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टाइमटेबल कमिटी की नई गाड़ियों और उनके विस्तार का विश्लेषण

नई गाड़ियाँ –

1: पुणे निजामुद्दीन पुणे हमसफ़र साप्ताहिक एक्सप्रेस यह गाड़ी वसई रोड, सूरत, वड़ोदरा कोटा होते हुए चलने की संभावना है। चूँकि यह मध्य रेलवे याने मनमाड़ भुसावल होते हुए मार्ग से 75 किलोमीटर शार्ट रूट है। इस पश्चिम रेलवे मार्ग से दुरन्तो और एक वातानुकूलित एक्सप्रेस भी चलती है। दोनोंही गाड़ियाँ लोकप्रिय भी है।

2 : गोरखपुर हरिद्वार गोरखपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस

3 : प्रयागराज लखनऊ प्रयागराज डेली एक्सप्रेस

4 : गोरखपुर लालकुआं गोरखपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस

यह तीनों गाड़ियाँ स्थानिक माँग के हिसाब से शुरू की जा रही है।

5 : उदयपुर जम्मूतवी उदयपुर साप्ताहिक हमसफर एक्सप्रेस इस मार्गपर यह पहली गाड़ी रहेगी। सैनिकों, पर्यटकों की माँग के अनुसार यह गाड़ी शुरू की जा रही है।

6 : सिकन्दराबाद गोरखपुर सिकन्दराबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस अभी फिलहाल इस मार्ग पर (लॉक डाउन के पहले ) 4 साप्ताहिक गाड़ियाँ चल रही है।

7 : लखनऊ रायपुर लखनऊ हमसफ़र साप्ताहिक, इन स्टेशनोंके बीच एक द्विसाप्ताहिक गरीबरथ चल रही है। जो काफी पॉपुलर ट्रेन है।

8 : यशवंतपुर निजामुद्दीन यशवंतपुर द्विसाप्ताहिक राजधानी, इन स्टेशनोंके बीच 6 गाड़ियाँ चल रही है, जिनमेसे दो डेली गाड़ियाँ है। यह नई राजधानी एक्सप्रेस सम्भवतः कर्नाटक राज्य के अन्दरूनी मार्ग गदग, होसापेट से चलाई जा सकती है।

9 : यसवंतपुर वाराणसी यसवंतपुर सप्ताहिक एक्सप्रेस, और

10 : यसवंतपुर मंडुआडीह यसवंतपुर सप्ताहिक एक्सप्रेस यह दोनों गाड़ियाँ गदग, होसपेट होकर चलाए जाने की ज्यादा सम्भावना दिख रही है। चूँकि सिकन्दराबाद नागपुर मार्ग से पहले ही गाड़ियाँ है।

11 : भावनगर हरिद्वार भावनगर साप्ताहिक एक्सप्रेस यह गाड़ी ओखा डेहराडून एक्सप्रेस के अबु रोड, अजमेर मार्ग से चलने की संभावना ज्यादा लगती है।

12: फिरोजपुर से न्यू हृषिकेश के बीच डेली और फिरोजपुर से हुजुरसाहिब नान्देड के बीच साप्ताहिक गाड़ी का प्रस्ताव है।

13: चंड़ीगढ़ उधमपुर द्विसाप्ताहिक, आनंदविहार श्री माता वैष्णो देवी कटरा द्विसाप्ताहिक और जम्मूतवी अमृतसर के बीच सप्ताह में पांच दिन डेमू ट्रेन चलाने का भी प्रस्ताव है।

गाड़ियोंका मार्ग विस्तार (एक्सटेंशन)

1: 18311/18312 सम्भलपुर मंडुआडीह सम्भलपुर द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस को सम्भलपुर से आगे विशाखापत्तनम तक विस्तारित किया जाएगा।

2: 18507/18508 विसाखापट्टनम अमृतसर विसाखापट्टनम हीराकुड त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस को अमृतसर से आगे जम्मूतवी तक विस्तारित किया जाएगा। फ़िलहाल विसाखापट्टनम से सीधे जम्मू के लिए कोई ट्रेन नही है।

