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मध्य रेलवे CR की दीपावली विशेष गाड़ियाँ मुम्बई से मंगलुरु, मडगांव और पुणे से अजनी के बीच

1) 01185/86 लोकमान्य तिलक टर्मिनस मंगलुरु जंक्शन लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक 21 अक्टूबर से 12 नवम्बर तक 4 फेरे लगाएगी।

2) 01187/88 लोकमान्य तिलक टर्मिनस मडगांव लोकमान्य तिलक टर्मिनस साप्ताहिक 16 अक्टूबर से 14 नवम्बर तक 5 फेरे लगाएगी।

3) 01189/90 पुणे अजनी पुणे वातानुकूलित साप्ताहिक 18 अक्टूबर से 30 नवम्बर तक 7 फेरे लगाएगी।

उपरोक्त सभी गाड़ियोंकी बुकिंग 16 अक्टूबर से खुलने जा रही है। विशेष गाड़ियोंको विशेष अतिरिक्त किराया दर से चलाया जा रहा है। गाड़ियोंकी संरचना में GS और SLR कोच अनारक्षित रहेंगे।

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4 जोड़ी गाड़ियाँ अगले महीनेसे सुपरफास्ट बन जाएगी

दक्षिण भारतमे, SWR रेल क्षेत्र में चलनेवाली 4 जोड़ी गाड़ियाँ मेल/एक्सप्रेस की श्रेणी बदलकर सुपरफास्ट श्रेणी में तब्दील होने जा रही है। यात्रीगण कृपया बदलें गाड़ी क्रमांक पर ध्यान दीजिएगा। गाड़ियोंमे समय बदलाव की फिलहाल कोई खबर नही है।

1) 16501/02 अहमदाबाद यशवंतपुर अहमदाबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 17 नवम्बर/15 नवम्बर से नए क्रमांक 22689/22690 से चलेंगी।

2) 16229/39 मैसुरु वाराणसी मैसूरु द्विसाप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 12 नवम्बर/14 नवम्बर से नए क्रमांक 22687/22688 से चलेंगी।

3) 11065/66 मैसुरु रेनिगुंटा मैसूरु साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 13 नवम्बर/14 नवम्बर से नए क्रमांक 22135/22136 से चलेंगी।

4) 16543/44 यशवंतपुर हुब्बाली यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 18 नवम्बर/19 नवम्बर से नए क्रमांक 20655/20656 से चलेंगी।

हम यात्रिओंसे निवेदन करते है, गाड़ियोंके अद्यायावत समयसारणी के लिए भारतीय रेल के अधिकृत ऐप, वेबसाइट से जानकारी लेकर ही अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें।

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‘वन्देभारत’ का ट्रेनसेट, जो भारतीय रेल के एक दृष्टिकोण मे बहुउपयोगी होनेवाला है।

आज देश की चौथी वन्देभारत, अम्ब अंदौरा – नई दिल्ली एक्सप्रेस का उद्धाटन माननीय प्रधानमंत्री जी करने जा रहे है।

अब तक वन्देभारत एक्सप्रेस के तमाम फ़ायदे उसके आधुनिक विशेषताओं के साथ हम सभी को लगभग याद हो गए है। यह देश मे निर्मित सेमी हाई स्पीड ट्रेनसेट है।

हम पहले ट्रेनसेट का औचित्य समझते है। ट्रेनसेट मतलब कहीं भी शंटिंग, अर्थात डिब्बा या लोको की जोड़-तोड़ करने की जरूरत नही। यह गाड़ी दोनोंही दिशाओंसे, जरूरत के मुताबिक ऑपरेट की जा सकती है। इसका अर्थ यह की गाड़ी की परिचालन क्षमता पुरेपुर उपयोग किया जा सकता है।

