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WDFC पश्चिमी समर्पित माल गलियारा निर्माण कार्य हेतु, पनवेल स्टेशन पर रेल ब्लॉक

10 सितम्बर 2023, रविवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

पनवेल स्टेशन पर वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) की अप और डाउन नई लाइनों के निर्माण के कारण मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल गाड़ियाँ रद्द की जा रही है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर DFC, माल ढुलाई तीव्र गति से हो और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मील इसलिए रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं। 2 समर्पित मालवहन गलियारे प्रगतिपथ पर हैं,

1) पूर्वी समर्पित माल गलियारा (ईडीएफसी) लुधियाना से सोननगर तक –
कुल लंबाई – 1337 किमी
पूर्ण – 1150 किमी (86%)

2) पश्चिमी समर्पित गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) दादरी (दिल्ली के पास) से जेएनपीटी तक –
कुल लंबाई – 1506 किमी
पूर्ण – 1046 किमी (70%)

3) EDFC और WDFC दोनों को मिलाकर-
कुल – 2843 किमी
पूर्ण – 2196 किमी (77%)

उपरोक्त पूर्ण खंड पर 1 लाख से अधिक मालगाड़ियाँ पहले ही चलाई जा चुकी हैं। जिनमें से अब तक 50,000 से ज्यादा मालगाड़ियां WDFC कॉरिडोर पर चलाई जा चुकी हैं।

डब्ल्यूडीएफसी पश्चिमी गलियारे के शेष 30% हिस्से के निर्माण के एक भाग के रूप में-
इसकी 2 नई समर्पित माल ढुलाई लाइनों (अप और डाउन) के निर्माण की योजना पनवेल स्टेशन यार्ड से होकर गुजरेगी, जो जेएनपीटी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट की ओर जाएगी।

पनवेल स्टेशन पर इन 2 नई लाइनों का निर्माण 18/08/2023 से शुरू किया गया है। लगभग 45 दिनों की कुल अवधि का निर्माण कार्य है। यह संभवतः 02/10/2023 को पूरा होगा।
18/08/23 से पनवेल स्टेशन यार्ड में प्रतिदिन 3 से 4 घंटे की अवधि का रात्रि ब्लॉक चल रहा है।
अब 11/09/2023 से इन ब्लॉकों की अवधि प्रतिदिन 00.30 बजे से 05.30 बजे तक बढ़कर 05.00 घण्टोंकी हो जायेगी। हर दिन यह रेल ब्लॉक जारी रहेगा और 02/10/2023 को समाप्त होने की संभावना है।

indiarailinfo.com से साभार

11/09/2023 से 02/10/2023 तक उपनगरीय ट्रेन रद्दीकरण इस प्रकार होगा

ए) मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से पनवेल तक डाउन हार्बर लाइन –

परिपत्रक में पनवेल एवं मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के रेलवे कोड, उपनगरीय गाड़ी क्रमांक का उपयोग किया गया है। पीएल – पनवेल, सीएसएमटी – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस

1) मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से पनवेल के लिए अंतिम लोकल होगी-
पीएल 201 जो 22.58 बजे सीएसएमटी से प्रस्थान करेगी।
2) पीएल 203 – सीएसएमटी से प्रस्थान 23.14 बजे रद्द कर दिया गया है।
3) पीएल 205 – सीएसएमटी प्रस्थान 23.30 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर तक चलेगी
4) पीएल 207 – सीएसएमटी प्रस्थान 23.52 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर तक चलेगी
5) पीएल 1 – सीएसएमटी प्रस्थान 00.13 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर तक चलेगी
6) पीएल 3 – सीएसएमटी प्रस्थान 00.24 बजे रद्द कर दिया गया है
7) पीएल 5 – सीएसएमटी प्रस्थान 00.40 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर तक चलेगी
8) बीआरवीडी 1 – वडाला प्रस्थान 00.50 बजे बेलापुर के बजाय वाशी तक चलेगी
9) पीएल 13 – सीएसएमटी प्रस्थान 05.18 बजे रद्द कर दिया गया है
10) पीएल 31 – सीएसएमटी प्रस्थान 06.40 बजे रद्द कर दिया गया है
11) सीएसएमटी से पनवेल तक पहली लोकल-
सीएसएमटी पर पीएल7 प्रस्थान 04.32 बजे अपने नियमित कार्यक्रम के अनुसार चलेगी।

