Uncategorised

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिशन मोड में भारतीय रेलवे 1,15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 58 अति महत्वपूर्ण और 68 महत्वपूर्ण परियोजनाएं सौंपने के लिए तैयार

मोबीलिटी, सुरक्षा को बड़ा प्रोत्साहन और अधिक सवारी गाड़ी तथा और मालगाड़ी चलाने के लिए अतिरिक्त क्षमता का सृजन

कोविड चुनौतियों के बावजूद 11,588 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 1,044 किलोमीटर लंबाई की 29 अति महत्वपूर्ण परियोजनाएं सौंपी गईं

असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तथा उत्तराखंड जैसे राज्यों में प्रमुख परियोजनाएं डिलीवर की गईं

कुल 3,750 किलोमीटर लंबाई की 58 अति महत्वपूर्ण परियोजनाओं की लागत 39,663 करोड़ रुपये

कुल 6,913 किलोमीटर लंबाई की 68 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की लागत 75,736 करोड़ रुपये

मल्टी-ट्रैकिंग यानी दोहरीकरण/तीसरी लाइन/चौथी लाइन की ये परियोजनाएं व्यस्त मार्गों पर हैं

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मिशन मोड में भारतीय रेलवे अगले कुछ वर्षों में 1,15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 58 अति महत्वपूर्ण और 68 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को सौंपने के लिए तैयार है।

कोविड की चुनौतियों के बावजूद भारतीय रेलवे पटरियों की क्षमता बढ़ाने के लिए अत्यावश्यक परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तेजी से काम कर रहा है।

पिछले एक वर्ष में 11,588 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 1,044 किलोमीटर लंबाई की 29 अति महत्वपूर्ण परियोजनाएं चालू हो गई हैं।

भारतीय रेल ने 39,663 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 3,750 किलोमीटर लंबाई की कुल 58 अति महत्वपूर्ण परियोजनाओं को चिन्हित किया है। इन 58 अति महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से 27 परियोजनाएं दिसंबर, 2021 तक पूरी हो जाएंगी जबकि शेष 02 परियोजनाएं मार्च 2022 तक सौंपी जाएंगी। 

उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल नेटवर्क का अधिकांश यातायात गोल्डन चतुर्भुज, उच्च घनत्व नेटवर्क मार्गों और अत्यधिक उपयोग किए गए  भारतीय रेलवे नेटवर्क मार्गों पर चलता है। उच्च घनत्व और अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क मार्ग में भारतीय रेलनेटवर्क कीमार्ग लंबाई 51 प्रतिशत है लेकिन इसमें 96 प्रतिशत यातायात है।

यातायात घनत्व, ले जाई जाने वाली सामग्री के प्रकार, रणनीतिक दृष्टि से मार्ग के महत्व के आधार पर तेजी से प्रगति कर रही परियोजनाओं (व्यय पहले ही 60 प्रतिशत से अधिक) सहित तत्काल विस्तार के लिए आवश्यक परियोजनाओं को अति महत्वपूर्ण श्रेणी (58 परियोजनाएं) में रखा गया है। जो परियोजनाएं अगले चरण में पूरी होनी हैं उन्हें महत्वपूर्ण परियोजनाएं(68 परियोजनाएं) माना गया है। ये सभी सिविल परियोजनाएं (विद्युतीकरण तथा सिग्नलिंग कार्य से संबंधित) हैं। 

केंद्रित रूप में वित्त पोषण तथा निरंतर निगरानी से इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है ताकि निवेश का लाभ उठाया जा सके। पूरी होने पर यह परियोजनाएं मोबिलिटी, सुरक्षा में सुधार लाएंगी और इन संतृप्त तथा व्यस्त मार्गों पर सवारी और मालगाड़ी चलाने की अतिरिक्त क्षमता का निर्माण होगा। शीघ्र पूरी की जाने वाली चिन्हित परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन को उच्च प्राथमिकता दी गई है।

