Stories/ News Alerts

Uncategorised

वन्देभारत vs गरीबों की रेल

09 अगस्त 2023, बुधवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, नवमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, वैसे हम विशुद्ध रूप से, सिर्फ और सिर्फ रेल सम्बन्धी ख़बरोंसे जुड़े हुए है, हमारे ब्लॉग को किसी राजनीति से कोई लेनादेना नही। मगर दिनोंदिन एक बात हमारे मन मे कौंध रही है, नई और बहुचर्चित वन्देभारत एक्सप्रेस पर मीडिया, सोशल मीडिया में दी गयी विशेष तवज्जों और वह भी अलग नज़रिए वाली। जैसे की वन्देभारत एक्सप्रेस से मवेशी कटे, वन्देभारत लोको का चेहरा बिगड़ा, वन्देभारत एक्सप्रेस पर पत्थरबाजी, वन्देभारत एक्सप्रेस का फलाना नुकसान हुवा इत्यादि।

क्या यह, वन्देभारत vs गरीबों की रेल ऐसे नैरेटिव, रिवायत बनाने का एजेन्डा चलाया जा रहा है? क्या आज से पहले देश मे कभी कोई वातानुकूलित या प्रीमियम गाड़ी नही चलाई गई है? देश की पहली सम्पूर्ण वातानुकूलित नई दिल्ली हावडा राजधानी सन 1969 में चली थी और आज भारतीय रेल का गौरव है। वातानुकूलित कुर्सी यान वाली शताब्दी एक्सप्रेस 1988 से चलाई जा रही है। हालांकि यह गाड़ियाँ सर्वप्रथम चली तब भी देश में इनको कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा। देश को ऐसी विलासपूर्ण, लग्जरी गाड़ियोंकी क्या जरूरत है, यह बोला जाता था मगर आज इन्ही गाड़ियोंका, देश की गतिमान, लोकप्रिय और भारतीय रेलवे की लाभदायक गाड़ियोंमे शुमार होता है।

वन्देभारत एक्सप्रेस ऐसी ही एक प्रीमियम, आधुनिक साजसज्जा, तकनीक वाली, देश को गौरवान्वित करनेवाली गाड़ी है। इसकी खूबियों के बारे में आप लोग इतनी बार पढ़ चुके होंगे के दोबारा से यहॉं गिनाने की कोई आवश्यकता हमें नही लगती। आज हम सिर्फ उस के लिए जो अलग व्यवहार, खबरें मीडिया में अग्रता से लाई जाती रही है, उस पर बात करेंगे।

क्या रेल पटरियों पर, रेल से टकरा कर आवारा मवेशियों के कटने की खबरें आम थी, अर्थात सुर्खियों में छपती थी? नहीं, मगर वन्देभारत के संदर्भ के कर यह खबर हेडलाइन्स में आती रही है। क्या पहले रेल पर पत्थरबाजी कभी नही हुई? होती थी और उनपर रेल प्रशासन की ओर से उपाय, उपचार और कड़ी कार्रवाई भी की गई है, मगर वन्देभारत पर यह खबरें सुर्खियों में छापी गयी। एक प्रवाद है, जिनके नाम होते है, उन्हें बड़ी आसानी से बदनाम भी किया जा सकता है, क्योंकि कौन, किस के बारे में, यह ज्यादा समझाना नही पड़ता। है ना?

कुछ वन्देभारत गाड़ियाँ खाली चल रही है। मीडिया इस मामले भी बड़ी सक्रियता से उन्हें असफल होने का तमगा लिये पीछे दौड़ रहा है। एक अभ्यास बताता है, किसी भी वन्देभारत का परिचालन खर्च, गाड़ी मात्र 30 प्रतिशत यात्रीभार से भी चले तो, निकलता है। गौरतलब यह है, देश भर के सारे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में वन्देभारत चले इसके लिए आग्रही थे और है। देशभर में अब तक 25 वन्देभारत गाड़ियाँ चली है और कुल 200 वन्देभारत गाड़ियाँ आने वाली है। 25 में से 2 या 3 गाड़ियाँ अपेक्षित यात्री भार से कम यात्रिओंका वहन कर रही है, तो क्या वन्देभारत एक्सप्रेस को असफ़ल करार दिया जा सकता है, कदापि नहीं।

