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सोलापुर और शिर्डी वन्देभारत अब ठाणे, कल्याण के यात्रिओंको भी अनुग्रहित करेंगी। 😊

03 अगस्त 2023, गुरुवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, द्वितिया, विक्रम संवत 2080

मध्य रेल की दो वन्देभारत एक्सप्रेस, 22225/26 मुम्बई सोलापुर मुम्बई और 22223/24 मुम्बई साईं नगर शिर्डी मुम्बई अपने फेरों में दिनांक 04 अगस्त से ठाणे और कल्याण यह स्टोपेजेस नियमित रूप से जोड़ने जा रही है। समयसारणी निम्नलिखित है,

मित्रों, वन्देभारत एक्सप्रेस की जो बनावट है, अविष्कार है, दरअसल बनी ही ऐसी है की उसे तुरन्त तीव्र गति से चलाया जा सके (क्विक पीकअप) और उतनी ही शीघ्रता से रोकी भी की जा सकती है ( क्विक कण्ट्रोल) और तो और इस परिचालन के दौरान यह गाड़ी विद्युत पुनरुत्पादन भी करती है। (ऑटो जनरेशन) ऐसी विशिष्टता के साथ चलनेवाले इस क्रान्तिकारी अविष्कार को जब यात्रिओंके बेहतर उपयोग हेतु अधिकाधिक स्टोपेजेस दिए जाते है, यात्री उसका उपयोग करते है तो यह बात रेल प्रशासन और क्षेत्र के यात्रिओंके लिए लाभदायक ही है।

रेल प्रशासन को चाहिए की वह सभी वन्देभारत एक्सप्रेस के मार्गोंके यात्रिओंके रुचि और जरूरत, मांग पर विचारपूर्वक निर्णय ले कर उनके स्टोपेजेस बढ़ाए। इससे कुछ वन्देभारत गाड़ियोंमे निम्नतम यात्रीभार के चलते, जो रियायती किरायोंमें चलाने की मजबूरी भरी योजनाओं को लाना पड़ रहा है, शायद उससे भी ना लाना पड़े। वैसे एक अभ्यास के अनुसार किसी वन्देभारत एक्सप्रेस का यात्रीभार 30 प्रतिशत से ज्यादा है तो वह अपने परिचालन खर्च की भरपाई कर रही है।

एक बात और है, वन्देभारत एक्सप्रेस यह संकल्पना बहुत सुन्दर, जबरदस्त है, बस आम यात्रिओंको इसके पर्यायोंसे तुलनात्मक अभ्यास करने की जरूरत न पड़े!😊 आम आदमी अभी भी अपने कमाई को कम्फर्ट और यात्रा अवधि के मुकाबले दाँव पर नही लगाना चाहता है। उसे अभी भी यात्रा अवधि थोड़ा ज्यादा लग रहा है तो उसकी परवाह नहीं है, बशर्ते पैसे दुगने न लगते हो, कुछ बचत हो जाये। जहाँ सड़क परिवहन मुकाबले में आ जाये तो फिर क्या कहने? वहाँ वन्देभारत पसंदीदा श्रेणी में नही आ सकती। इन्दौर – भोपाल मार्ग पर यही हो रहा है। वहाँ मार्ग की वॉल्वो गाड़ियाँ किराए और यात्री बोर्डिंग, डीबोर्ड में कडी टक्कर में है।

खैर, कल्याण, ठाणे के यात्रिओंको वन्देभारत यात्रा की बधाई!☺️

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अमृत भारत योजना के अंतर्गत आम आदमी अब, अपने गाँव, शहर के रेल्वे स्टेशन को अद्ययावत कराने में सहभाग लेगा!

