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ऑनलाइन अनारक्षित टिकिटिंग सिस्टम, UTS ऍप में बड़ा बदलाव

29 दिसम्बर 2025, सोमवार, पौष, शुक्ल पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2082

रेल विभाग के ऑनलाइन अनारक्षित टिकट ऍप UTS को रेल विभाग लगभग बन्द करने के कगार पर है। नए पंजीकरण अब बन्द किए जा चुके है। साथ ही मेन्यू में मासिक, त्रिमासिक सीज़न टिकट बनवाने का पर्याय स्थायी रूप से बन्द किया गया है। जिनके सीज़न टिकट ऍप पर मौजूद है, उनके लिए ‘शो टिकट’ के पर्याय में टिकट को ट्रान्सफर करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

UTS ऍप खोलते ही उपभोक्ता को ‘रेल वन’ ऍप पर जाने की सलाह दी जाती है। यूँ समझिए की अब अनारक्षित टिकट, सीज़न पास, प्लेटफार्म टिकट इत्यादि कार्य ‘रेल वन’ ऍप के जरिए ही किए जाएंगे। हालाँकि पहले से पंजीकरण किए हुए उपभोक्ताओंको अभी भी UTS ऍप का उपयोग अपने अनारक्षित टिकट एवं प्लेटफार्म टिकट बनाने के लिए करते आएगा।

कुल मिलाकर तय है, ‘रेल वन’ सुपर ऍप के आने से UTS का औचित्य लगभग समाप्त हो चुका है। ‘रेल वन’ ऍप के जरिए आरक्षित, अनारक्षित, प्लेटफॉर्म और सीज़न टिकट निकाले जा सकते है। ऐसे में UTS ऍप पर नए पंजीकरण रद्द करना यह ऍप बन्द करने की दिशा में उठाया गया कदम लगता है, जो सही भी है। केवल जिन यात्रिओंको सीज़न पास UTS पर मौजूद है, लगता है की शायद तब तक ही यह ऍप बना रहेगा।

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अजीबोगरीब निर्णय! पश्चिम रेलवे की तेरह गाड़ियोंमे तत्काल के लिए अब ओटीपी नही लगेगा

29 दिसम्बर 2025, सोमवार, पौष, शुक्ल पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2082

रेल प्रशासन ने तत्काल टिकटोंमे होने वाली धांधली को रोकने हेतु 18 एवं 24 दिसम्बर से कुछ गाड़ियोंमें ओटीपी अनिवार्य कर दिया था। चूँकि ओटीपी आने में लगने वाली देरी से PRS काउंटर्स एवं रेल टिकट एजेन्टों को आरक्षित टिकट मिलने में परेशानी होने लगी। यहाँतक की बुकिंग खुलते पहले मिनट में ही PRS काउंटर्स पर प्रतिक्षासूची की टिकट सामने आ जाती थी। इस परेशानी के चलते रेल प्रशासन ने निम्नलिखित तेरह गाड़ियोंके तत्काल बुकिंग को ओटीपी बेस्ड आरक्षण से हटाने का निर्णय लिया है। अर्थात उक्त गाड़ियोंकी तत्काल बुकिंग्ज के लिए ओटीपी की जरूरत नही होगी।

1: 12465 इन्दौर भगत की कोठी रणथंभौर सुपरफास्ट

2: 19005 सूरत भुसावल एक्सप्रेस

3: 19015 दादर पोरबंदर एक्सप्रेस

4: 19045 सूरत थावे ताप्ती गंगा एक्सप्रेस

5: 19223 साबरमती जम्मूतवी एक्सप्रेस

6: 19255 सूरत महुवा एक्सप्रेस

7,8: 19315/16  इन्दौर असरवा इन्दौरवीर भूमि एक्सप्रेस

9: 19489 अहमदाबाद गोरखपुर एक्सप्रेस

10: 14702 बान्द्रा टर्मिनस श्रीगंगानगर अमरापुर अरावली एक्सप्रेस

11: 19037 बान्द्रा टर्मिनस बरौनी अवध एक्सप्रेस

12: 19483 अहमदाबाद सहरसा एक्सप्रेस

13: 22956 भुज बान्द्रा टर्मिनस कच्छ सुपरफास्ट

उक्त गाड़ियोंमे तत्काल प्रभाव से, PRS काउंटर्स एवं रेल टिकट बुकिंग एजेन्ट के लिए ओटीपी बेस्ड तत्काल बुकिंग पद्धति रद्द की गई है। हालाँकि इन्ही गाड़ियोंके तत्काल बुकिंग्ज के लिए ई- टिकटोंमे IRCTC की वेबसाइट एवं ऍप पर ओटीपी बेस्ड बुकिंग के बारे में परिपत्र में कोई सूचना नही दी गई है, अर्थात ई-टिकटोंमे यह व्यवस्था जारी रह सकती है।

