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झाँसी डिवीजन में रेल्वे का ब्लॉक

उत्तर मध्य रेलवे के सूचना अनुसार, झाँसी मंडल अन्तर्गत रायरू रेलवे स्टेशन पर नान इंटरलाकिंग तथा नये विद्युत गुड्स शेड की स्थापना हेतु कुछ गाड़ियों का निरस्तीकरण तथा मार्ग परिवर्तन किया गया है।

निरस्तीकरण-
– 22 एवं 29 मई, 2019 को ग्वालियर से प्रस्थान करने वाली 11111 ग्वालियर-बलरामपुर सुशासन एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।

– 23 एवं 30 मई, 2019 को बलरामपुर से प्रस्थान करने वाली 11112 बलरामपुर-ग्वालियर सुशासन एक्सप्रेस निरस्त रहेगी।

मार्ग परिवर्तन-

– 23 एवं 30 मई, 2019 को गोरखपुर से प्रस्थान करने वाली 15045 गोरखपुर-ओखा एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल-टुण्डला-आगरा कैंट-झाॅसी के स्थान पर परिवर्तित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल-ऊरई-झाॅसी के रास्ते चलाई जायेगी।

19 एवं 26 मई, 2019 को ओखा से प्रस्थान करने वाली 15046 ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग झाॅसी-आगरा कैंट-टुण्डला-कानपुर सेन्ट्रल के स्थान पर परिवर्तित मार्ग झाॅसी-ऊरई-कानपुर सेन्ट्रल के रास्ते चलाई जायेगी।

17 एवं 24 मई, 2019 को सूरत से प्रस्थान करने वाली 19053 सूरत-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल-टुण्डला-आगरा कैंट-झाॅसी के स्थान पर परिवर्तित मार्ग कानपुर सेन्ट्रल-ऊरई-झाॅसी के रास्ते चलाई जायेगी।

19 एवं 26 मई, 2019 को मुजफ्फरपुर से प्रस्थान करने वाली 19054 मुजफ्फरपुर-सूरत एक्सप्रेस अपने निर्धारित मार्ग झाॅसी-आगरा कैंट – टुण्डला – कानपुर सेन्ट्रल के स्थान पर परिवर्तित मार्ग झाॅसी – ऊरई-कानपुर सेन्ट्रल के रास्ते चलाई जायेगी।

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रेल्वे की थ्रिलर स्टोरी

आज भारतीय रेलवे अपनी गती के नए नए कीर्तिमान बनाए जा रही है। सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी, गतिमान और आज की वन्दे भारत एक्सप्रेस। अब कुछ ही महीनोंकी बात है, ट्रेन 20, जो की 200 km प्रतिघंटा दौड़ने वाली गाड़ी है, आनेवाली है।

क्या आप जानते है, इन सब कीर्तिमान के पीछे कितनी मेहनत, कितनी सजगता है? अफसर, इंजीनियर, टेक्नीशियन बहोत सारे कर्मचारी अपनी दिन रात एक करते है, लेकिन इन सभी की ड्यूटी के साथ साथ एक कर्मचारी और भी है। वो है, भारतीय रेल के इन नए नए कीर्तमान के शिखरोंकी नींव का पत्थर, रेलवे में काम करनेवाला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, गैंगमैन,चाबी वाला।

आज की कहानी, इन्ही चाबी वालोंकी है। जिस तरह हर कोई ईमारत देखता है, उसकी मजबूती, बुलंदी देखता है, लेकिन नींव छुपी रह जाती है। उसी तरह यह चाबी वाला शायद ही कभी उजागर होता है।

हमारी कथा का नायक, मुश्ताक़, जिसकी उम्र कोई 37 साल की होगी। रेलवे में गैंगमैन में लग के 12 वर्ष हो गए थे। उसकी गैंग में 70 लोग थे। पटरी की देखभाल करना यह उनके गैंग की ड्यूटी थी। मुश्ताक़ का मुकर्दम बिरजू पांडे था, जो उससे 15 साल सीनियर था और PWI साहब थे लौटू पटेल। दरअसल एक गैंग का मेंबर ही सीनियर बनके मुकर्दम, और आगे जा के लोअर क्लास थ्री में PWI याने परमानैंट वे इंस्पेक्टर बनता है। काम सब का वही, रेलवे ट्रैक का मेंटेनेंस और रिपेयर करना।

