Editorials, Uncategorised

मिलेनियम एक्सप्रेस की वह रात…

यह आर्टिकल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए लिंक पे क्लिक करे – https://railduniya.in/2019/04/12/the-dark-night-on-millennium-express/

भारतीय लोगोंके जीवन मे रेलवे का एक अटूट सम्बन्ध रहा है। हमारे सुख दुख की साथी है यह रेलवे। लाखों लोग अपने रोजगार की जगह पर जाने के लिए रेलवे का ही उपयोग करते है। कुल मिलाकर भारत मे घूमने, फिरने और रोज की यातायात के लिए रेलवे को कोई भी अन्य और यथायोग्य पर्याय आज तो नही है।

आज अचानक ही पुराने रिकार्ड में ग्वालियर के फार्मसी कॉलेज के अध्यापक महोदय का एक प्रशंसा पर पत्र हाथ लग गया। पत्र पढ़ते ही उस रात की याद ताज़ा हो गई। यह किस्सा है तो काफी पुराना लेकिन है बड़ा ही रोमांचक।

उन दिनों रेलवे के ट्वीटर और फेसबुक अकाउंट नही थे और नाही आप रेलवे के अधिकारियों से सीधे संपर्क कर पाते थे, तो एक रात करीबन दो बजे का वक्त रहा होगा, रेलदुनिया का लैंडलाइन फोन घनघना उठा। सामने से एक बड़ी डरी सहमी सी आवाज़ में एक व्यक्ति बोल रहा था, ” साहब, आधी रात को तकलीफ़ देने के लिए माफी चाहता हूँ, लेकिन प्लीज हमारी मदद कीजिए”

कहानी इस प्रकार थी, वह व्यक्ति जो फोन कर रहे थे, वह ग्वालियर इलाके के फार्मेसी कॉलेज के अध्यापक थे। वे लोग अपने विद्यार्थिनीयोंके साथ, शैक्षणिक यात्रा से ऊटी से ग्वालियर की ओर लौट रहे थे। उनके शयनयान डिब्बे में करीबन 25 आरक्षण थे, डिब्बा इंजिन से दूसरा था और बगल वाला डिब्बा अनारक्षित याने सेकंड जनरल था। सबरीमाला के यात्रियों की बड़ी भीड़ गाड़ी में एकाएक चढ़ी और इन लोगोंके डिब्बे में कुछ असामाजिक तत्व उधम मचाने लगे। रात का वक्त, साथ मे लड़कियाँ, भाषा के कारण संभाषण की दिक्कतें , डिब्बे में कोई रेलवे का न तो RPF और न ही TTE, खतरे की जंजीर खिंचे तो काम नही कर रही थी।

अध्यापक महोदय ने हर सम्भव प्रयास कर लिया था। उन लोगोंसे बातचीत की, उनसे प्रार्थना की, की वे उन्हें अपने आरक्षित जगहों पर से ना उठाए चाहे तो आधी जगह में वो लोग ले ले और बची जगह में लड़कियों को एडजस्ट होने दे। लेकिन वे लोग से अब छेड़छाड़ होने की आशंका भी अध्यापक और उनके विद्यार्थिनीयोंको सताने लगी थी।

गाड़ी थी मिलेनियम एक्सप्रेस और हमारे टूरिस्ट चढ़े थे कोयम्बटूर से। उनकी सारी आरक्षित जगहे पहलेसे ही, एर्नाकुलम से लबालब भर भर के आयीं थी। डिब्बे में तो यह लोग चढ़ गए लेकिन हाल जो हो रहे थे उसका नजारा हमने आपको बताया।

रात मे ईन लोगोने गाड़ी में से लोकल पुलिस को भी फोन लगाने की कोशिशें की, लेकिन मदत नहीं पा सके। उन्होंने एक SOS तरीके की कोशिश करने की सोची और उनके पास रेलदुनिया की किताब में से उसका ऑफिस का नम्बर डायल किया।

