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रेल बोर्ड की यात्री सुविधा कमिटी का भुसावल दौरा।

रेलवे बोर्ड द्वारा स्थापित यात्री सुविधा कमिटी का भुसावल निरीक्षण दौरा शुरू है। कल ही हमारे प्रतिनिधि उदय जोशी और रवि वर्मा ने इस दौरे के मद्देनजर भुसावल स्टेशनपर कुछ यात्रिओंसे वार्तालाप किया था। आज उन सारे विषयोंपर यात्री कमिटी के सदस्यों ने करीबी नज़र रखते हुए बारीकीसे जायजा लिया।

हमने कल भी तस्विरोंके साथ यह बताया था की स्टेशन को, आहाते को युद्धक टैंक, गार्डन, प्लेटफार्म को मिनी गार्डन और अजन्ता पेन्टिंग्ज से शानदार तरीकेसे सजाया है। आज कमिटी सदस्य, भुसावल के अपर मण्डल प्रबन्धक मनोजकुमार सिन्हा और मण्डल वाणिज्य प्रबंधक बी कुमार इन सारे स्पॉट्स पर विजिट करते दिखाई दिए। सदस्योंने प्लेटफॉर्म्स की खानपान केंद्र में साफसफाई पर टिप्पणियां की और सुधार की जरूरत को समझाया।

कमिटी के चेअरमन पी के कृष्ण दास और सदस्य हिमेन्द्र बाल, प्रेमानंद रेड्डी, डॉ राजेन्द्र फड़के, डॉ अजित कुमार, काकु विजया लक्ष्मी और परशुराम महन्तो जलगाँव के निरीक्षण हेतु जाएंगे।

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यह भुसावल स्टेशन है।

भुसावल यह मध्य रेलवे का एक डिवीजन और मुख्य जंक्शन स्टेशन है। यहाँसे इटारसी और नागपुर के लिए गाड़ियोंका मार्ग बदलता है।

भुसावल स्टेशनपर कुल आठ प्लेटफॉर्म है और पूरे चौबीस घंटोंमे 200 से भी अधिक गाड़ियाँ यहाँसे आना जाना करती है। ऐसेमें भुसावल स्टेशन का दिनांक 24 को रेलवे बोर्ड की PAC पेसेंजर एमिनिटीज कमिटी याने यात्री सुविधा समिती का निरीक्षण होने जा रहा है। यह कमिटी प्लेटफॉर्म्स पर यात्रिओंकी सुविधाओंपर निरीक्षण कर रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को पेश करती है और रेलवे बोर्ड इस पर विचार कर आगे उपयुक्त निर्णय लेता है। इसके मद्देनजर हमारे प्रतिनिधि उदय जोशी, रवि वर्मा ने, स्टेशन पर मौजूद यात्रिओंसे बात चीत की और स्टेशन सुविधाओंका लेखाजोखा लिया।

शुरुवात स्टेशन के दक्षिण प्रवेश से करते है। स्टेशन का प्रवेशद्वार काफी सुन्दर अजन्ता कलाकृतियों से सजाया गया है। बाहर के अहाते में, मनोहर बाग़ीचेमे, 100 फिट पोल पर राष्ट्रध्वज तिरंगा लहराता है।

स्टेशन की लाउंज में प्रवेश करने के बाद समयरारिणी लगी हुई है, जो की त्रुटिपूर्ण है और सुधार की आवश्यकता है। आरक्षण कार्यालय, टिकट खिड़कियां, पूछताछ आदि सब यथास्थित है। आगे FOB पादचारी पल जिसे एस्केलेटर लगा हुवा है जो करीबन 1 वर्ष से निर्माणाधीन अवस्थामे बन्द है और उसके चलते एस्कलेटर भी बैरीकेट्स लगाकर बन्द किया गया है।