बी) ठाणे से पनवेल तक डाउन ट्रांसहार्बर लाइन-

1) ठाणे से पनवेल के लिए अंतिम लोकल टीपीएल73 – ठाणे से 23.32 बजे प्रस्थान करेगी
2) टीपीएल1 – ठाणे से प्रस्थान 00.05 बजे रद्द कर दिया गया है
3) टीपीएल3 – ठाणे से 05.12 बजे प्रस्थान रद्द कर दिया गया है
4) टीएनयू1 – ठाणे से प्रस्थान 05.40 बजे रद्द कर दिया गया है
5) टीपीएल63 – ठाणे से प्रस्थान 21.36 बजे रद्द कर दिया गया है
6) ठाणे से पनवेल के लिए पहली लोकल TPL5 – ठाणे से 06.20 बजे प्रस्थान करेगी।

सी) पनवेल से मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक अप हार्बर लाइन-

1) पनवेल से सीएसएमटी तक अंतिम लोकल-
पीएल2 – पनवेल से प्रस्थान 00.03 बजे नियमित कार्यक्रम के अनुसार चलेगी
2) पीएल 184 – पनवेल से प्रस्थान 21.52 बजे रद्द है
3) पीएल 196 – पनवेल से प्रस्थान 22.58 बजे रद्द है
4) पीएल4 – पनवेल से प्रस्थान 04.03 बजे रद्द कर दिया गया है
5) पीएल6 – पनवेल से प्रस्थान 04.27 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से, अपने बेलापुर के नियमित समय पर चलेगी
6) पीएल8 – पनवेल से प्रस्थान 04.49 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से, अपने नियमित बेलापुर समय पर चलेगी
8) पीएल10 – पनवेल से प्रस्थान 05.05 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से अपने नियमित बेलापुर समय पर चलेगी
9) पीएल 12 – पनवेल से प्रस्थान 05.17 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से अपने नियमित बेलापुर समय पर चलेगी
10) पीएल14 – पनवेल से प्रस्थान 05.31 बजे रद्द कर दिया गया है
11) बीआरवीडी2 – बेलापुर से प्रस्थान 05.50 बजे बेलापुर के बजाय वाशी से अपने नियमित वाशी समय पर चलेगी
12) बीआर 12 – बेलापुर से प्रस्थान 06.08 बजे बेलापुर के बजाय वाशी से अपने नियमित वाशी समय पर चलेगी
13) पनवेल से सीएसएमटी तक पहली लोकल होगी-
पीएल16 – पनवेल प्रस्थान 05.40 बजे।

डी) पनवेल से ठाणे तक अप ट्रांसहार्बर लाइन-

1) पनवेल से ठाणे तक आखिरी लोकल होगी-
टीपीएल72 – पनवेल प्रस्थान 22.15 बजे
2) टीपीएल74 – पनवेल से प्रस्थान 23.18 बजे रद्द कर दिया गया है
3) टीपीएल2 – पनवेल से प्रस्थान 04.33 बजे रद्द कर दिया गया है
4) टीपीएल4 – पनवेल से प्रस्थान 04.53 बजे रद्द कर दिया गया है
5) टीपीएल6 – पनवेल से प्रस्थान 05.21 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से अपने नियमित बेलापुर समय पर चलेगी
6) टीपीएल8 – पनवेल से प्रस्थान 05.44 बजे पनवेल के बजाय बेलापुर से अपने नियमित बेलापुर समय पर चलेगी
7) पनवेल से ठाणे तक पहली लोकल होगी-
टीपीएल10 – पनवेल प्रस्थान 06.13 बजे।

उपरोक्त जानकारी मध्य रेल के प्रेस विज्ञप्ति द्वारा प्राप्त

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मध्य रेल CR की वन्देभारत एक्सप्रेस : यात्री संख्या, आय सारा गुणा-गणित

