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अहमदनगर औरंगाबाद रेल मार्ग का सर्वे शुरू होगा 01 मार्च से

मध्य रेलवे के अहमदनगर स्टेशन से औरंगाबाद के लिए नई ब्रॉड गेज लाईन बिछाने हेतु सर्वेक्षण किए जाने के आदेश 2018/19 में दिए गए थे। वही सर्वेक्षण का कल से शुरू किया जा रहा है।

सड़क मार्ग से औरंगाबाद अहमदनगर पुणे के बीच भारी संख्या में यात्रिओं और माल का परिवहन होता है। लगभग हर 30 मिनट से औरंगाबाद से पुणे के लिए राज्य परिवहन की वातानुकूलित शिवशाही बस पुणे के लिए निकलती है और इस मार्ग पर ट्रैवल बसों की तो गिनती ही नही। फोर लेन सड़क मार्ग को प्रशासन ने छह लेन में बढाने का प्रस्ताव भी मन्जूर कर दिया है। ऐसी स्थिति में अब रेलवे मार्ग के लिए भी सर्वेक्षण किया जाना इस क्षेत्र के लिए बड़ी अच्छी खबर है।

पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह मार्ग काफी व्यस्त होता है। औरंगाबाद की जगप्रसिद्ध अजन्ता, एलोरा गुफाएँ, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, शनि शिंगणापुर, भगवान दत्त का स्थान देवगढ़ और शिर्डी के लिए इस मार्ग पर काफी ट्रैफिक रहती है।

सर्वेक्षक, मुम्बई से निकल औरंगाबाद और ज़िले से सड़क मार्ग से जाते हुए गंगापुर, नेवासा, शनि शिंगणापुर, अहमदनगर और आगे अहमदनगर जिले से होते हुए मनमाड़ इस प्रकार सर्वेक्षण करेंगे। इस बीच यह लोग औरंगाबाद, अहमदनगर के जिला मुख्यालयों, मण्डल रेलवे के स्थानिक अधिकारियों, जिला उद्योग केंद्र, अनाज मण्डी समितियाँ, रेलवे स्टेशन अफसर, बस डिपो अधिकारी, ट्रांसपोर्टर आदि लोगोंसे मिलकर रेलवे ट्रैफिक की संभावनाएं जानेंगे।

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चौंक गए? यह वही यात्रिओंसे खचाखच भर भर चलनेवाली सवारी गाड़ियाँ है।

दाहोद नागदा विशेष मेमू

संक्रमण काल के अनलॉक व्यवस्था में भारतीय रेल यात्रिओंकी मांग के चलते कई गाड़ियाँ “विशेष” का टैग लगाकर चला रहा है। कुछ गिनेचुने क्षेत्र छोड़ दिए तो अन्य सभी रेल क्षेत्रोंमें सारी गाड़ियाँ आरक्षण आसन व्यवस्थाओंके के साथ चलाई जा रही है। इन गाड़ियोंमे केवल कन्फर्म हुए आरक्षित टिकटधारी यात्रिओंको ही यात्रा करने की अनुमति है। यदि आपका टिकट प्रतिक्षासूची में रह जाता है, तो यात्रा करने की अनुमति आपको नही मिलेगी। यहाँतक की आपको टिकट के बिना रेलवे प्लेटफार्म पर भी एन्ट्री नही है।

लम्बी दूरी की गाड़ियाँ आरक्षित हो, यह तो ठीक है क्योंकी लम्बा सफर करनेवाले रेल यात्री आरामदायक और सुनिश्चित आसन व्यवस्था के साथ यात्रा करना चाहते है मगर 100-200 किलोमीटर की छोटी सी और “इन्ट्रा डे” रेल यात्रा हो, पास के शहर मे रोजगार हेतु रोज का जानाआना हो तो कैसा आरक्षण? द्वितीय श्रेणी का टिकट हाथोंहाथ लिए और चल पड़े। प्रतिदिन के यात्री तो मासिक पास ही बनवा लेते है। पश्चिम रेलवे ने अपने क्षेत्र में डेमू/मेमू/सवारी गाड़ियाँ चलवा तो दी है, मगर सारी आरक्षित गाड़ियाँ है। अग्रिम आरक्षण करें बगैर आप इनमें यात्रा नही कर सकते। ऐसी स्थितियोंमे आम यात्रिओंको क्या दिक्कत होती है, क्यों यह गाड़ियाँ खाली चल रही है यह समझते है।

