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दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा चली लिंगमपल्ली – हटिया श्रमिक विशेष गाड़ी

दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा प्रवासी मजदूरों को लेकर चली विशेष गाड़ी। 1225 प्रवासी मजदूरों के लिए सिकन्दराबाद के पास से नए विकसित रेलवे टर्मिनल लिंगमपल्ली से झारखंड राज्य में हटिया जाने वाली पहली प्रवासी श्रमिक स्पेशल ट्रेन आज दिनांक 1 मई को संचालित की गई।

प्रवासी मजदूरों को 56 बसों में रेलवे स्टेशन लाया गया। स्टेशन को अच्छी तरह से बैरिकेटिंग किया गया था और पर्याप्त संख्या में रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था, ताकि अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाई जा सके। कतार में लगे प्रवासी मजदूरों को रेलवे सुरक्षा बल के टीमों द्वारा कोचों को निर्देशित किया गया। यात्रिओंमें सोशल डिस्टेनसिंग रहे इस बात का विशेष ध्यान रखा गया।

रेलवे प्रशासन ने सारी तैयारी पहले से ही कर रखी थी। वाणिज्यिक कर्मचारियों द्वारा उन्हें टिकट जारी किए गए। राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा उन्हें भोजन के पैकेट और पानी की बोतलें प्रदान की गईं। यह गाड़ी केवल रेलवे के तकनीकी स्टापेजेस के स्टेशन्स पर ही रुकाई जाएगी। जिसमें ऑपरेटिंग स्टाफ़ याने लोंको पायलट और गार्ड बदले जाएंगे।

आज की इस श्रमिक विशेष गाड़ी को रवाना करने के लिए राज्य प्रशासन से सचिव, पंचायत राज और ग्रामीण विकास, तेलंगाना, पुलिस विभाग से आईजी पश्चिम क्षेत्र हैदराबाद, रेलवे से सिकन्दराबाद के एडीआरएम, जिलाधिकारी, रेलवे सुरक्षा बल और अन्य रेलवे अधिकारी उपस्थित थे। रेलवे और राज्य सरकार के प्रशासनिक विभागों में सुचारू समन्वय के साथ पूरी प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी के आसानी से पूरा किया गया।

इस विशेष रेल गाड़ी के साथ, सुरक्षा कायम रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के जवान और जीआरपी भी यात्रा करेंगे। प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर खुशी देखते ही बन रही थी। गाड़ी जब चलने लगी तब सारे प्रवासी श्रमिकोंके मुख से मुस्कान के साथ धन्यवाद, थैंक्यू के नारे गूंज रहे थे। आज सुबह 4.50 बजे लिंगमपल्ली स्टेशन से रवाना हुई गाड़ी करीबन रात 11 बजे तक हटिया पोहोंचने की उम्मीद है।

हटिया में भी रेलवे स्टेशनपर झारखंड प्रशासन ने उपयुक्त व्यवस्था तैयार रखी है। सारे श्रमिकोंकी जाँच होने के बाद उन्हें जरूरत के हिसाब से 14 दिनों के होम क्वारण्टाइन में रखे जाने की व्यवस्था भी कर ली गयी है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने राज्य सरकारोंके समन्वय के साथ जरूरत के हिसाब से, लॉक डाउन में फंसे और भी यात्री, पर्यटकों, विद्यार्थियों और मजदूरों को लिवाने के लिए ऐसी विशेष गाड़ियाँ छोड़े जाने की व्यवस्था की जा सकती है ऐसा आश्वासन दिया है।

लिंगमपल्ली हटिया विशेष श्रमिक एक्सप्रेस
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खबरें रेल की..

यज्ञपी लॉक डाउन की वजह से रेलवे की सभी यात्री गाड़ियाँ बन्द है, मगर आने वाले दिनोंमें क्या कुछ फेरबदल करना है उस पर कार्यवाही चल रही है।

हाल ही में हमारे पास एक खुशखबर उत्तर पश्चिम रेलवे के लिए आई है। 22481 / 22482 जोधपुर दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर सुपरफास्ट डेली एक्सप्रेस गाड़ी का हरिद्वार / ऋषिकेष तक विस्तरित करने को टाइम टेबल कमिटी से मंजूरी मिल गयी है और जल्द ही इसका नया टाइमटेबल बनाए जाने की सम्भावना है।

