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मुम्बई मण्डल में रेल ब्लॉक जारी है …..

मुम्बई मण्डल में और 15 जनवरी तक रेल ब्लॉक की सूचना है।

मुम्बईसे पुणे होकर पंढरपुर, विजयपुरा जानेवाली पैसेंजर, पुणे पनवेल पैसेंजर यह गाड़ियाँ रद्द रहेंगी।

जी हाँ, हुतात्मा एक्सप्रेस और 15 जनवरी तक दौंड बाईपास, अहमदनगर, कोपरगाँव होते हुए चलेगी। पनवेल, नासिक नही जाएगी।

मुम्बई कोल्हापुर के बीच चलनेवाली कोयना एक्सप्रेस 15 जनवरी तक पुणे कोल्हापुर के बीच ही चलेगी।

जानकारी के परिपत्रक देखे –

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अरे, साईड लो। प्राइवेट गाड़ियोंका जमाना आ रहा है।

लख़नऊ दिल्ली तेजस के बाद अब दूसरी प्राइवेट ट्रेन मुम्बई अहमदाबाद तेजस जनवरी 19 से शुरू होने जा रही है।

यकीन मानिए, करीबन दस लंबे रेल मार्ग, चार बड़े सबर्बन रेल नेटवर्क और पांच नॉन सबर्बन नेटवर्क प्राइवेट गाड़ियोंको उतारने के लिए निश्चित कर लिए गए है। लंबे रेल मार्ग में, मुम्बई से कोलकाता, गौहाटी, और चेन्नई, नई दिल्ली से मुम्बई, कोलकाता, बंगालुरु और चेन्नई, चैन्नई से कोलकाता और जोधपुर, तिरुवनंतपुरम से गौहाटी इन रेल मार्गोंकी अगले महिनेसे प्राइवेट ऑपरेशन के लिए टेंडरिंग प्रोसीजर शुरू हो जाएगी। मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई की सबर्बन गाड़ियाँ भी प्राइवेट प्लेयर के हाथों सौपने की तैयारी है तो नॉन सबर्बन पॉपुलर रूट्स में, नागपुर – पुणे, कोटा – जयपुर, विसाखापट्टनम – तिरुपति, गोरखपुर – लखनऊ और चंडीगढ़ – लखनऊ यहाँपर भी प्राइवेट गाड़ियाँ चलाने की व्यवस्था पूरे ज़ोरोंपर है।
रेल प्रशासन का यह कहना है, पहलेसे चलनेवाली कोई भी गाड़ी रद्द नही होगी, जो भी प्राइवेट ट्रेन चलेगी, नई ही रहेगी। अब तक तो आपने प्राइवेट ट्रेनोंकी सारी खूबियों को जान ही लिया होगा, अत्यधुनिक आसान व्यवस्था, फाइव स्टार क्वालिटी खानपान, डायनामिक रेट के किराए यह सब किसी आम यात्री के लिए नही है। वैसे भी रेल प्रशासन आम यात्री को धीरे धीरे उन्नत स्तर पर लेके जा ही रही है। आम यात्री जनरल कोचेस से स्लिपर कोच और अब वातानुकूलित 3 टियर तक में यात्रा करने तक की मजबूरी में पोहोंच गया है।

जनरल डिब्बों में वह पहले भी यात्रा नही कर पाता था तब स्लिपर क्लास ही उसका सहारा था, अब तो स्लिपर क्लास की हालत जनरल से भी गईगुज़री रहती है। जनरल क्लास से ज्यादा किराया देकर भी जनरल क्लास जैसे ही यात्रा करना हो तो थोड़ा और ज्यादा देकर वातानुकूलित 3 टियर में ही क्यों न जाया जाए? इस तरह के ख्यालातों के चलते आजकल लोग अपनी यात्रा को वातानुकूलित 3 टियर में तब्दील कर रहे है। हालाँकि इन वातानुकूलित 3 टियर में भी अनाधिकृत यात्रिओंका आक्रमण होना शुरू हो गया है। क्या ड्यूटी पास वाले, ऑन ड्यूटी रेल कर्मचारी और MST पास वाले सभी लोग बेहिचक वातानुकूलित 3 टियर में यात्रा कर लेते है।