3: 12807/12808 सप्ताह में पांच दिन चलनेवाली विसाखापट्टनम निजामुद्दीन विसाखापट्टनम समता एक्सप्रेस को निजामुद्दीन से आगे बढ़ाकर हिसार ले जाया जा रहा है। फिलहाल विसाखापट्टनम से हिसार के लिए कोई सीधी गाड़ी नही है। इससे निजामुद्दीन स्टेशन का कन्जेशन भी कम किया जाएगा।

4: 12409/12410 रायगढ़ निजामुद्दीन रायगढ़ गोंडवाना एक्सप्रेस जो सप्ताह में पांच दिन चलती है, उसे रायगढ़ से आगे सम्भलपुर तक विस्तारित किया जाएगा। यह गाड़ी का ले ओवर पीरियड का सदुपयोग है।

5: 12323/12324 हावड़ा आनन्द विहार हावड़ा द्विसाप्ताहिक गाड़ी को बाड़मेर तक बढ़ाया जा रहा है। यह एक अच्छा एक्सटेंशन है, राजस्थान में इसकी काफी माँग है।

6: 15115/15116 छपरा दिल्ली छपरा लोकनायक साप्ताहिक एक्सप्रेस को दिल्ली से आगे जयपुर तक विस्तारित किया जा रहा है।

7: 14213/14214 वाराणसी गोण्डा वाराणसी इंटरसिटी गाड़ी को बहराइच तक आगे बढ़ाया जा रहा है।

8: 19037/19038 बांद्रा गोरखपुर बांद्रा सप्ताह में चार दिन चलनेवाली अवध एक्सप्रेस को गोरखपुर से आगे नौतनवा ले जाया जा रहा है।

9: 12983/12984 अजमेर चंडीगढ़ अजमेर त्रिसाप्ताहिक गरीबरथ एक्सप्रेस को चंडीगढ़ से आगे लुधियाना ले जाया जा रहा है।

10: 14624/14623 दिल्ली सराय रोहिल्ला छिन्दवाड़ा दिल्ली सराय रोहिल्ला पातालकोट एक्सप्रेस को छिन्दवाड़ा से आगे इतवारी तक बढ़ाया जा रहा है। यह गाड़ी छिन्दवाड़ा से आगे नए बने मार्ग पर से इतवारी जाएगी।

11: 22161/22162 भोपाल दमोह भोपाल राज्यरानी एक्सप्रेस को दमोह से आगे वाराणसी तक ले जाया जा रहा है। यह गाड़ी कटनी, सिंगरौली, चोपन होते हुए वाराणसी जा सकती है।

12: 22421/22422 दिल्ली सराय रोहिल्ला से जोधपुर के बीच चलनेवाली सालासर एक्सप्रेस को गांधीधाम तक बढाने की सम्भावना है।

13: 12325/12326 कोलकाता नांगल डैम कोलकाता साप्ताहिक एक्सप्रेस को ऊना हिमाचल ले जाया जाएगा।

14: दिल्ली / नई दिल्ली से रोहतक के बीच चलनेवाली मेमू गाड़ी को जींद तक बढ़ाया जाएगा।

15: 12462/12461 जोधपुर दिल्ली मण्डोर एक्सप्रेस को मेरठ सिटी तक बढ़ाया जाएगा।

16: 12915/12916 अहमदाबाद दिल्ली अहमदाबाद आश्रम एक्सप्रेस को भी मेरठ सिटी तक बढाया जाएगा।

17: 12263 /12264 पुणे निजामुद्दीन पुणे दुरन्तो द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस को निजामुद्दीन से आगे न्यू हृषिकेश तक एक्सटेंड किया जाएगा।

हरिद्वार को टर्मिनेट होनेवाली 6 जोड़ी गाड़ियाँ अब एक्सटेंड कर के न्यू हृषिकेश को टर्मिनेट की जाने वाली है। उन गाड़ियोंके भी नम्बर ले लीजिए।

19609/19610 उदयपुर सिटी हरिद्वार उदयपुर सिटी त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस, 14605/14606 जम्मूतवी हरिद्वार जम्मूतवी साप्ताहिक एक्सप्रेस, 19031/19032 अहमदाबाद हरिद्वार अहमदाबाद डेली मेल, 12171/12172 लोकमान्य तिलक टर्मिनस हरिद्वार लोकमान्य तिलक टर्मिनस वातानुकूलित द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस, 18477 / 18478 पूरी हरिद्वार पूरी उत्कल डेली एक्सप्रेस, 14229/14230 प्रयागघाट हरिद्वार प्रयागघाट त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस इतनी गाड़ियाँ है।