मुश्ताक़ हमेशा रात की ट्रैक चेकिंग की ड्यूटी पसंद करता था। रात 10 बजेसे सुबह 6 बजे तक, कंधे पर 20 किलो का थैला, जिसमे पटरी का छोटा टुकड़ा, चाबियाँ, नट, बोल्ट, पाने और लंबे डंडे वाली हतौडी, एक टोर्च, दो सिग्नल वाली बत्तियाँ, दोनों हरी और लाल झंडियाँ, साथमे मोबाईल रेडियो याने वॉकीटोकी। इतना सारा झमेला सम्भालते रात के अँधेरोंमें, कड़कड़ाती ठंड हो या उफनती बरसात, बत्ती के या टोर्च के उजाले में, अकेले ट्रैक को जांचते 5 km जाना और उतना ही वापस आना, अपने मुकर्दम को ट्रैक का रिपोर्ट करना और फिर घर जाना, ऐसी थी ड्यूटी।

यह ऐसीही एक रात की बात है। दिसंबर की ठंड की अंधियारी वाली रात थी। मुश्ताक़ की ड्यूटी श्री क्षेत्र नागझिरी स्टेशन से शुरू होनी थी जो नदी का पुल पार करके पारस स्टेशन तक जाना था। PWI ऑफिस से अपना झोला उठाकर, बिरजू दादा को रामरमाई करके मुश्ताक़ निकला।

स्टेशन खत्म हुवा और आगे पुल शुरू होता है। हमेशा नागझिरी से पारस जाते वक्त, अप लाईन पर चेकिंग की जाती थी और आते वक्त डाउन लाइनपर याने गाड़ी सामने से आए ऐसी दिशा में पैदल चलना। मुश्ताक़ अप लाइन से पुल पार करते जा रहा था, डाउन ट्रैक से एक मालगाड़ी धड़धड़ाते पास हुई। मुश्ताक़ को पुल का थरथराने का आवाज़ थोड़ा अलग ही लगा, उसने सोचा, मालगाड़ी का रेक ज्यादा लम्बा या ओवरलोड होगा। बड़े अफसर पता नही देखते है या नही, वह बुदबुदाया।

थैला उठाकर पारस स्टेशन पहुंचा तो रात के 1 बज चुके थे। दोनोंही तरफ की गाड़ियाँ बराबर चल रही थी। उसने पारस के मास्टर से अपने डायरी में साइन करवाई और वापसी ड्यूटी के लिए निकल पड़ा। स्टेशन मास्टर ने उसे आवाज दी, “अरे मुश्ताक़, चाय तो पिता जा।” “ओ नही साबजी, जर्दा दबा लिया है।वैसे भी आज कुछ ठीक नही लग रहा। पता नही ये चौदस, अमावस मुझे भारी क्यो लगती है?” मुश्ताक़ ने बाहर मुँह निकाल, एक पीक मारी और पटरी पर बढ़ गया।

जाती आती गाड़ियोंको बत्ती दिखाए आगे बढ़ रहा था, बस नदी आ गई है, पुल पार किया की ड्यूटी पूरी। अब वह डाउन पटरी से आ रहा था। पिछेसे पारस से छूटी सेवाग्राम एक्सप्रेस साँय साँय करते उसे पास कर गई। उसके मंझे हुए कानोंमें एक खट खट की डरावनी आवाज़ आई। गाड़ी तो निकल चुकी थी। नागझिरी से पारस जाते हुए उसने अप साइड की पटरी चेक करी थी। उसका दिल बड़े जोर जोर से धड़कने लगा।