मीडिया का दूसरा चहेता विषय है, गरीबों की गाड़ियाँ विरुद्ध वन्देभारत एक्सप्रेस। यह कैसी तुलना है? भारतीय रेल में द्वितीय श्रेणी से लेकर एग्जीक्यूटिव और वातानुकूल प्रथम तक विभिन्न टिकट श्रेणियाँ है। अनारक्षित डेमू/मेमू से लेकर सम्पूर्ण वातानुकूलित राजधानी एक्सप्रेस तक की विभिन्न गाड़ियोंके प्रकार यात्रिओंके लिए चलाये जाते है। ऐसे में कम उत्प्रन्न वाले यात्रिओंको वन्देभारत एक्सप्रेस कहाँ आड़े आती है?

शून्याधारित समयसारणी कार्यक्रम के अंतर्गत कुछ गाड़ियोंको बन्द करना तय किया गया था। यह भारतीय रेल का दूरदृष्टिता विकास कार्यक्रम था। पुराने पारम्परिक कोचेस को बदलकर नए गतिमान आधुनिक LHB कोच लाना, रेल के सम्पूर्ण विद्युतीकरण से लोको का शंटिंग कर बदलने की प्रक्रिया से परिचालन समय की बचत करना, देशभर की पटरियों को उच्च क्षमता में बदलकर उनका मजबूतीकरण करना, सिग्नलिंग यंत्रणाओंको आधुनिक बनाना, सेल्फ प्रोपल्ड लोको वाली ट्रेन सेट को चलाना, मालगाड़ियोंके लिए समर्पित गलियारों का निर्माण, अलग रेल नेटवर्क या रेल दोहरीकरण, तिहरीकरण कर अलग पटरी बनाना, रेलवे स्टेशनोंको आधुनिकता का नया जामा पहनाना ताकी यात्रिओंके आवागमन में गतिशीलता आये, उनका आवागमन सुविधाजनक हो ऐसी व्यवस्था करना यह सारा कार्य भारतीय रेल को आधुनिकता की ओर ले जाने की जद्दोजहद ही तो है, क्या यह भद्दे नैरेटिव चलाने वालोंकी समझ से परे है? शायद नही, मगर बहुत से आम लोग इससे बरगलाए जरूर जा सकते है।

मित्रों, यह बात सच है, देश का आम यात्री साधारण गाड़ियाँ, मेल/एक्सप्रेस में साधारण कोच की कामना रखता है। उसे इन वातानुकूलित प्रीमियम गाड़ियोंकी न ही चाहत है, न ही फिलहाल कोई आवश्यकता। मगर हर व्यवस्था को बेहतर और ज्यादा बेहतर करने का अपना वक्त, समय होता है। जिस तरह आज रेल आधुनिकीकरण का वक़्त चल रहा है, उन सेल्फ प्रोपल्ड डेमू/मेमू गाड़ियोंका का भी वक़्त आएगा और जरूर आएगा। अपनी मांगों, जरूरतों को संजोए रखिये। भारतीय रेल आपकी हर सुविधाओंका ख्याल रख रही है। रेल तिहरीकरण, चौपदरी करण, DFC समर्पित मालगाड़ियोंके कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड/सेमी हाई स्पीड कॉरिडोर बन रहे है। ऐसी स्थिति में नियमित रेल मार्गों से न सिर्फ मालगाड़ियां हटेंगी बल्कि प्रीमियम और नॉनस्टॉप गाड़ियाँ भी अलग नेटवर्क पर जा सकती है।

रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट यह प्रसव वेदना है। आनेवाला काल भारतीय रेल के लिए एक उज्वल, उषःकाल लाने वाला है। बस, हम और आप सब इसी का इंतज़ार करते है।

Uncategorised

11139/40 मुम्बई गदग एक्सप्रेस, 11305/06 सोलापुर गदग एक्सप्रेस प्रतिदिन गाड़ियोंके होसापेट्टे विस्तार को रेल बोर्ड की अनुमति

08 अगस्त 2023, मंगलवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, सोलापुर, गदग और होसापेटे क्षेत्र के यात्रिओंकी लम्बी माँग को आखिरकार रेल प्रशासन ने अनुमति की हरी झंडी दिखा दी है।

