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कमर्शियल (?) डिपार्टमेंट

किसी भी कार्यकारी सरकारी या गैरसरकारी संस्थान में कई सारे विभाग कार्यरत होते है। हम उदाहरण के तौर पर रेल्वेज को लेते है क्योंकि हम दूसरी बात तो करते नही ना। तो, रेलवे इतनी बड़ी संस्था है जिसमे प्रबंधन, परिचालन, निर्माण, रखरखाव, ऐसे कई विभाग है, जो अपने अपने कार्य करते रहते है और जनता से जुड़ने के लिए पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट होता है। जो आम जनता और संस्था के बीच पुल का काम करता है। संस्था की जो भी उपलब्धि जनता के लिए है उसका जनता को ब्यौरा देना, प्रसिद्धि देना, जनता की संस्था से कोई शिकायत हो तो उसे सम्बंधित विभाग तक पोहचाना यह इस विभाग का प्रमुख कार्य होता है। जनता को उस संस्था से, या उसके किसी विभाग से किसी भी तरह से संपर्क करना हो तो इसी विभाग के जरिए सम्पर्क किया जाता है।

अब आप सोचते होंगे, क्या जनता को संस्थासे सीधा काम करना है तो पब्लिक रिलेशन याने जन सम्पर्क विभाग केवल यही एक ही मार्ग है? जी बिल्कुल सही है, लेकिन रुकिए संस्था का एक विभाग और है जो सीधे जनता के बीच मे रहकर संस्था का काम करते रहता है और वह है वाणिज्यिक विभाग। कमर्शियल डिपार्टमेंट याने वाणिज्य विभाग यह उस संस्था को न सिर्फ जनता बल्कि उद्योग, व्यापार जगत से भी जोड़ने का काम करता है। संस्था के कायदे, नियम को संस्था के हित मे जनता के लिए किस तरह से अमल में लाना है यह कमर्शियल डिपार्टमेंट के अख्तियार में आता है।

रूल्स जो होते है वह संस्था का आस्थापना विभाग बनाता है, उन रूल्स का सही तरीकेसे पालन किया जा रहा है या नही इस पर देखरेख रखने का काम एडमिनिस्ट्रेशन विभाग का है और इन रूल्स, कायदोंको अमल में लाकर संस्था का काम करना यह कमर्शियल डिपार्टमेंट का काम होता है। अब तक इस विभाग की महत्ता आप के समझ मे आ गयी होगी। यह वो विभाग है, जो संस्था के पूरे कायदे कानून को जानता है और उसके अधीन रहकर जनता की हर वह जरूरत और अपेक्षाओंको नियमोंके जामा पहनाकर उसे पूरा करनेका प्रयत्न करता है।

रेलवे में यह दोनोंही विभाग है। पब्लिक रिलेशन और कमर्शियल। वाणिज्य विभाग के अलावा किसी भी अन्य विभाग से आप सीधा सम्पर्क नही कर सकते और यदि करना हो तो आपको PRO याने पब्लिक रिलेशन के जरिए जाना होगा। लेकिन वाणिज्य विभाग सीधा जनता के लिए खुला है आप का संस्था या संस्था के नुमाइंदों से सीधा संपर्क। सबसे पहले आपको रेलवे के कमर्शियल विभाग की व्याप्ति बताते है। रेलवे की टिकट बुकिंग, आरक्षण, पार्सल, माल ढुलाई याने गुड्स ट्रैफिक, यात्री यातायात याने पैसेंजर ट्रैफिक, रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर के स्टॉल्स यह सारी व्यवस्था वाणिज्य विभाग के तहत आती है। हालांकी इस हाथी समान बड़े विभाग में और भी कई उपविभाग भी है, जिसमे पर्यटन, खानपान और आरक्षण के लिए रेलवे ने अपना एक अलगसे आर्म याने विभाग बनाया है उसका नाम है आई आर सी टी सी। इंडियन रेल्वेज कैटरिंग एन्ड टूरिजम कॉर्पोरेशन। रेल्वेके ऑनलाइन आरक्षण याने ई- टिकट, पर्यटन विशेष गाड़ियाँ, प्लेटफॉर्म्स के सभी खानपान और बाकी सब स्टॉल्स इसी निगम के तहत आते है।