यात्रिओंका मानना है, एक तरह से जिस धांधली को रोकने के लिए यह उपाययोजना की गई थी उसी को हटाकर रेल प्रशासन उसे अब अभय दे रही है।

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भारतीय रेलवे की अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता दोगुनी करने की योजना और उसके सामने चुनौतियाँ

27 दिसम्बर 2025, शनिवार, पौष, शुक्ल पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2082

प्रमुख शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने, भीड़भाड़ कम करने और राष्ट्रव्यापी संपर्क सुविधा में सुधार लाने के लिए किया जाएगा: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

व्यस्त स्टेशनों पर यातायात सुगम बनाने के लिए क्षमता वृद्धि के लाभों को प्राप्त करने हेतु क्षेत्रीय रेलवे से अल्पकालिक और मध्यम अवधि के उपायों की मांग की गई है।

यात्रा की मांग में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए, अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों की नई रेल गाड़ियों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक है। आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा। वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने के लिए निम्नलिखित कार्य शामिल होंगे:

i. मौजूदा टर्मिनलों को अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं से सुसज्जित करना।

ii. शहरी क्षेत्र में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और निर्माण करना।

iii. मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव सुविधाएं।

iv. विभिन्न स्थानों पर रेल गाड़ियों की बढ़ती संख्या की व्यवस्था करने के लिए यातायात सुविधा कार्यों, सिग्नलिंग उन्नयन और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में वृद्धि करना।

टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनलों के आसपास के स्टेशनों को भी ध्यान में रखा जाएगा ताकि क्षमता में संतुलन बना रहे। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए, पुणे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म और स्टेबलिंग लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खड़की और आलंदी स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।

उपरोक्त प्रक्रिया उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों प्रकार के यातायात के लिए की जाएगी, जिसमें दोनों खंडों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाएगा। 48 प्रमुख शहरों की एक व्यापक योजना विचाराधीन है (सूची संलग्न है)। इस योजना में निर्धारित समय सीमा के भीतर रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नियोजित, प्रस्तावित या पहले से स्वीकृत कार्यों को शामिल किया जाएगा।

क्षमता को वर्ष 2030 तक दोगुना करने की योजना है, लेकिन यह आशा है कि अगले 5 वर्षों में क्षमता में क्रमिक वृद्धि की जाएगी ताकि क्षमता वृद्धि के लाभ तुरंत प्राप्त किए जा सकें। इससे आने वाले वर्षों में यातायात की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में सहायता मिलेगी। योजना में कार्यों को तीन श्रेणियों, अर्थात् तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक में वर्गीकृत किया जाएगा। प्रस्तावित योजनाएँ विशिष्ट होंगी, जिनमें स्पष्ट समयसीमा और परिभाषित परिणाम होंगे। यद्यपि यह अभ्यास विशिष्ट स्टेशनों पर केंद्रित है, प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे को अपने-अपने मंडलों में रेल गाड़ियों की संचालन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाने के लिए कहा गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि न केवल टर्मिनल क्षमता में वृद्धि हो, बल्कि स्टेशनों और यार्डों पर अनुभागीय क्षमता और परिचालन संबंधी बाधाओं का भी प्रभावी ढंग से समाधान किया जाए।

केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं और अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। इस कदम से हमारे रेलवे नेटवर्क का उन्नयन होगा और राष्ट्रव्यापी संपर्क सुविधा में सुधार होगा।”

यात्रिओंकी रेल यात्रा की मांग दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। तत्काल टिकटोंमे साधारण टिकट से लगभग 35 प्रतिशत ज्यादा किराया लगता है और प्रीमियम तत्काल में किराए तत्काल रेट से शुरू होकर जब तक जगह भर नही जाती तब तक हर बुकिंग के बाद बढ़ते ही चले जाते है। कई बार यह किराए सर्वसाधारण बुकिंग रेट से दुगुने, तिगुने हो जाते है। इसके बावजूद सभी बुकिंग चन्द मिनटों में फुल्ल हो जाती है। आखिर इसका क्या राज़ है?