आगे प्लेटफॉर्मोंपर की स्थिति कुछ इस प्रकार दिखाई दी।


नवनिर्मित प्लेटफार्म क्रमांक 1 और 2 पर आने जाने के लिए केवल 1 पादचारी पुल है और कोईभी लिफ्ट या एस्कलेटर नही है। पब्लिक टॉयलेट प्लेटफॉर्म के दोनों ही एन्ड पर है। पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है लेकिन वॉटर कूलर नही है, भुसावलमें गर्मियों दिनोंमें 45 डिग्री के ऊपर तापमान रहता है। अतः पिने के लिए शीतल जल आवश्यक है। खानपान के स्टॉल्स भी न के बराबर है।

3 और 4 क्रमांक के प्लेटफार्म पर दोनोंही एन्ड पर कोई पब्लिक टॉयलेट नही है। प्रथम श्रेणी के महिला एवं पुरुषों के प्रतीक्षालय तो है लेकिन आम यात्रिओंका क्या? वे तो इन प्रतीक्षालयों का उपयोग नही कर सकते। बाकी सारी यात्री सुविधा जैसे शीतल जल के लिए वॉटर कूलर, फूड स्टॉल, स्टेशनरी स्टॉल खानपान फ़लोंके स्टॉल अच्छी अवस्थामे है। प्लेटफॉर्मोंका सौदर्यीकरण मिनी गार्डन भी काफी सुन्दर तरीकेसे किया गया है।

प्लेटफार्म क्र 4 पर गार्डन

प्लेटफार्म क्रमांक 5 / 5 अ / 6 पर केवल मुम्बई एन्ड पर ही एक पब्लिक टॉयलेट है जो की यात्रिओंके व्यवस्था में कम है। इन प्लेटफॉर्मोंपर भी बाकी सारी यात्री सुविधाएं यथोचित है। प्लेटफार्म क्रमांक 7/8 पर भी एक पब्लिक टॉयलेट केवल मुम्बई एन्ड पर ही है।

जब प्लेटफार्म शेडिंग की बात आती है तो प्लेटफार्म क्र 1,2,3,4 पर पूरा शेड नही है, काफी डिब्बे बिना शेड के रह जाते है और प्लेटफार्म क्र 5 पर नागपुर एन्ड बिना शेड का है।

यात्रिओंकी जरूरतें

यात्रिओंसे जब बातचीत की गई तो यात्री काफी उत्साहित दिखे। उनके कई सारी सूचनाएं थी। दक्षिण दिशा और उत्तर के दोनों लाउन्ज में मल्टीकलर ट्रेन नेम डिस्प्ले लगाना चाहिए। वैसे ही सभी प्लेटफार्म पर भी ट्रेन इंडिकेटर और डिब्बा इंडीकेटर मल्टीकलर डिस्प्ले लगाए जा सकते है।

पब्लिक टॉयलेट्स सामान्य यात्रिओंके सुविधा हेतु हर प्लेटफॉर्म्स के दोनों सिरोंपर अत्यावश्यक है।

गाड़ियाँ रुकनेपर कोचेस, डिस्प्ले से अलग ही रहते है, आजकल गाड़ियाँ स्टेशनोंपर कम ही रुकती है अतः कोच डिस्प्ले गाड़ियोंके डिब्बोंसे सही सही होना चाहिए।

यात्रिओंके लिए जो बैटरी कार चलाई जा रही है वह फिलहाल रैम्पसे चलाई जा रही है जिसे रैम्प के बजाय प्लेटफॉर्म्स के एन्ड पर बने पथसे चले तो रैम्प पर चलने वाले यात्रिओंको असुविधा नही रहेगी।
यात्रिओंके सुविधाके लिए क्लॉक रूम स्टेशनपर किसी भी प्रवेश के पास ही होना चाहिए फिलहाल यह सुविधा स्टेशन एरिया से काफी दुर है।

GRP पुलिस थाने में जाने के लिए रेलवे के आहातेसे से रास्ता होना चाहिए जो मौजूदा स्थिति में काफी घुमाकर जाना पड़ता है।