11305/06 सोलापुर गदग सोलापुर प्रतिदिन एक्सप्रेस कुछ समय परिवर्तन हो कर गदग से आगे होसापेटे तक सेवा देने जल्द ही पहुंचने वाली है।

साथ ही 11139/40 मुम्बई छत्रपति शिवाजी महाराज से गदग के बीच चलनेवाली प्रतिदिन एक्सप्रेस भी होसापेटे तक विस्तारित की जा रही है।

रेल बोर्ड ने इस विस्तार को अनुमति दे दी है और स्थानीय क्षेत्र, मण्डल को इस बदलाव को यथोचित समय पर लागू करने कहा है।

Uncategorised

भारतीय रेल में आम यात्री के लिए सुनहरा काल

07 अगस्त 2023, सोमवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, सप्तमी, विक्रम संवत 2080

भारतीय रेल! हमारे देश का नैशनल कैरियर! हम आम लोगोंके लिए किफायती, सुरक्षित यातायात का प्रमुख साधन। उपनगरीय यात्रिओंको जोड़े तो किसी पश्चिमी देशोंकी समूची लोकसंख्या गिन लीजिए, इतने यात्रिओंकी एक दिन की ढुलाई, हमारी भारतीय रेल में होती है। क्या देश की प्रचण्ड लोकसंख्या इसका कारण है या भारतीय रेल के अत्यंत किफायती किराए यात्रिओंको रेल यात्रा करने के लिए आकर्षित करते है?

किसी नतीज़े पर पहुंचने से पहले और चर्चाको आगे बढाते है। भारतीय रेल में उपनगरीय गाड़ियाँ छोड़, देश की लम्बी दूरी की रेल यात्राओंको समझते है। इन गाड़ियोंमे सबसे महंगा टिकट वातानुकूल प्रथम श्रेणी का है और सबसे सस्ता द्वितीय श्रेणी का। इसी दायरे में टिकट की तमाम श्रेणियाँ, विभिन्न प्रकार की प्रीमियम, राजधानी, शताब्दी, नवावतारित वन्देभारत, जनशताब्दी, सुपरफास्ट, मेल/एक्सप्रेस और मेमू एक्सप्रेस गाड़ियाँ सम्मिलित है। चूँकि सवारी गाड़ियाँ संक्रमण काल मे बन्द हुई तो फिर आजतक चली ही नही। नही तो ग़ैरउपनगरीय क्षेत्र की सबसे सस्ती द्वितीय श्रेणी टिकट का तमगा उससे न छीन पाता। घनघोर आश्चर्य की बात है, देश की सबसे लम्बी चलनेवाली कन्याकुमारी – डिब्रूगढ़ विवेक एक्सप्रेस जो 4153 किलोमीटर यात्रा करती है, उसके बाद दूसरे क्रमांक की तिरुवनंतपुरम – सिल्चर अरुनोई एक्सप्रेस जो 3915 किलोमीटर चलती है, जिनके एण्ड टु एण्ड यात्रा में चार – चार दिन लग जाते है, उनमें भी द्वितीय श्रेणी साधारण टिकट भारतीय रेल में उपलब्ध है। इन सब बातों के दौरान हमारी रेल यात्री के स्वर्णिम काल की बात तो पिछे रह गई, चलिए लौटते है,

हमारी रेल में 3 प्रकार के यात्री होते है, रोजाना यात्रा करनेवाले, जिनमे बहुतसे यात्री उपनगरीय गाड़ियोंमें यात्रा करते है और इनके पास मासिक/त्रिमासिक (MST/QST) टिकट होता है। दूसरे फ्रिक्वेंट ट्रेवलर अक्सर रेल यात्रा करने वाले यात्री। जो अमूमन महीने – दो महीने में रेल यात्रा करते है। तीसरे कभीकभार यात्रा करनेवाले पर्यटक या कारणवश यात्रा करनी पड़े ऐसे रेल यात्री। इन फ्रिक्वेंट ट्रैवलर या नियमित यात्रा करनेवाले लोगोंकी चर्चा में भारतीय रेल में आम यात्रिओंका स्वर्णिम काल, संक्रमण के बाद जो ‘केवल आरक्षित यात्री’ बन्धन में यात्री गाड़ियाँ चल रही थी, वह था। है न, आश्चर्यभरी बात!

