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बिलासपुर – कटनी खण्ड पर, नौरोजाबाद स्टेशनपर दस दिनोंका रेल ब्लॉक; 24 गाड़ियोंके फेरे रद्द, दो मार्ग परिवर्तन कर चलेंगी।

15 नवम्बर 2024, शुक्रवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा, विक्रम संवत 2081

दपुमरे SECR रेल क्षेत्र में रेल तिहरीकरण हेतु नौरोजाबाद स्टेशन पर करीबन दस दिनोंके रेल ब्लॉक के चलते निम्नलिखित 18 मेल/एक्सप्रेस एवं 6 सवारी विशेष गाड़ियोंके फेरे 22 नवम्बर 2024 से 02 दिसम्बर 2024 तक रद्द किए जा रहे है।

साथ ही 15231/32 बरौनी गोंदिया बरौनी प्रतिदिन एक्सप्रेस JCO दिनांक 23 से 29 नवम्बर 2024 तक अपने नियमित मार्ग बरौनी, कटनी, उसलापुर गोंदिया की जगह बरौनी, कटनी, जबलपुर, नैनपुर, बालाघाट गोंदिया होकर चलाई जाएगी।

रद्द गाड़ियोंमें 18234/33 बिलासपुर इन्दौर बिलासपुर नर्मदा एक्सप्रेस, 18236/35 बिलासपुर भोपाल बिलासपुर एक्सप्रेस, 11265/66 जबलपुर अम्बिकापुर जबलपुर एक्सप्रेस, 18247/48 बिलासपुर रीवा बिलासपुर एक्सप्रेस, 11751/52 रीवा चिरिमिरी रीवा त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस, 12535/36 रायपुर लखनऊ रायपुर द्विसाप्ताहिक गरीबरथ, 22867/68 दुर्ग निजामुद्दीन दुर्ग द्विसाप्ताहिक हमसफ़र एक्सप्रेस, 18203/04 दुर्ग कानपुर दुर्ग द्विसाप्ताहिक बेतवा एक्सप्रेस, 18213/14 दुर्ग अजमेर दुर्ग साप्ताहिक यह मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ रद्द रहेंगी। सवारी गाड़ियोंमे 08269/70 चिरिमिरी चाँदीला रोड चिरिमिरी, 05755/56 चिरिमिरी अनूपपुर चिरिमिरी, 06617/18 चिरिमिरी कटनी चिरिमिरी गाड़ियाँ रद्द रहेंगी।

यात्रीगण से अनुरोध है, उक्त रेल मार्ग पर रेल यात्रा का नियोजन तद्नुसार करें।

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यात्री किरायोंके बढ़ते घाटे से रेल विभाग परेशान ; निजात पाने के लिए अपनी कम अन्तर की गाड़ियाँ राज्य सरकार को सौप सकता है।

13 नवम्बर 2024, बुधवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी, विक्रम संवत 2081

प्राप्त जानकारियोंके अनुसार रेल विभाग अब यात्री किरायोंके सुधार पर लगनेवाले राजकीय अडंगोंपर गम्भीरता से विचार कर रहा है। फ़िलहाल रेल विभाग अपने प्रत्येक टिकट पर ‘छप्पन प्रतिशत रियायती किरायोंका’ दुखड़ा छापता है।

संक्रमण काल के बाद रेल प्रशासन ने विद्यार्थियों, मरीजों और दिव्यांग व्यक्तियों को दी जानेवाली किरायों की छूट को छोड़ बाकी सभी तरह की किराया रियायत कड़ाई के साथ बन्द कर दी है। रेल की सबसे सस्ती, सवारी गाड़ियोंके किरायोंमे भी बड़ा उलट फेर किया गया था। सब सवारी गाड़ियोंके गाड़ी क्रमांक में ‘0’ टैग लगाकर उन्हें विशेष गाड़ियोंकी श्रेणी में रखकर मेल/एक्सप्रेस के किराए में चलाने का एक असफल प्रयोग भी किया गया मगर राजनीतिक दबाव के चलते उन में से कई गाड़ियाँ फिर सवारी रूप और किरायोंमे लौटाई गई। कुछ नियमित मेल/एक्सप्रेस श्रेणियों में रखने में रेल विभाग सफल रहा।