दोनों प्रवेशद्वारपर लगी समयसारिणी तृटिपूर्ण है, स्टेशनके नाम, गाड़ियोंके नाम, नम्बर विचित्र तरीकेसे गलत लिखे गए है।

दक्षिण प्रवेश के पास एक होम कम आइलैंड प्लेटफॉर्म बनाया जा सकता है, जो स्थानिक यात्रिओंके लिए उपयुक्त रहेगा।

हर प्लेटफॉर्मोंपर लिफ्ट / एस्कलेटर सुविधा लगायी जाए। फिलहाल एक FOB एस्कलेटर से जुड़ा है जिसमे प्लेटफार्म पर चढ़ने उतरने की यांत्रिक सुविधा नही तो दूसरे FOB पर प्लेटफार्म पर लिफ्ट लगे है लेकिन दोनों सिरे पे यांत्रिक सुविधा नही है।

इसी तरह कुछ छोटी बड़ी मांगे और सुविधाएं हमारे संवाददाताओने यात्रिओंसे बातचीत करके जानी है। आशा है, रेलवे बोर्ड की PAC कमिटी इस पर विचार करेंगी।

निर्माणाधीन अधूरा पड़ा पादचारी पुल
प्लेटफार्म क्र 3/4 के बीच निर्माणाधीन AC लाउन्ज और रिटायरिंग रूम्स
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भुसावल जलगाँव तीसरी लाइन जल्द ही कार्यान्वित

भुसावल जलगाँव के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। यह 25 km के काम मे भुसावल से भादली तक तीसरी लाइन पूरी हो चुकी है और भादली से जलगाँव का काम भी अप्रेल से पहले पूरा करने की कवायद चल रही है। भादली से भुसावल तक तीसरी लाइनपर, मालगाड़ियोंका ट्रैफिक चल रहा है। यह पूरा प्रोजेक्ट एक तरह से भुसावल सूरत रेल ट्रैफिक के लिए महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है। किस तरह, आइए आपको बताते है।

सूरत – जलगाँव रेल मार्ग पश्चिम रेलवे के मुम्बई डिवीजन का हिस्सा है, जो की दोहरी रेल लाइन और विद्युतीकरण होकर तैयार है। 130 किलोमीटर प्रति घंटा स्पीड का यह मार्ग एक जियोग्राफिकल हक़ीकत की वजह से अपनी क्षमता से बहोत कम उपयोग में लिया जा रहा है। दरअसल पश्चिम रेलवे के सूरत – भुसावल मार्ग का जलगाँव जंक्शन पर मध्य रेलवे के मुम्बई भुसावल मेन लाइन से लिंक होता है, और यहाँ पर ही दोनों ओरसे आने वाली गाड़ियोंका जमावड़ा तैयार हो जाता है। मुम्बई से भुसावल के बीच कई तेज गाड़ियाँ है, जो जलगाँव नही रुकती और इसीलिए उन गाड़ियोंको सीधे निकलनेमे पश्चिम रेलवे की सूरत से आने वाली गाड़ियोंको बिना वजह जलगाँव में या स्टेशन के बाहर 25-40 मिनिट तक खड़ा रखना पड़ता है। यही स्थिति जब पश्चिम रेलवे में भुसावल से सूरत की ओर जानेवाली गाड़ियोंके लिए जलगाँव में, मुम्बई लाइन क्रॉस करके जाने में होती है।

भुसावल – जलगाँव के बीच तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण इन्ही भौगोलिक परेशानी का समाधान करने वाले स्वरूप में किया जा रहा है। भुसावल से भादली तक यह दोनों लाइनोंको मौजूदा मेन लाइनोंके साथ लाया गया है और भादली के बाद जलगाँव तक यह दोनों नई लाइनें, एक ROR रेल ओवर रेल या यूँ कहिए फ्लाईओवर ब्रिज से भुसावल मुम्बई मैन लाइन को क्रॉस करती हुई दूसरी दिशा में, जलगाँव – सूरत लिंक की साईड में आ जायेगी। जो कॉन्जेशन, लाइन क्रॉसिंग की समस्या है, वह खत्म हो जाएगी।

