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उत्तर रेलवे की वाराणसी – लोकमान्य तिलक टर्मिनस एवं दिल्ली – बान्द्रा के बीच विशेष गाड़ियाँ

6 जून 2024, गुरुवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2081

04230/29 वाराणसी लोकमान्य तिलक टर्मिनस वाराणसी विशेष

04230 विशेष वाराणसी से दिनांक 04, 08 एवं 12 जून 2024 को रात 22:20 को रवाना होगी एवं दिनांक 06, 10, एवं 14 की सुबह 10:30 को लोकमान्य तिलक टर्मिनस को पहुँचेंगी।

04229 विशेष लोकमान्य तिलक टर्मिनस से दिनांक 06, 10 एवं 14 जून 2024 को दोपहर 13:00 को रवाना होगी एवं दिनांक 07, 11, एवं 15 की रात 23:45 को वाराणसी पहुँचेंगी।

गाड़ी की संरचना में वातानुकूल, स्लिपर एवं साधारण कोच रहेंगे।

समयसारणी :

04005/06 दिल्ली जंक्शन बान्द्रा टर्मिनस दिल्ली जंक्शन वातानुकूलित विशेष

04005 विशेष दिल्ली जंक्शन से दिनांक 04, 06, 08 एवं 10 जून 2024 को रात 23:50 को रवाना होगी एवं दिनांक 06, 08, 10, एवं 12 की अल-सुबह 01:55 को बान्द्रा टर्मिनस को पहुँचेंगी।

04006 विशेष बान्द्रा टर्मिनस से दिनांक 06, 08, 10 एवं 12 जून 2024 को सुबह 04:00 को रवाना होगी एवं दिनांक 07, 09, 11, एवं 13 की सुबह 06:00 को दिल्ली जंक्शन पहुँचेंगी।

गाड़ी की संरचना में 16 गरीब रथ वातानुकूल कोच रहेंगे।

समयसारणी :

यात्रीगण अधिक जानकारी के लिए रेलवे की हेल्पलाइन 139, अधिकृत वेबसाइट/ऍप का उपयोग करें।

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उ प रेल NWR में राहत : चल रही,’0′ गाड़ी क्रमांक की 90 विशेष गाड़ियाँ, अब नियमित सवारी गाड़ी क्रमांक से चलेंगी।

6 जून 2024, गुरुवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2081

उ प रेल NWR में चल रही, शुरवाती ‘0’ गाड़ी क्रमांक की 90 विशेष गाड़ियाँ अब नियमित सवारी गाड़ी क्रमांक से चलेंगी। रेल यात्रिओंको ‘विशेष किरायों’ से राहत तो अमूमन मिल चुकी थी मगर रेल ऑपरेटिंग विभाग को भी परिचालनिक राहत मिलेगी। यह आदेश 01 जुलाई 2024 से लागू हो जाएगा। आइए देखते है उन 90 गाड़ियोंकी सूची,

ज्ञात रहे, पहले यही विशेष गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस किराया श्रेणी से चलाई जा रही थी, जिसे बीते कुछ महीने पहले ही रेल मुख्यालय ने आदेश पारित कर सवारी गाड़ियोंके किरायोंमे तब्दील किया था। अब इन्हें पुराने नियमित गाड़ी क्रमांक मिलने से यात्रिओंको भी गाड़ियोंकी पहचान करने में राहत मिलेगी।

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सूत्रों से पता चला है …

6 जून 2024, गुरुवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, अमावस्या, विक्रम संवत 2081

हम कभी भी पोलिटिकल खबरों में नही जाते है और ना ही रेलवे के इस ब्लॉग को किसी अन्य दिशा में जाने देंगे। चूँकि विद्यमान मन्त्री मण्डल बर्खास्त हो चुका है और नए मंत्रिमंडल का इन्तजार किया जा रहा है। तमाम रेल प्रेमियोंके बीच नए रेल मन्त्री के नामों की अटकलें तेज है। इसी बीच आप यकीन मानिए, रेल मंत्रालय इस बार किसे मिलने वाला है, हमारे नए रेल मंत्री कौन होंगे यह हमें सूत्रों से पता चला है। कौन इस बार रेल मन्त्री बनने वाले है, इस बात का राज़ हम खोले इससे पहले यात्रियों, रेल प्रेमियोंके बीच क्या चर्चाएं है, जरा उसे समझते है।

