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तथ्य 14661/62 दिल्ली बाड़मेर दिल्ली मालाणी एक्स्प्रेस के ..

‘ क्या से क्या हो गया .. ‘

आज ट्विटर पर एक खबर ट्रेंड हो रही है, मालाणी एक्स्प्रेस के फिर से रोजाना शुरू होने की यज्ञपि यह अलग अलग समयसारणी के स्लॉट मे चलेगी मगर बाड़मेर से दिल्ली के बीच तो रोज की सम्पर्कता दे देगी। यह जो भी है, लेकिन बाड़मेर वासियोंकी लोकप्रिय मालिणी एक्स्प्रेस की दशा कहाँ से शुरू हुई यह देखना आज की चर्चा का विषय है। पहले शूरवात आज की ट्वीट से;

इसमे स्पष्ट किया है, नई सेवा द्विसाप्ताहिक गाड़ी के स्वरूप मे चलाई जाएगी, चूंकि हावड़ा बाड़मेर के बीच 12323/24 यह द्विसाप्ताहिक और 14661/62 यह मालाणी एक्स्प्रेस का संक्रमणकाल के बाद का सुधारित (?) रूप त्रिसाप्ताहिक सेवा, चल ही रही थी। कुल मिलाकर पूरे सप्ताह बाड़मेर – दिल्ली के बीच यात्री सेवा पुनर्स्थापित की जाएगी, यह इस ट्वीट का संदेश है।

संक्रमणकाल मे सारी यात्री सेवा बंद कर दी गई थी, अर्थात मालिणी एक्स्प्रेस लिंक स्वरूप मे प्रतिदिन चलनेवाली गाड़ी थी और इसका जोधपुर मे जो जैसलमेर / बाड़मेर का लिंक/डीलिंक बन्द होना तो पहले ही तय हो गया था। इसके दो टुकड़े अब सीधे सप्ताह मे 4 दिन जैसलमेर और 3 दिन बाड़मेर के लिए तय कर दिए गए। निम्नलिखित रेल बोर्ड के पत्र मे सूची क्रमांक 13, 14, 15, 16 देखिए।

तय कुछ किया गया, लेकिन जैसलमेर और बाड़मेर की जनता तो आक्रोशित हो रही थी दोनों शहरोकी सेवा मे कटौती होना लिख दिया गया था। खैर, होना कुछ और था। एक विचार यह भी किया गया। 14659/60 दिल्ली जैसलमेर को प्रतिदिन कर दिया जाए और बाड़मेर प्रतिदिन के लिए 12461/62 दिल्ली जोधपुर के बीच चलने वाली मंडोर एक्स्प्रेस को जोधपुर से आगे बाड़मेर तक विस्तारित करने की बात निश्चित की गई। मंडोर एक्स्प्रेस का रैक 12915/16 अहमदाबाद दिल्ली आश्रम एक्स्प्रेस से लिंक किया जाए तो यह प्रयास संभव हो सकता था, मगर… यह मगर बड़ा पेचीदा होता है। कहाँ जोधपुर मे कुछ हुवा या पश्चिम रेल्वे के अहमदाबाद मे, यह मंडोर एक्स्प्रेस दिल्ली जोधपुर के बीच यथावत बनी रही, और कभी बाड़मेर के लिए नही चली।

इस दौरान, 12323/24 हावड़ा आनंदविहार के बीच चलनेवाली द्विसाप्ताहिक गाड़ी के रैक के आनंदविहार मे लम्बे लाय ओवर का उपयोग कर उसे बाड़मेर के लिए खींच दिया गया।

और जैसे की पहले तय था, दिल्ली की जगह विस्तार कर के जम्मू तवी से सप्ताह मे 4 दिन जैसलमेर के लिए और 3 दिन बाड़मेर के लिए विशेष सेवा के तौर पर गाडियाँ चल निकली। हालांकि यह भी 14645/46 जम्मू तवी से दिल्ली के बीच प्रतिदिन चलनेवाली शालीमार एक्स्प्रेस का विस्तार था। रैक की एडजस्टमेंट कर के यह व्यवस्था जमायी गई।

कुल मिलाकर यह कहानी बनी है जेसलमेर / बाड़मेर- दिल्ली के बीच चलनेवाली मालाणी और उसके लिंक एक्स्प्रेस की। दो दिन बाड़मेर – दिल्ली – हावड़ा, तीन दिन बाड़मेर – दिल्ली – जम्मूतवी और जब भी चल पड़े दो दिन नई सेवा बाड़मेर – दिल्ली। यूँ होगी सातों दिन बाड़मेर – दिल्ली कनेक्टिविटी

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क्या रेलवे में जंक्शनों का औचित्य खत्म होने जा रहा है?