IRCTC रेलवे की वो इकाई है जो शुद्ध व्यवसायिक तरीकेसे अपने व्यवहार करती है। रेलवे के अपने खान- पान के दरोमें और IRCTC के दरोंमें जमीन आसमान का फर्क क्यों रहता है, यह मेरी समझ मे आजतक नही आया। नागपुर के एक नम्बर प्लेटफार्म पर रेलवे और IRCTC की कैंटीन बिल्कुल आजुबाजुमे है। रेलवे कैंटीन में चाय ₹5/- में औऱ बगल की IRCTC कैंटीन में ₹20/- में और यकीन मानिए दोनोंकी टेस्ट मे रत्तीभर का फर्क नही, बिल्कुल एक जैसी। और क्या कहूँ, ऐसी चाय जो पीना किसी सजा से कम नही, भगवान किसी जन्मजन्मांतर के दुश्मन को न पिलाए। खैर छोड़िए।

हमारा विषय आज कमर्शियल डिपार्टमेंट था। जहाँ पब्लिक कन्सर्न और कॉटेक्ट सीधे होता है वहा कई सारी बातें उठती है। आरक्षण, पार्सल, टिकट चेकिंग यह सभी वाणिज्य विभाग के तहत आते है, हालांकि पूरा ही पब्लिक कन्सर्न होने के बावजूद इन मे से किसी दफ्तर में पब्लिक फोन, या ऐसा कोई टेलीफोन नही होता की जनता इन लोगोंसे सीधा सम्पर्क कर सके, लेकिन फिर भी सम्पर्क के अपने तरीके होते है जो कुछ लोगोंकी विशिष्टता होती है। यह वही लोग होते है जो आपको PRS काउंटर से कन्फर्म टिकट दिलाते है, आपका पार्सल किसी खास गाड़ी में चढ़वा देते है, या RAC क्लियर नही है यह स्थिति में भी आपकी बर्थ की व्यवस्था कर सकते है। यह किस तरह होता है, ना पूछिए जी कुछ बातें कमर्शियल भी होती है न। वैसे किस्से तो हमारे पास बहोत है और आपके साथ भी घटित हुए होंगे ही लेकिन किस्से और कभी।

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कृपया सम्भ्रम ना फैलाए।

दिनांक 14 को लॉक डाउन और उन्नीस दिन के लिए याने 3 मई तक बढ़ाए जाने की घोषणा की गई। दोपहर तक रेल प्रशासन का भी डिक्लेरेशन आ गया, कोई भी यात्री ट्रेन 14 अप्रेल रात 12 से लेकर 03 मई के रात 12 बजे तक नही चलाई जाएगी।

यह बात सभी रेल यात्रिओंको अच्छे से समझ आ गयी की 03 मई तक कोई भी यात्री गाड़ी नही चलेगी औऱ फिर से TRP वाला ट्रेंड शुरू हो गया। अभी तो गाड़ियाँ नही चलेगी, मगर जब चलेगी तब यात्रिओंको 4 घंटे पहले आना पड़ेगा, सोशल डिस्टेनसिंग से प्लेटफार्म पर एण्ट्री मिलेगी, सैनिटाइजर लगवाएंगे, स्क्रीनिंग करेंगे, यात्रिओंकी लिस्टिंग करेंगे। हे भगवान!