अब एक और प्रयोग की ओर रेल विभाग बढ़ रहा है। रेल विभाग की तमाम कम अन्तर में चलनेवाली गाड़ियाँ, उपनगरीय रेल, करीबन 200 किलोमीटर के भीतर चलनेवाली डेमू/मेमू गाड़ियाँ जो फिलहाल सवारी श्रेणियों में चल रही है, उन्हें राज्य सरकारों के हवाले करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। यही गाड़ियाँ रेल विभाग को खल रही है और हमेशा रेल बजट में निगेटिव उत्पन्न के पाले में रहती है। एक सोच के अनुसार उपरोक्त गाड़ियोंके परिचालन को अपने पास रख सारे वाणिज्यिक कार्य राज्य सरकार के हवाले किए जाएंगे। कुछ राज्य में राज्य सरकारें अपना परिवहन चलाती है अतः इस तरह की कार्यवाही से वह अवगत है। इन गाड़ियोंके किराए, स्टोपेजेस और फेरे का निर्धारण राज्य सरकार कर सकेगी। उससे मिलने वाली वाणिज्यिक और ग़ैरवाणिज्यिक आय भी वहीं अर्जित करेंगी। रेल विभाग उनसे ऑपरेटिंग शुल्क लिया करेंगी।

इस तरह की कार्यवाही में यात्रिओंके पाले में क्या पड़नेवाला है, यह समझने का प्रयत्न करते है। सबसे पहले किराए स्थानीय परिवहनों के स्तर पर अर्थात दुगुने, तिगुने बढ़ सकते है। रेल परिचालन में पहले ही इन गाड़ियोंको (उपनगरीय छोड़कर) दुय्यम प्राथमिकता थी, इस निर्णय के बाद और भी स्तर गिर सकता है। स्थानीय राजनयिकों की दखलंदाजी बढ़ सकती है। यह यात्रिओंके होनेवाले नुकसान की बातें है मगर कुछ बातें यात्री हित की भी हो सकती है। गाड़ियोंके फेरे, समयसारणी और स्टोपेजेस के निर्णय, स्थानीय जरूरतोंके अनुसार तीव्र गति से लिए जाएंगे। हालाँकि अन्तिम निर्णय रेल विभाग ही लेगा चूँकि रेल संसाधन वहीं के वहीं है, राज्य सरकारों की गाड़ियाँ कोई अलग पटरी या अलग स्टेशन, प्लेटफॉर्म पर थोड़े ही जानी है?

एक विचार यह भी है, जिस तरह रेल मंत्रालय ने भारतीय रेल के संसाधन के तत्त्वों पर गठित नौ क्षेत्रीय कार्यालयोंको राज्यवार तत्व पर पुनर्रचना कर सोलह किया उससे आए दिन किसी न किसी क्षेत्र से अपना अलग मण्डल या अलग क्षेत्रीय कार्यालय बनाने की मांग उठने लगी है। अखण्ड भारतीय रेल इस निर्णय से राज्य रेल की श्रेणी की ओर जाने लगी है। यदि स्थानिय राज्य सरकारों को रेल विभाग अपने वाणिज्यिक काम बाँट देती है तो इसका और कितना बुरा असर रेल के केन्द्रीय परिचालन एवं प्रबंधन पर पड़ेगा यह सोचने की बात रहेगी।

कुल मिलाकर रेल विभाग किराया बढ़ाने का ठीकरा राज्य सरकारों पर मढ़ने की कवायद करने की सोच रहा है। यात्री किरायोंके जरिए ज्यादा उत्पन्न का घी सीधी उंगली से निकालना सम्भव नही हो पा रहा इसलिए राज्य प्रशासन को बीचमे लाकर उंगली टेढ़ी की जाने की सोच है।

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तौबा करें इन विशेष गाड़ियोंसे..