02 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल अपने स्टेशनोंके उन्नतिकरण, सुधार योजना, अमृत भारत मे देश के नागरिकोंको सहभागी कर रही है। आज भारतीय रेल हर रोज तकरीबन 14,000 यात्री गाड़ियोंके जरिये, सवा दो करोड़ यात्रिओंको, देश के 7,500 स्टेशनोंपर सेवा दे रहा है। इन मे से 1,200 स्टेशनोंके रिडेवलपमेंट के कार्य “अमृत भारत स्टेशन” योजना के अंतर्गत किये जाने है। रेल प्रशासन चाहता है, रेल का प्रत्येक यात्री, स्टेशन सुधार में सलाह देकर सहभाग ले।

रेल प्रशासन को निम्नलिखित मदों में, यात्रिओंसे सलाह की अपेक्षाएँ है,

मौजूदा FOB फुट ओवर ब्रिज, ऊपरी पैदल पुलिया के अलावा अतिरिक्त FOB की आवश्यकता

स्टेशनसे प्लेटफार्म पर पहुंचने हेतु यन्त्रचलित सीढियां (एस्कलेटर), उद्वाहन (लिफ़्ट) की आवश्यकता

रेल्वे स्टेशन के अहाते और यात्री बरामदे में यथोचित सुधार

सार्वजनिक शौचालय और साधारण प्रतिक्षालयोंमे सुधार और सुविधाओंकी माँग

स्टेशन के बाहरी रचना को आकर्षक बनाना

स्टेशन की समूची विद्युत प्रकाश योजनाओं में सुधार

स्टेशनपर यात्री सुविधाओंका दृश्य मानकीकरण करना, अर्थात साइन बोर्ड्स, कोच पोजिशन इंडिकेटर, डिस्प्ले इत्यादि की माँग

स्टेशनपर उपलब्ध वाहनतल व्हीकल पार्किंग की सुविधा में सुधार की मांग

प्लेटफार्म्स पर उपलब्ध शेड की सुविधा

यूँ तो रेलवे इन सारी वस्तुविधान के लिए वर्षोँसे समितियाँ बनाती रहती है। स्टेशन लेवल पर प्लेटफॉर्म यूजर कमिटी, मन्डल स्तर पर DRUCC, क्षेत्रीय स्तर पर ZRUCC, NRUCC इत्यादि, लेकिन इस बार रेल प्रशासन से आम यात्री अपनी दरख्वास्त ट्वीट, ईमेल या निम्नलिखित लिंक से सीधे कर सकता है।

https://indianrailways.gov.in/railwayboard/FeedBackForm/index.jsp

अपनी सलाह भेजनेके लिए अंतिम तिथि 15 अगस्त 2023 है। तो चलिए, सुधारिए अपने स्टेशन को अपने हिसाब से! एक ध्यान रखे, आप कहीं स्टोपेजेस, नयी गाड़ियोंको चलवाने की फेहरिस्त मत जोड़ दीजिएगा। ☺️😊

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गोवा एक्सप्रेस का मनमाड़ स्टेशनसे, अपने निर्धारित समय से 85 मिनट पहले छूट जाने के अकल्पनीय हादसे पर मरे की ओर से खुलासा…

30 जुलाई 2023, रविवार, अधिक श्रावण, शुक्ल पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, कल हमारे ब्लॉग पर एक खबर प्रसारित की गई थी, “अरे! हमारी रेल्वे में ऐसा भी होता है?☺️😊” दरअसल तमाम मीडिया में यह ‘गोवा एक्सप्रेस’ वाली खबर उछली और उसपर मध्य रेल को जवाब देना जरूरी था। हम चाहते तो, ‘प्रेस नोट’ को मीडिया वाले संस्कार कर एक अलग पोस्ट बनाकर ला सकते थे, लेकिन हम यहाँ उस प्रेस नोट को यथावत दे रहे है। हालाँकि इसके बाद भी पाठकोंके अनसुलझे सवाल कायम है। पहले आप मध्य रेल की प्रेस नोट समझे, आगे कुछ प्रश्न हम रख ही रहे है,

मध्य रेल
प्रेस विज्ञप्ति

 रेलवे कर्मचारियों के अनुकरणीय प्रयासों ने यात्रियों के लिए आरामदायक यात्रा  सुनिश्चित की

 हुब्बलि मंडल के ब्रागांज़ा घाट खंड के कैसल रॉक – कैरनज़ोल स्टेशनों के बीच भूस्खलन के कारण, 26 जुलाई, 2023 को वास्को डी गामा से शुरू हुई ट्रेन संख्या 12779 वास्को-डी-गामा – हज़रत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस को मडगांव, माजोर्डा के रास्ते चलाने के लिए डायवर्ट किया गया था । जिसे निर्धारित मार्ग पर बिना ठहराव के संवाइडे कुडचडे , कालें, केसलरॉक, लोंडा, बेलगावी, घाटप्रभा, रायबाग, कुडची, मिरज, सांगली, कराड, सतारा, पुणे, दौंड कॉर्ड लाइन, अहमदनगर के बजाय वाया मडगांव, माजोर्डा मदुरे, रोहा, पनवेल, कर्जत और मनमाड के रास्ते चलाया गया।

