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मध्य रेल की ‘टॉय ट्रेन’ का मजा, फिर से बहाल। नेरल – माथेरान रेल दिनांक 22 अक्टूबर से यात्री सेवा मे

रेल प्रेमियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबर है, नेरल माथेरान नेरल अपने पूर्ण मार्ग पर दिनांक 22 अक्टूबर से बहाल की जा रही है। विशेष बात यह है, यात्रिओंको इस गाड़ी में पारदर्शक विस्टा डोम कोच की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है जिससे यात्री कोच में बैठे बैठे घाटी, पहाड़ीयोंका का लुत्फ उठा सकेंगे।

यूँ तो टॉय ट्रेन के मजे लेने के लिए महाराष्ट्र के रेल यात्रिओंको दार्जिलिंग या फिर दक्षिण में नीलगिरी पहाड़ी, हिमालय में कालका शिमला का रुख करना पड़ता है या फिर किसी रेल म्यूजियम में छोटी सी सवारी से अपना मन सन्तुष्ट करना पड़ता है। अब यह छोटी रेल गाड़ी के सवारी की तमन्ना मुम्बई – पुणे रेल मार्ग पर पड़नेवाले ब्रांच लाइन, नेरल – माथेरान से पूरी हो सकती है।

लेख की तस्वीरों के लिए हम रेल प्रेमी पत्रकार श्री राजेंद्र जी अकलेकर @rajtoday (ट्वीटर अकाउंट) के सादर आभार प्रकट करते है।

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बुनियादी परिचालन क्षमता और वन्देभारत ट्रेनसेट गाड़ियाँ

ज़ाहिर सी बात है, जब 200 वन्देभारत गाड़ियाँ चलाने बात हो चुकी है, तो प्रत्येक क्षेत्र को यह ट्रेनसेट का प्रसाद बंटना तय है। फिर क्यों ऐसी हुल्लड़ मची है?

वन्देभारत गाड़ियोंको लेकर अलग अलग घोषणाएं प्रत्येक क्षेत्र आये दिन करते जा रहे है। पाँचवी वन्देभारत गाड़ी दक्षिण रेलवे के चेन्नई – बंगालुरु – मैसुरु के बीच तो छठी सिकन्दराबाद – विजयवाड़ा के बीच चलने की बात सामने आ रही है। साथ ही महाराष्ट्र में मुम्बई – सोलापुर के बीच भी जनवरी 2023 से वन्देभारत चलने लग जायगी यह सुनने में आ रहा है।

वन्देभारत गाड़ी, जिसकी परिचालन क्षमता 180kmph है मगर जितनी भी आगामी परिचालन की घोषणा की गई, क्या उन मार्गों के ट्रैक और इतर बुनियादी सुविधाएं इस सेमी हाई स्पीड गाड़ी के लिए उपयुक्त है? शायद नही। फिर यह गाड़ियाँ किस तरह चलनेवाली है? 110 kmph की गति से? शायद हाँ। खैर, वैसी भी चले तो यात्रिओंको नई गाड़ी की दरकार है। अब वन्देभारत चले या वन्देमातरम (इति : महाराष्ट्र के माननीय उप मुख्यमंत्री महोदय) यात्री को केवल अपने गन्तव्य स्टेशन की रेल चाहिए।

अब मुम्बई – सोलापुर की बात ले लीजिए, आज ही ख़बरों में वहीं बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए है और कहा गया है, आने वाले ड़ेढ वर्ष तक इस मार्ग पर सेमी हाई स्पीड गाड़ियोंका दौड़ना सम्भव नही होगा। वैसे वन्देभारत गाड़ियाँ जहाँ चलनी थी उन रेल मार्गोंपर बाड़ भी लगाए जाने की बात थी जो सिवा दिल्ली – मथुरा रेल मार्ग के अलावा कहीं ओर तो शुरू भी नही किया गया है। ऐसे में मवेशियों के रेल से टकराने के हादसे हो रहे है।आप सहज ही समझ सकते है, की कोई रेल 180 kmph अर्थात 1 मिनट में 3 किलोमीटर या 20 सेकण्ड में 1किलोमीटर की गति से आ जाती है तो मवेशियों को क्या आम रेल कर्मी जो पटरियों पर काम करते रहता है, कितना कम मौका मिलेगा पटरियों से हटने का?