अब आगे क्या हुवा, बताते है। रात दो, ढाई बजे जब रेलदुनिया के दफ्तर में कॉल आयी तो यहाँसे तुरन्त उन्हें दक्षिण मध्य रेलवे झोन के RPF के झोनल कमिश्नर का मोबाइल नम्बर दिया गया चूँकि ट्रेन अब तक दक्षिण रेलवे पर कर दक्षिण मध्य रेल पर आ गई थी और खुद रेलदुनिया द्वारा भी कमिश्नर को प्राप्त परिस्थितियों से अवगत कराया गया। उन्होंने फौरन ट्रेन की पोजिशन ली और मार्ग के RPF कार्यलय को सावधान कर दिया। उन्हें कहा गया की पूरे बन्दोबस्त से जाए और यात्रिओंको सुरक्षा प्रदान करे, साथ ही मुख्यालय से ताजा जानकारी साझा करते रहे।

फिर रेल सुरक्षा बल ने जो काम किया है, आप अचंभित हो जाओगे। काटपाड़ी स्टेशन पर गाड़ी रुकते ही RPF दल ने पूरे डिब्बे को घेरा और बल का इस्तेमाल करते हुए डिब्बे के दरवाजे खुलवाए, अंदर प्रवेश कर उन गुंडों को अपने कब्जे में लिया और हमारे यात्रिओंको सुरक्षित किया, उन्हें अपनी जगहों पर बिठवाए। और इतनाही नहीं चार RPF का एक दल हमारे यात्रिओंके साथ, उस डिब्बे में ऑन ड्यूटी तैनात किया जो की ग्वालियर तक उनके साथ चला।

पता नही, लेकिन सफर में किसे किस तरह के अनुभवों से गुजरना पड़ सकता है। खैर, यह तो उन दिनोंकी बात है, आज कल तो रेल विभाग सुरक्षा के प्रति बहोत चाक चौबंद हो गया है। स्टेशनोंपर, गाड़ियोंमें हथियारबन्द पुलिस मौजूद रहते है।

रेलवे पुलिस हेल्पलाइन नंबर १८२.

ऊपर लिखी कथा एक सत्य घटना है। रेल दुनिया सदैव आपकी सेवा में।

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The Dark Night on Millennium Express

Read this article in Hindi : https://wp.me/pajx4R-7h

Railways has an unbreakable relationship in the lives of the Indian people, as a companion of our joys and sorrows . Millions of people use the railway to go to their destination. Overall, there is no other appropriate alternative to the railway for daily short distance commuters in India.

Today, out of blue, a letter from the teacher of the Pharmacy College, Gwalior was found in old records, an appreciation letter. The letter reminisced many old memories. It is an old yet thrilling story.

In those days there was neither twitter nor Facebook account of the railway and you couldn’t contact with railway officials directly. It would have been around two o’clock in the morning, the landline phone of Rail Duniya rang. The person on the other end was speaking in hushed voice, “Sir, I apologize for troubling you at midnight, but please help us”

The story follows, the person who called up, was a teacher of Pharmacy College of Gwalior . They were returning from Ooty to Gwalior with their students, from the educational tour. There were about 25 reservations in the sleeping compartment, second coach from the engine and the adjacent boggie was unreserved general. A large crowd of passengers traveling towards Sabarimala climbed in the coach and some goons started frightening the people in the compartment. It was the night time, the group was facing problem due to language barrier, and there were no railway officials neither the RPF nor the TTE in the couches. The chains for emergency stopping the train were not working.

The teacher had made every possible effort. He talked to them, prayed to them and even offered to share half of their seats and let the girls adjust in the remaining place. But the people were now harassing the teacher and the students.

The train was Millennium Express and our passengers were from Coimbatore. All of his reserved places had already filled up from Ernakulam. These people boarded the train but we already told you the scene of what was happening.

