Stories/ News Alerts

Uncategorised

जुलाई 2020 से गाड़ियोंमे होने वाले बदलाव और नई गाड़ियाँ : पार्ट – 1

भारतीय रेलवे जो भी बड़े बदलाव अपनी गाड़ियोंके समय में करती है, उसे जुलाई की समयसारिणी में छापती है। यह तो अभीतक तय नही है की 1 जुलाई से सभी गाड़ियाँ पटरी पर आ जाएगी पर आज तक कि परम्परा नुसार टाइमटेबल्स के बदलाव परीपत्रक के जरिए आना शुरू हो गए है। आइए उनमेसे जो हम तक आए है, उनको आपके सामने रखते है।

1: 18311/18312 सम्भलपुर मंडुआडीह एक्सप्रेस को विसाखापट्टनम तक आगे बढ़ाया जाएगा।

2: यात्रिओंके बीच बेहद लोकप्रिय एक सवारी गाड़ी मुम्बई से विजयपुरा, पंढरपुर आए साईं नगर शिर्डी के बीच चलती है। 51027/51028 मुम्बई पंढरपुर मुम्बई सप्ताह में 3 दिन और 51029/51030 मुम्बई विजयपुरा मुम्बई सप्ताह में 4 दिन साथ ही इन गाड़ियोंमे से कुछ डिब्बे दौंड स्टेशन पर कट कर रोजाना लिंक सवारी गाड़ी बनकर साईं नगर शिर्डी को जाते थे। अब यह गाड़ी को एक्सप्रेस में कन्वर्ट किया जा रहा है। उपरोक्त दो परिपत्रकोंसे इनका बाढला स्वरूप नजर आ रहा है लेकिन मुम्बई साईं नगर शिरडी की गाड़ी की कोई खबर नही दी गयी है। हालाँकि एक बात इन परिपत्रकोंसे स्पष्ट प्रतीत होती है की शिरडी के लिए गाड़ी की कोई अलग व्यवस्था की जाएगी, अब लिंक एक्सप्रेस दौंड में कुछ डिब्बे काट कर नही बनाई जाएगी।

3: 14519/14520 दिल्ली बठिण्डा दिल्ली और 14521/14522 अम्बाला दिल्ली अम्बाला यह दो गाड़ियोंका रैक शेयरिंग कर के 14731/14732 ऐसी एक गाड़ी दिल्ली फाजिल्का के लिए चलेगी।

4: नई गाड़ी विजयवाड़ा करनूल सिटी विजयवाड़ा सप्ताह में तीन दिन

5: नई गाड़ी भावनगर टर्मिनस से हरिद्वार के बीच एक साप्ताहिक नई गाड़ी

6: 12307/08 हावड़ा जोधपुर हावड़ा एक्सप्रेस मेड़ता रोड़ में कट कर कुछ डिब्बों के साथ उसकी लिंक 22307/22308 हावड़ा बीकानेर हावड़ा बनकर रोजाना चलती थी। नई व्यवस्था में हावड़ा जोधपुर के बीच 12307/08 यह गाड़ी सप्ताह में 5 दिन और 22307/22308 हावड़ा बीकानेर हावड़ा यह गाड़ी सप्ताह में 2 दिन चलेगी। मेड़ता रोड़ में डेली लिंक एक्सप्रेस का कट कर बनाना बन्द किया जा रहा है। कृपया परिचालन के दिन और लागू होने की तारीखोंपर ध्यान दीजिएगा।

7: 16331/32 मुम्बई तिरुवनंतपुरम मुम्बई, 16339/40 मुम्बई नागरकोईल मुम्बई और 16351/52 मुम्बई नागरकोईल मुम्बई इन तीनों गाड़ियोंको स्पीड अप किया जा रहा है और समय मे व्यापक परिवर्तन हो रहा है।

8: नई गाड़ी रीवा इतवारी रीवा एक्सप्रेस वाया सतना, जबलपुर, नैनपुर, गोंदिया ( जब गेज कन्वर्जन का काम पूरा हो जाता है ) रोजाना चलने वाली गाड़ी