मित्रों, इसके साथ एक व्हिडियो भी जोड़ा गया है, व्हिडियो के साथ उपरोक्त कमेंट्री चलती है। आप को बता दूं, ऐसा पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्यालय स्टेशन जबलपुर जहाँ पर यह सब शुरू है ऐसा व्हिडियो में बताया गया है, किसी भी अधिकृत ट्वीट, न्यूज या परीपत्रक में नही दिया गया है। दरअसल 5 अप्रेल को जबलपुर डि आर एम श्री संजीव विश्वास ने स्टेशन के सफाई कर्मी स्टाफ़ का मनोबल बढ़ाने हेतु एक विजिट ली थी, उन्हें संक्रमण से बचने के लिए क्या क्या करना है, सुरक्षितता का पालन कैसे करना है यह बताया था। उसके सारे फोटो ट्वीटर पर उपलब्ध है और तभी किसीने यह व्हिडियो बनाया होगा और उसे यात्रिओंका सन्दर्भ दे कर अपनी मनगढन्त कमेंटरी जोड़ कर वायरल कर दिया।

यह थी हक़ीकत DRM का सफाई कर्मियोंको सम्बोधन

हम आपको बार बार यही बात बता रहे है, जब तक आपको अधिकृत सूचना नही मिलती तब तक आप उसपर विश्वास मत कीजिए, और ना ही ऐसी लिंक किसी को फारवर्ड करें। कई बार आधी अधूरी जानकारी, जानकारी न होने से भी खतरनाक साबित होती है।

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कहानी झुक झुक रेल गाड़ी की

16 अप्रेल यह तारीख भारतीय रेल के इतिहास में नींव का पत्थर है। भारतीय रेलवे दिवस।

आज ही के दिन, सन 1853 मे भारत मे पहली यात्री रेल गाड़ी चली थी। स्थान था बोरीबन्दर जो समय जाते विक्टोरिया टर्मिनस बना और आज छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस नाम से जाना जाता है। यह पहली यात्री रेल गाड़ी बोरीबन्दर से ठाणे तक जाने वाली थी। वक्त था दोपहर के 3:30 बजे का। 14 डिब्बों की उस रेल गाड़ी में तीन भाँप से चलने वाले लोको याने इन्जिन लगे हुए थे, उनके नाम थे साहिब, सिन्ध और सुलतान।

तब भारतीय रेल याने आजकी IR तो थी नही, GIPR ग्रेट इंडियन पेनेन्झुला रेलवे नामक ब्रिटिश कम्पनी इस रेलवे की मालिक थी। इस गाड़ी को कुल 21 मील, तब अन्तर गिनने का मानक मील होता था और किलोमीटर के हिसाब से 34 km अन्तर काटना था। 400 सवारियों के साथ गाड़ी जब बोरीबन्दर से चलने को हुई तो 21 तोपोंकी सलामी दी गयी और इस गाड़ी के उद्धाटन का श्रेय तत्कालीन गवर्नर लार्ड डलहौजी को दिया गया। मबई से ठाणे की इस पहली यादगार रेल यात्रा को पूरे 57 मिनट लगे।

GIPR का आगे विस्तार जारी रहा। यह रेल कम्पनी भारत मे राज करनेवाली ईस्ट इंडिया कम्पनी से कॉन्ट्रैक्ट कर यहां भारतसे कपास, कृषि उत्पाद, लौह अयस्क और खनिज की ढुलाई के लिए लायी गयी थी। उस वक्त कई सारी ब्रिटिश कम्पनियों को भारत मे कॉन्ट्रैक्ट पर रेल निर्माण के लिए लाया गया था। 1854 में कल्याण, 1856 में कम्पुल्ली याने खोपोली, 1858 में पूना याने पुणे, 1861 में कसारा, 1865 में इगतपुरा याने इगतपुरी, 1868/70 में GIPR शोलापुर याने सोलापुर और मद्रास याने आज का चेन्नई से मद्रास रेलवे कम्पनी मद्रास से रायचूर होते हुए सोलापुर में जोड़ी गयी।