अपना डाउन ट्रैक छोड़कर वह फिरसे आवाज की तलाश में अप ट्रैक पर आया। देखता तो क्या? सन्न रह गया। धुजनी छूट गई, इतनी गहरी ठंठ में वह पसीने पसीने हो गया। पुल जहाँ ख़त्म हो रहा था, वहाँ की दोनों ही पटरी बिल्कुल छूट गई थी। ये तो सीधे सीधे पुल का गर्डर खिसकने की निशानी थी। वह सीधे पलटा, और पुल के दूसरे छोर की तरफ याने पारस स्टेशन की ओर दौड़ने लगा। जैसे ही पुल खत्म हुआ, उसके 50 मीटर आगे जाके उसने झोले से बत्ती निकली और उसमें लाल कांच चढाकर अपने हटौडे के डंडे पे टांग दी। दूसरा काम, फौरन वॉकीटोकी निकाल अपने मुकर्दम से बात शुरू की।

वॉकीटोकी याने मोबाईल रेडियो की व्यवस्था ऐसी रहती है की, 5 km के दायरे में सभी एक्टिव मोबाइल रेडियो एक दूसरे से सम्पर्क कर सकते है। मुश्ताक़ ने वॉकीटोकी को शुरू करते ही, उसकी रेंज में जितने भी मोबाईल रेडियो है, जो सब उसकी आवाज सुन रहे थे, और वो बदहवास सा चिल्ला रहा था। “ओ बिरजू दादा, पारस के मास्टर साब, नागझिरी के मास्टर साब, नदी के पुल पर, अप लाईन की दोनों पटरी चटख गई है, शायद पुल का गर्डर खिसक गया है। गाड़ियाँ रोक दीजिए। मैं ऑन ड्यूटी चाबी वाला मुश्ताक़ बोल रहा हूँ।

” अबे, क्या बक रहा है? ” वॉकीटोकी पर बिरजू चीखा, उधर पारस और नागझिरी के मास्टर की भी हालत खराब हो गई, अफ़रातफ़री मच गई। ईधर बिरजू पांडे जानता था, की मुश्ताक़ घबराहट में तो है, लेकिन ऊलजुलूल नहीं बकेगा, उसने फौरन अपने PWI लौटू पटेल को फोन लगाया, और मुश्ताक़ की बात बता दी।

बात की अहमियत जानते, लौटू पटेल, जो भुसावल में था, फौरन ही कंट्रोल ऑफिस पहुंचा। कंट्रोल ऑफिस ने तुरन्त इमरजेंसी सायरन बजवा दिए।

इधर मुकर्दम बिरजू ने भी अपना थैला उठाया और वह भी नदी की तरफ दौड़ पड़ा। नागझिरी और पारस स्टेशनोंपर इमरजेंसी लग चुकी थी। दोनोंही स्टेशन का PWI गैंग नदी की तरफ रवाना हुवा। भुसावल कंट्रोल पूरे हरकत में गया। सायरन सुनकर अफसरों के फोन शुरू हो गए। ब्रेक वैन को 15 मिनिट का वक्त दिया गया। इमरजेंसी गैंग अपने औजारों के साथ स्टेशनपर जमा होने लगी। नागपुर भुसावल ट्रैक का पूरा ट्रैफिक फौरन रोक दिया गया। जो जहाँ है उसे वहीं रोका जा रहा था।

बिरजू के साथ की गैंग, उधर पारस की गैंग पुल पर मुश्ताक़ के पास पहुंची। मुश्ताक़ अभी तक थरथरा रहा था। जब सब लोग पुल के छोर पर पहुंचे तो पटरी की हालत देखकर सन्न रह गए। दोनों पटरी टूटकर कमसे कम 4 इंच नीचे सरक गई थी। जब गर्डर की तरफ नज़र गई तो गर्डर एक छोर से लटक गया था। हालात देख सबकी रूह काँप गयी की अभी अभी सेवाग्राम एक्सप्रेस उसी पटरी से 100 की स्पीड से गई थी।

लगभग 70 मिनट में, भुसावल से ब्रेक डाउन गाड़ी नागझिरी पुल के जगह पहुंची और सभी जिम्मेदार अफसरों और टेक्नीशियन्स ने मोर्चा संभाला।

आगे उस पुल की मरम्मत का काम 2 महीने चला, लगभग 1 हफ्ते तक, उस सेक्शन की ट्रैफिक पूर्णतया बन्द थी, जिसे 1 हफ्ते बाद स्पीड रिसट्रिक्शन याने धीमे गति की पाबंदी के साथ शुरू की गई।

