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आ अब लौट चले ….

प्रवासी मजदूर अपने गाँव की ओर लौट रहे। सारे 40 दिनोंका दर्द अपने चेहरोंपर समेटे, एक तरफ तो गाँव लौटने की खुशी है तो दूसरी तरफ फिर से रोजगार की चिंता खाए जा रही है।

एर्नाकुलम केरला से झारखंड हटिया लौट ते मजदूर। श्रमिक स्पेशल में 1100 से अधिक यात्री फोटो सौजन्य : @Forumkeralam1

एक श्रमिक स्पेशल साबरमती से आगरा कैंट और सूरत से खुर्दा रोड़ रवाना हुई।

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02153 नासिक भोपाल श्रमिक स्पेशल पहुंची गंतव्य पर।

कल रात नासिक से 347 प्रवासी कामगारों को लेकर चली आज सुबह मिसरोड़ पहुंची। 02153 नासिक भोपाल श्रमिक स्पेशल गाड़ी को इटारसी भोपाल के बीच, भोपाल से 12 किलोमीटर पहले, भोपाल के उपनगर मिसरोड़ स्टेशन पर रोका गया। यहाँ पर पहुँचे यात्रिओंकी स्क्रीनिंग की व्यवस्था राज्य शासन ने तैयार रखी थी। यात्रिओंकी जाँच किए जाने पर यात्रिओंको अपने अपने गाँव बसों से पहुंचाया जाएगा।

फोटो सौजन्य : ट्विटर, DRM भोपाल

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लॉकडाउन में फंसे हो, रेल से घर जाना चाहते हो?

रेल प्रशासन द्वारा कोई भी यात्री ट्रेन दिनांक 17 मई तक नही चलाई जाएगी। जी हाँ, बिल्कुल सही लिख रहे है।

आप चाहे विद्यार्थी, पर्यटक, किसी कारखाने के श्रमिक या देहड़ी कामगार यदि अपने गाँव जाने की इच्छा रखते हो तो आपको राज्य शासन से ही सम्पर्क करना है। क्योंकी रेलवे कोई भी यात्री गाड़ी 17 मई तक नही चलाएगी। यह जो भी विशेष गाड़ियाँ चल रही है वह केवल राज्य सरकारोंकी विनंती नुसार चलाई जा रही है।

जिस शहर में आप फँस गए हो, या अब वहाँसे निकल अपने गाँव जाना चाहते हो, उस जिले की वेबसाइट उदाहरण के तौर पर http://www.dhule.gov.in जहाँ dhule यह जिले का नाम है, जो शहर से आपको निकलना है, उसके जिले का नाम डालिए। जो भी व्यवस्था होनी है, संबंधित जिला और राज्य प्रशासन ही करेगी। इन ज़िलोंकी वेबसाइट पर नोडल अफसर यात्रिओंकी संख्या और गन्तव्य शहर के अनुसार रेल प्रशासन से संपर्क कर गाड़ी की व्यवस्था की माँग करेगा। जब भी गाड़ी की व्यवस्था होगी, जिला प्रशासन आपसे संपर्क करेगी और स्टेशन तक ले आएगी। यात्रा के टिकट, यात्रा के दौरान खान पान यह सारी व्यवस्थाएं रेल और राज्य प्रशासन के समन्वय से ही चलाई जा रही है।

जो गाड़ी छोड़ी जा रही है, वह पॉइंट टू पॉइंट गाड़ी है। कोई यात्री ऐसा सोचता है, की फ़लाँ स्टेशनोंपर पर चढूँगा या फ़लाँ स्टेशन पर उतर अपने गाँव चला जाऊंगा तो ऐसा मुमकिन नही है। बीच मे गाड़ी कही रुकती है तो केवल रेलवे के तकनीकी कारणोंसे ही रुकाई जा रही है। किसी भी यात्री को बीच स्टेशनोंसे चढ़ने उतरने की अनुमति नही है।

स्पेशल गाड़ियोंमे यात्रा करनेवाले यात्रिओंके स्वास्थ्य की जाँच करना, उनके टिकट जारी करना, गाड़ी जहाँसे छूटेगी वहाँ खाने की व्यवस्था और गन्तव्य पर यही सारी व्यवस्था वहांके जिला एवं राज्य प्रशासन के द्वारा की जा रही है। गाड़ीमे यात्रा के दौरान खानपान और सुरक्षा की व्यवस्था रेल विभाग देख रहा है।

इससे आपको यह बात तो बहोत क्लियर हो गयी होगी, समझ आ गयी होगी की रेल में जाना है तो उसकी टिकट आपके जिले और राज्य सरकार के हाथ मे है। बिना वजह स्टेशन्स पर जाने का कोई अर्थ नही है।

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श्रमिक स्पेशल गाड़ियोंके टाईम टेबल

नासिक लखनऊ स्पेशल, नासिक भोपाल स्पेशल, कोटा राँची स्पेशल यह सारी गाड़ियाँ एकतरफ़ा चलाई जाने वाली गाड़ियाँ है और पॉइंट टू पॉइंट ही चलेगी। एक बार अपने स्टार्टिंग स्टेशनसे निकले तो सीधे गन्तव्य स्टेशनपर ही रुकेगी। जो भी बीच के स्टापेजेस दिखाई दे रहे है वह केवल टेक्निकल स्टॉपेज है। इन स्टापेजेस पर ना ही कोई यात्री उतरेगा और ना ही चढ़ पाएगा।

नासिक लखनऊ स्पेशल
नासिक भोपाल स्पेशल
कोटा राँची स्पेशल

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राज्य सरकारोंकी गुज़ारिश पर और भी चलाई जाएंगी विशेष गाड़ियाँ

आज ही राष्ट्रीय श्रमिक दिवस का औचित्य साधतें हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओरसे यह परीपत्रक जारी किया गया है।