9: 13319/20 रांची बैद्यनाथ धाम रांची एक्सप्रेस को दुमका तक विस्तारित किया जा रहा है।

10: 53045/46 हावड़ा रामपुरहाट हावड़ा फ़ास्ट पैसेंजर को एक्सप्रेस बना कर को दुमका तक विस्तारित किया जाएगा।

नई गाड़ीयाँ अपडेट्स और भी है, तो कल फिर मिलते है।

Uncategorised

क्या खोया, क्या पाया : सवारी गाड़ियाँ हो रही है एक्सप्रेस

देशभर में भारतीय रेल के कुल 18 झोन याने क्षेत्र बनाए गए है। इन सभी 18 क्षेत्रीय रेल्वेज में लगभग 508 सवारी गाड़ियाँ, डेमू और मेमू ट्रेन्स चलाई जाती है।

लॉक डाउन में 22 मार्च से 31 मई तक भारतीय रेलवे की सारी यात्री गाड़ियाँ यहाँतक की उपनगरीय और मेट्रो गाड़ियाँ भी बन्द कर दी गयी थी। ऐसे तो रेलवे दिनभर में 11,000 गाड़ियाँ रोजाना चलाती है पर केवल आज 1 जून से शुरू की गई 30 राजधानी गाड़ियाँ और 200 मेल एक्सप्रेस गाड़ियाँ चल रही है। कई हजारों टिकट रद्द किए गए, यात्रिओंके पैसे लौटाए जा रहे है। इन दिनों में रेलवे के राजस्व का काफी बड़ा नुकसान हुवा है।

अब जब देश को संक्रमण के लिए किए गए लॉक डाउन की स्थितियोंमे से हुए आर्थिक हानी से उबारने के लिए अनलॉक करना शुरू हुवा है। देश अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राजस्व कहाँ कहाँ से जोड़ा जा सकता है इसकी बारीकी से समीक्षा कर रहा है। पेट्रोलियम पर कर बढ़ाए जाना यह इसी प्रक्रीया का हीस्सा है। रेल प्रशासन ने सभी क्षेत्रीय रेलवे की 200 किलोमीटर से ज्यादा परिचालन करनेवाली, उनके क्षेत्र की करीबन 508 सवारी गाड़ियोंकी एक्सप्रेस में बदले जाने के लिए समीक्षा करने का आदेश दिया है।

हम यहाँपर कौनसी सवारी गाड़ी एक्सप्रेस में कन्वर्ट हो जाएगी यह तो नही कह सकते क्योंकि समीक्षा और निर्णय में कुछ अवधि लगेगा बादमे उसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी। लेकिन तब तक इससे आम यात्री के नफे नुकसान की चर्चा करते है।

सवारी गाड़ियोंको एक्सप्रेस किए जाने का सबसे बड़ा फायदा उनका समयपर चलना यह रहेगा। सवारी गाड़ियोंके समय काफी ढीले ढीले से होते है। मेल, एक्सप्रेस और सुपर गाड़ियोंका समयपालन करने के चक्कर मे अक्सर सवारी गाड़ियोंके समयपर पहुंचाने की घनघोर उपेक्षाएं होती है। गन्तव्य से पहले के एखाद दूसरे स्टेशनपर या किसी बड़े जंक्शन पर पहुंचने से पहले इन गाड़ियोंकी अहमियत तो छोड़िए अस्तित्व तक की दखल न के बराबर होती है। इंटरसिटी एक्सप्रेस किए जाने पर समयपालन सुनिश्चित होगा।

परिचालन में तेजी आने से नई गाड़ियोंके स्लॉट्स खाली होंगे और सेक्शनपर ज्यादा गाड़ियाँ चल पाएगी।

सवारी गाड़ियोंमे बहुतांश द्वितीय श्रेणी के ही डिब्बे लगे होते है, एक्सप्रेस किए जाने पर सेकन्ड सिटिंग याने 2S, स्लिपर SL और वातानुकूलित श्रेणी के डिब्बे बढ़ाए जाएंगे। यात्री अपनी यात्रा आरक्षित डिब्बों में कर पाएंगे।

