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देश बदल रहा है, साथ रेलवे भी।

आजादी के अमृत महोत्सव की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा देश दुनिया की बदलती गतिविधियों पर नजर रखते हुए अपनी चालढाल में बदलाव लाते जा रहा है। ऐसे में रेल्वे कहाँ इन बातोंसे अछूती रह पाएगी?

आज ही हमारे प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव की शुरुवात करते हुए भारतीय जनता से 75 सप्ताह में 75 वन्दे भारत एक्सप्रेस गाड़ियाँ चलावाने का वादा किया है। देश की सबसे आधुनिक और तेज गति की गाड़ी का संस्करण है वन्दे भारत गाड़ियाँ। फिलहाल नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा और नई दिल्ली से वाराणसी के बीच दो वन्दे भारत गाड़ियाँ चलाई जा रही है। साथ ही पूर्वोत्तर राज्योंके देशभर से रेल सम्पर्क को सार्थक करने की भी बात हुई है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी रेल कामकाज में यात्री सुविधाओंको बेहतर किए जाने पर जोर देने की बात रखी है। रेलवे के अफसर अब बिजनेस डेवलपमेंट अफसर की तरह काम करते नजर आएंगे, जवाबदेही बढ़ाई जाएगी और शिकायतोंका निपटारा शीघ्रता से किया जाएगा। रेलवे के लिए हर एक यात्री महत्वपूर्ण है, अतः यात्री चाहे द्वितीय श्रेणी जनरल क्लास में यात्रा करता है उसे भी कोई तकलीफ या परेशानी का सामना ना करना पड़े इसकी हिदायतें दी जा रही है।

आज सचमुच रेलवे में यात्री सुविधाओंमें काफी विस्तार हुवा है। स्टेशनोंका हुलिया बहुत कुछ बदल चुका है। स्टेशनोंकी सफाई व्यवस्था देखने लायक रहती है। जिस तरह सार्वजनिक स्थानोंकी सफाई व्यवस्था चाकचौबंद रखी जाए तो उसका उपयोग करनेवाले लोग भी उस सफाई का पालन करते नजर आते है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण महाराष्ट्र में अकोला शहर के निकट “श्री गजानन महाराज संस्थान, शेगांव” है। संस्थान के परिसर में हजारों सेवा भावी कर्मचारी सफाई कार्य मे दक्ष रहते है और उनके द्वारा रखी गयी साफसफाई देखते हुए हजारों लोगोंकी आवाजाही के बावजूद सम्पूर्ण परिसर एकदम साफसुथरा रहता है। यह ठीक वहीं तत्व है, की गन्दगी ही गन्दगी को बढ़ाती है। साफसुथरे प्लेटफार्म और स्टेशन परिसर को यात्री भी सराहते है और गन्दगी करने से कतराते है।

रेल मंत्री अपने कर्मियोंको शुद्ध व्यावसायिक तरीके से काम करवाने का प्रयत्न करवाते नजर आ रहे ऐसेमें यात्री द्वितीय श्रेणी साधारण और खास कर के स्लिपर क्लास की यात्रा सुचारू और सुरक्षित तरीके से कर सके इस पर ध्यान देंगे ऐसी आशा की जा सकती है। आज भी दस दस स्लिपर क्लास के कोचेस में केवल दो या तीन चल टिकट परीक्षक रहते है और द्वितीय श्रेणी में तो रेलवे की ओरसे कोई भी कर्मचारी नही रहता। रेलवे की अधिकृत निगरानी के अभाव में इन डिब्बो में अवैध विक्रेता, भीख मांगने वाले और तृतीयपंथी बेखटके यात्रिओंको परेशान करते रहते है। जब स्टेशन के आगमन पर ही सुरक्षा बल का व्यापक संचार रहता है, इसके बावजूद यह लोग स्टेशन के प्लेटफार्म पर या चलती गाड़ी किस तरह प्रवेश कर जाते है यह न सिर्फ आश्चर्य की बात है बल्कि संशोधन की भी बात है।

रेल प्रशासन के लिए इन बातोंका बन्दोबस्त करना अवश्य ही मामूली सी बात होगी मगर ऐसे ही “लूप होल” उन्हें अपने वाणिज्यिक कामकाज में मिल जाएंगे। फिर वह टिकट बुकिंग्ज हो या टिकट चेकिंग या खानपान विभाग हो या विश्रामालय हो। पार्सल बुकिंग्ज से लेकर लदान और पार्सल डिलेवरी हो सारे वाणिज्यिक कामोंमें व्यवसायिक सूसूत्रता लाने की आवश्यकता है।

