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सोशल मीडिया की ख़बरोंका पंचनामा

घटनाओं का आकलन किस तरह से किया जाता है, यह सम्बन्धित व्यक्ति का अपना अपना नज़रिया रहता है, मगर उस किये गए नजरिए, आकलन को जब समाज मे परोसा जाता है तो उपरोक्त घटना के मायने व्यक्ति दर व्यक्ति बदलते चले जाते है। कहते है, पत्रकार देश, दुनिया, समाज का आईना होता है। वह किसी घटना को किस अंदाज से अपने पाठकोंके सामने रखता है इस पर जनमानस का उस घटना प्रति नजरिया बनता है।

हाल ही की घटना देखिए, उच्चतम न्यायालय के 5 सदस्यीय पीठ ने विमुद्रिकरण पर निर्णय दिया। अब तक तो किसी भी निर्णय का अंतिम रूप उसके बहुमत पर आधारित होता था और अल्पमत की चर्चा सामने आती ही नही थी। केवल यह रहता था, निर्णय में बहुमत की संख्या क्या है, और वही अन्तिम परिणाम रहता था। मगर इस विषय मे अल्पमत का उल्लेख, बहुमत के बराबर या किंचित ज्यादा ही चर्चित रहा। यह सब उस “आईने” का प्रतिबिंब था की अल्पमत विवरण ने ज्यादा सुर्खियाँ बटोरी। मित्रों, हम सभी न्यायालयिन निर्णयों का पूर्ण रूपसे सन्मान रखते हुए उपरोक्त घटना का मीडिया में प्रस्तुतिकरण किस तरह किया गया, केवल यही बताने का प्रयास कर रहे है।

मीडिया क्या देखता है, किस तरह देखता है और उसे किस तरह प्रस्तुत करता है इस पर समाज, जनमानस की प्रतिक्रिया उभरती है। पहले यह माध्यम जनचर्चा और वृत्तपत्र, दूरदर्शन तक सीमित थे, मगर अब सोशल मीडिया के कई मंच खुल गए है। जो इनके हाथ मे हाथ डाले प्रतिस्पर्धा करते नजर आते है। यहाँ तक भी समस्या नही है, मगर जब सोशल मीडिया इंटरनेट के जरिये लगभग हर हाथ में पहुंच चुका है और यह लोग उसका उपयोग करते वक्त विवेकपूर्ण तरीके से नही करते या करते भी तो किसी शरारत को जन्म दिया जाता है, यह समस्या है। चूँकि इसमे सोशल मीडिया के करोड़ों उपयोगकर्ता का भी दोष नही है। माध्यम की साधन सामग्री सरलता से उपलब्ध है और इसके उपयोग की साधना का कोई वर्ग बना ही नही है। कमसे कम आम आदमी के लिए तो नही ही है और ना ही उसकी उसे कोई चिन्ता या फिक्र है।

खैर, आप को लग रहा होगा, आज हम अपने नियमित विषय से काफी दूर जा रहे है। लेकिन मित्रों, जब कोई ऐसी खबर दिखती है की उसका मूल कुछ और होता है और स्वरूप कुछ और! तो बड़ा विचित्र लगता है। आजकल पत्र और पत्रिकाओं में इस सोशल मीडिया से उत्प्रेरित खबरों का आधार लेकर बड़ी खबर, “ब्रेकिंग न्यूज़” बनाकर सामने लायी जाती है। बड़ा अचरज होता है। हाल ही में द म रेल की एक प्रतिदिन चलनेवाली एक्सप्रेस को विस्तारित करने की खबर अखबारों में छपी थी। उपरोक्त विषयपर कोई अधिकृत परिपत्र कभी सामने नही आया। सम्भवतः “कही सुनी” मीडिया की खबर अखबारों में छाप दी गयी। अब जनप्रतिनिधियों पर दबाव आ रहा है के उक्त विषयपर प्रशासनसे अपना बयान जारी करवाया जाए। ठीक उसी तरह धुलिया – चालीसगांव गाड़ियोंके स्लिप कोच का भी विषय है। पूर्व में धुलिया – पुणे और धुलिया – मुम्बई कोच चालीसगांव से मुख्य मार्ग की एक्सप्रेस गाड़ियोंमे जुट कर चलाए जाते थे। अब रेल प्रशासन ने किसी भी तरह के रेल शंटिंग प्रक्रिया को पूर्णतः रद्द करने का निर्णय ले लिया है तो ऐसे बयान, खबर क्यों और किस तरह सामने लायी जाती है? कहीं कोई सोशल मीडिया की शरारत तो नही?

