काचेगुड़ा से अकोला होते हुए नरखेड़ जाने वाली छह दिवसीय इण्टरसिटी और अकोला की साप्ताहिक गाड़ी बीच के दिनोंमें अचानक द म रेल प्रशासन ने बन्द कर दी गयी थी। यह तो हिंगोली, वाशिम और नान्देड के रेल प्रेमी कार्यकर्ताओं ने जम कर दबाव बनाया और वह काम भी कर गया। दिनांक 14 जनवरीसे यह गाड़ियाँ फिरसे यात्री सेवा में हाजिर हो रही है।
केवड़िया से 7 जोड़ी नई गाड़ियाँ और 3 जोड़ी गाड़ियोंके विस्तार की घोषणा
केवड़िया मे हमारे देश के प्रथम गृहमंत्री बैरिस्टर सरदार वल्लभभाई पटेल इनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। सरदार पटेल को उनकी कठोर और बेबाक कार्यशैली की वजह से लौहपुरुष के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रतिमा का निर्माण ” स्टेच्यु ऑफ यूनिटी” नाम से किया गया है।
केवड़िया को देश के विविध क्षेत्रोंसे रेल संपर्क से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्धाटन वीडियो लिंक द्वारा दिनांक 17 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी करने जा रहे है। साथ ही सात जोड़ी यात्री रेल गाड़ियोंके भी परिचालन की घोषणा की जा रही है। हम आपके लिए उन गाड़ियोंकी समयसारणी ले आए है।
20945/46 केवड़िया हज़रत निजामुद्दीन केवड़िया द्विसाप्ताहिक गुजरात सम्पर्क क्रान्ति
फ़िलहाल यह गाड़ी 09145/46 इस गाड़ी क्रमांक से चलाई जायेगी।
विद्यमान गाड़ियोंको केवड़िया तक विस्तारित किया जा रहा है।
12927/28 दादर वडोदरा दादर एक्सप्रेस प्रतिदिन को वडोदरा से आगे केवड़िया तक विस्तारित किया जारहा है। यह गाड़ी फ़िलहाल 02927/28 क्रमांक से चलेगी।
20903/04 वडोदरा वाराणसी वडोदरा साप्ताहिक महामना एक्सप्रेस को वड़ोदरा से आगे केवड़िया तक विस्तारित किया जा रहा है। यह गाड़ी फ़िलहाल 09103/04 क्रमांक से चलेगी।
20905/06 वडोदरा रीवा वडोदरा साप्ताहिक महामना को केवड़िया तक विस्तारित किया जा रहा है। यह गाड़ी फ़िलहाल 09105/06 क्रमांक से चलेगी।
इन सभी गाड़ियोंके आरक्षण दिनांक 15 जनवरीसे उपलब्ध रहेंगे।
लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विश्वविख्यात प्रतिमा “स्टेच्यू ऑफ यूनिटी” में स्थापित है। देशभर से पर्यटक लोग इसे देखने आते है।
अब तक केवड़िया मे रेल सम्पर्क नही था, लेकिन पश्चिम रेलवे के वडोदरा मण्डल के अथक प्रयासोंने और हमारे प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से यह काम सम्पन्न हुवा है। दिनांक 17 को प्रधानमंत्री इस रेल लाईन को देश को समर्पित करने जा रहे है। इसके साथ ही 6 जोड़ी रेल गाड़ियाँ अब सीधे केवड़िया से चलेगी।
इसमें दादर (प) से केवड़िया और अहमदाबाद केवड़िया जनशताब्दी यह दो जोड़ी एक्सप्रेस गाड़ियाँ नई है और प्रताप नगर केवड़िया के बीच 2 जोड़ी मेमू गाड़ियाँ चलेगी। इसके अलावा वाराणसी केवड़िया, रेवा केवड़िया, चेन्नई केवड़िया, निजामुद्दीन केवड़िया यह 4 जोड़ी गाड़ियाँ अपने निर्धारित वाराणसी वडोदरा महामना, रीवा वडोदरा महामना, मुम्बई सेंट्रल वडोदरा इनको वडोदरा से आगे केवड़िया तक विस्तारित किया जा रहा है, तो गुजरात सम्पर्क क्रांति को सप्ताह में एक दिन वडोदरा के बाद अहमदाबाद न ले जाते हुए केवड़िया ले जाया जा रहा है।