18: 22481/22482 जोधपुर दिल्ली सराय जोधपुर डेली सुपरफास्ट एक्सप्रेस को भी हरिद्वार तक एक्सटेंड किया जाएगा।

19: 14163/14164 मेरठ सिटी प्रयागराज मेरठ सिटी संगम एक्सप्रेस भी अब एक्सटेंड होकर मेरठ के बजाय सहारनपुर / अंबाला से चलाई जाएगी।

गाड़ियोंके फेरे

22975 / 22976 बांद्रा रामनगर बांद्रा साप्ताहिक एक्सप्रेस के फेरे में बढ़ोतरी कर द्विसाप्ताहिक किया जा रहा है।

14229 / 14230 प्रयागघाट हरिद्वार प्रयागघाट जो त्रिसाप्ताहिक थी जिसे डेली, रोजाना कर न्यू हृषिकेश तक एक्सटेंड किया जाएगा।

मित्रों, वैसे तो उत्तर रेलवे की टाइमटेबल कमिटी का अंग्रेजी में पूरा सरक्यूलर आप को हम पहले ही पोस्ट कर चुके है, यह उसी सर्क्युलर का विश्लेषण है।

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टिकट रद्दीकरण शुल्क के बारे में एक दृष्टि में सारी जानकारी

रेलवे के टिकट कैंसल कराने में कितना शुल्क कटेगा, रिफण्ड किस तरह लिया जाएगा यह एक नजर में देखने के लिए इस फॉरमेट के डाऊनलोड कर के रख ले, बहोत उपयोगी है।

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स्पेशल ट्रेनोंकी असल हक़ीकत

‘4200 श्रमिक स्पेशल गाड़ियोंमे करीबन 1 करोड़ श्रमिकोंने यात्रा कर अपने गाँव लौटे।’ ‘रेलवे कर्मचारी भी कोरोना योद्धा’ तो कोई वृत्तपत्र, “श्रमिक ट्रेन राह से भटकी”, “श्रमिकोंको रेल गाड़ी में खाना, पीने का पानी नही मिल रहा है” स्पेशल गाड़ियोंके यात्री बेहाल’ इस तरह के लेख बड़े बड़े न्यूजपेपर की हेडलाइन्स बने थे। सोशल मीडिया पर भी लोग फ़ोटो जोड़ जोड़ कर अपने मन मुताबिक गुण दोष मढ़े जा रहे थे। जिसको जैसे समझ आ रहा था वह किसी एक बाजू को पकड़ सही गलत का फैसला करते जा रहा था।

इन बातों, ख़बरोंको बहोत ज्यादा वक्त नही बिता है। हाल ही में एक लेख पढ़ने में आया और हमे लगा की रेल प्रशासन की भी टेक्निकल स्थिति लोगोंके नजर में आना जरूरी है। ऐसी परिस्थितियों में हम किसी घटना का समर्थन या किसी संस्था या व्यक्तिविशेष पर दोषारोपण नही कर सकते, केवल परिस्थिति का अवलोकन कर सकते है।

हमारे विचार से किसी भी वाकयात या घटना पर उसके समर्थन में या विरोध में बोलना बहोत आसान होता है। जब घटना सामने घटित होते रहती है या होने की स्थिति आन पड़ी है तब उससे छुटकारा / निज़ात पाना या उस पर सर्वोत्तम इलाज़ ढूंढना उतना ही मुश्किल होता है।

रेल प्रशासनपर श्रमिकोंकी यातायात करना यह अकस्मात आन पड़ी जिम्मेदारी थी। लॉक डाउन में संक्रमण रोकने के लिए रेल के पहिए थमे, यह भारतीय रेल के लिए ऐतिहासिक घटना ही थी। महायुद्ध काल मे भी रेल का परिचालन बन्द नही किया गया था। सारी यात्री गाड़ियाँ तुरन्त बन्द की गई। लेकिन मालगाड़ियां, पार्सल विशेष गाड़ियाँ तो चलाई जा रही थी। हजारों, लाखों कर्मचारियों को घर रुकने को बोला गया। छोटी बड़ी बीमारी वाले और 50 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के कर्मचारियोंको ड्यूटी पर आने की सख्त मनाही की गई। केवल 10 से 25 % कर्मचारियोंके भरोसे रेल चलाई जा रही थी। ऐसी स्थितियोंमे श्रमिकोंके बढ़ते हुजुम के लिए गाड़ियोंको पटरी पर उतरना उतना ही पेचीदा प्रश्न था जितना संक्रमण काल मे कर्मचारियोंकी फूल स्ट्रेंथ लगाकर ड्यूटी करवाना।

