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बाते, रेल अर्थसंकल्प पर बहस की!

जमाना ऐसा चल रहा है, हर किसी को बोलने, अपनी बात रखने का हक़ है, “राइट टु स्पीक,” अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य जो है। बात कहने का हक़ है, मगर मनवाने का? भाई, ऐसा कोई हक़ नही होता। 😄

फिर उसके लिए एक अलग नीति अपनाई जाती है, जिसे हमारे देश मे चाणक्य नीति कहा जाता है। साम, दाम, दण्ड और भेद यह वे चार सूत्र है जो चाणक्य नीति के तहत आते है, लेकिन आजकल सभी को यह सूत्र समझ आ गए है, अतः इससे भी काम सफल कराने में दिक्कतें आती है तब एक और अस्त्र बाहर निकलता है, वह है भावना, सहानुभूति बटोरने वाला अस्त्र। यह ऐसा अस्त्र है, इससे काम बनें या ना बनें लेकिन यह बात तो सिद्ध हो जाती है, की काम कराने के लिए घुटने तक टेक दिए गए है।

चर्चा का विषय यह है, रेल अर्थसंकल्प पर देशभर के विविध जनप्रतिनिधियों द्वारा रेल मन्त्री के सन्मुख, अपने क्षेत्र की बात रखी जा रही है। ऐसा है, किसी घर मे चार बेटे है, जो कुछ करना है वह “घर” के लिए करना है, मगर हर एक बेटा यह समझता है, उसे कुछ नही मिला, जो कुछ किया जा रहा है उसका फायदा उसके दूसरे भाई को ही मिलेगा। अब, वह ये क्यों नही समझता, जो कुछ हो रहा है वह “घर” को सुदृढ बनाने के लिए किया जा रहा है न की किसी एक को फायदा पहुँचाने। हमारा देश, हमारा घर है और हम वह चार बेटे है, जो दूसरे बेटे की थाली में घी ज्यादा परोसा जा रहा है इस पर ही नजरें गड़ाए रहते है।

जब बात प्रतिनिधित्व निभाने की है, तो यह साबित करना भी जरूरी है, की जनता की मांग सामने तक पोहोंचायी गयी है या नही? अतः माँगे तो रखी जाती ही है। चाहे वह पूरी कीये जाने के लिए योग्य हो या ना हो। फिर ऐसी विशिष्ट माँगोंके लिए सर्वेक्षण किया जाता है। जिसमे प्रोजेक्ट निर्माण की लागत और पूरा होने के बाद उससे मिलनेवाली कमाई इसका तालमेल लगाया जाता है। इस आधारपर प्रोजेक्ट का भविष्य तय होता है। कई बार जनप्रतिनिधियों के समाधान के लिए ही सर्वेक्षण करा जाता है, जिसके बारे में पहले ही पता होता है कि प्रोजेक्ट फिजिबल नही है।