हमारे अननोन, अज्ञात, बिना प्रसिद्धि मिलने वाले हीरो को, मुश्ताक़ को मुम्बई के जनरल मैनेजर से अवॉर्ड घोषित किया गया।

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नए प्रस्ताव : नई गाड़ियाँ, मार्ग विस्तार, गाड़ियोंके फेरे

जुलाई 2019 में रेलवे की नई समय सारिणी आने वाली है। रेलवे का हर क्षेत्र अपने तरफसे कुछ न कुछ नए गाड़ियाँ शुरू करने, गाड़ियोंके मार्ग विस्तार और गाड़ियोंके चलने के दिनोंमें बढ़ोतरी का प्रस्ताव, रेलवे बोर्ड को भेजता है। सभी क्षेत्रीय रेल्वेसे विचार विनिमय करने के उपरांत, रेलवे बोर्ड उपरोक्त प्रस्ताव को मूर्त रूप देती है।

विश्वसनीय सुत्रोंसे हमे इस प्रस्ताव की जानकारी मिली है, जो आपके लिए प्रस्तुत है।

नई गाड़ियाँ –

1- दिल्ली जगदलपुर एक्सप्रेस, साप्ताहिक
2 – रांची जयपुर एक्सप्रेस, साप्ताहिक
3 – दिल्ली सहरसा हमसफ़र एक्सप्रेस, रोज़ाना
4 – कोलकाता हजारीबाग टाउन एक्सप्रेस, साप्ताहिक

5 – भागलपुर नई दिल्ली हमसफ़र एक्सप्रेस, रोज़ाना
6 – काठगोदाम आगरा फोर्ट एक्सप्रेस, रोजाना
7 – जम्मु बंगलूरू एक्सप्रेस, साप्ताहिक
8 – हैदराबाद अमृतसर एक्सप्रेस, साप्ताहिक
9 – जोधपुर गोरखपुर एक्सप्रेस, साप्ताहिक
10 – बाड़मेर हावड़ा एक्सप्रेस, साप्ताहिक

11 – जोधपुर चेन्नई एक्सप्रेस, साप्ताहिक
12 – नई दिल्ली अम्बिकापुर एक्सप्रेस, साप्ताहिक
13 – रांची मुम्बई सेंट्रल एक्सप्रेस, साप्ताहिक
14 – रांची अहमदाबाद एक्सप्रेस, साप्ताहिक
15 – टाटानगर भागलपुर एक्सप्रेस, रोजाना

16 – कन्याकुमारी वाराणसी एक्सप्रेस, साप्ताहिक
17 – तिरुवनंतपुरम हैदराबाद एक्सप्रेस, साप्ताहिक
18 – यशवंतपुर तिरुचिरापल्ली एक्सप्रेस, रोजाना
19 – कोटा निजामुद्दीन एक्सप्रेस, रोजाना
20 – बंगारपेट – तिरुपति दिल्ली एक्सप्रेस, साप्ताहिक

मार्ग विस्तार –

1 – 12943/44 बलसाड़ कानपुर सेंट्रल एक्सप्रेस, छपरा तक

2 – 15033/34 हरिद्वार रामनगर एक्सप्रेस, देहरादून तक

3 – 12651/52 मदुरै निजामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, चंडीगढ़ तक

4 – 14645/46 दिल्ली जम्मूतवी एक्सप्रेस, श्री माता वैष्णो देवी कटरा तक

5 – 22481/82 जोधपुर दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस, हरिद्वार तक

6 – 12259/60 सियालदह नई दिल्ली दुरंतो एक्सप्रेस, बीकानेर तक

7 – 12721/22 निजामुद्दीन हैदराबाद दक्षिण एक्सप्रेस, बीदर तक

8 – 15231/32 बरौनी गोंदिया एक्सप्रेस, नागपुर तक

9 – 12977/78 अजमेर एर्नाकुलम मरूधर एक्सप्रेस, कोचुवेली तक

10 – 66019/20 काटपाडी सालेम मेमू, तिरुपत्तूर तक

11 – 22837/38 हटिया एर्नाकुलम एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम तक