कार्य निजी हाथोंमें सौंपे जाने से रेलवे की जिम्मेदारी घट नही जाती अपितु यह जाहिर होता है की वह अपने कर्मचारियों से नियोजनबद्ध तरीकेसे काम नही करवा सकती इसीलिए हार कर उसे निजी हाथोंमें सौप कर अपनी जिम्मेदारी से परे होना चाहती है। क्या हर शासकीय कामोंका निजीकरण होता है उसके पीछे यह वजह तो नही?

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उत्तर रेलवे ने अपने परीपत्रकों द्वारा किया नए समयसारणी का आगाज़

संक्रमणकाल में भारतीय रेल की सभी यात्री गाड़ियाँ रद्द कर दी गयी थी। उसके बाद 12 मई 2020 से धीरे धीरे गाड़ियाँ शुरू की गई और लगभग 80% यात्री गाड़ियाँ पटरियों पर दौड़ने लगी है। मेल/एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और अनारक्षित सवारी गाड़ियाँ चल तो रही है मगर है सभी गाड़ियाँ विशेष श्रेणी की।

सभी यात्री गाड़ियाँ विशेष श्रेणी में चलाने की वजह बताई जा रही है, गाड़ियोंके परिचालन की अनिश्चितता। चूँकि देश के किसी क्षेत्र में संक्रमण की मात्रा को मद्देनजर रखते हुए गाड़ियोंका संचालन नियंत्रित करने का जिम्मा राज्य प्रशासन और उनके द्वारा नामित किए गए नोडल ऑफिसर के निगरानी में है और इसी वजह से गाड़ियाँ कभी भी नियंत्रित की जा सकती है। ऐसी अवस्था मे गाड़ियाँ यदि नियमित रहती तो स्थितियां बड़ी असमंजस भरी हो सकती थी। अतः सभी गाड़ियोंको विशेष श्रेणी में ‘0’ नम्बर से शुरुवात कर क्रमांक दिए गए और यात्री आवश्यकता नुसार चलाया जा रहा है।

उत्तर रेलवे ने आज परीपत्रक जारी किए है जिसमे यह कहा गया है, जब भी समयसारणी नियमित होंगी तब उनकी गाड़ियोंके क्रमांक और परिचालन स्थितियां बदली जाएगी। परीपत्रक देखते हुए सम्भवतः यह लगता है, की नियमित समयसारणी जारी किए जाने में अब ज्यादा दिन नही लगेंगे। नियमित समयसारणी के कारण यात्रिओंके रेल यात्रा नियोजन में स्थिरता आ सकेगी और बार बार रेलवे के परीपत्रक पर नजर रखने की परेशानी से छुटकारा मिल सकेगा। आइए परीपत्रक भी देख लेते है।

नियमित समयसारणी में मार्ग परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
नियमित समयसारणी में गन्तव्य/आरंभिक स्टेशन का परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
नियमित समयसारणी में गाड़ी क्रमांक और परिचालन की स्थिति परिवर्तन किए जाने वाली गाड़ियोंकी सूची।
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एक पत्र और आस जगी सवारी गाड़ियोंके शुरू होने की।

सोशल मीडिया एक कार्यालयीन पत्र वायरल हुवा है और पत्र का मसौदा देखते हुए यह क़यास लगाया जा सकता है की जो PSPC, सवारी गाड़ियोंका अकाल और सूखा, मध्य रेलवे में पड़ा दिखाई दे रहा है वह प्रत्येक मण्डल के प्रत्येक खण्ड पर एक एक सवारी गाड़ी के चलवाने की अनुमति देकर मिटाने का प्रयत्न किया जा रहा है। सर्व प्रथम यह पत्र देखिए।