 दिनांक 27/7/2023 को ट्रेन संख्या 12779 डाउन वास्को डी गामा-हज़रत निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस को उसके निर्धारित रूट मिराज-पुणे-दौंड कॉर्ड लाइन के बजाय पनवेल-कल्याण-मनमाड के रास्ते डाईवर्ट किया गया था । इस डाईवर्जन के कारण, ट्रेन का मनमाड स्टेशन पर आगमन अपने निर्धारित समय से पूर्व 9:01 बजे हुआ और प्रस्थान 9:10 बजे जो अपने पूर्व निर्धारित समय के स्थान पर 10:35 बजे के बजाय 85 मिनट पूर्व ही मनमाड़ स्टेशन से हो गया । ट्रेन के समय से पूर्व प्रस्थान करने के कारण 3 ऑन बोर्ड टिकट चेकिंग स्टाफ और 44 आरक्षित यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं सके।

 इस भगदड़ की स्थिति को स्टेशन कर्मचारियों द्वारा बड़ी सूझ-बूझ के साथ प्रबंधित किया गया और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की सुगम व्यवस्था की गई । स्टेशन प्रबंधन द्वारा वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था के संबंध में मनमाड स्टेशन पर बार-बार घोषणा की गई, यात्रियों के मार्गदर्शन और मदद के लिए टिकट चेकिंग स्टाफ और आरपीएफ कर्मियों को तैनात किया गया।  सभी यात्रियों को बैठने की व्यवस्था और जलपान भी प्रदान किया गया।  उप स्टेशन अधीक्षक की निगरानी में तीन यात्रा टिकट परीक्षक और 5 और टीटीई (कुल 8 टिकट चेकिंग स्टाफ), 3 रेलवे सुरक्षा बल के जवान, 3 वाणिज्यिक कर्मचारी  यात्रियों की मदद में निरंतर जुटे हुए थे ।  इस बीच, ऑपरेटिंग और वाणिज्यिक कर्मचारियों ने ट्रेन संख्या 12859 सीएसएमटी-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस को मनमाड में विशेष ठहराव (हॉल्ट) प्रदान करने के प्रयास किए और 8 टीटीई बचे हुए यात्रियों के साथ गीतांजलि एक्सप्रेस में जलगांव तक गए।  जलगांव में, स्टेशन प्रबंधक के साथ 2 और टीटीई, 2 आरपीएफ ने यात्रियों आगे की यात्रा में मदत कर जलगांव में उनकी निर्धारित ट्रेन 12779 वास्को डी गामा – हजरत निजमुद्दीन एक्सप्रेस में चढ़ने की व्यवस्था की।

यात्री अपनी यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए रेलवे कर्मचारियों द्वारा की गई व्यवस्थाओं और प्रयासों से प्रसन्न और संतुष्ट थे।

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 दिनांक: 29 जुलाई, 2023
 पीआर नंबर 2023/07/47
 यह प्रेस विज्ञप्ति जनसंपर्क विभाग, मध्य रेल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई द्वारा जारी की गई है

मित्रों, रेल विभाग कोई ‘वन मैन शो’ तो नही है। पूरा का पूरा महकमा लगा रहता है।

जब गाड़ी अपने निर्धारित समयसे 90 मिनट, रेल्वेके हिसाब से 85 मिनट पहले आयी तो उसकी रिपोर्टिंग कमर्शियल कंट्रोल पर हुई होगी। परिचालन विभाग ने भी समझा होगा। गाड़ी के लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर याने गार्ड, चेकिंग स्टाफ़ जो मनमाड़ जंक्शन पर अपनी ड्यूटी बदल रहे थे। क्या किसी ने इस बात पर आपत्ति नहीं ली होगी? क्या गार्ड, लोको पायलट इगतपुरी से भुसावल तक थ्रू बुक किए गए थे? क्या मनमाड़ से नया परिचालक दल, वाणिज्यिक दल बदला नहीं गया था? क्या मुख्यालय से 12779 वास्को निजामुद्दीन गोवा एक्सप्रेस को मनमाड़ से निर्धारित समयसारणी से चलाने की अग्रिम सूचनाएं नही मिली थी?