एक एक वन्देभारत गाड़ियाँ शुरू करने की घोषणाएं इतनी जल्दी तेजी से की जा रही है, की ऐसा लगता है, आने वाले दिनोंमें यह हाई स्पीड ट्रेनसेट शायद बहुत दिनोंतक साधारण मेल/एक्सप्रेस के जैसे ही औसत गति से चलती नजर आए।

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दीपावली पर्व पर पुणे, मुम्बई से नागपुर के लिए अतिरिक्त गाड़ियाँ चलाई जानी चाहिए।

मध्य रेल CR हमेशा की तरह इस बार भी अपनी गिनी चुनी त्यौहार विशेष गाड़ियोंकी सूची लेकर आयी। जिसमे मुम्बई – नागपुर और पुणे – नागपुर के बीच केवल एक एक विशेष साप्ताहिक गाड़ी चलाई गई।

ग़ौर करने की बात यह है, मुम्बई, पुणे और नागपुर यह तीनों ही स्टेशन मध्य रेल के अंतर्गत आते है, लेकिन मध्य रेल लम्बी दूरी याने लखनऊ, दरभंगा, बलिया, गोरखपुर इत्यादी स्टेशनोंपर ज्यादा ध्यान देती है और स्थानीय यात्री बेचारे ताकते रह जाते है। ऐसे भी पुणे – नागपुर के बीच दिनांक 04 से 20 अक्टूबर कालावधि में एक प्रतिदिन चलनेवाली महाराष्ट्र एक्सप्रेस और कई साप्ताहिक गाड़ियोंको रद्द कर दिया गया है। वह तो जाने कहाँ से सुबुद्धि आई के पुणे नागपुर पुणे त्रिसाप्ताहिक एक्सप्रेस को पूर्वसूचित रद्द से पुनर्बहाली की निर्णय लिया गया, अन्यथा पता नही पुणे – नागपुर के बीच चलनेवाले यात्रिओंके क्या बुरे हाल होते।

आज भी यह स्थिति है, पुणे, मुम्बई से नागपुर, जबलपुर, भोपाल के लिए सैकड़ों वेटिंग लगी पड़ी है और रेल प्रशासन कोई हरकत लेने के मुड़ में नही है। ना ही अतिरिक्त कोच की व्यवस्था की जा रही है और ना ही कोई विशेष गाड़ी की। रेल प्रशासन को चाहिए की 20 से 24 अक्टूबर तक मुम्बई, पुणे से अतिरिक्त गाड़ियोंकी व्यवस्था शीघ्रता से करें। पुणे, मुम्बई से नागपुर के बीच न सिर्फ नियमित मार्ग बल्कि पुणे दौंड कुरडुवाडी लातूर होकर या मुम्बई से मनमाड़, औरंगाबाद, पूर्णा मुदखेड़ होकर जो शून्याधारित समयसारणी के पहले चलती थी उन गाड़ियोंको भी पटरी पर लाया जाना चाहिए। यही समय होता है, लोग प्रशासन की ओर हसरत भरी निगाहों से देखते है और प्रशासन उनकी उम्मीदों पर कतई खरा नही उतरता।