अब इस पत्र से हम कुछ अनुमान लगा सकते है। यह पत्र सोलापुर मण्डल के वरिष्ठ वाणिज्य अधीक्षक द्वारा मुख्य क्षेत्रीय वाणिज्य अधिक्षक मुम्बई मुख्यालय को प्रेषित किया गया है। पत्र में साफ लिखा गया है, सोलापुर मण्डल के प्रत्येक सेक्शन में प्रत्येकी एक जोड़ी ऐसी 4 जोड़ी गाड़ियाँ पुनर्स्थापित (रिस्टोर) की जा सकती है। अनुमानित यह है, की मध्य रेलवे मुख्यालय प्रशासन ने अपने प्रत्येक मण्डल को अपने हरेक सेक्शन की एक एक आवश्यक सवारी गाड़ी जो पुनर्स्थापित की जा सकती है, उसके प्रस्ताव भेजने के लिए कहा होगा। सोलापुर मण्डल ने जिन चार जोड़ी सवारी गाड़ियोंका प्रस्ताव भेजा है वह तो आपके सामने प्रस्तुत है।

क्या बचे 4 मण्डल, मुम्बई, भुसावल, नागपुर और पुणे इनके भी सवारी गाड़ियोंके शुरू करवाने के लिए प्रस्ताव भेजे गए है? हम नही जानते मगर फिर से अनुमान नामक घोड़ा दौड़ाकर कुछ तथ्योंको आपके सामने ला सकते है।

भुसावल मण्डल में इगतपुरी – भुसावल, खण्डवा – भुसावल और नरखेड़ – बड़नेरा – भुसावल ऐसे मुख्य खण्ड और चालीसगांव – धुळे एक ब्रांच सेक्शन है।

इगतपुरी – भुसावल खण्ड पर 3 जोड़ी सवारी गाड़ियाँ चलती है। 51153/54 मुम्बई – भुसावल – मुम्बई, 51423/24 इगतपुरी – मनमाड़ – इगतपुरी, 51181/82 देवलाली – भुसावल – देवलाली, बड़नेरा – भुसावल खण्ड पर 51183/84 भुसावल – नरखेड़ – भुसावल मेमू, 51197/98 भुसावल – वर्धा – भुसावल सवारी, 51285/86 भुसावल – नागपुर – भुसावल सवारी भुसावल खण्डवा खण्ड पर 51187/88 भुसावल – कटनी – भुसावल सवारी और 51157/58 भुसावल – इटारसी – भुसावल सवारी, चालीसगांव धुळे खण्ड 57 किलोमीटर के मार्ग पर 4 जोड़ी सवारी गाड़ियाँ चलती है। इसमें कहा जा सकता है की देवलाली- भुसावल, भुसावल – कटनी और भुसावल – नरखेड़ मेमू इन 3 जोड़ी गाड़ियोंका प्रस्ताव भेजा जा सकता है। वहीं चालीसगांव – धुळे खण्ड पर भी 4 में से 1-2 जोड़ी का प्रस्ताव भेजा का सकता है।

नागपुर मण्डल में बड़नेरा – नागपुर, वर्धा – बल्हारशहा और नागपुर – इटारसी यह 3 प्रमुख मार्ग है। जिसमे बड़नेरा नागपुर खण्ड 51261/62 अमरावती – वर्धा – अमरावती, 51259/60 वर्धा – नागपुर – वर्धा यह दोनोंही शुरू की जा सकती है। बल्हारशहा – नागपुर – इटारसी खण्ड पर 51829/30 नागपुर इटारसी नागपुर, 51293/94 नागपुर आमला नागपुर, 51195/96 बल्हारशहा वर्धा बल्हारशहा, 59395/96 बैतूल भण्डारकुण्ड बैतूल सवारी गाड़ियाँ चलती है। सारे सेक्शन में यात्री सेवा के हिसाब से एक एक ही सवारी गाड़ी होने से इनके प्रस्ताव भेजे जा सकते है।

पुणे मण्डल में पुणे दौंड पुणे के बीच दो जोड़ी मेमू गाड़ियाँ पहले ही चलने लग गई है। पुणे लोनावला यह उपनगरीय खण्ड है और 18+4 कुल 22 जोड़ी गाड़ियाँ चलती है, उसके लिए प्रशासन हो सकता है मुम्बई उपनगरीय सेवा की तरह निर्बंध लगाकर चलवा दे, कहा नही जा सकता। बचा पुणे – कोल्हापुर खण्ड तो इसमें 51409/10 पुणे कोल्हापुर पुणे, 51435/36 पुणे सातारा पुणे, 51429/30 सांगली कोल्हापुर सांगली, 51407/08, 51427/28 मीरज कोल्हापुर मीरज ऐसी सवारी गाड़ियाँ चलती है। जिसमे हो सकता है कि पुणे कोल्हापुर पुणे को, दिन की यात्रा देखते हुए प्राथमिकता दी जाए।

