10 दिसम्बर 2023, रविवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, द्वादशी/त्रयोदशी, विक्रम संवत 2080
उ रे NR में बाराबंकी – अयोध्या – शाहगंज – जाफ़राबाद रेल मार्ग दोहरीकरण अंतर्गत बाराबंकी रेल यार्ड रिमॉडलिंग हेतु 11 दिसम्बर 2023 से 16 जनवरी 2024 के बीच, छत्तीस दिनोंका रेल ब्लॉक लिया जा रहा है। उपरोक्त तिथियों में 44 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंके फेरे पूर्णतः रद्द रहेंगे। 67 मेल/एक्सप्रेस गाड़ियाँ अपने नियमित रेल मार्ग में, बाराबंकी होकर नही गुजरेंगी, अन्य 7 अलग अलग मार्ग से चलाई जाएंगी। यात्रीगण से निवेदन है, कृपया निम्नलिखित परिपत्रक देख कर अपनी रेल यात्रा का नियोजन करें। परिपत्रक में गाड़ी क्रमांक, गाड़ी का नाम, प्रकार, ब्लॉक के अवधि में अवस्था, JCO गाड़ी के प्रारम्भिक स्टेशन से छूटने की तिथि एवं बाधित फेरों की संख्या इस तरह रचना की गई है।
पूर्णतः रद्द गाड़ियाँ :-
निम्नलिखित गाड़ियाँ अंशतः रद्द की जाएगी :-
अपने नियमित मार्ग से परिवर्तन कर के चलनेवाली गाड़ियाँ :-
परावर्तित मार्ग :- 1) अयोध्या – अयोध्या कैंट – सुल्तानपुर – प्रयागराज जंक्शन – कानपुर होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 2) पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन – प्रयागराज जंक्शन – कानपुर होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 3) लखनऊ – माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ जंक्शन – वाराणसी होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 4) लखनऊ – सुल्तानपुर होकर चलनेवालीगाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 5) बुढ़वल – शहाजहाँपुर होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 6) कानपुर – प्रयागराज जंक्शन – बनारस – वाराणसी सिटी – भटनी – गोरखपुर होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
परावर्तित मार्ग :- 7) कानपुर – प्रयागराज जंक्शन – बनारस – वाराणसी सिटी – बलिया होकर चलनेवाली गाड़ियाँ
निर्धारित समयसारणी में नियंत्रण कर चलाई जानेवाली गाड़ियाँ :-
यात्रीगण अपनी रेल यात्रा का नियोजन करने से पूर्व रेलवे की हेल्पलाइन 139, अधिकृत वेबसाइट या ऍप से जानकारी ले लें।
09 दिसम्बर 2023, शनिवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080
बहुप्रतीक्षित और मुम्बई आजमगढ़ मुम्बई साप्ताहिक एक्सप्रेस के शून्याधारित समयसारणी में रद्द किए जाने के बाद की गई लगातार माँग के ऐवज में मिली 15181/82 मऊ – लोकमान्य तिलक टर्मिनस – मऊ साप्ताहिक एक्सप्रेस दिनांक 16 दिसम्बर से मऊ जंक्शन से प्रत्येक शनिवार को और 18 दिसम्बर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस से प्रत्येक सोमवार को रवाना की जाएगी।
गाड़ी की कोच संरचना इस प्रकार है, 02 वातानुकूल टु टियर, 06 वातानुकूल थ्री टियर इकोनॉमी, 07 स्लिपर, 04 द्वितीय श्रेणी साधारण, 01 जनरेटर वैन और 01 एसएलआर कुल 21 LHB कोच रहेंगे।
09 दिसम्बर 2023, शनिवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, द्वादशी, विक्रम संवत 2080