इसके लिए हमें आजकल भारतीय रेल के 90 फीसदी गाड़ियोंमे जो धान्दली चल रही है, उसे समझना होगा। रेल गाड़ियोंकी संरचना मानकीकरण के नामपर द्वितीय श्रेणी साधारण कोचों की कटौती, यात्री सुविधाओं की निगरानी रखनेवाले TTE चल टिकट निरीक्षक की कमी, और स्लिपर क्लास के रद्द नही किये गए प्रतिक्षासूची वाले काउंटर टिकट धारी यात्री, कम अन्तर यात्रा करनेवाले नियमित मासिक पास धारक और अनारक्षित टिकट धारक यात्री तमाम लोग बड़ी बेदरकारी से आरक्षित स्लिपर कोच और वातानुकूल थ्री टियर में धड़ल्ले से घुस कर यात्रा करने वाले यात्री। आज की ताजा ख़बर है, हावडा – चेन्नई मेल के आरक्षित कोच के यात्रिओंने खड़गपुर स्टेशनपर कोच में घुसे अनारक्षित यात्रिओंको निकाल बाहर करने तक गाड़ी को रोके रखा। यह गाड़ी खड़गपुर स्टेशनपर 4 घण्टे खड़ी रही।

आज कल की रेल गाड़ियोंकी स्थिति

यह सारी धान्दली, संक्रमण काल मे और बाद के लगभग 1 वर्ष तक बिल्कुल बन्द थी। केवल अग्रिम आरक्षण प्राप्त यात्री ही स्टेशन के अहाते में आ सकते थे। साधारण टिकट पूर्णतः बन्द कर दिए गए थे। अनारक्षित यात्रिओंके लिए रेलवे स्टेशन और तमाम यात्री गाड़ियाँ बन्द थी। सारे द्वितीय साधारण कोच में 2S आरक्षित द्वितीय सिटिंग के भाँती बुकिंग्ज की जा रही थी। तमाम मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट गाड़ियोंमें जितनी बुकिंग बस उतने ही यात्री यह माहौल था। केवल आवश्यकता पड़नेपर ही यात्री टिकट आरक्षित कर रेल यात्रा के लिए स्टेशनोंपर पहुंच रहा था। इस काल को यह लोग आम यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल कह रहे है।

मित्रों, यहॉं आपको निश्चित ही हैरानी लग रही होगी, बन्धनोंमें रहकर रेल यात्रा स्वर्णिम काल कैसे हो सकती है? क्या आरक्षित कोच में अनारक्षित यात्रिओंका यात्रा न करना यह उस संक्रमण काल का ही नियम था, पूर्वचलित न था? क्या MST धारक की स्लिपर क्लास में यात्रा करने की अनुमति है? क्या काउंटर का छपा टिकट वेटिंग लिस्ट में रह जाये तो भी आरक्षित श्रेणी में यात्रा कर सकता है? नहीं ना? फिर अब क्यों यह लोग नियमोंको ताक पर रख धान्दली मचा रहे है? क्यों रेल के टिकट जाँच दल, रेल्वेके अधिकारी अनाधिकृत यात्रिओंको दण्डित नही करते है? संक्रमण काल मे जो यात्री अनाधिकृत थे वे अब भी अनाधिकृत ही है। बस, फर्क यह है, लोगोंको नियमोंको ताक पर रखने की आदतसी हो गयी है। रेल विभाग को अपने वर्षोँ चले ढर्रों पर कायम है। हजारों किलोमीटर की साधारण टिकटें जारी कर ही रही है। अब भी काऊंटर्स की प्रतिक्षासूची में रह जानेवाली टिकट को बिना टिकट मान कर दण्डित करने में लापरवाही बरती जा रही है।