मुम्बई मण्डल यहाँपर तो उपनगरीय गाड़ियाँ चलती है, और काफी रस्साकशी के बाद निर्बन्धित स्वरूप में आम जनता को यात्रा करने की अनुमति मिली है। मुम्बई – इगतपुरी, मुम्बई – पनवेल और मुम्बई – लोनावाला यह मुख्य मार्ग पर उपनगरीय गाड़ियोंके अलावा कुछेक सवारी गाड़ियाँ चलती है, जिन्है शून्याधारित समयसारणी के तहत मेल/ एक्सप्रेस स्वरूप में चाल मिल चुकी है। मुम्बई भुसावल मुम्बई सवारी चलने लगे तो मुम्बई इगतपुरी खण्ड का समाधान हो जाएगा।

खैर, यह सारे अनुमान ही है, हक़ीकत क्या है और ‘अन्जाम ए गुलिस्तां’ क्या होगा यह तो माई-बाबा म रे ही जाने!

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मध्य रेलवे की सभी सवारी गाड़ियाँ जो संक्रमणकाल के पूर्व में चल रही थी और यात्री चाहते है, की अब जल्द उन्हें पटरियों पर चलाया जाए

कल हमारे ब्लॉग में हमने मध्य रेल प्रशासन को अपनी अनारक्षित सवारी गाड़ियोंको चलवाने का आग्रह किया था। कौनसी और कितनी गाड़ियाँ है जो चल रही थी और आज बन्द है चलिए देखते है। मध्य रेलवे के 5 मण्डल है। मुम्बई, पुणे, सोलापुर, नागपुर और भुसावल। इन सभी मण्डलोंकी सवारी गाड़ियोंकी सूची जो संक्रमणकाल के पूर्व में सुचारू रूप से चल रही थी और यात्रिओंमें लोकप्रिय थी।

मुम्बई मण्डल का कार्यक्षेत्र मुम्बई से इगतपुरी, कल्याण से लोनावला यह मुख्य मार्ग और बाकी अलग अलग उपनगरीय मार्ग पनवेल – कर्जत, दीवा – रोहा, कर्जत – खोपोली, दिवा – वसई, ठाणे – पनवेल ट्रांस हार्बर, माहिम कॉर्ड, कुर्ला – पनवेल

1 : 51027/28 मुम्बई पंढरपुर मुम्बई त्रिसाप्ताहिक।51029/30 मुम्बई विजयपुरा मुम्बई सप्ताह में 4 दिन और 51033/34 दौंड साइनगर शिर्डी दौंड लिंक सवारी प्रतिदिन यह मुम्बई , पुणे, दौंड होकर चलनेवाली अतिलोकप्रिय सवारी गाड़ी थी। हालांकि यह गाड़ियाँ शून्याधारित समयसारणी में एक्सप्रेस में तब्दील किए जाने की सूचना थी जिसे 01027/28 मुम्बई पंढरपुर मुम्बई त्रिसाप्ताहिक और 01041/42 मुम्बई शिर्डी मुम्बई सप्ताह में 4 दिन ऐसे चलाया जा रहा है। मुम्बई विजयपुरा का परिचालन प्रश्न ही है।

2: 51033/34 दौंड साइनगर शिर्डी दौंड लिंक सवारी प्रतिदिन, यह चार डिब्बों की लिंक पैसेन्जर, तीन दिन मुम्बई पंढरपुर और चार दिन मुम्बई विजयपुरा सवारी गाड़ियोंसे दौंड तक आकर अहमदनगर, पुनताम्बा होते हुए शिर्डी जाती थी। अहमदनगर शहर और जिले से मुम्बई की यह राज्यरानी थी, जो अब 01041/42 एक्सप्रेस में बदल गयी है । लेकिन अहमदनगर क्षेत्र को अब भी आशा है, की मुम्बई से सम्पर्क रोजाना बना रहने हेतु इस गाड़ी को पूर्व की तरह रोजाना चलते रखना चाहिए।

इसके अलावा मुम्बई मण्डल में कोंकण क्षेत्र के लिए 50119/20 दिवा पनवेल दिवा सवारी, 61011/12/13/14 दिवा रोहा दिवा सवारी, 50103/04 दादर रत्नागिरी दादर सवारी और डहाणू रोड पनवेल मेमू, वसई रोड पनवेल मेमू, दिवा पेण मेमू आदि गाड़ियाँ है जो रद्द ही है।

