Uncategorised

नंदादेवी जाएगी कोटा

12206 / 12205 देहरादून नई दिल्ली नंदादेवी एक्सप्रेस का मार्गविस्तार होने जा रहा है। यह गाड़ी दिनांक 25 अगस्त 2019 से देहरादून से कोटा और दिनांक 26 अगस्त से, कोटा से देहरादून की बीच चलेगी।

नंदादेवी एक्सप्रेस का मार्गविस्तार पहले ही हो जाता, मगर इंदौर और जबलपुर दोनोंही स्टेशन के बीच काफी खींचतान चली। एक वक्त तो ऐसा आया की 4 दिन इंदौर और 3 दिन जबलपुर ऐसा मार्गविस्तार लगभग तय हो गया।

परदे के पीछे क्या हलचल हुई, और नसीब कोटा वासियोंके खुले, उन्हें एक निजामुद्दीन होते हुए देहरादून के लिए एक रोजाना चलनेवाली, वातानुकूलित ट्रेन मिल गई।

हालाँकि कोटा से दिल्ली के लिए बहोत सारी गाड़ियाँ है और देहरादून के लिए भी एक सीधी डेली ट्रेन है। जबलपुर स्टेशन मोस्ट इलिजेबल केंडिडेट था। खैर, कोटा वासियोंको नए ट्रेन की बधाई।

Uncategorised

क्या आपने रेलवे में रिजर्वेशन लिया है?

अभी पिछले हफ्ते एक न्यूज पढ़ने में आई, रेलवे प्रशासन ने तय किया है, की वे जनरल सेकंड क्लास डब्बोंमे बॉयोमेट्रिक आई डी से एंट्री देंगे। इसकी शुरुवात मध्य रेल के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई से होगी और ट्रेन रहेगी, मुम्बई लखनौ पुष्पक एक्सप्रेस।

पुष्पक एक्सप्रेस, जिसमे 24 डिब्बोंमे से, केवल 4 डिब्बे अनारक्षित जनरल सेकंड क्लास रहते है। मुम्बई में, गाड़ी छूटने के समय जनरल डिब्बे में बैठने वालोंकी कतार लगती है और RPF की निगरानी में लोग चढ़ते है। फिर भी गाड़ी में चढ़ने वालोंका जो हुजुम रहता है, कई लोग इसमें चढ़ ही नही सकते और चढ़ भी गये तो बैठने की जगह नही मिल पाती। कई सारे लोग जगह सम्भाले होते है और दाम लेकर जरूरतमंदोंको बेचते है। इन्हीं एजंटोंपर नकैल कसने के लिए रेल प्रशासन ने यह कदम उठाने की सोची है।

जनरल टिकट लेते वक्त ही यात्रीका बॉयोमेट्रिक आईं डी याने हो सकता है आधार कार्ड नम्बर, टिकट पर अंकित किया जाएगा और डिब्बे के बाहर उसे कन्फर्म करके ही एंट्री दी जाएगी। जैसे भी हो, लेकिन प्रशासन का यह सराहनीय प्रयास रहेगा। इसके चलते वास्तविक यात्री और वृद्ध एवं महिला यात्रिओंको को अपनी सीट पानेमे काफी सुलभता होगी। हम ऐसे प्रयासोंका तहे दिल से स्वागत करते है।

यह तो हो गई जनरल सेकंड क्लास की बात, लेकिन आरक्षित डिब्बोंके बारेमे रेल प्रशासन क्या सोचता है, जरा यह भी तो पता चलें। आजकल हर तरह के आरक्षित डिब्बे चाहे वो AC का 2 टियर हो, 3 टियर हो, अनारक्षित यात्री, उसमे भी खास करके रोजाना अपडाउन करने वाले MST पास धारक, पुलिस और रेलवे के कर्मचारी बेख़ौफ़ यात्रा करते नज़र आते है।

जब AC की कोई पर्वा नहीं तो शयनयान स्लिपर की तो बिल्कुल ही इज्जत नही रहती। स्लिपर क्लास तो दिन की यात्रा में दूसरा जनरल डिब्बा ही बना रहता है। बेचारा आरक्षित यात्री अपना मुँह भींचके, रात होने का इंतजार करते, अपना सफर काटते रहता है। ताकी रात हो और वह अपनी बर्थ पे लेट सके।

इन सभी आरक्षित डिब्बोंके कॉरिडोर, अपडाउन वाले यात्रिओंसे डटे रहते है। जिसकी हिम्मत अंदर आ के जमने की नहीं हो पाती वह कॉरिडोर में जमा रहता है।
अंदर बैठा बेचारा यात्री टॉयलेट तो क्या यूज कर ले।

जब हर आरक्षित डिब्बा, रेल का प्रतिनिधि चाहे वह TTE हो, AC का कन्डक्टर हो, या अटेन्डेंट हो, अपनी ड्यूटी पर हाज़िर रहता है तो क्यों यह मुसिबत झेलनी पड़ती है आरक्षित यात्री को? इसमें रेल प्रशासन क्यों नही कोई कडा कदम उठाती है?

हमारा आग्रह है रेल प्रशासन से, यह रोजाना की आरक्षित यात्रिओंकी शिकायतों पर गौर करे, पैसेंजर एमिनिटीज के स्टाफ़ में बढ़ोतरी करके यात्री की सुविधा का ध्यान रखे, उनके द्वारा चुकाए गए आरक्षित टिकट के मुल्य की क़दर करे। कई यात्री अपना टिकट तत्काल और प्रीमियम तत्काल में डेढ़ गुना, दुगुना दाम देकर यात्रा करते है। क्या वह यह सोचकर घरसे निकलते है की उन्हें अपनी तमाम यात्रा किसी के साथ अपनी जगह बाँट कर पूरी करनी होगी?