In the night, the people tried to call the local police,  but got no help. Then desparate and distressed, they got the telephone number of our office from our magazine Rail Duniya.

It was the time of action for Railduniya. At 2.30 am, when the call came, we immediately gave the mobile number of the zonal commissioner of the RPF of the South Central Railway Zone. The train had already entered South Central Railway from Southern Railway Zone.

We informed the Commissioner was about the circumstances. He took the position of train immediately and alerted the RPF office on the route. They were asked to go with full preparation and provide security to the passengers, as well as to give all updates to the headquarters.

Then you will be amazed at what the railway security force did. After the train stopped at Katpadi station, the RPF team surrounded the whole compartment and forcefully opened the doors, entered inside and took those goons and secured our passengers, put them in their places. And not so much, a team of four RPF was also deployed on Duty with our passengers in the coach with them till Gwalior.

It is unusual, sometimes, experiences one might have to go through in the journey are  not very good. Well, it is story of old days, today the railway department has become very responsive and alert towards security. Armed police are also present in the trains and at stations.

The above story is a true phenomenon. Rail Duniya is always in your service.

Railways helpline number is 182.

Do share your thoughts and this article with the ones who you think will find it worth reading.

Regards

Rail Duniya

 

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कैसे ले ट्रेनोंमें रिजर्वेशन

छुट्टियां लगते ही बच्चोंका दिल मचलने लगता है, मामा के यहाँ जाना है, बुआ के घर जाना है तो किसी को छुट्टी में सैर सपाटे पर निकलना है।

बच्चे तो छुट्टियोंसे खुश हो जाते है, लेकिन आरक्षण की प्रतीक्षा सूची देख दिमाग़ चकरा जाता है। क्या करे? वेटिंग टिकट ले ले क्या? या तत्काल में ट्राई करें? 4 महीने पहले वेटिंग की टिकट गाड़ी छूटने के दिन तक भी वहीं की वहीं रहती है, मानो पत्थर की लकीर हो। तत्काल तो जैसे आकाल है, भाई किसके नसीब में कहाँ बरसता है, भगवान ही जाने।

देखिए, कुछ जानकारीया आपको देते है, ताकी आप समझे, कौनसा वेटिंग टिकट सही है। जब सारी कन्फर्म टिकट बुक हो जाती है तो RAC वाली बुकिंग शुरू होती और उसके बाद वेटिंग वाली। अब कन्फर्म तो कन्फर्म ही है, पक्का नम्बर मिल जाता है और RAC में आपको सीट नम्बर मिलता है जो यह बताता है की आप गाड़ी में चले आइए, जैसे ही कोई बर्थ की बुकिंग रदद् होती है, आप उसके सबसे पहले दावेदार है।

जो वेटिंग टिकट होती है, उसके तीन प्रकार होते है। पहला GNWL, दूसरा PQWL और तीसरा RLWL। अब थोड़ा ध्यान दे, जो GNWL वेटिंग होती है न वह होती है सबसे मुख्य वेटिंग लिस्ट, याने जनरल वेटिंग लिस्ट। यह वेटिंग टिकट सबसे तेज दौड़ती है। आप इस पर काफी हद तक भरोसा कर सकते है की कन्फर्म हो जाए। यह वेटिंग लिस्ट, जहाँ तक गाड़ी के स्टार्टिंग स्टेशन से गाड़ी के गंतव्य तक वाले टिकटों की होती है या कम यात्रा वाली भी हो सकती है बशर्ते यात्रा गाड़ी के शुरू के स्टेशन से शुरु होती हो।

दूसरी वेटिंग टिकट है, PQWL यह होती है पुलिंग कोटा वेटिंग लिस्ट याने स्टार्टिंग स्टेशन से शुरू होने वाली या गाडीके महत्व के पहले पड़ाव से शुरू होने वाली और कुछ दूरी की यात्रा वाली टिकट या गन्तव्य तक की टिकट। यह वेटिंग टिकट भी GNWL की छोटी बहन ही है। सबसे पहले GNWL को कंफरमेशन की प्रधानता है, उसके बाद इस वेटिंग वालो की टिकटे कन्फर्म होना शुरू होती है।