भुसावल मण्डल का कार्यक्षेत्र इगतपुरी – भुसावल – खण्डवा, भुसावल से बड़नेरा यह मुख्य मार्ग और बड़नेरा – अमरावती, बड़नेरा – चांदूर बाजार, चालीसगांव – धुले, जलम्ब – खामगांव यह ब्रान्च लाइन्स इसके अलावा बन्द पड़ी छोटी लाइनोंमें मूर्तिजापुर – अचलपुर – यवतमाल और पाचोरा – जामनेर

1: 51153/54 मुम्बई भुसावल मुम्बई सवारी गाड़ी। भुसावलसे सुबह 7:05 बजे रवाना होकर शाम 19:05 को मुम्बई जानेवाली, तमाम छोटे गाँव के किसानों, श्रमिकोंको बड़े शहरोंतक सस्ते में पहुंचाने वाली यह गाड़ी। शून्याधारित समयसारणी में इसे एक्सप्रेस बनाने का प्रस्ताव है। एक्सप्रेस बनने से किराया तो 2, 4 गुना बढ़ेगा ही मगर स्टापेजेस भी रद्द किए गए तो गाँव के लोगोंकी बड़ी मुसीबत होनेवाली है। यह गाड़ी जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए ताकि छोटे गांव, शहर अपने जिला मुख्यालयोंसे सम्पर्कता रख सके।

2: 51423/24 इगतपुरी मनमाड़ इगतपुरी शटल नासिक मनमाड़ के यात्रिओंके बीच काफी लोकप्रिय, लेकिन फिलहाल बन्द है।

3: 51157/58 भुसावल इटारसी भुसावल सवारी, भुसावल से खण्डवा, हरदा, इटारसी के बीच की ओवरनाइट गाड़ी, दोनों ओरसे रात को निकलकर सुबह अपने गन्तव्य को टिकाने वाली किफायती गाड़ी।

4: 51181/82 देवलाली भुसावल देवलाली सवारी, शटल के नाम से अप डाउन वालों में बेहद लोकप्रिय, जलगाँव जिले की सम्पर्क क्रांति जो जिले के छोटे छोटे गांव से रोजाना जिला मुख्यालयोंसे कामकाजी लोगोंके लिए महत्वपूर्ण गाड़ी साथ ही गाँव खेड़ोंसे किसान इससे अपने सागसब्जी शहरोंमें बेचने के लिए लेकर आते थे, शून्याधारित समयसारणी में इसे भी एक्सप्रेस में तब्दील करने का प्रस्ताव है। यात्री चाहते है किराया भले ही ज्यादा देना पड़े, एक्सप्रेस ही सही मगर अब इसे पटरियों पर ले आना चाहिए।

5: 51187/88 भुसावल कटनी भुसावल सवारी, यह डे टाइम में चलनेवाली गाड़ी, भुसावल से सुबह 9:30 को निकल खण्डवा 12:55, इटारसी 17:30 और जबलपुर होते हुए कटनी सुबह 3:25 को पहुंचती थी। वापसीमे कटनी से रात 22:30, इटारसी सुबह 6:30, खण्डवा 13:25 और भुसावल शाम 17:00 को पहुंचती थी।

6: 51197/98 भुसावल वर्धा भुसावल, भुसावल से दोपहर 14:30 को निकल वर्धा 21:40 को पोहोंचती थी। वापसीमे वर्धा से 23:00 को निकल भुसावल को सुबह 8:00 बजे पोहोंचती थी। यह गाड़ी विदर्भवासियोंको भुसावल – सूरत सवारी का कनेक्शन था।

51285/86 भुसावल नागपुर भुसावल सवारी, 51183/84 भुसावल नरखेड़ भुसावल मेमू सवारी, 51197/98 भुसावल वर्धा भुसावल सवारी यह तीनों जोड़ी गाड़ियाँ विदर्भ क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मलकापुर, शेगांव, अकोला, मूर्तिजापुर, बड़नेरा अमरावती, धामनगांव, पुलगांव वर्धा और नागपुर इन गांव शहरोंको और विदर्भ के आस पास के छोटे बड़े शहर, जिले जैसे वाशिम, हिंगोली, यवतमाल, पुसद के सम्पर्क के लिए बेहद अहम गाड़ियाँ रद्द रहने से यात्रिओंको बड़ी परेशानी है। यात्री चाहते है यह गाड़ियाँ भी जल्द पटरी पर आ जाए।