यह पूरा उद्धाटन समारोह वीडियो लिंक द्वारा किया जाएगा, जिसका मिनट टू मिनट कार्यक्रम आपके लिए दे रहे है।
रेल प्रशासन ने शून्याधारित समयसारणी की संकल्पना में यह बात पहले ही तय कर ली गयी थी की वे अब कोई भी लिंक एक्सप्रेस नही चलायेंगे।
लिंक एक्सप्रेस की संकल्पना बहोत उपयोगी है। जबसे भारतीय रेल चल रही है, तब से ही ऐसी लिंक एक्सप्रेस चली आ रही है। पहले ज्यादा गाड़ियाँ नही चलती थी। मुख्य रेल मार्गोंपर एखाद दो एक्सप्रेस और एक मेल रहती थी बाकी छोटे छोटे अंतर की सवारी गाड़ियाँ। उसमे भी ब्रांच लाइनोंपर तो पक्का सवारी गाड़ियाँ ही चलती थी, वह कभी भी मुख्य मार्ग पर जंक्शनोंसे आगे नही चलाई जाती थी। उदाहरण के लिए सूरत – भुसावल ब्रांच लाइन लीजिए। इस मार्गपर सूरत से भुसावल के बीच वर्षोंतक 3 जोड़ी सवारी गाडीही चलती थी। जिन यात्रिओंको लम्बा सफर करना होता वह जंक्शन्स पर रुककर दूसरी गाड़ी पकड़ अपनी यात्रा करते थे।
लिंक एक्सप्रेस की संकल्पना भी तब ही से चली मुख्य मार्ग की गाड़ी के कुछ डिब्बे निकाल कर ब्रांच लाइनपर एक अलग गाड़ी चलाई जाती थी जो दूरदराज के क्षेत्रोंकी सम्पर्कता मुख्य मार्गसे बनाए रखती थी। उत्तर भारत मे बहोत सारी छोटी छोटी ब्रांच लाइनें है, जिन्हें अलगसे रेल गाड़ी द्वारा जोड़ने में दिक्कतें थी अतः वैसी जगहोंपर लिंक एक्सप्रेस चलती थी। इसके लिए आप मध्य रेलवे की उत्तर भारत मे जानेवाली साकेत एक्सप्रेस का उदाहरण लीजिए। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से फैजाबाद मुख्य गाड़ी 11067 चलती है, जिसके कुछ डिब्बे प्रतापगढ़ स्टेशनपर निकलकर 21067 गाड़ी क्रमांक से रायबरेली जाते है और बची हुई गाड़ी फैजाबाद जाती है। यह सारी व्यवस्था इसी प्रकार से वापसी में भी होती है। गाड़ी का एक हिस्सा रायबरेली लिंक एक्सप्रेस के नाम से प्रतापगढ़ आता है और मुख्य गाड़ी फैजाबाद लोकमान्य तिलक टर्मिनस साकेत एक्सप्रेस मयू जुड़ कर सीधा मुम्बई को आता है। अब आपको लिंक एक्सप्रेस की संकल्पना समझ आ गयी होगी। इसी तरह 02779/80 निजामुद्दीन वास्को गोवा एक्सप्रेस में लोंडा स्टेशनपर 4 डिब्बे निकलकर 07305/06 हुब्बाली लिंक एक्सप्रेस बनकर हुब्बाली के लिए चलते थे और इस तरह हुब्बाली की दिल्ली से सीधी सम्पर्कता हो जाती थी।
रेलवे इन लिंक एक्सप्रेस से परेशानी क्या थी अब वह भी जान लीजिए। जैसे ही गाड़ी लोंडा स्टेशन पर पोहोचती, मुख्य गाड़ी के 4 डिब्बों की शंटिंग याने उन्हें मुख्य गाडीसे अलग करना और उसे लिंक एक्सप्रेस बनाना इसमें मुख्य गाडीका बहोत सारा समय जाया होता था। साथही रेल की 2 लाईनें ब्लॉक हो जाती थी, बड़ी संख्यामे कर्मचारीवर्गइस जोड़ तोड़ में अटकता था। इसके बाद गाड़ियोंका वैक्यूम ब्रेक प्रेशर आने में काफी वक्त तक इंतजार करना पड़ता था। दूसरा रेलवे के आधुनिकीकरण के चलते LHB डिब्बों का शंटिंग नही किया जा सकता था, उसकी एक अलग ही समस्या थी, LHB डिब्बों की लाइटिंग सिस्टम। यह व्यवस्था गाड़ी के अंतिम सिरे पर लगे जनरेटर से चलती है। ऐसेमें बताइए किस तरह डिब्बों को काटा और जोड़ा जा सकता है?