12 – 22483/84 जोधपुर गांधीधाम एक्सप्रेस, भुज तक

13 – 19419/20 चेन्नई अहमदाबाद एक्सप्रेस, गांधीधाम तक

14 – 12475/76 श्री माता वैष्णो देवी कटरा हापा एक्सप्रेस, जामनगर तक

गाड़ियोंके फेरे बढाना –

1 – 22127/28 लोकमान्य तिलक टर्मिनस काजीपेट आनंदवन एक्सप्रेस, 1 दिनसे 3 दिन

2 – 15227/28 यशवंतपुर मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस, 1 दिन से 3 दिन

3 – 15279/80 सहरसा आनंदविहार टर्मिनस एक्सप्रेस, 2 दिन से 3 दिन

4 – 15667/68 गांधीधाम कामाख्या एक्सप्रेस, 1 दिन से 3 दिन

5 – 12253/54 यशवंतपुर भागलपुर अंग एक्सप्रेस, 1 दिन से 3 दिन

6 – 19027/28 बांद्रा टर्मिनस जम्मूतवी एक्सप्रेस, 1 दिनसे 3 दिन

7 – 19579/80 राजकोट दिल्ली सराय रोहिल्ला एक्सप्रेस, 1 दिन से 3 दिन

8 – 22915/16 बांद्रा टर्मिनस हिसार एक्सप्रेस, 1 दिन से 3 दिन

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रेलवे में ग्रुप बुकिंग आरक्षण

रतन आज फिर अपने चाचा सुखीरामजी के यहाँ आ गया, जब तक बारात की बुकिंग का कोई फुल एन्ड फाइनल नहीं हो जाता तब तक रतन का इस तरह का सिलसिला चलता रहेगा ऐसा लगता है खैर, देखते है, सुखीरामजी आज क्या सिखाते है।

“चाचाजी, कल आपने स्पेशल कोच बुक करने की और ग्रुप आरक्षण करने की बातें बताई। कोच बुकिंग, निर्धारित तारीख के लिए, कमसे कम 30 दिन और ज्यादा से ज्यादा 6 महीने पहले बुक करा सकते है। रेलवे ने इसके लिए FTR ( full tariff rate) की http://www.ftr.irctc.co.in ऐसी वेबसाइट बना रखी है। जिसपे स्पेशल कोच या स्पेशल ट्रेन भी बुक करा सकते है। लेकिन चाचाजी, ग्रुप रिजर्वेशन के लिए क्या करे ये तो बताइए।”

“देखो रतन, कल तो मैंने बताया की, अपने पूरे यात्रिओंकी लिस्ट, उनके पूरे नाम, उम्र, लिंग, और पहचानपत्र (फोटो और पता, आई डी) के साथ सीनियर DCM, वरिष्ठ विभगिय वाणिज्य प्रबंधक के नामे अर्जी देनी होगी।”

“यह सब तो ठीक है, लेकिन आगे क्या और कैसे करेंगे?” रतन।

“अरे रतनभाई, Sr.DCM का अनुमतिपत्र ले कर रिजर्वेशन ऑफिस जाकर वहाँ CRS चीफ रिजर्वेशन सुपरिटेंडेंट को देना है। आगे की कार्यवाही याने रिजर्वेशन टिकट बनाने का काम वोही लोग करेंगे।
हाँ, यह ग्रुप रिजर्वेशन में, हमे जो भी अप्लिकेबल याने लागू कन्सेशन मिलने चाहिए, जरूर मिलेंगे। वरिष्ठ नागरिक, बच्चे का 50% कन्सेशन, सब मिलेंगे।”

यह तो ठीक है, लेकिन ऐन वक्त हमारे कुछ लोग बदले गए, याने लिस्ट की जगह, कोई दूसरे लोग आने वाले रहे तो क्या करना होगा?