इसके अलावा भुसावल मण्डल की ब्रांच लाइन चालीसगांव धुलिया, जलम्ब खामगांव, बड़नेरा अमरावती, इन पर भी गाड़ियाँ बन्द है। इन ब्रांच लाइनोंमें से बड़नेरा – अमरावती की 6 जोड़ी गाड़ियोंको शून्याधारित समयसारणी में बन्द करने का प्रस्ताव है। वैसे छोटी लाइन की ब्रांचेज पाचोरा – जामनेर, मूर्तिजापुर – अचलपुर – यवतमाल यह तो गेज कन्वर्शन तहत कभी की बन्द की जा चुकी है।

सोलापुर मण्डल

सोलापुर मण्डल का कार्यक्षेत्र दौंड से वाड़ी, दौंड से मनमाड़, कुरडुवाडी से मीरज, कुरडुवाडी से लातूर रोड और ब्रांच लाइन पुणताम्बा से शिर्डी, अहमदनगर से नारायणडोह ऐसा है।

71413/14/15/16 पुणे सोलापुर पुणे डेमू, 71301/02 सोलापुर गुंटकल सोलापुर डेमू, 71305/06 कलबुर्गी वाड़ी कलबुर्गी डेमू, 57628 कलबुर्गी सोलापुर, 57631/32 सोलापुर – रायचुर – कलबुर्गी सवारी, 57641/42 सोलापुर गदग सोलापूर सवारी, 57649/50 कलबुर्गी – वाड़ी – सोलापुर, 57685/86 सोलापुर विजयपुरा/ बगलकोट सोलापुर सवारी, 57129/30 विजयपुरा हैदराबाद विजयपुरा सवारी, 57659/60 सोलापुर – फलकनुमा कलबुर्गी सवारी यह सोलापुर मण्डल और उस क्षेत्र की गाड़ियाँ है।

इसके अलावा पुणे – दौंड – मनमाड़ खण्ड पर, 51491/02 पुणे मनमाड़ पुणे सवारी, 57515/16 दौंड नान्देड दौंड सवारी, 51421/22 पुणे निजामाबाद पुणे सवारी, 77657/58 जालना शिर्डी जालना डेमू शुरू किए जाने की प्रतीक्षा में है। इसमें हो सकता है कि द म रेल के भी रैक लगते हो मगर सभी सवारी/डेमू गाड़ियाँ फिलहाल बन्द ही है।

पुणे मण्डल

पुणे मण्डल का कार्यक्षेत्र लोनावला – पुणे – दौंड, पुणे – कोल्हापुर और दौंड – बारामती – फलटण – लोनन्द यह एक ब्रांच लाइन

01489/90/91/92 पुणे दौंड पुणे के बीच चलनेवाली मेमू गाड़ियाँ जो इसी क्षेत्र के मजबूत प्रवासी संघटना के आंदोलनों की देन है की चलाई गई। 3 जोड़ी और डेमू चलती थी, चूँकि इस खण्ड पर अब मेमू रैक उपलब्ध होने के बाद मेमू गाड़ियाँ चलाई जाएगी। पुणे मण्डल में पुणे – कोल्हापुर, पुणे – लोनावला, पुणे – दौंड – बारामती – फलटण ऐसे मार्ग आते है। पुणे – लोनावला उपनगरीय खण्ड पर 18 जोड़ी लोनावला तक और 4 जोड़ी पुणे – तलेगांव ऐसे कुल 22 जोड़ी गाड़ियाँ चलाने की अनुमति की प्रतीक्षा कर रही है।

51405/06 मिरज कैसल रॉक मिरज सवारी, 51419/20 मिरज हुब्बाल्ली मिरज सवारी,51425/26 परली वैजनाथ मिरज परली वैजनाथ वाया लातूर, उस्मानाबाद, कुरडुवाडी, 51433/34 निजामाबाद पंढरपुर निजामाबाद वाया नान्देड, परभणी, लातूर, कुरडुवाडी, 71419/20 पुणे कोल्हापुर पुणे डेमू, 51427/28 मीरज कोल्हापुर मीरज, 51409/10 पुणे कोल्हापुर पुणे, 51437/38 कुरडुवाडी मीरज कुरडुवाडी, 51435/36 पुणे सातारा पुणे इत्यादि सवारी गाड़ियाँ चलाए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है।