इसकी वजह है रेलवे के नाममात्र किराए। मुम्बई – पुणे के बीच मेल/एक्सप्रेस साधारण श्रेणी के किराए मात्र 85/- रुपए है। जबकी मुम्बई पुणे शहरोंमें स्टेशन पहुँचने के लिए 2, 4 किलोमीटर टैक्सी, रिक्शा के इससे ज्यादा रुपए लग जाते है। मुम्बई से पुणे के बीच रोडवेज के किराए 250 रुपये से शुरू होते है। फर्क समझिए! वही वन्देभारत गाड़ी में टिकट आसानी से उपलब्ध है।

यात्री तत्काल टिकट भी ले लेगा तो रेलवे में सिटिंग के 125 रुपए लगते है। बताइए क्यों न हो रेलवे में भीड़? रही बात लम्बी दूरी की गाड़ियोंकी तो यह गाड़ियाँ सीमित होती है। विशिष्ट स्टेशन के लिए दिन भर में एखाद या दो। उसमे में भी सड़क परिवहन या हवाई यात्रा से रेलवे बहुत ही कम किराए लेती है, साथ ही गंतव्य तक की पहुँच, सुरक्षा एवं आराम में बेहतर!

अब उक्त परिस्थितियों में रेल विभाग अपनी क्षमता दुगुनी क्या तिगुनी भी कर ले तो भीड़ छंटनी नही है।

रेल प्रशासन को चाहिए की 250 से 500 किलोमीटर तक की इंटरसिटी/मेमू एक्सप्रेस गाड़ियाँ बढ़ाए और लम्बी दूरी की गाड़ियोंके स्टोपेजेस घटाए। इससे स्थानीय यात्रिओंका लम्बी दूरी की गाड़ियोंपर अवलम्बन कम होगा। ज्यादातर यात्री इसी अंतर तक की यात्रा करनेवाले होते है। लम्बी दूरी की गाड़ियोंमें प्रीमियम गाड़ियाँ छोड़ अन्य को सैटेलाइट टर्मिनल्स से चलाए। मुख्य टर्मिनल्स पर ज्यादा से ज्यादा स्थानीय गाड़ियाँ लाई जानी चाहिए। इन यात्रिओंको ज्यादातर स्टेशन पर वक्त नही बिताना होता है इसलिए यात्रिओंकी आवाजाही तेज गति से होती है और ट्रैफिक तेजी से क्लियर होता है।

रेल विभाग ने अपनी संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए जो चार मदें तय की है, उस पर पहले ही उनका काम शुरू हो चुका है।

मुम्बई में छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, दादर, पनवेल, मुम्बई सेंट्रल, बान्द्रा टर्मिनस, जोगेश्वरी

पुणे में पुणे जंक्शन, हड़पसर, खड़की

नागपुर में नागपुर, इतवारी, अजनी

नई दिल्ली में नई दिल्ली, दिल्ली जंक्शन, आनन्द विहार, हज़रत निजामुद्दीन, दिल्ली सफदरजंग

बेंगलुरु में सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया टर्मिनल, बयापनहल्ली, बेंगलुरु कैंट

चेन्नई में चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एग्मोर, पेरंबूर

हैदराबाद में सिकन्दराबाद, काचेगुड़ा, चारलापल्ली

हावड़ा में कोलकाता, शालीमार, सांतरागाछी

इन्दौर में लक्ष्मीबाई नगर, डॉ आंबेडकर नगर

इत्यादि उदाहरण है।

अतिरिक्त प्लेटफार्म, स्टेबलिंग एवं पिट लाइनोंके लिए मौजूदा जमीन कम पड़ेगी अतः टर्मिनल्स पर बने लोको शेड, रेलवे दफ्तर, स्टाफ क्वार्टर्स को भी हिलाना पड़ सकता है।

सिग्नलिंग प्रणाली को उन्नत करने से दो स्टेशनोंके बीच के खण्ड में ज्यादा गाड़ियाँ चल सकती है।

कुल मिलाकर रेल विभाग भले ही यह कहे कि वह आने वाले पाँच वर्षोंमें गाड़ियोंके संचालन क्षमता बढ़ाएगी मगर उपरोक्त मदों पर उसने पहले ही काम शुरू कर उसका उपयोग भी ले रहे है। अब देखना यह है, और कितने नए टर्मिनल्स, लाइनें, स्टेबलिंग और पिट लाइनें नई बनेगी।

(उपरोक्त लेख pib.in के वार्तापत्र पर आधारित है)

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भोपाल को मिली दो नई गाड़ियोंकी सौगात

26 दिसम्बर 2025, शुक्रवार, पौष, शुक्ल पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2082

भोपाल को दो नई गाड़ियोंकी सौगात मिली है। रेल प्रशासन ने भोपाल से धनबाद के बीच त्रिसाप्ताहिक एवं भोपाल से चोपन के लिए एक साप्ताहिक गाड़ी चलाने की घोषणा की है।