गौरतलब यह है, रेल विभाग ने डैमेज़ कंट्रोल बखूबी निभाया। यात्रिओंको संभालकर, सहेजकर अपनी नियोजित रेल यात्रा में फिर पुनर्स्थापित किया। मगर जो प्रश्न यात्रिओंको खाये जा रहे है, वह रेल विभाग की ‘इंटर्नल इनक़्वायरी’ से शायद ही मीडिया तक पहुँचेंगी। कहते है न, बून्द से गयी वह हौज से क्या आएगी? 😢

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अरे! हमारी रेल्वे में ऐसा भी होता है?☺️😊

29 जुलाई 2023, शनिवार, अधिक श्रावण, शुक्ल पक्ष, एकादशी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल में कुछ ऐसी घटनाएं भी हो जाती है, की आम आदमी चौंक जाता है, आश्चर्यचकित हो जाता है, अरे! ऐसे भी हो सकता है?

फिलहाल पूरे रेल नेटवर्क पर कहीं न कहीं तकनीकी कार्य चल रहे है। कहीं रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण चल रहा है तो कहीं रेल मार्ग को विद्युतीकरण से अद्ययावत किया जा रहा है। इन कार्योंके चलते रेल विभाग कुछ समय के लिए रेल मार्ग ब्लॉक करती है और यात्री गाड़ियोंको रद्द/आँशिक रद्द या मार्ग परिवर्तन कर चलाती है। इन्ही कारणोंसे अनेक गाड़ियाँ अपने नियोजित समयसारणी से कई घण्टों देरी से चलती है। 2,4,6 घण्टोंकी देरी यात्री को समझ आती है, मगर 24 घण्टे, 30 घण्टे? 😊 दपुमरे पर आज़ाद हिंद एक्सप्रेस यह कारनामा करती है। दरअसल दपुमरे क्षेत्र में नागपुर से बिलासपुर के बीच अलग अलग खण्डोंमे रेल तिहरीकरण कार्य बड़े ज़ोरोंसे चल रहा है। जब जब यह तीसरी लाइन, पहले बिछी हुई मुख्य दो लाइनोंसे जोड़ी जाती है, सम्बंधित विभाग रेल ब्लॉक करता है और यात्री गाड़ियोंका ‘शेड्यूल’ पूरी तरह अस्तव्यस्त हो जाता है। चूँकि आज़ाद हिंद एक्सप्रेस बारों माह ‘फुल्ली बुक्ड’ अवस्था मे रहती है, उसे रद्द करना बहुत मुश्किल हो जाता है, और उसे देरी से ही सही चलाया जाता है।

यह तो हुवा तकनीकी कारणोंसे देरी की अवस्था, जो की विभाग को पता रहती है, पूर्वनियोजित रहती है। मगर कुछ अवांछित कारणोंसे भी यात्री गाड़ियाँ अपनी समयसारणी बिगाड़ देती है। वह है, अतिवृष्टि से ट्रैक की गिट्टी खिसकना, पटरियों पर चट्टानों का आ जाना या किसी ‘फ्रेटर’ मालगाड़ी का ‘फ़ेल’ होना। ऐसे में रेल विभाग को आननफानन में निर्णय लेना पड़ता है, और यात्री गाड़ियाँ जो अपने प्रारम्भिक स्टेशन से यात्रा शुरू कर चुकी है, उन्हें किसी तरह, मार्ग परिवर्तन कर या डिटेन, नियंत्रित कर गन्तव्योंतक पहुंचाने का भरकस प्रयास किया जाता है। ऐसी अवस्था मे जो यात्री गाड़ी के आखिरी स्टेशन तक यात्रा कर रहा है, वह तो देर-सवेर अपने स्टेशन पहुंच जाता है। दिक्कत ऐसे यात्रिओंकी होती है, जिन्हें ऐसे स्टेशनोंपर उतरना या चढ़ना है जो स्टेशन मार्ग परिवर्तन के चलते ‘स्किप्ड’ अर्थात मार्ग परिवर्तन के चलते अब गाड़ी ‘टच’ नहीं करेंगी, भयंकर हो जाती है। उन बेचारों को सूझता ही नही की गाड़ी में कैसे चढ़ेंगे या कहाँ उतर अपने घर पहुंचेंगे। 😢

