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ताल ठोंक के 🤭😁

15 अगस्त, लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के भाषण में एक वादा था, 75 सप्ताह में 75 वन्दे भारत गाड़ियाँ देश भर में चलाई जाएगी।

बस भैया, ललनवा के कान खड़े हो गए, “का कहे प्रधानमन्त्रीजी, वन्दे भारत गाड़ियाँ चलवाएंगे और वह भी पूरे 75 ठो?” अरे राजा भिया जरा तनिक निकाला तो वह लिस्टवा। अब ही चलते है सांसद जी का पास और दो चार ठो के लिए अपना किलेम डलवा देते है। राजा भैया बिफ़र गए, का किलेम किलेम करते हो, ऐसा थोड़े ही होता है, की माँग लगा दिए और मिल गयी गाड़ी? पहले ही जो जगह जगह पैर पसार लिए हो उससे तो निबट लेव। जो भी सर्वेक्षण की बात हुई, बस इसी तरह जोर लगाए और काम चालू करवा दिए। अब ई होत रहा की काम तो सब जगहन थोड़ा थोड़ा होई गवा पर पूरा कब होई इसका तो साक्षात भोले बाबा भी नही बता सकत है।

अब बारी लल्लन बाबू की थी, अरे भिया ऐसन थोड़े ही होत है? जब काम सुरु कर दिए है तो आजनकल हो जाई। उ बात गई ई नई बात है। जब हम कोई मांग नही रखे तो हम है ही किस काम के? माना की हमको और हमारे वोटर को ई वन्दे भारत की का जरूरत, हमे तो पास पड़ोस के शहर में जावे खातिर रोजाना की इंटरसिटी चाही, स्लिपर क्लास, सेकन्ड क्लास ज्यादा से ज्यादा उ नए इकोनॉमी वाले एसी वाले डब्ब न की गाड़ी चाही ताकी हमार लोगन आसानी से आस पास के शहरोंमें रोजगार और व्यापार के लिए जाए। अब तक जो आलिसान हमसफ़र वा चलाए रहे उसमे भी हम लड़ झगड़ स्लिपर तो लगवाया के नही, लगवाए ना? फिर। और जब जब नई गाड़ी चलावाने की बात होगी हमरा तो काम ही है, की हम उसका स्वागत करें, और हमारे इलाके के लिए माँग करें। अरे भिया, तब हु तो समझ आएगा की हम कितना जागृत है, कितना एलर्ट है? सांसद जी भी इही बात सोच रहे होंगे की हमने गाड़ियोंकी घोषणा सुनी की नाही। तो चलिए, अपनी सूची थामे, सांसद के धाम पर।

तकरीबन तकरीबन हर कार्यकर्ताओं में यही रेलमपेल चल रही है। गाड़ियाँ चलावाने की बात हो गयी मगर कहाँ चलेगी यह तो हम ही बताएंगे। अभी एक ही दिन बिता है, मगर वन्दे भारत गाड़ियोंकी माँग ऐसे लगाई जा रही है, मानो सारे यात्री बस कतार लगाए ही खड़े है, की कब गाड़ी चले और कब हम बुकिंग कर ले। वन्दे भारत यह भारतीय रेल की प्रीमियम स्तर की गाड़ी है। पुर्णतयः वातानुकुलित, ओटोमेटिक डोअर्स, सेल्फ प्रोपलड लोको, हवाई जहाज की तरह यात्री सीधे लोको पायलट तक जा सकता है, बात कर सकता है। पूरी गाड़ी में सीसीटीवी से निगरानी। अब ऐसी गाड़ियोंके रूट ऐसे ही तय थोड़े हो जाएंगे? रेलवे के वाणिज्य विभाग की नजर रहती है, कौनसे मार्ग पर वातानुकूलित बुकिंग्ज फूल चल रही है, कौनसे यात्री प्रीमियम ट्रेन में यात्रा करना चाहते है या कौनसे मार्गपर तेज गाड़ियोंकी जरूरत है साथ ही साथ वह मार्ग तेज गाड़ियोंके उपयुक्त है भी या नही। इतनी सारी कवायदोंके बाद कहीं जाकर गाड़ी चलाने के लिए स्वीकृति मिल पाएगी।

