एक व्हिडियो रेलवे स्टेशन का, पहले देख लीजिए फिर देते है आपके प्रश्नोंका उत्तर।
वीडियो सौजन्य: S.Lalitha @Lolita_TNIE
है न सुन्दर? क्या आपको यह ब्रिटिश रेलवे स्टेशन तो नही न लग रहा है? नही जी, आप भारत मे ही है, जी हाँ, यह हमारे भारतीय रेल का ही रेलवे स्टेशन है।
यह रेलवे स्टेशन है, नया बना हुवा बेंगालुरु के केम्पेगौडा इंटरनेशनल हवाई अड्डे (KIA) के लिए विशेष तौर पर बनाया गया रेलवे स्टेशन। जनवरी से हवाईअड्डे के कर्मचारियों और यात्रिओंके लिए बेंगालुरु, यशवंतपुर, बैय्यापनहल्ली और येलहंका से डेमू मेमू ट्रेनोंसे इस स्टेशन का सीधा सम्पर्क स्थापित हो गया है। स्टेशनपर सारी यात्री सुविधाएं यथास्थित शुरू हो गयी है। यह तो आप वीडियो देख कर जान ही लिए है, आगे समयसारणी भी दे रहे है। आनेवाले दिनोंमें और भी यात्री सेवाए बढ़नेवाली है, ऐसा द प रेल की ओरसे कहा गया है।
जी हाँ, यह प्लेटफार्म टिकट ही है और आज का 02 जनवरी का है। हाँ भाई, भारतीय रेलवे का ही है। यशवंतपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म टिकट और वह भी केवल नियमित रेट ₹10/- मे।
अब प्रश्न यह है, बाकी रेलवे स्टेशनोंपर प्लेटफार्म टिकट क्यों जारी नही किया जा रहा? या पुणे जैसे स्टेशनपर प्लेटफॉर्म टिकट के ₹50/- क्यो लिए जा रहे?
प्लेटफॉर्म पर कोई घूमने नही जाता है, रेल प्रशासन से प्रार्थना है, जरूरतमन्द व्यक्तियोंके लिए तो भी प्लेटफॉर्म का आबंटन शुरू करवाया जाए। कई बार वृद्ध यात्री, दिव्यांग या चल पाने में असमर्थ यात्रिओंके लिए रेल गाड़ी में अपना सामान लेकर चढ़ना, उतरना असहज होता है। उचित कारणोंके साथ प्लेटफार्म टिकट जारी किए जाए तो यात्रिओंकी बड़ी सुविधा होगी।
हाल ही में भारतीय रेल ने अपनी आरक्षित टिकट बुकिंग की अधिकृत वेबसाइट और ऐप में कुछ सुधारणाए की, कलेवर बदला, बुकिंग्ज की गति और क्षमता को बढ़ाया।
गाड़ियोंके नाम, नम्बर, यात्रा की तारीख, जगह की उपलब्धि अब काफी साफ और बड़े, बोल्ड अक्षरोंमें आती है। रिजर्वेशन करते वक्त साइट की बेहतर स्पीड की वजह से ऐप बफरिंग से मुक्ति मिली है। खाली जगहोंका ऑप्शन नया डला है, जिससे जिन गाड़ियोंमे जगह उपलब्ध है, सामने आ जाती है। जो नाम सुरक्षित किए गए है, वह बुकिंग्ज के वक्त सीधे उपलब्ध रहते है। इतर सुविधाओंकी बुकिंग्ज जैसे खानपान, रिटायरिंग रूम्स वगैरह की बुकिंग्ज भी उसी स्थानपर ऐप में उपलब्ध कराई गई है। रेल कर्मियोंके आरक्षण बुकिंग्ज अब ऐप, वेबसाइट से हो सकेगी जो पहले इसके जरिए नही की जा सकती थी। लेकिन इन सबमे सिवाय साफ और बड़े अक्षरोंके कोई और नवीनता नजर नही आई, उल्टे पहले ऐप की कई सुविधाओंको गायब कर दिया गया है।