एक बात विशेष तौर पर समझने की है, जब कहा जाता है, सड़क निर्माण की घोषणा, रेल मार्ग के मुकाबले फटाफट हो जाती है। उसके लिए धनार्जन भी हो जाता है, कार्य भी जल्द शुरू हो जाते है। साहब, यही तो मुख्य अन्तर है, सड़क और रेल मार्ग के बीच। सड़क मार्ग में कई उद्योग, व्यापार, जमीनदार, रसूखदार के हीत जुड़े होते है। किसी को फैक्ट्री के पास से सड़क गुजरने का फायदा मिलता है, किसी को खेती का मूल्यांकन बढ़कर मिलता है। दूसरा सड़क मार्ग ऐसा है, आपके पास ट्रक है, कार है, ट्रैक्टर है या बैलगाड़ी आप उस सड़क का उपयोग कभी भी, कहीं भी, कैसे भी कर सकते है, इसके लिए आपको न ही किसी विशेष वाहन या ही किसी विशेष अनुमति की जरूरत है। लेकिन रेल मार्ग का ऐसा नही है। रेल मार्ग पर चलने के लिए रेल गाड़ी ही चाहिए। याने रेल मार्ग बनाने के लिए खर्च, फिर उसपर चलाने के लिए विशिष्ट संरचनाओं से युक्त वाहन, उसकी देखभाल के लिए तन्त्रज्ञ, याने एक पूरी की पूरी यंत्रणा इसके लिए कायम स्वरूप में लगनी ही है। निर्माण, संचालन और देखभाल हरदम हर वक्त करना ही है। ऐसा नही की कच्ची पक्की कैसी भी सड़क है, वाहन तो चल ही जाएगा। याने रेल मार्ग के लिए फंडिंग करना, सड़क मार्ग की फंडिंग से कहीं मुश्किल है। दूसरा फर्क घाट, पहाड़ी, नदी, दर्रे इसका भी है, सड़क मार्ग के लिए शार्प टर्न, खड़ी चढ़ाई को एडजस्ट करना मुमकिन है, यह रेल मार्ग को आसानी से सम्भव नही है। रेल मार्ग के निर्माण का खर्च बढ़ता चला जाता है।

दूसरा, लम्बी लम्बी अन्तरोंकी गाड़ियोंकी माँग की जाती है, आम जनता को हर दिन पास के शहरों में जाने के लिए ज्यादा कनेक्टिविटी की जरूरतें है, न की दूर दूर के तीर्थक्षेत्रोंको जानेकी। वहीं बात इन्ही लम्बी दूरीक़े गाड़ियोंके स्टापेजेस के माँग की। भाई, वह रेल गाड़ी है, न की गांवों में चलने वाली कोई रोड़वेज बस, के हाथ दिखाया और रुक गयी, या अपना घर यहांसे पास पड़ता है, हम यही उतरेंगे। रेल गाड़ियोंके स्टापेजेस में रेलवे उसका खर्चा गिनती है और नही रोके जाने से फायदा। जब कमाई और खर्च का तालमेल दिखाई नही देता तब ही स्टापेजेस हटाए जाते है। रेल विभाग का स्टापेजेस कम करने में कोई निजी हित है ऐसा क़दापी नही सोचना चाहिए, ऐसी हर बात पर, तकनीकी आधार ले कर ही ऐसे निर्णय लिए जाते है।

खैर, बहुत सारी तकनीकी बातें है। अब आप बताए कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा पुल रेल मार्ग के लिए बनाया जा रहा है, रामेश्वरम में समुंदर के बीच अत्याधुनिक रेल पुलिया बनने जा रहा है, दिल्ली, कोलकाता की मैट्रो, रोहतक का हवाई रेल मार्ग, देश भर में वर्ष 2023 तक पूर्णतयः विद्युतीकरण, करोड़ो रूपये लगाकर बनाए जा रहे रेलवे के समर्पित मालवहन गलियारे, पटरियोंपर 130-160 किलोमीटर प्रति घण्टे से दौड़ लगाने वाली हमारे भारतीय रेल की अत्याधुनिक रेल गाड़ियाँ क्या यह हमारे लिए गौरव की बात नही? बेशक! यह सब हमारे लिए ही है, हम भारतियोंके लिए है।

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उत्तराखण्ड : उल्टी दिशामे बे-लगाम, दिल्ली से टनकपुर को जानेवाली पूर्णगिरी जनशताब्दी विशेष एक्सप्रेस के साथ विचित्र हादसा!

