पाँच तारा, स्टार क़्वालिटी की भोजन व्यवस्था, हाइजेनिक बेड रोल की बातें करें? इनको तो बस गांव और शहर के बीच जानेआने के लिए भले दो पग धरे जाए इतनी ही जगह वाली गाड़ी जिसे वह टुकटुकिया कहते है मिल जाए तो बहोत है।

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पश्चिम बंगाल में तीन दिन पूर्ण लॉक डाउन

पश्चिम बंगाल राज्य शासन ने 23, 25 और 29 जुलाई को राज्यव्यापी सम्पूर्ण लॉक डाउन रखने की घोषणा की है और उसी के तहत रेलवे से उन दिनों पश्चिम बंगाल के राज्य में पोहोंचने वाले यात्रिओंको यह हिदायत दी है कि वह स्टेशनपर गाडीसे उतरने के बाद अपने अपने घरोंको जाने की समुचित व्यवस्था कर ले। पश्चिम बंगाल शासन ने निम्नलिखित परीपत्रक जारी किया है, यात्रीगण कृपया नोट करें।