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आखिर कब तक लगा रहेगा बैन महाराष्ट्र में रेल यात्रा पर।

पूर्ण भारत मे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। देश भर में सब तो नही लेकिन 230 रेलगाड़ियां लगभग रोजाना दौड़ रही है। देश के तमाम राज्योंमें जहाँ से भी रेल चल रही है, उन पर अलग से ऐसा कोई बंधन नही थोपा गया है, सिवाय महाराष्ट्र राज्य के।

महाराष्ट्र में कोई भी यात्री राज्य के भीतर ही भीतर रेल यात्रा नही कर सकता। दरअसल रेलवे प्रशासन ने बिना आरक्षण रेल में यात्रा करने मनाई कर रखी है उसी नियम के तहत महाराष्ट्र राज्य शासन ने रेल प्रशासन को किसी भी यात्री को राज्य अन्तर्गत आरक्षण नही दिया जाए ऐसी योजना कर रखी है।

यह गोंदिया से मुम्बई टिकट लेते वक्त आया हुवा मेसेज है।

यह बात और है कि यात्री किसी पड़ोस के दूसरे राज्य से महाराष्ट्र में आ सकता है या जा सकता है। गोंदिया मुम्बई टिकट आरक्षित नही की जा सकती तो डोंगरगढ़ (छग) से टिकट लेकर यात्री वहाँसे यात्रा शुरू करता है। उसी प्रकार मुम्बई से दूसरे राज्य के स्टेशन का टिकट लेकर राज्य के किसी अपने स्टेशन पर लोग उतर रहे है। जलगाँव जिले के लोग मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से यात्रा शुरू कर रहे है।

संक्रमण रोके जाने हेतु महाराष्ट्र शासन ने यह कदम उठाए है, लेकिन जिनको यात्रा करनी है वह बेचारा क्या करे? राज्य प्रशासन की ओरसे सड़क यातायात के लिए अत्यावश्यक यात्री सेवा हेतु ई-पास जारी किए जाते है, लेकिन हर यात्री के पास निजी वाहन या टैक्सी का किराया चुकाया जा सके इतने पैसे नही होते अतः वो इस तरह के उल्टे सीधे काम करने मजबूर हो रहा है।

वही कथा उपनगरीय गाड़ियोंके लिए भी है। उपनगरीय गाड़ियोंमे सीमित प्रवेश हो, इस हेतु केवल शासकीय कर्मचारियों और कुछ सेवाभावी व्यवसायीयोंको ही वह भी कोड स्कैन कर के ही अनुमति दी जा रही है। मुम्बई की उपनगरीय सेवा मुम्बई से कसारा, कर्जत और पश्चिम में चर्चगेट से लेकर डहाणू रोड तक पसरी हुई है। क्या आम यात्री इन गाड़ियोंसे यात्रा नही कर सकता? उत्तर है नही। बिना अनुमति के गैर शासकीय सेवा वाला व्यक्ति यात्रा नही कर सकता। आज यात्रिओंका गुस्सा इसी बात पर फुट पड़ा।

उपनगरीय यातायात की रिपोर्ट शिवम राजपुरोहित द्वारा प्राप्त

नालासोपारा में रेल रोको आंदोलन.
ST बस नही मिलने से लोगो का फूटा गुस्सा ,जबरन प्लेटफॉर्म पर आए लोग , लॉकल ट्रेन को रोका गया। जी आरपी,आरपीएफ ने भीड़ को प्लेटफार्म से बाहर खदेड़ा।

हम महाराष्ट्र सरकार की मंशा समझते है, लोगोंके प्रति उनकी ज़िम्मेदारी पालने का एहसास भी समझ आता है। लेकिन नियम जब रोजीरोटी के आड़ आने लगे तो जनता भी बेबस हो जाती है। राज्य शासन को चाहिए की अपने इस नियम को समुचित व्यवस्थाओंके साथ पुनर्रचना कर सुधारित रूपमे जारी करे। निजी व्यवसायी, उनके कर्मचारी उनके लिए भी उपनगरीय गाड़ियोंमे यात्रा की जा सके ऐसे अनुमतिपत्र जारी करवाए। जिस तरह निजी वाहन लेकर राज्यान्तर्गत यातायात की जा सकती है, उसी प्रकार अनुमति लेकर रेल यात्रा की भी सेवाएं उपलब्ध कराई जाए।