चूँकि सवारी गाड़ियोंमे सभी डिब्बे साधारण श्रेणी के होने से इन गाड़ियोंसे किराए के स्वरूप में मिलनेवाला राजस्व नगण्य ही रहता है। एक्सप्रेस किए जाने से यात्रिओंकी एडवान्स बुकिंग विभिन्न श्रेणियों में कई जा सकेगी और राजस्व में वृद्धि होगी।

अब सवारी गाड़ियाँ एक्सप्रेस किए जाने से आम यात्री का क्या नुकसान होने जा रहा है, यह भी देख लेते है।

सबसे बड़ा झटका आर्थिक स्वरूप में होगा। इन गाड़ियोंमे यात्रा करनेवाले यात्री अक्सर गांव के किसान, दिहाड़ी मजदूर वर्ग के होते है। जिस यात्रा को वह 10₹ में कर रहे थे उन्हें उसके लिए 30-40₹ याने 3 से 4 गुना ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा

एक्सप्रेस किए जाने से सवारी गाड़ियोंके छोटे स्टेशनोंके स्टापेजेस भी स्किप किए जा सकते है, याने वहां के लिए रेल गाड़ी की उपलब्धता कम या नही रह जाएगी।

हम यह नही कहते कि प्रशासन अपना रेव्हेन्यु बढाने का प्रयास न करे लेकिन सिर्फ आर्थिक रूपसे कमजोर वर्ग पर इसकी मार पड़ना कतई ठीक नही होगा। इस का हल है कि कन्वर्ट करना ही है तो ज्यादा से ज्यादा ओवरनाइट सवारी गाड़ियोंको ही एक्सप्रेस में बदला जाए और दिन में चलने वाली सवारी गाड़ियोंको उपनगरीय गाड़ियोंके भाँति कम किराए वाली सवारी गाड़ी ही रहने दे।

चूँकि जिन क्षेत्रोंमें यह गाड़ियाँ कन्वर्ट की जा रही है उन क्षेत्रोंमें कोई उपनगरीय या मेट्रो गाड़ियाँ उपलब्ध नही है अतः प्रशासन को चाहिए कि कमसे कम एक सुबह और एक शाम में सवारी गाड़ी सेक्शन में चले इसकी सुनिश्चितता रखी जाए।

Uncategorised

यह सवारी गाड़ियाँ जल्द ही बन सकती है एक्सप्रेस गाड़ियाँ

रेल प्रशासन ने अपने सभी 18 क्षेत्रीय रेलवे के कार्यालयोंको यह सूचित किया है की वह अपने क्षेत्र में जो भी सवारी गाड़ियाँ, डेमू, मेमू ट्रेन्स 200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करती है उन्हें तत्काल प्रभाव से एक्सप्रेस श्रेणी में परावर्तित करें। साथ ही ऐसी गाड़ियोंकी लिस्ट भी उन्होंने जारी कर दी है। यदि ऐसी गाड़ियोंके स्टापेजेस कम किए जा सकते हो तो उन्हे भी बन्द किए जाने की सूचना दी गयी है।

मध्य रेल की 33, पूर्व तटीय रेलवे की 20, पूर्व मध्य रेलवे की 12, पूर्व रेलवे की 30, कोंकण रेलवे की 6, उत्तर मध्य रेलवे की 28, उत्तर पूर्व रेलवे की 16, पूर्वोत्तर सीमान्त रेलवे की 20, उत्तर रेलवे की 49, उत्तर पश्चिम रेलवे की 52, दक्षिण मध्य रेलवे की 62, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की 18, दक्षिण पूर्व रेलवे की 20, दक्षिण रेलवे की 34, दक्षिण पश्चिम रेलवे की 38, पश्चिम मध्य रेलवे की 32, और पश्चिम रेलवे की 38 गाड़ियाँ नामित की गई है। यह कुल 508 सवारी गाड़ियाँ है।