यह जितना भी सुधार किया गया है, वह तकनीकी रूपसे भलेही उन्नत एवं गतिमान किए गए हो, रेल पास बुकिंग्ज की सुविधा जोड़ी गयी हो, लेकिन यात्रिओंकी अपेक्षाएं कुछ और भी थी। इसके पूर्व जो फीचर्स ऐप में थे, जिनमे सिलेक्टेड डेट के साथ गाड़ियोंके अगले छह फेरोंके रिजर्वेशन स्टेटस दिखाई देते थे जो ऐप मोडिफिकेशन में गायब कर दिए गए। इसके साथ ही किसी एक सिलेक्टेड डेट की ही गाड़ियाँ दिखाई देती है, किसी अन्य दिनोंकी गाड़ियाँ अब डैश बोर्ड से नदारद है “अन्य दीनोंकी गाड़ियाँ उपलब्ध नही” ऐसा डैश बोर्ड पर लिखा होता है, हो सकता है की कोई और अपडेट आनेवाली हो। पहले ऐप में डैश बोर्ड से ही आरक्षण के कोटे की कैटेगरी याने जनरल, तत्काल, लेडीज ई. चुनते आती थी, जिसे डैश बोर्ड के बाहर कर दिया गया है। यदि आपको अलग अलग कोटे तलाशने है तो हर बार बैक जाकर कोटा बदलना होगा।
नए ऐप और वेबसाइट में गाड़ी सिलेक्ट करने के साथ ही सिलेक्टेड गाडीके समयसारणी के साथ उनके कोटा पर्टीक्युलर भी जोड़े जाने चाहिए यह हमारी काफी पुरानी माँग थी। जैसे 02656 चेन्नई अहमदाबाद नवजीवन एक्सप्रेस में चेन्नई से अहमदाबाद तक टिकट लेंगे तो GNWL, और अगले स्टेशन गुडूर से टिकट लेओंगे तो PQWL उसी प्रकार उदाहरण के लिए 01040 गोंदिया कोल्हापुर महाराष्ट्र एक्सप्रेस में गोंदिया से लेकर इतवारी तक से नागपुर से कोल्हापुर तक किसी भी स्टेशन का टिकट देखेंगे तो GNWL कोटे में मिलेगा। इतवारी के बाद नागपुर कोटा शुरू होता है तो नागपुर से आगे कोल्हापुर तक किसी भी स्टेशन के टिकट RLWL कोटे में मिलेगा, वही हाल आगे भुसावल के कोटे में भी है। कहने का तात्पर्य यह है यदि गाड़ियोंके समयसारणी के साथ कोटा इंडिकेटर एड किए जाते है तो न सिर्फ यात्रिओंकी सुविधा बढ़ेगी बल्कि रेलवे के राजस्व में भी काफी इज़ाफा होगा।
कुल मिलाकर आईआरसीटीसी वेबसाइट और ऐप का अपग्रेडेशन यात्रिओंकी अपेक्षा तो पूर्ण करता ही नही बल्कि और ज्यादा निराश कर देता है। PRS टिकट, जिसमे कर्मचारी लगते है, स्टेशनरी लगती है, रेलवे की मशीनरी, जगह ई. का इस्तेमाल किया जाता है, उसपर कोई सर्विस चार्ज नही पर ई टिकट जो व्यक्ति खुद और अपनी खुद की स्टेशनरी वह भी जरूरी लगे तो इस्तेमाल करता है उस पर सर्विस चार्ज लगाया जाता है। इस तरह का व्यवहार देखने से ऐसा लगता है रेल प्रशासन को ईश्वर सद्बुद्धि दे न तो कमसे कम व्यवहार बुद्धि तो भी जरूर दे ऐसी कामना है।