मगर हमरे राजा भैया और लल्लन बबुवा तो निकल पड़े है अपनी माँग का परचम लिए, सबसे पहले जो फहराना है।

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भुसावल मण्डल मे मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त

मध्य रेल के भुसावल मण्डल मे आज अल-सुबह 0:45 को एक कोयले से लदी मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

घटना का ब्यौरा कुछ इस प्रकार है, यह कोयले की मालगाड़ी जिसका गाड़ी क्रमांक SERM – KRDS BOX N यह था। यह मालगाड़ी बडनेरा से नागपूर की ओर बडनेरा – नारखेड़ एकहरी विद्युतीकृत रेल लाइन से जा रही थी। मार्ग के वालगाव स्टेशन से 0:40 को निकलने के बाद चांदुर बाजार स्टेशन पास करने से पहले ही पटरी से उतर गई। गाड़ी को दो लोको चला रहे थे, जिनके नंबर 23804 और 28432 यह थे। कुल 58 कोयले से लदे माल डिब्बे मे से 18 डिब्बे एवं एक लोको क्र 28432 पटरी से उतर गए। दुर्घटना OHE खंबा नंबर 691/20 से 691/10 के बीच घटित हुई। गाड़ी के लोको पायलट श्री यादव और गार्ड श्री लोखण्डे थे। दुर्घटना मे जान हानी/नुकसान की कोई खबर नहीं है। मगर रेल ट्रैक बाधित हुवा है।

मार्ग से चलनेवाली दो यात्री गाड़ियाँ बाधित हुई है। 07642 नरखेड़ काचेगुडा विशेष गाड़ी को आज दिनांक 15 अगस्त को अपने स्टार्टिंग स्टेशन नरखेड़ से पूर्ण रद्द कर दिया गया। दूसरी गाड़ी 09713 जयपुर सिकंदराबाद साप्ताहिक विशेष गाड़ी को आमला से नागपूर होकर बड़नेरा लाया गया और आगे यह गाड़ी अपने नियोजित मार्ग से चलाई जा रही है। मार्ग से चलाई जानेवाली सभी मालगाड़ियां परावर्तित कर दी गयी है।

दुर्घटना की खबर मिलते ही भुसावल, बड़नेरा, वर्धा, अजनी से कर्मचारी मार्ग के रखरखाव के लिए पहुँच गए। आमला जंक्शन से 140 टन की क्रैन भी बुलाई गई ताकि पलटी हुई बोगियो को पटरी से हटा कर मार्ग को पुनर्स्थापित किया जा सके।

गाड़ी के लोंको पायलट का कहना था की गाड़ी चलाते वक्त एक जोर से झटका लगा, उन्होंने फौरन गाड़ी को रोका। एक लोको और गाड़ी के पांचवे से बाइसवें डिब्बे तक के 18 डिब्बे पटरी से उतरे मिले।

फ़ोटो और सूचना प्रत्यक्ष दर्शी के फीड द्वारा-

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देश बदल रहा है, साथ रेलवे भी।

आजादी के अमृत महोत्सव की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा देश दुनिया की बदलती गतिविधियों पर नजर रखते हुए अपनी चालढाल में बदलाव लाते जा रहा है। ऐसे में रेल्वे कहाँ इन बातोंसे अछूती रह पाएगी?

आज ही हमारे प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव की शुरुवात करते हुए भारतीय जनता से 75 सप्ताह में 75 वन्दे भारत एक्सप्रेस गाड़ियाँ चलावाने का वादा किया है। देश की सबसे आधुनिक और तेज गति की गाड़ी का संस्करण है वन्दे भारत गाड़ियाँ। फिलहाल नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा और नई दिल्ली से वाराणसी के बीच दो वन्दे भारत गाड़ियाँ चलाई जा रही है। साथ ही पूर्वोत्तर राज्योंके देशभर से रेल सम्पर्क को सार्थक करने की भी बात हुई है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी रेल कामकाज में यात्री सुविधाओंको बेहतर किए जाने पर जोर देने की बात रखी है। रेलवे के अफसर अब बिजनेस डेवलपमेंट अफसर की तरह काम करते नजर आएंगे, जवाबदेही बढ़ाई जाएगी और शिकायतोंका निपटारा शीघ्रता से किया जाएगा। रेलवे के लिए हर एक यात्री महत्वपूर्ण है, अतः यात्री चाहे द्वितीय श्रेणी जनरल क्लास में यात्रा करता है उसे भी कोई तकलीफ या परेशानी का सामना ना करना पड़े इसकी हिदायतें दी जा रही है।