ऐसी ढेर समस्याओंका रेल प्रशासन ने एक ही इलाज निकाला, लिंक एक्सप्रेस को बन्द कर देना। इसके ऐवज में ब्रांच लाइनोंसे अलग से रेल गाड़ियाँ चलाने का प्रावधान रखा गया है। शायद इसीलिए कर्णाटक सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस जो सप्ताह में 5 दिन यशवंतपुर से निजामुद्दीन के बीच चलती है, मार्ग परिवर्तन कर के हुब्बाली होकर चलाई जाएगी।
12649/50 सप्ताह में पाँच दिन चलाई जाने वाली बेंगालुरु निजामुद्दीन कर्णाटक संपर्कक्रांति का मार्ग एवं नम्बर बदल कर चलाई जाने वाली है। पहले यह गाड़ी यशवंतपुर से निकलकर धर्मावरम, करनूल सिटी, काचेगुड़ा, बल्हारशहा, नागपुर, भोपाल, झाँसी, ग्वालियर और निजामुद्दीन तक चलती थी। अब इसका गाड़ी क्रमांक 06249/50 किया गया है और मार्च यशवंतपुर – निजामुद्दीन के बीच बदलकर तुमकुर, अरसीकेरे, दावणगेरे, हवेरी, हुब्बाली, गदग, कोप्पल, होसापेट, बल्लारी, गुंटकल, पेन्डाकल्लु, करनूल टाउन, काचेगुड़ा, बल्हारशहा, नागपुर, भोपाल, झाँसी, ग्वालियर और निजामुद्दीन ऐसा होगा।
06249 यशवन्तपुर से निजामुद्दीन के बीच करीबन 43.5 घंटे लग रहे है और 06250 निजामुद्दीन से यशवंतपुर के लिए 45.5 घंटे लग रहे है। यह गाड़ी कुल 2760 किलोमीटर का सफर तय कर रही है। वही पहले 12649/50 संपर्कक्रांति धर्मावरम के रास्ते, 2284 किलोमीटर की अपनी यात्रा 35 घंटे में पूरी करती थी। याने अपने पूर्ण यात्रा में, करीबन 475 किलोमीटर की बढ़ोतरी और यात्रा समय मे 8 से 10 बढ़ गए है।
कुल मिलाकर बेंगालुरु और दिल्ली के बीच का सम्पर्क अब इस गाड़ी थोड़ा लम्बा हो गया है, मगर कर्णाटक के भीतरी शहरोंका दिल्ली से सम्पर्क अवश्य ही जुड़ गया है।
06249 यशवंतपुर से 11 जनवरीसे लेकर 31 जनवरी तक चलेगी और 06250 हज़रत निजामुद्दीन से 14 जनवरीसे लेकर 03 फरवरी तक चलेगी। इस बीच ऐसा अनुमान निकाला जा रहा है, रेल प्रशासन इस तरह की कवायदें शून्याधारित समयसारणी को लेकर किए जा रही है, यात्रिओंकी प्रतिक्रिया और अपनी रेल व्यवस्थाओंका जायजा लेने का प्रयत्न कर रही है।