11631/32 भोपाल धनबाद भोपाल त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस

11631 एक्सप्रेस भोपाल से प्रत्येक सोमवार, गुरुवार एवं शुक्रवार को धनबाद के लिए शाम 20:55 पर रवाना होगी और अगले दिन शाम 20:30 पर धनबाद पहुँचेंगी। वापसी में 11632 एक्सप्रेस धनबाद से प्रत्येक रविवार, बुधवार एवं शनिवार को सुबह 7:20 को रवाना होकर अगके दिन सुबह 7:00 बजे भोपाल पहुँचेंगी।

कोच संरचना : 01 वातानुकूलित प्रथम/टू टियर, 01 वातानुकूलित टू टियर, 01 वातानुकूलित थ्री टियर/टू टियर, 04 वातानुकूलित थ्री टियर, 11 स्लिपर, 04 द्वितीय साधारण, 02 एसएलआर कुल 24 ICF कोच

स्टोपेजेस : भोपाल, विदिशा, गंज बसौदा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवाड़ा, खन्ना बंजारी, ब्यौहारी, मारवास ग्राम, सराय ग्राम, बरगवां, सिंगरौली, करेला रोड, मिर्चा धुरी, ओबरा डैम, चोपन, रेणुकूट, नगर उंझारी, गढ़वा, गढ़वा रोड, डॉल्टन गंज, बरवाडीह, लातेहार, टोरी, ख़ालरी, पतरातू, राँची रोड, बोकारो थर्मल, चन्द्रपुरा, कत्रासगढ़, धनबाद

11633/34 भोपाल चोपन भोपाल साप्ताहिक एक्सप्रेस

11633 एक्सप्रेस भोपाल से प्रत्येक रविवार को शाम 20:55 पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 10:30 पर चोपन पहुँचेंगी। वापसी में 11634 एक्सप्रेस चोपन से प्रत्येक सोमवार को शाम 17:10 को रवाना होकर अगके दिन सुबह 7:00 बजे भोपाल पहुँचेंगी।

कोच संरचना : 01 वातानुकूलित प्रथम/टू टियर, 01 वातानुकूलित टू टियर, 01 वातानुकूलित थ्री टियर/टू टियर, 04 वातानुकूलित थ्री टियर, 11 स्लिपर, 04 द्वितीय साधारण, 02 एसएलआर कुल 24 ICF कोच

स्टोपेजेस : भोपाल, विदिशा, गंज बसौदा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवाड़ा, खन्ना बंजारी, ब्यौहारी, मारवास ग्राम, सराय ग्राम, बरगवां, सिंगरौली, करेला रोड, मिर्चा धुरी, ओबरा डैम, चोपन

उपरोक्त नई गाड़ियाँ 22165/66 उर्जाधानी एक्सप्रेस के रैक से चलाई जाएगी अतः जल्द ही अतिरिक्त रैक उपलब्ध किया जाएगा और यह सेवाएं यात्रिओंके लिए शुरू होंगी।

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पहली जनवरी से भारतीय रेल की समयसारणी बदलेगी

25 दिसम्बर 2025, गुरुवार, पौष, शुक्ल पक्ष, पंचमी, विक्रम संवत 2082

01 जनवरी 2026 से भारतीय रेल अपनी समयसारणी में बदलाव करने जा रहा है। जाहिर सी बात है, संक्रमण काल से रेल विभाग की समयसारणी छपे स्वरूप में नही आती या आती भी है, तो बहुत सीमित मात्रा में और उपलब्ध की नही के बराबर होती है। अतः यात्रिओंसे बिनती है, पहली जनवरी से रेल यात्रा करने का नियोजन रेलवे के वेबसाइट, ऍप पर समयसारणी देख कर, समझ कर अपनी यात्रा का नियोजन कीजिएगा।

रेल समयसारणी के छोटे बड़े बदलाव जो हम तक पहुंचेंगे, अपने वेबसाइट के द्वारा आपके साथ साँझा करेंगे ही, इसके बावजूद आपको हमारा उपरोक्त रेलवे की वेबसाइट, ऍप पर समय जाँचने वाला निवेदन पर ध्यान देना होगा।

26101 पुणे अजनी वन्देभारत का अकोला, बडनेरा एवं वर्धा का परिचालन समय 10 मिनट पहले होने जा रहा है। यह बदलाव कल दिनांक 26 दिसम्बर से ही लागू हो जाएगा। कृपया निम्नलिखित परिपत्र देखिए,

साथ ही 19005 सूरत भुसावल एक्सप्रेस की भी समयसारणी दिनांक 26 दिसम्बर से बदलेगी।