इस ट्रेनसेट का सबसे बड़ा वैशिष्ट्य यह है की निम्नतम समय मे तीव्रतम गति लेना और कमसे कम समय मे गाड़ी की गति को नियंत्रण में लाना। क्या आप समझ रहे, इसका भारतीय रेल किस तरह उपयोग कर सकती है? सेमी हाई स्पीड अर्थात 200 kmph की उच्चतम गतिसीमा की गाड़ी औसत 75-80 की गति में चलाई जा रही है, कई क्षेत्र में अभी पटरियां भी उच्च क्षमता गति के काबिल नही है वहाँपर भी यह ट्रेनसेट लॉन्च किये जा रहे है? इसका अर्थ यह है, रेल विभाग वन्देभारत ट्रेनसेट का उपयोग उसके वैशिष्ट्य के अनुसार करेंगी।

और यदि इस तरह से उपयोग होने जा रहा है तो मानकर चलिए, भारतीय रेल की कई इन्टरसिटी/मेल/एक्सप्रेस/सुपरफास्ट ऐसी समयसारणी से चलती है, जिनके लगभग प्रत्येक 25/50 किलोमीटर पर स्टोपेजेस पड़ते है। आज हर दूसरा स्टेशन अपने यहाँ स्टोपेज की माँग लेकर खड़ा है और क्यों न करे, आखिर प्रगती का मार्ग यातायात की गति, सुविधाओं से जो जुड़ा है। ऐसी अवस्था मे देश की रेलवे, छोटे मझौले स्टेशनोंके लिए एक नया अवसर उपलब्ध करा सकती है।

वैसे भी वन्देभारत यह अत्याधुनिक, वातानुकूलित ट्रेनसेट है और फिर यह नई शुरू की गई मेमू/डेमू क्या है? 😊 जी, सही समझे! वह भी ट्रेनसेट ही है और वन्देभारत के ट्रेनसेट में और उनमें केवल लग्जरी का ही फर्क है। वातानुकूल नही है, आलीशान आसन नही है, और इसी तरह के थोड़े लग्जरी आइटम्स कम होंगे मगर परिचालन क्षमता सब वही की वही है।

मतलब जो भविष्य ट्रेनसेट का आनेवाला है, उसमे वन्देभारत का मूल नाम T18 के नए नए सुधारित अवतार सामने आते जाएंगे। स्लीपर वर्जन आ सकता है, सेमी लग्जरी भी आ सकता है। रेलवे के साधारण वर्ग के लिए मेमू/डेमू ट्रेनसेट तो आ ही गए है जिनका परीक्षण एक्सप्रेस के तौर पर देशभर में चल निकला है।

बस, थोडासा इंतजार कीजिये! जैसे ही वन्देभारत के ट्रेनसेट का उत्पादन बढ़ेगा, हमारी नियमित मेल/एक्सप्रेस भी ट्रेनसेट में बदली जानेवाली है।

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देश की चौथी वन्देभारत एक्सप्रेस, नई दिल्ली – अम्ब अंदौरा के बीच चलेगी।

22447 नई दिल्ली – अम्ब अन्दौरा वन्देभारत एक्सप्रेस और 22448 – अम्ब अन्दौरा – नई दिल्ली वन्देभारत एक्सप्रेस। दोनोंही दिशाओंसे यह गाड़ियाँ, सप्ताह में 6 दिन चलेंगी, ( प्रत्येक बुधवार को छोड़कर ) दिनांक 21 अक्टूबर से अपना पहला नियमित फेरा शुरू करेगी। कृपया निम्नलिखित समयसारणी देखिए,

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रेल यात्री गाड़ियोंका लगभग सम्पूर्ण वातानुकूलिकरण किया जा रहा है।

भारतीय रेल धीरे धीरे आम यातायात सेवा से खास सेवा बनती जा रही है। आगे क्या होगा यह तो पता नही मगर अभी ही सवारी गाड़ियाँ रेल सेवा के पटल से नदारद हो चुकी है और उसके साथ ही सस्ती रेल यात्रा भी उड़नछू हो गयी है।