आज सचमुच रेलवे में यात्री सुविधाओंमें काफी विस्तार हुवा है। स्टेशनोंका हुलिया बहुत कुछ बदल चुका है। स्टेशनोंकी सफाई व्यवस्था देखने लायक रहती है। जिस तरह सार्वजनिक स्थानोंकी सफाई व्यवस्था चाकचौबंद रखी जाए तो उसका उपयोग करनेवाले लोग भी उस सफाई का पालन करते नजर आते है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण महाराष्ट्र में अकोला शहर के निकट “श्री गजानन महाराज संस्थान, शेगांव” है। संस्थान के परिसर में हजारों सेवा भावी कर्मचारी सफाई कार्य मे दक्ष रहते है और उनके द्वारा रखी गयी साफसफाई देखते हुए हजारों लोगोंकी आवाजाही के बावजूद सम्पूर्ण परिसर एकदम साफसुथरा रहता है। यह ठीक वहीं तत्व है, की गन्दगी ही गन्दगी को बढ़ाती है। साफसुथरे प्लेटफार्म और स्टेशन परिसर को यात्री भी सराहते है और गन्दगी करने से कतराते है।

रेल मंत्री अपने कर्मियोंको शुद्ध व्यावसायिक तरीके से काम करवाने का प्रयत्न करवाते नजर आ रहे ऐसेमें यात्री द्वितीय श्रेणी साधारण और खास कर के स्लिपर क्लास की यात्रा सुचारू और सुरक्षित तरीके से कर सके इस पर ध्यान देंगे ऐसी आशा की जा सकती है। आज भी दस दस स्लिपर क्लास के कोचेस में केवल दो या तीन चल टिकट परीक्षक रहते है और द्वितीय श्रेणी में तो रेलवे की ओरसे कोई भी कर्मचारी नही रहता। रेलवे की अधिकृत निगरानी के अभाव में इन डिब्बो में अवैध विक्रेता, भीख मांगने वाले और तृतीयपंथी बेखटके यात्रिओंको परेशान करते रहते है। जब स्टेशन के आगमन पर ही सुरक्षा बल का व्यापक संचार रहता है, इसके बावजूद यह लोग स्टेशन के प्लेटफार्म पर या चलती गाड़ी किस तरह प्रवेश कर जाते है यह न सिर्फ आश्चर्य की बात है बल्कि संशोधन की भी बात है।

रेल प्रशासन के लिए इन बातोंका बन्दोबस्त करना अवश्य ही मामूली सी बात होगी मगर ऐसे ही “लूप होल” उन्हें अपने वाणिज्यिक कामकाज में मिल जाएंगे। फिर वह टिकट बुकिंग्ज हो या टिकट चेकिंग या खानपान विभाग हो या विश्रामालय हो। पार्सल बुकिंग्ज से लेकर लदान और पार्सल डिलेवरी हो सारे वाणिज्यिक कामोंमें व्यवसायिक सूसूत्रता लाने की आवश्यकता है।

कार्य निजी हाथोंमें सौंपे जाने से रेलवे की जिम्मेदारी घट नही जाती अपितु यह जाहिर होता है की वह अपने कर्मचारियों से नियोजनबद्ध तरीकेसे काम नही करवा सकती इसीलिए हार कर उसे निजी हाथोंमें सौप कर अपनी जिम्मेदारी से परे होना चाहती है। क्या हर शासकीय कामोंका निजीकरण होता है उसके पीछे यह वजह तो नही?