अब इन सभी परेशानियों से आपको दूर रहना है तो अपने आप को थोड़ा और, थोडासा और अपग्रेड करना जरूरी है। कैसे? हम बताते है, आपको कोई अतिरिक्त यात्रिओंकी तकलीफ नही चाहिए तो रेलवे की प्राइवेट गाड़ियोंको अपनाना होगा। किराया थोड़ा ज्यादा लगेगा पर आराम? पूछिए मत। आपको बिल्कुल हवाई जहाज की यात्रा का एहसास होगा इसकी गारंटी। प्लेटफार्म तो एयरपोर्ट लाईक बनाए जा ही रहे है, गाड़ियाँ भी एयर होस्टेस की तौर पर ट्रेन होस्टेस की मिजबानी से तैयार है।

बस! देखना है, जोर कितना बाजुएं क़ातिल में है। याने आपके बटुए में है।

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पांच जोड़ी गाड़ियोंका वाराणसी के बजाय मंडुआडीह बनेगा टर्मिनल ।

निम्नलिखित पांच जोड़ी गाड़ियाँ 1 जनवरीसे वाराणसी जंक्शन के जगह मंडुआडीह से चलेगी और लौटने में वाराणसी में खत्म होने की जगह मंडुआडीह तक जाएगी।

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माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय

मध्य रेल के महाप्रबंधक का भुसावल मण्डल का निरीक्षण दौरा सम्पन्न हुवा। इस निरीक्षण दौरे में भुसावल मण्डल के उल्लेखनीय कार्योंको पुरस्कृत किया गया। उसमें वर्मीकल्चर प्लांट एवं गार्डन, रेल्वेज में बायो टॉयलेट प्रोजेक्ट के लिए महत्वकांक्षी प्रकल्प है।

खण्डवा, बुरहानपुर, रावेर एवं भुसावल में निर्माणाधीन प्रकल्पोंका जायज़ा लिया गया। भुसावल स्टेशनपर मल्टीलाइन डिजिटल डिस्प्ले, प्लेटफार्म क्र 3/4 पर उद्यान एवं निर्माणाधीन आलीशान वातानुकूलित विश्रामालय शामिल है।

इस दौरे की प्रमुख उपलब्धी यह रही की भुसावल डिवीजन में गाड़ियोंकी स्पीड 110 km प्रति घंटा से बढाकर 130km प्रति घंटा की जानी है और भुसावल परिसर में रेल्वेसे वर्षों पुराना अतिक्रमण हटाकर खाली की गई जगह को उपयोग में लाया जायेगा। वहाँपर आनेवाले 2 वर्षोंमें MEMU गाड़ियोंके रखरखाव का कारखाना खड़ा किया जा रहा है। महाप्रबंधक की प्रेस मिट में बताया गया, इस 120 करोड़ के प्रकल्प निर्माण की निविदाएं पटना की कम्पनी के हक़ में जा चुकी है और निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। इससे स्थानिक युवाओंकों रोजगार के अवसर मिलने की आशा है।

एक विशेष बात का उल्लेख हम यहाँ पर करना चाहेंगे, प्रेस मिट में जो गाड़ियोंके स्पीड को 110 से 130 km प्रति घंटा बढ़ाने की बात हुई याने गाड़ियोंकी गति लगभग 18% बढ़ेगी। इससे क्या होगा आपको पता है? इससे गाड़ियाँ किसी एक स्टेशन से छूटने के बाद अपने अगले स्टॉप पर जल्दी पोहोंचेगी और जब अगले स्टेशनपर गाड़ी लेने के लिए जगह नही होगी, प्लेटफॉर्म खाली नही होगा तो गाड़ी आउटरपर खड़ी रहेगी, अब आप पूछोगे, इसका क्या हल है? तकलीफ़ यही तो है इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की, प्लेटफार्म के कमी की।