आशा है, राज्य शासन जनता की माँगोंपर सहानुभूति से विचार कर उचित उपाययोजना करें।

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खुशखबर : अकोला – आकोट CRS का निरीक्षण 23 जुलाई को

अकोला – खण्डवा गेज कन्वर्शन के विवादोंके बीच अकोला – आकोट जो कि बड़ी लाइन बिछ चुकी है उसका CRS निरीक्षण की तारीख जारी हो चुकी है। 23 और 24 जुलाई को यह निरीक्षण होने वाला है।

आप को बता दे, CRS याने कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी रेलवे के सुरक्षा आयुक्त। यह विभाग तमाम रेलवे के निर्माणाधीन कार्य को फाइनल जांच कर, अपनी रिपोर्ट भेजता है और क्लियर करता है तभी इस पर गाड़ियाँ चलाई जा सकती है। सभी सम्बंधित विभाग अपने अपने काम ठीक से कर के अपने स्तर पर उसकी जाँच करके फिर CRS निरीक्षण को काम की फाइनल जाँच के लिए बुलवाते है।

अकोला आकोट के बीच गांधी स्मारक रोड़ और पाटसुल नामक स्टेशन है। पहले मोटर ट्राली से निरीक्षण किया जाएगा और बादमे स्पीड ट्रायल होगी। आशा है, जल्द ही इस निरीक्षण में क्लियर होने के बाद अकोला आकोट के बीच गाड़ियाँ शुरू हो जाएगी। अकोला – पूर्णा के बीच चलने वाली गाड़ियाँ आकोट तक एक्सटेंड हो सकती है।

CRS के कार्यक्रम का चार्ट

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मन्थली सीजन टिकट सहुलियित किसकी, परेशानी किसको।

मन्थली सीजन टिकट याने MST यह डेली कम्यूटर्स, रेल मे तय दूरी के लिए रोजाना चलनेवालोंके लिए वरदान है। रोज कतार में लगकर टिकट लेने से मुक्ति यह इसका सबसे बड़ा फायदा है। लेकिन हमारे MST धारी मित्र इसका बहुतायत में लाभ उठाते है, कैसे? जानते है।

डेली अपडाउन करने की वजह से MST यात्री सभी गाड़ियों, उनके स्टाफ़ से भलीभाँति परिचित होते है। उनको गाड़ियोंमे फलाँ स्टेशनोंके लिए कोटे कहाँ कहाँ होते है, याने बर्थ कहाँ खाली मिलेंगे यह भी पता होता है। अक्सर यह लोग स्लिपर में, चेकिंग स्टाफ़ को राम रमाई करते हुए यात्रा करते पाए जाते है। जबकी द्वितीय श्रेणी के अलावा किसी भी अन्य श्रेणी में इनकी यात्रा को अनुमति नही है। हाल ही में कुछ गाड़ियोंमे अलग अलग क्षेत्रीय रेलवे ने गन्तव्योंके पास के स्टेशनोंके लिए MST धारकोंको स्लिपर क्लास में यात्रा करना मंजूर किया है लेकिन इसके लिए भी उन्हें अतिरिक्त किराया देना होगा।

जहाँ उपनगरीय गाड़ियाँ नही चलती वहाँपर MST पासधारक सवारी गाड़ियोंके अलावा मेल, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट गाड़ियोंमे भी यात्रा करने की अनुमति है। चूँकि यह यात्रा केवल द्वितीय श्रेणी में अलाउड होने से वातानुकूलित गाड़ियोंमे जैसे राजधानी, शताब्दी श्रेणी की गाड़ियाँ MST धारकोंके लिए प्रतिबंधित है। सुपरफास्ट गाड़ीमे यात्रा करने हेतु MST धारक को प्रति यात्रा सुपरफास्ट शुल्क ₹15/- देना होता है या MST का सुपरफास्ट का अतिरिक्त पास निकालना होता है। यह पास उन्हें केवल 15 एकल यात्रा के किराए में याने ₹225/- मात्र में उपलब्ध होता है।