दक्षिण मध्य रेलवे से भी कुछ इसी तरह की गाड़ियोंको सवारी गाडीसे एक्सप्रेस में अपग्रेड किए जाने की खबर है। 56501 / 56502 विजयवाड़ा हुबली विजयवाड़ा पैसेंजर गाड़ी को जल्द ही स्पीड अप करके एक्सप्रेस में बदला जाने वाला है। 56501 विजयवाड़ा से हुबली के बीच चलने वाली यह गाड़ी 693 किलोमीटर में 68 स्टेशन्स और उसे काटने के लिए लगते है 22 घंटे में और वापसी में 20 घंटे कुछ इस तरह की कहानी ये गाड़ी की है। बाकी और 2 सवारी गाड़ियाँ 56909/56910 बेंगालुरु होसपेट बेंगालुरु पैसेंजर और 56269 / 56270 शिवमोग्गा टाउन से मैसूरु के बीच चलने वाली पैसेंजर गाड़ी भी स्पीड अप किए जाने की खबर है।

बस इंतजार है, गाड़ियाँ चलना कब शुरू करें इसका।

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लॉक डाउन के बाद रेल गाड़ियाँ चलाने का प्रारूप

मई की 3 तारीख याने लॉक डाउन – 2 का आखरी दिन, तमाम रेल यात्रीओं के मन मे रेल गाड़ियाँ शुरू की जाने की उम्मीद है। आगे आने वाले दिनोंमें क्या होगा यह तो कोई नहीं जानता पर यदि गाडियाँ चलाई जाती है तो उसके लिए हम यहाँ हमारे पाठकों के लिए केवल चर्चा स्वरूप एक फॉर्मैट, प्रारूप रखना चाहेंगे।

यह बात तो तय है की रेड झोन से गाडियाँ नहीं चलाई जाएगी या वहाँपर यात्रिओंका आवागमन नही किया जाएगा। यहाँ तो लगभग सभी बड़े टर्मिनल्स मुंबई, दिल्ली, हावड़ा, सिकंदराबाद, चेन्नई, जयपुर, भोपाल, करीब करीब सभी राज्यों की राजधानियाँ संक्रमण के दायरों मे अटकी पड़ी है। देश मे हर तरफ जिलों की सीमाएं सील की गई है। ऐसी स्थितियों मे कौनसी गाडियाँ चल पायगी और रेड झोन के स्टेशनों को छोड़ कहाँ स्टोपेजस दिए जाए और इतनी पाबन्दियाँ लगाकर क्या यात्रिओंके लिये रेल में यात्रा करना आसान होगा? और तो और रेल प्रशासन के लिए भी कितना कठिन कार्य रहेगा, लेकिन किसी एक दिन तो इसकी शुरुआत करनी होगी और हमेशा के भाँती कोई भी पहला दिन मुश्क़िलोंसे भरा ही रहेगा।

फिलहाल कोई भी गाड़ी नही चल रही है, तो उदाहरण के तौर पर समझिए मुंबई हावड़ा दुरन्तो विशेष गाड़ी चलाई जाती है। गाड़ी को मुम्बई रेड झोन में है, वहाँसे शुरू करना है। इसके लिए मुम्बई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, या फिर पनवेल, दादर जो भी उचित और सुव्यवस्थित लगे वहाँ से गाड़ी शुरू की जा सकती है। आगे इगतपुरी (नासिक), भुसावल (जलगाँव), अकोला, बडनेरा (अमरावती), धामणगाँव (यवतमाल), वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, झारसुगुड़ा, टाटानगर, खड़गपुर, हावड़ा इस तरह के स्टापेजेस के साथ चलाया जा सकता है।

कहने का तात्पर्य यह की गाड़ी के कमसे कम स्टॉपेज, केवल अनुमतिपत्र के साथ कन्फर्म आरक्षित यात्री ही गाड़ी में यात्रा करेंगे। गाड़ी छूटने के समय से केवल 24 घंटे पहले घोषित होगी और तभीसे बुकिंग शुरू होगी। बुकिंग स्पेशल किरायोंमे ही की जाएगी जिसमें हर स्तर पर प्रिमियम बढ़ता जाएगा। केवल 12+2 डिब्बों की गाड़ी रहेगी जिसमे केवल गैर वातानुकूलित श्रेणी के डिब्बे रहेंगे और एक कैबिन में 4 लोग, LHB कोच में 10 कैबिन होते है अतः केवल 480 यात्री सफर करेंगे। जो 2 SLR डिब्बे रहेंगे उसमे चेकिंग और सिक्युरिटी के लिए RPF स्टाफ़ की व्यवस्था रहेगी।

गाड़ी के स्टॉपेज बुकिंग पर निर्धारित होंगे। बीच के स्टेशन्स पर यात्रिओंको चढ़ने उतरने की अनुमति नही होगी या बुकिंग पर आधारित सिलेक्टेड स्टापेजेस दिए जा सकते है। एक्चुअल गाड़ियाँ ही दुरन्तो, राजधानी इस टाइप की चले जिनके स्टॉपेज पहले ही लिमिटेड हो।