लीजिए, अब वडोदरा जंक्शन से भी 6 जोड़ी याने 12 यात्री गाड़िया बाईपास कर निकाल दी जाएंगी। गाँधीधाम की दो, ओखा की दो और भावनगर एव भुज की एक एक गाड़ियाँ जो कामाख्या, गौहाटी, शालीमार, हावड़ा, आसनसोल एव वाराणसी को जोड़ती है। यह गाड़ियोंकी वडोदरा कनेक्टिविटी जाकर, छायापुरी स्टेशन से हो जायेगी।

इससे पहले मनमाड़ – पुणे मार्ग के दौंड जंक्शन के बजाय दौंड कॉर्ड स्टेशन से गाड़ियाँ निकलने से दौंड स्टेशन की सारी रौनक ही चली गयी। खैर, वडोदरा दौंड के मुकाबले बहुत बड़ा स्टेशन और शहर है।

वडोदरा रेल्वे स्टेशन से छायापुरी रेलवे स्टेशन करीबन 7-8 किलोमीटर दूरी पर है। सिटी बस से करीबन 15 से 20 रुपये और ऑटो, टैक्सी से 100 से 150 रुपये किराया लग सकता है। परेशानी जंक्शन पर अलग मार्ग के लिए गाड़ी बदलने वाले यात्रिओंको होती है। अब यात्रिओंको चाहिए की वह जंक्शनोंके महत्व और उपयोग भूल जाये क्योंकी रेल प्रशासन ने स्टेशनोंपर किए जाने वाले शंटिंग बन्द करने की ठान ली है। इसी के चलते लिंक गाड़ियाँ और स्लिप कोचेस की सेवाएं भी बंद कर दी गयी है।

रेल प्रशासन ने अपने लोको रिवर्सल, शंटिंग और परिचालन समय की बचत करने हेतु यह व्यवस्था बनाई है। मध्य रेलवे के दौंड जंक्शन, प म रेल पर भोपाल जंक्शन और पश्चिम रेलवे के वडोदरा जंक्शन पर यही हुवा है। आगे इस सूची में नागपुर जंक्शन इटारसी से गोंदिया की ओर जानेवाली गाड़ियोंके लिए जल्द ही बाईपास होने वाला है। और जिन जिन स्टेशनोंपर लोको रिवर्सल करना पड़ता है, ऐसे सब स्टेशनोंको बाईपास बनाने के लिए नामित किया जा रहा है।

पश्चिम रेलवे का परिपत्रक :-

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मध्य रेल के मुम्बई नासिक और मुम्बई पुणे खण्ड पर प्रथम श्रेणी सीजन पास धारकोंको वातानुकूल कुर्सी यान में यात्रा अनुमति की पुनर्बहाली

यह वे चार जोड़ी गाड़ियाँ है, पंचवटी, डेक्कन क्वीन, डेक्कन और इण्टरसिटी एक्सप्रेस। निम्नलिखित परिपत्रक में गाड़ियाँ और उनके सीजन पास धारकों हेतु यात्रा अनुज्ञप्ति प्राप्त कोच/सीट्स के क्रमांक लिखे गए है।

मध्य रेलवे में राज्य शासन के रेलवे यात्रा हेतु संक्रमण कालीन निर्बंध अभी चल रहे है।

गौरतलब यह है, रेल प्रशासन द्वारा उपरोक्त गाड़ियोंमे प्रथम श्रेणी कुर्सी यान न होने के कारण नियमानुसार वातानुकूलित कुर्सी यान में प्रथम श्रेणी सीजन पास धारकोंको यात्रा की अनुमति दी है।

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रेल प्रशासन ने अपने ZBTT कार्यक्रम के अंश जाहिर कर देना चाहिए

संक्रमण काल मे दो ढाई महीने सभी यात्री गाड़ियाँ बन्द रखने के पश्चात रेल प्रशासन ने वातानुकूलित राजधानियोंसे शुरू कर धीरे धीरे लगभग सभी गाड़ियाँ पत्रियोंपर दौड़ा दी है। एक बात समझने की है, इस सारी प्रक्रिया के दौरान रेल प्रशासन ने अपना महत्वकांक्षी कार्यक्रम, ZBTT शून्याधारित समयसारणी अपने परिचालन ने उतार दिया था।

यह शून्याधारित समयसारणी, अंग्रेजी में ZBTT जीरो बेस्ड टाइमटेबल याने टाइमटेबल में सम्मिलित सारी गाड़ियोंको एक शून्य से शुरू कर, एक एक करके व्यवस्थापन में समायोजित करना। इस दौरान गाड़ियोंकी गति कम/ज्यादा करना, परिचालिक अवधि को घटना/बढ़ाना, ठहरावों को रद्द करना,नियमित गाड़ियोंको रदद् करना, मार्ग बदलना, गन्तव्योंमें बदलाव करना यह सारी गतिविधियाँ थी।

