पुणे जसीडीह पुणे साप्ताहिक गाड़ी जिसकी घोषणा मार्च 2021 में हो चुकी है, हकीकत की पटरियों पर दौड़ना 27 सितम्बर से शुरू कर देगी। रेल मन्त्री अश्विनी वैष्णव, इसे गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे इनकी जसीडीह स्टेशन पर उपस्थिति में, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्धाटन करेंगे। नियमित गाड़ी की समयसारणी भी जल्द ही उपलब्ध होंगी।
जसीडीह – पुणे गाड़ी का शुभारंभ दिनांक 27 सितम्बर सेपूर्व प्रकाशित संक्षिप्त समयसारणी
जसीडीह वास्को जसीडीह साप्ताहिक गाड़ी जिसकी घोषणा भी मार्च 2021 में हो चुकी है। यह गाड़ी दिनांक 28 सितम्बर से चलना शुरू करने वाली है। नियमित गाड़ी की समयसारणी भी जल्द ही उपलब्ध होंगी। फिलहाल 28 तारीख की उद्धाटन विशेष की समयसारणी लीजिए।
यह उद्धाटन विशेष गाड़ी की समयसारणी है।यह परिपत्रक मार्च 2021 में जारी किया गया था।
09483/84 अहमदाबाद बरौनी अहमदाबाद प्रतिदिन विशेष गाड़ी का सप्ताह में एक दिन आसनसोल के लिए विस्तार करने के लिए रेल प्रशासन की सहमती मिल गयी है। हालांकि विस्तार के बाद इस साप्ताहिक गाड़ी के क्रमांक में बदलाव होना निश्चित है साथ ही किस दिन से होगी इसका भी परिपत्रक का इंतजार है।
02925/26 बांद्रा अमृतसर बांद्रा पश्चिम एक्स्प्रेस दिनांक 01 अक्तूबर से दोनों ही दिशाओं से अपने नए समयानुसार चलना शुरू करेंगी। हम यहाँ पर नई समयसारणी दे रहे है। हैरत की बात यह है, भारतीय रेल के ‘मिशन रफ्तार’ को लजाते हुए यह गाड़ी अब बांद्रा से अमृतसर जाते हुए 10 मिनट ज्यादा समय लेगी वहीं अमृतसर से बांद्रा लौटते हुए 85 मिनट का ज्यादा समय लगाएगी।
जी हाँ, लगभग सभी क्षेत्रीय रेल्वे अपने क्षेत्रों मे अलग अलग गाड़ियों मे 01 अक्तूबर से समय परिवर्तन करने जा रही है। समयसारणी प्रकाशित करने के बारे मे फिलहाल रेल प्रशासन का कोई विचार दिखाई नहीं दे रहा, बस कोई स्टेशन वाइज समय के बदलाव दीए जा रहे तो कोई गाड़ी के। आज दक्षिण रेल्वे ने भी एक फ़ाइल परिपत्रक के नाम पर जारी कर दी है, जो स्टेशन वाइज गाड़ियों के समय मे बदलाव के बारे मे है। वह फ़ाइल यहाँ पर जोड़ रहे है।
यात्रियों की तकलीफ यही है, की उन्हे अपनी यात्रा का नियोजन करने के लिए समयसारणी चाहिए। यदि रेल प्रशासन उसे छपवाने मे असमर्थ है या असमंजस मे है तो उसे रेल्वे की अधिकृत वेबसाइटों पर ही अपलोड कर सकती है। अलग अलग रेलवे के अलग अलग परिपत्रक देख कर यात्रा का नियोजन यात्री किस तरह कर सकते है? क्या रेल प्रशासन की रेल यात्रीओं के प्रति उदासीनता नहीं मालूम होती?