तीसरी वेटिंग टिकट है, RLWL, रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट। भैया इस वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने का तो आप इंतजार ही करते रह जाओगे। कन्फर्मेशन का सबसे कम चान्स रहने वाली टिकट। यह टिकट रास्ते मे पड़ने वाले बड़े जंक्शन स्टेशनोंको दिए जाने वाले कोटे की टिकट है, जो की बड़ी मुश्किल से सरकती है।

अब आप समझ गए होंगे, यदि कन्फर्म टिकट उपलब्ध नही है तो क्या करना है? भाईसाहब, आजकल लगभग सभी लोग e-ticket बना सकते है तो जहाँसे GNWL टिकट मिल रही है, उसे चेक करो और लो। वेटिंग टिकट लेना ही पड़े तो फर्स्ट चॉइस GNWL वेटिंग टिकट रखो और खास बात टिकट बनाने के बाद अपना बोर्डिंग स्टेशन बदलना है, टिकट लेते वक्त ही बोर्डिंग स्टेशन नहीं बदलना है अन्यथा जो टिकट जनरेट होगी वह PQWL या RLWL निकलेगी। साथ ही साथ यह भी ध्यान रखना है की बोर्डिंग बदलनेका पर्याप्त समय आपके पास है या नही।

तो अब स्मार्ट बन जाए और वेटिंग टिकट में भी कंफरमेशन की संभावनाएं बढ़ाए।

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(Photo credits : Paperboat Drinks.)

Magazine PDF

New Train Index – Update

Dear members, we are sharing with you the updated train index with new trains started and announced.

The trains highlighted in yellow are the newly inaugurated, extension of existing trains, change in frequency and the trains details can be read as a comment by taking the cursor to the highlighted portion.

Kindly take advantage of the index and share with maximum number of your friends and family.

TRAIN INDEX FOR PDF 15 march 19

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Shakuntala Railways: India’s only private railway line.

Shakuntala Railway, the only privately-owned railway line in India offering passenger services, may soon be a part of history. Then Railway Minister Suresh Prabhu has cleared a proposal to take over the narrow gauge line and convert it into broad gauge at an estimated cost of Rs 1,500 crore.
Shakuntala Railway covers a 188-km stretch from Yavatmal to Achalpur in Amaravati district of Maharashtra. The Central Province Railway Company (CPRC), or the Shakuntala Railway, was founded in 1910 by Killick Nixon, a British firm, mainly to transport cotton from the area.
The route was used to ferry cotton from Vidarbha for exporting. But even after the nationalisation of other private sector railway lines, Shakuntala Railway continued to be privately-owned.
According to the contract with CPRC, if the Indian government fails to acquire the line in 2016, it will only be able to acquire it a decade later.
The Indian Railways pays an annual usage fee of Rs 2-3 crore for running two passenger trains and few goods trains on these tracks to CPRC.
Earlier, the railways was not keen on taking over the loss-making line. As per the contract, major expenses above Rs 10,000 must be borne by the company. According to the railways, the rent of using the line was adjusted from the cost of repairs and maintenance. All other lines owned by CPRC got nationalised. Interestingly, even now all the rail signals are from the British era, with a “Made in Liverpool” tag.
According to Indian Railways, on an average, five wagons are booked from Achalpur station to transport goods such as cotton, dry chilly, timber, handloom cloth, rosha oil, coffee seeds, mangoes, guavas and oranges from the area.
Information Compiled by Vignesh ( https://www.instagram.com/chwhaan/?hl=en)
Picture courtesy : Railfan Roopesh Kohad/ Google.

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