अब आपको पूर्ण स्थिति समझ आ गयी होगी, जब जलगाँव स्टेशन पर मध्य रेल और पश्चिम रेल के लाइन क्रॉसिंग की समस्या खत्म होने से पश्चिम रेलवे की गाड़ियोंको जलगाँव स्टेशन से पास करने में कोई परेशानी नही रहेगी और उससे सूरत – भुसावल मार्ग पर आसानी से गाड़ियोंका परिचालन बढ़ाया जा सकेगा। जलगाँव के प्लेटफार्म और लाइन भी ब्लॉक नही रहेगी, उससे मैन लाइन पर भी ज्यादा सेवाएं चल पाएगी।

दैनिक भास्कर, सूरत से साभार

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रेल मार्गोंकी डबलिंग/ ट्रिपलिंग के लिए सूची जारी।

भारतीय रेलवे में 21 मार्गोंकी लिस्ट जारी हुयी है, जिसमे रेल मार्ग को डबलिंग या ट्रिपलिंग के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे किया जाना है।

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रेल्वे प्लेटफॉर्म्स उपलब्ध सुविधाएं : किस तरह ले उपयोग।

गत 4-5 वर्षोंमें, भारतीय रेल ने अपने प्लेटफार्म पर यात्री सुविधाओंमें बेहतरीन सुधार किया है। खास करके यात्री आवागमन के लिए एग्जिट पॉइंट्स बढाए जा रहे है। लगभग हर छोटे बड़े जंक्शनों पर FOB – पैदल पुल, एस्कलेटर, बैटरी कार, रैम्प, लिफ्ट लगाए जा रहे है, ताकी यात्रिओंको प्लेटफॉर्मो से जल्द से जल्द बाहर निकलने में आसानी हो।

दरअसल यह सुविधाएं जिसमे कुछ यान्त्रिक है, जैसे एस्कलेटर, लिफ्ट, बैटरी कार और किसी स्टेशन के यात्रिओंको नयी है तो वहाँपर यात्रिओंको इनका उपयोग करने हेतु आवश्यक जानकारी ध्यान में रखकर ही उसका उपयोग करना चाहिए। कोई यांत्रिक सुविधा बन्द अवस्था मे हो खास करके एस्कलेटर तो उसका उपयोग सीढियोंकी तरह करना बिल्कुल गलत है। यदि एस्कलेटर, लिफ्ट किसी सुधार के लिए बन्द किए गए है तो प्रशासन उसपर ” बन्द ” का तख्ता लगाकर उसे बैरिकेट्स लगा देती है तो बहोत ज्यादा बेहतर रहता है।

जहाँ के यात्रिओंके लिए एस्केलेटर नए है, यात्री एस्कलेटर का उपयोग करते हुए दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते है और खास करके वृद्ध यात्री या छोटे बच्चे इसकी चपेट में आ जाते है। एस्कलेटर के उपयोग के लिए कुछ नियम और सूचनाएं है,

एस्कलेटर पर सवार होने से पहले वह किस दिशा में जा रहा है, उसपर अवश्य ध्यान दे। आपकी चलने की दिशा भी वहीं होनी चाहिए।

अपना पैर एस्कलेटर की सीढ़ी पर बीचोंबीच बराबर उठाकर रखे, न की किसी कोने पर या सीढ़ी की दीवाल से सटकर या घसीटते हुए रखना है।