बरसों स्टॉपेज लेती हुई कोई यात्री गाड़ी फलाँ तिथि से न रुकने लगे या बरसों तक यात्रिओंकी जमी-जमाई, अप-डाउन की सेट हुई गाड़ी, अचानक से पूर्णतः रद्द की घोषणा हो जाए! बड़े जोर का झटका लगता है। ग़ैरउपनगरीय रेल में संक्रमण के बाद यह बात बहुत आम हो गयी है। यात्री गाड़ियोंसे रोजाना चलने वाले यात्रिओंके लिए अब रेल से जाना-आना करना दु:स्वप्न हो गया है। नियमित गाड़ियोंके समय बदल दिए गए है, स्टोपेजेस हटा दिए गए है या उन्हें पूर्णतः रद्द कर दिया गया है। उदाहरण देना, कहाँ कहाँ के दे भैया? प्रत्येक ज़ोन, हरेक मण्डल में ऐसी गाड़ियाँ मिल जाएंगी और पीड़ित यात्री भी।
जाहिर सी बात है, प्रश्न ठेठ संसद में पहुंच गया। विद्यमान सांसद ने सीधे रेल मन्त्री से जवाब चाहा और यह वीडियो देखिए, बड़ा वायरल हुवा है।
रेल मन्त्री स्पष्ट शब्दोंमें कह रहे है, रखरखाव कार्य हेतु ‘मेंटेनेंस ब्लॉक’ के लिए कुछ गाड़ियोंको विविक्षित समय से पहले निकालने के लिए समयसारणी में बदलाव किया गया या स्टोपेजेस हटाए गए और कुछ गाड़ियोंमे इस तरह के बदलाव सम्भव नही थे उन्हें पूर्णतः रद्द कर दिया गया, हटा दिया गया। आगे एक आश्वासन भी दिया जा रहा है, रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर मान्यता देता है तो स्टोपेजेस या बन्द हुई गाड़ियाँ पुनः स्थापित की जा सकती है।
उदाहरण देते वक्त रेल मन्त्री जी ने सड़क यातायात का उल्लेख किया। सड़क यातायात में वाहन ‘डाइवर्जन’ का उपयोग सहजता से कर लेते है जो रेल यातायात में कदापी सम्भव नही है।
सुरक्षा और रखरखाव के लिए रेल ब्लॉक के लिए किसी भी यात्री को कोई आपत्ति नही हो सकती मगर… ! मगर, यह रेल ब्लॉक की अवधि, बदला हुवा परिचालन की जानकारी यात्रियों तक समुचित समय एवं यथायोग्य तरीके से पहुंचनी आवश्यक है। होता यह है, मात्र 24 घण्टे पूर्व रेल ब्लॉक लिया जाता है और यात्री गाड़ियाँ पिटती है, यात्री घण्टो परेशान होते है। यात्रिओंको बिल्कुल विश्वास में नही लिया जाता यह सबसे बड़ी दिक्कत है। परिवार एवं सामान के साथ चलनेवाले यात्री को कह दिया जाता है, फलाँ गाड़ी अपने गंतव्य तक नही जाएगी या परावर्तित मार्ग से जाएगी, वह बेचारा क्या करें?
कई बार ऐसे होता है, गाड़ियाँ ब्लॉक के अनुसार रद्द बताई जाती है और मात्र कुछ समयावधिसे पहले उन्हें पुनर्स्थापित कर दिया जाता है। विशेष गाड़ियोंका तो परिचालन कभी समयसारणी के अनुसार होता ही नही। यह गाड़ियाँ 24/36 घण्टों तक की देरी से भी चलते रहती है। हफ़्तों, महीनों पहले किए आरक्षण ऐन यात्रा के समय फुस्स हो जाते है। गाड़ियाँ रद्द या देरी से चलती है जिससे यात्री के किसी काम की नही रहती।
कुल मिलाकर यह रेल का खेल, खेला बनकर रह गया है। यात्री परेशान हो रहे है और रेल मन्त्री रेल बुनियादी सुधारोंकी दुहाई दे रहे है। एक बात समझना जरूरी है, रेल सेवा यात्रिओंके लिए है या यात्री रेल सेवा के लिए है? जिस तरह यात्रिओंका बड़ा तबक़ा सड़क यातायात की तरफ़ रुख कर रहा है और केवल मजबूरी में ही रेल यातायात को प्राधान्य दे रहा है, वह दिन दूर नही मालवहन की तरह यात्री सेवा से भी रेल विभाग पिछड़ जाएगा।
वैसे भी रेल विभाग आम यात्रिओंके वर्ग, द्वितीय जनरल और स्लिपर क्लास को धीरे धीरे मेल/एक्सप्रेस गाड़ियोंसे लगातार कम करते जा रहा है। रेल सेवा ‘एलाइट’ वर्ग, हवाई यात्रा करनेवाले यात्रिओंके मद्देनजर बनती जा रही है। वन्देभारत, वन्दे मेट्रो, वन्दे स्लिपर और नियमित गाड़ियोंसे नदारद होते ग़ैरवातानुकूल कोच, इसका सीधा उदाहरण ही तो है।
एक अभ्यास में बताया गया है, यात्री आजकल वातानुकूल कोच से यात्रा को प्राधान्य दे रहे है। भई, जब ग़ैरवातानुकूल कोच ही नही रहेंगे या नाममात्र रहेंगे तो यात्री बेचारा क्या करें?