अति महत्वपूर्ण परियोजनाएः

39,663 करोड़ रुपए लागत की 3,750 किलोमीटर कुल लंबाई वाली 58 परियोजनाओं को अति महत्वपूर्ण चिन्हित किया गया है। यह अति महत्वपूर्ण परियोजनाएं मल्टी-ट्रैकिंग यानी दोहरीकरण/तीसरी लाइन/चौथी लाइन की व्यस्त मार्गों पर हैं। इन परियोजनाओं के पूरी होने पर रेलवे इन घने/ संतृप्त/व्यस्त मार्गों पर सुरक्षा के साथ तेज गति से अधिक यातायात संचालन में सक्षम होगा। अब तक 11,588 करोड़ रुपए लागत की 1,044 किलोमीटर कुल लंबाई की 29 परियोजनाएं चालू कर दी गई हैं। 27 परियोजनाएं दिसंबर, 2021 तक पूरी हो जाएंगी जबकि शेष 02 परियोजनाएं मार्च 2022 तक पूरी होंगी।

महत्वपूर्ण परियोजनाएं:

75,736 करोड़ रुपये की लागत वाली 6,913 किलोमीटर कुल लंबाई की 68 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान की गई है और 1,408 करोड़ रुपये की लागत वाली 108 किलोमीटर लंबी 04 परियोजनाएं अब तक पूरी कर ली गई हैं और शेष परियोजनाओं को मार्च 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

68 महत्वपूर्ण परियोजनाएं – अनुमानित लागत 75,736 करोड़ रुपये (लगभग 76,000 करोड़) की थीं जिनमें से 21 मार्च तक 37,734 (लगभग 38,000 करोड़ रुपये) खर्च किए गए हैं। इस वर्ष के लिए परिव्यय 14,466 करोड़ रुपये (लगभग 15,000 करोड़) है। अब-तक 4 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

भारतीय रेलवे ने कोविड-19 महामारी के बावजूद वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 1,614 किलो मीटर दोहरीकरण/तीसरी/चौथी लाइन चालू की है। महामारी की स्थिति के बावजूद भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान अब तक 133 किलोमीटर दोहरीकरण/तीसरी लाइन चालू की है।

भारतीय रेलवे ने असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कुछ प्रमुख क्षमता निर्माण परियोजनाएं दी हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं

1) असम –

न्यू बोंगईगांव-गुवाहाटी सेक्शन के ब्रह्मपुत्र नदी पर नारायण सेतु पर दूसरी लाइन ट्रैक चालू होने से इस सेक्शन पर काफी राहत मिलेगी।

2) पश्चिम बंगाल-

  1. मई 2021 में भारतीय रेलवे ने कोविड-19 महामारी और राज्य चुनाव के बावजूद पश्चिम बंगाल में दो दोहरीकरण परियोजनाओं यानी कटवा – बाजार साऊ और अजीमगंज- बाजार साऊ का हिस्सा चालू किया है।

बी) कटवा- बाजार साऊ और अजीमगंज- बाजार साऊ: एनटीपीसी टीपीएस यानी फरक्का थर्मल पावर स्टेशन (निर्माणाधीन) के लिए कोयले की आवाजाही के लिए बर्धमान साहिबगंज की ओर आने- जाने वाले यातायात को देखते हुए इस लाइन का दोहरीकरण बहुत महत्वपूर्ण है

3) महाराष्ट्र –

जून 21 में भारतीय रेलवे ने महाराष्ट्र में अति महत्वपूर्ण परियोजना भुसावल-जलगांव तीसरी लाइन शुरू की है, जिससे इस सेक्शन की अड़चन दूर हो जाएगी और मनमाड़-खंडवा और भुसावल-उधना सेक्शन में ट्रेन सेवा संचालन के लिए काफी राहत मिलेगी।

4) उत्तराखंड-

हरिद्वार-लक्सर दोहरीकरण:. राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार तक इस खंड का पूरा मार्ग चालू होने के बाद डबल लाइन (जनवरी, 2021 में) बन गया है। इससे इस व्यस्त मार्ग पर समयबद्धता में सुधार होगा।

उपरोक्त अति महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भीड़भाड़ वाले मार्गों पर यात्री और माल ढुलाई की सुचारू आवाजाही, ट्रेनों की गति बढ़ाने, नई रेल सेवा शुरू करने, सुरक्षा में वृद्धि के लिए अधिक लाइन क्षमता उपलब्ध होगी क्योंकि इन व्यस्त मार्गों पर रखरखाव मार्जिन उपलब्ध होगा।

