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मध्य रेल की दोनों “वन्देभारत”

08 फरवरी 2023, बुधवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2079

मध्य रेल CR की दो वन्देभारत गाड़ियोंका उद्धाटन दिनांक 10 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे है। यज्ञपी यह दोनों गाड़ियाँ सप्ताह में 6 दिन चलनेवाली है।

22223/22224 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – साईं नगर शिर्डी – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सप्ताह में 6 दिन चलेगी। मंगलवार को दोनोंही दिशाओं से नही चलेगी।

22225/22226 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – सोलापुर – मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस सप्ताह में 6 दिन चलेगी। मुम्बई से बुधवार और सोलापुर से गुरुवार को नही चलेगी।

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पश्चिम रेल्वे WR के अहमदाबाद मण्डल में, मेहसाणा स्टेशन की यार्ड रिमॉडलिंग के चलते 8 फरवरी से 04 मार्च तक 24 गाड़ियाँ रद्द, 02 गाड़ियाँ आंशिक रद्द और 16 गाड़ियाँ मार्ग परिवर्तन कर चलेंगी।

08 फरवरी 2023, बुधवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2079

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रेलवे प्लेटफार्म की इस ‘सफाई’ की अब आवश्यकता है।

08 फरवरी 2023, बुधवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तृतीया, विक्रम संवत 2079

हाल की खबर है, मुम्बई के कल्याण स्टेशन पर प्लेटफार्म क्रमांक 4 और 5 ‘सफाई’ जारी है। आप कहेंगे, बीते 5, 7 वर्षोंसे लगभग सभी रेलवे स्टेशन काफी साफ-सुथरे दिखाई देने लगे है, फिर कल्याण में ऐसा क्या है?

कल्याण स्टेशन मध्य रेल का बेहद व्यस्त जंक्शन है। इसके 4/5 क्रमांक के प्लेटफार्म पर दिनभर में तकरीबन 277 गाड़ियोंका आवागमन चलता है, जिसमे सौ से ज्यादा मेल/एक्सप्रेस और मेन लाइन की उपनगरीय गाड़ियाँ शामिल है। यह आइलैंड प्लेटफार्म अर्थात प्लेटफार्म के दोनों दिशाओं में रेल पटरियाँ, क्रमांक 4 पर मुम्बई से कर्जत, पुणे और कसारा, नासिक की ओर जानेवाली गाड़ियोंके लिए और प्लेटफार्म क्रमांक 5 उपरोक्त मार्गोंसे मुम्बई की ओर जानेवाली गाड़ियोंके लिए उपयोग किया जाता है। आसानी से समझा जा सकता है, कितनी भीड़ इन प्लेटफार्म पर रहती होगी। आँकड़े बताते है, करीबन 2 लाख लोग प्लेटफार्म 4/5 का उपयोग करते है।

कल्याण स्टेशन के इस आईलैंड प्लेटफार्म पर, बीचोंबीच करीबन 750 वर्ग मीटर की जगह को घेरे ब्रिटिश काल से बने रेल्वेके 3, 4 कार्यालय बने हुए थे। जिसमें सहायक स्टेशन मास्टर, टिकट जांच, रेल सुरक्षा बल इत्यादि कर्मियोंके कामकाज चलते थे। इन दफ्तरों की वजह से 7 मीटर चौड़ा प्लेटफार्म सिकुड़कर 2-2 मीटर का रह गया था। यात्रिओंको गाड़ी पकड़ने, गाड़ी के आने के बाद डिब्बा ढूंढ उसमे सवार होने में बहुत तकलीफ़ होती थी। साथ ही सम्बंधित कार्यालय के कमियोंको भी असुविधाएँ हो रही थी। यात्री गाड़ी में सवार न होने की सूरत में ACP अलार्म चेन पुलिंग की जाती थी। पता चलता है, मध्य रेल पर चेन पुलिंग के मामलोंमें कल्याण स्टेशन का आँकड़ा सबसे ज्यादा है। आखिरकार रेल प्रशासन ने इस जगह को यात्रिओंके हित मे खाली करने का निर्णय लिया और वहीं सफाई अभी जारी है।

फिर हम और कौनसी ‘सफाई’ की बात करना चाहते है? जी, बिल्कुल ठीक सोच रहे है आप। यात्रिओंके मन की ही बात है। कल्याण जैसे ही अनेकों व्यस्ततम स्टेशनोंपर, प्लेटफार्म के बीचोंबीच लगे कैन्टीन, खानपान के ठेले, उनसे जुड़े खोमचे वाले विक्रेता गाड़ी के प्लेटफार्म पर प्रवेश करते ही अधिकृत यात्रिओंसे ज्यादा भीड़, होहल्ला मचाते है, इन पर रेल प्रशासन क्या सोचता है?