खैर, हम बता रहे थे, ऐसे ही एक मार्ग परिवर्तन वाली गाड़ी की विचित्र कथा। वास्को से हज़रत निजामुद्दीन के बीच चलनेवाली गोवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस, हुब्बाली जंक्शन से आगे भूस्खलन की वजह से मार्ग परिवर्तन कर चलाई जा रही थी। यह गाड़ी नियमित मार्ग लौंडा, मिरज, पुणे की बजाय कोंकण रेलवे के मडगांव, पनवेल, कल्याण होकर मनमाड़ आने वाली थी और मनमाड़ से आगे अपने नियमित मार्ग से हज़रत निजामुद्दीन को जानेवाली थी। चूँकि गाड़ी मार्ग परिवर्तन कर चल रही थी, उसे मनमाड़ तक किसी भी स्टेशनपर स्टोपेजेस लेने का कोई टाइमटेबल नही था। उसे अपने शेड्यूल को मनमाड़ स्टेशन से फॉलो करना था, जो सुबह 10:30 को पहुंचना और 10:35 को निकलना था। गाड़ी अपने ‘अनशेड्यूल्ड’ रन में धड़धड़ाते सुबह 9:00 बजे ही मनमाड़ पहुंच गई और पता नहीं रेल्वे कण्ट्रोल विभाग ने क्या सोचा, क्या समझा 😊 और गोवा एक्सप्रेस को 9:05 पर मनमाड़ से भुसावल की ओर रवाना कर दिया। हड़कंप तो तब मचा, जब मनमाड़ से सवार होनेवाले 45 यात्री गाड़ी के नियोजित समयानुसार सुबह 10:00 बजे स्टेशनपर पहुंचे। गाड़ी जा चुकी है, 90 मिनट पहले ही रवाना हो चुकी है यह सुन भौचक्के रह गए।

अब शुरू हुवा, डैमेज़ कंट्रोल! पीछे से भुसावल की ओर जानेवाली गीतांजलि एक्सप्रेस मनमाड़ को पहुंचने को थी। हालाँकि इस गाड़ी का मनमाड़ स्टेशनपर शेड्यूल्ड स्टोपेज नहीं है, उसे रोका गया और गोवा एक्सप्रेस से बिछड़े यात्रिओंको उसमे बिठाकर रवाना किया गया। गोवा एक्सप्रेस का मनमाड़ से चलने के बाद सीधे जलगांव स्टोपेज है, उसे गीतांजलि एक्सप्रेस जलगाँव पहुंचने तक रोका रखने की सूचनाएं दी गयी, और इस तरह बिछडोंका मेल साधा गया।

तो भईया, रेल में भी रेलमपेल हो सकता है।😊😊

लेख में उधृत तस्वीरों के लिए हम indiarailinfo.com के आभारी है।

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भारतीय रेल और उस के ज्ञानी, धनी ‘यूट्यूबर’

28 जुलाई 2023, शुक्रवार, अधिक श्रावण, शुक्ल पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल को देश की नैशनल करियर अर्थात जनता जनार्दन की यातायात का साधन माना जाता है। लेकिन इस 4G, 5G की ‘अनलिमिटेड’ उपलब्धतता के चलते भारतीय रेल देश के बेरोजगार युवाओं के रोजगार का भी साधन बन गयी है। कैसे? चलिए बताते है,

एक साधारण गणना में, देश मे लगभग 90 करोड़ स्मार्ट फोन धारक है। इन फोन्स के जरिए कुछ युवा ‘यू ट्यूब’, इंस्टाग्राम, फेसबुक रिल्स बनाकर उसे अपलोड करते है। अमूमन 3 मिनट की वीडियो को 5000 व्ह्यू मिले तो 1$ की आमदानी होती है, इस तरह मोटामोटी हिसाब है। ऐसे कोई अपना ज्ञान, समझ और सूझबूझ के जरिये कुछ आय अर्जित कर रहा है, तो इसमे बुराई क्या है? कुछ भी नही, बढ़िया है! मगर दिक्कतें आगे है, इनकी बेदरकारी, लापरवाही में है।