प्रविष्टि तिथि: 29 JUN 2021 1:47PM by PIB Delhi

Uncategorised

खुशखबर : पश्चिम रेलवे ने अपनी MSPC मेल/ एक्सप्रेस विशेष गाड़ियोंके 105 स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए।

पश्चिम रेलवे ने एक परीपत्रक जारी कर उनकी जो भी विशेष गाड़ियाँ चल रही है, उनमें 07 जुलाई से निम्नलिखित स्टापेजेस बहाल किए जाने की बात की है। दरअसल बहुत सी पुरानी नियमित गाड़ियाँ संक्रमण काल के बाद केवल विशेष श्रेणी में चलाई जा रही है और विशेष श्रेणी में उनके नियमित स्टापेजेस रद्द कर दिए गए थे जिन्हें अब बहाल किया जा रहा है।

कृपया निम्नलिखित चार्ट देखे। चार्ट में अनुक्रम क्रमांक के बाद स्टेशन कोड, MSPC गाड़ी नम्बर, नियमित गाड़ी नम्बर, गाड़ी कहाँ से कहाँ तक चलती है वह दिया है, उसके बाद WTT याने वर्किंग टाइमटेबल और आखिर में PTT याने पब्लिक टाइमटेबल दिया है। यह जो PTT arrl/dep है, वह आपका उपरोक्त स्टेशन का arrl गाड़ी के आनेका और dep गाड़ी के रवाना होने का समय है।

मुम्बई मण्डल में,

वापी और वलसाड़ में 09119/20 चेन्नई केवड़िया चेन्नई, दौंडाईचामें 01137/38 नागपुर अहमदाबाद नागपुर प्रेरणा साप्ताहिक, 08405/06 अहमदाबाद पूरी अहमदाबाद साप्ताहिक, अमलनेर में 02973/74 गाँधीधाम पूरी गाँधीधाम साप्ताहिक, धरणगांव में अहमदाबाद चेन्नई अहमदाबाद नवजीवन प्रतिदिन के स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए गए है।

वडोदरा मण्डल में,

आणंद में 01463/64/65/66 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ, 02489/90 बीकानेर दादर बीकानेर, 02989/90 दादर अजमेर दादर, 09493 गाँधीधाम पूरी, 06311 श्रीगंगानगर कोचुवेली, 06734 ओखा रामेश्वरम, नाडियाड में 02216 बान्द्रा दिल्ली सराय रोहिल्ला, 02490 दादर बीकानेर, गोधरा में 02995/96 बान्द्रा अजमेर बान्द्रा, 09111 वलसाड़ हरिद्वार, 01463/64/65/66 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ भरूच में 02995/96 बान्द्रा अजमेर बान्द्रा, देरोल में 01463/64/65/66 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ, अंकलेश्वर में 02961 मुम्बई इन्दौर अवन्तिका के स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए गए है।

अहमदाबाद मण्डल में,

साबरमती में 02915/16 अहमदाबाद दिल्ली अहमदाबाद आश्रम, 02037/38 पूरी अजमेर पूरी, आदिपुर में 09455/56 बान्द्रा भुज बान्द्रा कच्छ, 09115/16 दादर भुज दादर, मणिनगर में 02765 सिकंदराबाद राजकोट, 06614 कोयम्बटूर राजकोट, 07204 काकीनाडा भावनगर, 05045 गोरखपुर ओखा, 01090 पुणे भगत की कोठी, 01192 पुणे भुज, 01464 और 01466 जबलपुर सोमनाथ, 06502 यशवंतपुर अहमदाबाद, 06338 एर्नाकुलम ओखा, 06334 तिरुवनंतपुरम वेरावळ, 06336 नागरकोइल गाँधीधाम, 02656 चेन्नई अहमदाबाद नवजीवन, 02933 मुम्बई अहमदाबाद कर्णावती, 09115/16 दादर भुज दादर इन गाड़ियोंके स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए गए है।