दिल्ली से टनकपुर आ रही पूर्णागिरि जन शताब्दी एक्सप्रेस (05326) टनकपुर स्टेशन पर पहुंचने से पहले होम सिग्नल नंबर तीन के पास अचानक विपरीत दिशा में चलने लगी। जिससे रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं, ट्रेन को उल्टा चलता देख यात्रियों में भी हड़कंप मच गया।

बताया जा रह है कि शाम करीब चार बजे होम सिग्नल के पास एक पशु के ट्रेन की चपेट में आकर कटने के बाद यह घटना हई। सूचना पर आनन-फानन क्रॉसिंग गेटों को बंद करने के आदेश दिए गए। बनबसा में पत्थर लगाकर ट्रेन रोकने की कोशिश की गई, लेकिन ट्रेन नहीं रुकी। 

बताया जा रहा कि खटीमा-चकरपुर के बीच गेट संख्या 35 के पास ट्रेन को रोकने में सफलता मिली। सही समय पर ट्रेन रुक गई वरना बड़ा हादसा हो सकता था।  बनबसा रेलवे स्टेशन अधीक्षक अमरेंद्र सिंह ने बताया कि इंजन के बैक होने की कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही बनबसा और फागपुर में रेलवे कॉसिंग गेट बंद करा दिए गए थे। सभी यात्री सुरक्षित हैं। गाड़ी के कोचों के बीच का प्रेशर पाइप लीक होने से गाड़ी के ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया था। जिस वजह से गाड़ी खटीमा की तरफ ढलान होने के कारण वापस चलने लगी। रेलवे द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

इज्जतनगर मण्डल के पीआरओ राजेन्द्र सिंह ने बताया कि घटना की जांच के लिए तीन ए ग्रेड ऑफिसरों की टीम गठित की गई है। जांच में घटना के लिए दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कारवाई की जाएगी।

उपरोक्त खबर, अमर उजाला टनकपुर (चम्पावत) से साभार

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भुसावल मण्डल से गुजरने वाली 30 विशेष गाड़ियोंका परिचालन, जून माह तक बढ़ा।

विशेष गाडी की सेवा में विस्तार

रेल द्वारा विशेष गाडीयों की सेवा मे विस्तार, जून तक किया गया है विवरण निम्नलिखित है,

1)गाडी क्रमांक – 02812 अप हटिया -लोकमान्य टिळक टर्मिनस साप्ताहिक (प्रत्येक शुक्रवार ) की सेवा को दिनाँक 02.04.2021 से 25.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

2)गाडी क्रमांक – 02811 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस-हटिया साप्ताहिक (प्रत्येक रविवार ) की सेवा को दिनाँक 04.04.2021 से 27.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

3) गाडी क्रमांक – 02102 अप हावडा -लोकमान्य टिळक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक रविवार,गुरुवार ) की सेवा को दिनाँक 04.04.2021 से 01.07.2021तक बढ़ाया गया है।

4)गाडी क्रमांक – 02101 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस- हावडा द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक शुक्रवार,मंगळवार ) की सेवा को दिनाँक 02.04.2021 से 29.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

5)गाडी क्रमांक – 02880 अप भुवनेश्वर -लोकमान्य टिळक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक सोमवार, गुरुवार ) की सेवा को दिनाँक 01.04.2021 से 28.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

6) गाडी क्रमांक – 02879 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस-भुवनेश्वर द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक बुधवार,शनिवार ) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021से 30.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

7)गाडी क्रमांक – 02866 अप पुरी -लोकमान्य टिळक टर्मिनस साप्ताहिक (प्रत्येक मंगलवार ) की सेवा को दिनाँक 06.04.2021से 29.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

8)गाडी क्रमांक – 02865 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस -पुरी साप्ताहिक (प्रत्येक गुरुवार) की सेवा को दिनाँक 08.04.2021 से 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

9) गाडी क्रमांक – 02857 अप विशाखापट्टणम -लोकमान्य टिळक टर्मिनस साप्ताहिक (प्रत्येक रविवार) की सेवा को दिनाँक 04.04.2021 से 27.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

10)गाडी क्रमांक – 02858 डाऊन लोकमान्य टिळक टर्मिनस – विशाखापट्टणम साप्ताहिक (प्रत्येक मंगळवार) की सेवा को दिनाँक 06.04.2021 से 29.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

11)गाडी क्रमांक – 08501 अप विशाखापट्टणम -गांधीधाम साप्ताहिक (प्रत्येक गुरुवार) की सेवा को दिनाँक 01.04.2021 से 24.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