वैसे तो बीते दस वर्षोँसे जिस पार्टी गठबंधन का मंत्रिमंडल बनता था, समझा जाता है इस पँचवार्षिक मे भी वही लोग मंत्रिमंडल बनाने जा रहे। हालाँकि परिस्थितियाँ थोड़ी सी बदली है मगर भिन्न भिन्न तर्कों के घनघोर बादल, सावन की बदली भी शरमा जाए इतने तेजी से गहरा रहे है। टॉप टेन चैनल सर्च कर लीजिएगा, प्रत्येक मिनट पर ब्रेकिंग न्यूज का टैग लगा कर एक नयी माँग और किसी दूसरे चैनल पर माँग करते उसी दल की केवल शिद्दत से साथ निभाने का वादा जताने की खबरें दिखाई दे रही है। हम रेल प्रेमियोंकी हालत तो इतनी खराब है, जैसे फ़िल्म “चख दे इंडिया” में कोच सर की थी। वह अपने टीम के गोली को स्ट्राइकर किस दिशा में स्ट्रोक लगाने वाली है इस का अंदाजा देने वाले थे।

कोई कह रहा है, इस बार रेल मंत्रालय तो सिर्फ और सिर्फ बिहार ही ले जाएगा। बड़के बाबू ज़िद लिए बैठ गए है। अब सोचिए पहले भी सम्भाले हुए है, यह मंत्रालय। 9 क्षेत्र के टुकड़े कर उन्हें 16 कर किए थे, अब लौटेंगे तो क्या 16 से भी ज्यादा करा देंगे? सम्पर्क क्रान्ति गाड़ियाँ इनकी ही देन थी, वन्दे, नमो, अमृत इन नामों की आदत हो चुके रेल यात्रिओंको अब क्या बदली हुई सीरीज मिलने जाएंगी?

रेल मंत्रालय प्रधान सेवक जी के दिल के करीब का मामला है, अतः यह मंत्रालय शायद ही अलायन्स में जाता नजर आएगा। पुराने मन्त्री जी, हो सकता है, उनके पुराने कार्यक्षेत्र उड़ीसा राज्य की कमान सम्भालने चले जाए इसलिए उनका नाम पीछे पड़ गया है। राज्य मन्त्री जी को प्रमोट कर आगे लाते तो वह पहले ही डिस्क्वालिफाई हो चुके है। कुछ लोग नागपुर वाले हाई वे फैक्ट्री की भी वकालत कर रहे है। उनका मानना है, जिस तरह इन्होंने धड़ाधड़ (खटाखट, ठकाठक नही हं😊) हाइवे बनवाए है, रेलवे इन्हें ही सौपना चाहिए ताकि रेल भी झटपट डलवा कर दनादन नई गाड़ियाँ चलाई जा सके। मगर उनका स्वास्थ्य थोड़ा नरम चल रहा है और सड़क में उनके मुकाबले कोई और दिखाई नही दे रहा अतः उन्हें वही रहने देने की भी चर्चाएं है। एक नाम इसी विभाग में पहले मन्त्री रह चुके सी ए साहब की भी चर्चाएं जोरों पर है। मगर उन्हें रेल की जगह अर्थ का अर्थ ज्यादा समझ मे आता है।

कुल मिलाकर सार यह है, अनार एक है और ललचाए कई। क्यूँ न हो? रेल मंत्रालय वह जगह है जो सीधे जनता के दिलों में उतरने का दरवज्जा खोलता है। एक नई गाड़ी चला दीजिए या सीधी निकलती गाड़ी को दो मिनट के लिए बीच वाले स्टेशन पर रुकवा दीजिए, लाखों वोटर खुश।

मित्रों, सूत्रों के भी सारे पीड़ खुल गए अब कोई न कोई अप्रत्याशित और नया नाम ही सामने आएगा। जल्दी ही ‘सूत्रों’ से यह बात हमे पता चलेगी और हम फौरन आपको बताएंगे। तब तक टॉप टेन चैनल्स की ‘ब्रेकिंग न्यूज’ की खबरें लेते रहिए। 😊

लेख में उधृत चित्र के लिए हम times group और fundamatics के आभारी है।

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भुसावल मण्डल में कुछ गाड़ियोंकी समयसारणी में बदलाव किया गया

3 जून 2024, सोमवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2081

मध्य रेल भुसावल मण्डल की ओरसे यात्रीगण को सूचित किया जाता है, निम्नलिखित आठ गाड़ियोंके समयसारणी में दिनांक 01 जून 2024 से बदलाव किया गया है। संशोधित समय निम्नप्रकार है,

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रेलवे में अवैध यात्रियोंकी रोकथाम करना इतना सहज है?