रतलाम मण्डल में,

काला पीपल में 09323/24 डॉ आंबेडकर नगर भोपाल डॉ आंबेडकर नगर, 01463/64/65/66 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ, बेरछा, काली सिंध, अकोडिया, परबति में 01463/64 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ, बड़नगर में 09338 दिल्ली सराय रोहिल्ला इन्दौर इन गाड़ियोंके स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए गए है।

राजकोट मण्डल में,

थान में 01463/64/65/66 सोमनाथ जबलपुर सोमनाथ, भक्तिनगर में 06334/33 तिरुवनंतपुरम वेरावळ तिरुवनंतपुरम, 09218/17 जामनगर बान्द्रा जामनगर सौराष्ट्र जनता, हापा में 08401/02 पूरी ओखा पूरी द्वारका विशेष, 09263/64 पोरबंदर दिल्ली सराय रोहिल्ला पोरबन्दर, 02945/46 मुम्बई ओखा मुम्बई सौराष्ट्र मेल, खम्बालिया में 08401/02 पूरी ओखा पूरी द्वारका विशेष, पदाधारी, जाम वनथाली, कानालुस, मीठापुर में 02945/46 मुम्बई ओखा मुम्बई सौराष्ट्र मेल इन गाड़ियोंके स्टापेजेस पुनर्स्थापित किए गए है।

कुल मिलाकर 105 स्टापेजेस है। पश्चिम रेल WR के यह दृषिकोंण यात्रिओंकी के लिए बहुत ही लोकाभिमुख है।

Uncategorised

दक्षिण मध्य रेल SCR की 10 विशेष गाड़ियाँ, 10 गाड़ियोंका पुनर्चलन और 8 गाड़ियोंके सेवा की अवधि बढ़ी

विशेष गाड़ियाँ

1: 02523 सांतरागाछी तिरुपति साप्ताहिक दिनांक 04 जुलाई से प्रत्येक रविवार को चलेगी

2: 02524 तिरुपति सांतरागाछी साप्ताहिक दिनांक 05 जुलाई से प्रत्येक सोमवार को चलेगी।

3: 02543 हावड़ा एम जी आर चेन्नई सेंट्रल कोरोमण्डल प्रतिदिन विशेष दिनांक 03 जुलाई से चलेगी।

4: 02544 एम जी आर चेन्नई सेंट्रल हावड़ा कोरोमण्डल विशेष दिनांक 04 जुलाई से प्रतिदिन चलेगी।

5: 02527 हावडा सत्य साईं प्रशान्ति निलायम साप्ताहिक दिनांक 07 जुलाई से प्रत्येक बुधवार को चलेगी।

6: 02528 सत्य साईं प्रशान्ति निलायम हावडा साप्ताहिक दिनांक 09 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।

7: 08415 भुबनेश्वर कृष्णराजापुरम एकल फेरा दिनांक 30 जून बुधवार को चलेगी।

8: 08416 कृष्णराजापुरम भुवनेश्वर एकल फेरा दिनांक 01 जुलाई गुरुवार को चलेगी।

9: 08575 भुबनेश्वर लोकमान्य तिलक टर्मिनस एकल फेरा दिनांक 30 जून बुधवार को चलेगी।

10: 08576 लोकमान्य तिलक टर्मिनस भुवनेश्वर एकल फेरा दिनांक 02 जुलाई शुक्रवार को चलेगी।

निम्नलिखित 10 गाड़ियोंको फिरसे शुरू किया जा रहा है।

8 साप्ताहिक गाड़ियाँ सीमित अवधिके लिए चलाई जा रही है।

Uncategorised

गाड़ियाँ अनलॉक मगर MST पर रेल प्रशासन की चुप्पी; जनआक्रोश की कोई सुनवाई नही

संक्रमणकाल के निर्बंध हटाए जा रहे और 70 फीसदी गाड़ियाँ पटरी पर लौट गई है। यूँ तो शार्ट डिस्टेन्स डेली कम्यूटर्स जैसे ही गाड़ियोंमे सेकन्ड क्लास टिकटें चल निकली वैसे ही रेल में यात्रा करना शुरू हो गए थे। मगर अब भी इनकी जेबें रेल ही खाली करती चली जा रही है।