12)गाडी क्रमांक – 08502 डाऊन गांधीधाम-विशाखापट्टणम साप्ताहिक (प्रत्येक रविवार) की सेवा को दिनाँक 04.04.2021 से 27.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

13) गाडी क्रमांक – 02818 डाऊन पुणे संतरागाची साप्ताहिक (प्रत्येक सोमवार) की सेवा को दिनाँक 05.04.2021 से 28.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

14) गाडी क्रमांक – 02817 अप संतरागाची-पुणे साप्ताहिक (प्रत्येक शनिवार) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021 से 28.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

15) गाड़ी क्रमांक 01033 डाउन पुणे दरभंगा साप्ताहिक (प्रत्येक बुधवार) की सेवा को दिनाँक 07.04.2021 से 30.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

16)गाड़ी क्रमांक 01034 अप दरभंगा पुणे साप्ताहिक (प्रत्येक शुक्रवार ) की सेवा को दिनाँक 09.04.2021 से 02.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

17) गाड़ी क्रमांक 01407 डाउन पुणे लखनऊ साप्ताहिक (प्रत्येक मंगलवार ) की सेवा को दिनाँक 06.04.2021 से 29.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

18) गाड़ी क्रमांक 01408 अप लखनऊ पुणे साप्ताहिक (प्रत्येक गुरुवार ) की सेवा को दिनाँक 08.04.2021 से 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

19) गाड़ी क्रमांक 02107 डाउन लोकमान्य टिळक टर्मिनस लखनऊ त्रिसाप्ताहिक (प्रत्येक सोम ,बुध ,शनि ) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021 से 30.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

20) गाड़ी क्रमांक 02108 अप लखनऊ लोकमान्य टिळक टर्मिनस त्रिसाप्ताहिक (प्रत्येक मंगल गुरु, रवि) की सेवा को दिनाँक 04.04.2021 से 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

21) गाड़ी क्रमांक 02165 डाउन लोकमान्य टिळक टर्मिनस गोरखपुर द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक गुरु,सोम ) की सेवा को दिनाँक 01.04.2021 से 28.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

22) गाड़ी क्रमांक 02166 अप गोरखपुर लोकमान्य टिळक टर्मिनस द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक शुक्र,मंगल ) की सेवा को दिनाँक 02.04.2021 से 29.06.2021 पर्यंत वाढविण्यात आला आहे.

23) गाड़ी क्रमांक 02031 डाउन पुणे गोरखपुर द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक मंगल,शनि ) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021 से 29.06.2021 तक बढ़ाया गया है।

24) गाड़ी क्रमांक 02032 अप गोरखपुर पुणे द्विसाप्ताहिक (प्रत्येक गुरु,सोम ) की सेवा को दिनाँक 05.04.2021 से 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

25) गाड़ी क्रमांक 01079 डाउन लोकमान्य टिळक टर्मिनस गोरखपुर साप्ताहिक (प्रत्येक गुरु) की सेवा को दिनाँक 01.04.2021 से 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

26) गाड़ी क्रमांक 01080 अप गोरखपुर लोकमान्य टिळक टर्मिनस साप्ताहिक (प्रत्येक शनि) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021 से 03.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

27) गाड़ी क्रमांक 01115 डाउन पुणे गोरखपुर साप्ताहिक (प्रत्येक गुरु) की सेवा को दिनाँक 01.04.2021 पासून 01.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

28) गाड़ी क्रमांक 01116 अप गोरखपुर पुणे साप्ताहिक (प्रत्येक शनि ) की सेवा को दिनाँक 03.04.2021 से 03.07.2021 तक बढ़ाया गया है।

29) गाड़ी क्रमांक 02135 डाउन पुणे मंडुआडीह साप्ताहिक (प्रत्येक सोम) की सेवा को दिनाँक 05.04.2021 से 28 .06.2021 तक बढ़ाया गया है।