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उत्तर रेलवे ने अपने परीपत्रकों द्वारा किया नए समयसारणी का आगाज़

संक्रमणकाल में भारतीय रेल की सभी यात्री गाड़ियाँ रद्द कर दी गयी थी। उसके बाद 12 मई 2020 से धीरे धीरे गाड़ियाँ शुरू की गई और लगभग 80% यात्री गाड़ियाँ पटरियों पर दौड़ने लगी है। मेल/एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और अनारक्षित सवारी गाड़ियाँ चल तो रही है मगर है सभी गाड़ियाँ विशेष श्रेणी की।

सभी यात्री गाड़ियाँ विशेष श्रेणी में चलाने की वजह बताई जा रही है, गाड़ियोंके परिचालन की अनिश्चितता। चूँकि देश के किसी क्षेत्र में संक्रमण की मात्रा को मद्देनजर रखते हुए गाड़ियोंका संचालन नियंत्रित करने का जिम्मा राज्य प्रशासन और उनके द्वारा नामित किए गए नोडल ऑफिसर के निगरानी में है और इसी वजह से गाड़ियाँ कभी भी नियंत्रित की जा सकती है। ऐसी अवस्था मे गाड़ियाँ यदि नियमित रहती तो स्थितियां बड़ी असमंजस भरी हो सकती थी। अतः सभी गाड़ियोंको विशेष श्रेणी में ‘0’ नम्बर से शुरुवात कर क्रमांक दिए गए और यात्री आवश्यकता नुसार चलाया जा रहा है।

उत्तर रेलवे ने आज परीपत्रक जारी किए है जिसमे यह कहा गया है, जब भी समयसारणी नियमित होंगी तब उनकी गाड़ियोंके क्रमांक और परिचालन स्थितियां बदली जाएगी। परीपत्रक देखते हुए सम्भवतः यह लगता है, की नियमित समयसारणी जारी किए जाने में अब ज्यादा दिन नही लगेंगे। नियमित समयसारणी के कारण यात्रिओंके रेल यात्रा नियोजन में स्थिरता आ सकेगी और बार बार रेलवे के परीपत्रक पर नजर रखने की परेशानी से छुटकारा मिल सकेगा। आइए परीपत्रक भी देख लेते है।

नियमित समयसारणी में मार्ग परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
नियमित समयसारणी में गन्तव्य/आरंभिक स्टेशन का परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
नियमित समयसारणी में गाड़ी क्रमांक और परिचालन की स्थिति परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
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एक पत्र और आस जगी सवारी गाड़ियोंके शुरू होने की।

सोशल मीडिया एक कार्यालयीन पत्र वायरल हुवा है और पत्र का मसौदा देखते हुए यह क़यास लगाया जा सकता है की जो PSPC, सवारी गाड़ियोंका अकाल और सूखा, मध्य रेलवे में पड़ा दिखाई दे रहा है वह प्रत्येक मण्डल के प्रत्येक खण्ड पर एक एक सवारी गाड़ी के चलवाने की अनुमति देकर मिटाने का प्रयत्न किया जा रहा है। सर्व प्रथम यह पत्र देखिए।

अब इस पत्र से हम कुछ अनुमान लगा सकते है। यह पत्र सोलापुर मण्डल के वरिष्ठ वाणिज्य अधीक्षक द्वारा मुख्य क्षेत्रीय वाणिज्य अधिक्षक मुम्बई मुख्यालय को प्रेषित किया गया है। पत्र में साफ लिखा गया है, सोलापुर मण्डल के प्रत्येक सेक्शन में प्रत्येकी एक जोड़ी ऐसी 4 जोड़ी गाड़ियाँ पुनर्स्थापित (रिस्टोर) की जा सकती है। अनुमानित यह है, की मध्य रेलवे मुख्यालय प्रशासन ने अपने प्रत्येक मण्डल को अपने हरेक सेक्शन की एक एक आवश्यक सवारी गाड़ी जो पुनर्स्थापित की जा सकती है, उसके प्रस्ताव भेजने के लिए कहा होगा। सोलापुर मण्डल ने जिन चार जोड़ी सवारी गाड़ियोंका प्रस्ताव भेजा है वह तो आपके सामने प्रस्तुत है।

क्या बचे 4 मण्डल, मुम्बई, भुसावल, नागपुर और पुणे इनके भी सवारी गाड़ियोंके शुरू करवाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए है? हम नही जानते मगर फिर से अनुमान नामक घोड़ा दौड़ाकर कुछ तथ्योंको आपके सामने ला सकते है।

भुसावल मण्डल में इगतपुरी – भुसावल, खण्डवा – भुसावल और नरखेड़ – बड़नेरा – भुसावल ऐसे मुख्य खण्ड और चालीसगांव – धुळे एक ब्रांच सेक्शन है।