जब श्रमिक गाड़ियाँ शुरू कराई गई तब की स्थितियाँ देखे तो केवल 25% या उससे भी कम और उसमे भी स्किल्ड अनुभवी लोगोंके बिना इतनी गाड़ियोंको नियंत्रित करना कोई मुँह का खेल नही था। माना की रेलवे इससे कई गुना गाड़ियाँ चलाती है, लेकिन कर्मियोंके दल एक चौथाई रह जाए तब क्या हश्र होगा यह सामने है।

अब बात करते है, उस वक्त की जब गाड़ियाँ अपने नियोजित मार्गोंकी जगह अलग मार्गोंसे चलानी पड़ी। जितनी भी विशेष गाड़ियाँ, श्रमिक स्पेशल गाड़ियाँ बड़े मेट्रो सिटीज से निकल उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा की ओर जा रही थी। याने सारी गाड़ियोंका दबाव किसी एक ही दिशा की ओर था। प्लेटफॉर्म्स और सेक्शन ब्लॉक होने लगे। रेल ट्रैफिक कोई रोड़वेज की तरह नही होता कि रोड़ पर कुछ अवरोध आ जाए तो बाजू के खेतोंसे मार्ग निकाल लिया जाता है। सेक्शनपर गाड़ियोंका जाम लगता चला गया और कन्जेशन टालने के लिए गाड़ियोंको डाईवर्ट किया गया। जब गाड़ी डाईवर्ट होती है तो उसे खाली मार्ग , सेक्शन ब्लॉक की तलाश रहती है न की उसे यह विचार किया जाता है, की गाड़ी को कौनसे राज्य से ले जाना है और कौनसे से नही। जो भी रूट वेकण्ट हो, जिस ब्लॉक में गाड़ी को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा था उसे आगे बढाया गया और पीछे के रुकी हुई गाड़ियोंको प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा था।

रेल प्रशासन ने श्रमिकोंको न सिर्फ उनके गाँवोंतक पहुचाने की जिम्मेदारी ली थी बल्कि उनके खानपान, उनकी सुरक्षा की व्यवस्था भी भली भाँति सम्भाली थी। इस तरह का संचालन लगभग सारे रेल कर्मचारियोंके लिए बिल्कुल नया था। उसमें सीमित कर्मचारियों के साथ ऐसी अनपेक्षित अकस्मात आयी परिस्थितियोंसे निपटना और परिस्थितियों से बिल्कुल अपरिचित, महामारी से सुरक्षा के तरिकोंका ज्यादातर मालूमात नही, ऐसे कर्मचारियों की हाजिरी में रेल प्रशासन ने यह जिम्मेदारी का शिवधनुष न सिर्फ पेला बल्कि अच्छी तरह निभा भी लिया।

कुछ अव्यवस्थाएं जरूर हुई, गाड़ियाँ असमय, अस्थानों से घूमते हुए अपने गन्तव्यों तक पहुंची। लेकिन अपने टारगेट, अपने गोल, अपनी रेस उसने पूरी की। यही रेलवे की अचीवमेंट है, कामयाबी है और जिसके लिए रेल प्रशासन, उसके सारे कर्मचारी अभिनंदन और गौरव के पात्र है

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टाइमटेबल कमिटी की रिपोर्ट के अनुसार मध्य रेलवे की गाड़ियोंमें हो सकते है यह बदलाव।

टाइमटेबल कमिटी की वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई टाइमटेबल में मध्य रेलवे की गाड़ियोंमें होंगे कुछ इस तरह के बदलाव।

1 : 17318 लोकमान्य तिलक टर्मिनस हुब्बाल्ली एक्सप्रेस के टर्मिनल और स्पीड में बदलाव।

