Uncategorised

दूधसागर फॉल्स, ब्रिगेन्झा घाट का आनन्द लेना है, चलिए रेल विभाग इसकी व्यवस्था कर रहा है।

दिनांक 14 जुलै : मित्रों, इस वीक एन्ड पर्यटन गाड़ो के परिपत्रक को लेकर SWR दपरे रेल प्रशासन ने सत्य अथवा उनके द्वारा दिये जाने की खबर से इन्कार कर दिया है। यह ‘फेक न्यूज’ है ऐसा उनका कहना है। आगे इसकी इन्क्वायरी की जायेगी यह भी रेल प्रशासन का कहना है।

भारतीय रेल कई पहाड़ों, झरनों और वादियोंसे गुजरती है। देश के अलग अलग भागोंमें रेल से बेहतरीन नजारे दिखाई देते है। हिमाचल की वादियोंमे कालका – शिमला, दक्षिण की नीलगिरी रेल, दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन इनकी तो बात ही कुछ और हर मगर कुछ ऐसे मार्ग भी है जो मुख्य रेल को प्राकृतिक दृष्योंसे अद्भूत बना देते है। चाहे वह मुम्बई पुणे के बीच के भोर घाट के नजारे हो या मुम्बई नासिक के बीच थल घाट के। इटारसी – भोपाल, इटारसी – नागपुर मार्गों पर भी ऐसे सुंदर दृश्य देखे जा सकते है।

Pic courtesy : mufid kannur @indiarailinfo.com

इसी कड़ी में दूधसागर फॉल्स (हिन्दी फ़िल्म चेन्नई एक्सप्रेस फेम) और ब्रिगेन्झा घाट है। यह घाट हुबली मडगाँव के बीच पड़ता है और द प रेल विभाग इस अनुपम प्राकृतिक सुंदरता को निहारने के लिए एक वीकेंड साप्ताहिक एक्सप्रेस शुरू करने का प्रस्ताव लेकर आया है। इस रेल गाड़ी मे ‘विस्टा डोम’ कोच लगाया जाएगा, जिससे सारे नजारे बड़ी सुगमतासे देखे जा सकेंगे। यूँ तो आप दूधसागर, ब्रिगेन्झा घाट सर्च करोगे तो सैकड़ों तस्वीरे, वीडियो आपके सामने आ जाएंगे, इसीलिए हम उन्हें यहाँपर नही ला रहे है। तो चलिए गाड़ी की खबर लेते है।

Pic courtesy : venki63~ @indiarailinfo.com
SWR दपरे का प्रस्ताव

आप उपरोक्त परिपत्रक में देख सकते है, यह गाड़ी इसी सप्ताह दिनांक 16 जुलाई से प्रत्येक शनिवार को फ़ेरा शुरू कर सकती है। रेलवे ने इसे मॉनसून काल मे 9 फेरे चलाने का प्रस्ताव रखा है।

Uncategorised

यह कैसी आपाधापी, की यात्री उपभोक्ता समिती को क़ानूनपालन की मांग करनी पड़ी?

यूँ तो भारतीय रेल के किसी भी आरक्षित कोच में वीना आरक्षित यात्री का यात्रा करना अनुमतिपात्र नही है, मगर आजकल रेल विभाग का वाणिज्यिक चेहरा टिकट चेकिंग स्टाफ़ बड़े धड़ल्ले से अनारक्षित यात्रिओंको जुर्माने की रसीद काट कर आरक्षित यानोंमें यात्रा करने की अनुमति बांट रहा है।

मध्य रेल के कई स्टार्टिंग स्टेशनोंमें यह बात अक्सर देखी जा रही है। मुम्बई, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, पुणे इत्यादि स्टेशनोंपर गाड़ी अपने प्रस्थान पूर्व समय से प्लेटफार्म पर लगती है और यह गोरखधंधा शुरू हो जाता है। वैसे अनारक्षित यात्री चलती गाड़ी में आरक्षित कोच में यात्रा करते हुए पाया गया तो उसे कानूनन दण्डित किया जाना चाहिए मगर यह क्या, यहाँपर तो बाकायदा प्लेटफॉर्म पर ही जांच दल अनारक्षित यात्रिओंको पेनाल्टी काट काट कर आरक्षित कोचों में यात्रा करने का परमिट बाँट रहे है।