अब रेल प्रशासन को अपने आदि-अनादि काल के नियमोंको बदलने का वक्त आ गया है। कोई यात्री गाड़ी 500 किलोमीटर से ज्यादा यात्रा करनेवाली है, उसे सम्पूर्ण आरक्षित गाड़ी कर चलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही 500 किलोमीटर से कम अन्तर की इंटरसिटी गाड़ियाँ, 250 किलोमीटर से आसपास अन्तर चलनेवाली अनारक्षित डेमू/मेमू गाड़ियोंकी समुचित व्यवस्था करना चाहिए। मासिक पास, द्वितीय अनारक्षित टिकट केवल इंटरसिटी और कम अन्तर वाली डेमू/मेमू तक ही सीमित होना चाहिए। MST टिकट में सड़क पर लगनेवाले टोल नाकोंकी तरह दखल ली जाए। यह जो भी स्टेशन डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत स्टेशनोंपर आगमन, एन्ट्री पॉइंट पर भी यात्री टिकट, पास चेक हो और अधिकृत व्यक्ति ही रेल आहाते में आए। यह इतनी सी अपेक्षाओंकी पूर्तता होती है तो भारतीय रेल सदा के लिए अपने यात्रिओंके लिए स्वर्णिम काल लेकर आएगी।

Photo courtesy : http://www.indiarailinfo.com

Uncategorised

मध्य रेल भुसावल मण्डल के 6 स्टेशन रिडेवलपमेंट प्लान्स, जो “अमृत भारत स्टेशन योजना” में शामिल किए गए है।

06 अगस्त 2023, रविवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2080

मित्रों, भुसावल मण्डल के 6 स्टेशनोंके रिडेवलपमेंट कार्य का शिलान्यास आज रखा जा चुका है, उनके विस्तृत प्लान्स आपके लिए हाजिर है। मलकापुर, शेगांव, बड़नेरा, नेपानगर, मनमाड़ एवं चालीसगांव स्टेशन्स का हुलिया आमूलचूल बदलने जा रहा है। देखिए,

Uncategorised

भारतीय रेल की रेलवे स्टेशन उन्नयन योजना “अमृत भारत स्टेशन स्किम”

06 अगस्त 2023, रविवार, अधिक श्रावण, कृष्ण पक्ष, षष्टी, विक्रम संवत 2080

1309 रेल्वे स्टेशन “अमृत भारत स्टेशन योजना” के तहत विकसित किए जाने के लिए संशोधित किए गए है।

रेल विभाग की पुरानी, मॉडल स्टेशन योजना 1999 से 2008 तक प्रचलन में थी। इस योजना के तहत भारतीय रेलवे पर 594 स्टेशनों को उन्नयन (रिडेवलपमेंट) के लिए चुना गया था।

हाल ही में, भारतीय रेलवे पर रेलवे स्टेशनों के विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की गई है। जिसके तहत 1275 स्टेशन चुने गए है उनमेसे आज 508 स्टेशनोंकी उन्नयन परियोजना का शिलान्यास किया जा रहा है। इन 1275 स्टेशनोंकी सुधारित सूची हम PDF फॉरमेट में इंग्लिश में, यहॉं जोड़ रहे है। यह योजना दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ निरंतर आधार पर स्टेशनों के विकास की परिकल्पना करती है। इसमें स्टेशन पहुंच, सर्कुलेटिंग एरिया, वेटिंग हॉल, शौचालय, आवश्यकतानुसार लिफ्ट/एस्केलेटर, स्वच्छता, मुफ्त वाई-फाई, स्थानीय उत्पादों के लिए कियोस्क जैसी सुविधाओं में सुधार के लिए मास्टर प्लान तैयार करना और चरणों (स्टेप बाई स्टेप) में उनका कार्यान्वयन शामिल है। ऐसे प्रत्येक स्टेशन पर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’, बेहतर यात्री सूचना प्रणाली, कार्यकारी लाउंज, व्यावसायिक बैठकों के लिए नामांकित स्थान, भूनिर्माण आदि जैसी योजनाएं।

इस योजना में इमारत में सुधार, शहर के दोनों किनारों के साथ स्टेशन को एकीकृत करना, मल्टीमॉडल एकीकरण, दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल समाधान, गिट्टी रहित ट्रैक का प्रावधान, आवश्यकता के अनुसार ‘रूफ प्लाजा’, चरणबद्धता और व्यवहार्यता और निर्माण की भी परिकल्पना की गई है। लंबी अवधि में स्टेशनपर शहर के केंद्रों की संख्या।

मध्य रेलवे CR के 35 स्टेशन

अकोला, भुसावल, चंद्रपुर, छत्रपति शाहू महाराज टर्मिनस (कोल्हापुर), दादर, गुलबर्गा, जलगांव, कल्याण, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, मलकापुर, मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, नागपुर, नासिक रोड, पुणे, सोलापुर, ठाणे, वर्धा, लोनावला, खंडवा, मनमाड, अमरावती, मिरज, अहमदनगर, माथेरान, बडनेरा, बुरहानपुर, चालीसगांव, देवलाली, शेगांव, बैतूल, बल्लारशाह, कराड, सांगली, सतारा और दौंड।