अब गाड़ी मे बुकिंग हो गयी और समझिए की गाड़ी उसके स्टार्टिंग स्टेशन से दिन में 11 बजे चलने वाली है। सारे डिब्बे वेस्टिब्यूल रहेंगे और दरवाजे लॉक्ड रहेंगे। केवल आखरी डिब्बे से यात्री गाड़ीमे चढ़ेंगे और यात्रिओंकी बुकिंग भी उसी प्रकार से की जाएगी, जो यात्री सबसे पहले उतरने वाले होंगे वह सबसे पहले याने इंजिन से पहले डिब्बे में बैठेंगे और सबसे आखरी में उतरने वाले आखरी डिब्बे में। गाड़ी शुरू होने से पहले हर डिब्बे में एक TTE, और 2 RPF होंगे। सभी डिब्बे के दरवाजे लॉक किए जाएंगे। यात्री अपने निर्धारित गन्तव्य स्टेशन पर गाड़ी पहुंचने के बाद अपने डिब्बेसे उतरने के जगह पर आगे वाले सबसे पहले डिब्बे से ही उतर पाएगा। याने पूरी गाड़ीमे एण्ट्री और एग्जिट के लिए केवल एक एक ही डिब्बा होगा। बीच के सारे डिब्बे लॉक्ड रहेंगे। किसी भी तरह की असुविधा हो तो यात्री TTE या RPF से सम्पर्क करेंगे। कोई भी यात्री बिना आरक्षण के यात्रा नही कर पाएगा और ना ही बीच के किसी स्टेशन पर यात्री का उतरना या चढ़ना हो पाएगा। यह सीधा एयरवेज के रूल्स की तरह है। उसी की तरह यात्री के आवागमन पर कड़ी निगरानी रहेगी।

यात्री को अपनी बेडिंग, खाना इत्यादि की व्यवस्था खुद करनी होगी। अतिरिक्त लगेज साथ मे ले जाने की अनुमति नही होगी। गाड़ी में पीने के लिए पानी की बोतल खरीदी जा सकेगी। गाड़ी को विशेष व्यवस्था और निगरानी के साथ किसी स्टेशन पर पूर्वनियोजित कर चाय, नाश्ते की उपलब्धता कराई जा सकती है।जिसके लिए हर 2 डिब्बे के बीच एक ऐसे 6 वेंडर लोग गाड़ी में चलाए जा सकते है।

गाड़ी का कमर्शियल और सिक्युरिटी स्टाफ स्टार्ट टू एन्ड तक चलाया जा सकता है और ऑपरेटिंग स्टाफ जैसे गार्ड और लोको पायलट रूटीन के जगहोंपर बदला जा सकेगा। यात्रिओंके योग्य आचरण और उचित अनुशासन के चलते गाड़ियोंके स्टापेजेस और बीचके स्टेशनोंसे यात्रिओंका आवागमन शुरू किया जा सकता है।

यह सब हमारी ओरसे रेल प्रशासन के लिए सुझाव है और संक्रमण के हालात देख कर इसमें रेल प्रशासन उचित फेरबदल कर के और भी यथासंभव, सुसंगत निर्णय ले सकती है। बस, गाड़ियाँ चलनी चाहिए।

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अबब! कुतुबमीनार से भी ऊंचा।

भारतीय रेलवे के पर्वोत्तर सीमान्त रेलवे के इंजीनियरों ने यह कमाल कर दिखाया है। मणिपुर राज्य को देश की राजधानी से जोड़ने के लिए नई रेल लाईन निर्माण का काम जोरों पर है।

मणिपुर के तमेंगलोंग जिले के मकरु नदी के घाट पर 555.5 मीटर लंबे मेगा ब्रिज पर सभी गर्डरों को लॉन्च कर दिया गया है। जिरीबाम – तुपल – इंफाल के बीच नई ब्रॉड गेज 111 किलोमीटर लंबी रेल लाइन की राष्ट्रीय परियोजना का एक हिस्सा है। इस लाइन पर 47 सुरंगें है, एक सुरंग तो सवा दस किलोमीटर लंबी है। मकरू नदी पर के ब्रिज की विशेषता यह है, की भारतीय रेल पर 100 मीटर ऊंचा याने करीबन 33 मंज़िला बिल्डिंग होती है इतना ऊंचा घाट वाला ब्रिज पहली बार बनाया गया है।

इस ब्रिज का काम 23 अप्रैल, 2020 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जिसे नार्थ फ्रंटियर रेल्वेज के कंस्ट्रुक्शन विभाग ने तैयार किया है।

मकरु ब्रिज (NFR के ट्वीट से साभार)
जिरिबाम रेलवे स्टेशन
इम्फाल रेलवे स्टेशन प्रस्तवित परियोजना चित्र

फ़ोटो सौजन्य : indiarailinfo.com