आम भाषामें इन रोजाना रेल यात्रा करने वालोंको “अप-डाउन” वाले यात्री कहा जाता है। बहुत छोटे से से अंतर के लिए यह लोग वर्षोंसे रेल यात्रा करते चले आ रहे है। यहाँतक की इन लोगोंके जीवन का बड़ा हिस्सा डेली अप डाउन करते हुए रेल गाड़ियोंमे बीत जाता है। जिंदगी के महत्वपूर्ण त्यौहार भी यह लोग अपने रोजाना के सह यात्रिओंके साथ मनाते है। आपने मुम्बई – पुणे या मुम्बई मनमाड़ के बीच कई लोगोंको गणेशोत्सव, होली जैसे त्यौहार, किसी का जन्मदिन या शादी की वर्षगांठ जैसे व्यक्तिगत कार्यक्रम भी बड़े उत्साह से मिलजुलकर मनाते देखा होगा। अपने जीवन के बड़े हिस्से को रेलगाड़ी में बिताना इन लोगोंकी आवश्यकता बन गई है।

रेलगाड़ियोंके निर्बंध तो हटते चले गए मगर इन लोगोंके हाल उसी तरह चल रहे है। रेल प्रशासन ने गाड़ियाँ तो चला दी मगर MST मन्थली सीजन टिकट नामक, इन लोगोंकी अत्यधिक आवश्यक सुविधा अब तक भी शुरू नही की है। दरअसल MST में यात्री एक महीने की रेल यात्रा का रेल प्रशासन द्वारा तय किया हुवा किराया अग्रिम राशी देकर खरीद लेता है। जिससे उसको बार बार टिकट खरीदने के परेशानी से मुक्ति मिलती है और साथ साथ कुल किराया एक साथ देने से रेलवे के कुल किराए में उसे रियायत भी मिल जाती है। इसमें रेलवे का भी फायदा है, उसे महीनेभर का किराया अग्रिम मिल जाता है।

रेल प्रशासन ने अपने यात्री किरायोंकी सारी रियायत इस संक्रमण काल मे बन्द कर रखी है, जिसमे दिव्यांग व्यक्तियों की रियायत अपवाद है। मगर क्या रेल प्रशासन MST को भी रियायती टिकट समझती है? इसलिए इसको शुरू नही कर रही या रेल प्रशासन इस किरायोंके गणित को कुछ अलग तरह से गणना करना चाहती है?

MST टिकट इतना लोकप्रिय क्यों है, दरअसल MST टिकट एक तरह से एक महिनेका अग्रिम सेकन्ड/फर्स्ट क्लास टिकट है जिसमे 150 किलोमीटर के भीतर के किन्ही दो स्टेशनोंके बीच, कुल 60 एकल यात्रा करना निर्धारित है। मगर इन 60 एकल यात्रा का MST किराया अनुमानित तौर पर रेल प्रशासन केवल 15 एकल यात्रा का ही लगाता है। यह इसकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है। मुम्बई- पुणे और मुम्बई – नासिक के बीच 200 किलोमीटर का MST टिकट जारी करने की अनुमति है। चूँकि 15 एकल यात्रा का किराया वह भी सवारी गाड़ी के द्वितीय श्रेणी का, याने लगभग 25% किराए में महीनेभर का जाना आना हो जाता है तो अप डाउन वाले लोग इसीको प्राथमिकता देते है। जहाँ उपनगरीय गाड़ीयाँ चलती है वहाँपर तो ठीक है, मगर दूसरे गैर उपनगरिय खण्ड है और वहाँपर दिन में केवल 2-4 सवारी गाड़ियाँ चलती है वहाँपर यह लोग मेल/एक्सप्रेस में यात्रा करते है, जिनमे द्वितीय श्रेणी कोच लगे रहते है और जिनमे मन्थली पास धारकोंको यात्रा करने की अनुमति है।