सवारी गाड़ियोंमे में सामान्यत: ऐसेे नजारे देखने को नहीं मिलते हैं। उपरोक्त तस्वीर शनिवार को प्लेटफाॅर्म नं. 5 पर खड़ी दाहोद नागदा मेंमू एक्सप्रेस की है। ट्रेन के कोच इस तरह खाली थे। संक्रमण के बढ़ते मामलाें के कारण लोग सफर करने से बच रहे हैं, वहीं, इस कदर खाली गाड़ियोंका, आरक्षित रहना भी एक प्रमुख कारण है। आम तौर पर सवारी गाड़ियाँ से मजदूर वर्ग, छोटे गांव के यात्री ही सफर करते है। इन लोगोंका कोई पूर्व नियोजन नही रहता की वह अग्रिम आरक्षण कर रेल यात्रा करें। जब उन्हें काम या रोजगार पर निकलना पड़ता है, तभी वह अपनी यात्रा करने का साधन भी खोजते है। ऐसी हालातों में रेलवे के नियमोंनुसार आरक्षण चार्ट छप चुका होता है, टिकट बुकिंग बन्द हो जाती है, और गाड़ी खाली ही रह जाती है।

रेल प्रशासन की अग्रिम आरक्षण बुकिंग यात्रा करने से पहले या तो PRS खिड़की या ऑनलाइन ऍप/वेबसाइट से ली जा सकती है। ऍप और वेबसाइट से निम्न वर्ग के यात्रिओंका कोई वास्ता नही होता और जै उनके स्मार्ट फोन में उन्होंने डलवा भी लिया तो ऑनलाइन पेमेन्टकी दिक्कतें होती है। PRS खिड़की पर जाने का वक्त उनके पास नही होता। तब क्या किया जा सकता है?

रेल प्रशासन एक तो इन गाड़ियोंको अनारक्षित व्यवस्थाओंके के साथ चलाना चाहिए और यदि इसी तरीके मतलब आरक्षित ही चलाना चाहती है तो कमसे कम इनके प्रत्येक स्टापेजेस पर गाड़ी छूटने के समय से पहले तक टिकट मिलते रहने की व्यवस्था चलती रहे। यह नही की शुरवाती स्टेशनपर पूरे सफर का ही चार्ट बन गया हो और एक बार चार्ट बन जाए तो बीच वाले किसी भी स्टेशन से टिकट लेना हो तो जबाब मिले,” चार्ट प्रिपेयर्ड, चार्ट निकल चुका है, ट्रेन डिपॉर्टेड”

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लिंक एक्सप्रेस की उपयुक्तता को रेल प्रशासन कैसे नकार सकती है

एक बार फिर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंका जिन्न बोतल से बाहर आने को है। हाल ही में SCR द म रेल ने हैदराबाद/तिरुपति से वास्को के लिए एक विशेष गाड़ी की घोषणा की। इसमें मुख्य गाड़ी 07419/20 तिरुपति वास्को स्पेशल है और हैदराबाद से 07021/22 क्रमांक से 10 कोच की गाड़ी गुंटकल तक आकर मुख्य तिरुपति वास्को में जुड़ेगी। यह पुरानी लिंक एक्सप्रेस की ही संकल्पना है।

यह लिंक एक्सप्रेस वाली संकल्पना ब्रांच लाइन के महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनोंको मुख्य मार्गपर चलने वाली गाड़ियोंसे जोड़ते है। कई बार ऐसा होता है, ब्रांच लाइन के स्टेशनोंकी गाड़ियोंकी मांग तो होती है, मगर एक पूर्ण गाड़ी भरे इतने यात्रिओंकी नही, ऐसी स्थिति में भारतीय रेल के ब्रिटिशकाल से ही लिंक एक्सप्रेस या लिंक कोचेस चलाने की व्यवस्था चल निकली। कमसे कम 50 लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ ब्रांच लाइनके छोटे बड़े स्टेशनोंके यात्रिओंको प्रतिदिन सेवाएं दिए जा रही थी, जिसे रेल प्रशासन ने अपने शून्याधारित टाइमटेबल के नियोजन में समाप्त किए जाने की घोषणा कर दी।