आजकल सोशल मीडिया का दुरुपयोग इसी तरह हो रहा है। खबरें उड़ाई, फैलाई जाती है और कुछ गैरजिम्मेदाराना संवाददाताओंके अतिउत्साही परिणाम उनके मीडिया हाउस को भुगतने पड़ते है। उदाहरण तो बहुत निकलकर आ सकते है, अपने रेल विषयक और राष्ट्रीय स्तर तक के भी। आखिर प्रत्येक माध्यम का प्रचार और प्रसार का मुख्य वाहक उसका उपयोग कर्ता ही है। जब वह जागरूक हो जाएगा तो इस तरह की ‘मिस्चीवस’ शरारतपूर्ण ख़बरोंको विराम मिलेगा।

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यात्रियों के किराए से अर्जित रेलवे की राजस्व आय में 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी

02 जनवरी 2023
सोमवार, पौष, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2079


रेलवे ने आरक्षित यात्री खंड में 46 प्रतिशत और अनारक्षित यात्री खंड में 381 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की

अप्रैल से दिसंबर 2022 के दौरान प्रारंभिक आधार पर भारतीय रेलवे को यात्री किराए से कुल अनुमानित 48913 करोड़ रुपये की आय हुई है जो कि 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, क्योंकि पिछले वर्ष इसी अवधि में उसने 28569 करोड़ रुपये अर्जित किए थे।

आरक्षित यात्री खंड में, 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2022 की अवधि के दौरान बुक किए गए यात्रियों की कुल अनुमानित संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 56.05 करोड़ की तुलना में 59.61 करोड़ रही है, जो कि 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2022 की अवधि के दौरान आरक्षित यात्री खंड से उत्पन्न राजस्व पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 26400 करोड़ रुपये की तुलना में 38483 करोड़ रुपये रहा है, जो कि 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

अनारक्षित यात्री खंड में, 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2022 की अवधि के दौरान बुक किए गए यात्रियों की कुल अनुमानित संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 16968 लाख की तुलना में 40197 लाख है, जो 137 प्रतिशत की वृद्धि है। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2022 की अवधि के दौरान अनारक्षित यात्री खंड से उत्पन्न राजस्व पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 2169 करोड़ रुपये की तुलना में 10430 करोड़ रुपये है जो कि 381 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

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PIB द्वारा प्रकाशित, के सहयोग से

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PRS प्रतिक्षासूची टिकट धारकोंकी कुव्यवस्था पर रेल प्रशासन हो कठोर

JAN 1, 2023, SUNDAY
PAUSH SHUKLA PAKSHA, DASHAMI,
रविवार, पौष, शुक्ल पक्ष, दशमी, विक्रम संवत. 2079

रेल प्रशासन के अभ्यासानुसार रेल टिकटोंका 80% व्यवहार ऑनलाइन किया जा रहा है। जिसमे आईआरसीटीसी की वेबसाइट, ऍप, UTS इत्यादि शामिल है। जब ऑनलाइन लेनदेन से टिकट बुकिंग की जा रही है तो कुछ प्रश्न प्रशासनिक दक्षता के लिए अनुत्तरित है। आइए, समझते है।

टिकटोंका ऑनलाइन लेनदेन अर्थात रिफण्ड के लिए सुविधाजनक। चूँकि ऑनलाइन लेनदेन में यात्री का बैंक खाता रेल प्रशासन के पास पहुंचता है और धनवापसी की अवस्था मे तुरन्त ही व्यवहार पूर्ण किया जा सकता है। यह न सिर्फ यात्री के लिए सुविधाजनक है अपितु रेल प्रशासन के लिए भी बेहद कारगर है।

ऐसा क्यों? यह समझने के लिए हमे रेल टिकट आरक्षण की प्रणाली को समझना होगा। रेल टिकटोंका आरक्षण दो प्रकार से किया जाता है। ऑनलाइन और ऑफलाइन लेनदेन। ऑनलाइन में आईआरसीटीसी के ऍप, वेबसाइट या अन्य आईआरसीटीसी से संलग्न ऍप/वेबसाइट से यह व्यवहार होता है। यह व्यवस्था सम्पूर्णतः डिजिटल प्रक्रिया होती है। टिकट छापने की आवश्यकता नही रहती। दूसरा प्रकार ऑफलाइन टिकिटिंग अर्थात PRS पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम रेलवे के काउन्टर्स पर दैहिक चलन, फिजिकल करेंसी देकर यात्री टिकट खरीदता है। टिकट वहीं काउन्टर्स पर छापकर दिया जाता है।

अब अव्यवस्था यहाँसे शुरू होती है। टिकटें कोई भी हो वह कन्फर्म्ड है तब तो ठीक है मगर प्रतिक्षासूची में अंकित हो तो ऑनलाइन टिकटें चार्टिंग के वक्त अपनेआप रद्द की जाती है और PRS टिकट अपनेआप रद्द नही की जाती। हालाँकि रेल नियमानुसार प्रतिक्षासूची की प्रत्येक टिकट का PNR गाड़ी के चार्टिंग स्टेशन से छूटने के नियोजित समय से 30 मिनट बाद ड्रेन याने रद्द हो जाता है और हर वह यात्री जो इस रद्द PNR के जरिये यात्रा कर रहा है वह नियमानुसार बिना टिकट दण्डित किया जा सकता है।