रेल विभाग को चाहिए, जितनी सवारी गाड़ियाँ बन्द कर रखे है, उन्हें यथासंभव शुरू करवाए। चूँकि उन्हें मेल/एक्सप्रेस में पहले ही बदल चुके है अतः किराए से कम आय का बहाना तो चलने से रहा। बात ब्लॉक की है तो समयसारणी बदलिए, मगर गाड़ियाँ बन्द करना यह ठीक नही। दूसरा नियमित गाड़ियोंमे ग़ैरवातानुकूल कोचोंको बढ़ने की छोड़िए कमसे कम उन्हें जितने पहले उपलब्ध थे उनकी संख्या कायम करें। वातानुकूलित दफ़्तरोंमें बैठे या हवाई जहाजोंसे घूमने वाले उच्चवर्गीयों के सर्वे से आम जनता सिर्फ प्रताड़ित ही हो रही है। ज्ञात रहे, रेल विभाग अपनी बुनियादी संरचना में जो भी व्यापक और आधुनिक बदलाव कर रही है, वह उनतक पहुंच नही रहा, उन्हें सुख का अनुभव तो करा नही रहा बल्कि परेशानी और हैरत का सबब बन रहा है।
07 दिसम्बर 2023, गुरुवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, दशमी, विक्रम संवत 2080
उत्तर मध्य रेलवे में ग्वालियर – वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई झाँसी जंक्शन के बीच रेल तिहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य हेतु लगभग 12 से 18 दिसम्बर के बीच मुख्य रेल मार्ग की कुछ यात्री गाड़ियाँ बाधित रहेंगी, जिसका विवरण निम्नलिखित है,
पूर्णतः रद्द गाड़ियाँ :-
मार्ग बदलाव कर चलनेवाली गाड़ियाँ :-
उक्त गाड़ी अपने प्रारम्भिक स्टेशन झाँसी से दिनांक 17 दिसम्बर को नियमित समय 16:50 की जगह 150 मिनट देरी से याने 19:20 पर रवाना होगी।
निम्नलिखित गाड़ियाँ, ब्लॉक अवधीके दौरान नियंत्रित कर चलाई जाएगी।
06 दिसम्बर 2023, बुधवार, मार्गशीर्ष, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080
किराया रियायत के लिए रेल प्रशासन ने सभी “दिव्यांग कार्ड” को डिजिटल करना आवश्यक किया तब से दिव्यांग जन बड़ी परेशानी में थे। इन कार्ड की डिजिटल करने की अर्जी और कागजात मण्डल कार्यालय के वाणिज्यिक विभाग में ही जमा करने होते थे। एक एक रेल मण्डल में 7-8 जिले अंतर्भूत होते है तो सोचिए कितने दूर दूर से दिव्यांग जनों को मण्डल के चक्कर लगाने पड़ते थे? उदाहरण के लिए भुसावल मण्डल का कार्यक्षेत्र बहुत बड़ा है। भुसावल मण्डल के अंतर्गत नौ जिले आते है। नासिक, धुळे, जलगाँव, बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाळ, बुरहानपुर और खण्डवा।
इतने दूर से केवल अर्जी देने मण्डल मुख्यालय में आना यह वैसे भी आम जन को तकलीफ देह होता है, यह तो दिव्यांगों की बात थी। भुसावल रेल मन्डल प्रशासन ने दिव्यांग जनों को इस मामले में बड़ी राहत देने की घोषणा की है। दिव्यांग जन अपने कागजात, अर्जी के साथ “डिजिटलाइजेशन” के लिए, अब स्थानीय PRS या बुकिंग काउंटर पर जमा करा सकते है।
मण्डल प्रशासन इन कागजात एवं अर्जी पर यथायोग्य कार्रवाई और पूर्तता करने के पश्चात सम्बंधित व्यक्ति का डिजिटल कार्ड दिव्यांग के पते पर भेज देगा। उसके लिए उसे मण्डल कार्यालय या जहाँ उसने अपनी अर्जी स्थानीय टिकट बुकिंग ऑफिस, रिजर्वेशन ऑफिस में जमा कराई थी, चक्कर लगाने की आवश्यकता नही रहेगी।
यहाँपर हम उक्त जानकारी का पत्र एवं रियायत कार्ड के डिजिटलाइजेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज की सूची जोड़ रहे है। दिव्यांग जन उक्त सूची के अनुसार अपने सारे कागजात सेल्फ अटेस्टेड (स्व-साक्षांकित) अर्जी के साथ अपने स्थानीय रेल टिकट बुकिंग/रिजर्वेशन ऑफिस में जमा करवाये।
दिव्यांग जन की किराया रियायत हेतु पात्रता के निकषडिजिटलाइजेशन हेतु आवश्यक कागजात की सूचीअर्जी का नमूना अंग्रेजी मेंअर्जी का नमूना हिंदी में
दिव्यांग जनोंके लिए पात्रता के न्यूनतम निकष पर ध्यान दे। दिव्यांग के अपंगता प्रमाणपत्र पर, शारारिक दृष्टिसे न्यूनतम 40% अपंगता, मानसिक अपंगता न्यूनतम 40%, न्यूनतम 100% अंधत्व और न्यूनतम 100% मूक-बधिर इतनी अपंगता अंकित हो तभी उसे रेल में किराया रियायत मिल सकती है।
उपरोक्त सूचना मध्य रेल, भुसावल मण्डल की है मगर यह योजना भारतीय रेल के सभी क्षेत्रीय कार्यालय एवं मण्डल मुख्यालयों पर भी उपलब्ध हो सकती है। दिव्यांग जनोंसे यह बिनती है, सम्बंधित रेल मण्डल से इसकी जानकारी अवश्य ले और इस तरह की सुविधा उनके मण्डल में ना हो तो उसे जारी करवाने का आग्रह करें।