12 नवम्बर 2024, मंगलवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल त्यौहारों, छुट्टियों में अमूमन सभी व्यस्त रेल मार्गोंपर यात्रिओंकी भीड़ देखते हुए विशेष गाड़ियोंका संचालन करती है। रेल प्रशासन के नियमानुसार सभी विशेष यात्री गाड़ियोंमे अतिरिक्त किराया दर लागू रहता है। यह अतिरिक्त किराया दर तत्काल रेट से लेकर किलोमीटर रिस्ट्रिक्शन्स तक हो सकता है। किलोमीटर रिस्ट्रक्शन्स मतलब कम अन्तर के यात्री को भी निर्धारित अन्तर का किराया देना होगा। गौरतलब यह है, विशेष गाड़ियोंके द्वितीय साधारण वर्ग की टिकिटोंमें केवल सुपरफास्ट सरचार्ज के अलावा अतिरिक्त किरायोंका ज्यादातर दबाव नही होता।

अब मज़े की बात बताऊँ, यह विशेष गाड़ियाँ रेल विभाग के नियमित परिचालन में अतिरिक्त ही रहती है और इनकी प्राथमिकता न के बराबर रहती है। समझने की बात यह है, इनकी समयसारणी के हिसाब में यह गाड़ियाँ भले ही इनके प्रारम्भिक स्टेशन से चल दे मगर मार्ग में कहाँ और कितना रोकी जाएगी, गन्तव्य तक कब पहुँचेंगी इस पर मार्ग पर परिचालनिक दबाव कितना है इस पर निर्भर है। युँ समझिए, आपकी विशेष गाड़ी में भले ही सुपरफास्ट का टैग लगा हो, मार्ग की नियमित सवारी गाड़ी, मालगाड़ी भी उस पर भारी है। उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, विशेष गाड़ी को नही।

आजकल तो इन विशेष गाड़ियोंका परिचालन इस कदर बेपरवाह हुवा है, की उसे गंतव्य स्टेशन पर उसके रैक को लौटने के समयपर ही लिया जाता है, ताकि गन्तव्य टर्मिनल स्टेशनोंपर उस विशेष गाड़ी को ज्यादा खड़ा न करना पड़े। उदाहरण के तौर पर 01924 वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी से हड़पसर सुपरफास्ट विशेष को लीजिए, यह गाड़ी झाँसी से शनिवार शाम 19:40 को निकलकर अगले दिन रविवार शाम 16:30 को हड़पसर पहुंचना निर्धारित थी और 01923 हड़पसर झाँसी रविवार शाम 19:30 को हड़पसर से रवाना होनी थी। तो 01924 को हड़पसर में स्विकार ही लगभग शाम आठ बजे करते है और वहीं से रैक पलटाकर 01923 बनाकर रवाना कर दिया जाता है। हम यहाँपर केवल एक उदाहरण दे रहे है मगर, कोई भी विशेष गाड़ी के परिचालनिक रिकॉर्ड को खंगालकर देख लीजिए, यह परिचालनिक पद्धति तमाम विशेष गाड़ियोंमे रेल प्रशासन अपना रहा है।

रेल विभाग इन विशेष गाड़ियोंके समयपालन पर बिलकुल भी गम्भीर नही है। जब यह गाड़ियाँ मार्ग में अपनी समयसारणी से परे हो जाती है तो लगातार पिछड़ते चली जाती है और एक ऐसे दुष्टचक्र में फँसती चली जाती है की इनकी परिचालन देरी अपने निर्धारित समयसारणी से दो-तीन दिन अर्थात 48 से 72 घण्टे देरी से भी चलते दिखाई देती है। रेल विभाग इन गाड़ियोंकी इतनी बेइंतहा देरी के बावजूद, गाड़ी के रैक को अपने डिपो में वापिस भेजना, यात्रिओंकी बुकिंग कायम रहना यह इसे चलाते रखने की मजबूरी है।

अब यात्रिओंकी परेशानी समझिए। जब यात्री अपनी टिकट बुकिंग हेतु वेबसाइट खंगालता है तो उसे नियमित गाड़ियोंके साथ यह अतिरिक्त किराया वाली विशेष गाड़ियाँ भी दिखाई देती है। इनकी समयसारणी और कम स्टोपेजेस की सूची भी उसे ललचाती है, की वह इसमे बुकिंग कर सकता है। मगर जो भुक्तभोगी यात्री इस मायाजाल से गुजर चुके है, विशेष गाड़ियोंके सुगम (?) परिचालन को भुगत चुके है, इससे से तौबा ही करते है। इन गाड़ियोंमे पेंट्रीकार नही रहती। साफसफाई के लिए कर्मचारी दल मौजूद नही रहने से कोच में गंदगी रहती है। नियमित टिकट जाँच दल नही रहता। पहले तो बेडरोल भी भी उपलब्ध नही कराए जाते थे, जिसे अब सुधारा गया है, वातानुकूलित यानों में बेडरोल उपलब्ध कराए जा रहे है। जिस यात्री को गन्तव्य स्टेशन पर निर्धारित समयपर पहुँचना है, तो वह इन विशेष गाड़ियोंकी समयसारणी पर कतई विश्वास न करें या एखाद दिन का मार्जिन बचाकर अपनी टिकट बनवाए।