यह आपाधापी दरअसल इसलिए होती है, क्योंकी रेल विभाग अनारक्षित यात्री को दण्डित तो करता है मगर उन्हें कोच से उतारता नही है या सजा के लिए न्यायिक प्रक्रिया को नही अपनाता। इस तरह कोच में 72/80 यात्रिओंके बीच सैकड़ों अनारक्षित यात्री अपने अपने ‘दण्ड युक्त परमिट’ लेकर यात्रा करते रहते है। गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशनपर ही शयनयान की यह भयावह स्थिति रहती है की अधिकृत यात्री बेचारा अपनेआप को सिमटकर यात्रा करते रहता है और बाथरूम टॉयलेट का उपयोग भी करने से कतराता है।

चूंकि प्रारम्भिक स्टेशन पर ही अनाधिकृत यात्रिओंपर कोई कार्रवाई नही हुयी इसीलिए आगे प्रत्येक जांच स्टेशन या जाँच कर्मी उस ‘दण्ड युक्त परमिट’ को देख कर कोई कार्रवाई नही करते और इसी खचाखच वाली स्थिति में गाड़ी गन्तव्य तक अपनी यात्रा पूरी करती है। ज्यादातर यह स्थिति उप्र, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जानेवाली गाड़ियोंमें होती है। इन गाड़ियोंमे एक आरक्षित यात्री और उसके साथ 4-6 अनारक्षित यात्री होते है जो किसी तरह की कोई शिकायत नही करते।

हाल ही में उत्तर रेलवे के वाणिज्यिक अधिकारियों ने भी मध्य रेल के जांच दल के इस तरह के आचरण पर बड़ी आपत्ति उठाई थी। प्रारम्भिक स्टेशनपर सुरक्षा बल और सारी व्यवस्थाओंकी उपलब्धता होने के बावजूद जाँच दल इस तरह काम कर के अपने ‘टार्गेट्स’ के लिए ऊँचे ऊँचे झंडे गाढ़ अवॉर्ड्स प्राप्त करें और मुसीबत रेल में यात्रा करनेवाले यात्री झेले यह कहाँ का न्याय है?

कोई यात्री शिकायत भी करे तो ऐसी पेनाल्टीधारियोंकी भीड़ को किसी दूसरे कोच में मात्र खदेड़ दिया जाता है और यात्रा चलती ही रहती है।

आखिरकार यह प्रश्न क्षेत्रीय रेल उपभोक्ता समिति ने अपनी मीटिंग के दौरान क्षेत्रीय अधिकारियों के सामने रखा और साथ ही रेल मंत्री को भी इस विषयपर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

रेल अधिनियम भी यही कहता है, की आरक्षित यान में अनारक्षित यात्री पेनाल्टी भर कर भी यदि आरक्षित कोच में उसे आरक्षित जगह का आबंटन नही किया जा सकता है तो वह उस कोच में यात्रा करने योग्य नही है। उसे उसके टिकट के योग्य वर्ग में ही यात्रा करनी होंगी। और इसी नियम के तहत क्षेत्रीय उपभोक्ता सदस्य, रेल अधिकारियों से जाँच दलोंके इस तरह आरक्षित कोच में अनाधिकृत यात्रिओंको ठूंसने का विरोध कर रहे है।