9 सितम्बर 2023, शनिवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2080

मध्य रेलवे क्षेत्र से होकर चलने वाली वन्देभारत गाड़ियोंकी 15 अगस्त से 8 सितम्बर तक की ऑक्यूपेंसी रिपोर्ट। यह विस्तृत विवरण हमे यह दिखलाता है, वन्देभारत प्रीमियम एक्सप्रेस की उपलब्ध आसन संख्या के मुकाबले, कितने यात्रिओंने उसका उपयोग किया। रेल प्रशासन को अपेक्षित आय के मुकाबले कितने प्रतिशत आय अर्जित हुई। मुम्बई – मडगांव – मुम्बई वन्देभारत एक्सप्रेस, कोंकण रेल (मॉनसून समयसारणी में सप्ताह में 3 दिन) के अलावा बाकी सभी वन्देभारत एक्सप्रेस देश भर में सभी जगह, सप्ताह में छह दिन अपना फेरा करती है। चूँकि यह प्रीमियम स्तर की गाड़ी है इसीलिए यात्रिओं का इसके प्रति किस तरह का रुझान है, इस पर रेल प्रशासन लगातार अभ्यास करते रहती है।

सर्वेक्षण की अवधि : 15 अगस्त से 8 सितम्बर

कुल एकल यात्राएं – 150
कुल यात्रियों ने यात्रा की – 1,22,226 (1.22 लाख)
कुल राजस्व कमाई – 10,72,20,718 (10.72 करोड़)

1: 20825 बिलासपुर – नागपुर वन्देभारत एक्सप्रेस (8 कोच, सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक शनिवार छोड़कर)


अधिभोग (ऑक्यूपेंसी) – 122.56%
यात्राएँ – 22
यात्री संख्या – 14,291
अर्जित आय – ₹ 1,06,04,502

20826 नागपुर – बिलासपुर वन्देभारत एक्सप्रेस (सप्ताह में छह दिन, प्रत्येक शनिवार छोड़कर)

अधिभोग – 106.40%
यात्राएँ -22
यात्री संख्या – 12,407
अर्जित आय – ₹ 99,42,868

2: 22223 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – साई नगर शिर्डी वन्देभारत एक्सप्रेस (16 कोच, सप्ताह मे छह दिन, प्रत्येक मंगलवार छोड़कर)

अधिभोग – 81.33%
यात्राएँ – 21
यात्री संख्या – 19,267
अर्जित आय – ₹ 1,66,55,326

22224 साई नगर शिर्डी मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस वन्देभारत एक्सप्रेस (16 कोच, सप्ताह मे छह दिन, प्रत्येक मंगलवार छोड़कर)

अधिभोग – 81.88%
यात्राएँ – 21
यात्री संख्या – 19,398
अर्जित आय – ₹ 1,82,81,051

3: 22225 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – सोलापुर वन्देभारत एक्सप्रेस (16 कोच, सप्ताह मे छह दिन, प्रत्येक बुधवार छोड़कर)

अधिभोग – 93.71%
यात्राएँ – 21
यात्री संख्या – 22,200
अर्जित आय – ₹ 1,71,92,102

22226 सोलापुर मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – वन्देभारत एक्सप्रेस (16 कोच, सप्ताह मे छह दिन, प्रत्येक गुरुवार छोड़कर)

अधिभोग – 105.09%
यात्राएँ – 21
यात्री संख्या – 24,894
अर्जित आय – ₹ 1,97,28,491

4: 22229 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – मडगांव वन्देभारत एक्सप्रेस (8 कोच, सप्ताह मे तीन दिन, प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार)
अधिभोग – 92.05%
यात्राएँ – 11
यात्री संख्या – 5,367
अर्जित आय – ₹ 76,11,662

22230 मडगांव – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – वन्देभारत एक्सप्रेस (8 कोच, सप्ताह मे तीन दिन, प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार एवं शनिवार)

अधिभोग – 75.50%
यात्राएँ – 11
यात्री संख्या – 4,402
अर्जित आय – ₹ 72,04,716

उपरोक्त आँकड़े, जनसंपर्क विभाग, मध्य रेलवे मुख्यालय, मुंबई द्वारा जारी किए प्रेस विज्ञप्ति से लिए गए है।

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नई गाड़ियाँ : वेरावळ – बनारस, वड़ोदरा – दाहोद, रांची – न्यू गिरिडीह,