इसके लिए, रेलवे का चेंज ऑफ नेम ऐसा एक नियम है। इस नियम के तहत, पूरे ग्रुप के 10% तक के, न आ सकनेवाले लोगोंके नाम बदलने की सहूलियत है।
इस फैसिलिटी का उपयोग, हम गाड़ी छूटने के समय से 48 घंटे पहले तक ही कर सकते है।

एक बात अवश्य ध्यान रखनी है, की इस नाम बदल सकने की सुविधा में, ग्रुप बुकिंग के लिए और सरकारी कर्मचारियों जो अपनी ड्यूटी पर जा रहे है, इनके लिए नाम की बदली, परिवार के अंतर्गत तक ही सीमित रखने का बंधन नही है और यह सुविधा केवल कन्फर्म हो चुके आरक्षित टिकट के लिए ही है।

तत्काल टिकट और कन्सेशन वाले टिकटधारी यात्रिओंको यह सुविधा उपलब्ध नही है।

हाँ रतन, कुछ लोग अलग अलग आई डी लेकर, IRCTC की वेबसाइट पर जाकर, रेलवे के e ticket भी बनवा सकते है, लेकिन यह ठीक नही। दूसरा इसमें सभी टिकट, एक ही डिब्बे में मिलेंगे यह भी निश्चित नही है।

आ गया चाचाजी सब कुछ समझ मे। अब शादी की तारीख जैसे ही निश्चित हो जावें, सब डॉक्यूमेंट बनाकर और हिसाब से 120 दिन पहले पोहोंच जाएंगे रिजर्वेशन कराने। धन्यवाद।

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बारात ले जाने के लिए स्पेशल कोच करना है।

“अरे, रतन काहें परेशान होते हो, बस अभी बैठते है और पुरा के पूरा हिसाब निकलते है, जो सही बैठेगा तय हो जाएगा।” सुखलालजी बोले।

रतन आज सुबह ही राजस्थान से लौटा था। उसके छोटे भाई मखनी का रिश्ता राजस्थान में श्रीगंगानगर के पास 17 किलोमीटर की दूरीपर डूंगरी गाँव मे तय हो रहा था। मखनी विदेश में आईटी इंजीनियर था और वहीं साथ मे काम करनेवाली लड़की से उसका चक्कर चल गया। खास बात तो यह थी की लड़की अपने जाती की, और ठेठ राजस्थान के रईस खानदान की थी।

रतन के समधी, ठाकुर रणविजय इस रिश्ते से थोड़े नाराज़ ही थे, लेकिन आजकल की आबोहवा को समझते थे। मखनी का परिवार उन्हें अपनेसे उन्नीसा लग रहा था, अतः थोड़े अड़ाकर अपनी बात मनवाने की जिद कर रहे थे। उनका कहना था, “शादी इसी गांव में, पूरे रस्मोरिवाज के साथ 4 दिन तक चलेगी, हमारे परिवार में 40 साल बाद एक लड़की की विदाई होने जा रही है।”

इन्हीं बातों से परेशान रतन, सुखलालजी से सलाह मशविरा करने आया था। सुखलालजी रेलवे के रिटायर्ड स्टेशन प्रबंधक थे, और रेलवे की काफ़ी जानकारी रखते थे।

काफी मेहनत मशक्कत के बाद, सुखलालजी ने रतन के सामने ऑप्शन रखे, ” देख भई रतन, रेलवे से बारात ले जाने के तीन तरीके है। पहला टिकट निकालो और बैठ जाओ। लेकिन भुसावल से श्रीगंगानगर इतना 1614 किलोमीटर, बिना आरक्षण के जाना, इसे तो छोड़ ही दे।

दूसरा है, 150 लोगोंके जाने और आने के रिजर्वेशन बनाना। तो इसके लिए गाड़ी छूटने के 120 दिन पहले अग्रिम आरक्षण के नियमोंके तहत, हम टिकट बनवा सकते है। एक, चलने वाले 150 बरातियोंकी लिस्ट, दो कॉपी में बनवाई जाए, लिस्ट में यात्री का पूरा नाम, उम्र, लिंग और आई डी दर्ज होना चाहिए। अब यह लिस्ट, प्रोग्राम की याने लगन पत्रिका और अपने विभाग के वरिष्ठ विभागीय वाणिज्य अधिकारी के नाम अर्जी, यह सब लेकर रिजर्वेशन दफ्तर चलते है। वहाँसे हमे पार्टी की याने ग्रुप बुकिंग की परमिशन मिलेगी, रिज़र्वेशन सुपरिटेंडेंट हमे एक निर्धारित समय देंगे, उस के बाद ही हम इतने रिजर्वेशन कर सकते है।