हम रेल प्रशासन से अनुरोध करते है, विशेष गाड़ियोंकी समयसारणी इसी प्रकार से बनवाए जिस प्रकार वह चलाई जाती है। टर्मिनल स्टेशन पर जब वह यथार्थ में पहुंचाई जाती है, वह समय उसकी समयसारणी में डाला जाए तो हर्ज ही क्या है? कमसे कम यात्री के साथ धोखा तो नही होगा। इन गाड़ियोंको व्यर्थ ही सुपरफास्ट विशेष ऐसे विशेषणों से दूर रखा जाए। कई यात्री इन विशेष गाड़ियोंके अनियमित परिचालन के अभ्यस्त हो चुके है और जो भी यात्री पहली बार इनके मायाजाल में फँसता है, दोबारा कतई इन गाड़ियोंमे यात्रा नही करता। विशेष गाड़ियोंके परिचालन को निर्धारित समयसारणी के अनुसार चलाया जाए अन्यथा यात्री इन गाड़ियोंमें बुकिंग करने से तौबा करते नज़र आएंगे।

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हुब्बाली – भगत की कोठी के बीच त्यौहार विशेष गाड़ी के 3-3 फेरे

09 नवम्बर 2024, शनिवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल में फिलहाल त्यौहार विशेष गाड़ियोंकी धूम चल रही है। खासकर उत्तरप्रदेश, बिहार के लिए अमूमन सभी महानगरों के लिए हररोज गाड़ियाँ उपलब्ध कराई जा रही है। इसी बीच इक्कादुक्का विशेष गाड़ी कोई नए मार्ग पर निकाली जाती है तो उसकी जानकारी यात्रिओंके लिए आवश्यक बन जाती है। हुब्बाली – भगत की कोठी के बीच निम्नलिखित त्यौहार विशेष के 3 -3 फेरे चलाए जा रहे है, जिसका विवरण निम्नप्रकार से है,

07311/12 हुब्बाली – भगत की कोठी (जोधपुर) हुब्बाली त्यौहार विशेष एक्सप्रेस वाया मिरज, पुणे, वसई रोड, अहमदाबाद, अबू रोड

चलने की अवधि :-

हुब्बाली से रवाना होने की तिथि 12.11.24, 19.11.24 और 26.11.24 = (3 फेरे)

भगत की कोठी से रवाना होने की तिथि :- 14.11.24, 21.11.24 और 28.11.24 = (3फेरे)

कोच संरचना : वातानुकूलित टू टियर 02, वातानुकूलित थ्री टियर 12, स्लिपर 05, जनरेटर कम लगेज वैन 02 कुल 21 LHB कोच

स्टोपेजेस : हुब्बाली, धारवाड़, लौंडा, बेलागावी, घाटप्रभा, मिरज, सांगली, कराड़, सातारा, पुणे, लोनावला, कल्याण, वसई रोड, वापी, सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, मेहसाणा, पालनपुर, अबू रोड, पिंडवाड़ा, जवाईबंध, फालना, मारवाड़ जंक्शन, पाली मारवाड़, लूणी, भगत की कोठी

समयसारणी :

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रेल प्रशासन फिर एक बार ‘छुपी किराया वृद्धि’ की ओट में..

07 नवम्बर 2024, गुरुवार, कार्तिक, शुक्ल पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2081

भारतीय रेल में पिछली किराया वृद्धि करीबन दस वर्ष पहले हुई थी। उसके बाद आज 2024 तक कोई भी सीधी रेल किराया वृद्धि नही की गई है। यह बात और है, रेल प्रशासन किराया तालिका के अलावा अन्य तरीकोंसे अतिरिक्त किराया बढ़ा ही देती है। जिसमे किराया तालिका वहीं के वहीं मगर किराए ज्यादा लागू होते है।