2: 51027/28 और 51033/34 मुम्बई से पंढरपुर और शिर्डी के बीच चलनेवाली सवारी गाड़ी एक्सप्रेस बनाई जाएगी। जो हफ्ते में तीन और दो दिन चलेगी।

3 : 51029/30 मुम्बई बीजापुर सवारी गाड़ी डेली एक्सप्रेस में तब्दील की जा सकती है।

4: 16331 / 32 मुम्बई तिरुवनंतपुरम मुम्बई, 16339 /40 मुम्बई नागरकोइल मुम्बई और 16351 /52 मुम्बई नागरकोइल मुम्बई इन तीनों एक्सप्रेस गाड़ियोंको स्पीड अप, टर्मिनल चेंज और सुनियोजन किया जायेगा।

5: पुणे भागलपुर पुणे के बीच एक नई साप्ताहिक गाड़ी शुरू करने की योजना थी मगर 12149 /50 पुणे दानापुर पुणे गाडी को ही भागलपुर तक एक्सटेंशन किए जाने से नई गाड़ी को स्थगित किया गया है।

6 : 18519 /20 लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशाखापत्तनम एक्सप्रेस को रायगड़ा तक एक्सटेंड किए जाने की योजना है।

7 : फिरोजपुर हुजुरसाहिब नान्देड के बीच नई गाड़ी विचाराधीन है।

8 : कालका शिर्डी द्विसाप्ताहिक गाड़ी के फेरे बढ़ाने की सम्भावना है।

9: गोमतीनगर पुणे, गोमतीनगर यसवंतपुर, मंडुआडीह प्रतापनगर ( वडोदरा )और गोरखपुर पनवेल के बीच नई गाड़ियाँ चलाने का प्रस्ताव है।

और भी कई सारे प्रस्ताव है, गाड़ियोंके एक्सटेंशन भी है।

1: पुणे निजामुद्दीन वातानुकूलित नई गाड़ी

2 : सोलापुर नागपुर के बीच द्विसाप्ताहिक नई गाड़ी

3 : विशाखापत्तनम सूबेदारगंज (प्रयागराज) नई गाड़ी

4: प्रयागराज से तिरुचिरापल्ली और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के लिए नई गाड़ियाँ

5 : जयपुर कलबुर्गी के बीच साप्ताहिक गाड़ी

6: उदयपुर चेन्नई के बीच साप्ताहिक गाड़ी

7 : सिकन्दराबाद से रक्सौल और गोरखपुर के लिए द्विसाप्ताहिक गाड़ियाँ

8: तिरुपति से नागरसोल के बीच नई गाड़ी

9 : सिकन्दराबाद गांधीधाम साप्ताहिक

10: हटिया हड़पसर (पुणे) के बीच सप्ताहिक

गाड़ियोंका प्रस्तावित एक्सटेंशन

1 : 12171/72 लोकमान्य तिलक टर्मिनस हरिद्वार वातानुकूलित एक्सप्रेस को न्यू हृषिकेश तक

2 : 12263 / 64 पुणे निजामुद्दीन को न्यू हृषिकेश तक

3 : 22919 /20 चेन्नई अहमदाबाद को भगत की कोठी तक

4 : 14623 /24 दिल्ली सराय रोहिल्ला छिन्दवाड़ा को नए मार्ग से इतवारी तक

5 : 22929 /30 वडोडरा भिलाड को डहाणू रोड़ तक

इस तरह प्रस्ताव है।

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भारतीय रेलवे की टाइमटेबल कमिटी IRTTC की वर्ष 2019-20 की सिफारिशें

मित्रों, भारतीय रेलोंके बारे में जानने के लिए सभी भारतीय लोग बहोत उत्सुक रहते है, फिर नई गाड़ियाँ हो या नया टाइमटेबल। आइए आज कुछ नई जानकारी लेते है।

IRTTC याने इंडियन रेलवे टाइम टेबल कमिटी। यह कमिटी रेलवे के सभी झोन की जरूरतों और क्षमताओंके अनुसार टाइमटेबल में सुधारणाए करने के की सूचनाएं करती है। हर एक झोन के जनरल मैनेजर इस कमिटी में अपने अपने झोन का प्रतिनिधित्व करते है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड के कुछ डायरेक्टर भी इस कमिटी के सदस्य होते है।