2 जून 2024, रविवार, जेष्ठ, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2081

आजकल भारतीय रेल की सबसे बड़ी और विकराल समस्या है, अवैध यात्री। आप और हम जानते है, भारतीय रेल में अनारक्षित एवं आरक्षित कोच, इस तरह यात्री टिकटोंका वर्गीकरण किया हुवा है। अनारक्षित टिकट में केवल द्वितीय श्रेणी का टिकट उपलब्ध है, जिसे आम तौर पर ‘जनरल’ टिकट कहा जाता है। वहीं आरक्षित टिकट में शयनयान स्लिपर, द्वितीय श्रेणी सिटिंग यह ग़ैरवातानुकूलित और थ्री टियर, इकोनोमी, चेयर कार, टु टियर, प्रथम श्रेणी इत्यादि वातानुकूलित कोच उपलब्ध है। आरक्षित आसन व्यवस्थामे आगे गाड़ियोंके भी कई प्रकार है। मगर मेल/एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट यह दो प्रकार ऐसे है, जिनमे अनारक्षित एवं आरक्षित यह दोनोंही प्रकार के वर्ग, श्रेणियोंके टिकट उपलब्ध कराए गए है।

देश मे भारतीय रेल यह आम जनजीवन का सर्वाधिक सुलभ एवं सरल यातायात साधन है। उसमें उपनगरीय रेल क्षेत्र को अलाहिदा रखा जाए तो अमूमन 90% गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस एवं सुपरफास्ट श्रेणी की है जो हम भारतीय रेल यात्रिओंकी जीवन-वाहिनी है। एक आम भारतीय वर्ष में एखाद या दो बार लम्बी रेल यात्रा करता होगा पर 200 से 500 किलोमीटर की यात्रा उसे महीने में भी कई बार करने का योग आ जाता है। और इस तरह की रेल यात्रा के लिए उसका साधन है, यह मेल/एक्सप्रेस, सुपरफास्ट गाड़ियाँ।

किसी आम रेल यात्री को अपनी इस कामकाजी या जरूरत की रेल यात्रा के लिए लगभग शॉर्ट नोटिस पर याने अचानक ही निकलना पड़ता है, जिसके लिए उसे रेलवे में आरक्षित टिकट कदापि ही मिल पाता है, चाहे रेल विभाग की तत्काल या प्रीमियम तत्काल टिकटोंकी व्यवस्थाए ही क्यों न हो। उसे केवल ‘जनरल’ याने अनारक्षित टिकट का ही सहारा होता है। अब आगे रेल यात्रा की अवस्था यह है, अनारक्षित टिकट अमर्याद संख्या में बेचे जाते है और उस मुकाबले अनारक्षित यात्री कोच इन मेल/एक्सप्रेस या सुपरफास्ट गाड़ियोंकी बदली हुई कोच संरचना में, पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नही कराए जाते है। आजकल इनकी संख्या घटते घटते, पूरे गाड़ी संरचना में महज 2 या 3 कोच इतनी रह गई है।

ऐसी हालत में अनारक्षित कोचों में ठूँस ठूँस कर भरी भीड़ से घबराया, एक आम जरूरतमंद यात्री अपनी शर्म और गैरत से मरते, डूबते और डरते हुए आरक्षित शयनयान के कोच में, दरवाजोंके पास, पायदानों पर अपनी यात्रा से पार पाने का प्रयत्न करता है और यही है आजकल का भारतीय रेल का अवैध यात्री!

बिना टिकट या बिना वैध टिकट के यात्रा करने का आदी नही होने के कारण टिकट जाँच दल के पकड़ में वह बड़ी सहजता से आ जाता है। अपनी मजबूरियों का लाख रोना रोकर, दण्ड की रकम चुकाकर यह रेल यात्री अपनी रेल यात्रा निपटता है। यह वाकया कभी कभी इस तरह भी होता है, की उसका किसी टिकट जाँच दल से सामना नही होता और वह अपनी मजबूरी में की गई अवैध (?) रेल यात्रा बिना किसी दण्ड को चुकाए पूर्ण कर लेता है। जब ऐसा कई बार होता है और उसे इस बात की आदत हो जाती है, कोई टिकट जाँच दल हर रोज, हर बार नही आता और वह धीरे धीरे आदतन अवैध यात्री बनते चला जाता है।

हाल ही में हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा, रेल विभाग अवैध, आदतन बिना टिकट यात्रिओंकी तस्वीर रेलवे स्टेशनोंपर लगवाए। हमने एक आम भारतीय रेल यात्री की अवैध यात्रा करने की बाध्यता को विस्तृत तरीक़े से रखा। अब आप बताइए, क्या इतनी सहज है, अवैध यात्रिओंकी रोकथाम?