अब इन यात्रिओंकी मुसीबत यह है, की कोई भी सवारी गाड़ी नही चल रही, MST टिकट उपलब्ध नही, हर बार जाते आते एकल यात्रा टिकट के लिए टिकट घर जाकर लम्बी भीड़ भरी कतार में लगकर टिकट खरीदने में बहुत वक्त जाया हो रहा है साथमे संक्रमण के फैलने का डर है सो अलग।द्वितीय श्रेणी मेल एक्सप्रेस का एकल यात्रा टिकट भी सवारी गाड़ी के किराए से दो, तीन गुना ज्यादा है। ऐसे में जो MST का खर्च करीबन 200 रुपये हर माह का था वह अब बढ़कर 1500 से 1800 रुपए लग रहा है और इससे कई लोगोंका जीवनयापन गड़बड़ा गया है।

तमाम MST धारकोंकी मांग है, रेल प्रशासन ने अब MST टिकट शुरू करने पर निर्णय ले लेना चाहिए। बीते जून 2020 से यह डेली अप डाउन करनेवाले लोग अतिरिक्त किराया भर कर परेशान हो गए है। हर जगह हर बार गुहार लगा चुके है। वह चाहते है, रेल प्रशासन MST धारकोंको रियायती टिकट नही जरूरत की नजर से देखे और जल्द इसे शुरू करने की व्यवस्था करे।

Uncategorised

महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी की रेल यात्रा

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद 25 जून को दिल्ली में सफदरजंग रेलवे स्टेशन से एक विशेष राष्ट्रपति ट्रेन से कानपुर की यात्रा पर निकलेंगे। ट्रेन कानपुर देहात के दो स्थानों झिंझक और रूरा पर रुकेगी, जहां राष्ट्रपति अपने स्कूल के दिनों और अपनी समाज सेवा के शुरुआती दिनों के परिचितों के साथ संवाद करेंगे।

ये दोनों स्थान राष्ट्रपति के जन्म स्थान कानपुर देहात के गांव परौंख के नजदीक हैं, जहां 27 जून को उनके सम्मान में दो कार्यक्रम होने हैं। ट्रेन में चढ़ते ही, राष्ट्रपति अपनी पुरानी स्मृतियों की यात्रा करेंगे, जिनमें उनके बचपन से लेकर देश के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंचने तक का सात दशक का जीवनकाल कवर होगा।

ऐसा पहली बार है कि राष्ट्रपति अपना वर्तमान पद संभालने के बाद पहली बार अपने जन्म स्थान का भ्रमण करेंगे। हालांकि उन्होंने पहले भी यहां की यात्रा की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन महामारी के चलते यह योजना अमल में नहीं आ सकी।

सफर के साधन के रूप में ट्रेन के विकल्प को चुनना कई राष्ट्रपतियों की परम्परा की तर्ज पर है, जो देश के विभिन्न भागों के लोगों से जुड़ने के लिए ट्रेन से सफर पर निकला करते थे।

इस प्रकार, कोई वर्तमान राष्ट्रपति 15 साल के अंतराल के बाद ट्रेन की यात्रा पर निकलेंगे। पिछली बार एक राष्ट्रपति ने वर्ष 2006 में ट्रेन की यात्रा की थी, जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के कैडेट्स की पासिंग आउट परेड में शामिल होने के लिए एक विशेष ट्रेन से दिल्ली से देहरादून के लिए रवाना हुए थे।

रिकॉर्ड बताते हैं कि देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कई बार ट्रेन का सफर किया था। राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने बिहार की यात्रा के दौरान अपने जन्म स्थान सिवान जिले में जिरादेई का भ्रमण किया था। वह राष्ट्रपति की विशेष ट्रेन से छपरा से जिरादेई पहुंचे, जहां उन्होंने तीन दिन बिताए थे। उन्होंने ट्रेन से पूरे देश की यात्रा की थी।

डॉ. प्रसाद के बाद राष्ट्रपति बनने वालों ने भी देश के लोगों के साथ जुड़ने के लिए ट्रेन के सफर को प्राथमिकता दी थी।

28 जून को, राष्ट्रपति राज्य की राजधानी लखनऊ की अपनी दो दिवसीय यात्रा के लिए कानपुर सेंट्रल स्टेशन से ट्रेन से रवाना होंगे। 29 जून को, वह एक विशेष विमान से नई दिल्ली लौट आएंगे।

प्रविष्टि: by PIB Delhi