स्टेशनोंपर अस्वच्छता फैलानेवाले अनेक तत्वों में प्रमुख, खाद्यान्न के गुणवत्ता की रत्तीभर की गारंटी नही, रेल्वे स्टेशनोंके एकाधिकार का पुरेपुर लाभ उठाते हुए बेहद तल्ख भाषा का प्रयोग करनेवाले विक्रेता, खाद्यान्न का तोल, वजन, संख्या, पैकेजिंग प्रत्येक मद में असन्तुलन। क्या यह रेल प्रशासन की गरिमा को बढाने का काम करते है? कदापि नही। आये दिन पानी की बोतल के दाम पर आपको शिकायतें मिल जाएंगी। जिसमे भी 90% लोग चुपचाप मांगे वही दाम चुकाकर सामान खरीद लेते है। रेल प्रशासन कहता है, बिना रिसीट, बिल के दाम न दे, फ्री, मुफ्त ले जाये। ज़नाब, कौनसी दुनिया मे है आप? बिना दाम लिए, आप खाद्यान्न को हाथ तो लगाकर दिखाए! जो आपने सामान उठा भी लिए तो अभद्र भाषा से आपको झाड़कर आपके हाथ से सामान छीन लिया जाता है। फिर पूरा प्लेटफार्म घुमलो आपको कोई सामान नही देगा। खाने का दाम लिखने का कुछ और बेचने का कुछ और ही होता है।

गुणवत्ता के मामले में राम ही राजी है, अर्थात भगवान ही मालिक है। प्याज के पकौड़े के नाम पर पत्ता गोभी के पकोड़े खिलाए जाते है और मकदूर है, की आप उस वेण्डर को सामने से शिकायत कर दो, आप की ऐसीतैसी न हो जाए? चाय का दाम ₹5/- लिखा है, बस लिखा है। ₹10/- कम में चाय और ₹20/- से कम में कॉफी किसी रेलवे स्टेशन केवल किसी अफसर या यात्री समिति सदस्य को ही मिलती होगी। रही बात पके, तले नाश्ते की, उसका कोई भरोसा नही की वह दो दिन पुराने मसालोंको ही गर्म कर परोसा जा रहा है। टेस्ट बिगड़ा लगा तो फेंक दीजिए, शिकायत और वह भी सामने, बहुत मुश्किल है।

हाल ही में पैकेज्ड फूड की तारीख उतरी हुई की शिकायत एक यात्री समिति के सदस्य ने खुद की। वह सदस्य भुक्तभोगी था, अतः रेल अधिकारियों द्वारा कुछ कार्रवाई की गई, अन्यथा किसी अधिकारी के पास यात्रिओंकी सुविधाओंकी तरफ ध्यान देने का कहाँ वक्त है? शिकायत के बाद शायद कार्रवाई होती हो, मगर दक्षता रखने की सूरत में तो शायद ही होती होगी। जितने वेन्डर्स प्लेटफार्म पर उधम मचाते है, उतने ही आपको चलती गाड़ियोंमे अवैध विक्रेताओं की सूरत में भी मिल जाएंगे।