1863 में भुसावल, 1866 में खण्डवा, 1867 में अमरावती, 1881 में नागपुर जो आगे 1925 में कोलकाता से जोड़ा गया। लेकिन हावड़ा से एक रेल लाइन का काम इलाहाबाद (प्रयागराज), जबलपुर होते हुए शुरू था जो 1870 में पूरा हुवा और इस तरह मुम्बई से कोलकाता वाया जबलपुर, इलाहाबाद लाइन शुरू हुई।

आपको यह जानने की उत्सुकता जरूर होगी की पुरानी रेल गाड़ियाँ जो आज भी चल रही है। ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस यह गाड़ी 1929 में तत्कालीन उत्तर पश्चिम सीमांत प्रान्त के मुख्यालय पेशावर (अभी पाकिस्तान में) से मंगलौर तब मद्रास प्रेसिडेंसी के बीच चलती थी अब भी यह गाड़ी है जो नई दिल्ली से चेन्नई के बीच इसी नाम से चलती है।

इससे भी पहले याने 1866 में हावड़ा से शिमला कालका मेल चलती थी जो तब केवल अंग्रेज अफसर और वॉयसराय के लिए उनकी राजधानी कोलकाता से ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला के लिए चलती थी। हावड़ा से कालका तक बड़ी लाइन और आगे कालका से शिमला छोटी लाइन ऐसे सफर होता था, जो आज भी उसी नाम, कालका मेल से चल रहा है।

1912 मे बेलार्ड पियर से पेशावर के बीच द पंजाब लिमिटेड तब की सुपरफास्ट गाड़ी जिसका एवरेज स्पीड 56 kmph था और 2542 km का सफर 46 घंटे में तय करती थी जो आज मुम्बई से फिरोजपुर पंजाब मेल के नाम से चलती है। इसमें एक मजे की बात बताऊँ, यह गाड़ी GIPR कम्पनी की थी इन्ही स्टेशनोके बीच मुम्बई की दूसरी कम्पनी BB&CI बॉम्बे बरोड़ा एन्ड सेंट्रल इंडिया रेलवे ने अपनी एक गाड़ी शुरू कर दी उसका नाम था फ्रंटियर मेल जो 1828 में कोलाबा से पेशावर चलती थी और यदि गाड़ीमे शिप से आगे विदेश जाने वाले यात्रिओंके लिए कोलाबा से बेलार्ड पियर तक ले कर जाती थी।

BB&CI कम्पनी ने GIPR से स्पर्धा में यह गाड़ी शुरू की थी मुम्बईसे दिल्ली का उनका मार्ग बॉम्बे, बरोडा, रतलाम, मथुरा होते हुए था और अपने यात्रिओंके लिए उस जमाने मे वातानुकूलित डिब्बे की व्यवस्था भी की थी, कक्षोंको ठण्डा रखने के लिए बर्फ की लादियाँ जगह जगह स्टेशनोंसे चढ़ाई जाती थी। अभी हाल में यह गाड़ी गोल्डन टेम्पल मेल के नामसे मुम्बई से अमृतसर के बीच चल रही है।

पुरानी गाड़ियोंमे, BB&CI की कोलाबा सूरत वीकएंड एक्सप्रेस 1906 और 1937 में फ्लाईंग क्वीन और अब फ्लाईंग रानी, GIPR की मुम्बई पुणे डेक्कन क्वीन 1930 में शुरू की गई थी। इसी दौरान मद्रास रेल कम्पनी की मद्रास (चेन्नई) से सिलोन (श्रीलंका) के कोलंबो के लिए चलती थी। यह गाड़ी मद्रास से तूतीकोरिन तक रेल और आगे कोलंबो तक स्टीमर याने जल यातायात से पूरी होती थी इसके लिए शायद इसका नाम बोट मेल था। एक प्रतिष्ठित गाड़ी GIPR की और भी थी द इम्पेरियल इंडियन मेल जो बेलार्ड पियर (मुम्बई ) से कोलकाता जाती थी। जिसमे केवल 32 यात्री होते थे जो प्रथम श्रेणी में बैठते थे, बाकी उनके नौकरोंके लिए अलग व्यवस्था होती थी। यह गाड़ी अब मुम्बई हावड़ा कोलकाता मेल वाया इलाहाबाद है।