जिन क्षेत्रोंमें उपनगरीय रेल सेवा नही चलती उन क्षेत्रोंके लिए सवारी गाड़ियाँ, जो दिनभर में कमसे कम दो गाड़ियाँ, सुबह और शाम में चलती ही थी। अब उनका रूप, नाम, किराया सब बदल चुका है। यह गाड़ियाँ मेमू/डेमू एक्सप्रेस बन गयी है। जिनकी न ही औसत गति एक्सप्रेस के बराबर है न ही पड़ाव घटे है। जो पड़ाव रद्द किए गए है, उन स्टेशनोंके यात्री अलग परेशान है तो पुरानी सवारी गाड़ियोंकी ही समयावधि के लिए एक्सप्रेस के मूल्य का किराया चुकाना पड़ रहा है इसलिए नियमित टिकटधारी यात्री परेशान हो रहे है।

जहाँ गैरउपनगरीय क्षेत्रोंमें कम दूरी की, सभी स्टेशनोंपर रुकनेवाली गाड़ियोंकी जरूरत है और हमारे नेतागण प्रीमियम गाड़ियोंकी माँग, आग्रह जता रहे है। यह वातानुकूलित गाड़ियाँ क्या आम जनता को पुसानेवाली है? यह तो छोड़िए, रेल विभाग की नई डिब्बा संरचना सुनेंगे तो आप भौंचक रह जाओगे।

01 कोच वातानुकूलित प्रथम/द्वितीय या पूर्ण प्रथम (H या HA)

04 कोच वातानुकूलित द्वितीय (2A)

10 कोच वातानुकूलित तृतीय या वातानुकूल तृतीय इकोनॉमी (3A + 3M )

02 कोच स्लीपर (SL)

02 कोच द्वितीय साधारण, जनरल (GS)

01 पेंट्रीकार

01 एसएलआर

01 EOG जनरेटर

कुल 22 कोच, यदि गाड़ी में पेंट्रीकार मान्य न हो तो क्षेत्रीय रेल अपने संज्ञान से किसी भी वर्ग का कोच जोड़ सकती है।

इस विषय का परिपत्रक क्रमांक CC/70/2022 दिनांक 03/06/2022 का आगे दे रहे है।

मित्रों, तो आगे अपनी रेल यात्रा के लिए अपनी जेबें ज्यादा ढीली करने की तैयारी कर के रख लीजिए। क्योंकी 02 कोच स्लीपर में आपको आरक्षण मिलना बेहद मुश्किल है, जो 10, 12 कोच में ही नही मिलता था और वही कथा सामान्य द्वितीय श्रेणी अनारक्षित कोच, जिनकी संख्या भी 02 ही रहने वाली है।

आगे रेल विभाग वातानुकूलित 3 टियर में इकोनोमी श्रेणी का अविष्कार कर के अपनी पीठ थपथपाता है की उन्होंने 3 टियर वातानुकूलित कोच के किरायोंसे लगभग 7 से 8 % कम किराये में यात्रिओंके लिए बड़ी ‘इकोनॉमी’ उपलब्ध कराई है। जो की सांख्यिकी दृष्टिकोण से भले ही रेल विभाग को ज्यादा लगती होगी मगर अकेले या परिवार के साथ याटा करनेवाले यात्री को कुछ इकोनॉमी का एहसास नही करा पाती। यही फर्क 20 से 25 % रहता तो यात्री उसे अलग श्रेणी या इकोनॉमी श्रेणी मान सकता था।

खैर, जबरन नामकरण ही कर दिए है, तो बोलेंगे भाई “इकोनॉमी”। बात फर्क ही महसूस करने की है तो 3 टियर वातानुकूल के किराये 15% बढ़ जाएं और इकोनॉमी के वहीं के वहीं रहे तो फिर “इकोनॉमी” का फील आ ही जायेगा। ☺️