8 सितम्बर 2023, शुक्रवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

1: वेरावळ – बनारस – वेरावळ साप्ताहिक एक्सप्रेस

यह गाड़ी 24 ICF कोच से सुसज्जित रहेगी। गाड़ी अहमदाबाद, छायापुरी, रतलाम, नागदा, कोटा, बयाना, आग्रा फोर्ट, टूण्डला, गोविंदपुरी, प्रयागराज, ज्ञानपुर रोड होकर बनारस पहुचेंगी।

यह उद्धाटन विशेष गाड़ी है जो दिनांक 11 सितम्बर को चलेगी और उसका गाड़ी क्रमांक 02945 यह रहेगा।

12945/46 वेरावळ – बनारस – वेरावळ साप्ताहिक के नियमित फेरोंका विवरण

12946 बनारस वेरावळ साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 13 सितम्बर से प्रत्येक बुधवार को प्रातः 7:30 को बनारस से रवाना होकर गुरुवार शाम 19:00 को वेरावळ पहुचेंगी। 12945 वेरावळ बनारस साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 18 सितम्बर से प्रत्येक सोमवार को वेरावळ से प्रातः 4:15 को रवाना होगी और मंगलवार दोपहर 14:35 को बनारस पहुचेंगी। वापसीमे

2: वड़ोदरा – दाहोद – वड़ोदरा डेली मेमू

वड़ोदरा – दाहोद के बीच एक प्रतिदिन मेमू चलाने की रेल प्रशासन से अनुमति मांगी गई है, और आशा है, जल्द ही प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी।

3: रांची – न्यू गिरिडीह – रांची डेली एक्सप्रेस

18617/18 राँची न्यू गिरिडीह राँची इंटरसिटी एक्सप्रेस का दिनांक 12 सितम्बर को उद्धाटन किया जाएगा और दिनांक 13 सितम्बर से यह गाड़ी निम्नलिखित समयसारणी से चलाई जायेगी।

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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, द म रेल SCR के शिरपुर कागज़ नगर स्टेशन पर रेल तिहरीकरण हेतु रेल ब्लॉक रहेगा। 11 से 26 सितंबर के बीच अनेक गाड़ियाँ रद्द/आँशिक रद्द/ मार्ग परिवर्तन और नियंत्रित कर चलाई जाएगी।

7 सितम्बर 2023, गुरुवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

रेल प्रशासन का रेल ब्लॉक अवधि :

1: अपने प्रारम्भिक स्टेशन से सम्पूर्णतः रद्द की गई 34 गाड़ियाँ :

2: आँशिक रूप से रद्द की गई 3 जोड़ी गाड़ियाँ :

17011/12 हैदराबाद शिरपुर कागजनगर हैदराबाद इंटरसिटी एक्सप्रेस बेलमपल्ली से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 27 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

17233/34 सिकन्दराबाद शिरपुर कागजनगर सिकन्दराबाद भाग्यनगर एक्सप्रेस बेलमपल्ली से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 28 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

12757/58 सिकन्दराबाद शिरपुर कागजनगर सिकन्दराबाद एक्सप्रेस काजीपेट से शिरपुर कागजनगर दिनांक 10 से 27 सितंबर के बीच रद्द रहेगी।

3: मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 7 गाड़ियाँ निजामाबाद, मुदखेड़, पिम्पलकुट्टी, माजरी, नागपुर होकर चलाई जाएगी।

चार्ट की रचना इस प्रकार है, अनुक्रमांक, गाड़ी क्रमांक, गाड़ी का नाम, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने की तिथि, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने का दिन, नियमित मार्ग, परावर्तित मार्ग, परावर्तित मार्ग से चलने पर, स्किप होने वाले नियमित स्टोपेजेस

यात्रीगण से निवेदन है, परावर्तित गाड़ियोंमे बदले हुए मार्ग और नियमित मार्ग का फर्क, स्किप्ड स्टेशन, यात्रा को लगनेवाला अतिरिक्त समय और उस वजह से यात्रा को लगने वाली देरी इत्यादि बातोंको ध्यान में रखते हुए ही नियोजन करे।