30) गाड़ी क्रमांक 01116 अप मंडुआडीह पुणे साप्ताहिक (प्रत्येक बुध) की सेवा को दिनाँक 07.04.2021 से 30 .06.2021 तक बढ़ाया गया है।

आरक्षण: सभी गाड़ियाँ पूरी तरह से आरक्षित रहेगी। सुपरफास्ट विशेष ट्रेन संख्या. 02811, 02818, 01033, 01407, 02107, 02165, 02031, 01079, 01115, 02135, 02879, 02865, और 02858 के लिए बुकिंग सभी कम्प्यूटरीकृत आरक्षण केंद्रों पर और वेबसाइट http://www.irctc.co.in पर दिनांक 18.3.2021 से आरंभ होगी।

*विशेष का समय, हाल्ट और संरचना में कोई परिवर्तन नहीं है यानि कि वैसी रहेगी।

*इस विशेष ट्रेन के हाल्ट एवं विस्तृत समय के लिए कृपया http://www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या NTES ऐप डाउनलोड करें।

*इन विशेष ट्रेनों में केवल कन्फर्म यात्रियों को ही यात्रा करने की अनुमति है।

*यात्रियों को बोर्डिंग, यात्रा और गंतव्य पर यात्रा के दौरान COVID19 से संबंधित सभी मानदंडों, एसओपी का पालन करने की सलाह दी जाती है।

भुसावल मंडल

दिनांक- 17.03.2021

PR/2021/03/23

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क्या सडकोंपर केवल सरकारी वाहन ही चलाए जाने चाहिए, निजी नही?

चौक गए? अभी वाक्य पूरा नही हुवा है, “क्या रेल पटरियोंपर निजी ट्रेन नही दौड़ सकती?” यह उत्तर रेल मंत्री पीयूष गोयल का था जब उन्हें रेलवे के निजीकरण के बारे में प्रश्न किया गया था।

सरकार सड़कें बनवाती है, उसी तरह रेल पटरियोंसे रेल मार्गका भी निर्माण करवाती है। जिस तरह कुछ लोग गाँव चौपालों पर फुरसतिया बातें करतें है और उनको किसी बात पर तूल मिल जाती है तो उसे खींचते चले जाते है। ऐसी हालात में विषय का आत्मा तो भटक जाती है और चोटी, पूँछ खिंचाई चलते रहती है। अब देश मे समर्पित माल गलियारा अपना काम शुरू कर दिया है। लोको के नवनिर्माण किए जा रहे, लगभग 70% मेल/एक्सप्रेस श्रेणी की गाड़ियाँ अत्याधुनिक LHB कोचेस से चलाई जा रही है। पटरियां उच्च गति क्षमता वाली की गई है, लोको, यात्री डिब्बा स्टॉक भी उनके अनुरूप है, दूरसंचार, सिग्नलिंग भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से अनुरूप किए गए है तब भारतीय रेल अपने संसाधनो के साथ व्यावसायिक क्यों नही हो सकती? निजी लोग इस क्षेत्रमे आने से न सिर्फ भारतीय रेल को इसका फायदा मिलेगा बल्कि यात्रिओंको भी बेहतर और उच्चतम सेवाओंका अनुभव लेने का मौका मिलेगा। भारतीय रेल के तंत्रज्ञ अपनी सेवाओंमें नई तकनीक का इस्तेमाल करना सीख सकेंगे।

यह संकल्पना ठीक आईपीएल की तरह है। आईपीएल क्रिकेट लीग में कई विदेशी खिलाड़ियों के साथ हमारे देश के युवा खिलाड़ी खेलते है। उनकी फिटनेस, उनकी तकनीक, उनके खेलने का अंदाज इससे हमारे ख़िलाड़ियोंको अपने आप सीखने को मिलता है। इस आईपीएल लीग ने हमारे भारतीय टीम के कई ख़िलाड़ियोंको निखारा है, नई नई खोज का फायदा हमारी टीम को हुवा है। सीमित वर्षोंके लिए निजी गाड़ियोंका भारतीय रेल में अन्तर्भूत होना भारतीय रेल के कर्मियोंको उच्च, नई तकनीक और आंतरराष्ट्रीय दर्जे की वणिज्यिकता के नए पाठ जरूर पढवायगा। देश मे आंतरराष्ट्रीय श्रेणी का रेल परिचालन हो यह निजी क्षेत्रों को यहां लाने का प्रमुख उद्देश्य है।