पूर्व रेलवे ER के 51 स्टेशन

अंडाल जंक्शन, आसनसोल, बैद्यनाथधाम, बंदेल, बारासात, बर्द्धमान, बारुईपुर जंक्शन, बशीरहाट, भागलपुर, बिधाननगर रोड, बोलपुर, बोनगांव, बज बज, कैनिंग, दनकुनी, ढाकुरिया, दम दम, दुर्गापुर, गरिया, घुटियारी शरीफ, हावड़ा, जमालपुर जंक्शन, जसीडीह, कृष्णानगर रोड, कुल्टी, लबपुर, मधुपुर, मध्यमग्राम, मालदा टाउन, मुर्शिदाबाद, नबद्वीप धाम, न्यू फरक्का, राणाघाट जंक्शन, रानीगंज, सैंथिया, सियालदह, सोनारपुर, सुल्तानगंज, तारकेश्वर, टॉलीगंज, उल्टाडांगा, बैरकपुर, नैहाटी, रिशरा, श्रीरामपुर, रामपुरहाट, शेराफुल्ली, चंदननगर, साहिबगंज, बरहरवा और बरियारपुर।

पूर्व मध्य रेल ECR के 55 स्टेशन

अक्षयवट राय नगर, आरा, बक्सर, बरौनी जं., बेगुसराय, बेतिया, डाल्टनगंज, दानापुर, दरभंगा, धनबाद, डेहरी-ऑन-सोन, गया, हाजीपुर जं., जनकपुर रोड, खगड़िया, कोडरमा, मोकामा, मोतिहारी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, मुजफ्फरपुर , नालंदा, नयागांव, नरकटियागंज जं., नवादा, पारसनाथ, पटना, सगौली जं., सासाराम, समस्तीपुर, शेखपुरा, सीतामढी, सोनपुर जं., बरकाकाना, पटना साहिब, बख्तियारपुर, बिहारशरीफ, जमुई, झाझा, किऊल, लखीसराय, राजेंद्र नगर (टी) ), राजगीर, अनुग्रह नारायण रोड, रक्सौल, सहरसा, मधुबनी, रेनूकोट, सिंगरौली, चोपन, गढ़वा रोड, बाढ़, भभुआ रोड, दलसिंहसराय, फुलवारीशरीफ और मननपुर।

पूर्वी तटिय रेल ECoR के 24 स्टेशन

बदखंडिता, भद्रक, भुवनेश्वर, ब्रह्मपुर, बायरी, कटक, ढेंकनाल, गोलंथरा, जाजपुर-क्योंझर रोड, कपिलास रोड, खुर्दा रोड, पुरी, रहामा, संबलपुर, सुरला रोड, टिटलागढ़, विशाखापत्तनम, विजयनगरम, श्रीकाकुलम, पलासा, रायगडा, बालूगांव, संबलपुर रोड और केसिंगा।

उत्तर रेलवे NR के 80 स्टेशन

अम्बाला कैंट, अमृतसर, आनंदपुर साहिब, अयोध्या, बागपत रोड, बड़ौत, बरेली, भटिंडा, ब्यास, चंडीगढ़, देहरादून, दिल्ली, दिल्ली कैंट, दिल्ली सराय रोहिल्ला, धुरी जंक्शन, फैजाबाद, फरीदाबाद, फिरोजपुर, गढ़मुक्तेश्वर, गाजियाबाद, हरिद्वार, हज़रत निज़ामुद्दीन, जालंधर सिटी, जम्मू तवी, कालका, कठुआ, लखनऊ, लुधियाना, मेरठ सिटी, मोरादाबाद, नांगलोई, नई दिल्ली, पानीपत जंक्शन, पठानकोट, पटियाला, प्रयाग, रायबरेली जंक्शन, सहारनपुर, शिमला, वाराणसी, रोहतक, दिल्ली शाहदरा, बल्लभगढ़, करनाल, सोनीपत, मेरठ कैंट, जौनपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, भदोही, अकबरपुर, चक्की बैंक, जालंधर कैंट, फगवाड़ा, शाहजहाँपुर, जगाधरी, सरहंद जं., मुजफ्फरनगर, कुरूक्षेत्र, सब्जी मंडी, पलवल, शकूरबस्ती, बाराबंकी, शाहगंज, उन्नाव, जंघई, गुरदासपुर, होशियारपुर, रूड़की, नजीबाबाद, रामपुर, हरदोई, हापुड, चंदौसी, ऋषिकेश, राजपुरा, चंडी मंदिर, अबोहर, देवबंद और भोड़वाल माजरी।