इन यूट्यूब जीवियोंमे अनेक लोग ऐसे भी है, जो सादी सी बात को बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत करते है या कई बार गलत जानकारियाँ भी परोस देते है। बेसिरपैर के टाइटल लगाकर वीडियो, रिल्स अपलोड कर देते है, ताकी उनके व्ह्यू बढ़े। ऐसी गलतसलत जानकारियोंसे यात्री गुमराह भी हो सकते है। किसी का आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।

यह यू ट्यूब के जरिए कमाने हेतु, यह युवा गैरजिम्मेदाराना हरकतें करने पर आमदा हो जाते है। रेल की पटरियों पर, तेजी से आती रेल के सामने, छोटी रेल की पुलिया के नीचे खड़े होकर, तेज चलती रेल के दरवाजोंपर लटक कर यह लोग वीडियो बना बना कर उसे अपलोड़ करते है। जितना वीडियो ‘हट के’ उतने व्ह्यू ज्यादा और जितने व्ह्यू ज्यादा उतनी नाम, फेम, सब्सक्राइबर और इन्कम ज्यादा। इस ज्यादा ज्यादा के लालच में यह लोग भारतिय रेल के तकनीकी मामलों और ऐसी जगहोंपर पहुंच जाते है, जो की आम लोगोंके लिए प्रतिबंधित है। यहाँ तक की उन प्रतिबंधित तकनीकी सामग्री के वीडियो यह लोग अपलोड कर देते है तो उनको यह अहसास तक नही होता, इन सामग्रियों का उपयोग कुछ शरारती तत्व देश विघातक कार्रवाईयोंमें कर सकते है।

पातालपानी – कालाकुंड खण्ड पर कोई पटरी ही नही है, वन्देभारत कहाँसे चल गई? 😢

युवक युवतियाँ यह वीडियोग्राफी के काम करते है, जो प्रतिबंधित है, उन्हें उचित समझाइश देकर रोका जा सकता है। मगर उन ड्यूटी कर्मियोंको का क्या करें जो रेल्वेके सुरक्षा बलों में, रेल के लोको में और सिग्नलिंग डिपार्टमेंट में तैनात है। बाकायदा हर महीने सरकारी तनख्वाह ले रहे है और काम वीडियोग्राफी कर यू ट्यूब और फेसबुक रिल्स का कर रहे है। आप चकित रह जाएंगे इनमेसे कुछ वेतनभोगियों की यूट्यूब आमदानी 10 से 20 लाख रुपए वार्षिक तक है, इनके सब्सक्राइबर्स दस दस लाख है। क्या यह लोग अपने फर्ज के प्रति सजग है, अपनी ड्यूटी सही तरीके से कर रहे है? यदि इसका जवाब हाँ है, तो देश के असंख्य कर्मचारियों, सैनिकों, डॉक्टरोंके लिए अतिरिक्त रोजगार का नया दरवाजा खुल गया है। नैतिकता, अनैतिकता, गोपनीयता, सुरक्षितता गयी तेल लेने। बस! अपनी वीडियो, रिल्स बनाना है, उन्हें अपलोड करना है, अपने सब्सक्राइबर बढाना है और अपनी आय बढाना है।

मित्रों, टेक्नोलॉजी हमारे हाथ मे है। उसका उपयोग किस तरह करना है और किसके लिए करना है यह हमारा विवेक हमे सिखाता है। जिस फर्ज, ड्यूटी पर आप तैनात हो, उसकी जिम्मेदारी समझना जरूरी है। आपकी रोजीरोटी वह नौकरी है, न की यह यू ट्यूब और रिल्स की आमदानी। यही बात उन युवाओं के लिए भी, आप टेक्नोलॉजी का उपयोग अपनी उन्नति के लिए कीजिये। यह खुद और देश के जान माल को दाँव पर लगाकर इस तरह वीडियो बनाने और पैसा बनाने में कोई अर्थ नहीं और न ही यह कोई शाश्वत रोजगार हो सकता है।

लेख में प्रस्तुत तस्वीरें इंटरनेट, विविध ई-पेपर्स से साभार