अब भ्रमित करने वाले लोग और उनकी बातोंसे भ्रमित होने वाले लोग ऐसी बाते सोशल मीडिया में उछालते है, भारतीय रेल के 150 मार्ग बिक जाएंगे, 50 स्टेशन बिक जाएंगे तब उनके लिए वह सड़क मार्ग वाला उदाहरण देना लाज़मी बन जाता है। भारतीय रेलवे यह आश्वासित करता है, कोई भी पुरानी गाड़ियाँ बन्द न करते हुए नई 150 निजी गाड़ियाँ चलेंगी, अतः यात्री अपनी जरूरत के अनुसार अपनी यात्रा करने के लिए अपना वाहन चुन सकता है। जिस तरह सड़कों पर ऑटो से लेकर आलीशान टैक्सियां उपलब्ध रहती है और यात्री अपनी जरूरत के हिसाब से उन्हें चुनता है यह ठीक उसी तरह की संकल्पना है।

अब समझना आपको है की अपनी भलाई किस चीज में है, प्रोफेशनल बन कर जमानेके साथ चलने में समझदारी है या कुछ लोगोंकी बातोंसे भ्रमित होकर वही ढाक के तीन पात करते बैठे रहने में।

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पूर्वोत्तर रेलवे ने अपनी 26 जोड़ी, दक्षिण रेलवे ने गाड़ियोंके परिचालन अवधि का विस्तार किया

चलिए मित्रों, खबरे खबरे और ख़बरोंकी भी खबरें। पूर्वोत्तर रेलवे ने अपनी 26 जोड़ी याने 52 गाड़ियोंकी परिचालन अवधि बढाए जाने की घोषणा की है। सूची निम्नलिखित है, यात्रिओंको देखने, जानने और समझने की बात यह है, 26 में से 18 जोड़ी गाड़ियाँ पूजा विशेष और बची 8 जोड़ी विशेष गाड़ियाँ है।

हम फिरसे यात्रीगण को इन दो विशेष गाड़ियोंका फर्क समझाते है। चूँकि कोई भी नियमित गाड़ी का परिचालन नही किया जा रहा है और पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर केवल दो ही प्रकार की गाड़ियाँ चल रही है। एक विशेष और दूसरी पूजा कहिए या त्यौहार कहिए, विशेष। पूजा / त्यौहार / फेस्टिवल विशेष की रेल यात्रा महंगी होती है। 1.3 गुना यात्री किराया चार्ज किया जाता है और दूसरा दूरी निर्बंध, डिस्टेन्स रिस्ट्रिक्शन याने यात्रा टिकट 500 किलोमीटर दूरी का चार्ज किया जाएगा, चाहे यात्रा 100 किलोमीटर की ही क्यों न हो।

खैर, आज की यात्री रेल गाड़ियोंकी स्थिति यह है की लगभग 80% से ज्यादा गाड़ियाँ चलाई जा रही है। जिसमे महाराष्ट्र राज्य को छोड दिया जाता है, जो की बहुतांश मध्य रेलवे का कार्यक्षेत्र आता है, सभी क्षेत्रीय रेलवे में कम अंतर की, डेमू, मेमू, सवारी गाड़ियाँ चला दी गयी है, तो कम दूरी के यात्रिओंको, लम्बी दूरी की पूजा विशेष की महंगी यात्रा करने की आवश्यकता नही रह जाती है।

दक्षिण रेलवे की पूजा विशेष का परिचालन अवधि बढ़ा