उत्तर मध्य रेलवे NCR के 21 स्टेशन

आगरा कैंट, आगरा किला, अलीगढ, प्रयागराज जं., इटावा, ग्वालियर, झाँसी, कानपुर सेंट्रल, मथुरा जं., टुंडला, मिर्ज़ापुर, बांदा, मुरैना, राजा की मंडी, फ़तेहपुर, फ़िरोज़ाबाद, नैनी, बबीना, चित्रकुट धाम कर्वी, ललितपुर और उरई.

उत्तर पूर्वी रेलवे NER के 34 स्टेशन

बादशाह नगर, बलिया, बस्ती, छपरा जं., देवरिया सदर, गोंडा जं., गोरखपुर, इज्जतनगर जं., काठगोदाम, कटरा, लखनऊ, मंडुआडीह, मऊ जं., पीलीभीत, रावतपुर, सीवान जं., लखनऊ सिटी, प्रयागराज रामबाग, आज़मगढ़, बहराईच, बरहनी, बेल्थरारोड, भटनी जं., फर्रुखाबाद, ग़ाज़ीपुर सिटी, कासगंज, काशीपुर, खलीलाबाद, लखीमपुर, लालकुआं, सलेमपुर, सीतापुर, वाराणसी सिटी और कायमगंज।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे NFR के 35 स्टेशन

अलीपुरद्वार जंक्शन, अलुबारी रोड, अररिया कोर्ट, कूचबिहार, दलकोल्हा, धर्मनगर, डिब्रूगढ़, दीमापुर, घूम, गोसाईगांवहाट, गुवाहाटी, हरिश्चंद्रपुर, जलपाईगुड़ी, जोरहाट टाउन, कामाख्या, कटिहार, किशनगंज, कोकराझार, लुमडिंग, माल बाजार, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू बोंगाईगांव, न्यू कूचबिहार, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू माल जंक्शन, न्यू तिनसुकिया, पूर्णिया जंक्शन, रायगंज, रंगिया जंक्शन, सिलचर, सिलीगुड़ी टाउन, श्रीरामपुर, तेजपुर, बोंगाईगांव और तिनसुकिया।

उत्तर पश्चिम रेलवे NWR के 26 स्टेशन

आबू रोड, अजमेर, बीकानेर, हिसार, जयपुर, जोधपुर, रेवाडी, श्री गंगा नगर, उदयपुर, अलवर, फालना, रानी, मारवाड़ जंक्शन, ब्यावर, भीलवाड़ा, पाली मारवाड़, जैसलमेर, नागौर, मकराना, सूरतगढ़, भिवानी, हनुमानगढ़, सिरसा, राणा प्रतापनगर, किशनगढ़ और कोसली।

दक्षिण रेलवे SR के 48 स्टेशन

अलवाये, अराकोणम जंक्शन, कालीकट, कन्नानोर, चेंगन्नौर, चेंगलपट्टू, चेन्नई बीच, पुरुच्ची थैलेवार डॉ एम जी आर चेन्नई सेंट्रल, चेन्नई एग्मोर, कोयंबटूर, एर्नाकुलम जंक्शन, इरोड जंक्शन, कन्याकुमारी, काटपाडी, कयानकुलम, कोट्टायम, मदुरै, माम्बलम, मैंगलोर, पालघाट, पांडिचेरी, क्विलोन (कोल्लम), रामेश्वरम, सेलम, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली, तिरुत्तानी, त्रिचूर, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, तूतीकोरिन, वर्कला, जोलारपेट्टई, डिंडीगुल, शोरानूर, टेलिचेरी, तिरुप्पुर, तंजावुर, नागरकोइल, तिरुवल्ला, एर्नाकुलम टाउन, अंबूर, कोविलपट्टी, विरुधुनगर, बडगरा , कंकनाडी, तिरुर, विल्लुपुरम जंक्शन और एलेप्पी।