यह लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ कितनी उपयुक्त है, इनकी सूची देखकर आप जान जाएंगे। इन्दौर – उज्जैन – भोपाल जयपुर लिंक, हावडा जोधपुर – बीकानेर लिंक, गौहाटी – बाड़मेर बीकानेर लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला जोधपुर बीकानेर लिंक, निजामुद्दीन वास्को हुब्बाली लिंक, हावडा पोरबंदर ओखा लिंक, खजुराहो वाराणसी लिंक, झांसी इन्दौर लिंक, मानिकपुर खजुराहो निजामुद्दीन लिंक, राधिकापुर आनन्द विहार लिंक, तूतीकोरिन कोयम्बटूर लिंक, मदुराई चंडीगढ़ लिंक, सियालदाह हल्दीबाड़ी लिंक, सहरसा राजेंद्रनगर लिंक, वाराणसी शक्तिनगर लिंक, पटना सिंगरौली लिंक, दिल्ली सराय रोहिल्ला कोटद्वार मसूरी लिंक, शक्तिनगर टनकपुर त्रिवेणी लिंक, भगत की कोठी रामनगर कार्बेट पार्क लिंक, दिल्ली रामनगर लिंक, डिब्रूगढ़ दरभंगा अवध असम लिंक, टाटा कटिहार लिंक, मन्दसौर मेरठ लिंक, बरवाडीह बरेली लिंक इत्यादि इसके अलावा लिंक कोचेस भी चलते थे जिनकी सूची यहाँपर देना मुमकिन नही। लेकिन एक उदाहरण मुम्बई से चंद्रपुर, बल्हारशहा कोच का है। यह 4-5 कोच मुम्बई नागपुर सेवाग्राम से वर्धा आकर बल्हारशहा सवारी में लगते है। इस तरह चंद्रपुर, बल्हारशहा के यात्री सीधे मुम्बई की यात्रा प्रतिदिन उपलब्ध है। इसके ऐवज में क्या रेल प्रशासन इन्हें प्रतिदिन मुम्बई के लिए एक पूरी गाड़ी चलवा सकती है?

रेल प्रशासन का तर्क यह है, एक तो आधुनिक LHB कोचेस से गाड़ियाँ चलने से तकनीकी कारणोंके चलते उन गाड़ियोंमे लिंक एक्सप्रेस के डिब्बे जोड़ना, निकालना मुमकिन नही है। दूसरा जंक्शन स्टेशन जहाँपर लिंक एक्सप्रेस की जोड़ की जाती है, गाड़ी का समय जाया होता है। लाइनें ब्लॉक होती है और साथमे कर्मचारी वर्ग भी ज्यादा रखना पड़ता है। इनके ऐवज में रेलवे ब्रांच लाइनके स्टेशन से सीधी गाड़ियोंकी पेशकश करती है और ऐसी कई सीधी गाड़ियोंकी घोषणा भी उन्होंने कर दी है।

अब यात्रिओंकी परेशानी भी समझिए, जो लिंक एक्सप्रेस प्रतिदिन चलती थी वहाँपर द्विसाप्ताहिक या त्रिसाप्ताहिक गाड़ियोंपर उन्हें सन्तुष्ट होना पड़ रहा है। गाड़ियोंके फेरे कम किए जाने से प्रतिदिन की सम्पर्कता पर बड़ा असर हुवा है, जिस दिन यात्रा करना हो यदि उस दिन गाड़ी न हो तो कहीं दूसरे स्टेशन जाकर गाड़ी पकड़नी पड़ेगी। कहीं कहीं तो ऐसे पर्याय भी नही दिए गए है। जैसे मन्दसौर मेरठ लिंक के एवज में मंदसौर के यात्री को कोटा तक अलग गाड़ी और कोटा से सीधी ट्रेन में यात्रा करनी होगी।