यह अन्य तरीके से किराया वृद्धि में उनके लिए सबसे सरल प्रक्रिया साधारण मेल/एक्सप्रेस की श्रेणी को बदल कर उसे सुपरफास्ट में बदलना या सवारी गाड़ी को एक्सप्रेस में बदलना। गौरतलब यह है, आजतक जितनी भी सवारी गाड़ियाँ एक्सप्रेस में बदली गई, उन में स्टोपेजेस उतने ही रहने के कारण एक्सप्रेस की ‘फिल’ कभी आई ही नही है।

01 जनवरी 2025 से नई समयसारणी दाखिल होने जा रही है और सुना जा रहा है, उस मे साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट एवं सवारी से मेल/एक्सप्रेस में बदलने वाली गाड़ियोंकी लम्बी सूची है। 11077/78 पुणे जम्मूतवी पुणे झेलम एक्सप्रेस, 11057/58 मुम्बई अमृतसर मुम्बई पठानकोट एक्सप्रेस, 15066/65 पनवेल गोरखपुर पनवेल, 11407/08 पुणे लखनऊ पुणे साप्ताहिक, 11079/80 लोकमान्य तिलक टर्मिनस गोरखपुर लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक, 18237/38 कोरबा अमृतसर बिलासपुर छत्तीसगढ़, 11703/04 रीवा डॉ आंबेडकर नगर रीवा त्रिसाप्ताहिक इत्यादि सुपरफास्ट गाड़ियाँ बनने की सूची में नामजद है।

साधारण मेल/एक्सप्रेस से सुपरफास्ट बनाए जानेपर इन गाड़ियोंमे साधारण श्रेणी के किरायोंमें ₹15/-, स्लिपर क्लास में ₹30/-, वातानुकूलित थ्री टियर, वातानुकूलित टू टियर, वातानुकूलित चेयर कर में ₹45/- और वातानुकूलित प्रथम में ₹75/- प्रति सवारी सीधे जुड़ जाएंगे। लम्बी दूरी के सवारियों को अनुपात में यह वृद्धि कोई ज्यादा मायने नही रखेगी मगर कम अंतर के यात्रिओंको यह अतिरिक्त किराया और वह भी किसी अलग अनुभव अर्थात एक्सप्रेस से सुपरफास्ट में यात्रा करना बहुत खलेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, भारतीय रेल का सुपरफास्ट श्रेणी का मानदंड। मात्र 55 kmph औसत से अपनी यात्रा पूर्ण करनेवाली गाड़ी सुपरफास्ट श्रेणी में ली जा सकती है। उपरोक्त दर्शाई गई गाड़ियाँ औसत 50 से 54kmph गति से अपनी यात्रा पूर्ण कर रही है। जो भी अतिरिक्त परिचालन समय दिया गया है, उसमे मामूली फेरफार किया जाए तो यह गाड़ियाँ सुपरफास्ट के मानदंड में सम्मिलित की जा सकेगी। जहाँ रेल विभाग अपने ट्रैकों की गतिसीमाएँ 130, 160 kmph कर रही है, गाड़ियोंके रैक उनके अनुकूल याने LHB युक्त किए जा रहे है और सवारी गाड़ियोंसे लेकर अमूमन सभी यात्री गाड़ियाँ 100, 130 की गति से दौड़ रही है। ऐसी अवस्था में रेल विभाग चाहे तो सुपरफास्ट का मानदंड ऊँचा कर सकती है।

एक तरफ रेल विभाग अपनी आय से जूझ रहा है और दूसरी ओर रेल यात्री किराया बढ़ाने के निर्णय को राजनीति आगे जाने नही देती। दूसरी तरफ उच्च श्रेणियों के किरायोंपर हवाई मार्ग के किरायोंका भी दबाव रहता है। हालात यह है, सुपरफास्ट चार्ज, विशेष गाड़ियोंमे अतिरिक्त किराए, सवारी गाड़ियोंका मेल/एक्सप्रेस में बदलना, आवश्यक डेमू/मेमू, इंटरसिटी गाड़ियोंके जगह महंगी प्रीमियम गाड़ियोंकी लॉन्चिंग यह सब एक तरह से किरायोंमें वॄद्धि के ही संकेत है। तत्काल, प्रीमियम तत्काल, किसी न किसी तरीके से यात्रिओंको वैसे भी अतिरिक्त किराया भुगतान करना पड़ता है। आम यात्री अब इस तरह तैयार हो चुका है, की उसे कमसे कम दस प्रतिशत किराया ज्यादा चुकाना पड़ सकें बशर्ते राजनीति न आड़ी आए।