अब आपके मन मे यह सवाल आया होगा, यह MST के किराए किस तरह लागू होते है? तो मित्रों, यज्ञपि यह लोग लोग सवारी गाड़ियोंके अलावा मेल एक्सप्रेस में यात्रा करते है फिर भी इनके किराए का बेस सवारी गाड़ियोंके किराए ही है। अमूमन सवारी गाड़ियोंके 15 से 18 एकल यात्रा के किराए जितना किराया किसी MST पास को महीनेभर के लिए चार्ज किया जाता है। यानी 60 एकल यात्रा के लिए केवल 25 से 30% किराया वह भी सवारी गाड़ी के किराए से, ही इनको लगता है।

एक निश्चित अंतर के लिए रोजाना चलने की वजह से लगभग सारा चेकिंग, सिक्युरिटी और ऑपरेटिंग स्टाफ़ इन लोगोंसे परिचित होता है। साथ ही, किसी एक ही उद्देश्य से इकठ्ठे इतने सारे लोग उसके मुकाबले कभी कभार यात्रा करने वाले लम्बी दूरी के यात्रिओंपर आसानी से दबाव रख पाते है। और इसी वजह से यह लोग आसानीसे स्लिपर डिब्बों में, आरक्षित यात्रिओंकी जगहोंपर एडजस्ट होकर यात्रा कर लेते है। आरक्षित यात्री इनके बैठने पर आपत्ति लें तो आपस मे होहुज्जत भी होते रहती है।

इन सब बातोंपर उपाय क्या है? रेल प्रशासन के जो भी नियम बने है, वह काफी हद तक नैतिकता से पालन करने वालोंके हिसाब से बनाए गए है। जैसे रोड़ ट्रैफिक में पैदल चलनेवाले बायीं ओरसे चले ऐसा नियम है और फिर भी कोई दायी ओर से चलेगा तो हर व्यक्ति के पीछे ट्रैफिक पुलिस तो नियंत्रण के नही न दौड़ सकती है? उसी तरह रेलवे के भी नियम है। स्लिपर के हर कोच पर चेकिंग स्टाफ तो रहता नही। बिना आरक्षण के आप आरक्षित डिब्बों में यात्रा न कीजिए, बिना टिकट रेलवे के अहाते में प्रवेश न करें, भारतीय रेल आपकी अपनी सम्पत्ति है, इसका दुरुपयोग न करे, साफसफाई रखें आदि। यज्ञपि इनके तोड़े जाने पर सजा का प्रावधान है फिर भी लोग उनके हिसाब से इन क़ानूनोंकी धज्जियाँ उड़ाते रहते है।

रेलवे ने बीचमे सभी गैर उपनगरीय क्षेत्रोंमें MST/QST पासेस बन्द करने का विचार किया था, लेकिन राजकीय इच्छाशक्ति के दबाव से सम्भव नही हो पाया। बन्द करने की आवश्यकता भी नही है। रेल प्रशासन इसे गैर उपनगरीय क्षेत्र में एक्सप्रेस के रेट से चार्ज कर सकती है या फिर इसका इलाज मेमू, डेमू, इंटरसिटी गाड़ियाँ बढ़वाकर किया जा सकता है। लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे ऐसेभी छोटे अंतर के यात्री को जगह नही मिल पाती, जब दूसरी मेमू या इंटरसिटी गाड़ियाँ उपलब्ध होगी तो वैसे ही यह लोग लम्बी दूरी की गाड़ियोंमे यात्रा न करना पसंद नही करेंगे जो कि उनकी मजबूरी थी।

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ट्रैक बिछाने की मशीन

यह व्हिडियो देखिए, ट्रैक बिछाने का काम केवल 4-6 लोगोंके साथ मशीनसे किया जा रहा है। यह व्हिडियो हमारे देश का नही है, लेकिन इस तरह से काम हमारे यहाँपर भी किया जा सकता है।