एक तरफ सारी लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रेल प्रशासन रद्द करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर द म रेल के कार्यक्षेत्र में लिंक एक्सप्रेस की घोषणा की जाती है। ऐसी स्थितियोंमे जहाँपर लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ रद्द की गई है, वहांके रेल यात्री आहत हुए है। उन्हें रेल प्रशासन के भेदभावपूर्ण व्यवहार से बड़ी ठेस पहुंची है। वह चाहते है, उनके लिए भी लिंक एक्सप्रेस फिर से चलाई जाए या सक्षम पर्याय उपलब्ध कराया जाए।

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हैदराबाद/तिरुपति वास्को स्पेशल अपनी लिंक के साथ शुरू हो रही है

07021/07419 हैदराबाद / तिरुपति वास्को डी गामा स्पेशल दिनांक 01 अप्रैल से प्रत्येक गुरुवार को चलेगी। वापसीमे 07022/07420 वास्को डी गामा तिरुपति / हैदराबाद स्पेशल दिनांक 02 अप्रैल से प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी।

यात्रिओंके विशेष जानने की बात यह है, मुख्य गाड़ी 07419/20 तिरुपति वास्को तिरुपति साप्ताहिक स्पेशल है और 07021/22 यह गाड़ी उसकी हैदराबाद – गुंटकल – वास्को – गुंटकल – हैदराबाद लिंक एक्सप्रेस है।

भारतीय रेल ने यह निर्णय लिया है, तमाम लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंको बन्द किया जा रहा है। ऐसी ऐसी लिंक एक्सप्रेस गाड़ियाँ इस झीरो बेस प्रणाली में बन्द की गई है, जो उस इलाके की वर्षोंसे चली आ रही परम्पराएं बन चुकी थी। उक्त प्रतिदिन चलनेवाली लिंक एक्सप्रेस गाड़ियोंको बन्द करके उनके स्थान पर सप्ताह में 2 – 4 दिन चलने वाली गाड़ियाँ चलवा कर स्थानिक यात्रिओंको मना लिया है। आज भी राजस्थान की संपर्कक्रांति लिंक, इन्दौर जयपुर लिंक, निजामुद्दीन हुब्बाली लिंक ऐसी कई गाड़ियोंके यात्री उनकी प्रतिदिन चलनेवाली लोकप्रिय लिंक गाड़ियोंको मिस करते है।

तिरुपति/हैदराबाद वास्को लिंक को शुरू रखके रेल प्रशासन ने भुक्तभोगी यात्रिओंकी आशाओंको जीवित रखा है, की एक न एक दिन रेलवे को लिंक एक्सप्रेस के महत्व का एहसास होगा और या तो यह गाड़ियाँ शुरू की जाएगी या उनके बदले में यथोचित उपायोंको लागू किया जाएगा।

लिंक एक्सप्रेस की बातचीत के चक्कर मे महत्व की बात तो रह ही गयी, यह गाड़ी भी 1.3 किराया ज्यादा लेकर चलाई जाएगी और पूर्णतयः आरक्षित होगी।

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बरेली भुज के बीच चलनेवाली दोनों अला हज़रत एक्सप्रेस 01 मार्च से शुरू हो रही है।

04321/22 बरेली भुज बरेली अला हज़रत विशेष वाया पालनपुर भीलड़ी दिनांक 01 मार्च से सप्ताह में 4 दिन प्रत्येक सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को चलेगी और 04311/12 बरेली भुज बरेली अला हज़रत विशेष वाया अहमदाबाद त्रिसाप्ताहिक दिनांक 02 मार्च से प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार को शुरू होने जा रही है। उपरोक्त गाड़ियाँ पूर्णतयः आरक्षित रहेगी और केवल कन्फर्म टिकट धारक यात्री को ही इन गाड़ियोंमे यात्रा करने की अनुमति रहेगी।