यह विषय इतना बड़ा है और उतना ही कोयले जैसा काला। कितना ही घिस लो, काला ही निकलेगा। हालाँकि भारतीय रेल के सभी स्टेशनोंपर यह अवस्था न होगी, कुछ स्टेशन तो अपने व्यंजनों से जाने जाते है लेकिन दूध का जला छाँछ भी फूँक कर ही पियेगा न? इसका सिर्फ एक इलाज है, यात्री अपना खानपान खुद अपने हिसाब से लेकर निकले। चलती गाड़ी में तो अवैध विक्रेताओं से बिल्कुल ही न खरीदे। रेल प्रशासन ने चाहिए की अवैध विक्रेताओंपर लगाम लगाये। स्टेशन वेन्डर्स की सँख्या पर नियंत्रण करे, हर रोज गुणवत्ता जाँच के लिए किसी अधिकारी, कर्मियोंकी नियुक्ति हो और साथ ही उसकी जवाबदेही भी तय हो। अनुचित व्यवस्थामें पाए जाने पर तुरन्त कार्रवाई की जाए और उस अवस्था मे भरपाई यात्री को मिले न की सिर्फ प्रशासन उसे दण्डित कर जारी रखते चली जाए और यदि किसी स्टेशन पर यह सम्भव न हो तो वहाँ कैन्टीन, फूड स्टॉल बन्द कर दे। इसके अलावा कैन्टीन से बाहर निकल स्टॉल, खोमचे, ठेले चलाने की अनुमति कतई न दी जाए और ऐसी अवस्था मे कैन्टीन का परमिटधारक पाया जाए तो उसकी अनुमति रद्द हो।

कचरा, गन्दगी की सफाई तो अच्छे से हो रही है, अब कचरा, गन्दगी करने वालों, अवैध व्यवसाय कर भारतीय रेलवे की गरिमा को बाधा पहुंचाने वालोंके ‘सफाई’ की आवश्यकता है।

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भारतीय रेलवे के विभिन्न्न क्षेत्रों में कई यात्री गाड़ियोंके स्टोपेजेस पुनर्स्थापित किये गए

07 फरवरी 2023, मंगलवार, फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, द्वितीया, विक्रम संवत 2079

गौरतलब यह है, रेलवे बोर्ड के इस सम्बंध में लगभग 15 परिपत्रक है, और सारे स्टोपेजेस ‘एक्सपेरिमेंटल बेसिस’ पर अर्थात 6 महीने की प्रायोगिक अवस्थाओं में दिए गए है। कहते है न, ‘बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?’ इन एक्सपेरिमेंटल पड़ावों वाले स्टेशन के यात्री रेल प्रशासन से पूछना चाहते है, आखिर कितने दिन यह एक्सपेरिमेंट चलना है? कब तक तसल्ली करना चाहती है रेलवे, की यह स्टोपेजेस यात्रिओंके लिए जरूरी है। ☺️

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‘वन्देभारत’ ने थल और भोर दोनोंही घाट का पानी चखा! चढ़ाई/ढलान परीक्षा में उत्तीर्ण!! 😊

आज सुबह 11 बजे से मण्डल एवं क्षेत्रीय अधिकारोंके साथ यह घाट परीक्षण शुरू हुवा जो अभी थोड़ी ही देर पहले सफलता के साथ सम्पन्न हुवा।

पहला परीक्षण थल घाट का था। वन्देभारत मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से दोपहर 11:25 को निकली, और बिना कहीं रुके कल्याण स्टेशन पर मात्र 39 मिनट में 12:04 को पहुंची। इस रन में उसने लोकमान्य तिलक टर्मिनस जयनगर पवन एक्सप्रेस और लोकमान्य तिलक टर्मिनस छपरा एक्सप्रेस को ओवरटेक किया। थल घाट चढ़कर गाड़ी 13:20 को इगतपुरी पहुंची। गाड़ी तुरन्त ही 14:20 को वापिस कल्याण की ओर रवाना हुई। उसका अगला मिशन भोर घाट सर करना जो था।

Photo courtesy : Rajendra B Aklekar

कल्याण में दूसरे भोर घाट परीक्षण के लिए उसे कर्जत – खन्ड़ाला – लोनावला जाना था। इगतपुरी से 14:20 को निकली वन्देभारत, 15:40 को कल्याण पहुंची। 15:48 को मिशन भोर घाट शुरू हुवा। कल्याण 15:48, अम्बरनाथ 15:54, बदलापुर 15:58। कर्जत 16:37 और भोर घाट चढ़कर 17:18 को खन्ड़ाला पहुंच गई। अगला पड़ाव लोनावला 17:30 को पहुंची और परीक्षण पूरा हुवा। इस तरह वन्देभारत एक्सप्रेस दोनोंही घाट में गाड़ी की गति और स्थिरता अपने पार्किंग ब्रेक्स की परीक्षा से साथ 100% उत्तीर्ण हुई। 17:39 को अपनी वापसी यात्रा शुरू की।

यह सारी नैरेशन, रेल फैन ईशान दाते और नावेद जी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया है।