दपुमरे क्षेत्र में नागपुर से बिलासपुर तक महिनों से रेल विकास काम चल रहे है और उस मार्ग से आने वाली और पुणे, मुम्बई की ओर जानेवाली लगभग सभी गाड़ियाँ 4,6,8 घंटो तक देरी से चली आ रही है। जो गाड़ियाँ अपने गन्तव्य पर देरी से पहुंचती है तो अपनी वापसी यात्रा भी देरी से शुरू करती है और यह देरी वाला चक्र महिनों चलते ही रहता है। दूसरा “शॉर्ट नोटिस” पर रेल ब्लॉक लेना यह रेल विभाग एक अलग ही फितरत बनते जा रही है। आज 12103 पुणे लखनऊ एक्सप्रेस का दौंड होकर मनमाड़ वाला मार्ग बदलकर लोनावला, पनवेल इगतपुरी मनमाड़ होकर चलाने का निर्णय थोंपा गया है। यात्री रेल यातायात पर निर्भर है, रेल विभाग की इस तरह की मनमानी पर भी यात्रा करने के लिए मजबूर है।

कुल मिलाकर समस्या का समाधान बड़ी आसानी से किया जा सकता है। प्रतिक्षासूचीयों को देखते हुए रेल विभाग अतिरिक्त गाड़ियाँ, डिब्बे की व्यवस्था करें। भले ही विशेष गाड़ियाँ नियमित मार्ग से अलग मार्गों पर चले मगर चले जरूर।

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मध्य रेल CR के भुसावल मण्डल में, चालीसगांव स्टेशन पर रेल ब्लॉक; कुछ गाड़ियोंका परिचालन रहेगा बाधित

चालीसगांव स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज गर्डर के निर्माण के कारण रेल ब्लॉक लिया जा रहा है। निम्नलिखित गाड़ियोंका परिचालन बाधित रहेगा।

रद्द गाड़ियाँ :-

गाड़ी संख्या 11120 भुसावल-इगतपुरी मेमू ट्रेन 18.10.22 और ट्रेन नंबर 11119 इगतपुरी-भुसावल 19.10.22 को रद्द कर दिया गया है.

निम्नलिखित गाड़ियोंको नियंत्रित किया जाएगा

भुसावल से मनमाड़ की ओर जानेवाली गाड़ियाँ :-

1) 11078 (जम्मूतावी-पुणे) वाघली स्टेशन पर 08.15 से 11.25 तक
2) 12142 (पाटलिपुत्र- एलटीटी) कजगांव स्टेशन पर 08.30 बजे से 11.25 बजे तक।
3) 15065 (गोरखपुर – पनवेल) गालन स्टेशन पर 08.40 से 11.25 बजे तक।
4) 11056 (गोरखपुर-एलटीटी) पचोरा स्टेशन पर 08.45 से 11.25 बजे तक।
5) 12780 (निजामुद्दीन-वास्को) माहेजी स्टेशन पर 09.50 बजे से 11.25 बजे तक।

6) 15018 (गोरखपुर-एलटीटी) शिरसोली स्टेशन पर 10.25 से 11.25 बजे।
7) 15646 (गुवाहाटी-एलटीटी) जलगांव स्टेशन पर सुबह 10.40 बजे से 11.25 बजे तक।

मनमाड़ से भुसावल की ओर आनेवाली गाड़ियाँ

1) 20103 (एलटीटी-गोरखपुर) हीरापुर स्टेशन पर 10.35 से 11.25 बजे तक।

  1. 22129 (एलटीटी-प्रयागराज) नायडोंगरी स्टेशन पर 10.40 से 11.25 बजे।
  2. 12859 (सीएसएमटी-हावड़ा) पिम्परखेड़ स्टेशन पर 10.50 से 11.25 बजे तक।
  3. 12779 (वास्को निजामुद्दीन) नांदगांव स्टेशन पर 11.00 बजे से 11.25 बजे तक।
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4 जोड़ी गाड़ियोंके टर्मिनल्स में बदलाव! मगर यात्रिओंपर संकट नही।

उपरोक्त परिपत्रक देखिए, 19167/68 साबरमती एक्सप्रेस सप्ताह में 4 दीन और जोधपुर – वाराणसी के बीच चलनेवाली मरुधर बहने इन 4 जोड़ी गाड़ियोंको वाराणसी जंक्शन की जगह अब वाराणसी सिटी स्टेशनपर टर्मिनेट करने का निर्णय लिया गया है।