जब भी कोई नई गाड़ी की पेशकश कोई झोन करता है तो उसे उस गाड़ी का टाइमटेबल पटल पर रखना होता है, उस समयोंपर सम्बन्धित झोन अपनी अपनी जरूरत और समस्याओं की चर्चा करते है। यदि सम्बंधित झोन की कोई आपत्ति न हो तो वह गाड़ी, या एक्सटेंशन, या दिनोंके फेरे बढाने का प्रस्ताव मंजूर किया जाता है। ब्रिटिश परंपरा में रेलवे में मेन लाइन और ब्रांच लाइन ऐसे कन्सेप्ट हुवा करते थे। अक्सर मेन लाइनोंपर सीधी गाड़ियाँ चलाई जाती और ब्रांच लाइनोंकी गाड़ियाँ अपने सेक्शन तक सीमित रहती थी। हालाँकि तब लिमिटेशन्स भी बहोत थी। लाइनोंके अलग अलग गेज थे, विद्युतीकरण हर जगह नही था, लोको बदलने का बहोत बड़ा झंझट था। लेकिन किसी एक फिक्स पॉलिसी के तहत काम सुचारू तरीकेसे चल रहा था। अब ऐसा नही है, ब्रांच लाइनोंकी गाड़ियाँ अलग अलग मेन लाइन फिर ब्रांच लाइन, फिरसे मेन लाइनोंपर ऐसे चलाई जाती है। इसमें टाइमिंग्ज के स्लॉट्स की बड़ी दिक्कत होती है। अलग अलग खण्ड पर किसी स्लॉट को मैनेज कर के गाड़ी को निकालना यह बेहद जटिल कार्य है।

लॉक डाउन पीरियड में लगातार हफ़्तोंमें गाड़ियाँ बन्द मिली है और यह अपॉर्च्युनिटी या सुसंधी साधतें हुए टाइमटेबल कमिटी पूर्ण टाइमटेबल की पुनर्रचना करना चाह रही है। इसे झीरो बेस टाइमटेबल कहते है। रेलवे में करीबन 7300 रेलवे स्टेशन्स है, उसमे 500 ऐसे स्टेशन्स है जिनपर गाड़ियोंकी जरूरत और माँग हर वक्त लगी रहती है। कमिटी इसी बात को मद्देनजर रखे हुए है, और इसी को अपना बेस बनाकर टाइमटेबल की रचना करने जा रही है। आज तक किसी प्रिमियम गाड़ी को सीधे निकालने के लिए दूसरी कम महत्वपूर्ण गाड़ियोंको किसी स्टेशन की लूप लाइन में खड़ा कर दिया जाता था। अब कोशिश यह कि जा रही है, की गाड़ियोंको खड़ा कर के यात्रिओंका और रेलवे का समय और पैसा जाया न किया जाए।

रेलवे ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्यक्रम पर भी काफी ध्यान दिया है। ऑटिमेटिक सिग्नल ब्लॉक्स, लाइनोंका विद्युतीकरण, डबलिंग, ट्रिपलिंग और कहींपर जरूरतनुसार 4,5,6 लाइनोंतक काम बढाया है। गाड़ियोंके डिब्बे, लोको अत्याधुनिक बनाए जा रहे है, जो अत्याधिक गति से चलाए जा सकते है। मेंटेनेंस का रखरखाव का समय भी आधुनिक तकनिकोंके जरिए कम किया जा रहा है।

आज हमारे पास टाइमटेबल कमिटी की चर्चा के कुछ मुद्दे आए है, जो हम आपके साथ साँझा कर रहे है। पहले कमिटी की मंजूरी जिन मुद्दोंको मिली है, वह देखते है। यह थोड़ा टेक्निकल है, गाड़ियोंके नाम की जगह नम्बर्स है, स्टेशनोंके कोड है। कुछ समझने दिक्कत आए तो आप हमसे सम्पर्क कर सकते है।

अब कमिटी के सामने रखी गयी माँगों को देखते है। यह अलग अलग झोन की नई गाड़ियोंकी दरकार है।

और यह है गाड़ियोंके एक्सटेंशन याने अपने गन्तव्य से अगले स्टेशन आगे बढ़ने की माँग।

Courtesy : indiarailinfo.com