इगतपुरी – भुसावल खण्ड पर 3 जोड़ी सवारी गाड़ियाँ चलती है। 51153/54 मुम्बई – भुसावल – मुम्बई, 51423/24 इगतपुरी – मनमाड़ – इगतपुरी, 51181/82 देवलाली – भुसावल – देवलाली, बड़नेरा – भुसावल खण्ड पर 51183/84 भुसावल – नरखेड़ – भुसावल मेमू, 51197/98 भुसावल – वर्धा – भुसावल सवारी, 51285/86 भुसावल – नागपुर – भुसावल सवारी भुसावल खण्डवा खण्ड पर 51187/88 भुसावल – कटनी – भुसावल सवारी और 51157/58 भुसावल – इटारसी – भुसावल सवारी, चालीसगांव धुळे खण्ड 57 किलोमीटर के मार्ग पर 4 जोड़ी सवारी गाड़ियाँ चलती है। इसमें कहा जा सकता है की देवलाली- भुसावल, भुसावल – कटनी और भुसावल – नरखेड़ मेमू इन 3 जोड़ी गाड़ियोंका प्रस्ताव भेजा जा सकता है। वहीं चालीसगांव – धुळे खण्ड पर भी 4 में से 1-2 जोड़ी का प्रस्ताव भेजा का सकता है।

नागपुर मण्डल में बड़नेरा – नागपुर, वर्धा – बल्हारशहा और नागपुर – इटारसी यह 3 प्रमुख मार्ग है। जिसमे बड़नेरा नागपुर खण्ड 51261/62 अमरावती – वर्धा – अमरावती, 51259/60 वर्धा – नागपुर – वर्धा यह दोनोंही शुरू की जा सकती है। बल्हारशहा – नागपुर – इटारसी खण्ड पर 51829/30 नागपुर इटारसी नागपुर, 51293/94 नागपुर आमला नागपुर, 51195/96 बल्हारशहा वर्धा बल्हारशहा, 59395/96 बैतूल भण्डारकुण्ड बैतूल सवारी गाड़ियाँ चलती है। सारे सेक्शन में यात्री सेवा के हिसाब से एक एक ही सवारी गाड़ी होने से इनके प्रस्ताव भेजे जा सकते है।

पुणे मण्डल में पुणे दौंड पुणे के बीच दो जोड़ी मेमू गाड़ियाँ पहले ही चलने लग गई है। पुणे लोनावला यह उपनगरीय खण्ड है और 18+4 कुल 22 जोड़ी गाड़ियाँ चलती है, उसके लिए प्रशासन हो सकता है मुम्बई उपनगरीय सेवा की तरह निर्बंध लगाकर चलवा दे, कहा नही जा सकता। बचा पुणे – कोल्हापुर खण्ड तो इसमें 51409/10 पुणे कोल्हापुर पुणे, 51435/36 पुणे सातारा पुणे, 51429/30 सांगली कोल्हापुर सांगली, 51407/08, 51427/28 मीरज कोल्हापुर मीरज ऐसी सवारी गाड़ियाँ चलती है। जिसमे हो सकता है कि पुणे कोल्हापुर पुणे को, दिन की यात्रा देखते हुए प्राथमिकता दी जाए।

मुम्बई मण्डल यहाँपर तो उपनगरीय गाड़ियाँ चलती है, और काफी रस्साकशी के बाद निर्बन्धित स्वरूप में आम जनता को यात्रा करने की अनुमति मिली है। मुम्बई – इगतपुरी, मुम्बई – पनवेल और मुम्बई – लोनावाला यह मुख्य मार्ग पर उपनगरीय गाड़ियोंके अलावा कुछेक सवारी गाड़ियाँ चलती है, जिन्है शून्याधारित समयसारणी के तहत मेल/ एक्सप्रेस स्वरूप में चाल मिल चुकी है। मुम्बई भुसावल मुम्बई सवारी चलने लगे तो मुम्बई इगतपुरी खण्ड का समाधान हो जाएगा।

खैर, यह सारे अनुमान ही है, हक़ीकत क्या है और ‘अन्जाम ए गुलिस्तां’ क्या होगा यह तो माई-बाबा म रे ही जाने!