निम्नलिखित परावर्तित गाड़ियोंमे केवल 22647 कोरबा कोचुवेली एक्सप्रेस JCO 09/9/23 और 22815 बिलासपुर एर्नाकुलम एक्सप्रेस JCO 25/9/23 यह दो ही गाड़ियाँ है।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 9 गाड़ियाँ विजयवाड़ा, दुव्वाड़ा, सिम्हाचलम, रायागड़ा, टिटलागढ़, रायपुर, गोंदिया, नागपुर होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 7 गाड़ियाँ गुंटकल, वाड़ी, दौंड, मनमाड़, भुसावल, इटारसी होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 10 गाड़ियाँ पेड़ापल्ली, निजामाबाद, पूर्णा, अकोला होकर चलाई जाएगी।

मार्ग परिवर्तन : निम्नलिखित 3 गाड़ियाँ पेड़ापल्ली, निजामाबाद, पूर्णा, अंकाई होकर चलाई जाएगी।

प्रारम्भिक स्टेशन से नियमित प्रस्थान का समय बदलकर चलनेवाली गाड़ियाँ :

चार्ट की रचना इस प्रकार है, अनुक्रमांक, गाड़ी क्रमांक, गाड़ी कहाँ से कहाँ तक चलती है, उसका विवरण, प्रारम्भिक स्टेशन से प्रस्थान करने की तिथि, निर्धारित समय से कितनी देरी से चलेंगी उसका विवरण

निम्नलिखित तिथियोंपर 33 डाउन ट्रेन्स और 14 अप ट्रेन्स शिरपुर कागज़ नगर स्टेशन पर नही आएंगी।

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ZBTT, शून्याधारित समयसारणी : हिचकोले खाती, रेल विभाग की एक अच्छी संकल्पना !

6 सितम्बर 2023, बुधवार, भाद्रपद, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

ZBTT ज़ीरो बेस्ड टाइम टेबल अर्थात शून्याधारित समयसारणी इस तरह की संकल्पना भारतीय रेल ने 3-4 वर्ष पहले कार्यान्वित की थी। योजना मुम्बई आई आई टी के सहयोग से बनाई गई थी। ZBTT के तहत भारतीय रेल की प्रमुख संकल्पना यह थी, की सारी यात्री गाड़ियोंको शून्य कर एक एक गाड़ियोंको उनकी प्रमुखता, प्राधन्यता के मूल्य पर समयसारणी में रचा जाए।

इस शून्याधारित समयसारणी की आवश्यकता क्यों आन पड़ी थी, इसके लिए हमे और थोड़ा पीछे की ओर जाना पड़ेगा। हमारे देश मे रेल, ब्रिटिश राज की देन है। ब्रिटिशों ने देशभर से कच्चा माल, अयस्क, कृषि उत्पाद की यातायात करने और सेना की आवाजाही के लिए रेल बिछाने की पहल की थी। उद्देश्य सरल था, माल यातायात! और रेल लाइनोंकी सीधी संकल्पना थी, मेन लाइन और ब्रांच लाइन। मुख्य मार्ग की गाड़ियाँ लम्बी दूरी की सीधी चलने वाली गाड़ियाँ होती थी जो केवल जंक्शन स्टेशन, जिला मुख्यालय या छावनी स्टेशन्स पर रुकती थी। ब्रांच लाइन याने उप रेल मार्ग, जो दो अलग अलग मेन लाइन के जंक्शनों को जोड़नेवाली लाइन होती थी, और यहॉं की गाड़ियाँ उक्त जंक्शन स्टेशन के बीच चलती थी, जो अक्सर मेन लाइन्स अर्थात मुख्य मार्ग पर यात्रा नही करती थी। इस तरह के संकल्पना के साथ रेल परिचालन एक परिधी में चल रहा था। भारतीय रेल बनने के बाद याने स्वतंत्रता के बाद भी यही दौर चलता रहा।