मित्रों आपको जानकर अचरज होगा, लेकिन ZBTT का कार्यान्वयन धीमे धीमे ही सही मगर शुरू हो चुका है। आपने अपने क्षेत्र की कई मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके समयोंमे व्यापक बदलाव देखा होगा, अपने क्षेत्र की सवारी गाड़ियोंको खोया होगा या उन्हें मेल/एक्सप्रेस में बदलते देख रहे होंगे, पारम्परिक सवारी डिब्बों को जाकर नई मेमू या डेमू सिटिंग गाड़ियोंको समझने का प्रयास कर रहे होंगे। कुछ नियमित मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंका अभी तक भी शुरू न होना या स्टोपेजेस का स्किप होना यह सब उस शून्याधारित समयसारणी की ही गतिविधि है।

अब आम यात्रिओंके मन मे यह विचार कौंध जाना स्वाभाविक है, जब यह शून्याधारित समयसारणी लागू कर रहे है, ढेर बदलाव होने जा रहे है तो इतने सीक्रेटली, गुप्त तरीकेसे क्यों? यात्रिओंको या यात्री संगठनों को जो भी पता चल रहा है वह सब कुछ मामूली लीक्स के जरिये ही पता चल रहा है। रेल प्रशासन इसे आधिकारिक तौर पर घोषित क्यो नही कर देती, क्या प्रशासन को इसके सुचारु रूप मे कार्यान्वित होने में कोई शक या सन्देह है या और भी कुछ ऐसे अस्थायी बदलाव इसके तहत आनेवाले है, जो रेल प्रशासन अभी प्रगट न करना चाहती हो? खैर!

उपरोक्त लेख से कहीं आप इस शून्याधारित समयसारणी को यात्रीओंके लिए परेशानी तो नहीं न समझ रहे हो, यदि हाँ तो ऐसा बिल्कुल ही समझिए। दरअसल शून्याधारित समयसारणी को लाने की वजह है, वर्षोंसे चली या रही एडजस्टमेंट वाली समयसारणी। आपने एक गारमेंट की एड टीवी पर देखी होगी, हम भारतीय सब एडजस्ट करते है। लेकिन रेल्वे की समयसारणी मे इस एडजस्टमेंट की परिसीमा हो गई थी। अब LHB संरचना की तेज गाडियाँ चलाई जा रही है। यूँ तो LHB कोच की क्षमता 200 kmph है लेकिन हमारे ट्रैक याने पटरियाँ और दूसरा हमारी समयसारणी दोनों ही इसकी गति बढ़ाने की इजाजत नहीं दे पा रहे थे। अब रेल प्रशासन ने ठानी की प्रत्येक चीजों मे बदलाव करना होगा। भारतीय रेल मार्गों की 110 वाली गति को बढ़ाकर लगभग 130 कर ही दिया है और कई मार्गों पर 160 के ट्रायल्स चल रहे है। सिग्नल उपकरण अद्ययावत किए जा रहे है। ऐसे मे समयसारणी को कहाँ भला पीछे छोड़ा जाता? ZBTT के सारे बदलाव इकठठे लागू करने मे काफी परेशानियाँ आती थी इसलिए धीमे धीमे यह बदलाव किए जा रहे है। अब ढेर सारे ठहरावों का रद्दीकरण ही समझिए, एकसाथ इनका रद्दीकरण कर दिया जाता तो यात्रीओंकी परेशानी एकदम से बढ़ जाती दूसरा उसके ऐवज मे जो मेमू/डेमू गाडियाँ चलाई जानी है उनके रैक भी अभी पूर्णतयः उपलब्ध नहीं है।

एक बात तय समझे, शून्याधारित समयसारणी मे यात्रीओंका जो नुकसान दिख रहा है, वह तात्कालिक स्वरूप मे ही होगा। प्रत्येक मुख्य रेल मार्ग पर जो जो बुनियादी सुविधाए बधाई जा रही है, जैसे ट्रैक के दोहरिकरण, तिहरी करण, प्लेटफॉर्म्स मे बढ़ोतरी या उनकी लम्बाइयाँ बढ़ाना, मार्गों का विद्युतीकरण, समर्पित माल गलियारों का निर्माण इत्यादि आगे चलकर यात्री गाड़ियोंकी संख्या निश्चित ही बढ़वाने मे मदत करने वाले है। हमें तो यह लगता है, रेल प्रशासन अब खुलकर शून्याधारित समयसारणी की घोषणा कर उसे लागू कर दे।

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खबर म रे CR से; बेडरोल के आबंटन और पुणे जयपुर छुट्टी विशेष

पुणे जयपुर पुणे साप्ताहिक वातानुकूल थ्री टियर कोच व्यवस्था वाली समर स्पेशल अप्रेल माह से शुरू होने जा रही है। उपरोक्त गाड़ियोंके अग्रिम आरक्षण 19 मार्च मिल सकेंगे। समयसारणी के लिए निम्नलिखित परिपत्रक देखें।

एक खबर और है, बेडरोल के बारे में। मध्य रेल ने एक सूची जाहिर कर बताया है, उनकी गाड़ियोंमे कब से वातानुकूल यात्रिओंको बेडरोमिलने लग जाएंगे।