इन गाड़ियोंके बाद धीरे धीरे गाड़ियाँ बढ़ती गयी, रेलवे का विस्तार भी बढ़ गया। आज दुनिया मे चौथी सबसे बड़ी रेलवे भारतीय रेल है और आठवीं सबसे बड़ी रोजगार देने वाली संस्था है, जिसकी 67368 km रेल मार्ग है और ऐसा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है जो किसी एक संचालक रेल मंत्रालय के आधीन है।

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आज से भारतीय रेल पर सारी ट्रेनोंकी टिकट बुकिंग अगली सूचना तक रद्द।

अब तक यह चल रहा था, 15 अप्रेल से आगे सारी टिकटें IRCTC के ई पोर्टल पर बुक की जा रही थी, जिसे 3 मई तक लॉक डाउन की घोषणा के बाद 3 मई तक की सारी गाड़ियाँ रद्द कर रिफण्ड दिए जाने की सूचना दे दी गयी है।

इसमें एक बात और जान लीजिए, 3 मई के बाद भी IRCTC के ई पोर्टल पर कोई भी टिकट बुकिंग भी अगली सूचना दिए जाने तक स्थगित की गई है। यानी अब सारी अटकलोंको भी आराम दे दिया गया है।

अब बात करते है रिफण्डस की। आपके टिकट 3 मई की तारीख तक के है और ई टिकट है तो आपको कुछ भी नही करना है, गाड़ियाँ रद्द हो चुकी है और आपका रिफण्ड रास्तेमें है जो कभी भी आपके अकाउंट में दस्तक दे देगा। यदि PRS काउंटर टिकट है तो आप SMS के जरिए 139 रेलवे की हेल्पलाइन पर फोन करके, जब भी आपको सूचना आ जाए तब कैंसल कर लीजिए, काऊंटर्स ओपन किए जाने पर अपना कैश ले लीजिएगा।

एक विशेष बात और है, यदि आपकी टिकट 3 मई के बाद की है और गाड़ी कैंसल की कोई सूचना अभी जारी नही की गई है मगर आप अपनी रेल यात्रा नही करना चाहते तो भी आपके टिकट कैसल करने पर आपको पूरा रिफण्ड दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

निश्चिंत रहिए, घर पर ही रहिए, आगे रेल यात्रा करनी है या नही यह सुनिश्चित कर लीजिए और फिर घर बैठे बैठे ही अपने टिकट रद्दीकरण का काम कर लीजिए। निम्नलिखित परीपत्रक पढ़ लीजिए, उसमे स्पष्ट किया गया है।

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कल क्या हो, किसने जाना?

लॉक डाउन की घोषित मियाद पूरी होने को बस चन्द घंटे बचे है। कल सुबह 10 बजे हमारे प्रधानमंत्री इस विषय को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा करनेवाले है।

मित्रों, आप सभी लोगोंके मन मे हलचल मची हुई है, लॉक डाउन बढ़ेगा, खत्म होगा या आंशिक स्वरूप में रहेगा? रेलगाड़ियोंका क्या होगा, शुरू हो जाएगी या अभी नही होगी? नही हुई तो फिर कब होगी और शुरू हो गयी तो कुछ ही गाड़ियाँ चलेगी? गाडीके अन्दर कितने यात्री यात्रा कर पाएंगे? सवाल, सवाल और सवाल। यह सब ढेर सारे सवाल और तमाम उल्टी सीधी बातें हमारे चैनलों, वेबसाइटस और वॉट्सऐप पर चर्चाओं आम लोगोंके मन मे निर्माण कर दिए है।