देश की राजनीति भी एकल निर्धारण में ही चल रही थी अतः फेरफार, दखलंदाजी विशेषतः नही होती थी। फिर आया छोटे छोटे प्रान्त स्तर की पार्टियोंका दौर। 8, 10, 15 राजनीतिक पार्टियाँ मिलकर देश की बागडोर संभालने लगी। तुष्टिकरण का दौर चल निकला। जिस प्रदेश के रेल मन्त्री, उस प्रदेश को भर भरा कर यात्री गाड़ियाँ। और तो और, जो रेल गाड़ियोंकी मेन/ब्रांच लाइन की संकल्पना थी उसे दरकिनार कर दिया गया। यात्री गाड़ियाँ ब्रांच लाइन के स्टेशनोंसे निकल मेन लाइन पर आती, फिर किसी ब्रांच लाइन के स्टेशन पर जाकर खत्म होती। जंक्शन स्टेशनोंका कोई औचित्य ही नही रहा। इस तरह की यात्री गाड़ियाँ चलना बिल्कुल आम बात हो गयी। इससे मेन लाइन/ ब्रांच लाइन और उसकी गाड़ियाँ, उनकी प्राथमिकता यह सब का भी कोई महत्व न रहा।

वर्षों तक केवल एक रेल कोच फैक्ट्री इंटेग्रल कोच फैक्ट्री पेरंबूर चेन्नई में ही रेल यात्री कोच का उत्पादन होते रहा। वहीं लोको निर्मितीके लिए चित्तरंजन और बनारस यही कारखाने थे। वर्षोँसे बना उतना ही रेल नेटवर्क, उतनी ही रेल पटरियां, उतने ही रेल्वे स्टेशन, वही सिग्नल प्रणाली और उसी पर प्रत्येक रेल बजट में अलग अलग प्रांतोको संतुष्ट करने के लिए चलाई जानेवाली नई गाड़ियों फेहरिस्त, विस्तारो और स्टोपेजेसकी घोषणाएं, रैक और स्लॉट्स उपलब्ध नही है तो साप्ताहिक गाड़ियाँ चलवा दी जाती। ब्रांच से मेन और मेन से ब्रांच लाइनोंपर गाड़ियाँ कुदाई जा रही थी। नई गाड़ियाँ, सीमित स्लॉट्स में मालगाड़ियोंके यातायात पर अतिक्रमण कर चलाना मजबूरी हो गयी थी। जबकी सारे अर्थशास्त्री तक, यह बात भलीभाँति जानते थे, मालगाड़ियोंके बलबूते ही रेल यातायात खड़ी है, चल रही है।

इन सारी हेराफेरी और गाड़ियोंको स्लॉट्स में जबरन घुसाकर चलाने की वजह से न ही माल यातायात ढंग से चल रही थी, न ही प्रमुख गाड़ियोंका व्यवस्थित नियोजन हो पा रहा था और ना ही रेल अनुरक्षण के लिए स्थायी समय मिल रहा था। इधर रेल विभाग लगातार अपनी व्यवस्था, चल स्टॉक को मजबूत करने के लिए आक्रोशित था। कोच और लोको उत्पाद के लिए और इकाइयाँ शुरू करवाई गई। नए अत्याधुनिक तेज गति से चलने में सक्षम LHB कोच का उत्पादन देश मे शुरू हो गया। सिग्नल प्रणाली में आधुनिकता लाई गई। उधर ब्रांच लाइनों में यूनिगेज अर्थात छोटे मीटर गेज, नैरो गेज का रूपांतरण BG बड़ी लाइन में करने का कार्य शुरू किया गया। मगर इससे यात्री गाड़ियोंकी समयसारणी और भी ज्यादा तकलीफ़देह होती जा रही थी। इसका केवल अब एक ही उपाय था, यात्री गाड़ियोंकी समयसारणी की पुनर्रचना और यही है ZBTT या शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम।

अलग अलग क्षेत्रीय रेल्वेज़ को अपने क्षेत्र में रेल अनुरक्षण समय निर्धारित करने कहा गया। उन्हें, उस समय के स्लॉट्स के बीच में आने वाली गाड़ियाँ रद्द करने के लिए नामित करना था। गाड़ियोंकी औसत गति बढ़े इसके लिए छोटे स्टेशन के स्टोपेजेस रद्द किए जाने थे। उसके लिए प्रत्येक स्टोपेजेस के लिए रेल विभाग का अपेक्षित व्यय और उसके ऐवज में उक्त स्टेशन से मिलनेवाली आय इसके आँकड़े जांच कर उनपर स्टोपेजेस रद्द या जारी रखना, इस बात की मुहर लगनी थी। यह एक बहुत बड़ी और देशव्यापी कवायद होनेवाली थी। संक्रमण काल की आपत्ति को इस कवायद के लिए अवसर में बदला जा सकता था। सारी यात्री गाड़ियाँ लगभग 2 महीने बन्द थी और उसके बाद वर्ष भर तक भी गाड़ियोंके फेरे सीमित मात्रा में ही चल रहे थे।