रेलवे प्रशासन यह भी तो कर सकती है, की दिन की यात्रा और अपडाउन करनेवालोंके समय की गाड़ियोंमे ज्यादा सीट्स की क्षमता वाले एक्स्ट्रा कोचेस लगाए जाए ताकी दोनोंही तरह के यात्रिओंको परेशानी का सामना ना करना पड़े। जब गाड़ियोंकी क्षमताएं बढ़ाई जा रही है, 21 डिब्बोंके जगह 24 और 26 डिब्बे लगाए जा रहे है तो क्यों न हायर सीटिंग कैपिसिटी वाले डिब्बे एक्स्ट्रा कोचेस में लगाए जाए?

जो गाड़ियाँ, हर 25, 50 km पर रुकने वाली है, उन गाड़ियोंके लिए तो यह व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

Uncategorised

चाय पे चर्चा, रेल्वेकी।

दुनिया मे यूनिक याने एकमेव है, ऐसे कई स्मारकों या इमारतों को लेकर, आपने सुना होगा, लेकिन टेस्ट याने स्वाद में, सारी जगह एक जैसा होना यह केवल भारत में मुमकिन है, और वो है रेल में बिकने वाली चाय।

चाय, चाहे रेलवे के बड़ी कैंटीन की हो या छोटेसे स्टेशनपर के टी स्टॉल की या के हमारे गाडियोंके पेन्ट्री की हो, लिख लीजिए, बिलकुल एकसा स्वाद वहीं पतली, पानीदार, कम शक्कर वाली पारदर्शी चाय।

भाईसाब, गाड़ी में कभी आपने चाय वाले की “चाय ए चाय” आवाज़ सुनी है? अपने देश के बड़े बड़े रुतबेदार, रसूखदार नामोपे चलने वाली, चौधरी, महाजन, ठाकुर इन के नामोंसे, गाड़ियोंमें चाय बिकती है, और हमारा दावा है, यदि आपने ये चाय, पुरा कप, बिना मुँह बिगाड़े पी ली तो आप दुनिया के सबसे महान व्यक्ति हो और आपको फौरन ही, सबसे बड़े सहिष्णुता का नॅशनल अवार्ड देना चाहिए।

चूँकि आजकल हमारे देश मे बहोतसे लोग हम भारतिय, असहिष्णु होने का नगाड़ा पीटते रहते है, यदि वह भी ये चाय चख ले तो असहिष्णु शब्द ही भूल जाएंगे।

इस चायपुराण मे आपने अभी अनाधिकृत प्राइवेट चाय वालोंकी कर्ममहिमा का बखान तो सुना ही नही। ये लोग जो चाय पिलाते है, उसकी रेसिपी तो इस भूलोक की हो ही नही सकती। हमने सुना है, इनकी चाय, बिना शक्कर, बिना दुध और यहाँतक के बिना पत्ती की रहती है। चाय के लिए, पानी भी रेल के डिब्बे में के बेसिन से लिया जाता है। आप चौक तो नही गए? भाई, चौकना क्या सदमा भी लाज़मी है।

जब पत्ती के जगह केमिकल वाला कलर, शक्कर की जगह सैक्रीन, दूध की जगह वाइटनर और आपकी कुछ ज्यादा ही खुशनसीबी हो तो, इलायची वाला एसेंस। वाह ! क्या कहने। पटरी के पास ही कहींसे यह सब अमृत, गर्म करके, किटली या थरमासोंमें भरकर 10 रुपैय्या कप से धड़ाधड़ बिक जाता है।

क्यों भाई, पढ़के हालत पतली हो गई न?
आखिर ऐसी चाय, चना, भेल, समोसे, कचौरी बिकती कैसे है रेल में? अनाधिकृत विक्रेता किस के दम पर चलती गाड़ियोंमे अपना धंदा चलाते है? यह समझने के लिए कोई बहोत बडी तहकीकात करने की जरूरत नही है। लेकिन सबसे बड़ी गलती हमारी, हम ग्राहकोंकी है, जब तक हम इन लोगोंसे सामान खरीदते रहेंगे, तब तक यह चीजें धड़ल्ले से बिकती रहेगी।

माना, दो दो दिन गाड़ियोंमे गुजारने वाले यात्री की मजबूरी हो जाती है की वह चाय, नाश्ता गाड़ीमे खरीदते है। लेकिन हम आपसे आग्रह करते है, आप कोशिश करें, जो भी खरीदना है, अधिकृत वेंडर से ही खरीदे। रेट लिस्ट के हिसाब से ही पैसा दे और सामान में जो भी कमी मिले तो उसकी शिकायत भी जरूर करे।

रेलवे प्रशासन, यात्री की हर व्यवस्था सुचारू हो इसके लिए जी तोड़ कोशिश करती है। आजकल, 24 घंटे रेलवे की ट्वीटर सेवा पर, यात्री की हर, छोटी से छोटी शिकायत की भी सुनवाई और कारवाई तुरंत हो रही है। DRM स्तर के अधिकारी आपको तुरंत जवाब दे रहे है। @railwaysewa के ट्वीटर पर आप, आपको जो भी तकलीफ हो रही है, दर्ज कराते ही, रेलवे के अधिकारी गण, सम्बन्धित विभाग को आपकी शिकायत टैग करते है और जब तक समाधान न हो तब तक आपसे लगातार सम्पर्क में रहते है।

रही चाय पर हमारी चर्चा, वह तो जारी रहेगी। धन्यवाद।