नागपुर मण्डल का कार्यक्षेत्र बड़नेरा से नागपुर, नागपूर से इटारसी, वर्धा – बल्हारशहा यह मुख्य मार्ग और आमला – छिंदवाड़ा, चांदूर बाजार – नरखेड़, ताडली – घुघुस, माजरी – पिम्पलकुट्टी यह ब्रान्च लाइने और बन्द पड़ी पुलगांव – आर्वी छोटी लाइन

57135/36 अजनी काजिपेट अजनी, 51829/30 नागपुर इटारसी नागपुर, 51293/94 नागपुर आमला नागपुर, 51195/96 वर्धा बल्हारशहा, 51259/60/61/62 नागपुर – वर्धा – अमरावती यह सवारी गाड़ियाँ इसके अलावा भुसावल मार्ग की 2 और सवारी गाड़ियोंका उल्लेख भुसावल मण्डल के सूची में आ चुका है।

यह सिर्फ मध्य रेलवे की सवारी गाड़ियों के परिचालन शुरू करवाने तक की समस्या नही है बल्कि मध्य रेलवे से लगे हुए जो इतर क्षेत्रीय रेलवे है उनकी की गाड़ियाँ मध्य रेलवे में नही आ जा रही है। प म रेल ने अपनी कई सारी अनारक्षित गाड़ियाँ चलवा दी है मगर की इटारसी भुसावल की बात वह बिल्कुल नही करते वही अवस्था द म रेल की भी है उनकी नान्देड दौंड, निजामाबाद पुणे, परली मीरज, निजामाबाद पंढरपुर यह सब गाड़ियोंपर मौन साधा गया है। पश्चिम रेलवे की दो अनारक्षित गाड़ियाँ सूरत भुसावल सूरत और नंदुरबार भुसावल नंदुरबार चल रही है और शुक्र है ही केवल यही दो जोड़ी गाड़ियाँ है कि बेसीजारे यात्री भुसावल – जलगाँव इस मध्य रेलवे के खण्ड पर अनारक्षित टिकट ले कर यात्रा कर पा रहे।

आशा है, की उपरोक्त लम्बी सुचियोंमे न चलनेवाली और चलाए जाने की उम्मीद रखनेवाली गाड़ियोंको देखकर ही रेल और राज्य प्रशासन का कठोर मन पिघले और गाड़ियाँ चलवाने की अनुमति मिल जाए।

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कदम ही नही उठाओगे तो चल कैसे पाओगे? और दौड़ना तो भूल ही जाइएगा।

मध्य रेलवे की बात ही कर रहे है, जब पूरे देशभर में PSPC, अनारक्षित गाड़ियोंकी बौछार हो रही है बगल के मुख्यालयोंमे पश्चिम रेलवे मुम्बई से रोज लगभग हर रोज गाड़ियोंके चलाने की घोषणाएं की जा रही है। पश्चिम मध्य, उत्तर पश्चिम, दक्षिण पश्चिम रेलवे सीजन पास जारी करवा दिए है और मध्य रेलवे जस की तस है।

मध्य रेलवे पर किसी भी गाड़ी में अनारक्षित यात्री टिकट सुविधा चलाई नही जा रही, अपवाद है भुसावल – सूरत, भुसावल – नन्दूरबार गाड़ियाँ मगर उसे भी अपवाद क्यों कहे? आखिर वह कहाँ मध्य रेल की गाड़ीयाँ है, वह तो पश्चिम रेलवे की ही गाड़ियाँ है। तो मध्य रेलवे आखिर अपने यात्री सुविधा के लिए कर क्या रही है?

भुसावल पुणे भुसावल हुतात्मा एक्सप्रेस, शालीमार लोकमान्य तिलक टर्मिनस शालीमार एक्सप्रेस यह दो प्रतिदिन चलनेवाली एक्सप्रेस गाड़ियाँ संक्रमणकाल जो बन्द हुई तो फिर खुली ही नही। ठीक उसी तरह मुम्बई भुसावल मुम्बई सवारी, देवलाली भुसावल देवलाली सवारी, भुसावल से नागपुर, भुसावल से नरखेड़, भुसावल से वर्धा, भुसावल से कटनी, भुसावल से इटारसी यह भुसावल मण्डल की सवारी गाड़ियोंके बारे में कोई रेलवे अधिकारी कुछ बोलने के लिए तैयार ही नही।