मगर…

मगर हुवा वही जो नही होना चाहिए था। रेल विभाग के पास यह नियोजन तो था, की फलाँ गाड़ी बन्द करनी है, फलाँ स्टोपेजेस रद्द करने है, गाड़ियोंकी समयसारणी आमूलचूल बदलनी है, मगर उसके ऐवज में जो स्लॉट्स खाली हुए थे, उनको अस्थायी रूप से ही क्यों न हो, कुछ इंटरसिटी या कम दूरी की डेमू, मेमू गाड़ियाँ चलवा देते तो जो असंतोष स्थानीय यात्रिओंके मन मे पनपा वह न होता। कम दूरी के रोजाना जानाआना करनेवाले यात्री, इन स्टोपेजेस, गाड़ियाँ रद्दीकरण और नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके अप्रत्याशित बदलाव पहले तो परेशान हुए और बाद में नाराज़।

इस नाराजगी की वजहें एकदम जायज़ थी। सवारी गाड़ियोंको रद्द करना, उसके बदले कुछ गाड़ियोंको डेमू/मेमू एक्सप्रेस में बदल कर अपर्याप्त संख्या में चलाना। रेल विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में डेमू/मेमू रैक नही थे अतः आठ कार की ट्रेन सेट बनाकर हरेक क्षेत्रीय रेल विभाग को कुछ गाड़ियाँ दी गयी और उन्हें सवारी गाड़ियोंके ऐवज में चलवाया गया।सवारी गाड़ी के पुराने कोच की आसन क्षमता इन डेमू/ममुओंसे कहीं अधिक थी। नई आधुनिक, सुसज्जित डेमू/मेमू गाड़ियोंको देख यात्री जितने खुश हुए, उससे कहीं जल्द उनकी यह खुशी काफूर हो गयी और नाराजगी में बदल गयी।

रेल विभाग ZBTT को नियोजनबद्ध तरीके से लागू नहीं कर पा रहा था और इधर स्थानीय यात्रिओंकी विविध माँगोका दबाव, लोकप्रतिनिधियोंके जरिए रेल प्रशासन तक टकराने लगा। आखिर जो नियोजन था, उसमें फिसलन शुरू हुई। एक एक करके अमूमन सारे स्टोपेजेस लौटाए गए और अभी भी लौटाना जारी है।

हालाँकि, अभी यह एकदम से कहना, की ZBTT कार्यक्रम पूर्णतः असफल हो गया, या उसे अब बन्द कर दिया है, उचित नही होगा। यह बात है, की उचित ढंग समयसारणी की पुनर्रचना की गई, जैसा कुछ लग नही रहा है। रेल विभाग ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत सवारी गाड़ियोंकी जगह मेमू ट्रेनसेट लाए। बहुत से रेल मार्ग पर LHB रैक वाली गाड़ियोंको 130 किलोमीटर प्रति घंटे से दौड़ाने की अनुमति प्रदान की। वन्देभारत जैसे ट्रेन सेट वाली प्रीमियम गाड़ियोंका अवतरण साध्य किया। गौरतलब यह है, सभी सीधी चलनेवाली गाड़ियोंमे बीच जंक्शन स्टेशन्स पर होनेवाली शंटिंग लगभग बन्द कर दी गयी है। रेल विद्युतीकरण के व्यापक कार्यक्रम के कारण लोको भी प्रारम्भिक स्टेशन से गन्तव्य स्टेशन तक बिना बदले चल रहे है। लेकिन शून्याधारित समयसारणी के मूल उद्देश्य, समयसारणी की पुनर्रचना से यह कार्यक्रम अब भी दूर ही है, सार्थक नही हो पाया है, ऐसा लगता है।