अगला ऑप्शन है स्पेशल कोच करने का, इसके लिए वही कागजात याने लग्नपत्रिका, 150 लोगोंकी डीटेल लिस्ट और अपने क्षेत्र, मुम्बई के मुख्य परिचालन अधिकारी CPTM के नाम एक अर्जी। यह अर्जी हमे स्टेशन मैनेजर के पास देनी होगी। अर्जी में, हमारा पूरा प्रोग्राम, जाने आने की तारीख, गाड़ी, और वहाँ रुकने समय पूरा लिखित में देना होगा। फिर हमें गाड़ी की, कोच की उपलब्धता और हमारे द्वारा तय गाड़ी की क्षमता याने सभी तकनीकी बाते जानकर यह निश्चित किया जाएगा की हमारा प्रोग्राम कैसे सेट होगा। जब जाने और आने की गाड़ियाँ तय हो जाए तब हमें कोच के पंजीकरण की आर्डर मिलेगी। प्रति कोच ₹ 50,000/- मात्र अमानत के तौर पे भरना होगा। जैसे हम दो शयनयान बुक कर रहे है तो ₹ एक लाख डिपोजिट कराने होंगे।

इसके बाद गाड़ी छूटने के कमसे कम 48 घंटे पहले हमारा 144 क्षमता वाले दो शयनयान का टिकट बन जाना चाहिए। टिकट बनाते वक्त, हमारे डिपोजिट की आधी 50% रकम किराए के मूल्य में समाहित हो जाएगी। बची आधी रकम, जब हम कोच वापसी यात्रा पूर्ण करके रेलवे को सौंप देंगे तब जो भी कम ज्यादा हिसाब करके बची रकम हमे वापस मिल जाएगी।

अब किराए के नियम समझ ले, पार्टी कोच के टिकट में एक तरफ का कमसे कम अंतर 500 km चार्ज किया जाएगा। किसी भी यात्री को कन्सेशन याने सीनियर सिटीजन कन्सेशन या बच्चोंको आधा किराया, कन्सेशन नहीं मिलेगा। सभी लोगोंका या डिब्बे की क्षमताका, जो भी ज्यादा है उतने संख्यामे पूर्ण वयस्क का किराया देय रहेगा। डिब्बे की क्षमतासे ज्यादा लोग जा रहे है तो यात्रा शुरू करनेसे पहले ही उन एक्स्ट्रा लोगोंका टिकट बनवाना होगा, वरना यात्रा के दौरान अतिरिक्त लोग पाए जाने पर पेनाल्टी भरनी पड़ेगी। जाने आने के कुल किराया में, सर्विस चार्जभी जोड़ा जाएगा, जो की अभी बेसिक किराए के 30% चल रहा है।

गाड़ी के दोनों डिब्बे, हमारी एक तरफ की यात्रा पूरी होने से लेकर वापसी यात्रा शुरू होने तक जितनी देर खाली खड़े रहेंगे, उसका डिटेंशन चार्ज ₹ 900/- प्रति घंटा या कमसे कम ₹1500 /- जो भी ज्यादा हो, देना होगा।

यही नही, यदि हमारी गाड़ीमे डिब्बे कहीं दूसरे स्टेशन से लग के आ रहे है तो उसका एम्प्टी हौलेज चार्ज जो की कमसे कम 200 km या वास्तविक अंतर जो भी ज्यादा हो, उसका बेसिक किराया प्लस रिजर्वेशन चार्ज लागू रहेगा।

इसके बाद IRCTC का कुल किराए पे 5% फेसिलिटेशन चार्ज भरना होगा।

अब, रतन भाई आप इत्मीनान से, हर बात समझ के बताना की क्या करना है। कुछ और पूछना हो तो आ जाना हमारे पास, चलेंगे रेलवे स्टेशन पर और जानकारी लेने।