सबसे पहले आप सोचिए, यदि आपको पता चलता है की 15 तारीख से गाड़ियाँ शुरू होने जा रही है, तो आपका क्या प्लान है? घूमने जाना है? रिश्तेदारों के यहाँ जाना है या व्यापार व्यवसाय करने निकल पड़ना है? हमारे ख्याल से कई सारे कारण है जो आपको रेल में यात्रा करने के लिए मजबूर कर रहे हो ऐसे वास्तविकता है ही नही। समझिए की लॉकडाउन खत्म किया जाता है तो भी ऐसा कोई कारण नही की आप रेल में बैठने दौड़ पड़ेंगे। कारखाने, दफ़्तर शुरू किए गए तो भी व्यापार व्यवसाइयों का काम फोन पर होता रहेगा।

सबसे पहले जरूरत होगी मजदूर, श्रमिक, वेतनभोगी कर्मचारियोंकी और इन्हे जरूरत होगी सबअर्बन गाड़ियोंकी या शार्ट डिस्टेन्स चलनेवाली गाड़ियोंकी। अब इन लोगोंका वर्गीकरण कर के, जरूरत के हिसाब से, परिचयपत्र के साथ, इनको रेलोंमें एन्ट्री दी जा सकती है। जितने भी कर्मचारी, मजदूर, श्रमिक है उनके लिए उनके कारखानों, दफ्तरोंसे सम्मतिपत्र के आधार पर अनुमतिपत्र जारी कर उंन्हे रेल की पास के साथ यात्रा करने दी जा सकती है। साथ ही यही व्यवस्था जरूरतमंद यात्रिओंके लिए भी की जा सकती है। याने अपनी यात्रा करने के उचित कारण हो तो ही रेल में यात्रा करनी चाहिए।

कुछ दिनोंके बाद स्थानीय यातायात अनुशासन में चलती देख लम्बी दूरी की गाड़ियाँ भी स्पेशल शेड्यूल के साथ शुरू कराई जा सकती है। इन गाड़ियोंकी घोषणा उनके विशेष शेड्यूल से केवल 24 से 48 घंटे पहले की जानी चाहिए। गाड़ी में यात्रा करने के लिए यात्री को भारत सरकारका “आरोग्यसेतु” एप्लिकेशन, रेल यात्रा की विशेष अनुमतिपत्र जो किसी राजपत्रित अधिकार में जारी किया गया हो के साथ ही आवश्यक किया जाना चाहिए। खैर, हमारे विचार है और इसके पीछे आप सभी के अच्छे स्वास्थ्य की चिंता है।

लॉकडाउन हटाया गया या आँशिंक स्वरूप में रहा तो भी संक्रमण रोकने के लिए जितने भी नियम और एहतियात हमको बरतने है उनको आगे भी कायम रखते हुए ही सब कामकाज, ड्यूटी, व्यवसाय, व्यापार हमे करना होगा। घरसे निकलना है तो बिना उचित कारण के नही निकलना है और निकलना ही पड़े तो यात्रा चाहे रिक्शा, टैक्सी, बस या रेलगाड़ी, हवाईजहाज की क्यों न हो पूरा पूरा संयम, सावधानी सुरक्षा और कड़ा अनुशासन ही हमे संक्रमण से बचाए रख सकता है इसका ध्यान हमे रखना है।

अब हम यह सोचते है, कितना सुन्दर दृश्य होगा की हमारे देश के सारे पहिए चल पड़ेंगे। फिर वह रेल के हो या बसोंके, टैक्सी के हो या कारखानोंकी मशीनोंके। सारे भारतीय मजदूर, श्रमिक, कर्मचारी, व्यवसायी, व्यापारी, अफ़सर सभी अपनी अपनी सुरक्षा कायम रखते हुए, एकदूसरे को सहकार्य करते हुए अनुशासन कायम रख अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे है।