Uncategorised

अमरावती – कलबुर्गी – अमरावती के बीच मुम्बई, पुणे होकर प्रतिदिन रेलगाड़ी की मांग

विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र से मुम्बई, पुणे के लिए रेलगाड़ियोंकी सदोदित मांग यात्रिओंके द्वारा की जाती है। क्षेत्र के राज्यसभा सांसद मा. अनिलजी बोंडे इन्होंने इस मांग को बल दिया है। निम्नलिखित प्रस्तावित समयसारणी को देखे तो यह मांग सार्थक लगती है। अमरावती से कलबुर्गी वाया पनवेल, पुणे यह गाड़ी बडनेरा, अकोला, शेगांव, मलकापुर, भुसावल, जलगांव, चालीसगांव, मनमाड़, नासिक, कल्याण, पनवेल, लोनावला, चिंचवड़, पुणे, जिउर, कुरडुवाडी, सोलापुर, गाणगापुर, अक्कलकोट और कलबुर्गी ऐसे चलाई जाए ऐसी मांग है।

इस गाडीसे कई उद्देश सफल होते है। नासिक यह तीर्थक्षेत्र और महाराष्ट्र की तेजी से उभरती औद्योगिक नगरी है। कल्याण, पनवेल से मुम्बई सम्पर्क होता है। लोनावला, चिंचवड़, पुणे यहाँपर क्षेत्र के कई विद्यार्थियों का आनाजाना लगा रहता है। कुरडुवाडी, सोलापुर, अक्कलकोट, गाणगापुर यह भी तीर्थक्षेत्र है और विदर्भ से अब तक भी सीधे जुड़े हुए नही है अतः आशा करते है, यह गाड़ी को मान्यता मिले और क्षेत्र की जनता लाभान्वित हो।

Uncategorised

22117 पुणे अमरावती वातानुकूलित साप्ताहिक एक्सप्रेस की समयसारणी बदलेगी।

22117 पुणे अमरावती वातानुकूलित साप्ताहिक एक्सप्रेस की समयसारणी 20 जुलाई से यात्री अनुकूल की जा रही है। पहले यह गाड़ी दोपहर को पुणे से निकलकर रात में बेसमय अमरावती पहुंचती थी। जिसमे अब सुधार किया जा रहा है। गाड़ी के परिचालन दिन पुणे से बुधवार और ठहराव पुणे 22:00, दौंड कॉर्ड 23:03, अहमदनगर 0:32, कोपरगाँव 2:28, मनमाड़ 3:40, जलगांव 5:18, भुसावल 6:15, अकोला 8:38, बडनेरा 10:03 और अमरावती गुरुवार को सुबह 11:00 बजे पहुंचेंगी।

Uncategorised

जबरन अफवाएं फैलाकर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश। सम्पर्क क्रान्ति के यात्री ने गाड़ी ‘हाईजैक’ किये जाने का किया ट्वीट!

आज ट्विटर पर एक ऑनबोर्ड यात्री जो 12650 हज़रत निजामुद्दीन यशवंतपुर सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस में यात्रा कर रहा था की उसने आईआरसीटीसी एवं सिकंदराबाद मण्डल अधिकारी से हेल्प, हेल्प की गुहार लगा दी। उस यात्री का मानना था, उसकी ट्रेन 12650 सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस अपहृत कर ली गयी है।

रेल प्रशासन तुरन्त हरकत में आ गयी। मगर बात दरअसल कुछ और ही थी। गाड़ी अपने नियोजित मार्ग से परावर्तित होकर अलग रास्ते चलाई जा रही थी और इसकी पूर्व सूचना यथास्थित दी गयी थी। 23 जून को ही हमने भी यह परिपत्रक अपने ब्लॉग पर लिया था। इसके अलावा रेल प्रशासन सम्बन्धित आरक्षित यात्रिओंको sms द्वारा सूचित करते है, उद्घोषणा भी की जाती है, डिस्प्ले बोर्ड पर भी जाहिर किया जाता है। रेलवे वेबसाइट, ऐप्स पर भी यथोचित सूचनाएं उपलब्ध है।

ऐसे में इस तरह का बवाल मचाकर अन्य रेल यात्रियों को डराना कौनसा उचित आचरण है?