1: पुरानी 59813/14 कोटा यमुना ब्रिज/आग्रा फोर्ट कोटा सवारी गाड़ी विशेष क्रमांक 05913/14 PSPC कर 01 अक्तूबर से कोटा से और 04 अक्तूबर से आग्रा फोर्ट से प्रतिदिन शुरू की जा रही है। उक्त गाड़ी में मेल/एक्सप्रेस के किराए लगाए जाएंगे।
2: पुराना गाड़ी क्रमांक 59812/11 यमुना ब्रिज रतलाम यमुना ब्रिज सवारी गाड़ी विशेष क्रमांक 05912/11 PSPC कर 01 अक्तूबर से यमुना ब्रिज से और 03 अक्तूबर से रतलाम से प्रतिदिन शुरू की जा रही है। उक्त गाड़ी में मेल/एक्सप्रेस के किराए लगाए जाएंगे।
3: 19327/28 हल्दीघाटी पसेंजर के नाम से प्रसिद्ध रतलाम उदयपुर सिटी रतलाम के बीच चलनेवाली यह सवारी गाड़ी विशेष क्रमांक 09327/28 MSPC कर 02 अक्तूबर से रतलाम से और 03 अक्तूबर से उदयपुर सिटी से प्रतिदिन शुरू की जा रही है। उक्त गाड़ी में मेल/एक्सप्रेस के किराए लगाए जाएंगे।
4: बान्द्रा देहरादून बान्द्रा के मन्दसौर मेरठ लिंक वाले तमाम वादविवाद को इतिश्री देने वाली कोटा मन्दसौर कोटा एक्सप्रेस दिनांक 01 अक्तूबर से दोनोंही दिशाओंसे याने कोटा और मन्दसौर से शुरू की जा रही है। इनका गाड़ी क्रमांक 09816/15 ऐसा रहेगा और डिब्बा संरचना 2 एसएलआर, 4 द्वितीय श्रेणी, 4 स्लिपर, 1 वातानुकूल थ्री टियर और 1 वातानुकूल टू टियर ऐसे रहेगी।
उक्त गाड़ियोंमे आरक्षित कोच में केवल आरक्षित टिकट धारी यात्री ही यात्रा कर सकते है।
यह गुहार जिन स्टेशनोंके स्टापेजेस संक्रमण के बाद फिर से बहाल नही हुए है, या वर्षोंसे स्टापेजेस की मांग किए जा रहे लेकिन कार्रवाई क्या रेल के अधिकारी जवाब तक नही देते, ऐसे यात्रिओंके द्वारा की जा रही है। और क्यों न करे ऐसी मांग? उपभोक्ता समिति के सदस्योतक की कोई सुनवाई नही तो क्या करें? आखिर ऐसी बेतूकी माँग का क्या कारण हो सकता है, हम समझाते है। पहले निम्नलिखित परीपत्रक देख लीजिए।
02283/84 एर्नाकुलम निजामुद्दीन एर्नाकुलम साप्ताहिक दुरान्तो को सूरत स्टेशन पर ठहराव दिया जा रहा है। ज्ञात रहे, सुरत की सांसद श्रीमती दर्शना जरदोष, ने हाल ही में रेल राज्य मन्त्री का पदभार सम्भाला है।
02781/82 तिरुपति निजामुद्दीन तिरुपति त्रिसाप्ताहिक आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति विशेष को 24 सितम्बर से ग्वालियर स्टेशनपर ठहराव दिया जा रहा है।
यह तो खैर आपकी जानकारी के लिए है, की उपरोक्त जगहोंपर नए स्टापेजेस की घोषणा हुई है, मगर आम यात्री यह भलीभाँति जानता है की यह नए स्टापेजेस कैसे शुरू हो गए। ग्वालियर से तिरुपति की रेल सम्पर्कता बहुतायत में है। उसी प्रकार सुरत की भी एर्नाकुलम से कनेक्टिविटी में कोई कमी नही है। रही बात दिल्ली से कनेक्ट होने की तो सुरत और ग्वालियर से दिल्ली के लिए रेल गाड़ियोंकी भरमार है।
किसी स्टेशन को स्टापेजेस मिले तो उसका फायदा वहांके यात्रिओंको मिलेगा यह बात निश्चित है प्रश्न इसका है ही नही, अपितु वर्षोंसे मध्यप्रदेश का जिला मुख्यालय बुरहानपुर कई गाड़ियोंके स्टापेजेस मांगता आ रहा है, खण्डवा में कई गाड़ियाँ नही रुकती जबकी मध्यप्रदेश के निमाड़ प्रान्त के कई छोटे गाँवोंका यह स्टेशन मुख्य रेल सम्पर्क है। वहीं अवस्था रतलाम स्टेशन की भी है। इस तरह कई रेलवे स्टेशन है, जो अपने स्टेशन से गुजरने वाली और न रुकने वाली गाड़ियोंके यात्री ठहराव की माँग करते चले आ रहे और जिस पर सम्बंधित रेल अधिकारी जवाब तक नही देते या यह कह कर टाल देते है की आपके स्टेशन की आय उतनी नही है जितनी रेल प्रशासन ने स्टापेजेस देने के लिए निर्धारित की है।
आप सहज ही बता सकते है, यदि स्टेशनपर गाड़ी रुकेगी ही नही तो उस शहर के लोग क्या सैरसपाटे करने टिकट लेकर स्टेशन पर आएंगे? किस तरह से आय दिखेंगी? यदि कोई यात्री संगठन या उपभोक्ता समिति का गणमान्य सदस्य अपने स्टेशनपर स्टापेजेस की माँग करता है, तो आप प्रयोगात्मक तौर पर 3 माह या छह माह के लिए स्टापेजेस दे कर तो देखिए, तब ही तो आप को पता चलेगा कि स्टेशन की आय बढ़ती है या नही। नही तो बेचारे यात्रिओंका भी क्या दोष, उनकी सोच बराबर ही है की कोई उनके भी सांसद को मन्त्री बना दीजिए, ताकी गाड़ियाँ उनके स्टेशनोंपर भी रुकने लगे।