आपका चेहरा, नजर चलनेकी स्थिति हमेशा एस्कलेटर जिस दिशा की ओर है उसी तरफ होना चाहिए, एकबार आप एस्कलेटर पर स्थिर खड़े हो गए फिर रेलिंग को थामे, रेलिंग आपके केवल आधार या सपोर्ट के हेतु लगी है। रेलिंग पर अपना हाथ थामे रहिए मगर रेलिंग पर जोर नही देना है, और नाही उसपर बैठना या अपने हाथ का कोई बैग या सामान रखना है।

एस्कलेटर की सीढियोंके किनारोंपर झुकना, खड़े होना या कोई खेल करना खतरनाक हो सकता है। इससे आपका बैलेंस ढल सकता है।

एस्कलेटर के अंतिम छोर तक पहुंचने पर तुरंत बाहर होना चाहिए और उस एरिया को खुला रखना चाहिए।

एस्कलेटर पर सवार होते वक्त यदि आप नंगे पैर है, रबर स्लिपर पहने है या आपके जुते के लैस ढ़ीले या लंबे है तो यह काफी खतरनाक हो सकता है। ढीले ढाले वस्त्र पहनकर भी एस्कलेटर पर सवार होने में खतरा है। एस्कलेटर की जालीदार सीढ़ियोंमें इस तरह के कपड़े, लैस या रबर चप्पल फंस कर दुर्घटना हो सकती है।

एस्कलेटर पर सवार होते वक्त बुजुर्गों के वॉकर, छड़ी, व्हील चेयर के साथ ना चढ़ाए बेहतर है की उनके लिए एस्कलेटर के बजाए लिफ्ट का उपयोग करे। बड़ा सामान, लगेज, ट्रॉलिज, बच्चे की ट्रॉली के साथ न चढ़े। यह फिसलने का खतरा है।

यदि आप बच्चोंके, या वृद्ध के साथ एस्कलेटर पर सवार हो रहे हो तो उनका हाथ थामे रहे। स्टार्टिंग और एग्जिट पॉइंट पर उनका बराबर ख्याल रखें, जरूरत हो तो उनकी मदत करे। बहोत सी बार एस्कलेटर की गति से यह लोग तालमेल नही बना पाते और बैलेन्स खो सकते है।

एस्कलेटर पर बैठना, या बच्चोंको बैठाना एकदम गलत है, ऐसा कदापि न करे।

एस्कलेटर पर सवारी करने के लिए आप यदि आश्वस्थ नही है तो आप रेग्युलर सीढियां या लिफ्ट का प्रयोग करे। अतिरिक्त साहस न करें और न ही किसीको बाध्य करें।

एस्कलेटर पर स्टार्टिंग, एग्जिट और मिडल पॉइंट्स पर एमर्जनसी स्टॉप बटन्स लगे होते है, आपात स्थिति में आप इसका उपयोग एस्कलेटर को तुरन्त रोकने के लिए कर सकते है।

एस्कलेटर बन्द स्थिति में हो तो उसका उपयोग आम सिढ़ीयों की तरह ना करें। यदि एस्कलेटर किसी तांत्रिक कारणोंसे रुक गयी हो और अचानक चल पड़े तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। कई स्थानोंपर एस्कलेटर असिस्टेंट हाजिर रहते है, वे यात्रिओंकी मदत भी करते है और बन्द स्थिति में एस्कलेटर के एंट्री पॉइंट पर बैरिकेट्स भी लगा देते है।

इंजीनियरिंग कंपनियों ने हाल के वर्षों में सुरक्षित एस्केलेटर और चलती फुटपाथ विकसित किए हैं, लेकिन इस प्रकार की मशीनों के साथ हमेशा जोखिम जुड़ा होता है।  यदि आप एस्केलेटर की सवारी करने के लिए आश्वस्त नहीं हैं, तो हम इसके बजाय नियमित सीढ़ियों या लिफ्ट लेने का सुझाव देते हैं।  इन तरीकों के साथ-साथ जोखिम भी जुड़े हैं, लेकिन शायद एस्केलेटर के जोखिम के रूप में बड़े नहीं हैं।