मध्य रेलवे में 5 मण्डल है। मुम्बई, पुणे, सोलापुर, नागपुर और भुसावल। यदि सब मण्डलोंकी सवारी गाड़ियाँ देखे तो तमाम सवारी गाड़ियाँ रद्द ही है। जो भी मेल/एक्सप्रेस चलाई जा रही है सब की सब विशेष श्रेणी में, आरक्षित आसन व्यवस्था के साथ चलाई जा रही है। इन गाड़ियोंसे कम अंतर की यात्रा करना कतई सम्भव नही है। यदि यात्री सोचे कि उसे पास के 50-100 किलोमीटर के किसी शहर जाना है तो क्या वह महीनेभर पहले आरक्षण करेगा? या तत्काल में टिकट लेगा? जिस अनारक्षित यात्रा के लिए 50 रुपए लगते है उसे 150 रुपए खर्च कर आरक्षित यात्रा करनी पड़ती है और इसके बावजूद यदि कन्फर्म टिकट नही मिली तो 60 रुपए का क्लर्केज काट कर पैसा हाथ मे धर दिया जाता है कि भाईसाब आप का टिकट आरक्षित नही हुवा है, आप नही यात्रा कर सकते। क्या रेल प्रशासन इस बात को नही समझ रही है या समझना नही चाहती? क्यों यात्रिओंका मानसिक, शारारिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है?

मुम्बई मण्डल की पुणे होकर शिर्डी, पंढरपुर और विजयपुरा चलनेवाली सवारी गाड़ी को ZBTT शून्याधारित समयसारणी के निर्देशोंनुसार एक्सप्रेस में बदल कर विशेष श्रेणी में शुरू कर दिया गया है। क्या बाकी मण्डलोंमें इसी प्रकार से निर्णय ले कर गाड़ियोंको चलवाया नही जा सकता? जरूर किया जा सकता है, मगर निर्णय लेना रेल प्रशासन की जिम्मेदारी है। भुसावल मण्डल में भी शून्याधारित समयसारणी के अनुसार सवारी गाड़ियोंको मेल/एक्सप्रेस में बदलने के निर्देश है। स्थानीय पत्रपरिषदों में मण्डल अधिकारियोंने सवारी गाड़ियोंको मेमू विशेष में बदले जाने की बात भी कही है, मेमू गाड़ियाँ भी जगह जगह यार्ड में खड़ी है मगर चलवाने नाम पर …. कोई निर्णय नही लिया जा रहा है।

यही अवस्था मध्य रेल के सभी मण्डलोंमें है। पुणे मण्डल में यात्रिओंके भारी दबाव एवं आंदोलनों की चेतावनी के बाद दौंड – पुणे मेमू रोजाना दो फेरोंमें चलाई जाने लगी है क्या रेल प्रशासन को मनवाने का यही तरीका है? रेल प्रशासन यात्रिओंकी मजबूरी और परेशानी देख कर निर्णय नही ले सकती? या अपने क्षेत्र के यात्रिओंकी क्या मांग है इस बात की शायद जानकारी ही उन्हें नही है और यही बात यात्री उपयोगकर्ता परामर्श समितियोंके सद्स्योंपर भी लागू होती है। कुछेक सदस्य है, जो स्थानीय यात्रिओंकी कम अंतर के गाड़ी की मांगे बार बार रखे जाते देखे गए है मगर उन्हें भी आजतक कोई ठोस उत्तर प्रशासन नही दे पाया है।

आखिर वजह क्या है, क्यो स्थानीय यात्रिओंको मजबूर, परेशान एवं प्रताड़ित किया जा रहा है? संक्रमण की स्थिति में बहुत सारा सुधार है, मुम्बई उपनगरीय गाड़ियोंमे टीकाकरण पूर्ण हो चुके यात्रिओंको स्वतंत्रता दिन से यात्रा करने की अनुमति दी जा रही है तो क्यों न यही पैटर्न बाकी मण्डलोंमें भी अपना कर कम अंतर की अनारक्षित गाड़ियाँ चलवाने की प्रक्रिया शुरू की जाए? महोदय आपसे विनंती है आग्रह है कृपया इस दिशा में कदम उठाए, आप भी चलिए और कामकाजी लोगोंको भी चलने में मद्त कीजिए।