यह सब मुद्दें एकदूसरे से उलझे है। गाड़ियोंकी स्पीड बढ़ती है तो पूरे के पूरे टाईम टेबल की भी पुनर्रचना करनी पड़ेगी, तब ही तो इस स्पीड बढाने का फायदा मिल पाएगा। उधना जलगांव दोहरीकरण का गाड़ियोंके टाईम टेबल पर खासा असर नही हुवा है, आज भी पश्चिम रेलवे की लगभग सभी गाड़ियाँ घंटो पहले पालधी – जलगाँव स्टेशन के बीच आकर खड़ी हो जाती है जबकी जलगाँव स्टेशनपर उनके लिए 5 नम्बर का नया प्लेटफार्म का निर्माण किया जा चुका है। लेकिन जब तक जलगाँव – भुसावल 3/4 लाइन का निर्माण पूरा नही हो जाता तब तक उधना – जलगाँव दोहरीकरण का पूरा लाभ नही मिल सकता। क्योंकी किसी भी गाड़ी का टेक्निकल स्टॉपेज भुसावल ही है। स्टाफ़ बदलना, रखरखांव करना, गाड़ी में पानी भरना जिसके लिए गाड़ी को भुसावल में ही कमसे कम 10 मिनट रुकना है न की जलगाँव में। आज भी मध्य रेलवे की मुम्बई से आनेवाली गाड़ियाँ जलगाँव से सूरत की जानेवाली गाड़ियोंकी क्रॉसिंग जलगाँव में ही करनी पड़ती है, और यह क्रॉसिंग, भुसावल – जलगाँव तीसरी, चौथी लाइन के प्रोजेक्ट में, तरसोद के ROR रेल ओवर रेल ब्रिज से ही बिना किसी गाड़ी को रोके, सम्भव है।

तो मित्रों, यह सभी प्रोजेक्ट इस तरह एक दुसरेसे जुड़े होने के कारण एक एक उपलब्धि में पूरा बेनिफिट नहीं मिलेगा, सारे प्रोजेक्ट जब कम्प्लीट हो जाए तभी पूर्ण फलदायी होंगे। तब तक ” धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होए। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।” यह संत कबीर दास जी का दोहा याद रखिए।

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General Manager at Bhusaval division.

आज मध्य रेल के जनरल मैनेजर संजीव मित्तल अपने वार्षिक निरीक्षण हेतु भुसावल मण्डल के दौरे पर है।

यह एकदिवसीय निरीक्षण दौरा सुबह 9 बजे खण्डवासे शुरू हुवा। खण्डवा में उन्होंने स्टेशन का सर्क्युलेटिंग एरिया, टिकट परिक्षकोंके लिए बनाई गई नई लॉबी, गार्ड और लोको पायलट की लॉबी, नए बनाए गए फुट ओवर ब्रिज एवं सीसीटीवी रूम का निरीक्षण किया। इसके पश्चात कर्मचारीओंकी रनिंग रूम, OHE डिपो और राजभाषा, सुरक्षा पर रखी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। खण्डवा से नेपानगर 39km का हाई स्पीड चालान क्षमता का निरीक्षण, चाँदनी स्टेशन का SSP रूम, असीरगढ़, बुरहानपुर स्टेशन का निरीक्षण, स्टेशन पर बने सीसीटीवी के कार्य का निरीक्षण, प्लेटफॉर्म क्र 2 पर बनी कुंडी भंडारा की गैलरी का अवलोकन। रावेर स्टेशन का निरीक्षण, ‘ फिट बॉडी फिट माइन्ड’ प्रदर्शनी, संगणकीय उद्घोषणा प्रणाली और वृक्षारोपण।

भुसावल में स्टेशन का निरीक्षण, प्लेटफार्म क्र 3/4 पर नए बनाए जा रहे वातानुकूलित विश्रामालय एवं प्लेटफार्म गार्डन, दक्षिण दिशा के वेटिंग हॉल में मल्टीलाइन ट्रेन डिस्प्ले, सर्क्युलेटिंग एरिया के गार्डन, गाड़ियोंकी टंकियोंमे तेजी से पानी भरने की QWS (क्वीक वॉटरिंग सिस्टम ) का निरीक्षण, महत्वकांक्षी वर्मी कल्चर प्लांट और रोपवाटिका, महिला रेल सुरक्षा बल की कर्मचारिओंकी बैरक का निरीक्षण, DRM ऑफिस में कंट्रोल ऑफिस का निरीक्षण इस तरह कार्यक्रम तय किया गया है।

कुछ दृश्य – (फोटो – राहुल)

प्लेटफॉर्म 3/4 पर बना गार्डन

General Manager at Khandwa – ( फोटो-मनोज सोनी, खण्डवा)

General Manager visiting at Kundi Bhandara gallery on platform no.2, Burhanpur, in his Bhusawal division inspection tour.