गौरतलब यह है, की यह सारी गाड़ियाँ वाराणसी जं. से वाराणसी सिटी तक विस्तारित हो जाएगी। अर्थात अब वाराणसी जंक्शन पर ठहराव लेकर आगे बढ़ेगी। हम, रेल प्रशासन के इस तरह के टर्मिनल्स बदलाव के निर्णय की प्रशंसा करते है। मध्य रेल या इतर रेल्वेज में टर्मिनल्स बदलाव के वक्त मुख्य स्टेशन की सेवा खण्डित हो कर उसे पूर्व स्टेशनपर ही टर्मिनेट करने का निर्णय लिया जाता है। कुछ उदाहरण देखते है।

मध्य रेलवे का नागपुर स्टेशन। नागपुर जंक्शन के दोनों ओर टर्मिनलों का प्रावधान है। मध्य रेल का अजनी टर्मिनल और दूसरी ओर दपुमरे का इतवारी टर्मिनल। दपुमरे की गाड़ियाँ नागपुर आने से पहले ही इतवारी में टर्मिनेट हो जाती है और मध्य रेल की अजनी में। दोनोंही ओर के यात्री नागपुर जैसे अत्यंत सुविधाजनक जंक्शन सेवा से वंचित रह जाते है। खैर यहाँपर नागपुर के दोनों टर्मिनल स्टेशन अलग अलग क्षेत्रीय रेलवे के है। मगर पुणे में ऐसा नही है।

आइए, पुणे जंक्शन की व्यवस्था देखते है। ठीक इसी तरह कुछ पुणे जंक्शन के नवनिर्मित टर्मिनल की भी कथा है। पुणे के लिए हड़पसर टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। यदि कोई लम्बी दूर की गाड़ी हड़पसर में टर्मिनेट होती है तो यात्री को पुणे जाने के लिए कोई अतिरिक्त व्यवस्था की तरफ देखना पड़ता है। मुम्बई से पुणे रेल यात्रा के दौरान खड़की, शिवाजीनगर स्टेशन को भी टर्मिनल बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। रेल विभाग को चाहिए की, मुम्बई से पुणे की इन्टरसिटी गाड़ियोंको पुणे जंक्शन पर 5 मिनट का स्टोपेज दे कर हड़पसर में टर्मिनेट करे और दौंड से पुणे की ओर आने वाली गाड़ियोंको शिवाजीनगर, खड़की में टर्मिनेट करने की व्यवस्था करें। यह मुख्य जंक्शन की कनेक्टिविटी को कायम करने के लिए बेहद जरूरी है, अन्यथा उस जंक्शन स्टेशन का क्या उपयोग जिसपर गाड़ियाँ पहुंचने से पहले ही टर्मिनेट हो जाती है?

इसी तरह अहमदाबाद का साबरमती टर्मिनल, जोधपुर का भगत की कोठी टर्मिनल, भोपाल का रानी कमलापति टर्मिनल सूची में आ जाते है। यह कथा उन सारे मुख्य रेल मार्ग के बीच मे पड़ने वाले जंक्शन स्टेशन की है, जो अब बड़े शहर होने के कारण रेल टर्मिनल बनते गए और व्यस्तता के कारण उनके 5/10 किलोमीटर अगलबगल में नए टर्मिनल का विकास किया जा रहा है। रेल प्रशासन को चाहिए की ऐसे स्टेशनोंपर 2 अप/डाउन प्लेटफार्म ऐसे हो जिसपर गाड़ी आए, 5 मिनट रूके और किसी अगले स्टेशनपर जाकर टर्मिनेट की जाए। इसके लिए चाहे तो उपरोक्त जंक्शन स्टेशन के यार्ड/पिटलाइन/ लोको शेड का भी स्थानांतरण किया जा सकता है।

जंक्शन स्टेशन को जंक्शन की तरह उपयोग में लाए जाने के लिए इस तरह के निर्णय रेल प्रशासन को लेना नितांत आवश्यक है।