दक्षिण मध्य रेलवे SCR के 64 स्टेशन

धर्मावरम जंक्शन, गुंतकल, गुंटूर, हैदराबाद, काचीगुडा, काकीनाडा टाउन, नांदेड़, नेल्लोर, रायचूर, राजमुंदरी, सिकंदराबाद, तिरूपति, विजयवाड़ा, वारंगल, अनकापल्ली, अनंतपुर, औरंगाबाद, भीमावरम टाउन, कडपा, एलुरु, गोदावरी, जालना, काजीपेट, खम्मम, ओंगोल, परभणी, सामलकोट, तेनाली, अदोनी, चिराला, कुरनूल टाउन, मछलीपट्टनम, मंचिर्याल, पलाकोल्लु, रामागुंडम, ताडेपल्लीगुडेम, तंदूर, तनुकु, तुनी, यादगीर, भीमावरम, धोने, दोर्नाकल, गूटी, गुडीवाड़ा, गुडुर, मुदखेड, नादिकुडी , निदादावोलू, पाकाला, पूर्णा, रेनिगुंटा, विकाराबाद, अन्नवरम, बसर, भद्राचलमरोड, बीदर, मंत्रालयम रोड, नागरसोल, नलगोंडा, परलिवैजनाथ, श्रीकालाहस्ती, नंद्याल और निज़ामाबाद।

दक्षिण पूर्वी रेलवे SER के 22 स्टेशन

आद्रा, बगनान, बालासोर, बिष्णुपुर, बोकारो स्टील सिटी, चक्रधरपुर, कोंटाई रोड, गरबेटा, हटिया, झारग्राम, झारसुगुड़ा, खड़गपुर, कोलाघाट, मेचेदा, मिदनापुर, रांची, राउरकेला, संतरागाछी जंक्शन, तमलुक, टाटानगर, उलुबरिया और पुरुलिया

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे SECR के 11 स्टेशन

बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर, रायगढ़, गोंदिया, चांपा, शहडोल, भाटापारा, तिल्दा, राजनांदगांव और छिंदवाड़ा।

दक्षिण पश्चिम रेलवे SWR के 22 स्टेशन्स

बंगालूरु कैंट, बीजापुर, होसपेट, हुबली, मैसूरु, शिमोगा टाउन, तोरानागल्लू, वास्को-डी-गामा, बेलगाम, बेल्लारी जंक्शन, यशवंतपुर जंक्शन, अलनावर, बैंगलोर सिटी, बंगारपेट जंक्शन, दावणगेरे, धारवाड़, गडग, हसन, हसूर, कृष्णराजपुरम, लोंडा जंक्शन और तुमकुर।

पश्चिम रेलवे WR के 45 स्टेशन

अहमदाबाद, आनंद जंक्शन, बामनिया, बांद्रा टर्मिनस, भरूच, भावनगर, चित्तौड़गढ़, दादर, धरनगांव, द्वारका, गांधीधाम, गांधीग्राम, इंदौर, मुंबई सेंट्रल, नवसारी, निंबाहेड़ा, ओखा, राजकोट, रतलाम, सूरत, उज्जैन, वडोदरा, वलसाड, वापी, अंकलेश्वर, नडियाद, न्यू भुज, पालनपुर, महू, जामनगर, बिलिमोरा, उधना, नंदुरबार, मणिनगर, महेसाणा, दाहोद, देवास, मंदसौर, नागदा, नीमच, हापा, सुरेंद्रनगर, जूनागढ़, पोरबंदर और वेरावल।

पश्चिम मध्य रेलवे WCR के 20 स्टेशन

भोपाल, दमोह, रानी कमलापति स्टेशन, गुना, नर्मदापुरम, जबलपुर, कटनी जंक्शन, कोटा, पिपरिया, सतना, सवाई माधोपुर, मदनमहल, सागौर, मैहर, रीवा, इटारसी, बीना, भरतपुर, गंगापुर सिटी और विदिशा।

कोंकण रेलवे KRCL का एक स्टेशन

मडगांव.

उक्त जानकारी रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

pib.nic की पोस्ट : 21 जुलाई 2023 से साभार