इतनी गाड़ियोंको एक्सप्रेस में परावर्तित किया जाना रेलवे के इतिहास में एक अलग नई शुरुआत, क्रांतिकारी और साहसिक कदम साबित होने जा रहा है। इसके बाद 200 किलोमीटर से कम चलनेवाली गाड़ियाँ उपनगरीय गाड़ियोंकी श्रेणी में गिने जाने की संभावना लग रही है। इससे न सिर्फ रेलवे का राजस्व बढ़ेगा बल्कि गाड़ियोंके परिचालन में भी तेजी आ जाएगी। यात्रिओंके दृष्टि से देखा जाए तो उनकी जेब पर तगड़ी मार पड़ने वाली है। जहाँ सवारी गाड़ियोंके यात्री किराए मात्र 30 – 50 पैसे प्रति किलोमीटर देने पड़ते थे जो बढ़कर तिगुने तक बढ़ जाएंगे। फायदे की नजर में तौलते है, तो यात्री को यात्रा के समय मे कटौती, ज्यादा गाड़ियाँ और आरक्षण सुविधा यह दिखाई पड़ता है।

चलिए पहले लिस्ट देख लेते है,

Uncategorised

रेल्वे की यात्री सेवाएं कब होगी सामान्य।

लॉक डाउन के अनलॉक का दौर शुरू हो चुका है। 30 राजधानी गाड़ियाँ और 200 इतर मेल एक्सप्रेस यात्री सेवाएं शुरू हो चुकी है। इसके बावजूद यात्रिओंके मन मे सवाल है, आखिर रेलवे पूर्णतयः सामान्य कब हो रही है, सभी ट्रेनें कब तक पटरी पर आ जाएगी?

हाल ही में रेल प्रशासन ने अपनी 230 गाड़ियोंका जायजा लिया। उन में भी जून, जुलाई की काफी जगह खाली जा रही है और यात्रिओंकी ट्रैफिक भी करीबन एक तरफा ही चल रही है। अमूमन सारे श्रमिक जिनको अपने घर लौटने की इच्छा थी, लौट चुके है। राज्योंसे भी श्रमिक गाड़ियोंकी डिमान्ड लगभग न के बराबर है। जहाँ पर भी जरूरत होगी, रेल प्रशासन ने श्रमिक स्पेशल छोड़े जाने की तैयारी कर रखी है।

चूँकि अनलॉक की स्थितियोंमे कामकाज शुरू हो रहा है, तो बड़े शहरोंमें उपनगरीय गाड़ियोंकी माँग की जा रही है। मुम्बई में मध्य रेल की 200 और पश्चिम रेलवे की करीबन 73 सेवांए बहाल की जा चुकी है। हालांकि यह सेवाए भी राज्य सरकार नामित कर्मचारियोंके लिए सीमित की गई है। किसी अन्य यात्रिओंको इन सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति नही है।

रही बात यात्री सेवाएं बढाने की तो यात्रिओंकी जो एक तरफा ट्रैफिक का हुजूम चल रहा था वह भी अब थमने लगा है। जून, जुलाई में कई गाड़ियाँ खाली चल रही है। कुछ खास गन्तव्योंके लिए यात्रिओंकी मांग और प्रतीक्षा सूची दिखाई पड़ रही है वहाँपर रेल प्रशासन यात्री गाड़ियोंकी अतिरिक्त सेवाएं दे सकते है। लेकिन फिलहाल तो सभी सेवाएं शुरू किए जाने का कोई आसार नज़र नही आ रहा है। जहाँतक उपनगरीय सेवाओंका सवाल है, वह यात्रिओंकी और बड़े शहरों की मांग के अनुसार बढ़ाए जाने का वादा रेल प्रशासन ने किया है।

Uncategorised

स्पेशल गाड़ियोंमे किया गया है बदलाव

दो स्पेशल गाड़ियोंके समयोंमे बदलाव किया जा रहा है, साथ ही आनंद विहार टर्मिनस से चलनेवाली और वहाँपर समाप्त होने वाली 6 गाड़ियोंका टर्मिनल बदलकर दिल्ली जंक्शन किया गया है। उपरोक्त सन्दर्भ में रेलवे के सर्क्युलर जोड़े जा रहे है।