प्रतिक्षासूची के PRS टिकटधारक यात्री को यह गलतफहमी रहती है, उसके पास सम्पूर्ण देय रकम का टिकट है और वह रेल में यात्रा कर सकता है। वह यात्री उसका जिस वर्ग का प्रतिक्षासूची का टिकट है उसी श्रेणी में जबरन यात्रा करने का प्रयत्न करता है। हालाँकि न सिर्फ उसके आरक्षित वर्ग में अपितु द्वितीय अनारक्षित वर्ग में भी वह बिनाटिकट यात्री ही है, इस तरह की रेल यात्रा करना सर्वथा ग़ैरकानूनी है और उसे बिना टिकट दण्डित किया जा सकता है। क़ानूनन उसे रेल यात्रा आरम्भ करने से पहले अपने प्रतिक्षासूची टिकट को रद्द कर धनवापसी करा लेनी है और यदि यात्रा करनी है तो अनारक्षित टिकट खरीद कर आगे रेल यात्रा आरम्भ करनी है।

होता क्या है, PRS प्रतिक्षासूची का यात्री यह समझता है, उसने रिफण्ड लिया नही है अतः वह नियमित टिकट धारक है और वह अपने खरीदे आरक्षित वर्ग में यात्रा करने के लिए प्रयत्न कर सकता है या कमसे कम द्वितीय श्रेणी अनारक्षित वर्ग में तो जा ही सकता है। मगर यह उसका भ्रम है। चुँकि रेल प्रशासन के टिकट जाँच दल की अनुप्लब्धता कहे या अनदेखी ऐसे प्रतिक्षासूची टिकट धारक आरक्षित वर्ग के नियमित यात्रिओंको परेशान करते रहते है।

इसका उपाय क्या हो सकता है? ध्यान से समझे। भारतीय रेलोंमें टिकिटिंग 80% ऑनलाइन लेनदेन से हो चुकी है तो रेल प्रशासन निम्नलिखित कदम उठा सकती है। PRS काउन्टर्स पर डिजिटल पेमेन्ट अनिवार्य रूप से लागू करना, टिकट को केवल डिजिटलाइज्ड करना, प्लेटफॉर्मोंपर एवं आरक्षित यानोंमें यात्रिओंकी एन्ट्री बारकोड/ क्यू आर कोड से सुनिश्चित करना, टिकट जाँच पद्धति का विकेंद्रीकरण कर जाँच अधिकारी बढाना इत्यादि।

हम यह कदापि नही मानते की उपरोक्त सारे उपाय आम यात्री के रेल यात्रा करने में परेशानी की सबब बनेंगे अपितु जेन्युइन, प्रमाणित रेल यात्री की बहुत सी असुविधाएँ खत्म होगी और रेल प्रशासन द्वारा यात्रिओंको दी जाने वाली सुखसुविधा में भी बढ़ोतरी होगी। अवांछित तत्त्वों पर लगाम कसी जाएगी। पीछे रेलवे प्लेटफार्म पर गैरकानूनी रूपसे काम करनेवाले अवैध विक्रेताओं पर भी बारकोड मुद्रीत पहचान पत्र अनिवार्य किये जाने के लेख अनुसार कार्यवाही हुई और कई अवैध विक्रेता धराये गए, दण्डित किये गए और उनकी संख्यापर काफी हद तक अंकुश लगा है।

रेल प्रशासन जिस तरह यात्रिओंके लिए उच्चतम सुविधाओं में बढ़ोतरी करती चली जा रही है, जरूरी है, की यह सारी सुविधाएं केवल और केवल वास्तविक यात्रिओंको ही मिलती रहे।

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खुशखबर : बांद्रा दोंडायचा एक्सप्रेस को मिला भुसावल तक विस्तार

The newly launched Special Train No. 09051/52 Dondaicha-Mumbai Central Express has now been extended to Bhusawal, Minister of State for Railways Smt. Darshana Zardosh tweeted.Very Good Decision For Khandesh Region : दर्शना जरदोश

नई लॉन्च की गई स्पेशल ट्रेन नंबर 09051/52 दोंडाइचा-मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस का अब भुसावल तक विस्तार किया गया है। दर्शना जरदोश ने ट्वीट किया खानदेश क्षेत्र के लिए बहुत अच्छा फैसला

उपरोक्त ट्वीट रेल राज्य मंत्री श्रीमती दर्शना जरदोश का है। यह गाड़ी विद्यमान “खान्देश एक्सप्रेस ” के अलावा रहेगी।

साथ ही,

भुसावल-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस की संरचना में स्थायी विस्तार

रेलवे ने 1.1.2023 से स्थायी आधार पर भुसावल-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस में एक एसी-2 टीयर, तीन एसी-3 टीयर और एक शयनयान श्रेणी के डिब्बे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

ट्रेन संख्या 19003/19004 के लिए संशोधित संरचना: एक फर्स्ट एसी कम एसी-2 टीयर, एक एसी-2 टीयर, 6 एसी-3 टीयर, 9 स्लीपर क्लास, 6 सामान्य द्वितीय श्रेणी जिसमें दो गार्ड ब्रेक वैन शामिल हैं।

दोनों ट्रेनों के वेटिंग लिस्ट के यात्रियों से अनुरोध है कि वे ट्रेन में चढ़ने से पहले अपने पीएनआर की स्थिति की जांच कर लें।
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करें।